अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव सुरक्षा पर दिए अपने प्राइमटाइम संबोधन में चीन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान करीब 22 करोड़ मतदाताओं का व्यक्तिगत डेटा चोरी किया गया था। ट्रंप ने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा चुनावी डेटा उल्लंघन बताया। हालांकि, ट्रंप के इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने अपने भाषण में कोई सार्वजनिक तकनीकी या न्यायिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। डेटा में क्या-क्या होने का दावा? ट्रंप के अनुसार, कथित तौर पर लीक हुए डेटा में मतदाताओं के नाम, पते, फोन नंबर, राजनीतिक दल से जुड़ी जानकारी और अन्य व्यक्तिगत विवरण शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन ने इस उद्देश्य के लिए विशेष डेटा संग्रह इकाई बनाई थी। रूस, चीन और उत्तर कोरिया का भी लिया नाम अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के चुनावी ढांचे को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखने वाले देशों में चीन, रूस और उत्तर कोरिया सहित कई विदेशी समूह शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी खुफिया आकलनों में भी विदेशी हस्तक्षेप को लेकर चिंताएं जताई गई हैं। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर फिर उठाए सवाल ट्रंप ने एक बार फिर इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ये प्रणालियां साइबर हमलों के प्रति संवेदनशील हो सकती हैं और अमेरिका को कागजी मतपत्र (Paper Ballot) प्रणाली की ओर लौटने पर विचार करना चाहिए। एफबीआई और न्याय विभाग पर भी लगाए आरोप ट्रंप ने आरोप लगाया कि एफबीआई और अमेरिकी न्याय विभाग ने वर्ष 2020 के चुनाव के दौरान मिशिगन में कथित मतदाता धोखाधड़ी से जुड़े मामले की जांच को दबा दिया था। उन्होंने दावा किया कि यह व्यापक स्तर पर तथ्यों को छिपाने का प्रयास था। गैर-नागरिक मतदाताओं का भी किया जिक्र ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) की जांच में संघीय चुनावों के लिए राज्य की मतदाता सूची में लगभग 2.78 लाख गैर-नागरिकों के पंजीकरण की पहचान हुई है। उन्होंने कहा कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है। चुनावी दस्तावेज सार्वजनिक करने का दावा राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि व्हाइट हाउस ने चुनाव संबंधी खुफिया दस्तावेजों के लिए एक नया ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है। उनके अनुसार, इन दस्तावेजों में चुनाव प्रणाली की कमजोरियों और जांच से जुड़े निष्कर्ष शामिल हैं। उन्होंने लोगों से इन दस्तावेजों को देखने की अपील भी की। मेल-इन वोटिंग का फिर किया विरोध अपने करीब 23 मिनट के भाषण के अंत में ट्रंप ने डाक (मेल-इन) से मतदान का एक बार फिर विरोध किया। उन्होंने इसे "स्वाभाविक रूप से भ्रष्ट" व्यवस्था बताया और कहा कि इससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित होती है। हालांकि, अमेरिकी अदालतों, चुनाव अधिकारियों और कई स्वतंत्र जांचों में अब तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि मेल-इन वोटिंग के कारण व्यापक स्तर पर चुनावी धोखाधड़ी हुई या चुनाव परिणाम प्रभावित हुए थे।
वॉशिंगटन: अमेरिका के वरिष्ठ रिपब्लिकन सीनेटर और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी लिंडसे ग्राहम का 71 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके कार्यालय के अनुसार, शनिवार शाम एक संक्षिप्त और अचानक आई बीमारी के बाद उनका निधन हुआ। बाद में शुरुआती मेडिकल जांच में मौत का कारण महाधमनी (एओर्टिक) डिसेक्शन बताया गया। ग्राहम के निधन के बाद अमेरिका और इजरायल के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी, जबकि ईरान से जुड़े कुछ सरकारी मीडिया संस्थानों, सोशल मीडिया खातों और समर्थकों ने उनके निधन पर खुशी जाहिर की। ट्रंप और नेतन्याहू ने दी श्रद्धांजलि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लिंडसे ग्राहम को "महान सीनेटर" और "सच्चा देशभक्त" बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि इजरायल ने अपना एक मजबूत मित्र खो दिया है। ईरान से जुड़े मीडिया प्लेटफॉर्म पर अलग प्रतिक्रिया ईरान से जुड़े कुछ समाचार प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया खातों ने ग्राहम के निधन पर जश्न जैसा रुख अपनाया। कुछ पोस्टों में उनके खिलाफ तीखी टिप्पणियां की गईं और उनके लंबे समय से ईरान विरोधी रुख का उल्लेख किया गया। सोशल मीडिया पर कुछ ईरान समर्थक खातों ने ग्राहम की तस्वीर वाला एक ग्राफिक भी साझा किया, जिसमें लाल "X" का निशान लगाया गया था। इन पोस्टों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। निर्वासित युवराज रजा पहलवी ने जताया दुख ईरान के निर्वासित युवराज रजा पहलवी ने ग्राहम के निधन पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ग्राहम ईरानी जनता की स्वतंत्रता के समर्थक थे और लोकतंत्र समर्थक ईरानियों के बीच उनका सम्मान था। ईरान सरकार के मुखर आलोचक थे ग्राहम लिंडसे ग्राहम लंबे समय से ईरान की मौजूदा सरकार के आलोचक रहे थे। वे ईरान के खिलाफ कड़े अमेरिकी रुख के समर्थक माने जाते थे और कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ईरानी विपक्ष तथा लोकतांत्रिक बदलाव के समर्थन में बयान दे चुके थे। लंबे राजनीतिक करियर का हुआ अंत दक्षिण कैरोलिना से रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम 2002 से अमेरिकी सीनेट के सदस्य थे। इससे पहले वे अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सदस्य भी रह चुके थे। विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा मामलों में उनकी सक्रिय भूमिका के कारण वे रिपब्लिकन पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे। उनके निधन से अमेरिकी राजनीति में एक महत्वपूर्ण आवाज का अंत माना जा रहा है।
मुंबई, एजेंसियां। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान के साथ युद्धविराम समझौते को समाप्त घोषित किए जाने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंकाओं ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसका असर घरेलू बाजार पर भी दिखा और कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 1,677 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 581 अंक टूटकर 23,900 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बंद हुआ। सभी प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली बाजार में चौतरफा बिकवाली का माहौल रहा। सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान में बंद हुए। बैंकिंग, एफएमसीजी और ऑयल एंड गैस सेक्टर में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी करीब दो प्रतिशत तक लुढ़क गए। प्रमुख कंपनियों में जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, मारुति सुजुकी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, कोटक महिंद्रा बैंक और भारती एयरटेल के शेयरों में उल्लेखनीय गिरावट रही। निवेशकों को भारी नुकसान बाजार में आई इस तेज गिरावट से निवेशकों की करीब 10 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति घट गई। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर लगभग 470 लाख करोड़ रुपये रह गया। वहीं, बाजार में उतार-चढ़ाव को दर्शाने वाला इंडिया वीआईएक्स सूचकांक 27 प्रतिशत उछल गया, जो निवेशकों के बीच बढ़ी अनिश्चितता और डर को दर्शाता है। गिरावट की प्रमुख वजहें विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड करीब पांच प्रतिशत बढ़कर 78 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। साथ ही यूरोप और एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ। विशेषज्ञों की सलाह बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकाल में वैश्विक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे। हालांकि, भारत के मजबूत आर्थिक आधार और दीर्घकालिक निवेश संभावनाओं को देखते हुए निवेशकों को घबराकर निर्णय लेने के बजाय सतर्कता के साथ लंबी अवधि की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।
America-Pakistan News: अमेरिका के रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट ने अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम (सीजफायर) में पाकिस्तान की संभावित भूमिका पर सवाल उठाते हुए इस्लामाबाद की तीखी आलोचना की है। उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवाद और धार्मिक उत्पीड़न से जोड़ते हुए कहा कि दुनिया को यह नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान का अतीत क्या रहा है। शहबाज शरीफ की ईरान यात्रा पर उठाए सवाल सीनेटर रिक स्कॉट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को श्रद्धांजलि देते नजर आ रहे हैं। वीडियो में शहबाज शरीफ खामेनेई को एक महान नेता बताते दिखाई देते हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए स्कॉट ने कहा कि पाकिस्तान की यह भूमिका केवल दिखावा है और इसे शांति प्रक्रिया का विश्वसनीय मध्यस्थ नहीं माना जा सकता। "दुनिया याद रखे पाकिस्तान की असली पहचान" रिक स्कॉट ने कहा कि दुनिया को यह नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान वही देश है, जहां अल-कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन वर्षों तक छिपा रहा। उन्होंने पाकिस्तान पर धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर ईसाइयों के खिलाफ ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसे रिकॉर्ड वाला देश क्षेत्रीय शांति का नेतृत्व करने का दावा नहीं कर सकता। मध्यस्थता की भूमिका पर भी सवाल अमेरिकी सीनेटर ने कहा कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनने के योग्य नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस्लामाबाद की नीतियां उसे निष्पक्ष भूमिका निभाने से रोकती हैं। स्कॉट ने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका पाकिस्तान की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है और उसके हर कदम का आकलन किया जा रहा है। ईरान के घटनाक्रम के बीच आया बयान रिक स्कॉट का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव तथा क्षेत्रीय कूटनीतिक गतिविधियों को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।
वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवादों में घिर गए हैं। ट्रंप ने AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से तैयार एक तस्वीर साझा की, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा को विवादित तरीके से दिखाया गया है। तस्वीर में अरबी शब्द "अल्हम्दुलिल्लाह" भी लिखा गया है, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इतना ही नहीं, ट्रंप ने NATO शिखर सम्मेलन से पहले इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर भी एक मीम साझा किया, जिससे नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। ओबामा की AI तस्वीर पर विवाद ट्रंप द्वारा साझा की गई AI-जनरेटेड तस्वीर में बराक ओबामा और मिशेल ओबामा को राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान की सीढ़ियों पर मुस्कुराते और हाथ हिलाते हुए दिखाया गया है। तस्वीर में विमान पर "Yes We Can", "Obama", "BLM" (Black Lives Matter) जैसे शब्दों के साथ अरबी भाषा में "अल्हम्दुलिल्लाह" भी लिखा हुआ दिखाई देता है। इस पोस्ट को लेकर कई लोगों ने ट्रंप पर नस्लीय और सांप्रदायिक संकेतों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की AI तस्वीरें राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देती हैं और सार्वजनिक संवाद की गरिमा को प्रभावित करती हैं। पहले भी विवादों में रह चुके हैं ट्रंप यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने ओबामा को लेकर विवादित पोस्ट साझा किया हो। इससे पहले भी वह सोशल मीडिया पर AI और एडिटेड तस्वीरों के जरिए पूर्व राष्ट्रपति और उनके परिवार पर व्यक्तिगत टिप्पणियां कर चुके हैं। ट्रंप पर पहले भी ओबामा के जन्मस्थान को लेकर झूठे दावे फैलाने और नस्लीय टिप्पणी करने के आरोप लगते रहे हैं। उनकी कई पोस्टों की दोनों प्रमुख अमेरिकी राजनीतिक दलों के नेताओं ने आलोचना की थी। मेलोनी पर भी शेयर किया मीम ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर भी एक मीम साझा किया। इस पोस्ट में हाल ही में फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन की तस्वीर के साथ लिखा था— "Restraining Order Needed" (रोक लगाने वाले आदेश की जरूरत है)। हालांकि पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया गया, लेकिन इसे मेलोनी पर तंज के रूप में देखा गया। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे इटली की प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाने वाला पोस्ट बताया। G7 बैठक के बाद बढ़ा विवाद ट्रंप ने इससे पहले दावा किया था कि G7 शिखर सम्मेलन के दौरान जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए विशेष आग्रह किया था। मेलोनी ने इस दावे को सार्वजनिक रूप से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह झूठ बताया था। अब नए मीम के बाद दोनों नेताओं के बीच कथित तनातनी एक बार फिर चर्चा में आ गई है। AI पोस्ट को लेकर बढ़ रही चिंता हाल के महीनों में ट्रंप लगातार AI से तैयार तस्वीरों और मीम्स का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने के लिए कर रहे हैं। उनके समर्थक इन्हें व्यंग्य बताते हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि इस तरह की पोस्ट भ्रामक जानकारी, राजनीतिक ध्रुवीकरण और सामाजिक तनाव को बढ़ा सकती हैं। ट्रंप के ताजा पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है, हालांकि इस पर व्हाइट हाउस या बराक ओबामा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वॉशिंगटन: अमेरिका की 250वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ के जश्न के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवादों में आ गए हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर व्हाइट हाउस के लिए एक कथित "Golden Gift" की तस्वीर साझा की, लेकिन बाद में मीडिया की जांच में यह तस्वीर AI-जनरेटेड (कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बनाई गई) पाई गई। क्या था ट्रंप का दावा? ट्रंप ने पोस्ट में व्हाइट हाउस की Truman Balcony पर एक विशाल सुनहरे बाज (Golden Eagle) की तस्वीर साझा की। तस्वीर में बाज अपने फैले हुए पंखों के साथ बालकनी पर बैठा दिखाई देता है, जबकि बालकनी पर अमेरिकी ध्वज वाले एक बड़े शील्ड (कवच) को भी दर्शाया गया है। पोस्ट के साथ ट्रंप ने लिखा: "व्हाइट हाउस के 250वें जन्मदिन के वर्ष के लिए एक गोल्डन गिफ्ट।" इसके बाद व्हाइट हाउस के आधिकारिक X अकाउंट ने भी इस पोस्ट को रीशेयर किया। फैक्ट चेक में क्या सामने आया? अमेरिकी समाचार चैनल CNN की पड़ताल में दावा किया गया कि यह तस्वीर वास्तविक नहीं है। जांच में सामने आए प्रमुख बिंदु: वास्तविक Truman Balcony की बनावट और रेलिंग तस्वीर से मेल नहीं खाती। तस्वीर में दिखाया गया विशाल सुनहरा बाज वास्तव में वहां मौजूद नहीं था। शील्ड पर केवल 11 सितारे दिखाई देते हैं, जबकि अमेरिकी इतिहास के अनुसार मूल 13 उपनिवेशों का प्रतिनिधित्व करने के लिए ऐसे प्रतीकों में सामान्यतः 13 सितारे होते हैं। फोटोग्राफर ने भी पेश किया सबूत फ्रीलांस फोटोग्राफर Andrew Leyden ने ट्रंप की पोस्ट के कुछ समय बाद रात करीब 9:30 बजे ट्रूमैन बालकनी की वास्तविक तस्वीरें साझा कीं। उनकी तस्वीरों में न तो कोई विशाल सुनहरा बाज दिखाई दिया और न ही वह शील्ड, जिसका जिक्र ट्रंप की पोस्ट में था। नए पासपोर्ट डिजाइन पर भी चर्चा इसी बीच ट्रंप ने अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक कथित 'लिमिटेड एडिशन' अमेरिकी पासपोर्ट का डिजाइन भी साझा किया। पोस्ट किए गए डिजाइन में: ट्रंप को ऐतिहासिक Resolute Desk पर बैठे हुए दिखाया गया है। पृष्ठभूमि में United States Declaration of Independence का चित्रण है। नीचे ट्रंप के हस्ताक्षर भी प्रदर्शित किए गए हैं। ट्रंप ने इसके साथ संदेश लिखा: "Welcome, but be good." AI कंटेंट को लेकर फिर छिड़ी बहस इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हस्तियों और सरकारी संस्थानों द्वारा साझा की जाने वाली AI-जनरेटेड तस्वीरों की पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि, इस मामले में व्हाइट हाउस या ट्रंप की ओर से AI-जनरेटेड तस्वीर साझा किए जाने के आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वाशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पेट्रोल बेचने वाली तेल कंपनियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का लाभ तुरंत उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत घटकर करीब 68 डॉलर प्रति बैरल रह गई है, लेकिन इसके बावजूद पेट्रोल की खुदरा कीमतों में अपेक्षित कमी नहीं की गई है। 'लोगों से जरूरत से ज्यादा पैसे वसूले जा रहे' ट्रम्प ने कहा कि जब कच्चा तेल लगातार सस्ता हो रहा है, तब भी आम अमेरिकी उपभोक्ताओं से अधिक कीमत वसूली जा रही है। उन्होंने तेल कंपनियों से पेट्रोल की कीमत लगभग 2.50 डॉलर प्रति गैलन तक लाने की अपील की। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं से अनावश्यक रूप से अधिक पैसे लेना स्वीकार्य नहीं है और इसे गैरकानूनी माना जा सकता है। तेल कंपनियों को दी सख्त चेतावनी राष्ट्रपति ट्रम्प ने साफ शब्दों में कहा कि यदि कंपनियों ने जल्द कीमतों में कटौती नहीं की, तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी। इससे पहले भी ट्रम्प अमेरिकी न्याय विभाग को बड़ी तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण संबंधी गतिविधियों की जांच के निर्देश दे चुके हैं। मध्य पूर्व तनाव के बाद बदला बाजार का रुख हाल के दिनों में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था। हालांकि अब स्थिति कुछ सामान्य होने के साथ तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में अपेक्षित कमी नहीं आने पर ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई है। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका में महंगाई और ईंधन की कीमतें आम लोगों के लिए बड़ा मुद्दा बनी हुई हैं। राष्ट्रपति का कहना है कि बाजार में पारदर्शिता और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है।
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान नीति के मोर्चे पर बड़ी राजनीतिक जीत मिली है। अमेरिकी सीनेट ने उस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया, जिसका उद्देश्य राष्ट्रपति की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने की शक्तियों पर कांग्रेस का नियंत्रण बढ़ाना था। मतदान के दौरान दो रिपब्लिकन सीनेटरों के अंतिम समय में रुख बदलने से ट्रंप प्रशासन को राहत मिल गई। प्रस्ताव के रुकने के बाद ट्रंप ने इसे ईरान के लिए "कड़ा संदेश" बताया और अपने सहयोगी सांसदों का धन्यवाद किया। ट्रंप ने जताई खुशी, बोले- ईरान के लिए चेतावनी सीनेट में मतदान के बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "वाह! सीनेट ने ईरान पर अपना वोट बदल दिया। रैंड पॉल और बिल कैसिडी ने अपना रुख बदला। नेता जॉन थ्यून, लिंडसे ग्राहम, बर्नी मोरेनो और सभी का धन्यवाद। यह वोट ईरान के लिए एक चेतावनी है।" ट्रंप का कहना है कि राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों को सीमित करने वाला प्रस्ताव अमेरिका की कूटनीतिक और रणनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता था। राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों पर लगाम लगाने की कोशिश नाकाम सीनेट में पेश किए गए इस प्रस्ताव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ईरान के खिलाफ किसी भी बड़े सैन्य अभियान से पहले कांग्रेस की स्पष्ट मंजूरी आवश्यक हो। सीनेट ने प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया और इस तरह राष्ट्रपति की मौजूदा युद्ध शक्तियों को सीमित करने की कोशिश फिलहाल विफल हो गई। दो रिपब्लिकन सांसदों ने बदला फैसला इस मतदान का सबसे बड़ा मोड़ दो रिपब्लिकन सांसदों के रुख बदलने से आया। सीनेटर रैंड पॉल ने इस बार 'प्रेजेंट' वोट किया, यानी उन्होंने पक्ष या विपक्ष में मतदान नहीं किया। सीनेटर बिल कैसिडी ने प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के खिलाफ मतदान किया। अंतिम मतदान में प्रस्ताव के पक्ष में पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका और परिणाम 47-50-1 रहा। रैंड पॉल बोले- शांति वार्ता के लिए दिया राष्ट्रपति को मौका मतदान से पहले रैंड पॉल ने सोशल मीडिया पर कहा कि उनकी युद्ध शक्तियों को लेकर राय नहीं बदली है। उन्होंने लिखा कि उनका 'प्रेजेंट' वोट राष्ट्रपति को स्थायी शांति के लिए बातचीत करने की अधिक गुंजाइश देने के उद्देश्य से है। बिल कैसिडी ने पहले उठाए सवाल, फिर बदला रुख सीनेटर बिल कैसिडी ने पहले ट्रंप प्रशासन से ईरान संघर्ष को लेकर कई सवाल पूछे थे। उनका कहना था कि सांसदों और जनता को युद्ध की वास्तविक स्थिति की पूरी जानकारी मिलनी चाहिए। बाद में उन्होंने बताया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने उन्हें विस्तृत जानकारी दी, जिससे उनकी कई चिंताएं दूर हो गईं। इसके बाद उन्होंने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। कुछ रिपब्लिकन ने किया समर्थन, डेमोक्रेट में भी दिखी अलग राय रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिन्स और लिसा मुर्कोव्स्की ने राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों को सीमित करने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया। वहीं डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन फेटरमैन ने प्रस्ताव का विरोध किया। इससे साफ हुआ कि ईरान नीति को लेकर मतभेद केवल पार्टी लाइनों तक सीमित नहीं हैं। राष्ट्रपति की शक्तियों पर बहस जारी अमेरिका में राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सांसदों का तर्क है कि यदि कोई फैसला अमेरिका को बड़े सैन्य संघर्ष की ओर ले जा सकता है, तो उसमें कांग्रेस की औपचारिक मंजूरी अनिवार्य होनी चाहिए। वहीं ट्रंप समर्थकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के समय राष्ट्रपति के पास त्वरित निर्णय लेने की पर्याप्त संवैधानिक शक्तियां बनी रहनी चाहिए। ईरान को लेकर जारी तनाव के बीच सीनेट का यह फैसला ट्रंप प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक जीत माना जा रहा है, जबकि राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों को लेकर अमेरिकी कांग्रेस में बहस आगे भी जारी रहने के संकेत हैं।
Washington: ईरान के मिनाब स्कूल पर हुए घातक मिसाइल हमले को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि अब तक ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो सके कि स्कूल पर हमला अमेरिकी मिसाइल से किया गया था। उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान कई पक्षों की ओर से लगातार मिसाइलें दागी जा रही थीं, इसलिए हमले के लिए जिम्मेदार पक्ष की पहचान करना आसान नहीं है। 'हमारी मिसाइल थी, इसका कोई प्रमाण नहीं' हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि कुछ लोगों ने दावा किया कि मिनाब स्कूल पर अमेरिकी मिसाइल से हमला हुआ, लेकिन उनके पास इस दावे की पुष्टि करने वाला कोई विश्वसनीय प्रमाण नहीं है। उन्होंने कहा, "युद्ध के दौरान हर दिशा से मिसाइलें दागी जा रही थीं। ऐसे में यह तय करना बेहद मुश्किल है कि किस मिसाइल ने हमला किया। मुझे ऐसा कोई सबूत नहीं दिखा जिससे यह कहा जा सके कि वह हमारी मिसाइल थी।" 28 फरवरी को हुआ था भीषण हमला ईरान-अमेरिका संघर्ष के पहले दिन यानी 28 फरवरी को मिनाब स्थित एक स्कूल पर मिसाइल हमला हुआ था। इस हमले में 150 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जिनमें बड़ी संख्या में स्कूली छात्राएं शामिल थीं। घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और हमले की निष्पक्ष जांच की मांग उठी। अमेरिका पर लगे थे गंभीर आरोप हमले के तुरंत बाद कई मीडिया रिपोर्टों और विश्लेषकों ने आशंका जताई थी कि इसके पीछे अमेरिकी सैन्य कार्रवाई हो सकती है। अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और मामले की जांच जारी होने की बात कही है। ट्रंप ने जांच पर भी जताया संदेह डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इतने बड़े सैन्य संघर्ष के दौरान यह तय करना बेहद कठिन है कि किसी विशेष हमले के लिए कौन जिम्मेदार था। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है कि इस मामले की पूरी सच्चाई कभी सामने ही न आ सके। उनके मुताबिक, युद्ध क्षेत्र में लगातार हो रहे हमलों और अलग-अलग पक्षों की सैन्य गतिविधियों के कारण जांच एजेंसियों के सामने भी बड़ी चुनौती है। दुनिया की नजर जांच रिपोर्ट पर मिनाब स्कूल पर हुआ हमला ईरान-अमेरिका संघर्ष की सबसे दर्दनाक घटनाओं में गिना जा रहा है। बड़ी संख्या में बच्चों और नागरिकों की मौत के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच एजेंसियां इस हमले के लिए जिम्मेदार पक्ष की पहचान कर पाती हैं या नहीं।
New York Democratic Primary: न्यूयॉर्क की डेमोक्रेटिक प्राइमरी में भले ही जोहरान ममदानी खुद चुनाव मैदान में नहीं थे, लेकिन चुनाव नतीजों के बाद वह सबसे प्रभावशाली नेता बनकर उभरे हैं। उनके समर्थन वाले तीनों उम्मीदवारों ने अपने-अपने मुकाबले में जीत दर्ज की है। इन नतीजों के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर ममदानी की राजनीतिक पकड़ और मजबूत मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषक अब उन्हें पार्टी का नया 'किंगमेकर' बता रहे हैं। ममदानी समर्थित उम्मीदवारों में ब्रैड लैंडर ने मौजूदा सांसद डैन गोल्डमैन को हराया। वहीं क्लेयर वाल्डेज ने ब्रुकलिन बरो प्रेसिडेंट एंटोनियो रेनोसो को मात दी। तीसरे मुकाबले में डारियालिजा एविला शेवेलियर ने अनुभवी नेता एड्रियानो एस्पाइलाट को हराकर सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर कर दिया। चूंकि इन सीटों पर डेमोक्रेटिक पार्टी का मजबूत आधार है, इसलिए नवंबर में होने वाले आम चुनाव में इन उम्मीदवारों की जीत की संभावना भी काफी अधिक मानी जा रही है. ममदानी बोले- यह सिर्फ शुरुआत है तीनों उम्मीदवारों की जीत के बाद जोहरान ममदानी ने कहा कि उनकी राजनीतिक सफलता कोई संयोग नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले साल की जीत केवल एक शुरुआत थी और अब उनकी राजनीतिक विचारधारा व्यापक स्तर पर स्वीकार की जा रही है। ममदानी ने कहा कि उनका संगठन केवल चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे उम्मीदवारों को भी आगे बढ़ा रहा है जो आम लोगों के मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं। तीनों मुकाबलों में कैसे बदला राजनीतिक समीकरण? ब्रैड लैंडर ने डैन गोल्डमैन को दी मात सबसे चर्चित मुकाबला लोअर मैनहट्टन और ब्रुकलिन सीट पर हुआ, जहां ब्रैड लैंडर ने मौजूदा सांसद डैन गोल्डमैन को हराया। चुनाव प्रचार के दौरान लैंडर ने खुद को अधिक प्रगतिशील उम्मीदवार के रूप में पेश किया। ममदानी ने खुलकर उनके समर्थन में प्रचार किया, जिसका चुनाव परिणाम पर असर देखने को मिला। क्लेयर वाल्डेज ने पलट दिया मुकाबला ब्रुकलिन और क्वींस की सीट पर क्लेयर वाल्डेज ने एंटोनियो रेनोसो को हराकर सभी को चौंका दिया। यह सीट सांसद निडिया वेलाजक्वेज के हटने के बाद खाली हुई थी। ममदानी के समर्थन से वाल्डेज को युवा और प्रगतिशील मतदाताओं का बड़ा समर्थन मिला। डारियालिजा एविला शेवेलियर की ऐतिहासिक जीत सबसे बड़ा उलटफेर डारियालिजा एविला शेवेलियर ने किया। उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एड्रियानो एस्पाइलाट को हराया, जो करीब एक दशक से कांग्रेस में थे। इस जीत को न्यूयॉर्क की राजनीति के सबसे बड़े उलटफेरों में गिना जा रहा है। क्यों कहा जा रहा है 'किंगमेकर'? राजनीति में किसी नेता का उम्मीदवारों का समर्थन करना सामान्य बात है, लेकिन जोहरान ममदानी के समर्थन वाले तीनों उम्मीदवारों की जीत ने उनकी राजनीतिक ताकत को नई पहचान दी है। खास बात यह रही कि दो उम्मीदवारों ने मौजूदा सांसदों को हराया, जबकि तीसरे ने एक मजबूत राजनीतिक दावेदार को चुनावी मैदान में मात दी। ममदानी की कम्युनिकेशन डायरेक्टर अन्ना बह्र ने कहा कि यह नतीजे दिखाते हैं कि आम लोगों के मुद्दों पर आधारित राजनीति अब पारंपरिक चुनावी रणनीतियों पर भारी पड़ रही है। गाजा और इजरायल मुद्दा भी बना चुनावी केंद्र इन प्राइमरी चुनावों में गाजा युद्ध और अमेरिका की इजरायल नीति भी प्रमुख मुद्दा रही। ममदानी और उनके समर्थित उम्मीदवारों ने महंगाई, आवास संकट और आम लोगों की आर्थिक परेशानियों को अमेरिकी विदेश नीति से जोड़कर चुनाव प्रचार किया। इस रुख को लेकर उन्हें न्यूयॉर्क के कुछ यहूदी संगठनों और नेताओं की आलोचना का भी सामना करना पड़ा। डैन गोल्डमैन ने आरोप लगाया कि ममदानी का अभियान मध्य-पूर्व के मुद्दों को जरूरत से ज्यादा महत्व दे रहा है, जिससे राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ रहा है। डेमोक्रेटिक पार्टी में बढ़ा ममदानी का कद ताजा चुनाव परिणामों के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर जोहरान ममदानी का प्रभाव पहले से कहीं अधिक मजबूत माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि उनके समर्थित उम्मीदवार नवंबर के आम चुनाव में भी जीत हासिल करते हैं, तो ममदानी आने वाले वर्षों में पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।
वॉशिंगटन: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पाकिस्तान के प्रति नरम रुख और "हम पाकिस्तान से प्यार करते हैं" वाले बयान ने अमेरिका की घरेलू राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। वेंस के बयान के बाद दो रिपब्लिकन सीनेटरों ने पाकिस्तान और कतर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए दोनों देशों पर आतंकवादियों को पनाह देने और चरमपंथी संगठनों को समर्थन देने के आरोप लगाए हैं। रिक स्कॉट बोले- पाकिस्तान और कतर का आतंकियों को शरण देने का इतिहास Rick Scott ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि दुनिया को अब यह समझ जाना चाहिए कि अमेरिका के असली सहयोगी कौन हैं। उन्होंने लिखा, "कतर और पाकिस्तान का आतंकवादियों को पनाह देने का लंबा इतिहास रहा है। दोनों देश सार्थक शांति स्थापित करने के बजाय ईरान के दशकों पुराने आतंकी नेटवर्क को बढ़ावा देने में अधिक रुचि रखते हैं।" स्कॉट ने यह भी कहा कि ईरान के साथ ऐसा समझौता संभव है जो सभी पक्षों के हित में हो, लेकिन किसी भी स्थिति में तेहरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। जेडी वेंस के बयान से बढ़ा विवाद विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब JD Vance ने स्विट्जरलैंड में अमेरिका, पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के दौरान कहा था कि "हम पाकिस्तान से प्यार करते हैं।" वेंस उस समय ईरान के साथ संभावित शांति समझौते की तकनीकी और कूटनीतिक बारीकियों पर चर्चा कर रहे थे। उनके इस बयान के बाद रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ही पाकिस्तान को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। टिम शीही ने दिलाई ओसामा बिन लादेन की याद Tim Sheehy ने भी पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका को उसके अतीत को नहीं भूलना चाहिए। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "हमें यह याद रखना चाहिए कि पाकिस्तान ने एक दशक तक ओसामा बिन लादेन को अपने यहां छिपाकर रखा था।" शीही ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अतीत में ऐसे तत्वों को समर्थन दिया, जिन्होंने अमेरिकी हितों के खिलाफ काम किया। UAE, इजरायल और सऊदी अरब को बातचीत में शामिल करने की मांग सीनेटर शीही ने कहा कि यदि पाकिस्तान और कतर को मध्यस्थ की भूमिका दी जा रही है, तो अमेरिका को अपने पारंपरिक सहयोगियों को भी वार्ता प्रक्रिया में शामिल करना चाहिए। उन्होंने कहा, "संयुक्त अरब अमीरात, इजरायल और सऊदी अरब मध्य पूर्व में अमेरिका के सबसे विश्वसनीय सहयोगी हैं। किसी भी शांति प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।" कतर पर भी लगाए गंभीर आरोप शीही ने कतर पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह वर्षों से विभिन्न चरमपंथी संगठनों के लिए वित्तीय नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा, "यह मान लेना कि पाकिस्तान और कतर पूरी तरह निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाएंगे, वास्तविकता से दूर है।" अमेरिका में पाकिस्तान की भूमिका पर फिर छिड़ी बहस रिपब्लिकन सांसदों के बयानों से साफ है कि अमेरिका में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर पुराने सवाल एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। जेडी वेंस के हालिया बयान के बाद वॉशिंगटन में यह बहस तेज हो गई है कि मध्य पूर्व की नई कूटनीतिक पहल में पाकिस्तान और कतर की भूमिका कितनी प्रभावी और निष्पक्ष मानी जा सकती है।
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कतर की ओर से उपहार में मिले 400 मिलियन डॉलर मूल्य के विशेष बोइंग 747 विमान का अनावरण करते हुए इसे अपना नया अस्थायी 'एयर फोर्स वन' घोषित किया है। ट्रंप ने इस विमान को "दुनिया का सबसे आलीशान विमान" बताया और कहा कि यह अगले कुछ वर्षों तक राष्ट्रपति की आधिकारिक हवाई यात्राओं की जिम्मेदारी संभालेगा। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब 35 वर्षों तक अमेरिकी राष्ट्रपतियों की सेवा करने वाले पुराने एयर फोर्स वन विमान को हाल ही में रिटायर किया गया है। अगले NATO शिखर सम्मेलन में इसी विमान से जाएंगे ट्रंप राष्ट्रपति ट्रंप अगले महीने North Atlantic Treaty Organization के अंकारा शिखर सम्मेलन में इसी विमान से यात्रा करेंगे। यह विमान तब तक अस्थायी राष्ट्रपति विमान के रूप में उपयोग किया जाएगा, जब तक अमेरिकी वायु सेना के नए पीढ़ी के VC-25B विमान 2027-28 में सेवा में नहीं आ जाते। कतर के उपहार पर अमेरिका में छिड़ा विवाद ट्रंप ने मैरीलैंड स्थित Joint Base Andrews में लाल, सफेद, गहरे नीले और सुनहरे रंग से सजे इस विमान का अनावरण किया। इस विमान को लेकर अमेरिका में राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है। अमेरिकी नियमों के अनुसार, किसी भी सरकारी अधिकारी को एक कैलेंडर वर्ष में किसी एक स्रोत से बिना मांगे अधिकतम 50 डॉलर तक का उपहार स्वीकार करने की अनुमति है। ऐसे में 400 मिलियन डॉलर के इस विमान को स्वीकार किए जाने पर विपक्ष और नैतिकता विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं। ट्रंप बोले- इतना बड़ा प्रस्ताव ठुकराना मूर्खता होती आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा कि इतने बड़े प्रस्ताव को ठुकराना "मूर्खता" होती। वहीं, United States Department of Defense के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने कहा कि कतर से विमान स्वीकार करने की प्रक्रिया सभी संघीय नियमों और प्रावधानों के अनुरूप पूरी की गई है। राष्ट्रपति विमान में बदलने पर आएगा 1 अरब डॉलर तक का खर्च विमान की मूल कीमत 400 मिलियन डॉलर है, लेकिन इसे राष्ट्रपति की सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप पूरी तरह तैयार करने में भारी खर्च आने का अनुमान है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस बोइंग 747 को पूर्ण राष्ट्रपति विमान में बदलने के लिए लगभग 1 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च आ सकता है। इसमें उन्नत संचार प्रणाली, मिसाइल रक्षा तकनीक, साइबर सुरक्षा उपकरण और विशेष कमांड सुविधाएं शामिल की जाएंगी। उधर, नए VC-25B विमानों की डिलीवरी में देरी के कारण उनकी कुल परियोजना लागत भी बढ़कर लगभग 5 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है। 'दुनिया का सबसे आलीशान विमान' अनावरण समारोह के दौरान ट्रंप ने कतर के अमीर का धन्यवाद करते हुए कहा, "इसे दुनिया का सबसे आलीशान विमान माना जाता है। जब इसे बनाया गया था, तब इसे ऐसे स्तर पर तैयार किया गया था, जो शायद फिर कभी देखने को न मिले।" उन्होंने यह भी कहा कि कई विदेशी नेताओं के पास अमेरिका से अधिक आधुनिक सरकारी विमान हैं और अमेरिका को भी अपने राष्ट्रपति बेड़े को उसी स्तर पर बनाए रखना चाहिए। क्यों खास है यह विमान? कीमत: लगभग 400 मिलियन डॉलर मॉडल: विशेष रूप से तैयार किया गया बोइंग 747 भूमिका: अस्थायी एयर फोर्स वन उपयोग अवधि: 2027-28 तक अनुमानित रूपांतरण लागत: लगभग 1 अरब डॉलर पहली प्रमुख यात्रा: अंकारा में NATO शिखर सम्मेलन कतर से मिले इस लग्जरी विमान के अनावरण ने अमेरिकी राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। एक ओर ट्रंप इसे अमेरिकी प्रतिष्ठा और आधुनिकता की जरूरत बता रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे उपहार नीति, नैतिकता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा मान रहा है।
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और एनबीसी न्यूज की वरिष्ठ पत्रकार क्रिस्टेन वेल्कर के बीच हुए एक तीखे टीवी इंटरव्यू ने अमेरिका की राजनीतिक और मीडिया दुनिया में नई बहस छेड़ दी है। इंटरव्यू के दौरान दोनों के बीच कई मुद्दों पर तीखी नोकझोंक हुई और आखिरकार ट्रंप बातचीत बीच में ही छोड़कर स्टूडियो से बाहर निकल गए। इस घटना के बाद क्रिस्टेन वेल्कर एक बार फिर सुर्खियों में आ गई हैं। इंटरव्यू में क्या हुआ? एनबीसी के लोकप्रिय राजनीतिक कार्यक्रम ‘Meet the Press’ में बातचीत की शुरुआत विदेश नीति और ईरान से जुड़े मुद्दों पर हुई। चर्चा के दौरान ट्रंप ने एक बार फिर 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को "धांधली वाला चुनाव" बताया और दावा किया कि उनके पास इसके पर्याप्त सबूत हैं। जब क्रिस्टेन वेल्कर ने उनसे सबूतों के बारे में पूछा तो ट्रंप ने कैलिफोर्निया में देर से पूरी हुई मतगणना का उदाहरण दिया। वेल्कर ने चुनावी प्रक्रिया और नियमों का हवाला देकर उनकी बात को चुनौती दी। इसके बाद माहौल और गर्म हो गया। ट्रंप ने मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिकी मीडिया संस्थान भ्रष्ट हैं। इसी दौरान उन्होंने वेल्कर से कहा कि "या तो आप भ्रष्ट हैं या फिर मूर्ख।" बहस के बाद इंटरव्यू छोड़कर चले गए ट्रंप करीब एक घंटे तक चली बातचीत के दौरान दोनों के बीच कई बार तीखी बहस हुई। अंत में ट्रंप ने बातचीत समाप्त करने का फैसला करते हुए कहा कि अब उनके लिए काफी हो चुका है। उन्होंने अपना माइक्रोफोन उतारा और इंटरव्यू बीच में ही छोड़ दिया। स्टूडियो से बाहर जाते समय उन्होंने मीडिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि बेईमान प्रेस किसी भी देश के लिए अच्छी नहीं होती। कौन हैं क्रिस्टेन वेल्कर? क्रिस्टेन वेल्कर अमेरिका की सबसे प्रतिष्ठित राजनीतिक पत्रकारों में से एक मानी जाती हैं। उनका जन्म 1 जुलाई 1976 को हुआ था। वह वर्तमान में NBC News की वरिष्ठ पत्रकार और अमेरिका के चर्चित राजनीतिक कार्यक्रम ‘Meet the Press’ की होस्ट हैं। सितंबर 2023 में उन्होंने इस कार्यक्रम की कमान संभाली थी। इससे पहले वह NBC के ‘Weekend Today’ शो की सह-एंकर भी रह चुकी हैं। हार्वर्ड से पढ़ाई, व्हाइट हाउस तक का सफर क्रिस्टेन ने अपनी शुरुआती पढ़ाई फिलाडेल्फिया के जर्मनटाउन फ्रेंड्स स्कूल से की। बाद में उन्होंने प्रतिष्ठित Harvard University से अमेरिकी इतिहास में स्नातक की डिग्री हासिल की। पत्रकारिता में उनका करियर स्थानीय टीवी स्टेशनों से शुरू हुआ। कई क्षेत्रीय चैनलों में काम करने के बाद वह 2005 में NBC से जुड़ीं। 2011 में उन्हें व्हाइट हाउस संवाददाता बनाया गया और उन्होंने कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों के कार्यकाल को करीब से कवर किया। 2020 की राष्ट्रपति बहस से मिली बड़ी पहचान क्रिस्टेन वेल्कर को अंतरराष्ट्रीय पहचान 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान मिली, जब उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप और Joe Biden के बीच अंतिम राष्ट्रपति बहस का संचालन किया था। कोविड-19 महामारी के दौर में आयोजित उस बहस में उनके संतुलित और सख्त संचालन की व्यापक सराहना हुई थी। कई मीडिया विश्लेषकों ने उन्हें निष्पक्ष और प्रभावी मॉडरेटर बताया था। ट्रंप से पहले भी कई बार हो चुकी है टक्कर यह पहली बार नहीं है जब क्रिस्टेन वेल्कर और ट्रंप आमने-सामने आए हों। पिछले कुछ वर्षों में वह कई बार ट्रंप का इंटरव्यू कर चुकी हैं। मई 2025 में भी उन्होंने ट्रंप से अमेरिकी संविधान और राष्ट्रपति की शक्तियों को लेकर सवाल पूछे थे, जिनके जवाबों ने काफी विवाद पैदा किया था। ताजा इंटरव्यू अब तक का सबसे तीखा माना जा रहा है। फिर चर्चा में क्यों हैं वेल्कर? ताजा इंटरव्यू के बाद अमेरिकी मीडिया और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। समर्थक जहां इसे पत्रकारिता की स्वतंत्रता का उदाहरण बता रहे हैं, वहीं ट्रंप समर्थक इसे पक्षपातपूर्ण पत्रकारिता करार दे रहे हैं। फिलहाल इतना तय है कि ट्रंप के वॉकआउट के बाद क्रिस्टेन वेल्कर एक बार फिर अमेरिकी राजनीति और मीडिया विमर्श के केंद्र में आ गई हैं।
ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव को लेकर अमेरिकी राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की युद्ध संबंधी शक्तियों को सीमित करने वाला प्रस्ताव पारित कर दिया है। खास बात यह रही कि इस प्रस्ताव को पारित कराने में कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी डेमोक्रेट्स का साथ दिया। 215-208 वोटों से पास हुआ प्रस्ताव बुधवार को हुए मतदान में प्रस्ताव 215 के मुकाबले 208 मतों से पारित हुआ। मतदान के दौरान रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी, ब्रायन फिट्जपैट्रिक, टॉम बैरेट और वॉरेन डेविडसन ने पार्टी लाइन से हटकर प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया। इस नतीजे ने संकेत दिया है कि ईरान नीति को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी मतभेद बढ़ रहे हैं। कांग्रेस की मंजूरी बिना युद्ध पर उठे सवाल विवाद की जड़ अमेरिकी सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ है, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी। आलोचकों का आरोप है कि व्हाइट हाउस ने इस सैन्य कार्रवाई के लिए कांग्रेस से औपचारिक मंजूरी नहीं ली। डेमोक्रेट सांसदों का कहना है कि अमेरिकी संविधान के अनुसार लंबे सैन्य अभियान के लिए कांग्रेस की स्वीकृति आवश्यक है। क्या है वॉर पावर्स रिजॉल्यूशन? प्रतिनिधि सभा द्वारा पारित यह प्रस्ताव ‘वॉर पावर्स रिजॉल्यूशन’ के तहत लाया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रपति कांग्रेस की अनुमति के बिना लंबे समय तक किसी सैन्य संघर्ष में अमेरिका को शामिल न रख सकें। यह प्रस्ताव सीधे कानून नहीं बनता, लेकिन इसके जरिए राष्ट्रपति पर राजनीतिक और संवैधानिक दबाव बढ़ाया जा सकता है। अब सीनेट में होगी अगली परीक्षा हाउस से पारित होने के बाद यह प्रस्ताव अब सीनेट के पास जाएगा। वहां भी मंजूरी मिलने पर ट्रंप प्रशासन पर दबाव और बढ़ सकता है। अंतिम रूप से यह प्रस्ताव राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए नहीं भेजा जाता और सामान्य परिस्थितियों में इसे कानून का दर्जा नहीं मिलता। डेमोक्रेट सांसद बोले- संविधान की रक्षा जरूरी प्रस्ताव पेश करने वाले न्यूयॉर्क के डेमोक्रेट सांसद ग्रेगरी मीक्स ने कहा कि कांग्रेस अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभा रही है। उन्होंने कहा कि जब कार्यपालिका संविधान के अनुरूप काम नहीं करती, तब विधायिका का दायित्व है कि वह नियंत्रण और संतुलन की भूमिका निभाए। पहले टल गया था मतदान, अब बदल गए हालात इस प्रस्ताव पर मतदान मई में होना था, लेकिन उस समय इसे टाल दिया गया था। डेमोक्रेट नेताओं ने आरोप लगाया था कि रिपब्लिकन नेतृत्व प्रस्ताव की संभावित सफलता से चिंतित था। अब कुछ रिपब्लिकन सांसदों के समर्थन के साथ प्रस्ताव पारित होने से राजनीतिक समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं। रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी बढ़ रही असहमति ईरान नीति के अलावा हाल के महीनों में ट्रंप प्रशासन के कई प्रस्तावों पर रिपब्लिकन सांसदों के बीच मतभेद सामने आए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि विदेश नीति और सरकारी खर्चों को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग धड़े खुलकर सामने आने लगे हैं। स्पीकर माइक जॉनसन ने किया विरोध प्रतिनिधि सभा के स्पीकर माइक जॉनसन ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि राष्ट्रपति की शक्तियों पर इस तरह के प्रतिबंध अमेरिका की कूटनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकते हैं। उनका तर्क था कि ईरान में सैन्य अभियान के उद्देश्य पूरे किए जा चुके हैं और अब शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति को पर्याप्त स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। सैन्य अभियान की वैधानिक जांच भी शुरू इसी बीच पेंटागन, विदेश विभाग और यूएसएआईडी के महानिरीक्षकों ने ईरान से जुड़े सैन्य अभियान की संयुक्त समीक्षा शुरू कर दी है। निगरानी एजेंसियों का कहना है कि कानून के तहत 60 दिनों से अधिक समय तक चलने वाले सैन्य अभियानों की समीक्षा अनिवार्य होती है। इससे व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की ताजा मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी गई है। व्हाइट हाउस द्वारा जारी स्वास्थ्य रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हैं और राष्ट्रपति के रूप में अपनी सभी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में सक्षम हैं। हालांकि डॉक्टरों ने उन्हें वजन कम करने, नियमित व्यायाम करने और खान-पान में सुधार करने की सलाह भी दी है। व्हाइट हाउस ने जारी की मेडिकल रिपोर्ट व्हाइट हाउस ने शुक्रवार (29 मई) को राष्ट्रपति की वार्षिक स्वास्थ्य जांच से जुड़ी मेडिकल रिपोर्ट जारी की। राष्ट्रपति के चिकित्सक Sean Barbabella ने एक आधिकारिक मेमो में ट्रंप की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के हृदय, फेफड़ों और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली सामान्य पाई गई है। डॉक्टरों ने उनकी मानसिक क्षमता और संज्ञानात्मक स्थिति को भी संतोषजनक बताया है। राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारियों के लिए पूरी तरह फिट मेडिकल रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ट्रंप राष्ट्रपति और कमांडर-इन-चीफ के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी उम्र को देखते हुए स्वास्थ्य स्थिति अच्छी है और किसी गंभीर बीमारी या ऐसी समस्या के संकेत नहीं मिले हैं जो उनके सार्वजनिक दायित्वों को प्रभावित कर सके। वजन घटाने की सलाह रिपोर्ट में उनकी समग्र स्वास्थ्य स्थिति को सकारात्मक बताया गया है, लेकिन डॉक्टरों ने ट्रंप को वजन नियंत्रित करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती उम्र में वजन कम करने से हृदय संबंधी जोखिम घट सकते हैं और शारीरिक क्षमता को लंबे समय तक बेहतर बनाए रखा जा सकता है। इसी वजह से उन्हें नियमित व्यायाम और संतुलित आहार अपनाने की सिफारिश की गई है। खान-पान और जीवनशैली में सुधार की जरूरत मेडिकल टीम ने ट्रंप को अपनी डाइट में सुधार करने और शारीरिक गतिविधियां बढ़ाने की सलाह दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से उनकी फिटनेस और बेहतर हो सकती है। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि नियमित स्वास्थ्य जांच और सक्रिय दिनचर्या उनके दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद रहेगी। 14 जून को 80 वर्ष के होंगे ट्रंप डोनाल्ड ट्रंप 14 जून को 80 वर्ष के हो जाएंगे। उनकी उम्र को लेकर अक्सर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस होती रही है, खासकर तब जब वे अमेरिका के सबसे वरिष्ठ उम्र वाले नेताओं में शामिल हैं। ऐसे में व्हाइट हाउस की ओर से जारी यह मेडिकल रिपोर्ट उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मानी जा रही है। उम्र को लेकर चर्चा के बीच आई रिपोर्ट अमेरिका में शीर्ष राजनीतिक नेताओं की उम्र और स्वास्थ्य पिछले कुछ वर्षों से महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा बने हुए हैं। इसी संदर्भ में ट्रंप की स्वास्थ्य रिपोर्ट पर भी व्यापक नजर रखी जा रही थी। व्हाइट हाउस का कहना है कि मेडिकल जांच के निष्कर्ष बताते हैं कि राष्ट्रपति की शारीरिक और मानसिक स्थिति स्थिर है तथा वे अपने कार्यकाल की जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने में सक्षम हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के जन्मदिन पर व्हाइट हाउस में बड़ा UFC फाइट इवेंट आयोजित किया जाएगा। इसके लिए व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में विशाल फाइटिंग एरीना तैयार किया जा रहा है। मंगलवार को वहां बड़े क्रेन और लोहे के ढांचे लगाते हुए देखा गया। यह मुकाबला 14 जून को होगा, जो ट्रंप का 80वां जन्मदिन भी है। हजारों लोग लाइव देखेंगे मुकाबला ट्रंप ने बताया कि इस इवेंट में करीब 4,500 लोग सीधे व्हाइट हाउस लॉन में बैठकर मुकाबला देख सकेंगे। इसके अलावा व्हाइट हाउस के बाहर बड़ी स्क्रीन लगाई जाएंगी, जहां करीब 1 लाख लोग मुफ्त में मैच देख पाएंगे। ट्रंप बोले- ऐसा इवेंट पहले कभी नहीं हुआ इस महीने ओवल ऑफिस में हुए एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा था कि यह बेहद बड़ा फाइट इवेंट होगा और ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने UFC के मशहूर ऑक्टागन रिंग की तस्वीर भी दिखाई थी, जिसके पीछे व्हाइट हाउस नजर आ रहा था। UFC फाइटिंग के बड़े फैन हैं ट्रंप डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से UFC मुकाबलों के समर्थक रहे हैं। वह कई बड़े फाइट इवेंट्स में हिस्सा लेते रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि UFC जैसे खेलों के जरिए ट्रंप युवा पुरुष वोटर्स के बीच अपनी लोकप्रियता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। ‘UFC Freedom 250’ रखा गया इवेंट का नाम इस खास मुकाबले का नाम “UFC Freedom 250” रखा गया है। ट्रंप ने इसे अमेरिका की स्थापना की 250वीं वर्षगांठ से जुड़ा कार्यक्रम बताया है। UFC की ओर से पहले ही घोषणा की जा चुकी है कि मुख्य मुकाबले में Ilia Topuria और Justin Gaethje आमने-सामने होंगे। इस इवेंट पर खर्च होंगे करोड़ों डॉलर रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस आयोजन पर करीब 6 करोड़ डॉलर खर्च हो सकते हैं। व्हाइट हाउस का कहना है कि इस कार्यक्रम का पूरा खर्च UFC कंपनी उठाएगी और अमेरिकी टैक्सपेयर्स का पैसा इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। व्हाइट हाउस में पहले भी कर चुके हैं बड़े बदलाव यह आयोजन ट्रंप द्वारा व्हाइट हाउस में किए जा रहे बड़े बदलावों का हिस्सा माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे पहले रोज गार्डन की घास हटाई जा चुकी है और ईस्ट विंग में बड़ा बॉलरूम बनाने की योजना पर भी काम चल रहा है। युद्ध और महंगाई के बीच हो रहा बड़ा आयोजन यह इवेंट ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका ईरान के साथ बढ़ते तनाव और महंगाई जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसी वजह से विपक्षी दल और कई विश्लेषक इस आयोजन को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं।
अमेरिकी सीनेटर Lindsey Graham ने ईरान-इजराइल तनाव के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ बताता है, लेकिन उसका इजराइल के प्रति रवैया हमेशा विरोधी रहा है। ग्राहम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए पाकिस्तान से अब्राहम समझौते को लेकर स्पष्ट जवाब देने की मांग की। ईरानी सैन्य विमानों को लेकर भी किया दावा लिंडसे ग्राहम ने दावा किया कि ईरानी सैन्य विमान पाकिस्तान के एयरबेस पर मौजूद हैं। हालांकि उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक सबूत सार्वजनिक नहीं किया। उनका बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में ईरान और इजराइल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। पाकिस्तान के पुराने बयान का किया जिक्र ग्राहम ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के एक पुराने बयान का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान कभी अब्राहम समझौते का हिस्सा नहीं बनेगा क्योंकि उसे इजराइल पर भरोसा नहीं है। अमेरिकी सांसद ने कहा कि भले यह बयान पुराना हो, लेकिन पाकिस्तान की सोच आज भी वैसी ही दिखाई देती है। ट्रम्प की अपील का जवाब देने को कहा ग्राहम ने कहा कि अब पाकिस्तान को Donald Trump की उस अपील पर जवाब देना चाहिए, जिसमें मुस्लिम देशों से इजराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान खुद को क्षेत्र में शांति का समर्थक बताता है, तो उसे अपने रुख को साफ करना चाहिए। क्या है अब्राहम समझौता? Abraham Accords के तहत कुछ अरब देशों ने इजराइल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे और इजराइल को आधिकारिक मान्यता दी थी। इस समझौते के जरिए मध्य पूर्व में नए राजनीतिक और आर्थिक सहयोग की शुरुआत हुई थी। अमेरिका चाहता है कि और मुस्लिम देश भी इसमें शामिल हों। पाकिस्तान अब तक समझौते से दूर पाकिस्तान अब तक अब्राहम समझौते का हिस्सा नहीं बना है। पाकिस्तान लंबे समय से कहता आया है कि फिलिस्तीन मुद्दे का समाधान हुए बिना वह इजराइल को मान्यता नहीं देगा। पाकिस्तान की आधिकारिक नीति यही रही है कि स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य बनने के बाद ही इजराइल के साथ संबंधों पर विचार किया जाएगा। मध्य पूर्व तनाव के बीच बढ़ी कूटनीतिक चर्चा ईरान-इजराइल तनाव बढ़ने के बीच अमेरिका, पाकिस्तान और अन्य मुस्लिम देशों की भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की राजनीति और कूटनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
Donald Trump ने एक AI-जनरेटेड वीडियो शेयर कर नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस वीडियो में अमेरिकी टीवी होस्ट Stephen Colbert को कूड़ेदान में फेंकते हुए दिखाया गया है। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। क्या है वीडियो में? वीडियो में दिखाया गया है कि जैसे ही The Late Show with Stephen Colbert के अंतिम एपिसोड में स्टीफन कोल्बर्ट दर्शकों का स्वागत करते हैं, तभी पीछे से ट्रंप आते हैं। इसके बाद ट्रंप उन्हें कॉलर से पकड़कर डस्टबिन में फेंक देते हैं और फिर डांस करने लगते हैं। बैकग्राउंड में उनके चुनावी कैंपेन की धुन जैसी म्यूजिक भी सुनाई देती है। यह वीडियो AI तकनीक से तैयार किया गया बताया जा रहा है। शो के आखिरी एपिसोड के बाद बढ़ा विवाद यह वीडियो ऐसे समय सामने आया, जब ‘The Late Show with Stephen Colbert’ का आखिरी एपिसोड हाल ही में प्रसारित हुआ। 2015 में शुरू हुआ यह शो अमेरिका के सबसे लोकप्रिय लेट-नाइट टॉक शोज में शामिल रहा। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक शो का फिनाले एपिसोड रिकॉर्ड व्यूअरशिप के साथ खत्म हुआ। ओवरनाइट नीलसन रेटिंग्स के अनुसार इसे करीब 6.74 मिलियन लोगों ने देखा, जो 2015 के पहले एपिसोड से भी ज्यादा था। फिनाले एपिसोड में कई स्टार्स पहुंचे 21 मई को प्रसारित अंतिम एपिसोड में कई सेलिब्रिटी मेहमान शामिल हुए। कोल्बर्ट ने अपने खास अंदाज में दर्शकों को अलविदा कहा। शो के दौरान अभिनेता Bryan Cranston ने सरप्राइज एंट्री भी दी। क्यों बंद हुआ शो? CBS ने जुलाई 2025 में घोषणा की थी कि 30 साल पुराने इस शो को बंद किया जा रहा है। नेटवर्क ने इसके पीछे आर्थिक कारण बताए थे और कहा था कि पारंपरिक टीवी ब्रॉडकास्टिंग पर बढ़ते दबाव के चलते यह फैसला लिया गया। हालांकि आलोचकों और खुद कोल्बर्ट ने संकेत दिए थे कि इसके पीछे राजनीतिक वजहें भी हो सकती हैं। सोशल मीडिया और यूट्यूब का असर रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में लेट-नाइट टीवी शोज की लोकप्रियता में गिरावट आई है। अब बड़ी संख्या में दर्शक टीवी पर लाइव देखने के बजाय यूट्यूब और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शो के क्लिप्स देखना पसंद करते हैं। अब फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखेंगे कोल्बर्ट ‘The Late Show’ खत्म होने के बाद Stephen Colbert अब फिल्मों की स्क्रीनराइटिंग पर काम कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह Peter Jackson और अन्य राइटर्स के साथ मिलकर The Lord of the Rings: Shadow of the Past की कहानी लिख रहे हैं।
Donald Trump ने ईरान संकट और बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच अपने बेटे Donald Trump Jr. की शादी में शामिल होने को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उनके लिए शादी में जाना आसान नहीं है और चाहे वह जाएं या नहीं, दोनों ही हालात में मीडिया उन्हें निशाना बनाएगा। पत्रकारों से क्या बोले ट्रंप? व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह अपने बेटे की शादी में शामिल होने की कोशिश करेंगे, लेकिन फिलहाल समय सही नहीं लग रहा। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “अगर मैं शादी में जाता हूं, तो मुझे मारा जाएगा। अगर नहीं जाता हूं, तो फेक न्यूज मुझे छोड़ने वाली नहीं है।” ट्रंप ने संकेत दिया कि Iran से जुड़े मौजूदा तनाव और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा हालात उनकी प्राथमिकता बने हुए हैं। बहामास में होगी निजी शादी रिपोर्ट्स के मुताबिक, डोनल्ड ट्रंप जूनियर इस सप्ताहांत Bahamas में एक निजी समारोह में मॉडल और सोशलाइट Bettina Anderson के साथ शादी के बंधन में बंध सकते हैं। बताया जा रहा है कि समारोह को बेहद निजी रखा गया है और इसमें केवल करीबी परिवार के सदस्यों तथा दोस्तों को ही आमंत्रित किया गया है। सुरक्षा और राजनीति बनी बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि उनकी मौजूदगी से सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक चर्चाएं और बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि शादी में शामिल होने या न होने, दोनों स्थितियों में मीडिया आलोचना करेगा। ट्रंप ने इसे “ऐसी स्थिति जिसमें मैं जीत नहीं सकता” बताया। कैंप डेविड में हुई थी सगाई डोनल्ड ट्रंप जूनियर ने दिसंबर में अपनी सगाई का ऐलान किया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों की सगाई Camp David में हुई थी। बाद में बेटिना एंडरसन ने Mar-a-Lago में एक ब्राइडल शावर कार्यक्रम भी आयोजित किया था। ट्रंप जूनियर की दूसरी शादी यह डोनल्ड ट्रंप जूनियर की दूसरी शादी होगी। इससे पहले उनकी शादी Vanessa Trump से हुई थी, जिनसे उनके पांच बच्चे हैं। दोनों का 2018 में तलाक हो गया था। हाल ही में वैनेसा ट्रंप ने खुलासा किया था कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। इसके अलावा ट्रंप जूनियर की सगाई पहले Kimberly Guilfoyle से भी हुई थी, लेकिन 2024 में दोनों का रिश्ता खत्म हो गया। ईरान संकट पर टिकी दुनिया की नजर ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य, तेल आपूर्ति और परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव गहराता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति की विदेश नीति और सुरक्षा प्राथमिकताएं निजी कार्यक्रमों पर भारी पड़ सकती हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर पूर्व राष्ट्रपति Joe Biden पर निशाना साधते हुए दावा किया कि उनके कार्यकाल में अमेरिका ने तेज़ प्रगति की, जबकि देश की गिरावट बाइडेन प्रशासन के दौरान हुई। ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के उस बयान का जिक्र किया जिसमें अमेरिका को “गिरावट की ओर बढ़ता देश” बताया गया था। ट्रंप ने कहा कि वह शी जिनपिंग की बात से “100 फीसदी सहमत” हैं, लेकिन यह टिप्पणी उनके कार्यकाल पर नहीं बल्कि बाइडेन सरकार के दौर पर लागू होती है। ‘बाइडेन के समय देश कमजोर हुआ’ ट्रंप ने कहा कि बाइडेन प्रशासन के चार वर्षों में अमेरिका को आर्थिक और सामाजिक स्तर पर काफी नुकसान हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि खुली सीमाओं, ज्यादा टैक्स, गलत व्यापार समझौतों और बढ़ते अपराध ने देश को कमजोर किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर किए गए पोस्ट में ट्रंप ने ट्रांसजेंडर नीतियों, महिलाओं के खेलों में पुरुषों की भागीदारी और DEI (डाइवर्सिटी, इक्विटी और इन्क्लूजन) नीतियों की भी आलोचना की। ‘मेरे नेतृत्व में अमेरिका ने जबरदस्त उछाल देखा’ ट्रंप ने दावा किया कि उनके नेतृत्व में अमेरिका ने केवल 16 महीनों में बड़ी आर्थिक सफलता हासिल की। उन्होंने कहा कि शेयर बाजार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, 401K निवेश मजबूत हुए और अमेरिका फिर से आर्थिक ताकत के रूप में उभरा। उन्होंने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में अमेरिकी सेना दुनिया की सबसे शक्तिशाली बनी रही और ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया। ट्रंप ने वेनेजुएला के साथ रिश्तों में सुधार और रिकॉर्ड निवेश आने का भी दावा किया। ‘शी जिनपिंग ने दी थी बधाई’ ट्रंप ने अपने बयान में दावा किया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुद उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें बधाई दी थी। उन्होंने कहा कि उनके शासनकाल में रोजगार के अवसर बढ़े और कई नीतिगत बदलावों ने अमेरिका को मजबूत बनाया। हालांकि ट्रंप के इन दावों पर विपक्षी डेमोक्रेटिक नेताओं की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
Donald Trump ने एक बार फिर Cameron Hamilton पर भरोसा जताते हुए उन्हें Federal Emergency Management Agency (FEMA) का नेतृत्व करने के लिए नामित किया है। यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पिछले साल ट्रंप प्रशासन ने ही हैमिल्टन को FEMA के अस्थायी प्रमुख पद से हटा दिया था। क्यों हटाए गए थे हैमिल्टन? रिपोर्ट्स के मुताबिक, हैमिल्टन को उस समय हटाया गया था जब उन्होंने FEMA के अस्तित्व और उसकी जरूरत का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया था। उस दौरान ट्रंप प्रशासन लगातार संकेत दे रहा था कि FEMA को खत्म या कमजोर किया जा सकता है। ट्रंप पहले भी एजेंसी की कार्यप्रणाली की आलोचना करते रहे हैं और कई बार इसे “अप्रभावी” बता चुके हैं। अब क्यों हुई वापसी? अगर सीनेट उनके नामांकन को मंजूरी देती है, तो हैमिल्टन: आपदा प्रबंधन मामलों में ट्रंप के मुख्य सलाहकार होंगे Markwayne Mullin के साथ मिलकर काम करेंगे प्राकृतिक आपदाओं और आपात स्थितियों के लिए FEMA की तैयारी संभालेंगे विशेषज्ञों का मानना है कि यह नियुक्ति ट्रंप प्रशासन की रणनीति में बदलाव का संकेत हो सकती है, क्योंकि अमेरिका में गर्मियों के दौरान तूफान, बाढ़ और जंगल की आग जैसी आपदाओं का खतरा बढ़ जाता है। चुनौतीपूर्ण होगी जिम्मेदारी हैमिल्टन ऐसे समय FEMA की कमान संभालने जा रहे हैं जब एजेंसी के भीतर लगातार अस्थिरता बनी हुई है। जनवरी 2025 से अब तक एजेंसी तीन अस्थायी प्रमुख देख चुकी है। इसके चलते: प्रशासनिक असमंजस नीतिगत बदलाव आपदा तैयारी को लेकर चिंता जैसे मुद्दे सामने आए हैं। FEMA क्यों अहम है? Federal Emergency Management Agency अमेरिका में: तूफान बाढ़ भूकंप जंगल की आग अन्य प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए सबसे अहम संघीय एजेंसी मानी जाती है। यह एजेंसी राज्यों को राहत, बचाव और पुनर्वास में मदद करती है। क्या है ट्रंप प्रशासन की रणनीति? ट्रंप प्रशासन के भीतर लंबे समय से यह बहस चलती रही है कि: FEMA की भूमिका सीमित की जाए राज्यों को ज्यादा जिम्मेदारी दी जाए संघीय खर्च कम किया जाए हालांकि लगातार बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं के खतरे के बीच FEMA को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं माना जा रहा। अब कैमरन हैमिल्टन की वापसी को इस रूप में देखा जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन फिलहाल एजेंसी को खत्म करने के बजाय उसे अपने तरीके से पुनर्गठित करना चाहता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।