रांची। राजधानी रांची में गुरुवार को आयोजित 335वीं ऐतिहासिक जगन्नाथ रथ यात्रा आस्था, परंपरा और जनसैलाब का अद्भुत संगम बन गई। भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा भव्य रथ पर सवार होकर मुख्य मंदिर से मौसीबाड़ी पहुंचे। करीब डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और उत्साह के साथ रथ की रस्सी खींची। “जय जगन्नाथ” के गगनभेदी नारों के बीच लगभग दो घंटे में रथ यात्रा संपन्न हुई और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। इस वर्ष की रथ यात्रा कई मायनों में विशेष रही पिछले 10 वर्षों में पहली बार रथ यात्रा के दिन रांची में बारिश नहीं हुई। आमतौर पर इस अवसर पर हल्की या मध्यम वर्षा होती रही है, जिसे शुभ संकेत माना जाता है और अच्छी खेती से जोड़ा जाता है। मौसम विभाग ने बारिश की संभावना जताई थी, लेकिन पूरे आयोजन के दौरान मौसम साफ रहा।रांची की यह ऐतिहासिक रथ यात्रा वर्ष 1691 में नागवंशी शासक अनिनाथ शाहदेव द्वारा शुरू की गई थी। पुरी की परंपरा से प्रेरित यह यात्रा 335 वर्षों से लगातार आयोजित हो रही है। केवल 2020 और 2021 में कोरोना महामारी के कारण सार्वजनिक रथ यात्रा नहीं निकाली गई थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार रथ यात्रा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार भी शामिल हुए। दोनों ने भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना कर राज्य की सुख-समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए घोषणा की कि जगन्नाथपुर मंदिर की पहचान को और भव्य बनाने के लिए मंदिर से जुड़ने वाली सड़क पर एक विशाल तोरण द्वार का निर्माण कराया जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में मंत्री, विधायक, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। राज्यपाल रथ से उतरते समय कुछ क्षण के लिए असंतुलित हो गए, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत संभाल लिया। धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक परंपरा और जनभागीदारी से सजी यह रथ यात्रा एक बार फिर रांची की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में सफल रही।
ओडिशा के Puri में आयोजित भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के दौरान गुरुवार को भारी भीड़ और लगातार बारिश के बीच दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई। वहीं, 'पहंडी' अनुष्ठान में देरी होने के कारण भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ श्री गुंडिचा मंदिर तक नहीं पहुंच सके। ऐसे में शुक्रवार को श्रद्धालुओं को एक बार फिर रथ खींचने का अवसर मिलेगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि आज तीनों रथों को श्री गुंडिचा मंदिर तक पहुंचाया जाए। दो श्रद्धालुओं की गई जान मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के अनुसार, रथ यात्रा के दौरान सात श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। इनमें 60 वर्ष से अधिक आयु के एक श्रद्धालु की इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं, 35 वर्ष से अधिक उम्र के एक अन्य श्रद्धालु की हार्ट अटैक से जान चली गई। दोनों मामलों में मौत के कारणों की जांच की जा रही है। बारिश और उमस से कई श्रद्धालु हुए बीमार लगातार बारिश, उमस और भारी भीड़ के कारण कई श्रद्धालुओं को थकान, घुटन, शरीर में पानी की कमी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हुईं। अस्पताल में इलाज के बाद अधिकांश लोगों की हालत में सुधार होने पर उन्हें छुट्टी दे दी गई। 8 से 9 लाख श्रद्धालु पहुंचे पुरी मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, इस वर्ष देश-विदेश से करीब 8 से 9 लाख श्रद्धालु रथ यात्रा में शामिल हुए। प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों, सेवादारों और स्वयंसेवकों ने मिलकर भीड़ को नियंत्रित किया, जिससे आयोजन के दौरान किसी बड़े व्यवधान की स्थिति नहीं बनी। सरकार ने स्पष्ट किया कि आयोजन के दौरान भगदड़ या भीड़ प्रबंधन पूरी तरह विफल होने जैसी कोई घटना नहीं हुई। सभी आवश्यक सेवाएं पूरे समय सुचारु रूप से संचालित होती रहीं। 'बड़ा डंडा' मार्ग पर उमड़ी भारी भीड़ फायर सर्विस के महानिरीक्षक उमाशंकर दाश ने बताया कि 'बड़ा डंडा' मार्ग पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। इसी मार्ग से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ श्री गुंडिचा मंदिर तक ले जाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि भीड़ के दौरान दम घुटने और तबीयत बिगड़ने वाले करीब 100 श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्थायी अस्पतालों और एम्बुलेंस के जरिए उपचार उपलब्ध कराया गया। 'पहंडी' में देरी से बदला कार्यक्रम मुख्य प्रशासक अरबिंद पाढ़ी ने बताया कि अन्य धार्मिक अनुष्ठान समय पर हुए, लेकिन 'पहंडी' प्रक्रिया में एक घंटे से अधिक की देरी हुई। भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा मुख्य द्वार पर करीब 40 मिनट तक आगे नहीं बढ़ सकी, जिससे पूरे कार्यक्रम का समय प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि शुक्रवार सुबह साढ़े नौ बजे से रथ खींचने की प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाएगी। तीनों देवता शुक्रवार रात भी अपने-अपने रथों पर ही विराजमान रहेंगे, जबकि श्री गुंडिचा मंदिर में प्रवेश का पारंपरिक जुलूस शनिवार को आयोजित किया जाएगा।
ओडिशा के पुरी में गुरुवार को विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक आस्था के बीच शुरू हो गई। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के अवसर पर आयोजित इस ऐतिहासिक यात्रा में देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं ने "जय जगन्नाथ" के जयघोष के बीच भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के दर्शन किए। पारंपरिक अनुष्ठानों के बाद तीनों देव विग्रह अपने-अपने भव्य रथों पर विराजमान होकर गुंडिचा मंदिर, जिसे भगवान की मौसी का घर माना जाता है, के लिए रवाना हुए। सुबह से पूरे हुए सभी धार्मिक अनुष्ठान मंदिर प्रशासन के अनुसार, सुबह मंगला आरती, स्नान पूजा और विशेष श्रृंगार के बाद भगवान को गोपाल वल्लभ भोग और राजभोग अर्पित किया गया। इसके बाद पारंपरिक 'पाहांडी बिजे' अनुष्ठान के तहत देव विग्रहों को गर्भगृह से बाहर लाया गया। सबसे पहले सुदर्शन चक्र, फिर भगवान बलभद्र, माता सुभद्रा और अंत में भगवान जगन्नाथ को उनके निर्धारित रथों पर विराजमान कराया गया। हल्की बारिश को माना गया शुभ संकेत रथ यात्रा की शुरुआत के दौरान पुरी में हल्की बारिश भी हुई। श्रद्धालु इसे भगवान जगन्नाथ की कृपा और शुभ संकेत के रूप में देख रहे हैं। धार्मिक मान्यता है कि रथ यात्रा के दिन वर्षा होना समृद्धि और भगवान की प्रसन्नता का प्रतीक माना जाता है। गजपति महाराज ने निभाई 'चेरा पहरा' की परंपरा रथों पर भगवान के विराजमान होने के बाद रथ यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक 'चेरा पहरा' का आयोजन किया गया। इस रस्म के तहत पुरी के गजपति महाराज ने स्वयं सेवक का रूप धारण कर सोने की झाड़ू से तीनों रथों की प्रतीकात्मक सफाई की। यह परंपरा समाज में समानता और सेवा भाव का संदेश देती है। श्रद्धालुओं ने खींचे तीनों रथ सभी धार्मिक अनुष्ठानों के पूरा होने के बाद भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष, भगवान बलभद्र के तालध्वज और देवी सुभद्रा के दर्पदलन रथ को खींचने की प्रक्रिया शुरू हुई। हजारों श्रद्धालुओं ने मोटी रस्सियों को थामकर पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ रथों को आगे बढ़ाया। महाप्रभु का यह दिव्य कारवां धीरे-धीरे गुंडिचा मंदिर की ओर बढ़ रहा है, जहां पहुंचने के बाद विशेष पूजा और संध्या आरती का आयोजन किया जाएगा। सुरक्षा के बीच भक्ति का महासंगम रथ यात्रा को लेकर पुरी में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। प्रशासन की निगरानी में लाखों श्रद्धालु शांतिपूर्ण ढंग से यात्रा में शामिल हो रहे हैं। हर ओर भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिल रहा है, जिससे पुरी पूरी तरह जगन्नाथमय हो गया है।
आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा का शुभारंभ होता है। इस दौरान भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ भव्य रथ पर विराजमान होकर श्रीमंदिर से गुंडीचा मंदिर की यात्रा करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि रथ यात्रा में शामिल होकर भगवान के रथ को खींचने से सौ यज्ञों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। यदि आप किसी कारणवश रथ यात्रा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं, तो श्रद्धा और भक्ति के साथ घर पर भगवान जगन्नाथ की पूजा, मंत्र जाप और स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई आराधना भगवान की कृपा प्राप्त करने का माध्यम बनती है। घर पर भगवान जगन्नाथ की पूजा कैसे करें? घर पर भगवान जगन्नाथ की पूजा करने के लिए इन सरल चरणों का पालन करें— सबसे पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें और गंगाजल छिड़ककर उसे शुद्ध करें। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। घी का दीपक और धूप जलाकर पूजा का प्रारंभ करें। भगवान को चंदन, रोली, अक्षत, पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें। इसके बाद भगवान जगन्नाथ के मंत्रों और स्तोत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें। मालपुआ, मौसमी फल तथा सात्विक (बिना प्याज-लहसुन) भोजन का भोग अर्पित करें। अंत में भगवान जगन्नाथ की आरती करें और परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें। भगवान जगन्नाथ गायत्री मंत्र ॐ जगन्नाथाय विद्महे। महाबलाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥ भगवान जगन्नाथ का मूल मंत्र ॐ श्री जगन्नाथाय नमः॥ श्री जगन्नाथ अष्टकम का महत्व धार्मिक मान्यता के अनुसार श्री जगन्नाथ अष्टकम का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भगवान जगन्नाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह स्तोत्र भगवान के दिव्य स्वरूप, करुणा और भक्तों के प्रति उनके स्नेह का वर्णन करता है। परंपरागत विश्वास है कि नियमित रूप से इसका पाठ करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। जगन्नाथ स्तोत्र का महत्व जगन्नाथ स्तोत्र में भगवान श्रीकृष्ण के जगन्नाथ स्वरूप की स्तुति की गई है। इसमें भक्त भगवान से जीवन के कष्टों, भय, दुख और बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पाठ करने से मन में भक्ति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक संतुलन बढ़ता है। रथ यात्रा का धार्मिक महत्व मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के मिलन का प्रतीक है। इस दौरान भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच आते हैं और सभी को अपने दर्शन का अवसर प्रदान करते हैं। जो श्रद्धालु रथ यात्रा में शामिल नहीं हो पाते, वे घर पर भगवान का स्मरण, मंत्र जाप, स्तोत्र पाठ और आरती करके भी अपनी भक्ति व्यक्त कर सकते हैं।
मुंबई: पिछले कारोबारी सत्र की बड़ी गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को जोरदार वापसी की। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 500 अंक की बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया, जबकि निफ्टी 24,200 के करीब पहुंच गया। एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के चलते घरेलू बाजार में निवेशकों का भरोसा लौटता दिखा। सुबह करीब 9:25 बजे सेंसेक्स 500.85 अंक (0.65%) की बढ़त के साथ 77,555.79 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 141.75 अंक (0.59%) चढ़कर 24,193.80 के स्तर पर पहुंच गया। पिछले सत्र में आई थी बड़ी गिरावट मंगलवार को बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी। उस दौरान: सेंसेक्स 561.46 अंक गिरकर 77,054.94 पर बंद हुआ था। निफ्टी 158.95 अंक टूटकर 24,052.05 पर बंद हुआ था। आज की तेजी ने निवेशकों को कुछ राहत जरूर दी है। इन शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी सेंसेक्स के 30 शेयरों में से अधिकांश हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। सबसे ज्यादा बढ़त वाले प्रमुख शेयर: बजाज फाइनेंस (+2.33%) एक्सिस बैंक (+1.92%) इंडिगो (+1.75%) इटरनल (+1.64%) अल्ट्राटेक सीमेंट (+1.47%) भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ICICI बैंक एशियन पेंट्स रिलायंस इंडस्ट्रीज HDFC बैंक बजाज फिनसर्व अडानी पोर्ट्स बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, सीमेंट और एविएशन सेक्टर में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इन शेयरों पर रहा दबाव बाजार में तेजी के बावजूद आईटी सेक्टर के कुछ बड़े शेयरों में कमजोरी बनी रही। गिरावट वाले प्रमुख शेयर: TCS इंफोसिस टेक महिंद्रा पावर ग्रिड NTPC हिंदुस्तान यूनिलीवर टाटा स्टील आईटी इंडेक्स अन्य सेक्टरों की तुलना में कमजोर बना रहा। ब्रॉडर मार्केट में भी दिखी मजबूती केवल लार्जकैप ही नहीं, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स लगभग 0.39% चढ़ा। निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में भी करीब 0.39% की तेजी दर्ज की गई। सेक्टरवार प्रदर्शन में आईटी को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख सेक्टर सकारात्मक दायरे में कारोबार करते नजर आए। वैश्विक संकेतों का मिला सहारा बाजार को वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक संकेत मिले। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 20% ट्रांजिट शुल्क नहीं लगाया जाएगा, जिससे वैश्विक निवेशकों की चिंता कुछ कम हुई। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रही और ब्रेंट क्रूड लगभग 1.16% बढ़कर 85.71 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा। रुपये की चाल भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग स्थिर रहा। रुपया 96.1725 प्रति डॉलर पर खुला। पिछले कारोबारी सत्र में यह 96.20 पर बंद हुआ था। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल बाजार वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कॉर्पोरेट नतीजों पर नजर बनाए हुए है। यदि बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में खरीदारी जारी रहती है, तो बाजार में आगे भी सकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है।
कोलकाता: कोलकाता में इस्कॉन (ISKCON) की 55वीं ऐतिहासिक रथयात्रा बुधवार, 16 जुलाई को भव्य रूप से निकाली जाएगी। इस वर्ष पहली बार पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी रथ की रस्सी खींचकर यात्रा का शुभारंभ करेंगे। वहीं, इस्कॉन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी इस समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। मुख्यमंत्री करेंगे रथयात्रा का शुभारंभ इस्कॉन के अनुसार मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सुबह करीब 11:45 बजे कार्यक्रम स्थल पहुंचेंगे। वह भगवान जगन्नाथ, बलराम और देवी सुभद्रा के दर्शन करने के बाद पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ रथ की रस्सी खींचकर यात्रा का शुभारंभ करेंगे। नई सरकार बनने के बाद यह पहला अवसर होगा, जब मुख्यमंत्री इस्कॉन की कोलकाता रथयात्रा में शामिल होंगे। 55वें वर्ष में प्रवेश कर रही रथयात्रा इस्कॉन कोलकाता द्वारा आयोजित यह रथयात्रा पिछले 54 वर्षों से लगातार आयोजित की जा रही है। इस वर्ष का मुख्य विषय "भारत-मंदिर संस्कृति की विरासत" रखा गया है। आयोजकों के अनुसार चीन, रूस, यूक्रेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस आयोजन में भाग लेने के लिए कोलकाता पहुंचे हैं। इस मार्ग से गुजरेगी रथयात्रा रथयात्रा की शुरुआत इस्कॉन मंदिर, 3सी अल्बर्ट रोड से होगी। इसके बाद यात्रा सरत बोस रोड, एक्साइड चौराहा, हंगरफोर्ड स्ट्रीट, एजेसी बोस रोड, हाजरा रोड, श्यामा प्रसाद मुखर्जी रोड, जवाहरलाल नेहरू रोड और आउटराम रोड से होते हुए ब्रिगेड परेड ग्राउंड स्थित मौसी बाड़ी पहुंचेगी, जहां परंपरा के अनुसार भगवान का रथ ठहरेगा। 24 जुलाई को निकलेगी बहुदा यात्रा भगवान जगन्नाथ की वापसी यात्रा यानी बहुदा (उल्टा) रथयात्रा 24 जुलाई को आयोजित होगी। यह यात्रा ब्रिगेड परेड ग्राउंड से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए पुनः इस्कॉन मंदिर पहुंचेगी। 17 से 23 जुलाई तक लगेगा श्री जगन्नाथ महामेला रथयात्रा के अगले दिन से 17 जुलाई से 23 जुलाई तक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में श्री जगन्नाथ महामेला आयोजित किया जाएगा। यहां तिरुपति बालाजी मंदिर की स्थापत्य शैली पर आधारित गुंडिचा मंदिर की प्रतिकृति बनाई जाएगी, जहां सात दिनों तक भगवान जगन्नाथ, बलराम और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। शांति और सद्भाव का संदेश देगी रथयात्रा आयोजकों का कहना है कि मौजूदा वैश्विक तनाव और संघर्ष के दौर में इस वर्ष की रथयात्रा शांति, प्रेम, भाईचारे और मानवता का संदेश देने का प्रयास करेगी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए हैं।
Rath Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ की पवित्र रथ यात्रा हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और भव्य धार्मिक उत्सवों में से एक है। वर्ष 2026 में यह यात्रा 16 जुलाई, गुरुवार से शुरू होगी। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथों पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते हैं। इस अवसर पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु ओडिशा के पुरी पहुंचकर इस ऐतिहासिक यात्रा में शामिल होते हैं। कैसे शुरू हुई जगन्नाथ रथ यात्रा? सुभद्रा की इच्छा से जुड़ी है परंपरा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार भगवान श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा ने अपने दोनों भाइयों भगवान कृष्ण और बलभद्र (बलराम) से नगर भ्रमण कराने की इच्छा जताई। अपनी बहन की इच्छा पूरी करने के लिए दोनों भाइयों ने उन्हें रथ पर बैठाकर पूरे नगर का भ्रमण कराया। माना जाता है कि इसी घटना की स्मृति में हर वर्ष भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाती है। मौसी के घर जाने की परंपरा रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अपने मुख्य मंदिर से निकलकर गुंडीचा मंदिर पहुंचते हैं, जिसे धार्मिक मान्यताओं में भगवान की मौसी का घर माना जाता है। तीनों देवता यहां कुछ दिनों तक विराजमान रहते हैं। इस दौरान उनका विशेष स्वागत किया जाता है और पारंपरिक ओड़िया व्यंजन 'पोड़ा पीठा' का भोग अर्पित किया जाता है। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भगवान पुनः श्रीमंदिर लौटते हैं। रथ यात्रा का धार्मिक महत्व भगवान जगन्नाथ को 'जगत के नाथ', अर्थात संपूर्ण संसार के स्वामी कहा जाता है। सामान्य दिनों में श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन के लिए मंदिर जाना पड़ता है, लेकिन रथ यात्रा के दौरान भगवान स्वयं अपने गर्भगृह से बाहर निकलकर सभी भक्तों को दर्शन देते हैं। धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान के रथ को खींचता है या रथ यात्रा के दर्शन करता है, उसे भगवान जगन्नाथ का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसी भी मान्यता है कि इस पुण्य कार्य से व्यक्ति के पापों का क्षय होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। आस्था और संस्कृति का महापर्व जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक भी है। यह उत्सव भाई-बहन के प्रेम, सेवा, समर्पण और भगवान के प्रति अटूट भक्ति का संदेश देता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस पावन अवसर पर शामिल होकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
मुंबई, एजेंसियां। मुंबई में 6 जुलाई को निर्माता बोनी कपूर की बेटी और अर्जुन कपूर की बहन अंशुला कपूर ने अपने लॉन्ग-टाइम बॉयफ्रेंड रोहन ठक्कर के साथ शादी के बंधन में बंधकर नई जिंदगी की शुरुआत की। दोनों की शादी मुंबई के ताज होटल में परिवार और करीबी रिश्तेदारों की मौजूदगी में संपन्न हुई। शादी के कई भावुक और खूबसूरत वीडियो तथा तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। सास ने गले लगाकर दिया आशीर्वाद, भावुक हुए बोनी कपूर शादी के दौरान सामने आए एक वीडियो में अंशुला और रोहन विवाह संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते नजर आए। इस दौरान रोहन की मां ने दोनों को गले लगाकर आशीर्वाद दिया और बहू अंशुला पर स्नेह लुटाया। वहीं बेटी की शादी के मौके पर बोनी कपूर भी भावुक दिखाई दिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए दोनों को नई जिंदगी की शुभकामनाएं दीं और उनके सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की। भाई अर्जुन संग भावुक पल भी बना चर्चा का विषय शादी से पहले आयोजित प्री-वेडिंग समारोह की तस्वीरों में अंशुला कपूर अपने भाई अर्जुन कपूर को गले लगाकर भावुक होती नजर आई थीं। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई और फैंस ने भाई-बहन के रिश्ते की जमकर सराहना की। डेटिंग ऐप से शुरू हुई थी प्रेम कहानी अंशुला और रोहन की पहली मुलाकात वर्ष 2022 में एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी। दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदली और जुलाई 2025 में रोहन ने न्यूयॉर्क के सेंट्रल पार्क में घुटनों पर बैठकर अंशुला को प्रपोज किया। इसके बाद अक्टूबर 2025 में दोनों ने सगाई की थी। 21 जून से शादी की रस्में शुरू हुई थीं, जबकि मेहंदी, चूड़ा और कलीरे की रस्में 5 जुलाई को संपन्न हुईं। अब शादी के साथ दोनों ने अपने रिश्ते को नया मुकाम दे दिया है।
रांची। ऐतिहासिक जगन्नाथपुर रथ मेला और रथ यात्रा के शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सुव्यवस्थित आयोजन को लेकर रांची जिला प्रशासन और पुलिस ने तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचा दी हैं। रविवार को धुर्वा स्थित जगन्नाथपुर मंदिर परिसर के नीलाद्री हॉल में एडीजी मुख्यालय मनोज कौशिक की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मंदिर न्यास समिति, पुलिस और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने सुरक्षा, ट्रैफिक, भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की। ड्रोन, सीसीटीवी और सादे लिबास में पुलिस की रहेगी नजर प्रशासन ने मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने का फैसला लिया है। पूरे मेला क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा। महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। चोरी, छिनतई और पॉकेटमारी जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों को सादे लिबास में भी तैनात किया जाएगा। पूरे परिसर की निगरानी सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए की जाएगी, जबकि कंट्रोल रूम से हर गतिविधि पर लगातार नजर रखी जाएगी। ट्रैफिक, पार्किंग और स्वास्थ्य सुविधाओं की भी विशेष तैयारी श्रद्धालुओं की सुविधा और शहर में जाम से बचाव के लिए ट्रैफिक डायवर्जन प्लान लागू किया जाएगा। आम लोगों और वीआईपी वाहनों के लिए अलग-अलग पार्किंग स्थल बनाए जाएंगे। प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिस की तैनाती होगी और जरूरत पड़ने पर वन-वे व्यवस्था भी लागू की जाएगी। वहीं, मेला परिसर में अस्थायी चिकित्सा शिविर स्थापित किए जाएंगे, जहां डॉक्टर और पैरामेडिकल कर्मी 24 घंटे उपलब्ध रहेंगे। आपात स्थिति से निपटने के लिए एंबुलेंस भी तैनात रहेंगी। बैठक में मंदिर समिति के सदस्यों को पहचान के लिए एक समान पगड़ी या विशेष पहचान चिह्न धारण करने के निर्देश दिए गए। एडीजी मनोज कौशिक ने कहा कि जगन्नाथपुर रथ मेला राज्य की आस्था का प्रमुख आयोजन है और सभी विभागों के समन्वय से श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने सभी तैयारियां समय पर पूरी करने और सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए।
रांची। रांची में भगवान जगन्नाथ की 335वीं रथयात्रा के आयोजन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार मेले में पार्किंग शुल्क को लेकर विशेष व्यवस्था की जा रही है ताकि श्रद्धालुओं से मनमानी वसूली पर रोक लगाई जा सके। जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में मंगलवार को समाहरणालय सभागार में आयोजित जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया कि पार्किंग संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी। चयनित एजेंसी केवल रांची नगर निगम द्वारा निर्धारित शुल्क ही वसूल सकेगी। साथ ही पार्किंग दरों का स्पष्ट प्रदर्शन डिस्प्ले बोर्ड पर करना अनिवार्य होगा। सुरक्षा और सुविधाओं पर रहेगा विशेष फोकस बैठक में रथयात्रा मेले को सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालुओं के अनुकूल बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। पूरे मेला क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए वॉच टावर बनाए जाएंगे तथा खोया-पाया केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था सुनिश्चित करने और फायर ब्रिगेड की तैनाती करने का निर्देश दिया गया है। मेले के दौरान निर्बाध बिजली आपूर्ति भी सुनिश्चित की जाएगी। शराब और प्लास्टिक पर रहेगा प्रतिबंध प्रशासन ने मेला क्षेत्र की परिधि से 500 मीटर के दायरे में शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मेला क्षेत्र में प्लास्टिक और सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग पर भी पूरी तरह रोक रहेगी। रथयात्रा मार्ग पर दुकानों को केवल निर्धारित क्षेत्र में ही लगाने की अनुमति दी जाएगी। पिछली शिकायतों के बाद लिया गया फैसला उल्लेखनीय है कि वर्तमान में दोपहिया वाहनों के लिए 10 रुपये और चारपहिया वाहनों के लिए 30 रुपये पार्किंग शुल्क निर्धारित है। हालांकि पिछले वर्ष कई स्थानों पर वाहन चालकों से 100 रुपये तक वसूले जाने की शिकायतें मिली थीं। इन्हीं शिकायतों को देखते हुए प्रशासन ने इस बार सख्त व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। रथयात्रा महोत्सव 16 जुलाई से शुरू होकर 25 जुलाई को घूरती रथयात्रा के साथ संपन्न होगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।