बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को अपनी महत्वाकांक्षी ‘समृद्धि यात्रा’ के तहत कैमूर और रोहतास जिलों के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे कई विकास योजनाओं का उद्घाटन करेंगे और चल रही परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लेंगे। कैमूर और रोहतास में कार्यक्रम तय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सुबह के समय कैमूर जिले पहुंचेंगे, जहां वे विभिन्न योजनाओं का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद दोपहर में उनका कार्यक्रम रोहतास जिले में निर्धारित है, जहां वे विकास कार्यों की समीक्षा के साथ नई परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे। जनता से सीधा संवाद करेंगे CM इस यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री दोनों जिलों में जनसभाओं को भी संबोधित करेंगे। इन सभाओं के माध्यम से वे आम लोगों से सीधा संवाद स्थापित करेंगे और सरकार की योजनाओं की जानकारी साझा करेंगे। विकास कार्यों की होगी समीक्षा ‘समृद्धि यात्रा’ का मुख्य उद्देश्य जिलों में चल रही योजनाओं की जमीनी स्थिति का आकलन करना है। नीतीश कुमार अधिकारियों के साथ बैठक कर परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे और जरूरी दिशा-निर्देश देंगे। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर दोनों जिलों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने पहले से ही सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके। जिलों को मिलेंगी नई योजनाओं की सौगात इस दौरे के दौरान कैमूर और रोहतास जिले को कई नई विकास योजनाओं की सौगात मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र के बुनियादी ढांचे और जनसुविधाओं में सुधार आने की संभावना जताई जा रही है।
जनसंवाद के साथ विकास परियोजनाओं की समीक्षा, कई योजनाओं का होगा लोकार्पण और शिलान्यास बिहार में विकास कार्यों को रफ्तार देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ जारी है। इस यात्रा के चौथे चरण के दूसरे दिन बुधवार को मुख्यमंत्री जमुई और नवादा जिले का दौरा करेंगे। इस दौरान वे दोनों जिलों में सैकड़ों करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। जमुई को 914 करोड़ की 370 परियोजनाओं की सौगात मुख्यमंत्री का मुख्य कार्यक्रम जमुई जिले में होगा, जहां वे कुल 914 करोड़ रुपये की 370 विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। इनमें 602 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 181 परियोजनाओं का लोकार्पण किया जाएगा, जबकि 312 करोड़ रुपये की 189 नई योजनाओं का शिलान्यास होगा। इससे जिले में आधारभूत संरचना और जनसुविधाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है। सिकंदरा में जनसंवाद, विकास कार्यों की समीक्षा जमुई के सिकंदरा में मुख्यमंत्री का जनसंवाद कार्यक्रम प्रस्तावित है। यहां वे स्थानीय लोगों से सीधे संवाद करेंगे और क्षेत्र में चल रही योजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे। इसके साथ ही नवादा जिले में भी वे विभिन्न विकास परियोजनाओं का जायजा लेंगे और नई योजनाओं की घोषणा करेंगे। पहले दिन भागलपुर और बांका को मिली सौगात ‘समृद्धि यात्रा’ के चौथे चरण की शुरुआत मंगलवार से हुई थी। पहले दिन मुख्यमंत्री ने भागलपुर और बांका जिले का दौरा किया। इस दौरान भागलपुर में 441.32 करोड़ रुपये की 144 परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया, जबकि बांका में करीब 708 करोड़ रुपये की 497 योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ। 20 मार्च तक तय कार्यक्रम, बढ़ सकती है अवधि आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार ‘समृद्धि यात्रा’ का यह चरण 20 मार्च तक चलना है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक इस यात्रा की अवधि बढ़ाकर 30 मार्च तक किए जाने की संभावना है। इससे राज्य के अन्य जिलों में भी विकास योजनाओं की समीक्षा और घोषणाएं की जा सकती हैं। आगे की राजनीतिक हलचल पर नजर सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अप्रैल के दूसरे सप्ताह में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं। वहीं 14 अप्रैल के बाद राज्य में नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण की भी चर्चा तेज हो गई है, जिससे बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ सकती है। विकास और संवाद पर फोकस ‘समृद्धि यात्रा’ के जरिए मुख्यमंत्री का जोर विकास कार्यों को जमीन पर उतारने और आम जनता से सीधा संवाद स्थापित करने पर है। इस पहल से राज्य के विभिन्न जिलों में चल रही योजनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
बिहार की राजनीति में उस समय चर्चाएं तेज हो गईं जब मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने समृद्धि यात्रा के दौरान मंच पर उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary की पीठ थपथपाते हुए राज्य के विकास की बात कही। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर कोई संकेत दिया गया है। पूर्णिया और कटिहार में समृद्धि यात्रा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुरुवार को अपनी समृद्धि यात्रा के तहत Purnia और Katihar पहुंचे। यहां आयोजित सभाओं में उन्होंने बिहार के विकास के लिए आने वाले पांच वर्षों का रोडमैप जनता के सामने रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और खेल जैसे क्षेत्रों में बड़े बदलाव की योजना बना रही है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से बिहार में विकास की रफ्तार और तेज होगी। हर प्रखंड में आदर्श स्कूल और डिग्री कॉलेज शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार हर प्रखंड में आदर्श स्कूल और डिग्री कॉलेज खोलने की योजना पर काम कर रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को अपने इलाके में ही उच्च शिक्षा की बेहतर सुविधा मिल सकेगी। अस्पतालों को बनाया जाएगा विशेष अस्पताल स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रखंड स्तर के अस्पतालों को विशेष अस्पताल के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही ग्रामीण सड़कों को दो लेन में बदलने की योजना भी बनाई गई है, ताकि गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर हो सके। पटना में बनेगी आधुनिक स्पोर्ट्स सिटी राजधानी Patna में एक आधुनिक स्पोर्ट्स सिटी बनाने की योजना भी सामने रखी गई है। इसके जरिए खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं दी जाएंगी। सरकार खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने की योजना पर भी काम कर रही है, ताकि खेलों को बढ़ावा मिल सके। मखाना किसानों के लिए विशेष योजना मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि Makhana उत्पादन से जुड़े किसानों की आय बढ़ाने के लिए विशेष योजनाएं तैयार की जा रही हैं। इससे मिथिलांचल क्षेत्र के किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। मंच पर भावुक हुईं मंत्री लेशी सिंह कटिहार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंत्री Leshi Singh अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए भावुक हो गईं और मंच पर ही रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कठिन समय में उनका साथ दिया और राजनीति में आगे बढ़ने का अवसर दिया। सम्राट चौधरी को लेकर बढ़ी चर्चा कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंच पर मौजूद उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पीठ थपथपाकर भरोसा जताया कि राज्य में विकास कार्य इसी तरह आगे बढ़ते रहेंगे। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई कि क्या यह भविष्य के नेतृत्व को लेकर कोई संकेत है।
बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar शुक्रवार को अपनी समृद्धि यात्रा के तहत Khagaria और Saharsa जिले का दौरा करेंगे। इस दौरान खगड़िया जिले को करीब 304 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का तोहफा मिलेगा। मुख्यमंत्री यहां विभिन्न योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे तथा जनसंवाद कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे। संसारपुर मैदान में होगा मुख्य कार्यक्रम खगड़िया में कार्यक्रम का आयोजन संसारपुर खेल मैदान में किया गया है। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर भव्य पंडाल बनाए गए हैं और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन की ओर से पूरे इलाके में चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी जा रही है। 300 करोड़ से ज्यादा की योजनाओं का उद्घाटन-शिलान्यास जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री खगड़िया में 43 करोड़ रुपये की लागत से 35 योजनाओं का शिलान्यास करेंगे। 261 करोड़ रुपये की लागत से 284 योजनाओं का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही जिले में चल रही विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे। इस कार्यक्रम में दोनों उपमुख्यमंत्री और कई मंत्री भी मौजूद रह सकते हैं। सहरसा में भी विकास योजनाओं का तोहफा मुख्यमंत्री इसके बाद सहरसा पहुंचेंगे, जहां 90 करोड़ रुपये की लागत से 20 योजनाओं का शिलान्यास 286 करोड़ रुपये की लागत से 70 योजनाओं का उद्घाटन 136 करोड़ रुपये की लागत से 35 योजनाओं का कार्यारंभ किया जाएगा। रेलवे ओवरब्रिज का कर सकते हैं निरीक्षण समृद्धि यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री बूढ़ी गंडक नदी पर बन रहे खगड़िया-बख्तियारपुर बाइपास मार्ग के रेलवे ओवरब्रिज का निरीक्षण भी कर सकते हैं। यह परियोजना खगड़िया समेत आसपास के जिलों के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके बन जाने से क्षेत्र में जाम की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। पहले पूर्णिया और कटिहार को मिला था बड़ा तोहफा इससे पहले गुरुवार को मुख्यमंत्री Purnia और Katihar पहुंचे थे, जहां उन्होंने दोनों जिलों को मिलाकर करीब 895 करोड़ रुपये की योजनाओं का तोहफा दिया था। कार्यक्रम के दौरान मंत्री Leshi Singh ने मुख्यमंत्री की सराहना करते हुए कहा था कि उन्होंने एक अभिभावक की तरह हर कठिन समय में उनका साथ दिया और राजनीति में आगे बढ़ने का मौका दिया।
बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar की ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान Purnia में एक बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला। जनसभा को संबोधित करते हुए बिहार सरकार की मंत्री Leshi Singh मंच पर ही भावुक हो गईं और भाषण देते-देते उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। मुश्किल समय में ढाल बने नीतीश कुमार अपने संबोधन में लेसी सिंह ने कहा कि उनके जीवन के कठिन दौर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक अभिभावक की तरह उनके साथ खड़े रहे। उन्होंने भावुक स्वर में कहा, “मुझ जैसी साधारण महिला को राजनीति में आगे बढ़ाने का श्रेय नीतीश कुमार जी को जाता है। जब मेरे परिवार पर मुश्किलें आईं, तब वे ‘कृष्ण’ की तरह ढाल बनकर खड़े रहे और हर संकट से बाहर निकाला।” महिलाओं को आगे बढ़ाने का श्रेय मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ने बिहार की आधी आबादी यानी महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आज बिहार की बेटियां और महिलाएं जो सम्मान और अवसर पा रही हैं, वह मुख्यमंत्री के विजन का परिणाम है। पूर्णिया को मिली 500 करोड़ की योजनाएं कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने मत्स्य एवं पशुपालन विभाग की करीब 500 करोड़ रुपये की लागत वाली 200 योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। पूर्ववर्ती सरकार पर भी साधा निशाना अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए पूर्व की सरकारों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2005 से पहले बिहार की स्थिति काफी खराब थी, लोग शाम के बाद घर से निकलने में डरते थे और विकास के नाम पर बहुत कम काम हुआ था। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने बिहार को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाया है और अब राज्य में कानून का राज स्थापित हुआ है।
बिहार में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार जल्द ही 45 हजार नए शिक्षकों की भर्ती करने जा रही है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने यह घोषणा बुधवार को अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान अररिया दौरे में की। उन्होंने कहा कि इस बहाली से राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होगी और पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार आएगा। बिहार में बढ़ी शिक्षकों की संख्या मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में लगातार काम किया है। पहले राज्य के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी थी, जिसे दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर बहाली की प्रक्रिया शुरू की गई। उन्होंने बताया कि पहले नियोजित शिक्षकों की नियुक्ति की गई और बाद में Bihar Public Service Commission के माध्यम से भी शिक्षकों की भर्ती की गई। इन प्रयासों के चलते आज बिहार में सरकारी शिक्षकों की संख्या बढ़कर 5 लाख 24 हजार से अधिक हो चुकी है। अब इसी क्रम में 45 हजार और शिक्षकों की बहाली की जाएगी। बालिका शिक्षा पर सरकार का विशेष ज़ोर मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2006 से ही सरकार ने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू कीं। छात्राओं को साइकिल और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, जिसका सकारात्मक असर देखने को मिला। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के कारण स्कूलों में लड़कियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। लालू-राबड़ी शासन पर साधा निशाना इस दौरान मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 24 नवंबर 2005 से पहले राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब थी और लोग शाम के बाद घर से निकलने से डरते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी कमज़ोर थी। सड़कों के कारण कम हुआ सफर का समय मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने राज्य में सड़कों और पुल-पुलियों का बड़े पैमाने पर निर्माण कराया है। इसका परिणाम यह हुआ कि अब राज्य के अधिकांश जिलों से पटना पहुंचना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। पहले जहां कई जिलों से राजधानी पहुंचने में छह घंटे या उससे अधिक समय लगता था, वहीं अब दूरदराज के जिलों से भी करीब पांच घंटे में पटना पहुंचा जा सकता है। महिलाओं के सशक्तिकरण पर भी फोकस मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए भी सरकार ने कई योजनाएं लागू की हैं। वर्ष 2015 में शुरू की गई Saat Nischay Yojana को बिहार के विकास की बड़ी पहल माना गया। इसके विस्तार के रूप में वर्ष 2020 में इसका दूसरा चरण Saat Nischay Yojana Phase-2 लागू किया गया। अब ‘सात निश्चय-3’ के तहत भी कई विकास कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य शिक्षा, आधारभूत संरचना और महिलाओं के सशक्तिकरण के जरिए बिहार के समग्र विकास को गति देना है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को अपनी समृद्धि यात्रा के तहत अररिया जिले का दौरा करेंगे। इस दौरान वे करीब 545 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन और कार्यारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा जिले में पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा और डेयरी क्षेत्र के विकास को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। सुबह 10 बजे से शुरू होगा कार्यक्रम मुख्यमंत्री का कार्यक्रम सुबह करीब 10 बजे न्यू पुलिस लाइन (हरियाबाड़ा) से शुरू होगा। यहां वे लगभग 54 करोड़ रुपये की लागत से बने अत्याधुनिक पुलिस लाइन भवन का उद्घाटन करेंगे। करीब 35 एकड़ क्षेत्र में फैले इस परिसर में प्रशासनिक भवन, प्रशिक्षण केंद्र, अस्पताल, स्कूल, महिला और पुरुष बैरक, पारिवारिक आवास, अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आवास तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के लिए भी आवासीय सुविधा विकसित की गई है। परिसर में मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर के लिए हेलीपैड भी बनाया गया है। इससे जिले की कानून-व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलेगी। ANM-GNM नर्सिंग संस्थान का करेंगे उद्घाटन इसके बाद मुख्यमंत्री सड़क मार्ग से अररिया आरएस पहुंचेंगे, जहां वे 29.6 करोड़ रुपये की लागत से बने ANM-GNM प्रशिक्षण संस्थान (नर्सिंग कॉलेज) का उद्घाटन करेंगे। इस संस्थान का शिलान्यास वर्ष 2017 में किया गया था और अब इसका निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। यहां हर साल करीब 200 छात्र-छात्राओं को नर्सिंग प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे स्थानीय युवाओं को स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार और करियर के नए अवसर मिलेंगे। अररिया कॉलेज स्टेडियम में समीक्षा बैठक दौरे के दौरान मुख्यमंत्री अररिया कॉलेज स्टेडियम में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी करेंगे। इसके साथ ही वे जनसंवाद कार्यक्रम को संबोधित करेंगे और विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए विकास योजनाओं के स्टॉलों का निरीक्षण भी करेंगे। 545 करोड़ की योजनाओं का होगा शुभारंभ मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान कुल 545 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं की शुरुआत की जाएगी। इसमें 330.60 करोड़ रुपये की 6 योजनाओं का शिलान्यास 157.16 करोड़ रुपये की 60 योजनाओं का उद्घाटन 58.12 करोड़ रुपये की 2 योजनाओं का कार्यारंभ शामिल है। इन योजनाओं में अररिया आरएस स्थित मिल्क चिलिंग प्लांट के नवीकरण की महत्वपूर्ण परियोजना भी शामिल है। वर्तमान में इस प्लांट की क्षमता 21 हजार लीटर प्रतिदिन है, जिसे बढ़ाकर 50 हजार लीटर प्रतिदिन किया जाएगा। इससे लगभग 350 सहकारी समितियों से दूध संग्रह की व्यवस्था और मजबूत होगी तथा डेयरी से जुड़े किसानों और पशुपालकों को सीधा लाभ मिलेगा। दोपहर 1:30 बजे किशनगंज के लिए होंगे रवाना मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं की पूरी तैयारी कर ली है। प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई है और कार्यक्रम स्थलों पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री दोपहर करीब 1:30 बजे बाजार समिति हेलीपैड से हेलीकॉप्टर के माध्यम से किशनगंज के लिए रवाना होंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा अररिया जिले में विकास योजनाओं को गति देने के साथ-साथ रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देने वाला माना जा रहा है।
सुपौल: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को सुपौल जिले के निर्मली से समृद्धि यात्रा के तीसरे चरण की शुरुआत करेंगे। इस दौरान वह जिले को 569.36 करोड़ रुपये की 213 विकास योजनाओं की सौगात देंगे। कार्यक्रम को लेकर प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सुबह 10:45 बजे निर्मली पहुंचे मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा नामांकन के बाद पहली बार किसी बड़े कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वह सुबह 10:45 बजे हेलीकॉप्टर से निर्मली अनुमंडल कार्यालय परिसर स्थित हेलीपैड पर पहुंचे। इसके बाद वह निर्मली स्थित रिंग बांध के जीर्णोद्धार कार्य का निरीक्षण करेंगे और अनुमंडल कार्यालय परिसर में लगाए गए विभिन्न विभागों के स्टॉल का अवलोकन करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री विभिन्न हितधारकों और स्थानीय लोगों से भी बातचीत करेंगे। 213 योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास मुख्यमंत्री जिले के विकास से जुड़ी कुल 569.3677 करोड़ रुपये की 213 योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इनमें 434.469 करोड़ रुपये की 84 योजनाओं का शिलान्यास और 134.8987 करोड़ रुपये की 129 योजनाओं का उद्घाटन शामिल है। इसके बाद वह निर्मली अनुमंडल सभागार में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक करेंगे और आम लोगों से जनसंवाद भी करेंगे। दोपहर में मधेपुरा के लिए होंगे रवाना निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री दोपहर 1:22 बजे हेलीकॉप्टर से मधेपुरा के लिए रवाना होंगे। इस तरह सुबह 10:45 बजे से दोपहर 1:22 बजे तक वह करीब दो घंटे 37 मिनट निर्मली में रहेंगे। कार्यक्रम को लेकर प्रशासन अलर्ट मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर सोमवार को निर्मली में डीएम सावन कुमार और एसपी शरथ आरएस की संयुक्त अध्यक्षता में अधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में कार्यक्रम को सुरक्षित और सफल तरीके से संपन्न कराने के लिए विस्तृत चर्चा की गई। डीएम ने अधिकारियों को रूट चार्ट, आगमन-प्रस्थान व्यवस्था, सभा स्थल की तैयारी, यातायात नियंत्रण, वीआईपी मूवमेंट और प्रशासनिक समन्वय से जुड़े सभी बिंदुओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था के सख्त निर्देश एसपी शरथ आरएस ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि कार्यक्रम स्थल, हेलीपैड और रूट लाइन पर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद रखी जाए। भीड़ नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन और वीआईपी सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। सभी अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि कार्यक्रम से पहले स्थल का निरीक्षण कर तैयारियों की समीक्षा करें और किसी भी कमी को तुरंत दूर करें, ताकि समृद्धि यात्रा का कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हो सके।
बिहार की राजनीति में मंगलवार से हलचल और तेज होने वाली है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज (10 मार्च) से अपनी बहुचर्चित ‘समृद्धि यात्रा’ की शुरुआत करने जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर राज्यसभा चुनाव को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी अपनी पार्टी के विधायकों के साथ अहम बैठक कर रणनीति तय करेंगे। सुपौल के निर्मली से शुरू होगी समृद्धि यात्रा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ का आगाज सुपौल जिले के निर्मली से होगा। इस दौरान सीएम विभिन्न विकास परियोजनाओं का निरीक्षण करेंगे और अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी करेंगे। जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री निर्मली में बन रहे रिंग बांध का निरीक्षण करेंगे। इसके अलावा सरकारी योजनाओं से जुड़े स्टॉलों का अवलोकन भी करेंगे। कार्यक्रम के दौरान वे कई नई योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करने वाले हैं। जनसभा को भी करेंगे संबोधित यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री दोपहर में एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। इस मौके पर वे क्षेत्र के विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देंगे। माना जा रहा है कि इस यात्रा के जरिए सरकार जमीनी स्तर पर चल रहे विकास कार्यों का आकलन करना चाहती है। राज्यसभा चुनाव को लेकर तेजस्वी की बैठक उधर, राज्यसभा चुनाव को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्यसभा की पांचवीं सीट को लेकर सियासी समीकरण बन रहे हैं। इसी को देखते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव आज अपनी पार्टी के विधायकों के साथ बैठक करेंगे। बताया जा रहा है कि इस बैठक में चुनावी रणनीति, वोट मैनेजमेंट और आगे की राजनीतिक योजना पर चर्चा की जाएगी। जनता से संवाद की तैयारी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जाने का फैसला कर चुके हैं। ऐसे में बिहार की सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने से पहले वे ‘समृद्धि यात्रा’ के जरिए एक बार फिर जनता से सीधा संवाद स्थापित करना चाहते हैं। इस यात्रा के दौरान वे राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा कर विकास योजनाओं की प्रगति का जायजा लेंगे और स्थानीय लोगों की समस्याओं को भी सुनेंगे।
बिहार दौरे पर फिर निकलेंगे मुख्यमंत्री बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar राज्यसभा जाने से पहले एक बार फिर जनता के बीच पहुंचने की तैयारी में हैं। वे जल्द ही अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ का अगला चरण शुरू करेंगे, जिसके तहत राज्य के कई जिलों का दौरा कर विकास योजनाओं की समीक्षा करेंगे और लोगों से संवाद करेंगे। सूत्रों के मुताबिक यात्रा का अगला चरण कटिहार जिले से शुरू होगा, जहां मुख्यमंत्री विभिन्न सरकारी योजनाओं का जायजा लेंगे और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देंगे। विकास योजनाओं का करेंगे निरीक्षण इस यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री कई प्रमुख योजनाओं की प्रगति का स्थल निरीक्षण करेंगे। इनमें विशेष रूप से राज्य सरकार की प्रगति यात्रा और सात निश्चय योजना से जुड़ी परियोजनाओं की समीक्षा शामिल होगी। इसके साथ ही जिले में चल रही अन्य महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का भी जायजा लिया जाएगा, ताकि उनके क्रियान्वयन की स्थिति का आकलन किया जा सके। राज्यसभा के लिए दाखिल कर चुके हैं नामांकन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में राज्यसभा जाने का फैसला लिया है। उन्होंने 5 मार्च को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी वे बिहार के विकास के लिए काम करते रहेंगे और नई सरकार को पूरा सहयोग देंगे। समृद्धि यात्रा को भी इसी संकल्प का हिस्सा माना जा रहा है। जनता को धन्यवाद देने का प्रयास राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा मुख्यमंत्री के लिए जनता से सीधा संवाद करने और उन्हें धन्यवाद देने का अवसर भी होगी। लंबे समय तक राज्य की कमान संभालने के बाद वे इस यात्रा के माध्यम से लोगों से जुड़ाव बनाए रखना चाहते हैं। राजनीति में सक्रिय हुए बेटे निशांत कुमार इसी बीच मुख्यमंत्री के बेटे Nishant Kumar ने भी राजनीति में औपचारिक रूप से कदम रख दिया है। उन्होंने हाल ही में Janata Dal (United) की सदस्यता ग्रहण की है। पार्टी सूत्रों के अनुसार निशांत कुमार भी जल्द एक जनसंपर्क यात्रा शुरू कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि उनकी यात्रा चंपारण क्षेत्र से शुरू हो सकती है। बिहार की राजनीति में बढ़ी हलचल नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले और उनके बेटे के राजनीति में आने के बाद बिहार की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल रही है। ऐसे में समृद्धि यात्रा को राजनीतिक दृष्टि से भी काफी अहम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह यात्रा राज्य के राजनीतिक माहौल और आगामी रणनीतियों को भी प्रभावित कर सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।