Tata Group

Chinese Navy conducts a ballistic missile launch from a nuclear submarine during a military exercise in the Pacific Ocean.
चीन ने परमाणु पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया, अमेरिका समेत कई देशों ने जताई चिंता

बीजिंग/वॉशिंगटन: चीन ने सोमवार को प्रशांत महासागर में अपनी परमाणु पनडुब्बी (Nuclear Submarine) से बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। इस परीक्षण के बाद अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। चीन ने इसे अपनी नियमित सैन्य अभ्यास गतिविधि का हिस्सा बताया है। परमाणु पनडुब्बी से हुआ मिसाइल परीक्षण चीनी सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) नेवी ने स्थानीय समयानुसार दोपहर 12:01 बजे परमाणु पनडुब्बी से एक रणनीतिक बैलिस्टिक मिसाइल का प्रक्षेपण किया। चीनी सेना का दावा है कि मिसाइल में डमी (बिना विस्फोटक) वारहेड लगाया गया था और उसने प्रशांत महासागर के खुले समुद्री क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्य पर सफलतापूर्वक निशाना साधा। चीन का कहना है कि यह उसकी वार्षिक सैन्य प्रशिक्षण गतिविधियों का हिस्सा था और संबंधित देशों को इसकी पूर्व सूचना दे दी गई थी। अमेरिका ने जताई गंभीर चिंता अमेरिकी विदेश विभाग ने परीक्षण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चीन के इस कदम पर उसकी करीबी नजर थी। अमेरिका ने कहा कि जब दुनिया परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के प्रयास कर रही है, तब चीन अपने परमाणु शस्त्रागार का तेजी से विस्तार कर रहा है। अमेरिकी बयान में कहा गया कि बीजिंग का बिना पर्याप्त पारदर्शिता के परमाणु क्षमताओं का विस्तार वैश्विक सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी उठाए सवाल जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी चीन के मिसाइल परीक्षण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां एशिया-प्रशांत की स्थिरता के लिए चुनौती बन सकती हैं। न्यूजीलैंड ने भी चीन से अधिक पारदर्शिता बरतने और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले सैन्य कदमों पर स्पष्ट जानकारी साझा करने की अपील की है। हथियार नियंत्रण वार्ता की अपील अमेरिका ने चीन से परमाणु हथियार नियंत्रण वार्ता में शामिल होने का आग्रह किया है। साथ ही अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) और अंतरिक्ष प्रक्षेपणों की नियमित जानकारी साझा करने की व्यवस्था अपनाने की भी मांग की है। अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए अपने रक्षा दायित्वों का पालन करता रहेगा। क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे रणनीतिक मिसाइल परीक्षण अमेरिका और चीन के बीच पहले से जारी सैन्य प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकते हैं। दक्षिण चीन सागर, ताइवान जलडमरूमध्य और प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच यह परीक्षण क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई बहस खड़ी कर सकता है।  

Deepshikha जुलाई 7, 2026 0
Westside
टाटा ग्रुप में नई पीढ़ी की एंट्री, माया टाटा को मिली वेस्टसाइड ई-कॉमर्स की कमान

मुंबई, एजेंसियां। टाटा समूह ने नेतृत्व परिवर्तन और डिजिटल विस्तार की रणनीति के तहत नई पीढ़ी को बड़ी जिम्मेदारियां सौंपने की दिशा में अहम कदम उठाया है। समूह की फैशन रिटेल कंपनी ट्रेंट की प्रमुख ब्रांड ‘वेस्टसाइड’ के ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग की कमान अब नोएल टाटा की बेटी माया टाटा संभालेंगी। हालांकि कंपनी की ओर से इस नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन इसे टाटा समूह की दीर्घकालिक उत्तराधिकार योजना और डिजिटल कारोबार को मजबूत करने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।   डिजिटल कारोबार को मिलेगी नई दिशा 37 वर्षीय माया टाटा ने अपने करियर की शुरुआत टाटा कैपिटल से की थी। इसके बाद उन्होंने टाटा डिजिटल में काम करते हुए ई-कॉमर्स, ऑनलाइन रिटेल, ग्राहक अधिग्रहण और डिजिटल प्लेटफॉर्म संचालन का व्यापक अनुभव हासिल किया। टाटा नियो, बिगबास्केट, क्रोमा और टाटा 1एमजी जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ काम करने का अनुभव उन्हें वेस्टसाइड की ओमनीचैनल और ई-कॉमर्स रणनीति का नेतृत्व करने के लिए उपयुक्त बनाता है। उनका मुख्य लक्ष्य वेस्टसाइड की ऑनलाइन मौजूदगी को मजबूत करना और ब्रांड का वैश्विक विस्तार करना होगा।   नई पीढ़ी को मिल रही बड़ी जिम्मेदारियां नोएल टाटा वर्तमान में ट्रेंट के चेयरमैन हैं और नवंबर 2026 में इस पद से हटने की संभावना है। माना जा रहा है कि वे माया के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे। वहीं उनके बेटे नेविल टाटा पहले से ट्रेंट के स्टार बाजार हाइपरमार्केट डिवीजन की कमान संभाल रहे हैं, जबकि बेटी लिआ टाटा इंडियन होटल्स कंपनी (ताज) में वाइस प्रेसिडेंट हैं। तीनों भाई-बहन टाटा ट्रस्ट्स से जुड़ी संस्थाओं के बोर्ड का भी हिस्सा हैं।   वेस्टसाइड का तेजी से विस्तार ट्रेंट की कुल आय में लगभग 40 प्रतिशत योगदान वेस्टसाइड का है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का राजस्व करीब 19,700 करोड़ रुपये रहा। कंपनी हर साल लगभग 50 नए स्टोर खोलने की योजना पर काम कर रही है और उसके स्टोरों की संख्या बढ़कर 321 शहरों में 1,286 हो चुकी है। माया टाटा की नियुक्ति से संकेत मिलते हैं कि टाटा समूह आने वाले वर्षों में ई-कॉमर्स, डिजिटल इंटीग्रेशन और भारतीय ब्रांड्स को वैश्विक पहचान दिलाने पर विशेष जोर देगा।

abhishek singh जुलाई 7, 2026 0
Trent Ltd stock price falls sharply after Q1 business update amid weak revenue growth concerns.
Trent के शेयरों में 10% तक की बड़ी गिरावट, Q1 बिजनेस अपडेट से निवेशक क्यों हुए निराश?

टाटा समूह की रिटेल कंपनी Trent Ltd के शेयरों में मंगलवार को शुरुआती कारोबार के दौरान तेज गिरावट देखने को मिली। कंपनी के पहली तिमाही (Q1) के बिजनेस अपडेट के बाद निवेशकों की निराशा साफ नजर आई, जिसके चलते शेयर करीब 10% टूटकर 3,010 रुपये के इंट्राडे लो तक पहुंच गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ रिकवरी आई और शेयर लगभग 3,052 रुपये के स्तर पर कारोबार करता दिखा। क्यों टूटा Trent का शेयर? शेयर में गिरावट की सबसे बड़ी वजह कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ रही। जून तिमाही में Trent की स्टैंडअलोन आय में 19% सालाना वृद्धि दर्ज की गई, जो बाजार और विश्लेषकों की उम्मीदों से कम रही। विशेषज्ञों के अनुसार, कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ लगातार पांचवीं तिमाही 20% से नीचे रही है। इससे यह चिंता बढ़ी है कि क्या Trent की तेज विकास दर अब धीमी पड़ रही है। स्टोर विस्तार भी उम्मीद से कमजोर कंपनी ने जून तिमाही के दौरान कुल 20 नए स्टोर खोले। इनमें: 1 Westside स्टोर 19 Zudio स्टोर विश्लेषकों का मानना है कि Westside स्टोरों की धीमी बढ़ोतरी और राजस्व प्रति वर्ग फुट (Revenue Per Square Foot) में अपेक्षित सुधार न होना निवेशकों की चिंता का कारण बना। ब्रोकरेज हाउस की क्या है राय? Q1 अपडेट के बाद अलग-अलग ब्रोकरेज फर्मों ने Trent को लेकर अपनी राय जारी की है। Macquarie ने 'Outperform' रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹3,600 का लक्ष्य मूल्य दिया, लेकिन समान स्टोर बिक्री (Same-Store Sales Growth) में नरमी की आशंका जताई। Morgan Stanley ने 'Overweight' रेटिंग और ₹3,151 का टारगेट बनाए रखा। फर्म का कहना है कि रेवेन्यू ग्रोथ उसके अनुमान से कम रही है, जिससे निकट अवधि में शेयर पर दबाव रह सकता है। Bernstein ने भी 'Outperform' रेटिंग और ₹3,500 का लक्ष्य रखा, लेकिन शेयर में अल्पकालिक नकारात्मक प्रतिक्रिया की संभावना जताई। Citi सबसे ज्यादा सतर्क नजर आया। उसने 'Sell' रेटिंग के साथ ₹2,733 का लक्ष्य मूल्य बरकरार रखा। फर्म ने बढ़ती प्रतिस्पर्धा, कमजोर राजस्व प्रति वर्ग फुट और टियर-2 एवं टियर-3 शहरों में विस्तार से जुड़ी चुनौतियों को प्रमुख जोखिम बताया। निवेशकों की नजर आगे की रणनीति पर बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में Trent के लिए समान स्टोर बिक्री, नए स्टोरों का प्रदर्शन और उपभोक्ता मांग में सुधार अहम भूमिका निभाएंगे। यदि शहरी खपत में मजबूती आती है तो कंपनी की विकास दर दोबारा तेज हो सकती है।  

surbhi जुलाई 7, 2026 0
Zudio and Westside growth
ज़ूडियो-वेस्टसाइड को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाले नोएल टाटा अब वोल्टास को भी कहेंगे अलविदा

नई दिल्ली, एजेंसियां। टाटा समूह के वरिष्ठ उद्योगपति और सफल रिटेल रणनीतिकार नोएल टाटा इस साल नवंबर में 70 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद वोल्टास के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने कंपनी की 72वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में स्वयं इसकी जानकारी दी। इससे कुछ दिन पहले ही वह ट्रेंट लिमिटेड के चेयरमैन पद छोड़ने की घोषणा भी कर चुके हैं। लगातार दो बड़ी कंपनियों से उनके हटने को टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।   ज़ूडियो और वेस्टसाइड को बनाया देश का लोकप्रिय फैशन ब्रांड नोएल टाटा को भारतीय रिटेल सेक्टर में नई पहचान दिलाने का श्रेय दिया जाता है। उनके नेतृत्व में ट्रेंट लिमिटेड ने वेस्टसाइड और ज़ूडियो जैसे ब्रांडों को देशभर में मजबूत पहचान दिलाई। जहां वेस्टसाइड को प्राइवेट लेबल मॉडल के जरिए विकसित किया गया, वहीं वर्ष 2016 में लॉन्च हुआ ज़ूडियो कम कीमत में ट्रेंडी फैशन उपलब्ध कराकर तेजी से ग्राहकों की पहली पसंद बन गया। खासकर छोटे शहरों और मध्यम वर्ग के बीच इस ब्रांड ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की।   रणनीति से बदली कंपनी की तस्वीर नोएल टाटा की व्यावसायिक रणनीति का असर कंपनी के प्रदर्शन में भी साफ दिखाई दिया। उनके नेतृत्व में ट्रेंट का कारोबार करीब 1,300 करोड़ रुपये से बढ़कर 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि मुनाफा लगभग 130 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,700 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया। आज वेस्टसाइड के 300 से अधिक और ज़ूडियो के करीब 960 से ज्यादा स्टोर देशभर में संचालित हो रहे हैं। कंपनी का मार्केट कैप भी लगभग 1.73 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।   समृद्ध अनुभव और वैश्विक दृष्टि 1957 में जन्मे नोएल टाटा, नवल टाटा और सिमोन टाटा के पुत्र तथा रतन टाटा के सौतेले भाई हैं। उन्होंने ब्रिटेन के ससेक्स विश्वविद्यालय से स्नातक और फ्रांस के INSEAD बिजनेस स्कूल से प्रबंधन की शिक्षा प्राप्त की। अपने लंबे करियर में उन्होंने टाटा इंटरनेशनल, ट्रेंट और वोल्टास जैसी कंपनियों को नई दिशा दी। अब उनके पद छोड़ने के साथ टाटा समूह में नई नेतृत्व टीम की भूमिका पर उद्योग जगत की नजरें टिकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नोएल टाटा की बनाई मजबूत रणनीति और रिटेल मॉडल आने वाले वर्षों में भी समूह की कंपनियों की विकास यात्रा को दिशा देते रहेंगे।

anjali kumari जुलाई 1, 2026 0
Tata Trusts issues legal notice over a 37-year-old share transfer dispute and seeks ₹1000 crore damages.
Tata Trusts Row: 37 साल पुराने शेयर विवाद पर टाटा ट्रस्ट्स का सख्त रुख, आरोप वापस लेने या ₹1000 करोड़ हर्जाना देने की मांग

टाटा समूह से जुड़ा एक नया विवाद सामने आया है, जो करीब 37 साल पुराने शेयर ट्रांसफर से संबंधित है। इस मामले में टाटा ट्रस्ट्स ने याचिकाकर्ता सुरेश तुलसीराम पाटिलखेड़े और उनकी वकील कात्यायनी अग्रवाल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कानूनी नोटिस भेजा है। ट्रस्ट्स ने दोनों से लगाए गए आरोप वापस लेने को कहा है, अन्यथा 1000 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की जाएगी। क्या है पूरा मामला? विवाद जनवरी 1989 में नवजबाई रतन टाटा ट्रस्ट (NRTT) से दिवंगत नवल एच. टाटा को ट्रांसफर किए गए 833 शेयरों से जुड़ा है। वर्तमान में ये शेयर रतन टाटा, जिमी टाटा और नोएल टाटा के परिवार से जुड़े हैं। याचिकाकर्ता सुरेश पाटिलखेड़े ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के समक्ष शिकायत दर्ज कर इस शेयर ट्रांसफर की जांच की मांग की थी। शिकायत में लगाए गए प्रमुख आरोप शेयर एक सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट से निजी व्यक्ति को ट्रांसफर किए गए। ट्रांसफर के लिए कोई वैध प्रस्ताव या ट्रांसफर डीड नहीं थी। यह सौदा बिना किसी भुगतान (Nil Consideration) के किया गया। टाटा ट्रस्ट्स ने आरोपों को बताया बेबुनियाद टाटा ट्रस्ट्स ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नवल टाटा ने ट्रांसफर से लगभग एक वर्ष पहले ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया था। ट्रस्ट्स के मुताबिक— इस लेन-देन को दोनों संस्थाओं के बोर्ड की मंजूरी प्राप्त थी। शेयरों के बदले उचित भुगतान किया गया था। पूरी प्रक्रिया की कानूनी समीक्षा देश के प्रसिद्ध न्यायविद नानी पालखीवाला ने की थी। पहले भी लगा था बैठकों पर प्रतिबंध इसी याचिका के आधार पर महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने 15 मई को टाटा ट्रस्ट्स की बैठकों और महत्वपूर्ण फैसलों पर अस्थायी रोक लगाई थी। जांच पूरी होने तक ट्रस्ट्स की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। अब ट्रस्टियों की अगली बैठक 8 जून को प्रस्तावित है। 'सीरियल लिटिगेटर' बताया टाटा ट्रस्ट्स ने अपने बयान में सुरेश पाटिलखेड़े को "सीरियल लिटिगेटर" यानी आदतन मुकदमेबाज बताया है। ट्रस्ट का आरोप है कि इन दावों का उद्देश्य टाटा परिवार और ट्रस्ट्स की 130 वर्ष पुरानी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना है। क्यों अहम है यह विवाद? टाटा ट्रस्ट्स देश के सबसे बड़े परोपकारी संगठनों में से एक हैं और टाटा समूह की कई कंपनियों में उनकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। ऐसे में इस तरह के कानूनी विवाद कॉरपोरेट गवर्नेंस और ट्रस्ट प्रबंधन के दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।  

surbhi जून 6, 2026 0
Air India aircraft on runway amid rising jet fuel costs and flight cuts
महंगे जेट फ्यूल से एयर इंडिया पर दबाव: 100 उड़ानों में कटौती की तैयारी, किराए बढ़ने के संकेत

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल का असर अब भारतीय एविएशन सेक्टर पर साफ दिखाई देने लगा है। विमान ईंधन (ATF) की बढ़ती कीमतों ने एयरलाइंस कंपनियों के ऑपरेशन को महंगा बना दिया है। इसी दबाव के चलते Air India ने रोजाना करीब 100 उड़ानों में कटौती की तैयारी शुरू कर दी है, जिनमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों रूट शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक, Air India फिलहाल रोजाना लगभग 1,100 फ्लाइट्स ऑपरेट करती है। जून महीने में यूरोप, नॉर्थ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर जैसे अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर सबसे ज्यादा कटौती देखने को मिल सकती है। यह फैसला बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के दबाव में लिया जा रहा है। एटीएफ की कीमतों ने बढ़ाई चिंता एयरलाइन इंडस्ट्री के लिए जेट फ्यूल सबसे बड़ा खर्च होता है, जिसकी हिस्सेदारी कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट में करीब 40% तक होती है। हाल के महीनों में ATF की कीमतों में भारी उछाल आया है। हालांकि सरकार ने फिलहाल घरेलू जेट फ्यूल की कीमतों में राहत दी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए कोई राहत नहीं दी गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली में जेट फ्यूल की कीमतें मार्च के मुकाबले लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। वहीं, ग्लोबल एवरेज जेट फ्यूल की कीमत फरवरी के करीब 99.40 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर अप्रैल के अंत तक 179.46 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई–यानी करीब 80% की बढ़ोतरी। इंडस्ट्री ने सरकार से मांगी मदद Federation of Indian Airlines, जिसमें इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी कंपनियां शामिल हैं, ने सरकार से राहत की मांग की है। फेडरेशन का कहना है कि मौजूदा कीमतों के चलते इंडस्ट्री पर भारी दबाव है और अगर जल्द राहत नहीं मिली तो स्थिति गंभीर हो सकती है। लंबे रूट और बढ़ती लागत ने बढ़ाया संकट Air India पर अन्य कंपनियों की तुलना में ज्यादा असर इसलिए भी पड़ रहा है क्योंकि इसका अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क बड़ा है। पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने के कारण यूरोप और नॉर्थ अमेरिका जाने वाली फ्लाइट्स को लंबा रूट लेना पड़ रहा है, जिससे ईंधन खपत और क्रू कॉस्ट दोनों बढ़ गए हैं। कई फ्लाइट्स को वियना और स्टॉकहोम जैसे शहरों में स्टॉपओवर करना पड़ रहा है। घाटा 20,000 करोड़ के पार, टाटा ग्रुप पर दबाव एयर इंडिया का कुल घाटा पहले ही 20,000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। Tata Group और उसकी साझेदार Singapore Airlines पर इस घाटे को कम करने और कंपनी को मुनाफे में लाने का दबाव बढ़ता जा रहा है। गौरतलब है कि टाटा ग्रुप ने 2022 में एयर इंडिया का अधिग्रहण किया था। यात्रियों पर क्या होगा असर? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ATF की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहती है, तो आने वाले समय में फ्लाइट टिकट महंगे हो सकते हैं और उड़ानों की संख्या में और कटौती भी संभव है। इसका सीधा असर यात्रियों की जेब और यात्रा योजनाओं पर पड़ेगा।  

surbhi मई 1, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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