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Actor Naseeruddin Shah reacts emotionally in a video over the alleged lathi-charge on protesting students at Jantar Mantar.
छात्रों पर कथित लाठीचार्ज को लेकर भावुक हुए नसीरुद्दीन शाह, वीडियो जारी कर सरकार पर साधा निशाना

Naseeruddin Shah on Jantar Mantar Protest: अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई कथित मारपीट और लाठीचार्ज को लेकर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में छात्रों के प्रति अपना समर्थन जताया और हिंसा की आलोचना की। वीडियो में वे भावुक भी नजर आए और कहा कि छात्रों के साथ हो रहे व्यवहार से उन्हें गहरा दुख और गुस्सा है। इंस्टाग्राम वीडियो में क्या बोले नसीरुद्दीन शाह? 76 वर्षीय अभिनेता ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी पूरी सहानुभूति छात्रों के साथ है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने अभिनय जीवन में विद्यार्थियों से बहुत कुछ सीखा है और वे हर शिक्षक दिवस पर उन्हें सम्मानपूर्वक याद करते हैं। उन्होंने छात्रों से हिम्मत न हारने की अपील करते हुए कहा कि समाज का एक बड़ा वर्ग उनके साथ खड़ा है। हिंसा की आलोचना अपने वीडियो में नसीरुद्दीन शाह ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कथित मारपीट की निंदा की। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं बेहद दुखद हैं और किसी भी लोकतांत्रिक समाज में असहमति की आवाज को हिंसा से दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर हमला करने वालों के लिए कड़ी भाषा का इस्तेमाल किया और कहा कि ऐसे लोगों को अपने कर्मों के परिणामों के बारे में भी सोचना चाहिए। वायरल वीडियो पर भी हुई चर्चा सोशल मीडिया पर इससे पहले एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें दावा किया गया था कि नसीरुद्दीन शाह अपने बेटों के साथ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में मौजूद थे। हालांकि, बाद में स्पष्ट हुआ कि वह वीडियो मुंबई में आयोजित एक स्क्रीनिंग कार्यक्रम का था और उसका जंतर-मंतर के प्रदर्शन से संबंध नहीं था। विरोध प्रदर्शन का दायरा बढ़ा NEET पेपर लीक मामले से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब कई शहरों तक फैल चुका है। दिल्ली के बाद मुंबई में भी प्रदर्शन हुए हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुंबई पुलिस ने कुछ दिनों के लिए पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस निकालने और अन्य सार्वजनिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया है। कई फिल्मी हस्तियों ने भी जताया समर्थन छात्रों के समर्थन में कई फिल्मी हस्तियों ने भी अपनी राय रखी है। इनमें प्रकाश राज, अनुराग कश्यप, शबाना आजमी, विशाल ददलानी, अतुल कुलकर्णी, रितेश देशमुख, सोनाक्षी सिन्हा, दिलजीत दोसांझ, वीर दास, भूमि पेडनेकर, सोनू सूद, पूजा भट्ट, सोहा अली खान, हुमा कुरैशी और अन्य कलाकारों के नाम शामिल हैं।  

surbhi जुलाई 22, 2026 0
Vishal Dadlani, Kunika Sadanand, and Shekhar Suman react to the CJP protest, sparking debate across Bollywood.
CJP प्रदर्शन पर बॉलीवुड में बंटी राय, विशाल ददलानी ने चुप्पी पर उठाए सवाल, कुनिका सदानंद और शेखर सुमन ने भी दी प्रतिक्रिया

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हुए CJP के प्रदर्शन और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के बाद बॉलीवुड में भी प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। गायक विशाल ददलानी, अभिनेत्री कुनिका सदानंद और अभिनेता शेखर सुमन ने इस मुद्दे पर अपनी राय सार्वजनिक की है। वहीं, कई बड़े फिल्मी सितारों की चुप्पी को लेकर भी सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है। विशाल ददलानी ने बॉलीवुड की चुप्पी पर जताई नाराजगी विशाल ददलानी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा करते हुए प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि जो छात्र अपने भविष्य और अधिकारों की बात कर रहे थे, उनके साथ बल प्रयोग किया गया। इसके साथ ही उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के उन लोगों पर भी सवाल उठाए, जिन्होंने अब तक इस मुद्दे पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी। विशाल ने कहा कि सामाजिक मुद्दों पर कलाकारों को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए और केवल चुप रहना समाधान नहीं है। पहले भी उठा चुके हैं आवाज विशाल ददलानी इससे पहले भी छात्रों से जुड़े मुद्दों और विभिन्न सामाजिक विषयों पर अपनी राय खुलकर रखते रहे हैं। उन्होंने एक अन्य पोस्ट में भी शिक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर चिंता व्यक्त की थी। कुनिका सदानंद ने सरकार से उठाए सवाल अभिनेत्री कुनिका सदानंद, जो हाल के दिनों में छात्रों के समर्थन में जंतर-मंतर भी पहुंची थीं, ने सरकार से इस पूरे मामले पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनका कहना था कि यदि इतने लंबे समय से उठ रहे मुद्दों पर चर्चा नहीं होगी, तो लोगों का भरोसा कमजोर होगा। उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद की आवश्यकता पर भी जोर दिया और कहा कि सरकार को छात्रों की बात सुननी चाहिए। शेखर सुमन ने भी जताई चिंता अभिनेता शेखर सुमन ने भी छात्रों के प्रदर्शन और उस दौरान हुई घटनाओं पर प्रतिक्रिया दी। अपने कार्यक्रम के दौरान उन्होंने युवाओं की आवाज सुने जाने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि समाज में संवाद और जवाबदेही लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक ओर कई लोग उन कलाकारों का समर्थन कर रहे हैं जिन्होंने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग मानते हैं कि सार्वजनिक हस्तियों पर किसी भी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने का दबाव नहीं होना चाहिए।  

surbhi जुलाई 21, 2026 0
Delhi Police removing women protesters from Jantar Mantar after Sonam Wangchuk was shifted to hospital
जंतर-मंतर पर हंगामा, महिला प्रदर्शनकारियों को उठाकर ले गई पुलिस; सोनम वांगचुक अस्पताल में भर्ती

दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल लेकर गई। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शन स्थल खाली कराते हुए वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों को हटाया और कई लोगों को हिरासत में भी लिया। इस दौरान महिला प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। न्यूज एजेंसी एएनआई द्वारा साझा किए गए वीडियो में पुलिस महिला प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाती दिखाई दे रही है। वीडियो में एक महिला कार्यकर्ता पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए चिल्लाती है, "हम प्रदर्शन क्यों नहीं करें?" वहीं, कुछ प्रदर्शनकारी जमीन पर बैठकर विरोध जताते रहे, जिन्हें पुलिसकर्मियों ने उठाकर वहां से बाहर ले जाया। महिला प्रदर्शनकारियों को उठाकर ले गई पुलिस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कई महिला प्रदर्शनकारी प्रदर्शन स्थल छोड़ने को तैयार नहीं थीं। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें पकड़कर और उठाकर वहां से हटाया। कुछ प्रदर्शनकारियों को पुलिस वाहन तक ले जाया गया, जबकि कई लोगों को हिरासत में भी लिया गया। पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान जंतर-मंतर पर भारी संख्या में सुरक्षाबल तैनात रहे। मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए नारेबाजी भी की। सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं सोनम वांगचुक एएनआई के मुताबिक, सूत्रों ने बताया कि सोनम वांगचुक को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, वह पूरी तरह होश में हैं और उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद हुई कार्रवाई दिल्ली पुलिस का कहना है कि दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश और डॉक्टरों की सलाह के बाद सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्रवाई का उद्देश्य उनकी सुरक्षा और इलाज सुनिश्चित करना था। साथ ही पुलिस ने जंतर-मंतर पर मौजूद सभी प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक प्रदर्शन समाप्त कर स्थल खाली करने की अपील की। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए इसे आंदोलन को दबाने की कोशिश बताया। सोनम वांगचुक की सेहत और उनके आंदोलन को लेकर आगे क्या फैसला होता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।  

kalpana जुलाई 18, 2026 0
Social activist Sonam Wangchuk being taken to Safdarjung Hospital from Jantar Mantar
जंतर-मंतर से हटाए गए सोनम वांगचुक, अस्पताल में भर्ती; CJP ने लगाया लाठीचार्ज का आरोप

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले 21 दिनों से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी लगातार बिगड़ती सेहत को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने तत्काल चिकित्सकीय निगरानी में भर्ती करने का निर्देश दिया था। कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर पहुंची और उन्हें अस्पताल लेकर गई। न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, फिलहाल सोनम वांगचुक की तबीयत स्थिर बताई जा रही है। उन्हें सफदरजंग अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है, जहां उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जंतर-मंतर पर तैनात रहा भारी पुलिस बल शनिवार सुबह कोर्ट के आदेश के बाद जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस की मौजूदगी के बीच वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया। इस दौरान उनके समर्थकों ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया और इसे आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश बताया। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों में वांगचुक की सेहत को लेकर भी चिंता साफ दिखाई दी। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन समाप्त करने और जंतर-मंतर खाली करने की अपील की। पुलिस का कहना है कि हाई कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए वांगचुक को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल ले जाया गया है। 21 दिनों से आमरण अनशन पर हैं वांगचुक सोनम वांगचुक पिछले तीन सप्ताह से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे हैं। लंबे समय से भोजन न लेने के कारण उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी, जिसके बाद मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराने का निर्देश दिया। CJP ने लगाया लाठीचार्ज का आरोप इस बीच सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे CJP समर्थकों पर लाठीचार्ज किया। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ बल प्रयोग किया गया। हालांकि, इस आरोप पर दिल्ली पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल सोनम वांगचुक का इलाज डॉक्टरों की निगरानी में जारी है। वहीं, उनके समर्थक आंदोलन को जारी रखने की बात कह रहे हैं। अब सभी की नजर वांगचुक की सेहत और आंदोलन के अगले कदम पर बनी हुई है।  

kalpana जुलाई 18, 2026 0
CJP founder Abhijeet Deepke addresses protesters at Jantar Mantar in New Delhi amid rain, claiming his social media video was blocked after seeking permission for temporary shelters.
बारिश में टेंट की मांग वाला वीडियो ब्लॉक होने का दावा, अभिजीत दीपके ने सरकार पर उठाए सवाल

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया है कि सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया उनका एक वीडियो ब्लॉक कर दिया गया है। उनका कहना है कि वीडियो में उन्होंने केवल दिल्ली पुलिस से प्रदर्शनकारियों को बारिश से बचाने के लिए टेंट लगाने की अनुमति देने की अपील की थी। 20वें दिन भी जारी रहा प्रदर्शन जंतर-मंतर पर CJP का विरोध प्रदर्शन लगातार 20वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान दिल्ली में हुई बारिश के बीच प्रदर्शनकारी खुले आसमान के नीचे डटे रहे। अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि बारिश के बावजूद प्रदर्शन स्थल पर तिरपाल या टेंट लगाने की अनुमति नहीं दी गई। वीडियो ब्लॉक होने का किया दावा दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि उनका वीडियो भारत में ब्लॉक कर दिया गया है। उन्होंने मूल पोस्ट और ब्लॉक होने का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए लिखा कि वीडियो में केवल बारिश से बचाव के लिए टेंट लगाने की अपील की गई थी। हालांकि, वीडियो ब्लॉक किए जाने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। दिल्ली पुलिस पर लगाए आरोप अभिजीत दीपके का आरोप है कि भारी बारिश के दौरान प्रदर्शनकारी पूरी तरह भीग गए, जबकि पुलिसकर्मी सुरक्षित स्थान पर मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि बारिश के कारण कई छात्र बीमार पड़ गए और उनका सामान, गद्दे तथा चादरें भी भीग गईं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूरी रात छात्रों को जागकर बितानी पड़ी क्योंकि बारिश से उनका सामान खराब हो गया था। छात्रों की स्थिति पर जताई चिंता दीपके ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल अधिकांश छात्र 19-20 वर्ष की आयु के हैं और लगातार बारिश के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने प्रशासन से प्रदर्शनकारियों के लिए न्यूनतम सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। सोनम वांगचुक की सेहत बिगड़ने का दावा इस विरोध प्रदर्शन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर भी चिंता जताई गई है। पीटीआई के हवाले से जारी एक मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, भूख हड़ताल शुरू होने के बाद उनका वजन 7 किलोग्राम से अधिक कम हो गया है। रिपोर्ट में बताया गया कि उनका वजन 59.40 किलोग्राम दर्ज किया गया, जबकि हृदय गति 74 बीट प्रति मिनट, ब्लड ग्लूकोज 75 mg/dL और ऑक्सीजन सैचुरेशन 98 प्रतिशत रहा। डॉक्टरों के अनुसार, फिलहाल उनके शरीर में पानी का स्तर सामान्य है। मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार वीडियो ब्लॉक होने और प्रदर्शन स्थल पर टेंट लगाने की अनुमति नहीं मिलने संबंधी आरोपों पर फिलहाल सरकार या दिल्ली पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले को लेकर आगे की स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।  

Deepshikha जुलाई 10, 2026 0
Protesters gather in Rawalakot as demonstrations over economic demands escalate in PoK.
POK के रावलकोट में प्रदर्शन के दौरान गोलीबारी, 16 लोगों की मौत का दावा; कई घायल

  रावलकोट: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तनाव हिंसक रूप लेता नजर आया। स्थानीय सूत्रों और प्रदर्शनकारी संगठनों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की कथित गोलीबारी में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 37 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। रिपोर्टों के मुताबिक, रावलकोट के ईदगाह मैदान में हजारों लोग महंगाई, बिजली दरों में वृद्धि और बुनियादी राजनीतिक एवं आर्थिक अधिकारों की मांग को लेकर एकत्र हुए थे। प्रदर्शन के दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए और सुरक्षा बलों द्वारा बल प्रयोग किए जाने के आरोप लगाए गए। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई तथा घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। कई दिनों से जारी है आंदोलन POK में पिछले कई दिनों से सस्ती बिजली, सब्सिडी वाले खाद्यान्न और अधिक प्रशासनिक अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन जारी है। प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और आर्थिक चुनौतियों के कारण आम लोगों का असंतोष लगातार बढ़ रहा है। हाल के दिनों में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर लगाए गए प्रतिबंधों और आंदोलन से जुड़े कई कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासन ने कुछ इलाकों में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी हैं। रावलकोट घटना के बाद विरोध प्रदर्शन तेज रावलकोट की घटना के बाद खाई गाला समेत कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। कई बाजार बंद रहे और लोगों ने सुरक्षा बलों की कार्रवाई के खिलाफ मार्च निकाले। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की भी इन प्रदर्शनों में भागीदारी देखी गई। प्रदर्शनकारी नेताओं का दावा है कि 5 जून से जारी आंदोलन के दौरान अब तक 53 नागरिकों की मौत हो चुकी है। इस संख्या की भी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। नेताओं ने कहा है कि वे आर्थिक राहत और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेंगे। भारत की प्रतिक्रिया भारत ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। भारत ने इसे गंभीर मानवाधिकार मुद्दा बताते हुए कहा कि यह पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में नागरिक अधिकारों की स्थिति पर सवाल खड़े करता है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मामले का संज्ञान लेने और प्रभावित लोगों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की गई है। फिलहाल क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और स्थिति पर सभी पक्षों की नजर है। घटना से जुड़े दावों और हताहतों के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
Uncontrolled bus crashes into crowd after rally in Asansol, injured people and chaos at scene
आसनसोल में चुनावी सभा के बाद बड़ा हादसा: बेकाबू बस भीड़ में घुसी, 7 साल की बच्ची समेत 12 घायल; इलाके में तनाव

पश्चिम बंगाल के Asansol में विधानसभा चुनाव के बीच एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस की चुनावी सभा खत्म होने के तुरंत बाद एक बेकाबू बस भीड़ में घुस गई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इस घटना में एक मासूम बच्ची समेत करीब 12 लोग घायल हो गए, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभा खत्म होते ही हुआ हादसा घटना Railpar इलाके की है, जहां तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उम्मीदवार Malay Ghatak के समर्थन में एक बड़ी चुनावी सभा आयोजित की गई थी। सभा समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में लोग बाहर निकल रहे थे, तभी अचानक तेज रफ्तार से आ रही एक बस भीड़ की तरफ मुड़ गई और कई लोगों को कुचलते हुए आगे बढ़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और कुछ ही सेकंड में पूरा माहौल चीख-पुकार और भगदड़ में बदल गया। कैसे बेकाबू हुई बस? स्थानीय लोगों के अनुसार: बस चालक ने अचानक वाहन पर नियंत्रण खो दिया बस कब्रिस्तान की दीवार तोड़ते हुए सड़क किनारे जा घुसी इस दौरान कई दुकानों, ऑटो और टोटो को जोरदार टक्कर मारी बताया जा रहा है कि बस की रफ्तार काफी तेज थी, जिससे नुकसान और ज्यादा बढ़ गया। चालक पर लगे गंभीर आरोप हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा देखा गया। लोगों का आरोप है कि: बस पर “पश्चिम बंगाल पुलिस” लिखा हुआ था वाहन चला रहा व्यक्ति Central Industrial Security Force (CISF) का जवान था वह कथित तौर पर नशे की हालत में था हालांकि पुलिस ने अभी इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। चालक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया है और उससे पूछताछ जारी है। घायलों की हालत गंभीर इस हादसे में घायल हुए लोगों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। घायलों में एक 7 साल की बच्ची भी शामिल है कई लोगों की हालत नाजुक बताई जा रही है डॉक्टरों की टीम लगातार इलाज में जुटी है कुछ घायलों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों में रेफर करने की भी तैयारी की जा रही है। घटना के बाद बवाल और विरोध हादसे के बाद इलाके में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा: भीड़ ने बस में तोड़फोड़ की सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया कुछ समय के लिए स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई हालात को काबू में करने के लिए भारी संख्या में पुलिस और केंद्रीय बलों को मौके पर तैनात किया गया। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। मौके पर पहुंचे नेता, की शांति की अपील घटना की सूचना मिलते ही Malay Ghatak मौके पर पहुंचे और घायलों का हाल जाना। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और भरोसा दिलाया कि सभी घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराया जाएगा। जांच जारी, कई सवाल बरकरार पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि: हादसा महज लापरवाही का नतीजा था या इसके पीछे कोई साजिश थी साथ ही, यह भी जांच का विषय है कि बस किसकी थी और उसे उस समय वहां क्यों चलाया जा रहा था। चुनावी सुरक्षा पर उठे सवाल चुनावी माहौल के बीच हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतनी बड़ी सभा के बाद भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था में चूक साफ नजर आई, जो भविष्य के लिए एक चेतावनी है।  

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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