Spiritual News

Hindu funeral ritual being performed near a cremation pyre before sunset as per Garuda Purana beliefs.
सूर्यास्त के बाद क्यों नहीं किया जाता अंतिम संस्कार? जानिए Garuda Purana में क्या है मान्यता

हिंदू धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक हर संस्कार का विशेष महत्व माना गया है। सनातन परंपरा के अनुसार प्रत्येक धार्मिक कार्य को विधि-विधान और निर्धारित नियमों के साथ करना जरूरी माना जाता है। यही वजह है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका अंतिम संस्कार भी पूरी श्रद्धा और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ किया जाता है। Garuda Purana में मृत्यु, आत्मा और मोक्ष से जुड़े कई नियमों और मान्यताओं का उल्लेख मिलता है। इन्हीं मान्यताओं के अनुसार सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार करना अशुभ माना गया है। अंतिम संस्कार का क्या है धार्मिक महत्व? हिंदू मान्यता के अनुसार मृत्यु केवल शरीर का अंत है, जबकि आत्मा अमर मानी जाती है। अंतिम संस्कार को आत्मा की मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। धार्मिक विश्वास है कि यदि दाह संस्कार सही विधि-विधान, मंत्रों और परंपराओं के अनुसार न किया जाए, तो आत्मा को शांति नहीं मिलती और उसे मोक्ष प्राप्त करने में बाधा आ सकती है। सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार क्यों नहीं किया जाता? Garuda Purana और अन्य धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार करने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार: सूर्य देव प्रकाश, ऊर्जा और सकारात्मकता के प्रतीक माने जाते हैं। दिन के समय किए गए संस्कारों को शुभ और देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त माना जाता है। रात का समय नकारात्मक शक्तियों और अशुभ प्रभावों से जुड़ा माना गया है। इसी वजह से माना जाता है कि सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार करने से आत्मा को मोक्ष प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है। यही कारण है कि यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु रात में हो जाए, तो शव को अगले दिन सूर्योदय तक सुरक्षित रखा जाता है। इसके पीछे वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण भी हैं धार्मिक मान्यताओं के अलावा इसके पीछे कुछ व्यावहारिक वजहें भी बताई जाती हैं। प्राचीन समय में: रात में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं होती थी जंगलों और श्मशान घाटों में सुरक्षा का खतरा रहता था अंतिम संस्कार की प्रक्रिया सही ढंग से पूरी करना कठिन होता था इन्हीं कारणों से दिन के समय अंतिम संस्कार करने की परंपरा विकसित हुई, जो आज भी कई परिवारों में निभाई जाती है। परंपरा और आस्था का प्रतीक सनातन धर्म में अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आत्मा की शांति और मोक्ष से जुड़ा पवित्र संस्कार माना जाता है। इसलिए आज भी अधिकांश लोग सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार करने से बचते हैं और पारंपरिक मान्यताओं का पालन करते हैं।  

surbhi मई 22, 2026 0
Married women performing Vat Savitri Vrat puja around banyan tree
वट सावित्री व्रत 2026 कब है? जानें सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

Vat Savitri Vrat हिंदू धर्म का बेहद महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन माता सावित्री ने अपने तप, प्रेम और दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत वैवाहिक सुख और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। वट सावित्री व्रत 2026 कब है? पंचांग के अनुसार Vat Savitri Vrat ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। इस वर्ष व्रत की तिथि: व्रत: 16 मई 2026, शनिवार अमावस्या तिथि प्रारंभ: सुबह 05:12 बजे अमावस्या तिथि समाप्त: देर रात 01:31 बजे पूजा का शुभ मुहूर्त ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा के अनुसार, वट वृक्ष की पूजा सुबह के समय करना विशेष फलदायी माना गया है। शुभ योग: सुबह 10:26 बजे तक सौभाग्य योग रहेगा इस दौरान पूजा और व्रत संबंधी धार्मिक कार्य करना अत्यंत शुभ माना जा रहा है। वट सावित्री व्रत का धार्मिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार: वट वृक्ष में Brahma, Vishnu और Shiva का वास माना जाता है। इसे “अक्षय वट” भी कहा जाता है। वट वृक्ष की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। इस दिन महिलाएं: व्रत रखती हैं वट वृक्ष की पूजा करती हैं सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं पति की लंबी आयु की कामना करती हैं वट सावित्री व्रत पूजा विधि Vat Savitri Vrat के दिन: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें स्वच्छ वस्त्र धारण करें वट वृक्ष के पास जाकर जल अर्पित करें रोली, अक्षत, फूल और मिठाई चढ़ाएं पेड़ के चारों ओर कच्चा सूत लपेटें सावित्री-सत्यवान कथा का पाठ करें पति की लंबी आयु की प्रार्थना करें दान का भी है विशेष महत्व धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन: भोजन वस्त्र फल जरूरत की वस्तुएं दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।  

surbhi मई 15, 2026 0
Dark chocolate pieces kept beside a bedside lamp symbolizing better sleep and stress relief at night
रात में डार्क चॉकलेट खाना फायदेमंद? बेहतर नींद और तनाव कम करने में मिल सकती है मदद

सोने से पहले एक छोटा टुकड़ा बन सकता है हेल्दी आदत अगर आपको रात में मीठा खाने की आदत है, तो डार्क चॉकलेट आपके लिए एक बेहतर विकल्प हो सकती है। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, सोने से पहले थोड़ी मात्रा में डार्क चॉकलेट खाने से शरीर को रिलैक्स महसूस हो सकता है और नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें मौजूद कुछ पोषक तत्व शरीर में मेलाटोनिन और सेरोटोनिन जैसे हार्मोन को सपोर्ट करते हैं, जो बेहतर नींद और मानसिक शांति से जुड़े होते हैं। मेलाटोनिन और रिलैक्सेशन में कैसे करती है मदद? डार्क चॉकलेट में ट्रिप्टोफैन नामक तत्व पाया जाता है, जो शरीर में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन के निर्माण में मदद करता है। मेलाटोनिन वह हार्मोन है जो शरीर की स्लीप साइकिल को नियंत्रित करता है। वहीं सेरोटोनिन मूड को बेहतर बनाने और तनाव कम करने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा डार्क चॉकलेट में मैग्नीशियम भी भरपूर मात्रा में होता है। यह मिनरल मांसपेशियों को रिलैक्स करने और तनाव कम करने में मदद करता है, जिससे शरीर को आराम महसूस होता है। ब्लड सर्कुलेशन और मूड पर भी असर विशेषज्ञों के मुताबिक, डार्क चॉकलेट में मौजूद फ्लेवोनॉयड्स ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इससे दिमाग तक ऑक्सीजन की सप्लाई बेहतर होती है और मानसिक शांति महसूस हो सकती है। यही कारण है कि कई लोग रात में थोड़ी मात्रा में डार्क चॉकलेट खाने के बाद अधिक रिलैक्स महसूस करते हैं। क्या रात में चॉकलेट खाने से नींद खराब भी हो सकती है? हालांकि हर व्यक्ति पर इसका असर अलग हो सकता है। डार्क चॉकलेट में थोड़ी मात्रा में कैफीन भी मौजूद होती है। ऐसे में जो लोग कैफीन के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं, उन्हें रात में इसे खाने से नींद आने में परेशानी हो सकती है या बेचैनी महसूस हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर आपको कॉफी या कैफीन वाली चीजों से जल्दी असर होता है, तो रात में बहुत ज्यादा डार्क चॉकलेट खाने से बचना चाहिए। वजन बढ़ने का डर कितना सही? पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट खाना वजन बढ़ाने का बड़ा कारण नहीं बनता। करीब 10 ग्राम डार्क चॉकलेट में लगभग 60 कैलोरी होती है। अगर इसे संतुलित मात्रा में लिया जाए, तो यह लो-कैलोरी डाइट में भी शामिल की जा सकती है। डार्क या मिल्क चॉकलेट, कौन बेहतर? डॉक्टर और न्यूट्रिशनिस्ट आमतौर पर 65-70 प्रतिशत या उससे ज्यादा कोको वाली डार्क चॉकलेट को बेहतर मानते हैं, क्योंकि इसमें चीनी कम और एंटीऑक्सीडेंट ज्यादा होते हैं। हालांकि इसमें कैफीन की मात्रा मिल्क चॉकलेट से थोड़ी अधिक होती है। अगर आपको कैफीन से दिक्कत नहीं होती, तो डार्क चॉकलेट बेहतर विकल्प मानी जाती है। वहीं कैफीन से संवेदनशील लोग कम मात्रा में मिल्क चॉकलेट चुन सकते हैं।  

surbhi मई 13, 2026 0
Devotees worshipping Lord Vishnu with yellow flowers and lamps on Apara Ekadashi 2026
अपरा एकादशी 2026 आज: भगवान विष्णु की पूजा से मिलेगा अपार पुण्य, जानें शुभ मुहूर्त, मंत्र और जरूरी नियम

आज मनाई जा रही है अपरा एकादशी आज 13 मई 2026 को अपरा एकादशी का पावन व्रत रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में यह एकादशी भगवान Vishnu को समर्पित मानी जाती है। इसे अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को अपार पुण्य, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। कहा जाता है कि अपरा एकादशी का व्रत करने से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खुलता है। पहली बार व्रत रखने वालों के लिए पूजा विधि, नियम और सावधानियों की जानकारी बेहद जरूरी मानी जाती है। अपरा एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और पारण समय एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 मई 2026, दोपहर 2:52 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 13 मई 2026, दोपहर 1:29 बजे व्रत पारण समय: 14 मई 2026, सुबह 5:31 बजे से 8:14 बजे तक उदयातिथि के अनुसार आज यानी 13 मई को व्रत रखा जा रहा है। इस बार अपरा एकादशी पर सर्वार्थसिद्धि योग का भी शुभ संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। भगवान विष्णु को प्रिय हैं ये रंग और भोग धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय माना जाता है। इसलिए अपरा एकादशी के दिन पीले वस्त्र पहनना और पीली वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है। प्रिय फूल पीले गेंदे के फूल कमल पीले गुलाब प्रिय भोग पीले फल केसरिया भात पीले रंग की मिठाइयां भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करना चाहिए, क्योंकि बिना तुलसी के भगवान विष्णु का भोग अधूरा माना जाता है। अपरा एकादशी पूजा विधि सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को पीले वस्त्र पर स्थापित करें। फिर पंचामृत से भगवान का अभिषेक करें। पूजा में पीले फूल, पीला चंदन और पीले वस्त्र अर्पित करें। दीपक और धूप जलाकर फल और मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के दौरान विष्णु मंत्रों का जाप करें और बाद में विष्णु चालीसा व व्रत कथा का पाठ करें। अंत में आरती करके पूजा संपन्न करें। भगवान विष्णु के प्रमुख मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥ अपरा एकादशी पर इन बातों का रखें विशेष ध्यान चावल खाना माना जाता है वर्जित एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन चावल खाना अशुभ माना गया है। सात्विक भोजन करें घर में प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। व्रत में सेंधा नमक का ही उपयोग करें। तुलसी दल न तोड़ें एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित माना जाता है। पूजा के लिए तुलसी दल दशमी तिथि को ही तोड़कर रख लेना चाहिए। क्रोध और विवाद से बचें इस दिन शांत मन से भगवान विष्णु का ध्यान करें। किसी की निंदा या अपशब्द बोलने से बचना चाहिए। दिन में न सोएं धार्मिक मान्यता है कि एकादशी पर दिन में सोने से व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता। इस समय को भजन-कीर्तन और धार्मिक पाठ में लगाना शुभ माना गया है।  

surbhi मई 13, 2026 0
Devotees offering prayers to Lord Hanuman during Bada Mangal celebrations with lamps and flowers
12 मई को मनाया जाएगा दूसरा बड़ा मंगल, 19 साल बाद बना दुर्लभ संयोग

Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ माह में पड़ने वाला बड़ा मंगल भगवान Hanuman की विशेष आराधना का दिन माना जाता है। उत्तर भारत, खासकर Lucknow और अवध क्षेत्र में इस पर्व का बेहद खास महत्व है। इस साल 12 मई को ज्येष्ठ मास का दूसरा बड़ा मंगल मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन संकटमोचन हनुमान जी की पूजा करने से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। 19 साल बाद बना दुर्लभ संयोग साल 2026 का बड़ा मंगल इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इस बार अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के कारण ज्येष्ठ माह लंबा हो गया है। आमतौर पर ज्येष्ठ महीने में 4 या 5 मंगलवार पड़ते हैं, लेकिन इस बार कुल 8 बड़े मंगलवार पड़ रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ऐसा दुर्लभ संयोग करीब 19 साल बाद बना है। धार्मिक मान्यता है कि इतने लंबे समय तक हनुमान जी की आराधना का अवसर मिलना बेहद शुभ माना जाता है। भक्त इस दौरान व्रत, पूजा-पाठ और भंडारे का आयोजन कर बजरंगबली की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। क्यों कहा जाता है ‘बुढ़वा मंगल’? बड़ा मंगल को कई जगह ‘बुढ़वा मंगल’ के नाम से भी जाना जाता है। इसके पीछे दो प्रमुख पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। पहली कथा के अनुसार, Mahabharata काल में Hanuman ने वृद्ध वानर का रूप धारण कर Bhima के अहंकार को समाप्त किया था। चूंकि उन्होंने वृद्ध रूप में मंगलवार को दर्शन दिए थे, इसलिए इसे ‘बुढ़वा मंगल’ कहा जाने लगा। दूसरी मान्यता के अनुसार, ज्येष्ठ माह के मंगलवार को ही भगवान Rama और हनुमान जी की पहली मुलाकात हुई थी। इसी कारण यह दिन हनुमान भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। 2026 के सभी बड़े मंगल की तिथियां पहला बड़ा मंगल – 5 मई दूसरा बड़ा मंगल – 12 मई तीसरा बड़ा मंगल – 19 मई चौथा बड़ा मंगल – 26 मई पांचवां बड़ा मंगल – 2 जून छठा बड़ा मंगल – 9 जून सातवां बड़ा मंगल – 16 जून आठवां बड़ा मंगल – 23 जून कैसे करें पूजा? बड़ा मंगल के दिन सुबह स्नान करके साफ या लाल वस्त्र पहनने की परंपरा है। भक्त हनुमान मंदिरों में जाकर चमेली के तेल और सिंदूर से चोला चढ़ाते हैं। इसके साथ ही बूंदी के लड्डू, गुड़-चना और फलों का भोग लगाया जाता है। इस दिन Hanuman Chalisa, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। शाम के समय हनुमान जी की आरती और प्रसाद वितरण के साथ पूजा संपन्न की जाती है। लखनऊ और अवध में दिखती है खास रौनक Lucknow समेत अवध क्षेत्र में बड़ा मंगल के अवसर पर जगह-जगह भंडारे लगाए जाते हैं। भक्तों को शरबत, पूड़ी-सब्जी और प्रसाद वितरित किया जाता है। मंदिरों में विशेष सजावट और धार्मिक आयोजनों के कारण पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिलता है।  

surbhi मई 8, 2026 0
Devotees performing Skanda Shashti puja with offerings and Lord Kartikeya idol on auspicious day
स्कंद षष्ठी 2026: 22 अप्रैल को मनाया जाएगा व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में भगवान कार्तिकेय (स्कंद) को समर्पित स्कंद षष्ठी का विशेष महत्व है। यह पर्व हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है, लेकिन वैशाख मास की स्कंद षष्ठी का महत्व अधिक माना जाता है। साल 2026 में यह पर्व 22 अप्रैल, बुधवार को मनाया जाएगा। तिथि और शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार: षष्ठी तिथि प्रारंभ: 22 अप्रैल 2026, सुबह 01:21 बजे षष्ठी तिथि समाप्त: 22 अप्रैल 2026, रात 10:47 बजे उदयातिथि के आधार पर व्रत और पूजा: 22 अप्रैल को ही पूजा विधि स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा इस प्रकार करें: सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें पूजा स्थान पर भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें साथ में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना भी शुभ माना जाता है जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें चंदन, अक्षत, लाल फूल और धूप-दीप अर्पित करें मोर पंख चढ़ाना विशेष फलदायी माना जाता है ‘स्कंद षष्ठी कवच’ का पाठ करें और मंत्र जाप करें अंत में आरती कर प्रसाद वितरित करें स्कंद षष्ठी का महत्व पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर नामक असुर का वध किया था। इसलिए यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से: जीवन के कष्ट दूर होते हैं शत्रुओं पर विजय मिलती है आत्मविश्वास और साहस बढ़ता है संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होती है ज्योतिष के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष होता है, उनके लिए यह व्रत विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।  

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
Maa Baglamukhi puja with flowers and offerings
बगलामुखी जयंती 2026: कब है, जानें तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में Baglamukhi जयंती का विशेष महत्व है। दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या मां बगलामुखी की जयंती इस साल 24 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) को मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर माता की विधि-विधान से पूजा करते हैं। तिथि और शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार: अष्टमी तिथि प्रारंभ: 23 अप्रैल 2026, रात 08:49 बजे अष्टमी तिथि समाप्त: 24 अप्रैल 2026, शाम 07:21 बजे उदयातिथि के अनुसार जयंती: 24 अप्रैल शुभ मुहूर्त: ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:19 से 05:03 तक अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:53 से दोपहर 12:46 तक पूजा विधि सुबह स्नान कर स्वच्छ (संभव हो तो पीले) वस्त्र धारण करें व्रत का संकल्प लें चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर मां बगलामुखी की तस्वीर/यंत्र स्थापित करें पीले फूल, हल्दी, चंदन, अक्षत और पीले फल अर्पित करें बेसन के लड्डू, केसरिया हलवा या पीले चावल का भोग लगाएं हल्दी की माला से बीज मंत्र का जाप करें मंत्र: “ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय, जिह्वाम् कीलय, बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा।” अंत में माता की आरती करें धार्मिक महत्व मां बगलामुखी को ‘पीताम्बरा’ भी कहा जाता है, क्योंकि उन्हें पीला रंग अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि उनकी पूजा से: शत्रुओं पर विजय मिलती है वाणी और बुद्धि पर नियंत्रण आता है नकारात्मक ऊर्जा और बाधाएं दूर होती हैं प्रमुख सिद्धपीठ इस अवसर पर देश के प्रसिद्ध मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है, जैसे: Nalkheda Baglamukhi Temple Pitambara Peeth Bankhandi Baglamukhi Temple इन स्थानों पर भक्त बड़ी संख्या में दर्शन और अनुष्ठान के लिए पहुंचते हैं।  

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
Goddess Matangi devotional illustration with flowers, lamps and spiritual worship setup on Matangi Jayanti
मातंगी जयंती आज: जानें क्या करें और किन गलतियों से बचें, तभी मिलेगी माता की कृपा

आज पूरे देश में Matangi Jayanti श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आने वाली यह जयंती मां Matangi को समर्पित होती है, जो दस महाविद्याओं में नौवीं स्वरूप मानी जाती हैं। उन्हें ज्ञान, कला, संगीत और वाणी की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से भय दूर होता है, वाणी में मधुरता आती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। हालांकि, माता मातंगी की पूजा के नियम अन्य देवियों की तुलना में थोड़े विशेष माने जाते हैं, इसलिए कुछ बातों का खास ध्यान रखना जरूरी होता है। क्या न करें? मातंगी जयंती के दिन कुछ कार्यों से बचना बेहद जरूरी माना गया है: गंदगी न रखें: घर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि माता को स्वच्छता प्रिय है। कला का अपमान न करें: किसी भी कलाकार, वाद्य यंत्र या किताब का अपमान करना अशुभ माना जाता है। वाणी पर नियंत्रण रखें: झूठ बोलना, अपशब्द कहना या विवाद करना माता को नाराज कर सकता है। तामसिक भोजन से दूरी: मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज जैसे भोजन का सेवन न करें। अशुद्ध अवस्था में पूजा न करें: बिना स्नान किए या अशुद्ध मन से पूजा करने से फल नहीं मिलता। क्या करें? इस दिन कुछ विशेष कार्य करने से माता की कृपा प्राप्त होती है: नीम के पत्ते अर्पित करें: पूजा में नीम का विशेष महत्व है। संगीत और कला साधना करें: गायक या कलाकार अपने वाद्य यंत्रों का पूजन करें। दान-पुण्य करें: जरूरतमंदों को वस्त्र या सुहाग सामग्री दान करना शुभ होता है। मंत्र जाप करें: माता के बीज मंत्र का शांत मन से जाप करें। सात्विक भोजन करें: दिनभर सात्विक आहार का पालन करें। धार्मिक महत्व Matangi को ‘उच्छिष्ट चांडालिनी’ भी कहा जाता है, जिनकी साधना से व्यक्ति को वाणी सिद्धि, आत्मविश्वास और मानसिक स्पष्टता प्राप्त होती है। यह दिन विशेष रूप से कलाकारों, गायकों और विद्यार्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।  

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
Badrinath Temple decorated with flowers during opening of doors for Char Dham Yatra in Uttarakhand
बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल से खुलेंगे, नवंबर तक कर सकेंगे भगवान बद्रीविशाल के दर्शन

उत्तराखंड के पवित्र चारधामों में शामिल Badrinath Temple के कपाट इस साल अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार हर वर्ष इसी दिन मंदिर के द्वार खोले जाते हैं। इस बार भक्त 23 अप्रैल से 13 नवंबर तक भगवान बद्रीविशाल के दर्शन कर सकेंगे। कपाट खुलने की विशेष परंपरा कपाट खुलने की प्रक्रिया बेहद विधिपूर्वक और परंपराओं के अनुसार होती है। सुबह करीब 4 बजे: मुख्य पुजारी (रावल), धर्माधिकारी और हक-हकूकधारी गर्भगृह के द्वार पर पहुंचते हैं टिहरी राजघराने के प्रतिनिधि और प्रशासन भी मौजूद रहते हैं सबसे पहले कपाट की सील और ताले की जांच होती है इसके बाद मंत्रोच्चार और पूजा के साथ जैसे ही कपाट खुलते हैं, श्रद्धालुओं को भगवान के “निर्वाण दर्शन” होते हैं, जिन्हें बेहद शुभ माना जाता है। ‘घृत कंबल’ और महाभिषेक का महत्व सर्दियों में भगवान को ओढ़ाया गया घृत कंबल (घी में डुबोया ऊनी वस्त्र) कपाट खुलते ही हटाया जाता है। इसके बाद: तिल के तेल से भगवान का महाभिषेक किया जाता है यह पवित्र तेल टिहरी राजघराने की ओर से विशेष विधि से तैयार किया जाता है ‘गाडू घड़ा’ की अनोखी परंपरा टिहरी राजघराने की सुहागिन महिलाएं पारंपरिक तरीके से तिल का तेल निकालती हैं, जिसे ‘गाडू घड़ा’ कहा जाता है। यह पवित्र कलश यात्रा: ऋषिकेश → श्रीनगर → जोशीमठ होते हुए बद्रीनाथ धाम पहुंचती है। सर्दियों में जब Badrinath Temple के कपाट बंद रहते हैं, तब भगवान की पूजा Narsingh Temple Joshimath में की जाती है। बद्रीनाथ कैसे पहुंचें? हवाई मार्ग: सबसे नजदीकी एयरपोर्ट Jolly Grant Airport (देहरादून) है, जो लगभग 317 किमी दूर है। यहां से टैक्सी और बस मिल जाती हैं। रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन Rishikesh Railway Station है, जो करीब 297 किमी दूर है। सड़क मार्ग: बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग-58 पर स्थित है। ऋषिकेश, हरिद्वार, देहरादून और दिल्ली से बस और टैक्सी की नियमित सुविधा उपलब्ध है। श्रद्धालुओं के लिए खास जानकारी चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु बद्रीनाथ धाम पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन की ओर से सुरक्षा, ट्रैफिक और स्वास्थ्य सुविधाओं के विशेष इंतजाम किए जाते हैं।  

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
Kinnar community blessing people and receiving donation items during religious ritual in India
किन्नरों को दान कब और क्या करें? जानें ज्योतिष से जुड़े महाउपाय

भारतीय समाज में किन्नर समुदाय को विशेष आध्यात्मिक महत्व दिया गया है। मान्यता है कि इनके आशीर्वाद में अद्भुत शक्ति होती है, जो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। तीज-त्योहार, विवाह और मांगलिक अवसरों पर किन्नरों का आशीर्वाद शुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सही समय और उचित वस्तु का दान करने से जीवन की कई समस्याओं का समाधान संभव है। किस दिन करें किन्नरों को दान? ज्योतिष के अनुसार किन्नर समुदाय का संबंध बुध ग्रह से माना जाता है। इसलिए बुधवार का दिन किन्नरों को दान देने के लिए सबसे शुभ माना गया है। इस दिन किए गए उपाय जल्दी फल देते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाते हैं। किन चीजों का करें दान? अगर कुंडली में बुध दोष हो या आर्थिक/मानसिक समस्याएं बनी रहती हों, तो बुधवार के दिन किन्नरों को ये चीजें दान करना लाभकारी माना जाता है: हरे रंग के कपड़े हरी चूड़ियां हरे फल (जैसे अमरूद, हरी सब्जियां) धन या अन्न कारोबार में सफलता के लिए उपाय यदि मेहनत के बावजूद व्यापार में तरक्की नहीं हो रही है, तो बुधवार के दिन किन्नर को ढोलक दान करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे उनका आशीर्वाद मिलता है और व्यापार में तेजी आती है। आर्थिक समस्याओं से राहत के लिए अगर पैसा टिक नहीं रहा या लगातार आर्थिक परेशानी बनी रहती है, तो: एक पूजा की सुपारी पर सिक्का रखकर किन्नर को दान करें यह उपाय धन की स्थिरता और वृद्धि के लिए लाभकारी माना जाता है। सुखी वैवाहिक जीवन के लिए दांपत्य जीवन में तनाव या बाधाएं आ रही हों, तो शुक्र ग्रह को मजबूत करने के लिए: इत्र सफेद मिठाई सुंदर वस्त्र किन्नरों को दान करें। इससे वैवाहिक जीवन में मधुरता और सुख-शांति बढ़ने की मान्यता है। मान्यता और सावधानी ध्यान रखें कि ये सभी उपाय धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय विश्वासों पर आधारित हैं। इन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ करना ही महत्वपूर्ण माना जाता है।  

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Anjali Kumari मई 16, 2026 0