Punjab Politics

PM Modi Punjab Visit
PM मोदी का पंजाब दौरा क्यों है खास? 2027 चुनाव से पहले बीजेपी की रणनीति पर सबकी नजर

नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को पंजाब के जालंधर दौरे पर रहेंगे, जहां वे कई विकास और रेलवे परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। हालांकि यह दौरा सरकारी कार्यक्रम के रूप में आयोजित हो रहा है, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से इसे 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। हाल ही में भारतीय जनता पार्टी ने घोषणा की है कि वह 2027 का विधानसभा चुनाव अपने दम पर लड़ेगी। ऐसे में प्रधानमंत्री का यह दौरा पार्टी के विकास एजेंडे और चुनावी रणनीति दोनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।   दोआबा और रविदासिया समुदाय पर खास फोकस जालंधर का चयन भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह शहर दोआबा क्षेत्र में स्थित है, जहां अनुसूचित जाति (एससी) मतदाताओं की बड़ी आबादी रहती है। साथ ही, यहां रविदासिया समुदाय के प्रमुख धार्मिक केंद्र डेरा सचखंड बल्लां का प्रभाव भी है। माना जा रहा है कि भाजपा इस दौरे के जरिए इस प्रभावशाली समुदाय के बीच अपनी पैठ और मजबूत करने की कोशिश करेगी। प्रधानमंत्री अपने दौरे के दौरान जालंधर से वाराणसी के बीच चलने वाली श्री गुरु रविदास जी महाराज एक्सप्रेस को भी हरी झंडी दिखाएंगे। यह रेल सेवा रविदासिया समुदाय के श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि वे बड़ी संख्या में गुरु रविदास की जन्मस्थली वाराणसी की यात्रा करते हैं।   विकास और चुनावी रणनीति साथ-साथ दौरे के दौरान प्रधानमंत्री जालंधर कैंट, एसएएस नगर (मोहाली), श्री मुक्तसर साहिब और श्री आनंदपुर साहिब रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास सहित कई परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। इन योजनाओं के माध्यम से केंद्र सरकार पंजाब में विकास कार्यों को प्रमुखता से सामने रखना चाहती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा विकास कार्यों के साथ-साथ भाजपा के चुनावी अभियान की शुरुआती रणनीति का हिस्सा भी है। ऐसे समय में जब राज्य में कुछ मुद्दों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है, भाजपा इस दौरे के जरिए विकास, कनेक्टिविटी और सामाजिक जुड़ाव के संदेश के साथ पंजाब में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने का प्रयास करेगी।

anjali kumari जुलाई 16, 2026 0
Satluj Film Controversy
फिल्म ‘सतलुज’ पर पंजाब में सियासत गरमाई, अकाली दल हर गांव में करेगा विशेष प्रदर्शन

मुंबई, एजेंसियां। मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर पंजाब की राजनीति गरमा गई है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी इस फिल्म का प्रदर्शन पंजाब के हर गांव और कोने में करेगी। यह फिल्म पहले ‘पंजाब ’95’ नाम से बनाई गई थी और 3 जुलाई को ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर बिना किसी कट के रिलीज हुई थी। हालांकि, दो दिन बाद ही इसे प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया, जिसके बाद विवाद और गहरा गया।   खालरा के संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की बात सुखबीर सिंह बादल ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह फिल्म कांग्रेस शासन के दौरान सिख समुदाय पर हुए कथित अत्याचारों और जसवंत सिंह खालरा के संघर्ष को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को उस दौर के इतिहास से परिचित कराने के लिए अकाली दल राज्यभर में फिल्म का प्रदर्शन करेगा। बादल ने आरोप लगाया कि उस समय हुए घटनाक्रम को दबाने की कोशिश की जा रही है और उनकी पार्टी ऐसा नहीं होने देगी।   फिल्म हटाने पर राजनीतिक बयानबाजी फिल्म के ओटीटी से हटाए जाने को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने विपक्ष के उन आरोपों को खारिज किया, जिनमें केंद्र सरकार या भाजपा पर फिल्म हटवाने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने कहा कि यह मामला राजनीतिक रंग देने की कोशिश है और फिल्म में दिखाया गया दौर कांग्रेस शासन का था।   इस बीच पंजाब भाजपा ने बताया कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फिल्म को ओटीटी से हटाने के मामले की समीक्षा के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है।   हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी ‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है। खालरा ने 1984 से 1994 के दौरान पंजाब में हजारों अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार के मामलों की जांच की थी। वर्ष 1995 में उनके लापता होने के बाद 2005 में पंजाब पुलिस के चार कर्मियों को उनके अपहरण और हत्या का दोषी ठहराया गया था।

anjali kumari जुलाई 9, 2026 0
AAP leaders celebrate victory after the party secured a majority in the Hoshiarpur Municipal Corporation and Jalalabad Municipal Council elections in Punjab.
पंजाब निकाय चुनाव: 2027 विधानसभा चुनाव से पहले AAP का दमदार प्रदर्शन, होशियारपुर और जलालाबाद में बड़ी जीत

चंडीगढ़: पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हुए नगर निकाय चुनावों में आम आदमी पार्टी (AAP) ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए अपनी राजनीतिक पकड़ और मजबूत कर ली है। पार्टी ने होशियारपुर नगर निगम और जलालाबाद नगर परिषद में शानदार जीत दर्ज कर विपक्षी दलों को बड़ा झटका दिया है। होशियारपुर नगर निगम में AAP का दबदबा होशियारपुर नगर निगम की 50 सीटों में से आम आदमी पार्टी ने 35 सीटों पर जीत हासिल कर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया। चुनाव परिणाम के अनुसार— AAP: 35 सीटें कांग्रेस: 9 सीटें भाजपा: 3 सीटें निर्दलीय: 3 सीटें होशियारपुर में इस चुनाव के दौरान करीब 60.5 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व आम आदमी पार्टी के विधायक ब्रह्म शंकर जिम्पा करते हैं। जलालाबाद में भी AAP की बड़ी सफलता आम आदमी पार्टी ने जलालाबाद नगर परिषद की 17 में से 12 सीटों पर जीत दर्ज की। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि जलालाबाद लंबे समय तक शिरोमणि अकाली दल (SAD) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है। बदलते राजनीतिक समीकरण जलालाबाद सीट पर 2017 के विधानसभा चुनाव में सुखबीर सिंह बादल ने वर्तमान मुख्यमंत्री भगवंत मान को हराया था। हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार जगदीप कंबोज ने सुखबीर बादल को 30,930 वोटों के बड़े अंतर से पराजित कर राजनीतिक समीकरण बदल दिए थे। नगर परिषद चुनाव में मिली ताजा जीत को भी इसी राजनीतिक बदलाव की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है। निकाय चुनावों में लगातार मजबूत प्रदर्शन इससे पहले मई 2026 में हुए पंजाब के नगर निकाय चुनावों में भी आम आदमी पार्टी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था। उस दौरान पार्टी ने राज्य के— 8 नगर निगम, 75 नगर परिषद, और 19 नगर पंचायतों के चुनावों में भी महत्वपूर्ण सफलता हासिल की थी। 2027 चुनाव से पहले बढ़ा AAP का मनोबल होशियारपुर और जलालाबाद में मिली जीत को आम आदमी पार्टी के लिए 2027 विधानसभा चुनाव से पहले एक सकारात्मक राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। वहीं, कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के लिए यह परिणाम संगठनात्मक रणनीति और जनाधार को मजबूत करने की चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।  

Deepshikha जुलाई 6, 2026 0
Punjab politics
क्या पंजाब बनेगा अगला बंगाल?

रांची। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अब पंजाब में संगठन विस्तार और चुनावी जमीन तैयार करने में जुटी है। 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी राज्य में अपनी रणनीति को धार देने में लगी है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि क्या पंजाब भी आने वाले समय में बंगाल की तरह भाजपा और विपक्ष के बीच सीधी राजनीतिक लड़ाई का केंद्र बनेगा। बीजेपी पंजाब में कानून-व्यवस्था, नशे की समस्या, किसानों से जुड़े मुद्दों और विकास के एजेंडे को प्रमुखता से उठा रही है। पार्टी का प्रयास शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी अपने संगठन को मजबूत करना है। इसके लिए बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और नए चेहरों को जोड़ने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।   राघव चड्ढा फैक्टर पर नजर पंजाब की राजनीति में राघव चड्ढा का नाम लगातार चर्चा में बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आम आदमी पार्टी के प्रमुख चेहरों में रहे राघव चड्ढा को लेकर चल रही अटकलों ने राज्य की राजनीति को नई दिशा दी है। हालांकि, उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी बड़े बदलाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद उनका नाम पंजाब की बदलती सियासी तस्वीर में अहम माना जा रहा है।   क्या पंजाब में दोहराएगा बंगाल वाला समीकरण? विशेषज्ञों का कहना है कि पंजाब की राजनीतिक परिस्थितियां पश्चिम बंगाल से काफी अलग हैं। यहां आम आदमी पार्टी सत्ता में है, जबकि शिरोमणि अकाली दल, कांग्रेस और बीजेपी चार प्रमुख ताकतों के रूप में मैदान में हैं। ऐसे में बीजेपी के लिए चुनौती आसान नहीं होगी। फिर भी पार्टी संगठन का विस्तार, नए सामाजिक समीकरण और आक्रामक चुनावी रणनीति के जरिए खुद को मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है।आप के दो पूर्व नेता रेस में हैं।     पंजाब की सियासी ताकत की बात करे तो पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं। विधानसभा में बीजेपी के दो MLA हैं।पंजाब में लोकसभा की कुल सीटें 13 हैं। बीजेपी के पास कोई सीट नहीं है।पंजाब में राज्यसभा की कुल सीटें सात हैं। इनमें छह बीजेपी के पास हैं।   आप के दो पूर्व नेता हैं रेस में इधर पश्चिम बंगाल की जीत के बाद पंजाब को गंभीरता से ले रही बीजेपी राज्य को केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल में अधिक तवज्जो दे सकती है। चर्चा है कि पंजाब में AAP छोड़कर आए नेताओं को इनाम मिल सकता है। इनमें सेलिब्रेटी फेस राघव चड्ढा का नाम सबसे आगे है। उनके साथ अशोक मित्तल (लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी) का भी नाम चल रहा है। चर्चा है कि दोनों में किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है, लेकिन अभी फैसला नहीं हुआ है। रवनीत बिट्टू को बीजेपी चुनावों में झोंकना चाहती है। उनकी जगह पर हाल ही में मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद बने तरुण चुघ को लाया जा सकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कद्दावर नेता चुघ पंजाब चुनाव में पार्टी को मजबूती देंगे। वह पंजाब से ही आते हैं।   अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि 2027 के विधानसभा चुनाव तक पंजाब की सियासत किस ओर करवट बैठती है ये तो आने वाला  वक्त  ही बताएगा। और क्या बीजेपी राज्य में वैसी ही राजनीतिक बढ़त हासिल कर पाएगी जैसी उसने बंगाल या अन्य राज्यों में दर्ज की है?

anjali kumari जून 30, 2026 0
Ketan Agarwal Murder Case
केतन मर्डर केस: चेतन चौधरी का होगा गेट एनालिसिस, जांच में खुल सकते हैं कई बड़े राज

पुणे, एजेंसियां। चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी चेतन चौधरी का गेट (Gait) एनालिसिस कराने का फैसला लिया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस वैज्ञानिक परीक्षण से हत्या वाले दिन चेतन की गतिविधियों और घटनास्थल पर उसकी मौजूदगी से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। इसी कड़ी में पुलिस मंगलवार को चेतन को लेकर एक बार फिर लोहागढ़ किला पहुंची, जहां पूरे घटनाक्रम का पुनर्निर्माण (क्राइम सीन रीक्रिएशन) किया जाएगा।   पुलिस हिरासत पांच दिन और बढ़ी सोमवार को महाराष्ट्र की एक अदालत ने मुख्य आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत पांच दिन के लिए बढ़ा दी। पुलिस ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और आरोपियों से पूछताछ के साथ-साथ घटनास्थल पर साक्ष्यों की पुष्टि के लिए उनका पुलिस हिरासत में रहना जरूरी है।   पासपोर्ट जलाने का भी आरोप पुलिस जांच के अनुसार, सिया गोयल ने कथित तौर पर केतन का पासपोर्ट चोरी कर उसे फाड़कर जला दिया था। दावा है कि परिवार की प्रस्तावित बाली यात्रा को रोकने और केतन के साथ विदेश जाने से बचने के लिए उसने ऐसा किया। जांच में कार चालक के बयान को भी अहम माना जा रहा है, जिसने बताया कि यात्रा के दौरान सिया कुछ देर के लिए अकेले कार तक गई थी।   हत्या की साजिश के मिले संकेत पुलिस का आरोप है कि 18 जून को लोहागढ़ किले पर केतन अग्रवाल को खाई में धक्का देकर हत्या की गई। शुरुआत में इसे हादसा माना गया था, लेकिन बाद की जांच में हत्या की आशंका सामने आई। पुलिस के मुताबिक, सिया और चेतन के बीच पिछले छह महीनों में 2,000 से अधिक फोन कॉल और लगभग 238 घंटे की बातचीत हुई थी। जांच एजेंसियों को शक है कि इन्हीं बातचीत के दौरान कथित साजिश रची गई।   पुलिस यह भी दावा कर रही है कि घटना से पहले भी केतन को खाई में धक्का देने की एक असफल कोशिश की गई थी। अब गेट एनालिसिस, क्राइम सीन रीक्रिएशन और अन्य फॉरेंसिक जांच के आधार पर पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

abhishek singh जून 30, 2026 0
Punjab Chief Minister Bhagwant Mann and Sikh legislators appear before the Akal Takht in Amritsar over the Jagat Jot Shri Guru Granth Sahib Satkar (Amendment) Act, 2026.
गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़े कानून पर बढ़ा विवाद, अकाल तख्त ने सभी सिख विधायकों को किया तलब; सरकार को संशोधन के लिए मिला एक माह

  अमृतसर: पंजाब सरकार के 'जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम-2026' को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इसी मुद्दे पर सोमवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान समेत पंजाब विधानसभा के सभी 78 सिख विधायकों को अमृतसर स्थित अकाल तख्त के समक्ष उपस्थित होना पड़ा। सुनवाई के बाद अकाल तख्त ने सरकार को कानून में आवश्यक संशोधन करने के लिए एक महीने का समय दिया है। बैठक के बाद पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने इसे सकारात्मक और सार्थक बताया, लेकिन तख्त की मर्यादा का हवाला देते हुए चर्चा का विवरण सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया। वहीं, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पुष्टि की कि सरकार को कानून में संशोधन के लिए एक महीने का समय दिया गया है। क्या है पूरा मामला? पंजाब सरकार ने 13 अप्रैल 2026 को 'जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम-2026' विधानसभा के विशेष सत्र में पेश किया था। आनंदपुर साहिब में आयोजित इस विशेष सत्र में विधेयक सर्वसम्मति से पारित हुआ और बाद में इसे राज्यपाल की मंजूरी भी मिल गई। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी (अपमान) की घटनाओं पर रोक लगाना और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। कानून में क्या हैं प्रमुख प्रावधान? संशोधित कानून के तहत— बेअदबी की साजिश रचकर सांप्रदायिक तनाव फैलाने पर आजीवन कारावास और 5 से 20 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान। बेअदबी के अपराध पर 20 वर्ष तक की कैद और 2 से 10 लाख रुपये तक जुर्माना। अन्य संबंधित मामलों में 5 वर्ष तक की सजा का प्रावधान। अकाल तख्त ने क्यों जताई आपत्ति? अकाल तख्त ने कानून में सजा के प्रावधानों पर आपत्ति नहीं जताई है। उसकी मुख्य आपत्ति कानून बनाने की प्रक्रिया को लेकर है। अकाल तख्त का कहना है कि गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़े किसी भी कानून को लागू करने से पहले अकाल तख्त, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और व्यापक सिख समुदाय से विचार-विमर्श किया जाना चाहिए था। इसके अलावा कानून में प्रयुक्त कुछ धार्मिक शब्दावली और प्रावधानों को सिख परंपराओं के अनुरूप नहीं बताया गया है। सुनवाई में क्या निर्णय हुआ? अकाल तख्त के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने सभी सिख विधायकों को कानून से जुड़ी आपत्तियों की सूची सौंपी और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह एक महीने के भीतर इन बिंदुओं पर संशोधन कर विधानसभा में संशोधित विधेयक लाए। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक मामलों से जुड़े विषयों में सरकार को संबंधित धार्मिक संस्थाओं से व्यापक परामर्श करना चाहिए। सरकार ने संशोधन पर जताई सहमति पंजाब सरकार ने अकाल तख्त की आपत्तियों का सम्मान करते हुए कानून में आवश्यक संशोधन करने पर सहमति जताई है। सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों में कड़ी सजा सुनिश्चित करना है, न कि धार्मिक परंपराओं या संस्थाओं के अधिकारों में हस्तक्षेप करना।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
Punjab Chief Minister Bhagwant Mann faces political controversy over an alleged viral video as BJP demands an FIR and an independent investigation.
सीएम भगवंत मान के कथित वीडियो पर सियासत तेज, राघव चड्ढा ने FIR और इस्तीफे की मांग की

  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े कथित वायरल वीडियो को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। इस मामले में बीजेपी नेता राघव चड्ढा ने गंभीर आरोप लगाते हुए FIR दर्ज करने और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने दावा किया है कि मामले को दबाने के लिए फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करवाई गई। राघव चड्ढा के आरोप से बढ़ा विवाद राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (AAP) की ओर से मुख्यमंत्री भगवंत मान को बचाने के लिए कथित तौर पर फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करवाई गई। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से सिख समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं और लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। FIR और स्वतंत्र जांच की मांग बीजेपी नेता ने मांग की कि इस बात की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए कि कथित फर्जी रिपोर्ट किसने तैयार की, इसमें कौन-कौन अधिकारी शामिल थे और इसमें सरकारी संसाधनों का कितना इस्तेमाल हुआ। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की भी अपील की। गुरुग्राम पुलिस की कार्रवाई से मामला और उलझा गुरुग्राम पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने 10 लाख रुपये लेकर फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार की। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस पूरे मामले में पंजाब के कुछ अधिकारियों की भूमिका तो नहीं है। भगवंत मान ने आरोपों को बताया साजिश मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो पूरी तरह फर्जी है और उन्हें बदनाम करने के लिए राजनीतिक साजिश रची जा रही है। उनका कहना है कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति वह नहीं हैं। विपक्ष पर साधा निशाना सीएम मान ने बीजेपी, कांग्रेस और अकाली दल पर उनकी छवि खराब करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जनता सच्चाई जानती है और वे अपने विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित करते रहेंगे। अकाल तख्त की कार्रवाई भी चर्चा में इस विवाद के बीच अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को तलब किया था। बाद में सिख समुदाय से उनके सामाजिक बहिष्कार की अपील किए जाने की भी खबर सामने आई, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
Arvind Kejriwal reacts to ED raids in Punjab amid GST scam investigation involving businesses.
पंजाब में ED की बड़ी कार्रवाई, कई ठिकानों पर छापेमारी; केजरीवाल बोले- व्यापारियों को घबराने की जरूरत नहीं

  चंडीगढ़: पंजाब में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को दावा किया कि केंद्रीय एजेंसी राज्य में व्यापारियों को निशाना बना रही है। उन्होंने छोटे व्यापारियों से घबराने की बजाय एकजुट रहने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार उनके साथ खड़ी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए अपने पोस्ट में केजरीवाल ने कहा कि ईडी की कार्रवाई से व्यापारियों को डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरा पंजाब और राज्य सरकार इस मुश्किल समय में उनके साथ है और सभी मिलकर इस स्थिति का सामना करेंगे। GST घोटाले की जांच में ED का एक्शन इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय ने पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा से जुड़े कथित 100 करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले की जांच के सिलसिले में पंजाब और उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर छापेमारी की है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई मोबाइल फोन की बिक्री से जुड़े कथित जीएसटी फर्जीवाड़े की जांच का हिस्सा है। सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की भी जांच कर रही है और कई व्यक्तियों तथा कारोबारी संस्थाओं को जांच के दायरे में लिया गया है। मोबाइल फोन कारोबार से जुड़ा है मामला प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित घोटाला मोबाइल फोन के व्यापार और उससे संबंधित कर लेनदेन से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि फर्जी बिलिंग और अन्य वित्तीय अनियमितताओं के जरिए बड़े पैमाने पर जीएसटी की चोरी की गई, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा। ईडी अब वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि कथित तौर पर अवैध रूप से अर्जित धन के प्रवाह का पता लगाया जा सके। राजनीतिक बयानबाजी भी तेज ईडी की कार्रवाई के बीच पंजाब की राजनीति में भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। आम आदमी पार्टी इसे व्यापारियों और विपक्षी नेताओं को दबाव में लाने की कोशिश बता रही है, जबकि जांच एजेंसियों का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह उपलब्ध सबूतों और जांच के आधार पर की जा रही है। ईडी की ओर से अभी तक छापेमारी को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। जांच पूरी होने के बाद एजेंसी आगे की कार्रवाई पर फैसला ले सकती है। जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें पंजाब और उत्तर प्रदेश में हुई इस कार्रवाई को राज्य की हालिया बड़ी आर्थिक जांचों में से एक माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या नए तथ्य सामने आते हैं और क्या एजेंसी इस मामले में किसी बड़े खुलासे तक पहुंच पाती है।  

Deepshikha जून 9, 2026 0
AAP supporters celebrating Punjab municipal election victory as party secures majority of wards
पंजाब निकाय चुनाव में AAP की बड़ी जीत, बीजेपी पांचवें स्थान पर; कांग्रेस रही दूसरे नंबर पर

पंजाब नगर निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट बढ़त हासिल की है। चुनाव नतीजों में AAP ने 900 से अधिक वार्डों में जीत दर्ज कर राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ का संदेश दिया है। वहीं कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) का प्रदर्शन उम्मीदों से काफी कमजोर रहा। इन चुनावों को राज्य में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा था। नतीजों ने संकेत दिया है कि शहरी क्षेत्रों में भी पार्टी का प्रभाव बरकरार है। AAP ने जीते सबसे ज्यादा वार्ड रात 11 बजे तक उपलब्ध नतीजों के अनुसार, कुल 1,977 वार्डों में हुए चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 957 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस 397 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। वहीं निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी अच्छा प्रदर्शन करते हुए 251 वार्ड जीते। शिरोमणि अकाली दल (SAD) को 191 सीटें मिलीं, जबकि बीजेपी केवल 167 सीटों पर जीत दर्ज कर सकी।   प्रमुख दलों का प्रदर्शन पार्टी जीती सीटें (वार्ड) आम आदमी पार्टी (AAP) 957 कांग्रेस (INC) 397 निर्दलीय (IND) 251 शिरोमणि अकाली दल (SAD) 191 भारतीय जनता पार्टी (BJP) 167 बहुजन समाज पार्टी (BSP) 7 बीजेपी के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं ये नतीजे? नगर निकाय चुनावों में बीजेपी का पांचवें स्थान पर रहना पार्टी के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। पार्टी न केवल कांग्रेस और AAP से पीछे रही, बल्कि निर्दलीय उम्मीदवारों और शिरोमणि अकाली दल से भी कम सीटें हासिल कर सकी। विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में संगठन विस्तार और जनाधार बढ़ाने के लिए बीजेपी को नई रणनीति पर काम करना पड़ सकता है। खासकर ऐसे समय में जब पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत स्थिति में है, लेकिन राज्य में अपेक्षित समर्थन हासिल नहीं कर पा रही है। जीत के बाद AAP में जश्न का माहौल नतीजों के बाद पंजाब भर में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जीत का जश्न मनाया। पार्टी कार्यालयों में ढोल-नगाड़ों के साथ खुशी मनाई गई और समर्थकों के बीच मिठाइयां बांटी गईं। पार्टी नेताओं ने इसे राज्य सरकार के कामकाज और विकास नीतियों पर जनता की मुहर बताया। अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी पर साधा निशाना जीत के बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब की जनता का आभार जताया। उन्होंने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि जनता ने उन ताकतों को जवाब दिया है जो लगातार लोगों और छोटे कारोबारियों को परेशान करने का काम कर रही थीं। केजरीवाल ने बीजेपी को "ईडी पार्टी" बताते हुए कहा कि मतदाताओं ने नकारात्मक राजनीति को खारिज कर दिया है। भगवंत मान बोले- जनता ने विकास की राजनीति को चुना भगवंत मान ने चुनाव परिणामों का स्वागत करते हुए कहा कि जनता ने विकास, काम और जनहित की राजनीति पर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि चुनाव नतीजे यह दिखाते हैं कि लोग नफरत और टकराव की राजनीति के बजाय विकास और सुशासन को प्राथमिकता दे रहे हैं। पंजाब की राजनीति के लिए क्या संकेत? नगर निकाय चुनावों के नतीजे यह संकेत देते हैं कि पंजाब में आम आदमी पार्टी अभी भी मजबूत स्थिति में है। कांग्रेस ने दूसरे स्थान पर रहकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है, लेकिन सत्तारूढ़ दल से उसका अंतर काफी बड़ा है। वहीं बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के सामने आने वाले समय में अपने जनाधार को मजबूत करने की चुनौती बनी रहेगी। इन नतीजों को भविष्य के विधानसभा और लोकसभा चुनावों की दिशा तय करने वाले संकेतों के रूप में भी देखा जा रहा है।  

surbhi मई 30, 2026 0
Bhagwant Mann reacts after firing outside Diljit Dosanjh manager’s house amid political pressure claims
दिलजीत दोसांझ के मैनेजर के घर फायरिंग के बाद बढ़ा विवाद, भगवंत मान बोले- राजनीति में आने का बनाया जा रहा दबाव

फायरिंग की घटना के बाद गरमाई सियासत Diljit Dosanjh के मैनेजर के घर के बाहर हुई फायरिंग के बाद मामला अब राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है। पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने इस घटना को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ समय से दिलजीत दोसांझ पर राजनीति में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा था। मुख्यमंत्री ने कहा कि कलाकारों को जबरन राजनीति में लाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। क्या बोले भगवंत मान? Bhagwant Mann ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पिछले कुछ दिनों से ऐसी खबरें सामने आ रही थीं कि भाजपा दिलजीत दोसांझ को राजनीति में लाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि दिलजीत पहले ही साफ कर चुके हैं कि उनका राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं है। ऐसे में उन पर दबाव बनाना सही नहीं है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कई राजनीतिक दल लोकप्रिय कलाकारों की फैन फॉलोइंग का फायदा उठाना चाहते हैं। विजय का भी लिया उदाहरण भगवंत मान ने दक्षिण भारतीय अभिनेता Vijay का उदाहरण देते हुए कहा कि फिल्मों की लोकप्रियता कई बार नेताओं को कलाकारों को राजनीति में लाने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने दावा किया कि इसी तरह कुछ लोग दिलजीत दोसांझ की लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें राजनीति में शामिल करना चाहते हैं। मैनेजर के घर पर हुई थी गोलीबारी रिपोर्ट्स के अनुसार, हरियाणा के करनाल में दिलजीत दोसांझ के मैनेजर गुरप्रताप सिंह कांग के घर के बाहर अज्ञात हमलावरों ने फायरिंग की थी। घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई, हालांकि किसी के घायल होने की खबर सामने नहीं आई। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली जिम्मेदारी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस घटना की जिम्मेदारी Lawrence Bishnoi Gang ने ली है। फिलहाल पुलिस सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर पूरे मामले की जांच कर रही है और हमलावरों की तलाश जारी है। राजनीति में आने से पहले ही कर चुके हैं इनकार Diljit Dosanjh पहले भी सोशल मीडिया के जरिए साफ कर चुके हैं कि वे राजनीति में शामिल नहीं होने वाले हैं। इसके बावजूद लगातार उनके राजनीति में आने की अटकलें लगती रही हैं, जिन पर अब फायरिंग की घटना के बाद बहस और तेज हो गई है।  

surbhi मई 14, 2026 0
Diljit Dosanjh
क्या दिलजीत दोसांझ बनेंगे पंजाब की राजनीति का नया सितारा?

चंडीगढ़, एजेंसियां। दिलजीत दोसांझ को लेकर पंजाब की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। दक्षिण भारत के सुपरस्टार विजय के तमिलनाडु की राजनीति में सक्रिय होने और मुख्यमंत्री बनने के बाद अब पंजाब में भी ऐसा चेहरा तलाशने की बहस तेज हो गई है। पूर्व सैन्य अधिकारियों और बुद्धिजीवियों के समूह Jago Punjab Manch ने दिलजीत दोसांझ से राजनीति में आने की भावुक अपील की है।   दिलजीत ने विनम्रता से ठुकराया प्रस्ताव सोशल मीडिया पर जब एक अखबार ने सवाल पूछा कि क्या दिलजीत पंजाब का नया राजनीतिक चेहरा बन सकते हैं, तो उन्होंने बेहद संक्षिप्त लेकिन साफ जवाब दिया। दिलजीत ने लिखा, “कभी नहीं... मेरा काम मनोरंजन करना है... मैं अपने क्षेत्र में बहुत खुश हूं।” उनके इस जवाब ने साफ कर दिया कि फिलहाल राजनीति में आने का उनका कोई इरादा नहीं है।   क्यों उठी दिलजीत को राजनीति में लाने की मांग? ‘जागो पंजाब मंच’ के प्रमुख और पूर्व आईएएस अधिकारी S. S. Boparai ने कहा कि पंजाब इस समय कर्ज, नशे और राजनीतिक नेतृत्व के संकट से गुजर रहा है। उन्होंने दिलजीत की बेदाग छवि, युवाओं में लोकप्रियता और देशभक्ति को उनकी सबसे बड़ी ताकत बताया। बोपाराई के अनुसार, कनाडा में तिरंगा लहराकर दिलजीत ने अपने साहसी रुख का परिचय दिया।   विवादों और समर्थन के बीच दिलजीत दिलजीत हाल के वर्षों में कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा में रहे हैं। किसान आंदोलन के दौरान उन्होंने किसानों का खुलकर समर्थन किया था। वहीं, उन्हें खालिस्तानी समर्थक संगठनों से धमकियां भी मिलीं। इस बीच भाजपा ने उनका समर्थन करते हुए उन्हें भारत का “सांस्कृतिक राजदूत” बताया। प्रधानमंत्री Narendra Modi से उनकी मुलाकात ने भी राजनीतिक अटकलों को हवा दी।   कलाकारों का पंजाब राजनीति में मजबूत रिकॉर्ड पंजाब में कलाकारों का राजनीति में सफल रिकॉर्ड रहा है। Bhagwant Mann, Vinod Khanna, Hans Raj Hans और Sunny Deol जैसे कई नाम राजनीति में अपनी पहचान बना चुके हैं। हालांकि फिलहाल दिलजीत ने राजनीति से दूरी बनाए रखने का संकेत दिया है। 

Unknown मई 11, 2026 0
ED officials conduct raid at Punjab minister Sanjeev Arora’s residence in Chandigarh amid money laundering probe
ED Raid: पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा के ठिकानों पर ईडी का छापा, दिल्ली-NCR तक कार्रवाई

ED Raid: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार को पंजाब सरकार के मंत्री संजीव अरोड़ा और उनसे जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की. जांच एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पंजाब, चंडीगढ़ और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में एक साथ कार्रवाई शुरू की. ईडी की टीम चंडीगढ़ के सेक्टर-2 स्थित संजीव अरोड़ा के सरकारी आवास पर भी पहुंची, जहां कई घंटों तक तलाशी अभियान चलाया गया. पीएमएलए के तहत हुई कार्रवाई ईडी अधिकारियों के मुताबिक, यह छापेमारी धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की आपराधिक धाराओं के तहत की गई है. जांच एजेंसी ने पंजाब के अलावा हरियाणा के गुरुग्राम स्थित एक रियल एस्टेट कंपनी समेत कुल पांच परिसरों पर तलाशी ली है. सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी वित्तीय लेनदेन, संपत्ति निवेश और कथित अवैध फंडिंग से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है. हालांकि ईडी ने अभी तक मामले में आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है. पहले भी हो चुकी है कार्रवाई यह पहला मौका नहीं है जब संजीव अरोड़ा ईडी की जांच के दायरे में आए हैं. इससे पहले अप्रैल 2026 में भी ईडी ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत अरोड़ा और उनसे जुड़ी इकाइयों के परिसरों पर छापेमारी की थी. उस समय संजीव अरोड़ा ने कहा था कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेंगे और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है. 2024 में भी हुई थी रेड ईडी ने साल 2024 में भी लुधियाना पश्चिम से विधायक रहे संजीव अरोड़ा के ठिकानों पर छापा मारा था. उस दौरान जांच औद्योगिक जमीन के कथित गलत इस्तेमाल और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में की गई थी. उस समय अरोड़ा राज्यसभा सांसद थे. राजनीतिक में बढ़ी हलचल ताजा कार्रवाई के बाद पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है. वहीं, पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.  

surbhi मई 9, 2026 0
Bhagwant Mann arrives in Delhi with AAP leaders to meet President over MP defection issue
राष्ट्रपति से मिलने दिल्ली पहुंचे भगवंत मान, AAP सांसदों के ‘दलबदल’ पर उठाएंगे बड़ा मुद्दा

Punjab Politics: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों के साथ दिल्ली का रुख किया है, जहां वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य हाल ही में AAP के सात राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के मुद्दे को उठाना है, जिसे पार्टी ‘ग़ैरक़ानूनी दलबदल’ करार दे रही है। यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है और इसके संवैधानिक पहलुओं पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्या है पूरा विवाद? 24 अप्रैल 2026 को राघव चड्ढा समेत आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा जॉइन कर ली थी। इस फैसले को राज्यसभा सभापति की मंजूरी भी मिल गई, जिससे यह मामला और संवेदनशील हो गया। हालांकि आम आदमी पार्टी का कहना है कि यह दलबदल कानून का स्पष्ट उल्लंघन है और इन सांसदों की सदस्यता रद्द होनी चाहिए। पार्टी का आरोप है कि लोकतांत्रिक मूल्यों और जनादेश के साथ समझौता किया गया है। राष्ट्रपति से क्या करेंगे मांग? भगवंत मान इस पूरे घटनाक्रम को राष्ट्रपति के सामने विस्तार से रखेंगे और उनसे संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग करेंगे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, “मुझे विश्वास है कि राष्ट्रपति हमारी बात जरूर सुनेंगी। वह संविधान की संरक्षक हैं और देश की सर्वोच्च संवैधानिक प्राधिकरण हैं। हमें न्याय की उम्मीद है।” बीजेपी का जवाब और सियासी तंज इस मुद्दे पर सुनील जाखड़ ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें इस मुलाकात की ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन भगवंत मान को अपने विधायकों पर नजर रखनी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कहीं ऐसा न हो कि AAP के विधायक भी भाजपा के कार्यक्रमों में पहुंच जाएं। इस बयान के बाद दोनों पार्टियों के बीच सियासी जुबानी जंग और तेज हो गई है। संवैधानिक और राजनीतिक महत्व यह मामला सिर्फ एक राजनीतिक दल बदल तक सीमित नहीं है, बल्कि दलबदल कानून, संसद की कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक मूल्यों से भी जुड़ा हुआ है। अगर इस पर कोई बड़ा फैसला आता है, तो इसका असर भविष्य की राजनीति पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केस आने वाले समय में एक मिसाल बन सकता है कि राज्यसभा जैसे सदन में दलबदल के मामलों को कैसे देखा और सुलझाया जाता है। आगे की राजनीति पर नजर अब सभी की निगाहें द्रौपदी मुर्मु से होने वाली इस मुलाकात पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि इस मुद्दे पर क्या संवैधानिक कदम उठाए जाते हैं और क्या इससे AAP को कोई राहत मिलती है। कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम पंजाब से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है, जो आने वाले दिनों में और भी गर्मा सकता है।  

surbhi मई 5, 2026 0
Ajay Maken reacts to AAP Rajya Sabha MPs merging with BJP amid Punjab political controversy
AAP सांसदों के BJP में विलय पर कांग्रेस का हमला, अजय माकन बोले- पंजाब के जनादेश का अपमान

राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों के विलय पर सियासी घमासान आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों, जिनमें राघव चड्ढा भी शामिल हैं, के बीजेपी में विलय को मंजूरी मिलने के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस घटनाक्रम पर कांग्रेस ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता अजय माकन ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने पंजाब के जनादेश का अनादर किया है और इससे राज्य में अलगाववादी ताकतों को बल मिल सकता है। "पंजाब में वही हुआ, जो अलगाववादी चाहते थे" अजय माकन ने कहा कि पंजाब जैसे संवेदनशील और सीमावर्ती राज्य में यह राजनीतिक बदलाव गंभीर चिंता का विषय है। उनके मुताबिक, अलगाववादी ताकतें लंबे समय से यह प्रचार करती रही हैं कि पंजाब के लोगों की आवाज को दबाया जाता है। माकन ने आरोप लगाया कि बीजेपी का यह कदम उसी नैरेटिव को मजबूती देता है। 6 फीसदी वोट, लेकिन 86 फीसदी राज्यसभा सीटें कांग्रेस नेता ने कहा कि 2021 के पंजाब विधानसभा चुनाव में बीजेपी को केवल 6.6 प्रतिशत वोट और दो सीटें मिली थीं। इसके बावजूद अब पंजाब से राज्यसभा की सात में से छह सीटों पर बीजेपी का प्रभाव हो गया है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक जनादेश के साथ अन्याय बताया। AAP पर भी साधा निशाना अजय माकन ने आम आदमी पार्टी पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि AAP अब आम आदमी की नहीं, बल्कि अरबपतियों की पार्टी बन चुकी है। माकन के अनुसार, बीजेपी में शामिल हुए सातों सांसदों की औसत घोषित संपत्ति 800 करोड़ रुपये से अधिक है। केजरीवाल पर लगाए गंभीर आरोप कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर धनाढ्य लोगों को राज्यसभा भेजा। उन्होंने यह भी कहा कि AAP को कांग्रेस का वोट काटने के लिए खड़ा किया गया था, लेकिन अब उसका "मुखौटा" उतर चुका है। INDIA गठबंधन पर भी उठे सवाल माकन ने स्वीकार किया कि कांग्रेस और AAP के बीच पहले भी वैचारिक मतभेद रहे हैं। हालांकि, गठबंधन की मजबूरियों के चलते दोनों दल साथ आए थे। अब इस घटनाक्रम के बाद INDIA गठबंधन के भीतर भी नई बहस शुरू होने की संभावना है।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
Punjab minister Sanjeev Arora
AAP को एक और झटका: पंजाब मंत्री संजीव अरोड़ा के घर ED की रेड

लुधियाना: पंजाब की राजनीति में हलचल मचाते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार सुबह आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री Sanjeev Arora के घर छापेमारी की। ईडी की टीम सुबह-सुबह लुधियाना स्थित उनके आवास पर पहुंची, जहां सुरक्षा के लिए केंद्रीय बल भी तैनात किए गए। कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई सूत्रों के मुताबिक, ईडी ने सिर्फ आवास ही नहीं बल्कि Sanjeev Arora से जुड़े अन्य ठिकानों पर भी दबिश दी है। यह कार्रवाई कथित मनी लॉन्ड्रिंग और जमीन सौदों में अनियमितताओं से जुड़े एक पुराने मामले को लेकर की जा रही है। अशोक मित्तल पर भी हुई थी रेड इससे पहले बुधवार को ईडी ने AAP के राज्यसभा सांसद Ashok Mittal के जालंधर स्थित घर और उनकी निजी यूनिवर्सिटी में भी छापेमारी की थी। मित्तल के घर पर सर्च ऑपरेशन पूरा हो चुका है लेकिन उनकी यूनिवर्सिटी में अभी भी जांच जारी बताई जा रही है AAP पर बढ़ता दबाव लगातार दो दिनों में पार्टी के बड़े नेताओं पर हुई कार्रवाई से आम आदमी पार्टी पर राजनीतिक दबाव बढ़ता दिख रहा है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर हो सकता है, जबकि AAP की ओर से इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया जा सकता है। ED की ये कार्रवाई पंजाब की सियासत में बड़ा मुद्दा बन सकती है। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस मामले को और गरमा सकती हैं।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
Raghav Chadha
राघव चड्ढा को मिल सकती है Z सुरक्षा, पंजाब सरकार ने पहले वापस लिया था सुरक्षा कवर

नई दिल्ली, एजेंसियां। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्डा को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। खबर है कि केंद्र सरकार उन्हें जल्द ही Z श्रेणी की सुरक्षा प्रदान कर सकती है। यह चर्चा ऐसे समय में तेज हुई है जब हाल ही में पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने उनका सुरक्षा कवर वापस ले लिया था। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली और पंजाब में उन्हें Z सुरक्षा दी जा सकती है, जबकि अन्य राज्यों में Y+ श्रेणी की सुरक्षा मिलने की संभावना है। Z सुरक्षा देश में उच्च स्तर की सुरक्षा श्रेणियों में से एक मानी जाती है, जिसमें लगभग 20 से अधिक सुरक्षाकर्मी, जिनमें NSG कमांडो भी शामिल होते हैं, तैनात किए जाते हैं।   पार्टी में मतभेद और पद से हटाया जाना हाल ही में पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया था और उनकी जगह अशोक मित्तल  को जिम्मेदारी सौंपी गई। इस फैसले के बाद से पार्टी और चड्ढा के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। राघव चड्ढा ने भी अपने बयानों में कहा था कि उन्हें “खामोश किया जा सकता है, लेकिन हराया नहीं जा सकता।” इससे साफ है कि पार्टी के अंदरूनी समीकरणों में बदलाव आया है।   सुरक्षा वापसी और नई अटकलें पंजाब में Bhagwant Mann की सरकार ने उनका सुरक्षा कवर वापस ले लिया था, जिसके बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया। अब केंद्र स्तर पर उन्हें उच्च सुरक्षा दिए जाने की संभावनाओं ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी के भीतर नेतृत्व और रणनीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि राघव चड्ढा की राजनीतिक भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ती है।

Unknown अप्रैल 15, 2026 0
Man applying beard oil to well-groomed beard for smooth and stylish look grooming routine
परफेक्ट स्टाइल के लिए टॉप 5 बियर्ड ऑयल

मैं बियर्ड ऑयल के बारे में खुलकर बात करना चाहता हूँ, क्योंकि दाढ़ी सिर्फ एक लुक नहीं–ये एक लाइफस्टाइल है। जब मैंने बियर्ड ग्रूमिंग की दुनिया में कदम रखा, तो मैंने अपने तीन “पर्सनल ग्रूमिंग एक्सपर्ट्स” की मदद ली–मेरे भाई (बियर्ड गोल्स), मेरे पापा (ओरिजिनल स्मूद ऑपरेटर) और मेरी खुद की दाढ़ी (जिसे मैं रॉयल्टी की तरह ट्रीट करता हूँ)। कई हफ्तों तक सबकी मॉर्निंग रूटीन को ऑब्ज़र्व करने, अलग-अलग ऑयल्स ट्राय करने और भाई-पापा की राय लेने के बाद, मैंने समझा कि असल में क्या काम करता है। ऐसे ऑयल्स जो आपकी दाढ़ी को शानदार खुशबू दें और जिद्दी बालों को आसानी से सेट कर दें–ये वही बेस्ट बियर्ड ऑयल्स हैं जो आपकी स्टाइल को परफेक्शन तक ले जाते हैं। टॉप बियर्ड ऑयल्स जो आपके ग्रूमिंग गेम को बनाएंगे शानदार सच कहें तो बियर्ड केयर, मेंस सेल्फ-केयर का अहम हिस्सा है। ये 5 बियर्ड ऑयल्स आपके लुक में शाइन, सॉफ्टनेस, खुशबू और स्टाइल–सब कुछ जोड़ देते हैं। चाहे आप रफ-टफ लुक चाहते हों या क्लीन और क्लासी स्टाइल–ये ऑयल्स आपको बेसिक से बॉस बना देंगे। 1. Jack Black Beard Oil मेरा भाई ग्रूमिंग को लेकर काफी पिकी है। जब उसने Jack Black Beard Oil इस्तेमाल किया, तो मैं समझ गया कि ये खास है। “भाई, ये तो कमाल है,” उसने शीशे में खुद को देखते हुए कहा।  हल्का लेकिन बेहद नॉरिशिंग दाढ़ी को सॉफ्ट और स्मूद बनाता है सबटल (हल्की) खुशबू, जो लोगों को पसंद आए इसमें Kalahari melon और marula जैसे नैचुरल ऑयल्स होते हैं, जो बिना चिपचिपाहट के हाइड्रेशन देते हैं। 2. Premium Beard Oil ये ऑयल हमारे घर में एक तरह की “विरासत” बन चुका है। पापा ने इसे भाई को गिफ्ट किया था, और अब ये दोनों का फेवरेट है। पापा इसे “मॉर्निंग आर्मर” कहते हैं, जबकि भाई इसे लगभग परफ्यूम की तरह इस्तेमाल करता है।  हल्का लेकिन गहराई से मॉइस्चराइजिंग दाढ़ी को स्मूद और सेट करता है शानदार और क्लासी खुशबू ये वो ऑयल है जो हमेशा बाथरूम शेल्फ से गायब रहता है  3. Arlo’s 99% Natural Beard Oil Pro-Growth मेरे पापा किसी भी प्रोडक्ट को आसानी से पसंद नहीं करते। लेकिन जब उन्होंने इसे “मस्ट-हैव” कहा, तो समझिए ये खास है।  99% नैचुरल फॉर्मूला दाढ़ी को सॉफ्ट और शाइनी बनाता है फ्लाईअवे (उड़े हुए बाल) कंट्रोल करता है सबसे खास बात–ये बियर्ड ग्रोथ में भी मदद करता है। पापा हमेशा कहते हैं: “अगर दाढ़ी बढ़े, तो चमके भी।”  4. Forest Essentials Grooming Beard Oil ये पापा का सबसे भरोसेमंद (ride-or-die) बियर्ड ऑयल है। एक बार उन्होंने गलती से सुगंध वाला ऑयल लगा लिया और पूरा दिन “नाइटक्लब” जैसी खुशबू में बिताया 😄 तब से उन्होंने फ्रेगरेंस-फ्री ऑयल ही चुना–और यही उनका फेवरेट बन गया।  बिना खुशबू (fragrance-free)   हल्का और नॉन-ग्रीसी   स्किन-फ्रेंडली, कोई एलर्जी नहीं ये सादा लेकिन असरदार ऑयल है–एकदम क्लासिक। 5. Maharajah Beard Oil (10ml Travel Size) ये छोटा सा ऑयल मेरे दोस्त की वजह से हमारे घर में आया–और अब सबका फेवरेट बन चुका है।  शानदार और रॉयल खुशबू दाढ़ी को स्मूद और सॉफ्ट बनाता है ट्रैवल-फ्रेंडली और कॉम्पैक्ट अब हाल ये है कि मैं, मेरा भाई और पापा–तीनों इसे इस्तेमाल कर रहे हैं। लगता है हमारे घर में “Maharajah Beard Oil क्लब” बन चुका है  बियर्ड ऑयल इस्तेमाल करने के टिप्स हल्की गीली दाढ़ी पर लगाएं 2–5 बूंद काफी होती हैं स्किन तक मसाज करें कंघी से अच्छे से फैलाएं

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0