Today in history April 9

Important Events
Important Events: 9 अप्रैल की महत्त्वपूर्ण घटनाएं

1667 – पेरिस में पहली पब्लिक आर्ट प्रदर्शनी लगाई गई। 1669 – मुगल बादशाह औरंगजेब ने सभी हिन्दू स्कूलों और मंदिरों को ध्वस्त करने का आदेश दिया। 1838 – लंदन में नेशनल आर्ट गैलरी खोली गई। 1860 - पहली बार मनुष्य की आवाज़ का अंकन किया गया। 1945 – यूनाइटेड स्टेट्स एटोमिक एनर्जी कमीशन की स्थापना की गई। 1948 – फ़िलिस्तीन के बैतुल मुक़ददस नगर के पश्चिम में दैरे यासीन नामक गावं में ज़ायोनियों ने निर्मम जनसंहार किया। 1953 – वार्नर ब्रदर्स ने 'हाउस ऑफ वैक्स' शीर्षक से पहली 3 डी फिल्म प्रदर्शित की। 1955 – अमेरिका ने नेवादा में परमाणु परीक्षण किया (कन्फर्म नहीं)। 1957 – मिस्र की स्वेज नहर को साफ किया गया और जहाजों के लिए खोला गया।  1965 - कच्छ के रन में भारत-पाक में युद्ध छिड़ा। 2 बटालियन केरिपुबल की एक छोटी सी टुकड़ी ने गुजरात के रन ऑफ कच्छ में सरदार पोस्ट पर पाकिस्तानी ब्रिगेड द्वारा हमले को विफलकऱ 34 पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतरा और 4 को जिंदा गिरफ्तार किया। सैन्य लड़ाई के इतिहास में कभी भी एक छोटी सी सैन्य टुकड़ी इस तरह से एक पूर्ण पैदल सेना ब्रिगेड से नहीं लड़ी। इस संघर्ष में 6 बहादुर केरिपुबल के रण बाँकुरों ने अपनी शहादत दीं। बल के बहादुर जवानों की गाथा को श्रद्धांजलि के रूप में हर वर्ष 9 अप्रैल को शौर्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। 1967 – बोइंग 737 हवाई जहाज की नींव रखी गई। 1972 – सोवियत संघ और इराक ने मैत्री संधि पर हस्ताक्षर किए। 1975 – साउथ कोरिया के आठ लोगों को फांसी पर लटका दिया गया, ये लोग पीपल्स रेव्यूल्यूशनरी पार्टी से संबंध रखते थे। 1988 – अमेरिका ने पनामा पर आर्थिक प्रतिबंध लगाया। 1988 - ली पेंग चीन के प्रधानमंत्री बने। 1989 - एशिया की पहली सम्पूर्ण भूमिगत संजय जलविद्युत परियोजना शुरू की गयी। 1991 – पूर्व सोवियत संघ में शामिल जार्जिया ने अपनी स्वतंत्रा की घोषणा की। 1998 - सऊदी अरब में मीना के पास भगदड़ में 150 से अधिक यात्रियों की मृत्यु। 1999 - नाइजर के राष्ट्रपति इब्राहिम बारे मैनसारा की हत्या, खालसा पंथ की त्रिशती पर विशेष डाक टिकट जारी। 2002 - बहरीन में निगम चुनाव में महिलाओं को भी भाग लेने की छूट मिली। 2003 - स्टीव वॉ सर्वाधिक टेस्ट (157) खेलने वाले खिलाड़ी बने। 2003 – ईराक में शासक सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटा दिया गया। साथ ही, बगदाद के मुख्य चौराहे पर सद्दाम हुसैन के पुतले को भी नीचे गिरा दिया था। 2004 - ईराक में संघर्ष तेज़ पर अमेरिकी काफ़िले पर हमले में 9 लोगों की मृत्यु। 2004 - पुर्तग़ाल के सर्वोच्च न्यायालय ने भारत के कई आपराधिक मामलों में वांछित माफिया सरगना अबू सलेम के भारत प्रत्यर्पण सम्बन्धी आदेश की पुन: समीक्षा करने को कहा। 2005 - ब्रिटेन के युवराज चार्ल्स का विवाह कैमिला के साथ सम्पन्न। 2006 - यूरेनस ग्रह के चारों ओर शनि जैसा वलय होने की पुष्टि। 2006 - पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ़ ने 2007 के चुनावों के बाद भी अपने पद बने रहने की घोषणा की। 2008 - उत्तर प्रदेश सरकार ने दलिया व कॉपियों समेत डेढ़ दर्जन वस्तुओं को वैट से मुक्त किया।  2008 - राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने वर्ष 2007-08 में अपने कारोबार में पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 21% की वृद्धि की। 2008 - नेपाल में बहुप्रतीक्षित संविधान सभा के लिए मतदान शुरू हुआ। 2010 - जम्मू-कश्मीर की विधान सभा ने अंतर ज़िला भर्तियों पर पाबंदी लगाए जाने सबंधी विवादित विधेयक पारित हो गया। 2013 – फ्रांसीसी सीनेट ने समलैंगिक विवाह के लिए विधेयक को मंजूरी दी। 2019 - छत्‍तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में नक्‍सली हमले में भाजपा विधायक भीमा मंडावी और चार सुरक्षाकर्मियों की मौत।  2019 - कश्मीर: किश्तवाड़ अस्पताल में आतंकी हमले में घायल RSS नेता की मौत,  कर्फ्यू लगा। 2019 - क्राउन प्रिंस के करीबी समेत 16 सऊदी अफसरों के अमेरिका में प्रवेश पर पाबंदी लगी। 2020 - ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने लॉकडाउन 14 अप्रैल से आगे 30 अप्रैल तक बढ़ा दिया। ओडिशा ऐसा करने वाला पहला राज्य बना।  2020 - जब समूची दुनिया कोरोना वायरस से जूझ रही है तब राजस्थान का भीलवाड़ा जिला बेहतर मैनेजमेंट व दृढ़ इच्छाशक्ति की बदौलत कोरोना मुक्त हुआ।  2021 - प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री श्री मार्क रूटे ने वर्चुअल सम्मेलन में विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया। 2021 - भारत और चीन वर्तमान समझौतों और नियमों के तहत बकाया मामलों को तेजी से निपटाने पर सहमत हुए। 2021 - म्यांमार में सुरक्षाबलों ने यंगून शहर के पास प्रदर्शनकारियों पर राइफ़ल ग्रेनेड चलाई जिससे 80 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई। 2022 - पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने नेशनल असेंबली में विश्वास मत खोया , इरान खान पाकिस्तान के इतिहास में ऐसे पहले प्रधानमंत्री बने जिन्हें अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटाया गया। 2022 - पिनाका एमके-I (एन्हैंस्ड) रॉकेट सिस्टम और पिनाका एरिया डेनियल म्यूनिशन रॉकेट सिस्टम्स का डीआरडीओ और भारतीय सेना द्वारा सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। 2023 - महाराष्ट्र के अकोला में बाबूजी महाराज मंदिर कैंपस के टिन शेड पर नीम का पेड़ गिरने से सात लोगों की मौत हुई व 30 घायल हुए। 2023 - जोएल एम्बीड को प्रति गेम औसतन 33.1 अंक के साथ लगातार दूसरे सीज़न के लिए एनबीए स्कोरिंग चैंपियन नामित किया गया। 2023 - कुवैती न्यूज ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करते हुए ट्विटर पर अरबी बोलने वाले आभासी समाचार प्रस्तुतकर्ता का अनावरण किया। 2024 - भारतीय तट रक्षक प्रदूषण नियंत्रण जहाज (पीसीवी) समुद्र पहरेदार आसियान देशों में अपनी चल रही विदेशी तैनाती के हिस्से के रूप में ब्रुनेई के मुआरा बंदरगाह पर पहुंचा।   9 अप्रॅल को जन्मे व्यक्ति   1778 – ब्रिटेन के रासायनशास्त्री हमफ़्रे डेविस का जन्म हुआ। उन्होंने अपने शोधकार्य के दौरान सोडियम पोटैशियम कैलशियम मैग्नीज़ियम स्ट्रेन्शियम और बैरियम के तत्वों को दूसरे तत्वों से अलग किया। 1879 – रुस की क्रान्ति के नेता लियून ट्रोटेस्की का जन्म हुआ। 1893 – हिंदी के एक प्रमुख साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन का जन्म हुआ। उन्हें महापंडित की उपाधि दी जाती है। 1916 - एस. ओबुल रेड्डी - आंध्र प्रदेश के 6वें राज्यपाल थे। 1919 - अवधनाम सीता रमण एक भारतीय लेखक और पत्रकार और इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ़ इंडिया के पूर्व संपादक थे। 1929 - शरन रानी - 'हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत' की विद्वान् और सुप्रसिद्ध सरोद वादिका। 1933 - प्रतिमा देवी एक भारतीय अभिनेत्री थीं जिन्हें कन्नड़ फिल्मों में उनके काम के लिए जाना जाता था। 1948 – अभिनेत्री जया बच्चन का जन्म हुआ । 1954 - जयराम रमेश, प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री। 1964 - तीरथ सिंह रावत (भाजपा) उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री।   9 अप्रॅल को हुए निधन   1626 – ब्रिटिश दर्शनशास्त्री फ़्रैंसिस बेकिन का 65 वर्ष की आयु में निधन हुआ। 1756 – बंगाल के नवाब अली बर्दी खान की 80 साल की आयु में निधन हुआ(10 अप्रैल 1756 का भी वर्णन मिलता है)। 1981 - दुर्गाबाई देशमुख, प्रथम महिला नेता। 1984 - भाऊराव देवाजी खोब्रागडे भारतीय भारतीय रिपब्लिकन पार्टी के राजनीतिज्ञ थे। 2009 - शक्ति सामंत, प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता एवं निर्देशक। 2019 - 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' में राजनाथ सिंह का किरदार निभाने वाले एक्टर नवतेज हुंडल का निधन। 2020 - पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हजारीलाल रघुवंशी का 93 वर्ष की उम्र में भोपाल के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। 2021 - महाराष्‍ट्र विधानसभा के दो बार सदस्‍य रह चुके राव साहेब अंतापुरकर का मुम्‍बई में निधन हुआ। 2021 - ब्रिटेन: क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय के पति प्रिंस फिलिप (99 वर्षीय) का निधन हुआ। 2023 - जर्मन - अमेरिकी जैज पियानोवादक, वाइब्राफोनिस्ट, संगीतकार और शिक्षक कार्ल हंस बर्जर (88) का निधन हुआ। 2023 - अमेरिकी कॉलेज फुटबॉल कोच फ्रेड पैनकोस्ट (90) का निधन हुआ। 2024 - न्यूज़ीलैंडर क्रिकेट खिलाड़ी जैक अलाबास्टर (93) का निधन हुआ।   9 अप्रॅल के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव   श्री जयाजी महाराज यात्रा हीरपुर (मूर्तिजापुर)। श्री महादेव यात्रा सिंदखेड़ (अकोला)। श्री अवलियाबा जयंती उमरामोथा (वाशिम)। श्रीमती जया बच्चन जन्म दिवस। श्री राहुल सांकृत्यायन जयन्ती। पराक्रम / शौर्य दिवस 1965 (केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल)।   कृपया ध्यान दें   यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।

Anjali Kumari अप्रैल 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Thick smoke rising near Tehran university after gas station attack causing panic in campus area
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तेहरान में गैस स्टेशन पर हमला, यूनिवर्सिटी परिसर में मचा हड़कंप

surbhi अप्रैल 6, 2026 0