मुंबई, एजेंसियां। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को घरेलू शेयर बाजार ने मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। निवेशकों की जोरदार खरीदारी के दम पर बीएसई सेंसेक्स 521 अंक चढ़कर 78,285 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 160 अंक की बढ़त के साथ 24,430 पर पहुंच गया। लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बाजार में तेजी देखने को मिली, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। दिनभर के कारोबार के दौरान ऑटो, मेटल, रियल्टी और कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर के शेयरों में सबसे अधिक खरीदारी दर्ज की गई। इन सेक्टरों में सकारात्मक रुझान के चलते प्रमुख सूचकांकों को मजबूत समर्थन मिला। बाजार में व्यापक खरीदारी के कारण अधिकांश सेक्टर हरे निशान में बंद हुए और निवेशकों की संपत्ति में भी इजाफा हुआ। विश्लेषकों के अनुसार विश्लेषकों के अनुसार, घरेलू आर्थिक संकेतकों की मजबूती, वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और चुनिंदा सेक्टरों में बेहतर निवेशकों की दिलचस्पी ने बाजार को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई। विशेष रूप से मेटल और ऑटो कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिली, जबकि रियल्टी और कंज्यूमर ड्यूरेबल कंपनियों के शेयरों ने भी बेहतर प्रदर्शन किया। इससे पहले शुक्रवार, 3 जुलाई को भी बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ था। उस दिन सेंसेक्स 261 अंक चढ़कर 77,764 पर और निफ्टी 95 अंक की तेजी के साथ 24,270 पर बंद हुआ था। सोमवार की तेजी के साथ दोनों प्रमुख सूचकांक पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में और मजबूत स्तर पर पहुंच गए। बाजार विशेषज्ञों का मानना बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक संकेत अनुकूल बने रहते हैं और घरेलू स्तर पर निवेशकों का भरोसा कायम रहता है, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है। हालांकि निवेशकों को उतार-चढ़ाव वाले माहौल में सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
मुंबई, एजेंसियां। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने जोरदार शुरुआत की। ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनाव कम होने की खबर के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा और इसका असर घरेलू बाजार पर साफ दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 1000 अंकों से अधिक की तेजी के साथ खुला, जबकि एनएसई निफ्टी 330 अंकों से ज्यादा चढ़कर कारोबार करता नजर आया। विदेशी मुद्रा बाजार में भी सकारात्मक माहौल रहा और रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 53 पैसे मजबूत होकर खुला। इन शेयरों में दिखी सबसे ज्यादा तेजी सेंसेक्स में सूचीबद्ध कंपनियों में इंडिगो, इटरनल, बजाज फाइनेंस और एशियन पेंट्स के शेयरों में सबसे अधिक तेजी दर्ज की गई। वहीं, निफ्टी में श्रीराम फाइनेंस, इंडिगो, इटरनल, बजाज फाइनेंस और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल (TMPV) के शेयर प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे। बाजार में खरीदारी का माहौल बनने से अधिकांश सेक्टर हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। एशियाई बाजारों में भी लौटी मजबूती अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा के बाद एशियाई बाजारों में भी शानदार तेजी देखने को मिली। जापान का निक्केई सूचकांक चार प्रतिशत से अधिक चढ़कर नई ऊंचाई पर पहुंच गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी भी 4.3 प्रतिशत मजबूत हुआ, जबकि ऑस्ट्रेलिया का ASX200 भी अच्छी बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। वैश्विक निवेशकों ने इस घटनाक्रम को सकारात्मक संकेत के रूप में लिया। कच्चे तेल की कीमतों में राहत वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड की कीमत 3.45 डॉलर घटकर 83.88 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 3.95 डॉलर टूटकर 80.93 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल की कीमतों में नरमी से भारत जैसे आयातक देशों को राहत मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गिरावट जारी रहती है तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह सामान्य होने में अभी कुछ समय लग सकता है।
मुंबई, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को शानदार तेजी देखने को मिली। वैश्विक तनाव कम होने की उम्मीद और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने बाजार को मजबूती दी। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1,073.61 अंकों की बड़ी छलांग लगाकर 76,488.96 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 312.41 अंक चढ़कर 24,031.70 पर पहुंच गया और 24,000 का अहम स्तर पार करने में सफल रहा। बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों ने संभाली कमान बाजार की इस शानदार रिकवरी में बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के शेयर सबसे आगे रहे। HDFC Bank और Bajaj Finance के शेयरों में करीब 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा ऑटो और वित्तीय कंपनियों में भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। कच्चे तेल में गिरावट से बाजार को राहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीदों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है। तेल सस्ता होने से भारत जैसे आयातक देशों को राहत मिलती है, जिससे बाजार का सेंटीमेंट मजबूत हुआ। निवेशकों को उम्मीद है कि इससे महंगाई और आयात लागत पर दबाव कम हो सकता है। रुपया भी मजबूत, निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें शेयर बाजार में तेजी के साथ भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ। रुपया 35 पैसे की बढ़त के साथ 95.25 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। बाजार जानकारों का कहना है कि यदि वैश्विक हालात स्थिर रहते हैं और विदेशी निवेश बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में बाजार में और मजबूती देखने को मिल सकती है।
मुंबई, एजेंसियां। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को घरेलू शेयर बाजार ने शानदार शुरुआत की। वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेत और कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के चलते निवेशकों का सेंटीमेंट मजबूत हुआ, जिसका असर भारतीय बाजार में भी देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 863 अंक से ज्यादा की तेजी के साथ 76,278 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं एनएसई निफ्टी 256 अंकों की बढ़त लेकर 23,975 के करीब कारोबार करता दिखा। कुछ समय बाद सेंसेक्स 900 अंक तक उछल गया, जबकि निफ्टी भी 24 हजार के करीब पहुंच गया। ऑटो और बैंकिंग सेक्टर में खरीदारी बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों में देखने को मिली। महिंद्रा एंड महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, लार्सन एंड टुब्रो और इंटरग्लोब एविएशन जैसे शेयरों में मजबूत तेजी दर्ज की गई। वहीं टीसीएस और सन फार्मा के शेयरों में हल्की कमजोरी देखने को मिली। कच्चे तेल में गिरावट बनी बड़ी वजह विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट है। ब्रेंट क्रूड करीब 5.5 प्रतिशत टूटकर 97 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया। हाल के दिनों में यह 100-105 डॉलर के स्तर पर बना हुआ था। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की खबरों से तेल बाजार में नरमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल के दाम घटने से भारत को बड़ा फायदा हो सकता है। इससे महंगाई का दबाव कम होगा, आयात लागत घटेगी और कंपनियों के मुनाफे में सुधार होगा। वैश्विक बाजारों का भी मिला समर्थन एशियाई बाजारों में भी मजबूती देखने को मिली। जापान का निक्केई इंडेक्स 3 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा, जबकि ऑस्ट्रेलिया और चीन के बाजार भी बढ़त में रहे। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका-ईरान वार्ता सफल रहती है और कच्चे तेल की कीमतें नीचे बनी रहती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में आगे भी तेजी जारी रह सकती है।
मुंबई, एजेंसियां। मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की। BSE Sensex में शुरुआती कारोबार के दौरान 400 अंकों से अधिक की तेजी दर्ज की गई, जबकि Nifty 50 24,450 के अहम स्तर को पार कर गया। सेंसेक्स 445.82 अंक चढ़कर 78,966.12 पर पहुंचा, वहीं निफ्टी 121.15 अंक बढ़कर 24,486 पर कारोबार करता नजर आया। बैंकिंग और इंफ्रा शेयरों में खरीदारी बाजार की इस तेजी में बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के शेयरों का अहम योगदान रहा। Adani Ports और ICICI Bank के शेयरों में करीब 2% तक की बढ़त देखी गई। इसके अलावा एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, इंटरग्लोब एविएशन और एनटीपीसी भी लाभ में रहे। हालांकि, आईटी और सीमेंट सेक्टर में दबाव बना रहा, जहां Infosys और Tata Consultancy Services जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक संकेतों से मिला सहारा बाजार में इस तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारकों की बड़ी भूमिका रही। अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता की खबरों से निवेशकों में सकारात्मक भावना बनी है। साथ ही Brent Crude Oil की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने से भी बाजार को मजबूती मिली है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड करीब 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। रुपये में कमजोरी, लेकिन बाजार मजबूत इस बीच भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 16 पैसे कमजोर होकर 93.32 पर आ गया। हालांकि विदेशी निवेश और घरेलू बाजार की मजबूती ने निवेशकों का भरोसा बनाए रखा है। विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार फिलहाल वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर है और आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
मुंबई, एजेंसियां। हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को भारतीय शेयर बाजार ने दमदार वापसी की। महावीर जयंती के कारण मंगलवार को बाजार बंद रहने के बाद आज निवेशकों ने मजबूती के साथ कारोबार शुरू किया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 1,899.53 अंक चढ़कर 73,847.08 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 572.55 अंक की उछाल के साथ 22,903.95 पर कारोबार करता दिखा। वहीं, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 15 पैसे मजबूत होकर 94.70 पर पहुंच गया। बाजार में तेजी की बड़ी वजह बाजार में आई इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान तनाव के जल्द खत्म होने की उम्मीद रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की ओर से संकट खत्म करने के संकेतों ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। इसका असर एशियाई और भारतीय बाजारों में साफ दिखाई दिया। सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियों में तेजी आज की तेजी की खास बात यह रही कि सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियों के शेयर हरे निशान में रहे। इनमें ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, अदानी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस, इंटरग्लोब एविएशन और लार्सन एंड टुब्रो प्रमुख बढ़त वाले शेयर रहे। इससे निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल देखने को मिला। एशियाई और अमेरिकी बाजारों से मिला सपोर्ट वैश्विक बाजारों में भी तेजी रही। दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 7%, जापान का निक्केई 225 चार फीसदी से अधिक, जबकि हैंग सेंग और शंघाई सूचकांक भी मजबूती में रहे। अमेरिकी बाजार में भी मंगलवार को नैस्डैक 3.83%, एसएंडपी 500 2.91% और डाउ जोन्स 2.49% चढ़ा था। तेल की कीमतें और निवेशकों की सतर्कता हालांकि बाजार में तेजी के बीच ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जो चिंता का विषय बना हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव से सप्लाई बाधित होने का खतरा है। उधर, सोमवार को एफआईआई ने 11,163 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि डीआईआई ने 14,894 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।