साउथैम्पटन, एजेंसियां। इंग्लैंड ने पांचवें और अंतिम टी20 मुकाबले में भारत को 56 रन से हराकर पांच मैचों की सीरीज 4-0 से अपने नाम कर ली। बारिश के कारण पहला मुकाबला रद्द हो गया था, जबकि बाकी चारों मैचों में इंग्लैंड ने दबदबा बनाए रखा। अंतिम मुकाबले में इंग्लैंड ने बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया। बटलर और ब्रूक ने भारतीय गेंदबाजों की उड़ाई धज्जियां टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने 20 ओवर में 257/3 का विशाल स्कोर खड़ा किया। अनुभवी बल्लेबाज जोस बटलर ने 64 गेंदों में 131 रन की तूफानी पारी खेली, जिसमें बारह चौके और आठ छक्के शामिल रहे। वहीं कप्तान हैरी ब्रूक ने 45 गेंदों पर नाबाद 95 रन बनाए। दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 233 रन की रिकॉर्ड साझेदारी कर भारत के खिलाफ टी20 इतिहास का सबसे बड़ा साझेदारी रिकॉर्ड बनाया। भारत की ओर से शिवम दुबे ने 2 विकेट, जबकि प्रसिद्ध कृष्णा को 1 विकेट मिला। भारतीय बल्लेबाजों ने की कोशिश, लेकिन लक्ष्य रहा दूर 258 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। शुरुआती विकेट जल्दी गिरने के बाद ईशान किशन ने 35 गेंदों में 56 रन और तिलक वर्मा ने 25 गेंदों में 53 रन बनाकर संघर्ष जरूर किया, लेकिन दूसरे छोर से लगातार विकेट गिरते रहे। पूरी टीम 20 ओवर में 201/8 रन ही बना सकी। इंग्लैंड की ओर से सैम करन ने 3 विकेट, जबकि आदिल राशिद ने 2 विकेट लेकर भारत की वापसी की उम्मीद खत्म कर दी। इंग्लैंड ने हर विभाग में दिखाई बादशाहत इस जीत के साथ इंग्लैंड ने न सिर्फ सीरीज 4-0 से जीती, बल्कि पूरे दौरे में आक्रामक क्रिकेट का शानदार प्रदर्शन किया। जोस बटलर को उनकी शतकीय पारी के लिए 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया। अब दोनों टीमों के बीच अगली भिड़ंत वनडे सीरीज में होगी, जहां भारत इस हार का हिसाब बराबर करने की कोशिश करेगा।
ब्रिस्टल, एजेंसियां। भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए चौथे टी20 मुकाबले में मेजबान इंग्लैंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को 9 विकेट से हरा दिया। इस जीत के साथ इंग्लैंड ने पांच मैचों की टी20 सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर पहली बार भारत के खिलाफ दो या उससे अधिक मैचों की द्विपक्षीय टी20 सीरीज अपने नाम कर ली। श्रेयस अय्यर ने अकेले संभाली भारतीय पारी टॉस के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने निर्धारित 20 ओवर में 7 विकेट पर 158 रन बनाए। टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे। कप्तान श्रेयस अय्यर ने शानदार संघर्ष करते हुए 49 गेंदों में नाबाद 80 रन बनाए, जिसमें कई आकर्षक चौके और छक्के शामिल रहे। उनके अलावा शिवम दुबे ने 22 रन का योगदान दिया, जबकि बाकी बल्लेबाज बड़ी साझेदारी नहीं बना सके। आर्चर और टंग ने भारत को नहीं संभलने दिया इंग्लैंड की ओर से तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर ने कसी हुई गेंदबाजी करते हुए 4 ओवर में 20 रन देकर 2 विकेट लिए। जॉश टंग ने भी 2 विकेट झटके और भारतीय बल्लेबाजी पर लगातार दबाव बनाए रखा। दोनों गेंदबाजों ने शुरुआती झटके देकर भारत को बड़े स्कोर तक पहुंचने से रोक दिया। ब्रूक और सॉल्ट ने भारत से छीन ली जीत 159 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने शुरुआत में एक विकेट गंवाया, लेकिन इसके बाद कप्तान हैरी ब्रूक और सलामी बल्लेबाज फिल सॉल्ट ने भारतीय गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया। ब्रूक ने सिर्फ 35 गेंदों में नाबाद 79 रन, जबकि सॉल्ट ने 42 गेंदों में नाबाद 59 रन बनाए। दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 146 रन की अटूट साझेदारी कर टीम को 13.5 ओवर में ही जीत दिला दी। भारतीय गेंदबाज रहे बेअसर भारत की ओर से अर्शदीप सिंह को एकमात्र विकेट मिला। बाकी गेंदबाज इंग्लैंड के बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में नाकाम रहे। ब्रूक और सॉल्ट ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए मैच को पूरी तरह एकतरफा बना दिया। इंग्लैंड ने रचा इतिहास इस जीत के साथ इंग्लैंड ने भारत के खिलाफ अपनी पहली द्विपक्षीय टी20 सीरीज जीत दर्ज की। वहीं भारत को लगातार हार का सामना करना पड़ा और टीम की बल्लेबाजी व गेंदबाजी दोनों पर सवाल उठने लगे हैं। अब दोनों टीमें शनिवार को सीरीज के अंतिम मुकाबले में आमने-सामने होंगी, जहां भारत सम्मान बचाने और इंग्लैंड क्लीन स्वीप करने के इरादे से उतरेगा।
रांची। रांची के धुर्वा स्थित झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (JSCA) स्टेडियम में 24 जून को झारखंड प्रीमियर लीग (JPL) 2026 के फाइनल मैच के दौरान हुई भगदड़ और तोड़फोड़ के मामले में आखिरकार प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। घटना के 15 दिन बाद धुर्वा थाना में तैनात सब-इंस्पेक्टर हीरालाल साह के लिखित आवेदन पर 100 से 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने प्रारंभिक जांच (सनहा संख्या-31/26) पूरी होने के बाद यह कार्रवाई की है। कैसे हुई अफरा तफरा जैसी हाल? एफआईआर में आरोप है कि कुछ लोगों ने जबरन मुख्य प्रवेश द्वार और बैरिकेडिंग तोड़कर स्टेडियम में प्रवेश करने की कोशिश की, जिससे अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। पुलिस के अनुसार फाइनल मुकाबले के लिए बड़ी संख्या में फ्री पास जारी किए गए थे। इसके अलावा आम दर्शकों के लिए भी प्रवेश निशुल्क रखा गया था, जिसके कारण स्टेडियम की क्षमता से अधिक लोग पहुंच गए। सुरक्षा जांच के बाद दर्शकों को अंदर भेजा जा रहा था, लेकिन क्षमता पूरी होने पर मुख्य गेट बंद कर दिया गया। इसके बाद बाहर मौजूद भीड़ के एक हिस्से ने जबरन अंदर घुसने का प्रयास किया। रांची पुलिस अब स्टेडियम के सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी व भौतिक साक्ष्यों की जांच कर रही है। एसपी ने बताया कि फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों की टी20 सीरीज में भारतीय टीम को 2-0 से मिली हार के बाद खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इस बीच भारत के पूर्व मुख्य चयनकर्ता कृष्णमाचारी श्रीकांत ने टीम के उपकप्तान तिलक वर्मा की बल्लेबाजी पर कड़ी नाराजगी जताई है। श्रीकांत ने आरोप लगाया कि तिलक वर्मा ने टीम की जरूरत के मुताबिक बल्लेबाजी नहीं की, बल्कि मैच को अंत तक ले जाकर खुद मैच जिताने की कोशिश में धीमी पारी खेली। उनके मुताबिक मिडिल ओवरों में धीमी बल्लेबाजी भारतीय टीम की हार की बड़ी वजह बनी। मिडिल ऑर्डर का प्रदर्शन रहा निराशाजनक पूरी टी20 सीरीज में भारतीय टीम का मिडिल ऑर्डर उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। खासकर स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ बल्लेबाज संघर्ष करते नजर आए। रिपोर्ट के अनुसार, तिलक वर्मा, शिवम दुबे और अक्षर पटेल का स्ट्राइक रेट मिडिल ओवरों में काफी धीमा रहा, जिससे टीम पावरप्ले में मिली अच्छी शुरुआत का फायदा नहीं उठा सकी। इसके अलावा, कहा गया कि आईपीएल 2024 के बाद से स्पिन के खिलाफ तिलक वर्मा के प्रदर्शन में गिरावट देखने को मिली है। इसी वजह से 2026 टी20 विश्व कप के दौरान टीम प्रबंधन ने उन्हें मिडिल ऑर्डर की बजाय फिनिशर की भूमिका में भी आजमाया था। दूसरे टी20 में नहीं दिला सके जीत सीरीज के दूसरे मुकाबले में भारत को 155 रन का लक्ष्य मिला था। टीम की शुरुआत खराब रही और महज 19 रन पर तीन विकेट गिर गए। इसके बाद तिलक वर्मा ने एक छोर संभालकर बल्लेबाजी की और मुकाबले को आखिरी ओवर तक पहुंचाया। हालांकि अंतिम क्षणों में रन गति बढ़ाने में टीम सफल नहीं हो सकी और भारत को 1 रन से हार का सामना करना पड़ा। श्रीकांत ने क्या कहा? अपने यूट्यूब चैनल पर बातचीत के दौरान कृष्णमाचारी श्रीकांत ने भारतीय बल्लेबाजी की आलोचना करते हुए कहा कि— "आप मिडिल ओवरों में उस तरह बल्लेबाजी नहीं कर सकते जैसी भारत ने की। खासकर तिलक वर्मा, शिवम दुबे और अक्षर पटेल का स्ट्राइक रेट बेहद खराब था। शुरुआत में पारी संभालना जरूरी होता है, लेकिन उसके बाद तेजी से रन बनाने भी जरूरी हैं।" उन्होंने कहा कि यदि मिडिल ओवरों में रन गति रुक जाती है तो लक्ष्य हासिल करना काफी मुश्किल हो जाता है। 'सिर्फ अपने लिए खेल रहे थे' श्रीकांत ने तिलक वर्मा के रवैये पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि— "तिलक वर्मा सिर्फ अपने लिए खेल रहे थे। वह सिंगल-डबल लेकर मैच को आखिरी तक ले जाना चाहते थे ताकि अंत में खुद मैच जिताकर हीरो बन सकें। ऐसे लक्ष्य का पीछा आखिरी गेंद तक नहीं, बल्कि एक ओवर पहले पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए।" बहस का विषय बनी बल्लेबाजी हालांकि तिलक वर्मा की पारी को लेकर क्रिकेट जगत में अलग-अलग राय सामने आ सकती हैं। कुछ विशेषज्ञ मुश्किल परिस्थितियों में विकेट बचाकर खेलने को सही रणनीति मानते हैं, जबकि अन्य का मानना है कि टी20 क्रिकेट में आवश्यक रन गति बनाए रखना उतना ही महत्वपूर्ण होता है। आयरलैंड के खिलाफ मिली सीरीज हार के बाद भारतीय टीम के मिडिल ऑर्डर की बल्लेबाजी और मैच फिनिश करने की रणनीति पर चर्चा तेज हो गई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।