Donald Trump ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिका की सैन्य ताकत पर सवाल उठाने वालों पर तीखा हमला बोला है। चीन दौरे पर रवाना होने से पहले ट्रंप ने कहा कि जो लोग यह दावा कर रहे हैं कि ईरान सैन्य मोर्चे पर अमेरिका के खिलाफ बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, वे “देशद्रोही” मानसिकता दिखा रहे हैं। ट्रंप ने कहा: “ये अमेरिकी कायर हैं जो हमारे देश के खिलाफ हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयान ईरान को “झूठी उम्मीद” देते हैं, जबकि वास्तविक स्थिति बिल्कुल अलग है। “ईरान की नेवी और एयर फोर्स खत्म” ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरान की नौसैनिक और वायु सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। उनके मुताबिक: ईरान के 159 नौसैनिक जहाज अब नष्ट हो चुके हैं ईरानी एयर फोर्स लगभग खत्म हो गई है सैन्य तकनीक और नेतृत्व को भारी नुकसान हुआ है हालांकि ट्रंप के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ईरान की आर्थिक स्थिति पर भी टिप्पणी ट्रंप ने कहा कि ईरान अब आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि केवल “लूजर और एहसान फरामोश लोग” ही अमेरिका की सैन्य क्षमता पर सवाल उठा सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान को घरेलू आलोचकों और विपक्षी नेताओं पर सीधा हमला माना जा रहा है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी किया बचाव इस बीच Pete Hegseth ने भी ट्रंप प्रशासन की सैन्य रणनीति का बचाव किया। सीनेट एप्रोप्रिएशन सबकमेटी के सामने पेश होते हुए उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत और Strait of Hormuz में तनाव के बावजूद अमेरिका के पास अभी भी “सभी कार्ड” मौजूद हैं। इंडो-पैसिफिक सहयोगियों को संदेश पीट हेगसेथ ने Dan Caine के साथ सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि अमेरिका इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने सहयोगियों को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप का प्रस्तावित चीन दौरा वैश्विक राजनीति और सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। बढ़ते तनाव से वैश्विक चिंता अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजारों, तेल कीमतों और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ा, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
कमजोर संकेतों के साथ खुल सकता है बाजार BSE Sensex और NIFTY 50 में शुक्रवार को दबाव देखने को मिल सकता है। ग्लोबल बाजारों में कमजोरी, अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। गिफ्ट निफ्टी करीब 102 अंकों की गिरावट के साथ 24,283 के आसपास कारोबार करता दिखा, जिससे घरेलू बाजार में कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी बाजार की टेंशन मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने दुनियाभर के बाजारों को प्रभावित किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य में हालिया सैन्य घटनाओं के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। इसका असर कमोडिटी मार्केट पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कच्चा तेल 100 डॉलर के पार ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 101 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह चिंता की बात मानी जा रही है, क्योंकि इससे महंगाई और लागत दोनों बढ़ सकती हैं। सोने और डॉलर में भी तेजी अनिश्चितता बढ़ने के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं। सोने की कीमतों में तेजी देखी गई है, जबकि डॉलर इंडेक्स भी मजबूत बना हुआ है। ग्लोबल बाजारों का क्या रहा हाल? अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए। टेक शेयरों में मुनाफावसूली और भू-राजनीतिक तनाव का असर वॉल स्ट्रीट पर देखने को मिला। Dow Jones Industrial Average में 0.63% की गिरावट S&P 500 0.38% नीचे बंद NASDAQ Composite 0.13% टूटा एशियाई बाजारों में भी कमजोरी रही। जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते दिखे। आज आएंगे इन बड़ी कंपनियों के नतीजे शुक्रवार को कई दिग्गज कंपनियां अपने चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे जारी करेंगी। बाजार की नजर खासतौर पर इन कंपनियों पर रहेगी: State Bank of India (SBI) Titan Company Hyundai Motor India Swiggy MCX India Urban Company इन शेयरों में दिख सकता है एक्शन BSE India कंपनी का चौथी तिमाही का मुनाफा सालाना आधार पर 61% से ज्यादा बढ़ा है, जिसके बाद शेयर चर्चा में रह सकता है। Lenskart मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी में बड़ी ब्लॉक डील हो सकती है। इससे शेयर बाजार में हलचल बढ़ सकती है। Cochin Shipyard कंपनी की सहयोगी इकाई को नया बड़ा ऑर्डर मिला है, जिससे निवेशकों की नजर इस शेयर पर बनी रहेगी। Britannia Industries एफएमसीजी कंपनी ने मजबूत तिमाही नतीजे पेश किए हैं। मुनाफे में 21% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। PNC Infratech कंपनी को लखनऊ विकास प्राधिकरण से बड़ा EPC प्रोजेक्ट मिला है, जिससे शेयर में तेजी देखने को मिल सकती है। निवेशकों को किन बातों पर रखनी होगी नजर? मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार आज का कारोबार काफी उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है। निवेशकों को अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर बनाए रखनी होगी।
तेहरान में सत्ता का बदलता समीकरण Iran की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में असली ताकत अब पारंपरिक राजनीतिक और धार्मिक नेतृत्व से हटकर सैन्य ढांचे के पास जाती दिख रही है। विशेष रूप से Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) का प्रभाव तेजी से बढ़ा है, जिससे सरकार के फैसलों पर सेना का दबदबा मजबूत हुआ है। अहमद वहिदी का उभार, बने सबसे प्रभावशाली चेहरा इस बदलाव के केंद्र में Ahmad Vahidi हैं, जिन्हें IRGC का प्रमुख बनाया गया है। वहिदी पहले भी ईरान के रक्षा मंत्री और कुद्स फोर्स जैसे अहम सैन्य संगठनों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुके हैं। अब उन्हें देश की सुरक्षा, विदेश नीति और युद्ध रणनीति के बड़े फैसलों का प्रमुख चेहरा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान हालात में वही तय कर सकते हैं कि ईरान संघर्ष बढ़ाएगा या बातचीत का रास्ता चुनेगा। IRGC का बढ़ता नियंत्रण, सरकार पर हावी सैन्य शक्ति Islamic Revolutionary Guard Corps अब सिर्फ सैन्य बल नहीं रह गया है, बल्कि यह आर्थिक, खुफिया और विदेश नीति जैसे क्षेत्रों में भी गहरी पकड़ रखता है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि कई बार सरकार के कूटनीतिक फैसलों को भी IRGC के सख्त रुख के कारण बदला या रोका गया है। सुप्रीम लीडर की भूमिका पर भी उठे सवाल ईरान में औपचारिक रूप से सर्वोच्च शक्ति सुप्रीम लीडर के पास होती है। वर्तमान में Mojtaba Khamenei इस पद पर हैं, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि असली नियंत्रण अब पर्दे के पीछे IRGC के हाथों में जाता दिख रहा है। इससे धार्मिक नेतृत्व की भूमिका सीमित होकर प्रतीकात्मक बनने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिका-ईरान संबंधों पर असर United States और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच यह बदलाव बेहद अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जब निर्णय लेने की ताकत सैन्य नेतृत्व के पास होती है, तो बातचीत अधिक कठोर और अनिश्चित हो सकती है। इससे शांति वार्ता और सीजफायर प्रयासों पर भी असर पड़ सकता है। वैश्विक राजनीति में बढ़ेगा असर अहमद वहिदी और IRGC का बढ़ता दबदबा यह संकेत देता है कि ईरान अब ज्यादा सख्त और आक्रामक नीति अपना सकता है। इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट ही नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा समीकरणों पर भी देखने को मिल सकता है।
US-Iran Tension: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ कर दिया है कि ईरान के बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकाबंदी तब तक नहीं हटेगी, जब तक दोनों देशों के बीच कोई ठोस समझौता नहीं हो जाता। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब युद्ध खत्म करने के लिए प्रस्तावित दूसरे दौर की वार्ता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ट्रंप का सख्त संदेश डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा: “नाकाबंदी ईरान को पूरी तरह तबाह कर रही है। वे हर दिन 500 मिलियन डॉलर गंवा रहे हैं। यह लंबे समय तक नहीं चल सकता।” ट्रंप के इस बयान से साफ है कि अमेरिका नाकाबंदी को एक दबाव की रणनीति के रूप में इस्तेमाल कर रहा है, ताकि ईरान को बातचीत और समझौते के लिए मजबूर किया जा सके। ईरान ने भी रखी शर्त दूसरी ओर Iran ने भी स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमेरिकी नाकाबंदी नहीं हटाई जाती, तब तक वह किसी भी वार्ता में शामिल नहीं होगा। ईरान के इस रुख से दोनों देशों के बीच गतिरोध (Deadlock) की स्थिति बन गई है। पाकिस्तान में बैठक पर संशय Islamabad में संभावित दूसरे दौर की बातचीत को लेकर तैयारियां तो जारी हैं, लेकिन हालात अभी भी अनिश्चित हैं। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा अब तक तय नहीं उपराष्ट्रपति JD Vance अभी वॉशिंगटन से रवाना नहीं हुए हैं ईरान ने भी बैठक में शामिल होने पर अंतिम फैसला नहीं लिया है वार्ता पर संकट के बादल अमेरिका और ईरान दोनों अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं: अमेरिका: पहले समझौता, फिर नाकाबंदी खत्म ईरान: पहले नाकाबंदी हटाओ, फिर बातचीत इस टकराव के चलते शांति वार्ता की संभावनाएं कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और हथियार तस्करी के मोर्चे पर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। United States की एजेंसियों ने 44 वर्षीय ईरानी नागरिक Shamim Mafi को गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने Iran और Sudan के बीच बड़े पैमाने पर हथियारों की तस्करी और सौदेबाजी में अहम भूमिका निभाई। यह गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब मिडिल ईस्ट और अफ्रीका में सुरक्षा हालात पहले से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं, और हथियारों के अवैध नेटवर्क को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ रही है। कहां और कैसे हुई गिरफ्तारी? शमीम माफी को Los Angeles International Airport (LAX) पर हिरासत में लिया गया। अमेरिकी जांच एजेंसी FBI के अधिकारियों ने उन्हें एयरपोर्ट पर रोका सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में एक एजेंट को “FBI” जैकेट पहने देखा गया, जो माफी को कार में बैठा रहा है एक अन्य तस्वीर में भारी मात्रा में नकदी दिखाई गई, जिससे इस नेटवर्क के वित्तीय पैमाने का अंदाजा लगाया जा रहा है अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही जांच का हिस्सा थी। क्या हैं मुख्य आरोप? अमेरिकी अभियोजकों का कहना है कि माफी: ईरान और सूडान के बीच हथियारों की डील में “मिडिलवुमन” (दलाल) के रूप में काम कर रही थीं उन्होंने अपनी कंपनी के जरिए ड्रोन, बम, बम फ्यूज़ और लाखों राउंड गोला-बारूद की सप्लाई में मदद की वर्ष 2025 में इस नेटवर्क के जरिए 70 लाख डॉलर से अधिक का भुगतान प्राप्त हुआ रिपोर्ट्स के अनुसार, यह नेटवर्क काफी संगठित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय था। ओमान से ऑपरेट हो रहा था नेटवर्क जांच में सामने आया है कि: माफी और उनके एक सहयोगी ने ओमान में “Atlas International Business” नाम की कंपनी चलाई इसी कंपनी के जरिए हथियारों के सौदों को अंजाम दिया जाता था कंपनी को विभिन्न डील्स के लिए बड़े पैमाने पर भुगतान मिला यह मॉडल दिखाता है कि कैसे फ्रंट कंपनियों के जरिए अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी को छुपाया जाता है। बड़े हथियार सौदों का खुलासा अदालती दस्तावेजों में कई चौंकाने वाले दावे किए गए हैं: सूडान के रक्षा मंत्रालय को 55,000 बम फ्यूज़ बेचने में दलाली 70 मिलियन डॉलर से अधिक के ड्रोन कॉन्ट्रैक्ट खास तौर पर Mohajer-6 ड्रोन की सप्लाई, जो एक सशस्त्र UAV है और युद्ध में इस्तेमाल किया जाता है इन डील्स से यह साफ होता है कि मामला सिर्फ छोटे स्तर की तस्करी का नहीं, बल्कि बड़े सैन्य सौदों का है। खुफिया एजेंसियों से कनेक्शन अमेरिकी जांच एजेंसियों का दावा है कि: माफी 2022 से 2025 के बीच ईरानी खुफिया एजेंसियों के सीधे संपर्क में थीं उन्होंने जानबूझकर ऐसे सौदों को अंजाम दिया, जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हैं अगर यह आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला केवल तस्करी नहीं, बल्कि राज्य-समर्थित गतिविधि की श्रेणी में आ सकता है। कानूनी स्थिति और सजा शमीम माफी को Los Angeles की संघीय अदालत में पेश किया जाएगा। उन पर गंभीर आपराधिक धाराएं लगाई गई हैं दोषी पाए जाने पर उन्हें अधिकतम 20 साल तक की जेल हो सकती है क्यों अहम है यह मामला? यह गिरफ्तारी कई स्तरों पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है: 1. वैश्विक सुरक्षा: हथियारों की इस तरह की तस्करी संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में हिंसा को और बढ़ा सकती है। 2. अमेरिका-ईरान तनाव: पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों के बीच यह मामला दोनों देशों के बीच विवाद को और बढ़ा सकता है। 3. प्रतिबंधों का उल्लंघन: यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद गुप्त नेटवर्क कैसे सक्रिय रहते हैं। 4. छुपे हुए नेटवर्क का खुलासा: फ्रंट कंपनियों और तीसरे देशों (जैसे ओमान) के जरिए चल रहे नेटवर्क वैश्विक निगरानी के लिए बड़ी चुनौती हैं।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने United States और Iran के बीच टकराव को और तेज कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना ने खाड़ी क्षेत्र में ईरानी झंडे वाले एक विशाल कार्गो जहाज़ को रोककर अपने नियंत्रण में ले लिया। क्या है पूरा मामला? ट्रंप के अनुसार “टोस्का” नाम का यह जहाज़ अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहा था। यह जहाज़ करीब 900 फीट लंबा बताया जा रहा है आकार और वजन के लिहाज से इसे एक छोटे एयरक्राफ्ट कैरियर के बराबर बताया गया अमेरिकी नेवी ने पहले जहाज़ को रुकने की चेतावनी दी लेकिन जब जहाज़ ने चेतावनी को नजरअंदाज किया, तो अमेरिकी बलों ने कार्रवाई करते हुए: जहाज़ के इंजन रूम को निशाना बनाया फायरिंग कर उसे आगे बढ़ने से रोक दिया अंततः जहाज़ को अपने नियंत्रण में ले लिया गया इस ऑपरेशन का वीडियो भी United States Central Command (CENTCOM) द्वारा जारी किया गया, जिसमें एक अमेरिकी युद्धपोत कार्गो जहाज़ को रोकते हुए और उसकी दिशा में फायरिंग करता दिखाई देता है। ईरान की चुप्पी और सख्त रुख इस घटना के बाद अब तक Iran की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन संकेत साफ हैं कि तेहरान का रुख नरम नहीं होने वाला। ईरानी सरकारी मीडिया पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि: जब तक अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म नहीं करता तब तक ईरान किसी भी नई वार्ता में हिस्सा नहीं लेगा यानी यह घटना दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे गतिरोध को और गहरा कर सकती है। बातचीत पर मंडराया संकट यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब: अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल Pakistan जाने वाला है वहां ईरान के साथ दूसरे दौर की शांति वार्ता की संभावना जताई जा रही थी लेकिन जहाज़ की जब्ती और फायरिंग की घटना के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या ईरान अब बातचीत की मेज पर आएगा भी या नहीं। होर्मुज पर बढ़ता खतरा इस घटना का सबसे बड़ा असर Strait of Hormuz पर पड़ सकता है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। यहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है किसी भी सैन्य टकराव से तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है अंतरराष्ट्रीय व्यापार और शिपिंग पर भी असर पड़ सकता है पहले से ही इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही को लेकर तनाव बना हुआ है, और इस नई कार्रवाई ने जोखिम को और बढ़ा दिया है। क्या यह टकराव बढ़ेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना सिर्फ एक नौसैनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि एक बड़ा रणनीतिक संदेश भी है। अमेरिका अपनी नाकेबंदी को सख्ती से लागू करना चाहता है ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मान सकता है ऐसे में दोनों देशों के बीच “टिट-फॉर-टैट” (जवाबी कार्रवाई) की आशंका बढ़ गई है। अमेरिकी नेवी द्वारा ईरानी झंडे वाले जहाज़ को रोकने की घटना ने मिडिल ईस्ट के हालात को और नाजुक बना दिया है। एक तरफ बातचीत की कोशिशें जारी हैं, तो दूसरी ओर जमीनी स्तर पर सैन्य कार्रवाई हो रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि: क्या ईरान इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देगा? क्या प्रस्तावित वार्ता आगे बढ़ पाएगी? या फिर यह टकराव एक बड़े संघर्ष की ओर बढ़ेगा?
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच Iran की आंतरिक राजनीति को लेकर नई अटकलें तेज हो गई हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ईरान की शक्तिशाली सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) का प्रभाव तेजी से बढ़ा है और उसने सुरक्षा व विदेश नीति से जुड़े फैसलों पर पकड़ मजबूत कर ली है। क्या वाकई “तख्तापलट” जैसा माहौल है? सीधे तौर पर आधिकारिक “कूप” (coup) की पुष्टि नहीं है, लेकिन संकेत यह जरूर मिल रहे हैं कि: सैन्य नेतृत्व का प्रभाव बढ़ा है कूटनीतिक (डिप्लोमैटिक) चैनल कमजोर पड़े हैं बातचीत की जगह सख्त रुख हावी हो रहा है रिपोर्ट्स के मुताबिक IRGC से जुड़े वरिष्ठ नेता Ahmad Vahidi और सुप्रीम लीडर के करीबी Mojtaba Khamenei की भूमिका अहम हो गई है। नरमपंथी नेता साइडलाइन? ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi जैसे नेताओं के प्रभाव में कमी की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि: उन्होंने पहले बातचीत के जरिए तनाव कम करने के संकेत दिए थे लेकिन IRGC ने सख्त रुख अपनाते हुए उस लाइन को पलट दिया इससे साफ है कि फिलहाल “डिप्लोमेसी बनाम मिलिट्री” की लड़ाई में सैन्य पक्ष भारी पड़ रहा है। बढ़ा तनाव Strait of Hormuz पर नियंत्रण को लेकर हालात और गंभीर हो गए हैं। ईरान ने जहाजों की आवाजाही सीमित की कई जहाजों को निशाना बनाए जाने की खबरें सैकड़ों जहाज फंसे होने की आशंका यह मार्ग वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है, इसलिए इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। डिप्लोमेसी में सेना की एंट्री रिपोर्ट्स बताती हैं कि IRGC से जुड़े अधिकारियों को अब बातचीत करने वाले प्रतिनिधिमंडल में भी शामिल किया जा रहा है, ताकि कोई भी फैसला “सिस्टम लाइन” से बाहर न जाए। इससे संकेत मिलता है कि: विदेश नीति पर भी सैन्य नियंत्रण बढ़ रहा है पश्चिमी देशों के साथ समझौते की संभावना और कम हो सकती है अमेरिका के सामने क्या विकल्प? अब United States के सामने तीन संभावित रास्ते माने जा रहे हैं: डिप्लोमैटिक दबाव बढ़ाना – प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय समर्थन के जरिए मिलिट्री विकल्प – होर्मुज और क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करना मध्यस्थता के जरिए समझौता – तीसरे देशों के माध्यम से बातचीत जारी रखना लेकिन मौजूदा हालात में किसी भी विकल्प के आसान होने की संभावना कम दिख रही है। क्षेत्र में अनिश्चितता बढ़ी कमजोर संघर्षविराम (सीजफायर) के बावजूद हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। बातचीत ठप पड़ती दिख रही है सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं खाड़ी क्षेत्र में बड़े संघर्ष का खतरा बना हुआ है ईरान में सत्ता संतुलन में बदलाव की ये खबरें भले पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई हों, लेकिन संकेत साफ हैं–सैन्य ताकत का असर बढ़ रहा है और कूटनीति कमजोर पड़ रही है। ऐसे में आने वाले दिन न सिर्फ ईरान-अमेरिका रिश्तों, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट की स्थिरता के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि Iran अपने संवर्धित (एनरिच्ड) यूरेनियम का भंडार अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार हो गया है और दोनों देशों के बीच शांति समझौता बेहद करीब है। हालांकि, ईरानी सरकारी मीडिया ने ट्रम्प के इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति “हवाई किले बना रहे हैं” और जमीनी स्तर पर ऐसी कोई सहमति नहीं बनी है। ट्रम्प का दावा: तेल सप्लाई सामान्य होगी व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रम्प ने कहा कि अगर यह समझौता हो जाता है, तो वैश्विक तेल सप्लाई फिर से सामान्य हो जाएगी मिडिल ईस्ट में तनाव कम होगा उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि समझौता Islamabad में होता है, तो वे खुद वहां जा सकते हैं। होर्मुज संकट पर आज 40 देशों की अहम बैठक Strait of Hormuz में बढ़ते संकट को देखते हुए आज करीब 40 देशों की वर्चुअल बैठक आयोजित होगी। अध्यक्षता: France और United Kingdom उद्देश्य: समुद्री मार्गों की सुरक्षा और तेल सप्लाई सुनिश्चित करना खास बात: इस बैठक में अमेरिका शामिल नहीं होगा क्या होता है यूरेनियम एनरिचमेंट? यूरेनियम एक ऐसा तत्व है जिसका इस्तेमाल परमाणु ऊर्जा उत्पादन में और परमाणु हथियार बनाने में दोनों में किया जा सकता है। अंतर सिर्फ इसकी एनरिचमेंट (शुद्धता) में होता है: कम स्तर: ऊर्जा उत्पादन 90% तक एनरिचमेंट: परमाणु हथियार संभव रिपोर्ट्स के मुताबिक: ईरान के पास 5–6 टन एनरिच्ड यूरेनियम है 120–130 किलोग्राम यूरेनियम करीब 60% तक एनरिच्ड है अमेरिका-इजराइल का दबाव अमेरिका और Israel लंबे समय से ईरान पर उसके परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने और एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने का दबाव डालते रहे हैं। पिछले 24 घंटे के बड़े अपडेट्स 1. इजराइल-लेबनान सीजफायर अमेरिका की पहल पर 10 दिन का युद्धविराम लागू, लेकिन उल्लंघन के आरोप भी सामने आए। 2. सैन्य गतिविधियां तेज मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना हाई अलर्ट पर, बातचीत फेल होने पर फिर युद्ध की चेतावनी। 3. ईरान-अमेरिका वार्ता ट्रम्प ने कहा–शांति समझौता “बेहद करीब”, जल्द आमने-सामने बातचीत संभव। 4. तेल बाजार पर असर सीजफायर की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। 5. अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ी G-7 देशों ने चेतावनी दी कि लंबा संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाएगा। ट्रम्प के दावे और ईरान के खंडन के बीच स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम मार्ग पर बढ़ता तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में आज होने वाली अंतरराष्ट्रीय बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।
तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी के जवाब में खुली धमकी देते हुए कहा है कि जरूरत पड़ी तो अमेरिकी जहाजों को “पहली मिसाइल” में ही डुबो दिया जाएगा। नाकेबंदी के बाद भड़का ईरान अमेरिका ने हाल ही में ईरानी बंदरगाहों पर आने-जाने वाले जहाजों पर सख्त रोक लगा दी है। अमेरिकी सेना ने साफ चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले जहाजों पर बल प्रयोग किया जाएगा। हजारों सैनिक और युद्धपोत तैनात कई जहाजों को वापस लौटाया गया होर्मुज जलडमरूमध्य में कड़ी निगरानी रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह नाकेबंदी शांति वार्ता फेल होने के बाद लागू की गई। ईरान की खुली चेतावनी ईरान के सैन्य नेतृत्व ने साफ कहा है कि अगर अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दबाव बनाया, तो जवाब सैन्य होगा। अमेरिकी जहाज मिसाइलों के निशाने पर नाकेबंदी को “उकसावे की कार्रवाई” बताया युद्धविराम टूटने की चेतावनी ईरान ने यह भी कहा कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो पूरे क्षेत्र में व्यापार और शिपिंग बाधित हो सकती है। ट्रंप का सख्त रुख, बढ़ी सैन्य तैनाती डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए सैन्य मौजूदगी और बढ़ा दी है। मिडिल ईस्ट में हजारों अतिरिक्त सैनिक भेजे गए कई एयरक्राफ्ट कैरियर और युद्धपोत तैनात रणनीति: ईरान को समझौते के लिए मजबूर करना वैश्विक असर, तेल बाजार पर दबाव होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से करीब 20% वैश्विक तेल सप्लाई गुजरती है। सप्लाई बाधित होने का खतरा तेल कीमतों में उछाल वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर शांति वार्ता पर टिकी दुनिया की नजर तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं, लेकिन हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। पहले दौर की वार्ता फेल दूसरे दौर की बातचीत की तैयारी सीजफायर भी खतरे में आगे क्या? अमेरिका की नाकेबंदी और ईरान की धमकी ने हालात को विस्फोटक बना दिया है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह टकराव: बड़े सैन्य संघर्ष में बदल सकता है वैश्विक ऊर्जा संकट को और गहरा सकता है पूरी दुनिया की नजर अमेरिका-ईरान के अगले कदम और संभावित शांति वार्ता पर टिकी हुई है।
तेहरान/इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान ने कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर बुधवार को एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पहुंचे। शांति मिशन पर मुनीर की ईरान यात्रा पाकिस्तान की सेना की मीडिया विंग ISPR के अनुसार, यह दौरा अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने की कोशिशों का हिस्सा है। मुनीर के साथ पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी मौजूद हैं। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संभावित दूसरे दौर की वार्ता को आगे बढ़ाना और कूटनीतिक गतिरोध खत्म करना है। शहबाज शरीफ के ताबड़तोड़ विदेश दौरे दूसरी ओर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी सक्रिय भूमिका में नजर आ रहे हैं। वह एक साथ कई अहम देशों के दौरे पर हैं: सऊदी अरब कतर तुर्की इन बैठकों में क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और अमेरिका-ईरान तनाव पर चर्चा की जा रही है। ‘शांति वार्ता 2.0’ की तैयारी सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत हो सकती है। पाकिस्तान इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। इसका मकसद है: दोनों देशों के बीच तनाव कम करना स्थायी समाधान की दिशा में बढ़ना मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसी स्थिति टालना पहला दौर रहा बेनतीजा इससे पहले इस्लामाबाद में हुई 21 घंटे की वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई थी। इसके बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए। डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़े तनाव ने स्थिति को और जटिल बना दिया। आगे क्या? अब पूरी दुनिया की नजर संभावित “शांति वार्ता 2.0” पर टिकी है। अगर यह बातचीत सफल रहती है, तो क्षेत्र में स्थिरता लौट सकती है। वार्ता विफल होने की स्थिति में अमेरिका-ईरान तनाव और गहरा सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर भी असर देखने को मिल सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर कर रख दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा Strait of Hormuz में नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी कच्चा तेल (WTI) करीब 8 प्रतिशत बढ़कर 104.24 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड लगभग 7 प्रतिशत चढ़कर 102.29 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। इस घटनाक्रम ने न केवल ऊर्जा बाजार बल्कि वैश्विक शेयर बाजारों में भी अस्थिरता बढ़ा दी है। Dow Jones Futures में गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों में चिंता साफ झलक रही है। सप्लाई संकट की आशंका से बढ़ी कीमतें विशेषज्ञों के अनुसार, तेल की कीमतों में अचानक उछाल का सबसे बड़ा कारण सप्लाई बाधित होने का डर है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा Strait of Hormuz से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और अन्य खाड़ी देश इसी समुद्री मार्ग के जरिए बड़े पैमाने पर तेल निर्यात करते हैं। अमेरिकी प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि जब तक ईरान अपनी “आक्रामक गतिविधियों” पर रोक नहीं लगाता, यह नाकेबंदी जारी रहेगी। ऐसे में बाजार में अनिश्चितता और जोखिम की भावना बढ़ गई है। ईरान पर अमेरिका की सख्त कार्रवाई राष्ट्रपति Donald Trump ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी नौसेना उन जहाजों को रोकेगी जो ईरान को कथित तौर पर अवैध टैक्स या टोल का भुगतान कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईरान अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में माइन (समुद्री बम) होने का डर फैलाकर वैश्विक व्यापार को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि यदि किसी शांतिपूर्ण जहाज पर हमला हुआ तो अमेरिका कड़ी सैन्य प्रतिक्रिया देगा। क्या पूरी तरह बंद होगा समुद्री रास्ता? US Central Command के अनुसार, यह नाकेबंदी पूरी तरह से वैश्विक जहाजरानी को रोकने के लिए नहीं है। गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को सीमित अनुमति दी जाएगी। अमेरिका का उद्देश्य ईरान की तेल आय को नियंत्रित करना है, न कि पूरी दुनिया के व्यापार को बाधित करना। हालांकि, बढ़ते सैन्य तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही में पहले ही कमी आने लगी है, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है। आगे क्या? वर्तमान हालात यह संकेत दे रहे हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव जल्द कम होने वाला नहीं है। राष्ट्रपति ट्रंप के “लॉक्ड एंड लोडेड” बयान से यह स्पष्ट है कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए भी तैयार है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजरें अब कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक महंगाई को और बढ़ा सकती हैं, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
मुंबई, एजेंसियां। हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने कमजोर शुरुआत की। शुरुआती सत्र में सेंसेक्स 824.44 अंक टूटकर 73,282.41 पर आ गया, जबकि निफ्टी 248.95 अंक गिरकर 22,719.30 तक फिसल गया। बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव देखने को मिला और निवेशकों का रुख सतर्क नजर आया। शुरुआती कारोबार में इटरनल और इंडिगो जैसे शेयरों में करीब 2% की गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती बाजार चाल और सेक्टरों के प्रदर्शन से साफ है कि वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर भारतीय बाजार पर भी दिख रहा है। रुपया भी दबाव में, निवेशकों की चिंता बढ़ी शेयर बाजार की कमजोरी के साथ-साथ भारतीय मुद्रा पर भी दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 17 पैसे कमजोर होकर 93.07 के स्तर पर पहुंच गया। रुपये में यह गिरावट विदेशी निवेशकों की सतर्कता और बढ़ते वैश्विक जोखिमों का संकेत मानी जा रही है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और पश्चिम एशिया का तनाव भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार दोनों के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं। एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख मंगलवार को एशियाई बाजारों में भी सतर्क कारोबार देखने को मिला। जापान का निक्केई 225 हल्की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 बढ़त में रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी लगभग सपाट रहा, वहीं शंघाई कंपोजिट में मजबूती देखने को मिली। इस बीच, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 111 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी कच्चा तेल 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई। क्यों टूटा बाजार? विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं—अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की तेज कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और मुनाफावसूली। आने वाले सत्रों में निवेशकों की नजर अब वैश्विक घटनाक्रम, तेल की चाल और घरेलू आर्थिक संकेतकों पर बनी रहेगी। फिलहाल बाजार में अस्थिरता और दबाव का माहौल बना हुआ है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि “ईरान को एक ही रात में खत्म किया जा सकता है।” ट्रंप की कड़ी चेतावनी व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा- अगर ईरान तय समय सीमा (डेडलाइन) तक डील नहीं करता, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है यह कार्रवाई “मंगलवार रात” को भी हो सकती है ट्रंप ने ईरान को वॉशिंगटन समयानुसार रात 8 बजे तक का समय दिया है (भारतीय समय: बुधवार सुबह 5:30 बजे)। डील की मुख्य शर्तें अमेरिका की शर्तों में सबसे अहम- होर्मुज़ स्ट्रेट को खोलना वैश्विक तेल सप्लाई में बाधा न डालना गौरतलब है कि दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। बातचीत जारी, लेकिन अनिश्चितता बरकरार ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि ईरान के नेता “अच्छी नीयत” से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। ईरान का जवाब: अस्थायी सीजफायर नहीं ट्रंप की धमकी के बीच ईरान ने- अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) को खारिज कर दिया स्थायी समाधान और प्रतिबंध हटाने की मांग रखी यानी ईरान फिलहाल किसी अल्पकालिक समझौते के पक्ष में नहीं है। रक्षा अधिकारियों की मौजूदगी इस अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में- अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डान केन भी मौजूद रहे, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालिया घटनाक्रम पिछले सप्ताह अमेरिकी सुरक्षा बलों ने- दक्षिणी ईरान में गिराए गए F-15 फाइटर जेट के दो क्रू मेंबर्स को सुरक्षित रेस्क्यू किया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक नए बयान ने मिडिल ईस्ट की राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने कहा है कि होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाजों पर टोल वसूलने का अधिकार ईरान के बजाय अमेरिका को होना चाहिए। “हम विजेता हैं, टोल हमें मिलना चाहिए” सोमवार को मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा- “क्यों न हम टोल वसूलें? मैं यह करना पसंद करूंगा बजाय कि उन्हें (ईरान) टोल मिले। हमें टोल क्यों नहीं वसूलना चाहिए? हम विजेता हैं।” उनके इस बयान को अमेरिका के आक्रामक रुख के तौर पर देखा जा रहा है। शांति समझौते में होर्मुज़ खोलना जरूरी हालांकि ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के साथ किसी भी संभावित शांति समझौते में एक अहम शर्त होगी- होर्मुज़ स्ट्रेट को पूरी तरह खोलना तेल और जहाजों की आवाजाही पर कोई रोक न होना उन्होंने कहा कि अमेरिका “फ्री ऑयल ट्रांजिट” चाहता है। क्या है पूरा विवाद? पहले ईरान ने संकेत दिया था कि वह होर्मुज़ से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलेगा इसके जवाब में अब ट्रंप ने खुद टोल वसूली की बात कह दी क्यों अहम है होर्मुज़ स्ट्रेट? दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है यहां किसी भी तनाव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है बढ़ सकता है तनाव ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच पहले से ही सैन्य और कूटनीतिक तनाव चरम पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान हालात को और बिगाड़ सकते हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच एक नया और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बीच ईरान ने अपने नागरिकों से पावर प्लांट्स के आसपास इकट्ठा होने की अपील की है। पावर प्लांट्स के बाहर बनेंगी ह्यूमन चेन अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान सरकार ने- यूनिवर्सिटी छात्रों कलाकारों खिलाड़ियों युवा संगठनों से अपील की है कि वे 7 अप्रैल को देशभर के पावर प्लांट्स के आसपास मानव श्रृंखला (Human Chain) बनाकर खड़े हों। इसका मकसद सार्वजनिक ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) पर संभावित अमेरिकी हमलों का विरोध करना बताया गया है। ट्रंप का अल्टीमेटम खत्म होने के करीब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को- होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और सीजफायर मानने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, जो आज रात 8 बजे तक खत्म हो रहा है (भारतीय समय अनुसार सुबह 5:30 बजे)। “4 घंटे में तबाह कर सकते हैं ईरान” ट्रंप ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा- अमेरिका के पास ईरान को “एक ही रात में तबाह” करने की योजना है सभी पुल और पावर प्लांट निशाने पर हो सकते हैं यह कार्रवाई सिर्फ 4 घंटे में पूरी की जा सकती है उन्होंने दावा किया कि मंगलवार रात तक ईरान के प्रमुख ढांचे पूरी तरह नष्ट किए जा सकते हैं। बढ़ता खतरा और वैश्विक चिंता ईरान का नागरिकों को पावर प्लांट्स के पास इकट्ठा करना एक असामान्य कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे- आम लोगों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और गहरा सकता है
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक बाजारों पर साफ दिखने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई धमकी के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। 110 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड रविवार को वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.4% बढ़कर 110.60 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 1.8% उछलकर 113.60 डॉलर प्रति बैरल हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव की वजह से हुई है। होर्मुज स्ट्रेट बना तनाव की जड़ दरअसल, ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा शिपिंग के लिए नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान की ऊर्जा सुविधाओं पर हमला कर सकता है। उन्होंने अपने बयान में यहां तक कहा कि मंगलवार को ईरान में “पावर प्लांट डे” और “ब्रिज डे” होगा, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव सीधे तेल की कीमतों को प्रभावित करता है। ईरान का जवाब- पहले नुकसान की भरपाई ट्रंप की धमकी के जवाब में ईरान ने साफ कहा है कि जब तक उसे युद्ध में हुए नुकसान की पूरी भरपाई नहीं मिलती, तब तक वह होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोलेगा। इससे हालात और बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है। ओमान कर रहा मध्यस्थता इस बीच, ओमान ने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिशें तेज कर दी हैं। ओमान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, ईरान के साथ जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही बहाल करने को लेकर बातचीत जारी है। अमेरिका में गैस की कीमतें भी आसमान पर तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता का असर अमेरिका में भी देखने को मिल रहा है। AAA के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में एक गैलन गैस की औसत कीमत बढ़कर 4.11 डॉलर तक पहुंच गई है, जो 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। युद्ध शुरू होने के बाद से इसमें करीब 38% की बढ़ोतरी हो चुकी है।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच टकराव और बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका की 18 बड़ी कंपनियों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है, जिसके बाद व्हाइट हाउस ने कड़ा रुख अपनाते हुए जवाब दिया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी सेना पहले भी ईरान के हमलों को रोकने में सक्षम रही है और आगे भी पूरी तरह तैयार है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के बैलेस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों में करीब 90 प्रतिशत की कमी आई है, जो अमेरिकी रक्षा क्षमता को दर्शाता है। टेक कंपनियां निशाने पर IRGC ने मंगलवार (31 मार्च 2026) को जारी बयान में कहा कि अगर ईरानी नेताओं की हत्या जारी रहती है तो अमेरिका की प्रमुख टेक और कॉर्पोरेट कंपनियों को निशाना बनाया जाएगा। ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि ये कंपनियां अमेरिका और इजरायल की सैन्य व खुफिया गतिविधियों में सहयोग कर रही हैं। ईरान ने जिन कंपनियों को निशाने पर बताया है, उनमें गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एपल, मेटा, इंटेल, आईबीएम, सिस्को, ओरेकल, डेल, एनवीडिया, टेस्ला, जेपी मॉर्गन, जनरल इलेक्ट्रिक, बोइंग सहित कुल 18 कंपनियां शामिल हैं। कर्मचारियों को चेतावनी IRGC ने इन कंपनियों में काम कर रहे कर्मचारियों को भी चेतावनी दी है। बयान में कहा गया है कि यदि वे अपनी सुरक्षा चाहते हैं तो तुरंत अपने कार्यस्थल छोड़ दें। ईरान ने यह भी कहा कि वह अपने अधिकारियों की हत्या का बदला इन कंपनियों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाकर लेगा। खाड़ी देशों में बढ़ा खतरा ईरान पहले ही खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले कर चुका है। अब कॉर्पोरेट ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी ने क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे साइबर हमलों और आर्थिक मोर्चे पर टकराव तेज हो सकता है। अमेरिका का सख्त रुख अमेरिका ने साफ किया है कि वह अपने नागरिकों और कंपनियों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि किसी भी हमले का जवाब कड़े तरीके से दिया जाएगा। मिडिल ईस्ट में बढ़ते इस तनाव का असर वैश्विक बाजारों और टेक सेक्टर पर भी पड़ सकता है, जिससे आने वाले दिनों में हालात और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अब अमेरिकी सत्ता के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। ईरान को लेकर संभावित सैन्य कार्रवाई और परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और उनकी खुफिया प्रमुख Tulsi Gabbard के बीच सोच में अंतर सामने आया है। ट्रंप ने क्या कहा? राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वीकार किया कि तुलसी गबार्ड का रुख ईरान के मामले में उनसे “थोड़ा नरम” है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्हें गबार्ड पर पूरा भरोसा है। ट्रंप ने कहा कि उनका रुख बेहद सख्त है और वह नहीं चाहते कि ईरान किसी भी हाल में परमाणु हथियार हासिल करे। उनके अनुसार, अगर ऐसा हुआ तो वैश्विक सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है। सरकार के भीतर बढ़ती असहमति रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका-इजरायल के संयुक्त अभियान को लेकर रिपब्लिकन नेताओं और प्रशासन के भीतर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ नेता सैन्य कार्रवाई के पक्ष में हैं वहीं, कुछ आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव को लेकर चिंतित हैं अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने भी इस मुद्दे पर अपेक्षाकृत सतर्क रुख अपनाया है। इस्तीफे से बढ़ी हलचल इस विवाद के बीच, नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के प्रमुख Joe Kent ने हाल ही में इस्तीफा दे दिया। बताया जा रहा है कि उन्होंने ईरान के खिलाफ युद्ध को लेकर अलग राय रखते हुए पद छोड़ा और कहा कि अमेरिका के लिए तत्काल कोई बड़ा खतरा नहीं है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भ्रम अमेरिकी सरकार के भीतर ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर विरोधाभासी दावे सामने आए हैं: कुछ अधिकारियों का कहना है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के बेहद करीब है वहीं, अन्य का दावा है कि पिछले अभियानों में उसकी क्षमता काफी हद तक खत्म हो चुकी है दूसरी ओर, ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। क्या आगे बढ़ेगा संघर्ष? विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आंतरिक मतभेद अमेरिका की रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, यह भी संभव है कि इन चर्चाओं के बाद कोई कूटनीतिक समाधान या समझौता सामने आए।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि वह मौजूदा संघर्ष से पीछे हटने वाला नहीं है। ईरान ने कहा है कि जब तक उसे युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा नहीं मिलता, तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। ईरानी सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मोहसिन रजेई ने कहा कि ईरान की शर्तें बिल्कुल स्पष्ट हैं- सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं और अमेरिका यह गारंटी दे कि भविष्य में वह किसी भी तरह की दखलंदाजी नहीं करेगा। रजेई ने टीवी बयान में कहा कि ईरानी सेना पूरी ताकत से ऑपरेशन चला रही है और नया नेतृत्व हालात को मजबूती से संभाल रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह युद्ध एक हफ्ते में खत्म हो सकता था, लेकिन इजराइल के रुख की वजह से संघर्ष लंबा खिंच गया। इजराइल पर लगातार मिसाइल हमले इजराइल की सेना (IDF) के मुताबिक, ईरान ने एक बार फिर बैलिस्टिक मिसाइल दागी। हालांकि ताजा हमले में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ और मिसाइल खुले इलाके में गिरी। तेल अवीव, पेटाह टिक्वा और आसपास के इलाकों में सायरन बजाए गए, जिसके बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए। बाद में इजराइल की होम फ्रंट कमांड ने खतरा टलने की पुष्टि की। अमेरिका में मतभेद, ट्रम्प के बयान चर्चा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उनके रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के सबसे बड़े समर्थक रहे हैं। उनका कहना है कि ईरान की मिसाइल, ड्रोन और नौसेना क्षमता को खत्म करना जरूरी है। हालांकि, अमेरिकी सरकार के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद भी सामने आए हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस फैसले से पूरी तरह सहमत नहीं बताए जा रहे, जबकि कुछ अधिकारियों ने विरोध में इस्तीफा भी दिया है। वैश्विक असर: तेल संकट और कूटनीतिक हलचल तेज ईरान-इजराइल तनाव का असर पूरी दुनिया पर दिख रहा है। जापान ने तेल संकट को देखते हुए अपने भंडार जारी करने का फैसला लिया है। दक्षिण कोरिया ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर को लेकर चिंता जताई है। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। जमीनी हालात: हमले, मौतें और राहत कार्य जारी तेहरान में एक हमले में एक प्रोफेसर और उनके दो बच्चों की मौत हो गई, जिससे हालात की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं, मलबे में फंसे एक बच्चे को सुरक्षित निकालने का वीडियो भी सामने आया है।
वैश्विक खेल जगत में भू-राजनीतिक तनाव का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। ईरान की फुटबॉल फेडरेशन ने FIFA से अनुरोध किया है कि उसके 2026 विश्व कप मुकाबलों को अमेरिका से हटाकर मेक्सिको में आयोजित किया जाए। सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चिंता ईरान के फुटबॉल प्रमुख मेहदी ताज के अनुसार, मौजूदा युद्ध हालात में टीम की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने साफ कहा कि यदि खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती, तो टीम अमेरिका यात्रा नहीं करेगी। यह बयान उस समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी संकेत दिया था कि ईरानी टीम की सुरक्षा अमेरिका में चुनौतीपूर्ण हो सकती है। क्या बदलेगा मैच का वेन्यू? फिलहाल ईरान के ग्रुप स्टेज मैच लॉस एंजेलिस और सिएटल में तय हैं, लेकिन अब उन्हें मेक्सिको शिफ्ट करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस पर FIFA की ओर से अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं आया है। युद्ध का असर खेल पर अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने हालात को और जटिल बना दिया है। इस वजह से: ईरान की भागीदारी पर सवाल खड़े हुए खिलाड़ियों की सुरक्षा चिंता का विषय बनी टूर्नामेंट के लॉजिस्टिक्स पर असर पड़ सकता है हालांकि Asian Football Confederation ने साफ किया है कि ईरान अब भी विश्व कप में खेलने के लिए निर्धारित है और उसने आधिकारिक तौर पर टूर्नामेंट से हटने की घोषणा नहीं की है। अनिश्चितता के बीच तैयारियां जारी दूसरी टीमों ने अभी अपनी तैयारियां जारी रखी हैं। न्यूजीलैंड की टीम ने भी कहा है कि जब तक कोई आधिकारिक बदलाव नहीं होता, वे तय कार्यक्रम के अनुसार ही तैयारी करेंगे। यह मामला सिर्फ खेल नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। अगर ईरान के मैच अमेरिका से मेक्सिको शिफ्ट होते हैं, तो यह FIFA विश्व कप के इतिहास में एक बड़ा और अभूतपूर्व फैसला साबित हो सकता है।
ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने Apar Industries को लेकर अपनी ताजा रिपोर्ट जारी की है। कंपनी के मैनेजमेंट से बातचीत के बाद ब्रोकरेज ने शेयर पर ₹9,629 का टारगेट प्राइस बरकरार रखा है, लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए रेटिंग को ‘BUY’ से घटाकर ‘Accumulate’ कर दिया है। US-Iran तनाव का सीमित असर, लेकिन जोखिम बरकरार रिपोर्ट के मुताबिक, US-Iran तनाव का कंपनी पर सीधा असर फिलहाल सीमित है, क्योंकि मिडिल ईस्ट से कंपनी की कमाई का हिस्सा केवल 6–7% के आसपास है। हालांकि, स्थिति बिगड़ने पर शिपिंग लागत, बीमा खर्च और कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। मजबूत डिमांड और 10% वॉल्यूम ग्रोथ का अनुमान कंपनी का अनुमान है कि करीब 10% तक बिक्री (वॉल्यूम) बढ़ सकती है, खासकर कंडक्टर सेगमेंट में। यह बढ़त बेहतर और महंगे प्रोडक्ट, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और अमेरिका में बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने व रिन्यूएबल एनर्जी की बढ़ती मांग की वजह से होगी। केबल बिजनेस बना ग्रोथ का बड़ा इंजन Apar Industries का केबल बिजनेस तेजी से बढ़ रहा है। करीब 20% से ज्यादा सालाना ग्रोथ (YoY) का अनुमान मीडियम टर्म में ~11% EBITDA मार्जिन लगभग ₹8000 करोड़ के कैपेक्स से विस्तार बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और ऑपरेटिंग लीवरेज से इस सेगमेंट में और तेजी की उम्मीद है। डेटा सेंटर सेक्टर से नई संभावनाएं रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डेटा सेंटर सेक्टर कंपनी के लिए नया ग्रोथ ड्राइवर बन सकता है। किसी भी डेटा सेंटर प्रोजेक्ट में केबल्स का हिस्सा 4–5% तक होता है, जिससे आने वाले समय में मांग और बढ़ सकती है। P/E वैल्यूएशन और टारगेट स्टॉक फिलहाल FY27 और FY28 के अनुमानित मुनाफे पर क्रमशः 31 गुना और 26 गुना के P/E पर ट्रेड कर रहा है। ब्रोकरेज ने अलग-अलग बिजनेस सेगमेंट के लिए वैल्यूएशन इस तरह रखा है: कंडक्टर: 34 गुना केबल्स: 34 गुना स्पेशलिटी ऑयल्स: 12 गुना इन सबके आधार पर SoTP (Sum of the Parts) मॉडल से ₹9,629 का टारगेट प्राइस तय किया गया है। निवेशकों के लिए क्या संकेत? ब्रोकरेज के अनुसार, लंबी अवधि में कंपनी की ग्रोथ कहानी मजबूत बनी हुई है, लेकिन मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। ‘Accumulate’ रेटिंग का मतलब है कि निवेशक गिरावट पर धीरे-धीरे खरीदारी कर सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।