Regional Security

Qatari and Iranian officials meet in Tehran amid renewed diplomatic efforts to ease tensions between the United States and Iran.
Iran-US Tension: तनाव के बीच फिर शुरू हुई सुलह की कोशिश, तेहरान पहुंचा कतर का प्रतिनिधिमंडल

तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास एक बार फिर तेज हो गए हैं। हालिया सैन्य टकराव के बाद कतर ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए बातचीत बहाल कराने की पहल शुरू की है। इसी सिलसिले में कतर का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को तेहरान पहुंचा, जहां दोनों पक्षों के बीच रुकी हुई वार्ता को दोबारा शुरू कराने पर जोर दिया जा रहा है। कतर ने संभाली मध्यस्थ की भूमिका मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कतर के वार्ताकार तेहरान पहुंचे हैं ताकि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव को कम किया जा सके। यह पहल ऐसे समय में हुई है, जब हाल के दिनों में सैन्य गतिविधियों में कुछ नरमी देखने को मिली है और कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं फिर से बनती दिखाई दे रही हैं। अमेरिका की सहमति से शुरू हुई पहल रिपोर्ट के मुताबिक, कतर का यह प्रयास अमेरिका के साथ समन्वय में किया जा रहा है। मध्यस्थों का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच बढ़े अविश्वास को कम करना और संवाद की प्रक्रिया को फिर से शुरू करना है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि शुरुआती बातचीत सकारात्मक रहती है, तो आगे व्यापक वार्ता का रास्ता खुल सकता है। कैसे बढ़ा था अमेरिका-ईरान तनाव हालिया तनाव उस समय बढ़ा जब अमेरिका ने ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर हमलों में शामिल होने का आरोप लगाया। इसके बाद अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े कई सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की। जवाब में ईरान ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया। सैन्य तैयारी के साथ कूटनीति भी जारी अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वॉशिंगटन ने सैन्य विकल्प खुले रखे हैं, लेकिन फिलहाल उसकी प्राथमिकता कूटनीतिक समाधान तलाशना है। अमेरिकी प्रशासन सीमित सैन्य कार्रवाई के बाद तनाव को नियंत्रित रखते हुए बातचीत का अवसर बनाए रखना चाहता है। पुरानी वार्ता को फिर पटरी पर लाने की कोशिश कतर इससे पहले भी अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ताओं की मेजबानी कर चुका है। हालांकि हालिया सैन्य संघर्ष के बाद बातचीत की प्रक्रिया रुक गई थी। अब क्षेत्रीय देशों की कोशिश है कि दोनों पक्ष एक बार फिर बातचीत की मेज पर लौटें, ताकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम किया जा सके और किसी बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका को टाला जा सके। क्षेत्रीय स्थिरता पर टिकी नजरें विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कतर की मध्यस्थता और दोनों देशों की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि अमेरिका और ईरान के रिश्ते टकराव की दिशा में आगे बढ़ते हैं या फिर कूटनीति के जरिए समाधान का रास्ता निकलता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें तेहरान में चल रही इस नई पहल पर टिकी हैं।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
External Affairs Minister S. Jaishankar meets Bahrain's King Hamad bin Isa Al Khalifa in Manama to discuss India-Bahrain ties and regional security.
ईरान तनाव के बीच बहरीन पहुंचे एस. जयशंकर, शाह को दिया पीएम मोदी का संदेश; रणनीतिक साझेदारी पर हुई अहम चर्चा

मनामा: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को बहरीन की राजधानी मनामा में बहरीन के शाह हमद बिन ईसा अल खलीफा से मुलाकात कर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं एवं संदेश सौंपा। इस दौरान दोनों पक्षों ने भारत-बहरीन संबंधों को और मजबूत बनाने, क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की। जयशंकर की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब हाल के सप्ताहों में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के दौरान बहरीन भी मिसाइल और ड्रोन हमलों की चपेट में आया था। शाह हमद से मुलाकात, भारतीय समुदाय का जताया आभार विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्हें बहरीन के शाह हमद बिन ईसा अल खलीफा और युवराज एवं प्रधानमंत्री सलमान बिन हमद अल खलीफा से मुलाकात कर खुशी हुई। उन्होंने बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं पहुंचाईं और बहरीन में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा एवं कल्याण सुनिश्चित करने के लिए शाह का आभार व्यक्त किया। जयशंकर ने कहा कि भारत, बहरीन के नेतृत्व द्वारा दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को दिए जा रहे निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन को अत्यंत महत्व देता है। बहरीन के विदेश मंत्री से भी हुई अहम बैठक जयशंकर ने बहरीन के विदेश मंत्री डॉ. अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल जयानी से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। विदेश मंत्री ने बताया कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय सहयोग को नई गति देने के साथ-साथ पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। खाड़ी देशों के दौरे पर हैं जयशंकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर 5 से 10 जुलाई तक खाड़ी क्षेत्र के चार देशों के दौरे पर हैं। इस यात्रा में कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान शामिल हैं। इस दौरे का उद्देश्य भारत और खाड़ी देशों के बीच आर्थिक, ऊर्जा, निवेश, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करना है। कतर में भी हुई थी अहम बैठक बहरीन पहुंचने से पहले जयशंकर ने कतर का दौरा किया था, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल-थानी से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। क्यों अहम है यह दौरा? जयशंकर की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। हालिया संघर्ष के दौरान बहरीन पर ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले भी हुए थे। इसके अलावा कतर और ओमान अमेरिका-ईरान के बीच संभावित अप्रत्यक्ष वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे समय में भारत का खाड़ी देशों के साथ लगातार उच्चस्तरीय संवाद क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और भारतीय नागरिकों के हितों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगे का कार्यक्रम खाड़ी देशों का दौरा पूरा करने के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर 13 जुलाई को न्यूयॉर्क पहुंचेंगे, जहां वह 2028-29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत के अभियान की शुरुआत करेंगे। इसके बाद 14-15 जुलाई को वह ब्रसेल्स में आयोजित भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद की बैठक में भाग लेंगे।  

Deepshikha जुलाई 7, 2026 0
Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu speaking during a public address, warning that Israel is prepared to launch further military action against Iran if necessary.
ईरान को इजरायल की खुली चेतावनी, नेतन्याहू बोले- जरूरत पड़ी तो फिर करेंगे हमला

  यरुशलम: Benjamin Netanyahu ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इजरायल दोबारा सैन्य कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय तनाव को लेकर कूटनीतिक बातचीत जारी है। तुर्की की सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलु के अनुसार, एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल अपनी सुरक्षा के मामले में किसी अन्य देश पर निर्भर नहीं रहेगा और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने को तैयार है। 'जरूरत पड़ी तो तीसरी बार भी करेंगे कार्रवाई' नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ पहले की गई सैन्य कार्रवाइयों ने इजरायल को संभावित परमाणु खतरे से बचाया। उन्होंने कहा कि यदि इजरायल की सुरक्षा को फिर से खतरा महसूस हुआ, तो ईरान के खिलाफ एक और सैन्य अभियान शुरू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इजरायल अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में स्वतंत्र रूप से निर्णय लेगा और किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए तैयार रहेगा। अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच बढ़ा तनाव नेतन्याहू का बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और परमाणु मुद्दों पर सहमति बनाने के प्रयास जारी हैं। दोनों पक्ष संघर्षविराम को व्यापक राजनीतिक समझौते में बदलने की दिशा में बातचीत कर रहे हैं। इन वार्ताओं में क्षेत्रीय सुरक्षा, प्रतिबंधों में संभावित राहत और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं। इजरायल ने दोहराया अपना रुख इजरायल पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि वह ऐसे किसी भी समझौते से स्वयं को बाध्य नहीं मानेगा, जो उसकी दृष्टि में ईरान की सैन्य या परमाणु क्षमताओं को बढ़ावा देता हो। इजरायली नेतृत्व का कहना है कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और आवश्यकता पड़ने पर वह एकतरफा कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है। ट्रंप ने संयम बरतने की अपील की वहीं, Donald Trump ने सार्वजनिक रूप से सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि पश्चिम एशिया में दोबारा सैन्य तनाव बढ़ना किसी के हित में नहीं होगा और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
Mumbai Rain
मुंबई में मानसून का कहर: मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, लोकल ट्रेनें प्रभावित

मुंबई,एजेंसियां। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में बुधवार को हुई भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। लगातार हो रही बारिश के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे सड़क यातायात बाधित रहा और लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। अंधेरी सबवे में करीब पांच फीट पानी भर जाने के कारण प्रशासन को एहतियातन इसे यातायात के लिए बंद करना पड़ा।   लोकल ट्रेन सेवा पर पड़ा असर भारी बारिश का असर मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन सेवा पर भी देखने को मिला। वेस्टर्न, सेंट्रल और हार्बर लाइन की कई ट्रेनें देरी से चलीं। हार्बर लाइन पर ओवरहेड इलेक्ट्रिक (OHE) वायर में तकनीकी खराबी आने से कई लोकल ट्रेनें बीच रास्ते में ही रुक गईं। सुबह के व्यस्त समय में आई इस समस्या से हजारों यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी। रेलवे की तकनीकी टीम ने मौके पर पहुंचकर मरम्मत कार्य शुरू किया, जिसके बाद धीरे-धीरे सेवाएं सामान्य करने का प्रयास किया गया।   बालकनी गिरने से व्यक्ति की मौत दक्षिण मुंबई के बाबुलनाथ रोड स्थित MHADA की 'सूर्यप्रकाश' इमारत में मंगलवार देर रात तीसरी मंजिल की बालकनी का एक हिस्सा अचानक गिर गया। हादसे में 51 वर्षीय संतोष रामचंद्र भारस्कर गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद फायर ब्रिगेड, पुलिस, एम्बुलेंस और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची तथा सुरक्षा के मद्देनजर आवश्यक कदम उठाए गए।   कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। विभाग ने अगले चार से पांच दिनों तक भारी बारिश, तेज हवाओं और कुछ स्थानों पर बिजली गिरने की चेतावनी दी है। प्रशासन ने नागरिकों से अनावश्यक यात्रा से बचने, जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है। वहीं, रेलवे, नगर निगम और आपदा प्रबंधन विभाग को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट मोड पर रखा गया है।

abhishek singh जुलाई 1, 2026 0
Russian and Pakistani officials sign security cooperation agreements during SCO meeting in Bishkek, Kyrgyzstan.
भारत के दोस्त रूस ने पाकिस्तान के साथ किए दो अहम समझौते, SCO बैठक में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति

  नई दिल्ली/बिश्केक: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के दौरान रूस और पाकिस्तान ने सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों देशों ने अवैध प्रवासन पर नियंत्रण और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके अलावा क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और अफगानिस्तान की स्थिति जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। यह समझौते किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी और रूस के गृह मंत्री व्लादिमीर कोलोकोल्त्सेव के बीच हुई बैठक के दौरान हुए। मोहसिन नकवी एससीओ सदस्य देशों के गृह एवं सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए बिश्केक पहुंचे हैं। अवैध प्रवासन रोकने पर समझौता पाकिस्तान के गृह मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने अवैध प्रवासन की रोकथाम और इससे जुड़े मामलों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते के तहत दोनों देश अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध रूप से रह रहे नागरिकों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया में सहयोग करेंगे। ड्रग्स तस्करी के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई रूस और पाकिस्तान के बीच दूसरा समझौता मादक पदार्थों और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने से संबंधित है। दोनों देशों ने ड्रग्स नेटवर्क पर निगरानी बढ़ाने, खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान करने और अंतरराष्ट्रीय तस्करी से निपटने के लिए संयुक्त प्रयासों को मजबूत करने पर सहमति जताई। रूस-पाकिस्तान संबंधों में बढ़ती नजदीकी हाल के वर्षों में रूस और पाकिस्तान के संबंधों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। दोनों देश ऊर्जा, व्यापार और औद्योगिक सहयोग के क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ा रहे हैं। पाकिस्तान रूस से ऊर्जा आयात बढ़ाने की संभावनाओं पर भी काम कर रहा है। जुलाई 2025 में दोनों देशों ने कराची स्थित पाकिस्तान स्टील मिल को पुनर्जीवित करने के लिए एक समझौता किया था। यह परियोजना ऐतिहासिक महत्व रखती है क्योंकि इस स्टील मिल की स्थापना सोवियत संघ की सहायता से की गई थी। अफगानिस्तान और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा बैठक के दौरान अफगानिस्तान की सुरक्षा स्थिति, सीमा पार आतंकवाद और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। रूस और पाकिस्तान दोनों ने क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। मध्य एशियाई देशों के नेताओं से भी मिले नकवी एससीओ बैठक के दौरान पाकिस्तानी गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने ताजिकिस्तान, उजबेकिस्तान, किर्गिस्तान और कजाकिस्तान के गृह मंत्रियों के साथ भी अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में आतंकवाद, सीमा पार अपराध, संगठित अपराध और सुरक्षा सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। SCO मंच पर सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा बिश्केक में हुई बैठकों से संकेत मिलता है कि एससीओ सदस्य देश क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, अवैध प्रवासन और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे साझा खतरों से निपटने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने के पक्ष में हैं। रूस और पाकिस्तान के बीच हुए ये नए समझौते भी इसी व्यापक क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0