United States

Chinese Navy conducts a ballistic missile launch from a nuclear submarine during a military exercise in the Pacific Ocean.
चीन ने परमाणु पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया, अमेरिका समेत कई देशों ने जताई चिंता

बीजिंग/वॉशिंगटन: चीन ने सोमवार को प्रशांत महासागर में अपनी परमाणु पनडुब्बी (Nuclear Submarine) से बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। इस परीक्षण के बाद अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। चीन ने इसे अपनी नियमित सैन्य अभ्यास गतिविधि का हिस्सा बताया है। परमाणु पनडुब्बी से हुआ मिसाइल परीक्षण चीनी सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) नेवी ने स्थानीय समयानुसार दोपहर 12:01 बजे परमाणु पनडुब्बी से एक रणनीतिक बैलिस्टिक मिसाइल का प्रक्षेपण किया। चीनी सेना का दावा है कि मिसाइल में डमी (बिना विस्फोटक) वारहेड लगाया गया था और उसने प्रशांत महासागर के खुले समुद्री क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्य पर सफलतापूर्वक निशाना साधा। चीन का कहना है कि यह उसकी वार्षिक सैन्य प्रशिक्षण गतिविधियों का हिस्सा था और संबंधित देशों को इसकी पूर्व सूचना दे दी गई थी। अमेरिका ने जताई गंभीर चिंता अमेरिकी विदेश विभाग ने परीक्षण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चीन के इस कदम पर उसकी करीबी नजर थी। अमेरिका ने कहा कि जब दुनिया परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के प्रयास कर रही है, तब चीन अपने परमाणु शस्त्रागार का तेजी से विस्तार कर रहा है। अमेरिकी बयान में कहा गया कि बीजिंग का बिना पर्याप्त पारदर्शिता के परमाणु क्षमताओं का विस्तार वैश्विक सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी उठाए सवाल जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी चीन के मिसाइल परीक्षण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां एशिया-प्रशांत की स्थिरता के लिए चुनौती बन सकती हैं। न्यूजीलैंड ने भी चीन से अधिक पारदर्शिता बरतने और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले सैन्य कदमों पर स्पष्ट जानकारी साझा करने की अपील की है। हथियार नियंत्रण वार्ता की अपील अमेरिका ने चीन से परमाणु हथियार नियंत्रण वार्ता में शामिल होने का आग्रह किया है। साथ ही अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) और अंतरिक्ष प्रक्षेपणों की नियमित जानकारी साझा करने की व्यवस्था अपनाने की भी मांग की है। अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए अपने रक्षा दायित्वों का पालन करता रहेगा। क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे रणनीतिक मिसाइल परीक्षण अमेरिका और चीन के बीच पहले से जारी सैन्य प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकते हैं। दक्षिण चीन सागर, ताइवान जलडमरूमध्य और प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच यह परीक्षण क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई बहस खड़ी कर सकता है।  

Deepshikha जुलाई 7, 2026 0
Westside
टाटा ग्रुप में नई पीढ़ी की एंट्री, माया टाटा को मिली वेस्टसाइड ई-कॉमर्स की कमान

मुंबई, एजेंसियां। टाटा समूह ने नेतृत्व परिवर्तन और डिजिटल विस्तार की रणनीति के तहत नई पीढ़ी को बड़ी जिम्मेदारियां सौंपने की दिशा में अहम कदम उठाया है। समूह की फैशन रिटेल कंपनी ट्रेंट की प्रमुख ब्रांड ‘वेस्टसाइड’ के ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग की कमान अब नोएल टाटा की बेटी माया टाटा संभालेंगी। हालांकि कंपनी की ओर से इस नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन इसे टाटा समूह की दीर्घकालिक उत्तराधिकार योजना और डिजिटल कारोबार को मजबूत करने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।   डिजिटल कारोबार को मिलेगी नई दिशा 37 वर्षीय माया टाटा ने अपने करियर की शुरुआत टाटा कैपिटल से की थी। इसके बाद उन्होंने टाटा डिजिटल में काम करते हुए ई-कॉमर्स, ऑनलाइन रिटेल, ग्राहक अधिग्रहण और डिजिटल प्लेटफॉर्म संचालन का व्यापक अनुभव हासिल किया। टाटा नियो, बिगबास्केट, क्रोमा और टाटा 1एमजी जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ काम करने का अनुभव उन्हें वेस्टसाइड की ओमनीचैनल और ई-कॉमर्स रणनीति का नेतृत्व करने के लिए उपयुक्त बनाता है। उनका मुख्य लक्ष्य वेस्टसाइड की ऑनलाइन मौजूदगी को मजबूत करना और ब्रांड का वैश्विक विस्तार करना होगा।   नई पीढ़ी को मिल रही बड़ी जिम्मेदारियां नोएल टाटा वर्तमान में ट्रेंट के चेयरमैन हैं और नवंबर 2026 में इस पद से हटने की संभावना है। माना जा रहा है कि वे माया के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे। वहीं उनके बेटे नेविल टाटा पहले से ट्रेंट के स्टार बाजार हाइपरमार्केट डिवीजन की कमान संभाल रहे हैं, जबकि बेटी लिआ टाटा इंडियन होटल्स कंपनी (ताज) में वाइस प्रेसिडेंट हैं। तीनों भाई-बहन टाटा ट्रस्ट्स से जुड़ी संस्थाओं के बोर्ड का भी हिस्सा हैं।   वेस्टसाइड का तेजी से विस्तार ट्रेंट की कुल आय में लगभग 40 प्रतिशत योगदान वेस्टसाइड का है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का राजस्व करीब 19,700 करोड़ रुपये रहा। कंपनी हर साल लगभग 50 नए स्टोर खोलने की योजना पर काम कर रही है और उसके स्टोरों की संख्या बढ़कर 321 शहरों में 1,286 हो चुकी है। माया टाटा की नियुक्ति से संकेत मिलते हैं कि टाटा समूह आने वाले वर्षों में ई-कॉमर्स, डिजिटल इंटीग्रेशन और भारतीय ब्रांड्स को वैश्विक पहचान दिलाने पर विशेष जोर देगा।

abhishek singh जुलाई 7, 2026 0
Workers prepare a massive 408-kilogram time capsule for burial at Philadelphia's Independence National Historical Park to mark America's 250th anniversary.
अमेरिका आजादी के 250 साल पूरे होने पर दफनाएगा 408 किलो का टाइम कैप्सूल, 2276 में खुलेगा; जानिए इसकी खासियत

वॉशिंगटन: अमेरिका अपनी आजादी के 250 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक अनोखी ऐतिहासिक पहल करने जा रहा है। 4 जुलाई को फिलाडेल्फिया स्थित इंडिपेंडेंस नेशनल हिस्टोरिकल पार्क में 408 किलोग्राम वजनी एक विशाल टाइम कैप्सूल जमीन में दफनाया जाएगा, जिसे अब से 250 साल बाद यानी 2276 में खोला जाएगा। इस टाइम कैप्सूल का उद्देश्य भविष्य की पीढ़ियों के लिए वर्ष 2026 के अमेरिका की संस्कृति, विज्ञान, तकनीक, समाज और जीवनशैली का दस्तावेज सुरक्षित रखना है। इसकी जानकारी नेशनल पार्क सर्विस के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी दर्ज की गई है, ताकि भविष्य में इसे आसानी से खोजा जा सके। क्या है टाइम कैप्सूल? टाइम कैप्सूल एक विशेष रूप से सीलबंद कंटेनर होता है, जिसमें किसी समय की महत्वपूर्ण वस्तुएं, दस्तावेज और सांस्कृतिक प्रतीक सुरक्षित रखे जाते हैं। इसे वर्षों या सदियों बाद खोला जाता है ताकि आने वाली पीढ़ियां उस दौर के इतिहास और जीवन को समझ सकें। क्या-क्या रखा गया है कैप्सूल में? इस विशेष कैप्सूल में अमेरिका के सभी 50 राज्यों और आम नागरिकों द्वारा चुनी गई कई अनूठी वस्तुएं शामिल की गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से— व्हेल की हड्डी दुनिया के सबसे बड़े जिप्सम रेगिस्तान की रेत राइट बंधुओं के विमान का कपड़ा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़ी भविष्यवाणियां ऐतिहासिक दस्तावेज अमेरिकी समाज और संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने वाली कई अन्य वस्तुएं 250 साल तक सुरक्षित रखने के लिए अपनाई गई विशेष तकनीक वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि कैप्सूल में रखी वस्तुएं ढाई सौ साल बाद भी सुरक्षित रहें। इसके लिए कई वर्षों के शोध के बाद विशेष तकनीक विकसित की गई। कैप्सूल की प्रमुख विशेषताएं: सिलेंडर आकार में बनाया गया है, ताकि कोनों से पानी रिसने की संभावना न रहे। इसे इंडियम धातु से पूरी तरह सील किया गया है, जो सूक्ष्म दरारों को भी बंद कर देती है। अंदर 35 प्रतिशत नियंत्रित नमी रखी गई है, जिससे कागज और अन्य सामग्री सुरक्षित बनी रहे। इसे जमीन के लगभग 10 फीट नीचे दफनाया जाएगा, जहां तापमान अपेक्षाकृत स्थिर रहता है। पानी और जंग से कैसे रहेगा सुरक्षित? कैप्सूल के ऊपर एक अतिरिक्त स्टील सिलेंडर लगाया जाएगा, जिससे दोनों परतों के बीच हवा का कुशन बनेगा। यह संरचना भूजल, नमी और बाढ़ जैसी परिस्थितियों में भी पानी को कैप्सूल तक पहुंचने से रोकेगी। प्रोजेक्ट के प्रमुख वैज्ञानिक माइकल बेरिला के अनुसार, "अगर इस टाइम कैप्सूल तक पानी पहुंच गया, तो इसका मतलब होगा कि फिलाडेल्फिया लगभग छह फीट पानी में डूब चुका होगा।" टाइम कैप्सूल दफनाने का उद्देश्य क्या है? इस परियोजना का उद्देश्य केवल इतिहास को संरक्षित करना नहीं है, बल्कि वर्ष 2026 के अमेरिका की वास्तविक तस्वीर भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचाना भी है। संग्रहालयों की वस्तुएं समय के साथ बदली या स्थानांतरित हो सकती हैं, लेकिन टाइम कैप्सूल को तय समय से पहले नहीं खोला जाता। इससे भविष्य के लोग बिना किसी बदलाव के उस दौर की झलक देख सकेंगे। दुनिया के चर्चित टाइम कैप्सूल क्रिप्ट ऑफ सिविलाइजेशन (अमेरिका): 1936 में बनाया गया यह दुनिया के सबसे प्रसिद्ध टाइम कैप्सूल में माना जाता है। इसे वर्ष 8113 में खोला जाएगा। वेस्टिंगहाउस टाइम कैप्सूल (न्यूयॉर्क): 1939 में दफनाया गया था और इसे 6939 में खोलने की योजना है। भारत का 'कलपात्र': 1973 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने दिल्ली के लाल किले के पास टाइम कैप्सूल दफन कराया था। 1977 में सरकार बदलने के बाद इसे बाहर निकाल लिया गया। पहले खुले टाइम कैप्सूल में क्या मिला था? मैसाचुसेट्स (2015): 220 साल पुराने कैप्सूल से चांदी और तांबे के सिक्के, अखबार, पदक और ऐतिहासिक दस्तावेज मिले। नॉर्वे (2012): 100 साल पुराने पैकेट में स्थानीय इतिहास से जुड़े दस्तावेज और अखबार मिले। बोस्टन (2014): 1901 के टाइम कैप्सूल से पुराने अखबार, तस्वीरें और खेल संबंधी पत्रिकाएं बरामद हुईं। यह नया अमेरिकी टाइम कैप्सूल भविष्य की पीढ़ियों के लिए वर्ष 2026 के अमेरिका का एक ऐतिहासिक संदेश और समय की अमूल्य धरोहर बनकर सुरक्षित रहेगा।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
US President Donald Trump speaks at a US Independence Day event as Iran begins funeral ceremonies for former Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei in Tehran.
खामेनेई के अंतिम संस्कार पर ट्रंप का तंज, बोले- 'हम अच्छे हैं, इसलिए ईरान को एक हफ्ते का समय दिया'

वॉशिंगटन/तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की शुरुआत के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर तीखा हमला बोला। अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले आयोजित एक कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने "इंसानियत" दिखाते हुए ईरान को अंतिम संस्कार के लिए एक सप्ताह का समय दिया। ट्रंप के इस बयान के बाद एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव चर्चा में आ गया है। क्या बोले ट्रंप? अमेरिका की आजादी के 250 वर्ष पूरे होने के अवसर पर माउंट रशमोर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा, "हमने ईरान को पूरी तरह झुका दिया। वे समझौता करना चाहते हैं। हमने इंसानियत दिखाते हुए उन्हें खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए एक हफ्ते की मोहलत दी, क्योंकि हम अच्छे हैं।" हालांकि ट्रंप ने अपने इस दावे के समर्थन में कोई अतिरिक्त जानकारी या आधिकारिक विवरण साझा नहीं किया। तेहरान में शुरू हुए अंतिम संस्कार कार्यक्रम इस बीच, अयातुल्ला अली खामेनेई के कई दिनों तक चलने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रम शनिवार (4 जुलाई) से शुरू हो गए हैं। उनका पार्थिव शरीर तेहरान स्थित ग्रैंड मोसल्ला परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है, जहां बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। सड़कों पर उमड़े हजारों लोग राजधानी तेहरान में सुबह से ही बड़ी संख्या में शोकाकुल लोग ग्रैंड मोसल्ला की ओर बढ़ते दिखाई दिए। कई लोगों ने काले कपड़े पहन रखे थे और उनके हाथों में झंडे तथा बैनर थे। शहर के प्रमुख मार्गों पर खामेनेई की तस्वीरों वाले बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए हैं। शिया परंपरा के अनुसार कई श्रद्धालु छाती पीटकर शोक व्यक्त करते नजर आए। 9 जुलाई को होगा सुपुर्द-ए-खाक ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अंतिम संस्कार की विभिन्न रस्में कई दिनों तक चलेंगी। इसके बाद 9 जुलाई को अयातुल्ला अली खामेनेई को पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। ट्रंप के ताजा बयान पर ईरान की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Iranian and U.S. officials engage in diplomatic efforts amid Middle East tensions, as reports claim senior Iranian negotiators faced alleged security threats during peace talks.
शांति वार्ता के बीच ईरानी नेताओं पर हमले की साजिश! रिपोर्ट में बड़ा दावा, इजरायल की 'टारगेट लिस्ट' में थे अराघची और गालिबाफ

तेहरान/वॉशिंगटन: इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते पर बातचीत के दौरान इजरायल कथित तौर पर ईरान के शीर्ष वार्ताकारों को निशाना बनाने की योजना पर काम कर रहा था। हालांकि, इन दावों की किसी भी पक्ष ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में बड़ा दावा अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने वर्तमान और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघचीऔर संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ कथित तौर पर इजरायल की टारगेट लिस्ट में शामिल थे। दोनों नेता युद्धविराम और शांति वार्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका को आशंका थी कि यदि इन नेताओं पर हमला होता है तो शांति वार्ता पूरी तरह विफल हो सकती है। अमेरिका ने जताई थी चिंता रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल में शुरू हुई वार्ताओं के दौरान वॉशिंगटन ने क्षेत्र के कुछ मित्र देशों के जरिए ईरान को संभावित सुरक्षा खतरे की जानकारी भी पहुंचाई थी। अमेरिकी अधिकारियों को डर था कि वार्ता में शामिल नेताओं पर किसी भी तरह का हमला पूरे कूटनीतिक प्रयास को पटरी से उतार सकता है। ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाने की रणनीति का दावा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान के शीर्ष नेताओं को निशाना बनाना युद्ध की शुरुआत से ही इजरायल की कथित रणनीति का हिस्सा रहा है। दावे के मुताबिक, इजरायल की सूची में वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी और पूर्व विदेश मंत्री कमाल खराजी जैसे अन्य प्रमुख नेताओं के नाम भी शामिल थे। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। पाकिस्तान यात्रा के दौरान भी सुरक्षा का खतरा रिपोर्ट के अनुसार, इसी वर्ष अप्रैल में जब अब्बास अराघची और मोहम्मद बाकर गालिबाफ वार्ता के सिलसिले में इस्लामाबाद पहुंचे थे, तब भी उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई थी। बताया गया है कि पाकिस्तान ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल के विमान को अपने लड़ाकू विमानों की सुरक्षा उपलब्ध कराई थी। वापसी के दौरान ईरानी सुरक्षा एजेंसियों ने कथित खुफिया सूचना के आधार पर विमान को संभावित खतरे की चेतावनी दी। तेहरान की जगह मशहद में उतारा गया विमान रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संभावित सुरक्षा खतरे को देखते हुए ईरानी विमान को तेहरान के बजाय मशहद हवाई अड्डे पर उतारा गया। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने सड़क मार्ग से करीब आठ घंटे की यात्रा कर तेहरान पहुंचकर अपना सफर पूरा किया। आधिकारिक पुष्टि नहीं रिपोर्ट में किए गए सभी दावों की अब तक स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। न तो इजरायल, न अमेरिका और न ही ईरान की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी की गई है। ऐसे में इन दावों को फिलहाल मीडिया रिपोर्ट के तौर पर ही देखा जा रहा है।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
U.S. President Donald Trump speaks during an interview while discussing U.S.-Iran peace talks, sanctions, military operations and the Strait of Hormuz.
ट्रंप का बड़ा दावा: 'ईरान ने लगभग सभी शर्तें मान लीं', बताया क्यों नहीं बंद किया गया होर्मुज स्ट्रेट

वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच हालिया शांति वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने अमेरिका की लगभग सभी प्रमुख शर्तें स्वीकार कर ली हैं और हाल के सैन्य अभियानों के बाद उसकी सैन्य क्षमता और अर्थव्यवस्था दोनों गंभीर रूप से कमजोर हो चुकी हैं। अमेरिकी मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि क्षेत्रीय तनाव और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान अब पहले जैसी स्थिति में नहीं है। उनके मुताबिक, अमेरिका ने लगातार कई दिनों तक सैन्य अभियान चलाकर ईरान की रक्षा क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचाया। 'बार-बार नष्ट किए गए ईरान के रडार' CNBC को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के रडार सिस्टम को कई बार निशाना बनाया। उन्होंने कहा, "जब-जब ईरान ने नया रडार लगाने की कोशिश की, हमने उसे फिर से नष्ट कर दिया। पिछले सप्ताह भी हमने उनका रडार सिस्टम खत्म किया। अब उन्हें तीसरी बार पूरी व्यवस्था फिर से तैयार करनी होगी।" ट्रंप ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में जरूरत पड़ी तो अमेरिका के पास आगे की कार्रवाई के लिए सभी आवश्यक संसाधन मौजूद हैं। 'ईरान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह टूट चुकी है' ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी प्रतिबंधों और सैन्य दबाव का ईरान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि देश में महंगाई करीब 300 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं। ट्रंप के अनुसार, "वे कुछ भी नहीं कमा रहे हैं। उनके शीर्ष नेता जा चुके हैं, दूसरे और तीसरे स्तर के कई नेता भी बाहर हो चुके हैं। उनकी सेना के अधिकांश वरिष्ठ जनरल अब नहीं रहे।" होर्मुज स्ट्रेट क्यों नहीं किया बंद? ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका ने रणनीतिक रूप से होर्मुज स्ट्रेट को बंद नहीं किया, क्योंकि इससे पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर गंभीर असर पड़ सकता था। उन्होंने कहा, "अगर मैं सख्त फैसला लेकर अगले कुछ वर्षों के लिए होर्मुज स्ट्रेट बंद कर देता, जहां से दुनिया का करीब 20 से 21 प्रतिशत तेल गुजरता है, तो कच्चे तेल की कीमत 350 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती और वैश्विक मंदी आ सकती थी।" 'अमेरिकी नौसेना ने सुरक्षित निकाले तेल टैंकर' ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना ने तनावपूर्ण हालात के बावजूद तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की। उन्होंने कहा, "हर रात हमारी नौसेना दक्षिणी मार्ग से जहाजों को सुरक्षित निकाल रही थी। एक रात हमने 22 तेल टैंकरों को सुरक्षित बाहर निकाला। यह बहुत बड़ी मात्रा में तेल था और पूरी कार्रवाई बेहद सफल रही।" शांति वार्ता के बीच बढ़ी कूटनीतिक हलचल ट्रंप के ये बयान ऐसे समय आए हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच हालिया शांति समझौते को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं। हालांकि, ट्रंप के सैन्य और आर्थिक दावों पर ईरान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, उनके कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हो सकी है।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
Firefighters respond to a major fire at a motel in Wooster, Ohio, where three members of an Indian family from Gujarat died due to smoke inhalation.
अमेरिका में दर्दनाक हादसा: ओहायो के मोटल में आग से गुजरात के दंपति और बेटी की मौत, दम घुटने से गई जान

नई दिल्ली/ओहायो: अमेरिका के ओहायो राज्य के वूस्टर शहर में हुए एक भीषण अग्निकांड में गुजरात के एक परिवार के तीन सदस्यों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे में गुजरात के खेड़ा जिले के नडियाद निवासी हितेशभाई सुथार, उनकी पत्नी हिनाबेन सुथार और 20 वर्षीय बेटी ईशानी सुथार की दम घुटने से जान चली गई। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। बेहतर भविष्य की तलाश में गए थे अमेरिका मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हितेशभाई सुथार अपने परिवार के साथ करीब दो वर्ष पहले बेहतर रोजगार और भविष्य की उम्मीद में अमेरिका गए थे। वे ओहायो के वूस्टर स्थित इकोनो लॉज मोटल में कार्यरत थे और परिवार भी वहीं रह रहा था। रात डेढ़ बजे लगी आग पुलिस के मुताबिक, बुधवार देर रात करीब 1:30 बजे मोटल में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग तेजी से पूरे भवन में फैलने लगी। हालात बिगड़ते देख परिवार ने मोटल के फ्रंट डेस्क पर फोन कर मदद मांगी। बताया गया कि उन्हें तत्काल बाथरूम में जाकर पानी चालू रखने और वहीं सुरक्षित रहने की सलाह दी गई। इसके बाद तीनों बाथरूम में चले गए और बचाव दल का इंतजार करने लगे। धुएं से दम घुटने से हुई मौत अग्निशमन विभाग के मौके पर पहुंचने तक आग काफी फैल चुकी थी। बचाव दल जब परिवार तक पहुंचा, तब तक बाथरूम में जहरीले धुएं और गैस के कारण तीनों की दम घुटने से मौत हो चुकी थी। अधिकारियों ने बताया कि आग पर काबू पाने में समय लगने के कारण परिवार को समय रहते बाहर नहीं निकाला जा सका। गुजरात में शोक की लहर इस दर्दनाक घटना की खबर मिलते ही गुजरात के खेड़ा जिले के नडियाद में परिवार के रिश्तेदारों और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों ने परिवार के निधन पर गहरा दुख जताया है। आग लगने के कारणों की जांच जारी अमेरिकी प्रशासन और अग्निशमन विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल आग लगने की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आग किस कारण लगी और क्या मोटल में सुरक्षा संबंधी मानकों का पालन किया गया था या नहीं। शव भारत लाने की प्रक्रिया शुरू परिवार के शवों को भारत लाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन के संपर्क में है और आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने में सहायता कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
Israeli Deputy Foreign Minister Sharren Haskel speaking during an interview, commenting on Iran, regional security, and the ongoing U.S.-Iran diplomatic talks.
इजराइल की चेतावनी: 'ईरान पर भरोसा करना खतरनाक', भारत समेत लोकतांत्रिक देशों को सतर्क रहने की सलाह

यरुशलम/नई दिल्ली: Sharren Haskel ने कहा है कि ईरान पर भरोसा करना आसान नहीं है और भारत सहित सभी लोकतांत्रिक देशों को सतर्क रहना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु एवं क्षेत्रीय तनाव से जुड़े मुद्दों पर बातचीत जारी है। अमेरिका-ईरान वार्ता पर जताया संदेह समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, शैरेन हैस्केल ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अमेरिका-ईरान वार्ता से बहुत अधिक उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने ईरान को एक आक्रामक शासन बताते हुए कहा कि केवल बातचीत पर्याप्त नहीं है, बल्कि भरोसा तभी कायम हो सकता है जब उसके व्यवहार में वास्तविक बदलाव दिखाई दे। इजराइल लंबे समय से लगाता रहा है आरोप इजराइल लगातार ईरान पर आरोप लगाता रहा है कि वह पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ाने, विभिन्न सशस्त्र समूहों का समर्थन करने और अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर, ईरान इन आरोपों को खारिज करता रहा है और कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है तथा इजराइल क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है। दोनों देशों के बीच तनाव 1979 की Iranian Revolution के बाद से लगातार बना हुआ है और हाल के वर्षों में कई बार सैन्य टकराव भी देखने को मिले हैं। भारत का संतुलित रुख भारत ने अब तक पश्चिम एशिया के मुद्दों पर संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई है। भारत के इजराइल के साथ रक्षा, कृषि और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में मजबूत संबंध हैं। वहीं ईरान भारत की ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है। इसी कारण भारत दोनों देशों के साथ अपने संबंध बनाए रखते हुए किसी एक पक्ष का खुला समर्थन करने से बचता रहा है। वैश्विक नजर अमेरिका-ईरान वार्ता पर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विवादों का समाधान तलाशना है। इजराइल लगातार इस प्रक्रिया को लेकर अपनी आशंकाएं व्यक्त करता रहा है। शैरेन हैस्केल का ताजा बयान भी इसी नीति को दोहराता है कि स्थायी भरोसे के लिए केवल कूटनीतिक बातचीत नहीं, बल्कि ईरान के व्यवहार में ठोस बदलाव आवश्यक है।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
U.S. Senator Steve Daines speaks at the U.S.-India Strategic Partnership Forum, praising India as a trusted partner while contrasting his security concerns during visits to China.
'मेरा फोन बीजिंग नहीं, दिल्ली जाता है': अमेरिकी सीनेटर स्टीव डेंस ने भारत को बताया भरोसेमंद साझेदार

वॉशिंगटन: Steve Daines ने भारत की विश्वसनीयता की सराहना करते हुए चीन पर अप्रत्यक्ष निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब वह चीन की यात्रा करते हैं तो अपना मोबाइल फोन वॉशिंगटन में छोड़ देते हैं, लेकिन भारत आते समय वही फोन अपने साथ लेकर आते हैं। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। भारत पर भरोसा, चीन को लेकर सतर्कता Steve Daines ने U.S.-India Strategic Partnership Forum के लीडरशिप समिट में कहा कि उनका यह व्यवहार दोनों देशों के प्रति भरोसे के स्तर को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "जब मैं चीन जाता हूं, तो मेरा यह फोन मेरे साथ नहीं जाता। यह वॉशिंगटन में ही रहता है। लेकिन जब मैं दिल्ली या भारत के किसी भी शहर में आता हूं, तो यही फोन मेरे साथ होता है।" उनके अनुसार, यही एक विश्वसनीय मित्र और रणनीतिक साझेदार की पहचान है। भारत-अमेरिका मिलकर दे सकते हैं चीन को चुनौती सीनेटर डेंस ने कहा कि भारत और अमेरिका मिलकर तकनीक, नवाचार और उन्नत उद्योगों के क्षेत्र में चीन को प्रभावी चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की प्रतिभा और अमेरिका की तकनीकी क्षमता का संयोजन वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प तैयार कर सकता है। चीन से रिश्ते पूरी तरह खत्म नहीं हो सकते डेंस ने माना कि अमेरिका चीन के साथ अपने संबंध पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकता, लेकिन उसे आर्थिक और रणनीतिक जोखिम कम करने की दिशा में काम करना होगा। उनके मुताबिक, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत जैसे भरोसेमंद साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाना आवश्यक है। भारत-अमेरिका साझेदारी को बताया अहम सीनेटर ने कहा कि वॉशिंगटन में चीन से जुड़ी चुनौतियों पर लगातार चर्चा होती रहती है, लेकिन अब अमेरिका को यह तय करना होगा कि भविष्य में किन देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच मजबूत संबंध केवल दोनों लोकतांत्रिक देशों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता, आर्थिक विकास और तकनीकी सहयोग के लिए भी महत्वपूर्ण होंगे।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
Iranian Parliament Speaker Mohammad Bagher Ghalibaf speaks during a televised interview, accusing Israel of trying to derail a reported Iran-US agreement amid ongoing regional tensions.
ईरान का दावा- इजरायल बिगाड़ना चाहता है अमेरिका से हुई डील, गालिबाफ बोले- ट्रंप प्रशासन के भीतर भी मतभेद

  तेहरान: ईरान की संसद के अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने दावा किया है कि इजरायल किसी भी कीमत पर ईरान और अमेरिका के बीच हुए हालिया समझौते को सफल नहीं होने देना चाहता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी इस समझौते को लेकर मतभेद मौजूद हैं। स्विट्जरलैंड की यात्रा से लौटने के बाद एक टीवी इंटरव्यू में गालिबाफ ने कहा कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच हुए 14 बिंदुओं वाले "इस्लामाबाद समझौते" को लागू करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इजरायल इसके रास्ते में बाधा डाल रहा है। 'इजरायल समझौते से घबराया हुआ है' ईरानी समाचार एजेंसी ISNA के अनुसार, गालिबाफ ने कहा कि यह समझौता लेबनान में युद्ध समाप्त करने, विस्थापित लोगों की वापसी सुनिश्चित करने और कब्जे वाले क्षेत्रों से सेना हटाने जैसे प्रावधानों पर आधारित है। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल इस समझौते का विरोध इसलिए कर रहा है क्योंकि यह उसके और अमेरिका के लिए "हार का दस्तावेज" साबित होगा। गालिबाफ ने कहा कि समझौते पर सहमति बनने के बाद इजरायल ने लेबनान में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दीं, ताकि समझौते के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न हो। लेबनान की संप्रभुता पर दिया जोर ईरानी संसद अध्यक्ष ने कहा कि समझौते के अनुसार लेबनान की सुरक्षा की जिम्मेदारी वहां की सरकार के पास होगी और देश की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सीमाओं का सम्मान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विस्थापित नागरिकों को अपने घर लौटने का अधिकार मिलना चाहिए और कब्जा किए गए इलाकों से सैन्य बलों की वापसी होनी चाहिए। 'अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी मतभेद' गालिबाफ ने दावा किया कि समझौते को लेकर अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी अलग-अलग राय है। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio और उपराष्ट्रपति JD Vance का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं। उनके अनुसार, हाल के दिनों में अमेरिकी अधिकारियों की कुछ गतिविधियां इस समझौते की भावना के अनुरूप नहीं थीं। दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं ईरान की ओर से किए गए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिका या इजरायल की ओर से भी इस संबंध में तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। क्षेत्र में जारी तनाव के बीच अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधी घटनाक्रमों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
Logos representing the US Treasury and Indian companies after the United States removed four Indian firms from its Russia-related sanctions list.
अमेरिका ने भारत की 4 कंपनियों को दी बड़ी राहत, रूस से जुड़े प्रतिबंधों की सूची से हटाया नाम

  नई दिल्ली/वॉशिंगटन: अमेरिका ने भारत की चार कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए रूस से जुड़े प्रतिबंधों की सूची से उनके नाम हटा दिए हैं। अमेरिकी वित्त विभाग (यूएस ट्रेजरी) के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने अपनी ताजा समीक्षा के बाद यह फैसला लिया। इन कंपनियों के नाम स्पेशली डिज़िग्नेटेड नेशनल्स एंड ब्लॉक्ड पर्सन्स (SDN) सूची से हटाए गए हैं। इस कदम के बाद इन कंपनियों पर लागू कई वित्तीय और व्यापारिक प्रतिबंध समाप्त हो सकते हैं, जिससे उनके अंतरराष्ट्रीय कारोबार को गति मिलने की उम्मीद है। किन भारतीय कंपनियों को मिली राहत? प्रतिबंध सूची से हटाई गई कंपनियां हैं— RRG Engineering Technologies Pvt. Ltd. (हैदराबाद) Lokesh Machines Ltd. (हैदराबाद) Galaxy Bearings Ltd. (अहमदाबाद) Shaurya Aeronautics Pvt. Ltd. (नई दिल्ली) ये कंपनियां पहले रूस से जुड़े व्यापारिक मामलों के कारण अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आ गई थीं। क्या होगा इसका असर? प्रतिबंध हटने के बाद इन कंपनियों के लिए— अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। वैश्विक वित्तीय लेन-देन पर लगी बाधाएं कम होंगी। विदेशी निवेश प्राप्त करने की संभावनाएं बढ़ेंगी। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में व्यापार करना पहले की तुलना में अधिक सरल होगा। भारत-अमेरिका संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों के लिहाज से सकारात्मक संकेत है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग और निवेश को बढ़ावा मिल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि रूस से जुड़े लेन-देन पर अमेरिका की व्यापक प्रतिबंध नीति अभी भी प्रभावी है और अन्य संस्थाओं या कंपनियों पर लागू नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। OFAC क्या है? ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की वह एजेंसी है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के तहत विभिन्न देशों, संगठनों और व्यक्तियों पर आर्थिक प्रतिबंध लागू करती है। समय-समय पर यह एजेंसी प्रतिबंध सूची की समीक्षा कर उसमें संशोधन भी करती है। भारत की चार कंपनियों को SDN सूची से हटाने का फैसला इसी नियमित समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
GST Collection
सरकार की टैक्स कमाई में बड़ा उछाल, जून में GST संग्रह 13.9% बढ़कर ₹1.94 लाख करोड़

नई दिल्ली, एजेंसियां। जून 2026 में भारत का वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह मजबूत बढ़त के साथ ₹1.94 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गया। वित्त मंत्रालय के अनुसार, जून में सकल जीएसटी संग्रह ₹1,94,812 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष जून 2025 के ₹1,71,105 करोड़ की तुलना में 13.9 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि की सबसे बड़ी वजह आयातित वस्तुओं पर मिलने वाले कर संग्रह में रिकॉर्ड बढ़ोतरी रही।   आयात कर ने बढ़ाई रफ्तार जून के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी सामानों के आयात पर मिलने वाला टैक्स 34.6 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि के साथ ₹60,038 करोड़ तक पहुंच गया। इसके मुकाबले घरेलू कारोबार से मिलने वाला जीएसटी संग्रह 6.5 प्रतिशत बढ़कर ₹1,34,774 करोड़ रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि आयात में तेजी से सरकारी राजस्व को मजबूती मिली है, हालांकि घरेलू मांग में अपेक्षाकृत धीमी बढ़त चिंता का विषय बनी हुई है।   रिफंड के बाद भी बढ़ा शुद्ध राजस्व सरकार ने जून के दौरान करदाताओं को ₹32,436 करोड़ का जीएसटी रिफंड जारी किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 29.1 प्रतिशत अधिक है। इसके बावजूद सरकार का शुद्ध जीएसटी राजस्व ₹1,62,377 करोड़ रहा, जो सालाना आधार पर 11.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।   पहली तिमाही में 6.31 लाख करोड़ से अधिक संग्रह चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में कुल ₹6,31,699 करोड़ का जीएसटी संग्रह दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 8.4 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान आयात कर संग्रह में 26.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि घरेलू कर संग्रह में 2.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।   राज्यों का प्रदर्शन रहा मिला-जुला राज्यों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो महाराष्ट्र सबसे अधिक ₹30,714 करोड़ के संग्रह के साथ शीर्ष पर रहा। उत्तर प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। वहीं सिक्किम, पुडुचेरी, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और तमिलनाडु में जीएसटी संग्रह में गिरावट देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत आयात गतिविधियां अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन दीर्घकालिक संतुलित विकास के लिए घरेलू उपभोग और बाजार मांग को भी गति देना आवश्यक होगा।

abhishek singh जुलाई 1, 2026 0
The US Supreme Court building in Washington, D.C., as it upholds a block on Donald Trump’s birthright citizenship executive order.
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को दिया झटका, अमेरिका में जन्मे बच्चों की नागरिकता बरकरार

  वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को नागरिकता नीति के मुद्दे पर बड़ा कानूनी झटका लगा है। Supreme Court of the United States ने ट्रंप प्रशासन के उस कार्यकारी आदेश पर रोक को बरकरार रखा है, जिसके तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले कुछ बच्चों को जन्मसिद्ध नागरिकता (Birthright Citizenship) से वंचित करने का प्रयास किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि इस मामले में कार्यकारी आदेश को लागू नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही अमेरिका में जन्मे बच्चों को फिलहाल पहले की तरह नागरिकता मिलती रहेगी। क्या था ट्रंप प्रशासन का आदेश? ट्रंप प्रशासन ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर कहा था कि यदि किसी बच्चे के माता-पिता अमेरिकी नागरिक या वैध स्थायी निवासी (ग्रीन कार्ड धारक) नहीं हैं, तो केवल अमेरिका में जन्म लेने के आधार पर उस बच्चे को स्वतः अमेरिकी नागरिकता नहीं मिलेगी। इस आदेश को कई राज्यों, नागरिक अधिकार संगठनों और प्रभावित परिवारों ने अदालत में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मामले पर अंतिम संवैधानिक फैसला अभी शेष हो सकता है, लेकिन फिलहाल निचली अदालत द्वारा लगाई गई रोक जारी रहेगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन जन्मसिद्ध नागरिकता से जुड़े अधिकारों की महत्वपूर्ण संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है। सामूहिक याचिका के बाद शुरू हुई कानूनी लड़ाई यह मामला New Hampshire की एक अदालत में दायर सामूहिक (Class Action) याचिका से शुरू हुआ था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि ट्रंप प्रशासन का आदेश हजारों परिवारों और अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। क्या कहता है 14वां संशोधन? अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के Citizenship Clause के अनुसार: "संयुक्त राज्य अमेरिका में जन्मे या प्राकृतिक रूप से नागरिक बने तथा उसके अधिकार क्षेत्र के अधीन आने वाले सभी व्यक्ति संयुक्त राज्य अमेरिका और उस राज्य के नागरिक हैं, जहां वे निवास करते हैं।" इसी प्रावधान के आधार पर अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता (Birthright Citizenship) का सिद्धांत लंबे समय से लागू है। ट्रंप प्रशासन को लगातार कानूनी चुनौतियां यह हाल के महीनों में ट्रंप प्रशासन की नीतियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सामने आए प्रमुख मामलों में से एक है। नागरिकता नीति पर आया यह फैसला प्रशासन की आव्रजन (इमिग्रेशन) नीति के लिए महत्वपूर्ण झटका माना जा रहा है।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
A digitally created image of a giant golden eagle on the White House Truman Balcony shared by Donald Trump, later questioned as AI-generated.
'गोल्डन गिफ्ट' पर ट्रंप घिरे, फैक्ट चेक में AI-जनरेटेड निकली व्हाइट हाउस की तस्वीर

  वॉशिंगटन: अमेरिका की 250वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ के जश्न के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवादों में आ गए हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर व्हाइट हाउस के लिए एक कथित "Golden Gift" की तस्वीर साझा की, लेकिन बाद में मीडिया की जांच में यह तस्वीर AI-जनरेटेड (कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बनाई गई) पाई गई। क्या था ट्रंप का दावा? ट्रंप ने पोस्ट में व्हाइट हाउस की Truman Balcony पर एक विशाल सुनहरे बाज (Golden Eagle) की तस्वीर साझा की। तस्वीर में बाज अपने फैले हुए पंखों के साथ बालकनी पर बैठा दिखाई देता है, जबकि बालकनी पर अमेरिकी ध्वज वाले एक बड़े शील्ड (कवच) को भी दर्शाया गया है। पोस्ट के साथ ट्रंप ने लिखा: "व्हाइट हाउस के 250वें जन्मदिन के वर्ष के लिए एक गोल्डन गिफ्ट।" इसके बाद व्हाइट हाउस के आधिकारिक X अकाउंट ने भी इस पोस्ट को रीशेयर किया। फैक्ट चेक में क्या सामने आया? अमेरिकी समाचार चैनल CNN की पड़ताल में दावा किया गया कि यह तस्वीर वास्तविक नहीं है। जांच में सामने आए प्रमुख बिंदु: वास्तविक Truman Balcony की बनावट और रेलिंग तस्वीर से मेल नहीं खाती। तस्वीर में दिखाया गया विशाल सुनहरा बाज वास्तव में वहां मौजूद नहीं था। शील्ड पर केवल 11 सितारे दिखाई देते हैं, जबकि अमेरिकी इतिहास के अनुसार मूल 13 उपनिवेशों का प्रतिनिधित्व करने के लिए ऐसे प्रतीकों में सामान्यतः 13 सितारे होते हैं। फोटोग्राफर ने भी पेश किया सबूत फ्रीलांस फोटोग्राफर Andrew Leyden ने ट्रंप की पोस्ट के कुछ समय बाद रात करीब 9:30 बजे ट्रूमैन बालकनी की वास्तविक तस्वीरें साझा कीं। उनकी तस्वीरों में न तो कोई विशाल सुनहरा बाज दिखाई दिया और न ही वह शील्ड, जिसका जिक्र ट्रंप की पोस्ट में था। नए पासपोर्ट डिजाइन पर भी चर्चा इसी बीच ट्रंप ने अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक कथित 'लिमिटेड एडिशन' अमेरिकी पासपोर्ट का डिजाइन भी साझा किया। पोस्ट किए गए डिजाइन में: ट्रंप को ऐतिहासिक Resolute Desk पर बैठे हुए दिखाया गया है। पृष्ठभूमि में United States Declaration of Independence का चित्रण है। नीचे ट्रंप के हस्ताक्षर भी प्रदर्शित किए गए हैं। ट्रंप ने इसके साथ संदेश लिखा: "Welcome, but be good." AI कंटेंट को लेकर फिर छिड़ी बहस इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हस्तियों और सरकारी संस्थानों द्वारा साझा की जाने वाली AI-जनरेटेड तस्वीरों की पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि, इस मामले में व्हाइट हाउस या ट्रंप की ओर से AI-जनरेटेड तस्वीर साझा किए जाने के आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
Italian Prime Minister Giorgia Meloni responds to comments by US President Donald Trump during a media interaction in Rome.
'अमेरिका के सामने नहीं झुकेंगे', ट्रंप के आरोपों पर जॉर्जिया मेलोनी का पलटवार, कहा- साझेदारी बराबरी की होती है

  रोम: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इटली और अमेरिका के संबंध बराबरी और साझेदारी पर आधारित हैं, न कि किसी के सामने झुकने पर। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार न तो अमेरिका विरोधी है और न ही किसी विदेशी नेता के दबाव में काम करती है। क्या है पूरा विवाद? विवाद की शुरुआत तब हुई जब डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ कई बार तस्वीर खिंचवाने का अनुरोध किया था। ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि मेलोनी ऐसा अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए कर रही थीं। मेलोनी ने दिया जवाब एक इटैलियन समाचार संस्थान को दिए इंटरव्यू में मेलोनी ने ट्रंप के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, "मैं न पहले किसी के सामने झुकी थी और न आगे झुकूंगी। अमेरिका के साथ हमारा रिश्ता मजबूत साझेदारी और पारस्परिक सम्मान पर आधारित है।" उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की ताकत उनकी एकजुटता में है और उन्होंने हमेशा इसी सोच के साथ काम किया है। 'लोकप्रियता विदेश नीति से तय नहीं होती' मेलोनी ने ट्रंप के इस दावे को भी खारिज किया कि उनकी लोकप्रियता अमेरिका के खिलाफ रुख अपनाने की वजह से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि उनकी लोकप्रियता किसी विदेशी नेता के साथ रिश्तों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर आधारित है कि उनकी सरकार इटली के राष्ट्रीय हितों की कितनी मजबूती से रक्षा करती है। उन्होंने कहा, "मैंने हमेशा इटली के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और आगे भी देती रहूंगी।" सैन्य समझौतों पर भी दिया बयान इटली की प्रधानमंत्री ने अमेरिका और इटली के बीच मौजूद सैन्य समझौतों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इटली में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों से जुड़े समझौतों का सम्मान किया जाएगा और उन्हें एकतरफा तरीके से बदला नहीं जा सकता। उन्होंने दोहराया कि इटली एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है तथा उसकी विदेश नीति राष्ट्रीय हितों के आधार पर तय होती है। ट्रंप को अप्रत्यक्ष संदेश मेलोनी ने बिना नाम लिए ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी लोकप्रियता को लेकर किसी और को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है और बेहतर होगा कि हर नेता अपने काम पर ध्यान दे। अमेरिका दौरा भी टला इस विवाद के बीच इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने अपना प्रस्तावित अमेरिका दौरा भी रद्द कर दिया। सरकार की ओर से दौरा रद्द करने का आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
US President Donald Trump and Iranian Foreign Ministry officials amid conflicting statements over possible nuclear talks in Doha.
दोहा वार्ता पर ट्रंप के दावे को ईरान ने किया खारिज, कहा- अमेरिका से किसी बैठक का कार्यक्रम नहीं

  तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता को लेकर एक बार फिर विरोधाभासी बयान सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच कतर की राजधानी दोहा में जल्द बातचीत होगी, लेकिन ईरान ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। तेहरान ने स्पष्ट कहा है कि अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर कोई बैठक तय नहीं की गई है। ट्रंप बोले- दोहा में होगी बातचीत वॉशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित वार्ता का मुख्य विषय ईरान का परमाणु कार्यक्रम होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करे और ईरान भी इस बात से सहमत है। ट्रंप के मुताबिक, इसी मुद्दे पर दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत होगी। Truth Social पर भी किया दावा ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर भी पोस्ट कर लिखा कि ईरान ने बैठक का अनुरोध किया है और मंगलवार को दोहा में बातचीत होगी। उन्होंने यह नहीं बताया कि बैठक में किन-किन प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। ईरान ने तुरंत किया खंडन ट्रंप के दावे के कुछ ही समय बाद ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इसे खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर कोई वार्ता या बैठक निर्धारित नहीं है। उनके बयान के बाद दोहा में संभावित बातचीत को लेकर स्थिति और अधिक अस्पष्ट हो गई है। संघर्षविराम के बीच बढ़ी अनिश्चितता दोनों देशों के बीच लंबे समय तक चले तनाव और सैन्य टकराव के बाद हाल ही में संघर्षविराम की स्थिति बनी है। ऐसे समय में वार्ता को लेकर अमेरिका और ईरान के अलग-अलग दावों ने कूटनीतिक प्रयासों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की तैयारी की खबर समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर संभावित प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर सकते हैं। वहीं, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान इस सप्ताह कतर में एक तकनीकी टीम भेजने की तैयारी कर रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस तकनीकी दल की यात्रा का अमेरिकी अधिकारियों की किसी संभावित मौजूदगी या वार्ता से कोई संबंध नहीं है। फिलहाल तस्वीर साफ नहीं अमेरिका और ईरान की ओर से सामने आए अलग-अलग बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दोनों देशों के बीच औपचारिक बातचीत को लेकर अभी कोई स्पष्ट सहमति दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में दोहा में संभावित वार्ता होगी या नहीं, इस पर फिलहाल संशय बना हुआ है।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
US President Donald Trump and Iranian officials amid conflicting claims over possible US-Iran talks in Doha.
ट्रंप का दावा- दोहा में बैठक के लिए ईरान ने किया अनुरोध, तेहरान ने किया खंडन

  वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच संभावित वार्ता को लेकर विरोधाभासी दावे सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत का अनुरोध किया है और दोनों देशों के बीच कतर की राजधानी दोहा में बैठक होगी। ईरान ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि इस सप्ताह किसी भी तरह की बैठक या वार्ता तय नहीं है। ट्रंप बोले- ईरान ने मांगी बातचीत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान ने अमेरिका से बैठक का अनुरोध किया है और यह बैठक अगले दिन दोहा में आयोजित होगी। ट्रंप का यह दावा ऐसे समय सामने आया है, जब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट पर हो सकती है चर्चा यदि अमेरिका और ईरान के बीच दोहा में वार्ता होती है तो उसका मुख्य एजेंडा होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव को कम करना हो सकता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हाल के दिनों में क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और सुरक्षा चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ी है। अमेरिकी अधिकारी का दावा- सैन्य गतिविधियां रोकने पर सहमति समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि दोनों पक्षों ने फिलहाल सैन्य गतिविधियां रोकने पर सहमति जताई है। वहीं, एक अन्य अधिकारी ने कहा कि तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी रहने तक होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी रह सकती है। ईरान ने बैठक की खबरों को किया खारिज दूसरी ओर, ईरान ने ट्रंप के दावे को सिरे से नकार दिया है। सरकारी प्रसारक आईआरआईबी (IRIB) के मुताबिक, ईरान के उप विदेश मंत्री (कानूनी एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों) काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट कहा कि इस सप्ताह किसी भी कार्य समूह की बैठक निर्धारित नहीं है। उन्होंने कहा कि कतर के साथ नियमित संपर्क और परामर्श जारी है, लेकिन दोहा में किसी तकनीकी बैठक की पुष्टि नहीं की जा सकती। उनके अनुसार, औपचारिक वार्ता तभी शुरू होगी जब दोनों पक्ष समय, स्थान और अन्य आवश्यक शर्तों पर सहमत होंगे। कतर निभा रहा है मध्यस्थ की भूमिका अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के प्रयासों में कतर लगातार मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने के लिए कूटनीतिक स्तर पर संपर्क जारी है और विभिन्न माध्यमों से बातचीत की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। विरोधाभासी दावों से बनी असमंजस की स्थिति ट्रंप के दावे और ईरान के आधिकारिक खंडन के बाद संभावित वार्ता को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। एक ओर अमेरिका बैठक होने की बात कह रहा है, जबकि ईरान किसी भी निर्धारित वार्ता से इनकार कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के रुख और कूटनीतिक प्रयासों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
US and Iranian officials agree to pause military operations ahead of high-level talks in Doha aimed at easing regional tensions.
मिडिल ईस्ट संकट पर राहत के संकेत! अमेरिका और ईरान हमले रोकने पर सहमत, दोहा में होगी अहम वार्ता

  वॉशिंगटन/तेहरान: मध्य पूर्व में कई दिनों से जारी सैन्य तनाव के बीच राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान ने फिलहाल एक-दूसरे के खिलाफ सभी सैन्य हमले रोकने पर सहमति जताई है। दोनों देशों के बीच यह सहमति ऐसे समय बनी है, जब हाल के दिनों में सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र में युद्ध की आशंकाएं बढ़ा दी थीं। अमेरिकी मीडिया कंपनी Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पक्ष अब संघर्ष को और बढ़ाने के बजाय कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमत हुए हैं। इसी सिलसिले में मंगलवार (30 जून) को कतर की राजधानी दोहा में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच अहम बैठक होगी। फिलहाल रुकी सैन्य कार्रवाई रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान ने अस्थायी रूप से सभी सैन्य (काइनेटिक) गतिविधियों पर रोक लगाने का फैसला किया है। यह कदम उस अंतरिम समझौते को बचाने की कोशिश माना जा रहा है, जिसकी घोषणा दोनों देशों ने करीब 11 दिन पहले लंबे तनाव को कम करने के उद्देश्य से की थी। समझौते के बाद भी दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए सीमित सैन्य कार्रवाई की थी, जिससे युद्धविराम पर सवाल उठने लगे थे। अब दोनों देशों ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए बातचीत का रास्ता चुना है। दोहा में होगी अहम बैठक अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता होगी। पहले यह बैठक स्विट्जरलैंड में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक चर्चा के लिए प्रस्तावित थी, लेकिन हालिया सैन्य घटनाक्रम के बाद इसका स्थान बदलकर दोहा कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़े विवादों और समुद्री सुरक्षा पर चर्चा होगी। समुद्री व्यापार रहेगा सामान्य अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्टि की है कि बातचीत शुरू होने तक दोनों देश सैन्य कार्रवाई से परहेज करेंगे। एक अधिकारी ने कहा कि सभी सैन्य गतिविधियों को फिलहाल रोकने पर सहमति बन गई है। दूसरे अधिकारी के अनुसार, दोनों पक्ष तनाव कम करने के लिए पीछे हटेंगे और अंतरराष्ट्रीय समुद्री जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी रहेगी, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर तत्काल असर पड़ने की आशंका कम हो गई है। होर्मुज विवाद रहेगा वार्ता का केंद्र दोहा में होने वाली बैठक का मुख्य फोकस होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े विवादों का समाधान होगा। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित कर सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोहा वार्ता सकारात्मक रहती है, तो मध्य पूर्व में हालिया सैन्य तनाव कम करने और व्यापक कूटनीतिक समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।  

Deepshikha जून 29, 2026 0
Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi speaks as Iran warns of halting US talks following American military strikes and rising tensions in the Gulf.
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का पलटवार, बहरीन-कुवैत पर ड्रोन और मिसाइल हमले; वार्ता रोकने की चेतावनी

  तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बहरीन और कुवैत की ओर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई जारी रखी, तो दोनों देशों के बीच चल रही वार्ता पूरी तरह रोक दी जाएगी। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ा विवाद ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के संचालन और सुरक्षा पर उसका नियंत्रण है तथा उसकी सीधी भागीदारी के बिना इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को दोबारा खोलने की किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा। इसी मुद्दे को लेकर क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान का आरोप है कि अंतरिम समझौते के बावजूद कुछ देशों ने उसकी भूमिका को नजरअंदाज करते हुए जलडमरूमध्य में नई व्यवस्था लागू करने की कोशिश की, जिसके बाद हालात और बिगड़ गए। ओमान मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर भी हमले ईरान ने संयुक्त राष्ट्र समर्थित ओमान समुद्री मार्ग से गुजर रहे जहाजों पर भी दो बार हमले किए हैं। लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस जलमार्ग को वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मार्ग मानता रहा है। एक समय दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस की लगभग पांचवें हिस्से की आपूर्ति इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरती थी, इसलिए क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। विदेश मंत्री अराघची का सख्त संदेश इराक यात्रा के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप से हालात और खराब होंगे। उन्होंने कहा कि यदि ईरान की मौजूदा व्यवस्था से अलग कोई नया तंत्र लागू करने की कोशिश की गई, तो इससे जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने में देरी होगी और क्षेत्रीय टकराव और बढ़ सकता है। कुवैत ने ड्रोन और मिसाइलें मार गिराने का दावा किया कुवैत की सेना के अनुसार, रविवार सुबह अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद ईरान की ओर से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों और कई ड्रोन को उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने सफलतापूर्वक रोक दिया। अधिकारियों ने बताया कि इस हमले में किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। कुवैत में अमेरिकी सेना का एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा मौजूद है, जिसके कारण यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है। बहरीन में रिहायशी इमारत को नुकसान बहरीन के गृह मंत्रालय ने बताया कि ईरानी हमलों के दौरान अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट स्थित एक बहुमंजिला रिहायशी इमारत क्षतिग्रस्त हुई। इस घटना में किसी की मौत नहीं हुई। सरकार की ओर से जारी तस्वीरों में इमारत की ऊपरी मंजिल को भारी नुकसान पहुंचा हुआ दिखाई दिया। बहरीन ने हमले की निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर की कार्रवाई अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, समुद्र में एक व्यापारी पोत पर हुए हमले के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य निगरानी तंत्र, संचार नेटवर्क, हवाई रक्षा प्रणालियों, ड्रोन भंडारण केंद्रों और बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमताओं को निशाना बनाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्धविराम समझौते के उल्लंघन के जवाब में ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों सहित कई रणनीतिक सैन्य प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई है। वार्ता पर मंडराया संकट ईरान ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि अमेरिकी सैन्य अभियान जारी रहता है, तो दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक वार्ता पूरी तरह ठप हो सकती है। ऐसे में पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।  

Deepshikha जून 29, 2026 0
US President Donald Trump meets NATO Secretary General Mark Rutte amid tensions over support for Iran-related military action.
पैसा नहीं, वफादारी चाहिए... ईरान युद्ध में साथ न देने पर NATO पर भड़के ट्रंप, मार्क रूटे ने दिया जवाब

  वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के दौरान अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने पर नाटो सहयोगी देशों पर नाराजगी जताई है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को अपने सहयोगियों से आर्थिक मदद नहीं, बल्कि वफादारी और राजनीतिक समर्थन की उम्मीद थी। उनके इस बयान पर नाटो महासचिव Mark Rutte ने यूरोपीय देशों का बचाव करते हुए कहा कि गठबंधन के सदस्य अमेरिका के साथ खड़े रहे हैं और उन्होंने सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। व्हाइट हाउस में ट्रंप ने जताई नाराजगी व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में नाटो प्रमुख मार्क रूटे के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ अभियान में अमेरिका ने अपने दम पर कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि अमेरिका को सैन्य सहायता की जरूरत नहीं थी, लेकिन सहयोगी देशों की ओर से समर्थन का संकेत मिलना महत्वपूर्ण था। ट्रंप ने कहा कि यदि यूरोपीय देश यह कहते कि वे अमेरिका के साथ खड़े हैं या किसी भी तरह मदद के लिए तैयार हैं, तो यह गठबंधन की एकजुटता का संदेश होता। उन्होंने कहा कि इस मामले में उन्हें सहयोगियों से निराशा हाथ लगी। स्पेन, इटली, ब्रिटेन और जर्मनी पर साधा निशाना बैठक के दौरान ट्रंप ने कई नाटो देशों की आलोचना करते हुए कहा कि कुछ सदस्य देश सुरक्षा के लाभ तो उठाना चाहते हैं, लेकिन जिम्मेदारियों को साझा करने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने विशेष रूप से स्पेन, इटली, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस का उल्लेख करते हुए कहा कि कई देश रक्षा सहयोग और सामूहिक जिम्मेदारियों को लेकर अपेक्षित भूमिका नहीं निभा रहे हैं। ट्रंप ने आरोप लगाया कि कुछ सहयोगी देशों को लगता है कि वे बिना पर्याप्त योगदान दिए भी अमेरिकी सुरक्षा छतरी का लाभ ले सकते हैं। “हमें पैसे नहीं, वफादारी चाहिए” एक पत्रकार के सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को सहयोगी देशों के धन की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना अमेरिका के पास है और उसे आर्थिक मदद की जरूरत नहीं पड़ती। ट्रंप ने कहा कि उनकी अपेक्षा केवल इतनी है कि जब अमेरिका अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए आगे आए, तो बदले में उसे राजनीतिक और रणनीतिक समर्थन मिले। उन्होंने कहा कि यूरोप में तैनात हजारों अमेरिकी सैनिक वहां के देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मौजूद हैं। नाटो प्रमुख मार्क रूटे ने किया सहयोगियों का बचाव ट्रंप की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए नाटो महासचिव मार्क रूटे ने कहा कि यूरोपीय देशों ने अमेरिका का समर्थन किया है और ईरान की परमाणु गतिविधियों से पैदा होने वाला खतरा केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं था, बल्कि वैश्विक सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा था। रूटे ने कहा कि अभियान के दौरान यूरोप स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि यूरोपीय आधारभूत ढांचे और एयरबेस का उपयोग अमेरिकी अभियानों के लिए किया गया, जिससे मिशन को रणनीतिक सहायता मिली। रक्षा खर्च में बढ़ोतरी को बताया ‘ट्रंप ट्रिलियन’ मार्क रूटे ने दावा किया कि ट्रंप के पहले कार्यकाल के बाद से यूरोपीय देशों और कनाडा ने रक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी की है। उन्होंने इस अतिरिक्त निवेश को “ट्रंप ट्रिलियन” का नाम देते हुए कहा कि सहयोगी देश धीरे-धीरे सुरक्षा बोझ साझा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। रूटे के अनुसार, यूरोप और कनाडा ने रक्षा क्षेत्र में लगभग 1.2 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त निवेश किया है। इसके अलावा अमेरिकी रक्षा कंपनियों को भी बड़े पैमाने पर सैन्य उपकरणों के ऑर्डर दिए गए हैं। नाटो शिखर सम्मेलन से पहले बढ़ी बयानबाजी ट्रंप और रूटे के बीच यह सार्वजनिक मतभेद ऐसे समय सामने आया है, जब नाटो का अगला शिखर सम्मेलन 7-8 जुलाई को Ankara में आयोजित होने वाला है। सम्मेलन में गठबंधन के 32 सदस्य देशों के नेता भाग लेंगे और रक्षा खर्च, सामूहिक सुरक्षा तथा वैश्विक संकटों पर चर्चा करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के ताजा बयान नाटो के भीतर रक्षा जिम्मेदारियों और अमेरिका की भूमिका को लेकर चल रही पुरानी बहस को फिर से तेज कर सकते हैं।  

Deepshikha जून 25, 2026 0
A commercial oil tanker passes through the Strait of Hormuz amid rising tensions between the United States and Iran.
अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट का दावा- होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की पकड़ बड़ी चुनौती, परमाणु हथियार से भी ज्यादा चिंता का विषय

  वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते से पहले अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक नई रिपोर्ट ने पश्चिम एशिया की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान अब किसी भी समय दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), में समुद्री यातायात को बाधित करने की क्षमता रखता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की यह क्षमता केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति के लिए भी बड़ा जोखिम बन सकती है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में कुछ खुफिया सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि होर्मुज पर ईरान का प्रभाव अमेरिका के लिए परमाणु हथियारों से भी बड़ी रणनीतिक चुनौती बनकर उभरा है। दुनिया के 20 फीसदी तेल व्यापार का प्रमुख मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का परिवहन इसी समुद्री रास्ते से होता है। ऐसे में इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों, आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक महंगाई पर पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के पास अब भी बड़ी संख्या में मिसाइलें, ड्रोन, मिसाइल लॉन्चर और तेज गति वाली नौकाएं मौजूद हैं, जिनकी मदद से वह इस समुद्री क्षेत्र में दबाव बनाने की क्षमता रखता है। अमेरिका-ईरान समझौते पर टिकी नजरें अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संकेत दिया है कि समझौते के प्रमुख बिंदुओं में ईरान का परमाणु हथियार नहीं रखने का वादा और होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखना शामिल है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह आने वाले दिनों में समझौते का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक कर सकते हैं। अभी तक इस समझौते के आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। विशेषज्ञों की चिंता बरकरार भले ही अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता आगे बढ़ रही हो, लेकिन ऊर्जा विशेषज्ञों और सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की रणनीतिक पकड़ भविष्य में भी वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए अनिश्चितता का बड़ा कारण बनी रह सकती है।  

Deepshikha जून 18, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0