पश्चिम बंगाल के Asansol में विधानसभा चुनाव के बीच एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस की चुनावी सभा खत्म होने के तुरंत बाद एक बेकाबू बस भीड़ में घुस गई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इस घटना में एक मासूम बच्ची समेत करीब 12 लोग घायल हो गए, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभा खत्म होते ही हुआ हादसा घटना Railpar इलाके की है, जहां तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उम्मीदवार Malay Ghatak के समर्थन में एक बड़ी चुनावी सभा आयोजित की गई थी। सभा समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में लोग बाहर निकल रहे थे, तभी अचानक तेज रफ्तार से आ रही एक बस भीड़ की तरफ मुड़ गई और कई लोगों को कुचलते हुए आगे बढ़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और कुछ ही सेकंड में पूरा माहौल चीख-पुकार और भगदड़ में बदल गया। कैसे बेकाबू हुई बस? स्थानीय लोगों के अनुसार: बस चालक ने अचानक वाहन पर नियंत्रण खो दिया बस कब्रिस्तान की दीवार तोड़ते हुए सड़क किनारे जा घुसी इस दौरान कई दुकानों, ऑटो और टोटो को जोरदार टक्कर मारी बताया जा रहा है कि बस की रफ्तार काफी तेज थी, जिससे नुकसान और ज्यादा बढ़ गया। चालक पर लगे गंभीर आरोप हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा देखा गया। लोगों का आरोप है कि: बस पर “पश्चिम बंगाल पुलिस” लिखा हुआ था वाहन चला रहा व्यक्ति Central Industrial Security Force (CISF) का जवान था वह कथित तौर पर नशे की हालत में था हालांकि पुलिस ने अभी इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। चालक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया है और उससे पूछताछ जारी है। घायलों की हालत गंभीर इस हादसे में घायल हुए लोगों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। घायलों में एक 7 साल की बच्ची भी शामिल है कई लोगों की हालत नाजुक बताई जा रही है डॉक्टरों की टीम लगातार इलाज में जुटी है कुछ घायलों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों में रेफर करने की भी तैयारी की जा रही है। घटना के बाद बवाल और विरोध हादसे के बाद इलाके में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा: भीड़ ने बस में तोड़फोड़ की सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया कुछ समय के लिए स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई हालात को काबू में करने के लिए भारी संख्या में पुलिस और केंद्रीय बलों को मौके पर तैनात किया गया। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। मौके पर पहुंचे नेता, की शांति की अपील घटना की सूचना मिलते ही Malay Ghatak मौके पर पहुंचे और घायलों का हाल जाना। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और भरोसा दिलाया कि सभी घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराया जाएगा। जांच जारी, कई सवाल बरकरार पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि: हादसा महज लापरवाही का नतीजा था या इसके पीछे कोई साजिश थी साथ ही, यह भी जांच का विषय है कि बस किसकी थी और उसे उस समय वहां क्यों चलाया जा रहा था। चुनावी सुरक्षा पर उठे सवाल चुनावी माहौल के बीच हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतनी बड़ी सभा के बाद भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था में चूक साफ नजर आई, जो भविष्य के लिए एक चेतावनी है।
Jammu and Kashmir के Udhampur जिले में सोमवार को एक भीषण सड़क हादसा हो गया, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। रामनगर क्षेत्र के पास एक यात्री बस अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी, जिससे कम से कम 7 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा ऐसे समय हुआ जब बस दूरदराज के गांवों से यात्रियों को लेकर उधमपुर की ओर जा रही थी। पहाड़ी रास्तों और तेज रफ्तार के कारण यह दुर्घटना और भी घातक साबित हुई। कैसे हुआ दर्दनाक हादसा? प्रारंभिक जानकारी के अनुसार: बस रामनगर के कागोर्ट/कनोते गांव के पास से गुजर रही थी यह इलाका घुमावदार और संकरी पहाड़ी सड़कों के लिए जाना जाता है अचानक चालक का वाहन पर नियंत्रण बिगड़ गया बस फिसलते हुए सड़क से नीचे गहरी खाई में जा गिरी स्थानीय लोगों का कहना है कि बस तेज रफ्तार में थी, जिससे चालक के लिए नियंत्रण पाना मुश्किल हो गया। हादसे के बाद आसपास के ग्रामीण सबसे पहले मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया। मौत और घायलों की स्थिति इस दुर्घटना में: 7 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई कई यात्री घायल हुए, जिनमें कुछ की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है घायलों को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। गंभीर रूप से घायल लोगों को बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। तुरंत शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन और राहत एजेंसियां सक्रिय हो गईं: पुलिस, SDRF और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं खाई में गिरी बस से घायलों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया एंबुलेंस के जरिए घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया कई घायलों की हालत नाजुक होने के कारण उन्हें एयरलिफ्ट करने की तैयारी भी की जा रही है, ताकि समय रहते बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके। केंद्रीय मंत्री ने लिया हालात का जायजा केंद्रीय मंत्री और उधमपुर से सांसद Jitendra Singh ने हादसे पर गहरा दुख जताया। उन्होंने बताया कि: जिला प्रशासन से लगातार संपर्क में हैं राहत और बचाव कार्यों की निगरानी की जा रही है घायलों को हर संभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे। पहाड़ी इलाकों में बढ़ता हादसों का खतरा उधमपुर और रामनगर क्षेत्र की सड़कें लंबे समय से दुर्घटनाओं के लिए संवेदनशील मानी जाती हैं। यहां हादसों के पीछे कई कारण होते हैं: संकरी और घुमावदार सड़कें गहरी खाइयां और कमजोर सुरक्षा बैरियर ओवरस्पीडिंग और लापरवाही कई जगहों पर खराब सड़क स्थिति विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे इलाकों में वाहनों की गति पर सख्त नियंत्रण और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है। क्या कहते हैं स्थानीय लोग? स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार: इस सड़क पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं कई जगह रेलिंग या गार्ड नहीं लगे हैं लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मार्ग पर सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। प्रशासन की आगे की कार्रवाई प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। संभावित जांच बिंदु: बस की तकनीकी स्थिति चालक की लापरवाही या थकान सड़क की स्थिति और सुरक्षा इंतजाम जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
हेयरपिन मोड़ पर चालक का संतुलन बिगड़ा, हादसे में कई घायल तमिलनाडु के सेलम जिले में एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया। कोयंबटूर-सेलम राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक सरकारी बस के नियंत्रण खोने से हुए हादसे में केरल के 9 शिक्षकों की मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। कैसे हुआ हादसा? जानकारी के मुताबिक, यह हादसा उस समय हुआ जब बस 13वें हेयरपिन मोड़ पर मुड़ रही थी। इसी दौरान चालक अचानक नियंत्रण खो बैठा। अनियंत्रित बस पहले एक दोपहिया वाहन और फिर एक ऑटो रिक्शा से टकराई, जिसमें करीब 10 लोग सवार थे। टक्कर के बाद बस नीचे की ओर 9वें हेयरपिन मोड़ तक जा गिरी। बस में केरल के पेरिंथलमन्ना से आए 13 पर्यटक सवार थे, जो पेशे से शिक्षक थे। मृतकों और घायलों की स्थिति हादसे में 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल एक अन्य व्यक्ति ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। घायलों में बस चालक, 17-18 साल के दो युवक और दो महिलाएं शामिल हैं। सभी को तुरंत बचाव दल ने निकालकर पोलाची के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। राहत और बचाव कार्य तेज घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंच गईं। वरिष्ठ अधिकारियों ने खुद राहत और बचाव कार्य की निगरानी की। घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई। प्रधानमंत्री और नेताओं ने जताया दुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई। साथ ही घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी घटना पर दुख जताते हुए अधिकारियों को घायलों के बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस दुखद घटना पर शोक व्यक्त किया। स्कूल में फैला मातम इस हादसे के बाद केरल के मलप्पुरम स्थित पांग-पल्लिपरंबा गवर्नमेंट एलपी स्कूल में शोक की लहर है, जहां सभी मृतक शिक्षक कार्यरत थे। पूरे इलाके में मातम का माहौल बना हुआ है।
रांची। राजधानी रांची के रातू इलाके में एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जिसमें झारखंड पुलिस की महिला कांस्टेबल रंजीता एक्का की मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब वह हाईकोर्ट में ड्यूटी के लिए घर से निकली थीं। हादसे का विवरण जानकारी के अनुसार, रांची के रातू थाना क्षेत्र के हाजी चौक पर स्कूटी सवार रंजीता अचानक डिसबैलेंस होकर सड़क पर गिर गईं। इसी दौरान एक अज्ञात वाहन ने उन्हें कुचल दिया और चालक मौके से फरार हो गया। गंभीर चोट लगने के कारण उन्हें तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस और परिवार की प्रतिक्रिया रांची पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। रातू थाना प्रभारी आदिकान्त महतो ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और जल्द ही जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी। मृतक कांस्टेबल सिमडेगा जिला बल की थीं और वर्तमान में झारखंड हाईकोर्ट में डेपुटेशन पर तैनात थीं। पति की भी दुखद मौत सूत्रों के अनुसार, रंजीता के पति भी झारखंड पुलिस में थे और उनकी मौत भी एक सड़क हादसे में ही हो गई थी। पति की मृत्यु के बाद अनुकंपा के आधार पर रंजीता को पुलिस में कांस्टेबल का पद मिला था। अब रंजीता की मौत ने उनके परिवार पर एक बार फिर गहरा सदमा डाल दिया है। नतीजा रांची में इस दुखद घटना ने न केवल उनके परिवार को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि पुलिस विभाग को भी स्तब्ध कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि सड़क सुरक्षा और वाहन चालकों की जिम्मेदारी को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
आंध्र प्रदेश के मार्कापुरम के पास गुरुवार तड़के एक भयावह सड़क हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। यात्रियों से भरी एक निजी ट्रैवल बस और तेज रफ्तार ट्रक के बीच आमने-सामने की जोरदार टक्कर के बाद बस आग के गोले में तब्दील हो गई। इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 12 लोगों की जलकर मौत हो गई, जबकि करीब 20 यात्री घायल हो गए हैं। कैसे हुआ हादसा? प्राप्त जानकारी के अनुसार, बस तेलंगाना के जगित्याल/निर्मल इलाके से नेल्लोर की ओर जा रही थी। सुबह करीब 5:45 बजे, रेयावरम के पास एक तेज रफ्तार ट्रक से इसकी सीधी टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस में तुरंत आग लग गई, जिससे कई यात्री अंदर ही फंस गए और बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका। 20 यात्रियों ने बचाई जान हादसे के बाद बस में अफरा-तफरी मच गई। करीब 20 यात्रियों ने किसी तरह खिड़कियों और दरवाजों से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। सभी घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में जुट गईं। मुख्यमंत्री ने जताया शोक, जांच के आदेश एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने अधिकारियों से तत्काल स्थिति की जानकारी ली और घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के निर्देश दिए। साथ ही, हादसे के कारणों की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपने के आदेश भी दिए हैं। वहीं, राज्य के मंत्री नारा लोकेश ने भी घटना पर शोक जताते हुए कहा कि यात्रियों का इस तरह जलकर मौत का शिकार होना बेहद दुखद है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार मृतकों के परिजनों को हरसंभव सहायता प्रदान करेगी।
बोकारो के गोमिया में दर्दनाक हादसा बोकारो जिले के गोमिया क्षेत्र में एक ही ट्रैक्टर से जुड़े दो अलग-अलग सड़क हादसों में तीन युवकों की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया और लोगों ने सड़क जाम कर दिया। अवैध बालू लदा ट्रैक्टर बना मौत का कारण पहली घटना गोमिया थाना क्षेत्र के तुलबुल गांव के पास हुई। स्थानीय लोगों के मुताबिक, तेज रफ्तार में अवैध बालू लेकर जा रहा ट्रैक्टर ललपनिया की ओर बढ़ रहा था। इसी दौरान चंद्रकिशोर प्रसाद की बाइक ट्रैक्टर से टकरा गई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद चालक ट्रैक्टर लेकर फरार हो गया। भागते समय दूसरी बाइक को भी मारी टक्कर पहली घटना के बाद भाग रहे उसी ट्रैक्टर ने दूसरी दुर्घटना को भी जन्म दिया। ललपनिया थाना क्षेत्र में अचानक ट्रैक्टर के रुकने से पीछे आ रही पल्सर बाइक उसकी ट्रॉली से जा टकराई। इस बाइक पर सवार कृष्ण मुर्मू और उमेश किस्कू की भी मौके पर ही मौत हो गई। परिजनों का फूटा गुस्सा, सड़क जाम घटना के बाद मृतकों के परिजन और स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए। ललपनिया-गोमिया मार्ग पर शव रखकर सड़क जाम कर दिया गया। परिजन आरोपियों की गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि रात से ही सड़क जाम है, जिससे आवागमन प्रभावित हो गया है। पुलिस मौके पर, हालात पर नजर सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंच गई है और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। एक शव को पुलिस ने कब्जे में ले लिया है, जबकि अन्य शवों को उठाने से परिजन इनकार कर रहे हैं। अवैध बालू खनन पर फिर उठे सवाल इस घटना ने एक बार फिर अवैध बालू खनन और तेज रफ्तार वाहनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना नियंत्रण के चल रहे ऐसे ट्रैक्टर न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती हैं, बल्कि आम लोगों की जान के लिए भी खतरा बनते जा रहे हैं।
तेलंगाना में Hanamkonda जिले के हसनपर्थी इलाके में शनिवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में दो कॉलेज छात्रों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि तेज रफ्तार डंपर ने बाइक सवार छात्रों को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस के अनुसार यह हादसा हसनपर्थी क्षेत्र में स्थित बड़े चेरुवु (पेड्डा चेरुवु) के पास हुआ। मृतकों की पहचान सुप्रतीक और अकरम के रूप में हुई है, जो SSR डिग्री कॉलेज के छात्र बताए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक दोनों छात्र मोटरसाइकिल से कॉलेज जा रहे थे। इसी दौरान पीछे से आ रही तेज रफ्तार डंपर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों छात्र सड़क पर गिर पड़े और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जमा हो गए। कुछ समय के लिए सड़क पर यातायात भी प्रभावित रहा। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। हसनपर्थी पुलिस इंस्पेक्टर एम. राजेश ने बताया कि शुरुआती जांच में हादसे की वजह डंपर की तेज रफ्तार सामने आई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और फरार चालक की तलाश की जा रही है। पुलिस ने दोनों छात्रों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है और उनके परिवारों को घटना की सूचना दे दी गई है। इस हादसे की खबर से कॉलेज और स्थानीय समुदाय में शोक की लहर फैल गई है। साथियों और शिक्षकों ने दोनों छात्रों को मेहनती और उज्ज्वल भविष्य वाला बताया।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।