Teacher Recruitment 2026

BPSC TRE-4 recruitment may add 2,000 teacher vacancies, taking total posts beyond 34,000 in Bihar.
BPSC TRE-4 में बढ़ सकती हैं 2 हजार सीटें, 34 हजार के पार जा सकता है भर्ती का आंकड़ा; जानिए किस विषय में मिल सकता है ज्यादा मौका

पटना: बिहार में सरकारी शिक्षक बनने का सपना देख रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा के चौथे चरण यानी टीआरई-4 से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। पहले से प्रस्तावित 32,388 पदों के अलावा करीब 2 हजार और रिक्तियां इस भर्ती में शामिल किए जाने की संभावना है। यदि अतिरिक्त पदों को मंजूरी मिलती है तो टीआरई-4 में कुल रिक्तियों का आंकड़ा 34 हजार के पार पहुंच सकता है। हालांकि, अतिरिक्त पदों की संख्या और विषयवार रिक्तियों की अंतिम तस्वीर जिलों से प्राप्त रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी। शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों से टीआरई-3 के बाद बची हुई शिक्षक रिक्तियों का विवरण मांगा है। रिपोर्ट मिलने के बाद इन पदों को टीआरई-4 की अधियाचना में शामिल किए जाने की संभावना है। पहले 32,388 पदों पर भेजी गई थी अधियाचना टीआरई-4 के लिए शिक्षा विभाग पहले ही 32,388 पदों पर नियुक्ति की अधियाचना बिहार लोक सेवा आयोग को भेज चुका है। प्रस्तावित रिक्तियों में कक्षा 1 से 5 तक के लिए 3,847 पद, कक्षा 6 से 8 तक के लिए 8,563 पद और कक्षा 9 से 10 तक के लिए 3,877 पद शामिल हैं। सबसे अधिक रिक्तियां कक्षा 11 और 12 के लिए प्रस्तावित हैं। इन कक्षाओं में 22 विषयों के लिए कुल 16,101 शिक्षकों की नियुक्ति प्रस्तावित की गई है। अब यदि जिलों से प्राप्त नई रिपोर्ट के आधार पर करीब 2 हजार अतिरिक्त रिक्तियां शामिल होती हैं, तो अभ्यर्थियों के लिए अवसर और बढ़ सकते हैं। किन विषयों में बढ़ सकती हैं सीटें? अतिरिक्त रिक्तियों में गणित, विज्ञान और वाणिज्य जैसे विषयों के शिक्षकों की संख्या अधिक रहने की संभावना जताई जा रही है। सरकारी स्कूलों में इन विषयों के शिक्षकों की कमी लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। विशेष रूप से कक्षा 9 से 12 तक गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान और वाणिज्य के शिक्षकों की जरूरत बताई जा रही है। ऐसे में इन विषयों से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए टीआरई-4 महत्वपूर्ण अवसर बन सकता है। इसके अलावा बंगला, पाली, प्राकृत, मैथिली, भोजपुरी समेत अन्य विषयों में भी उपलब्ध रिक्तियों की जानकारी जिलों से मांगी गई है। करीब 7 हजार स्कूलों में विषयवार शिक्षकों की कमी उपलब्ध जानकारी के अनुसार बिहार में कक्षा 9 से 12 तक करीब 10 हजार विद्यालय हैं। इनमें लगभग 7 हजार स्कूलों में गणित, भौतिकी और रसायन विज्ञान जैसे विषयों के शिक्षकों की कमी बताई जा रही है। यही वजह है कि नई रिक्तियों को अंतिम रूप देते समय केवल मौजूदा खाली पदों को ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की संख्या और भविष्य में सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों के आंकड़ों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। इससे उम्मीद है कि टीआरई-4 में उन विषयों और जिलों को प्राथमिकता मिल सकती है, जहां शिक्षकों की आवश्यकता ज्यादा है। टीआरई-1 से टीआरई-3 तक हुई बड़ी भर्तियां बिहार में शिक्षक भर्ती के पिछले तीन चरणों में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को सरकारी स्कूलों में नियुक्ति मिली है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार टीआरई-1 में करीब 1.20 लाख, टीआरई-2 में लगभग 70 हजार और टीआरई-3 में 66,603 अभ्यर्थियों की नियुक्ति हुई। इन तीन चरणों को मिलाकर राज्य में करीब 2.55 लाख शिक्षकों की भर्ती हो चुकी है। अब टीआरई-4 को लेकर अभ्यर्थियों की नजर अंतिम रिक्तियों और आधिकारिक विज्ञापन पर टिकी हुई है। जिलों से रिपोर्ट मिलने के बाद साफ होगी तस्वीर फिलहाल करीब 2 हजार अतिरिक्त पद बढ़ने की संभावना है, लेकिन इसे अंतिम संख्या नहीं माना जा सकता। शिक्षा विभाग को जिलों से रिक्तियों का पूरा ब्योरा मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने नए पद टीआरई-4 में जोड़े जाएंगे। रिपोर्ट में मौजूदा रिक्त पदों के साथ विद्यार्थियों की संख्या और आने वाले समय में सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों की स्थिति को भी शामिल किया जाएगा। इसके आधार पर विषयवार और जिलावार पदों में बदलाव किया जा सकता है। अभ्यर्थियों के लिए क्या मायने रखता है? अगर करीब 2 हजार अतिरिक्त पद टीआरई-4 में शामिल किए जाते हैं तो कुल रिक्तियों का आंकड़ा 34 हजार से ऊपर जा सकता है। इससे बिहार के शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए चयन के अवसर बढ़ेंगे। हालांकि, अभ्यर्थियों को अंतिम वैकेंसी, विषयवार पदों और पात्रता से संबंधित जानकारी के लिए बीपीएससी के आधिकारिक विज्ञापन का इंतजार करना चाहिए। जिलों से रिपोर्ट आने और विभागीय स्तर पर पदों को अंतिम रूप दिए जाने के बाद ही टीआरई-4 की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। फिलहाल सबसे ज्यादा उम्मीद उन अभ्यर्थियों को है जो गणित, विज्ञान, भौतिकी, रसायन विज्ञान और वाणिज्य जैसे विषयों से जुड़े हैं। अब देखना होगा कि अंतिम अधियाचना में कितने अतिरिक्त पद शामिल होते हैं और बीपीएससी की ओर से टीआरई-4 का आधिकारिक विज्ञापन कब जारी किया जाता है।  

surbhi अगस्त 10, 2026 0
Bihar Teacher Recruitment
बिहार में शिक्षक भर्ती का इंतजार खत्म, जुलाई में आएगा BPSC TRE 4 नोटिफिकेशन

पटना, एजेंसियां। बिहार में सरकारी शिक्षक बनने का सपना देख रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। राज्य के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने साफ कर दिया है कि BPSC TRE 4 भर्ती 2026 का आधिकारिक नोटिफिकेशन जुलाई महीने में जारी किया जाएगा। लंबे समय से भर्ती विज्ञापन का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए यह ऐलान राहत भरा माना जा रहा है।   शिक्षा मंत्री ने कहा  शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग और बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) भर्ती प्रक्रिया की तैयारी में जुटे हुए हैं। जुलाई में नोटिफिकेशन जारी होने के बाद रिक्त पदों की संख्या, आवेदन प्रक्रिया और परीक्षा से जुड़ी सभी जानकारी सार्वजनिक कर दी जाएगी। हालांकि अभी तक सरकार की ओर से पदों की संख्या का आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है।   अभ्यर्थियों का लंबा इंतजार खत्म TRE 4 भर्ती को लेकर पिछले कई महीनों से अभ्यर्थी आंदोलन कर रहे थे। राज्य के कई जिलों में प्रदर्शन और धरना भी हुए। अभ्यर्थियों की मांग थी कि सरकार जल्द से जल्द नई शिक्षक बहाली प्रक्रिया शुरू करे ताकि युवाओं को रोजगार का अवसर मिल सके। हाल ही में मुख्यमंत्री आवास में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के बाद भर्ती प्रक्रिया तेज करने का फैसला लिया गया।   पहली बार लागू होगी डोमिसाइल नीति इस बार की भर्ती का सबसे बड़ा बदलाव डोमिसाइल नीति को माना जा रहा है। सरकार बिहार के मूल निवासियों को प्राथमिकता देने की तैयारी में है। लंबे समय से स्थानीय अभ्यर्थी इसकी मांग कर रहे थे। माना जा रहा है कि इससे राज्य के युवाओं को सीधा लाभ मिलेगा।   किन पदों पर होगी बहाली TRE 4 के तहत प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। इसमें कक्षा 1 से 12 तक के विभिन्न विषयों के पद शामिल होंगे। अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार करीब सवा लाख पदों पर बहाली निकाले, हालांकि अंतिम संख्या नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

Unknown मई 28, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 7, 2026 0