India-UK Relations: ब्रिटेन में संभावित राजनीतिक बदलाव के बावजूद भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के संबंध मजबूत बने रहेंगे। दक्षिण एशिया के लिए ब्रिटेन के ट्रेड कमिश्नर और भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के मुख्य वार्ताकार हरजिंदर कंग ने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी किसी एक सरकार या प्रधानमंत्री पर निर्भर नहीं है, बल्कि साझा इतिहास, लोकतांत्रिक मूल्यों और आर्थिक हितों पर आधारित है। नेतृत्व बदलने से नहीं बदलेगा भारत-यूके संबंध न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में हरजिंदर कंग ने कहा कि भारत और ब्रिटेन के रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध रहे हैं। इसके अलावा लोकतांत्रिक व्यवस्था, कानूनी ढांचा, अंग्रेजी भाषा और ब्रिटेन में रह रहे बड़े भारतीय समुदाय ने इन संबंधों को और मजबूत बनाया है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से ब्रिटेन में नेतृत्व परिवर्तन होने पर भी भारत के साथ रणनीतिक और व्यापारिक साझेदारी प्रभावित होने की संभावना नहीं है। एंडी बर्नहैम को बताया भारत का समर्थक हरजिंदर कंग ने कहा कि ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहैम, जिन्हें भविष्य में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद का संभावित दावेदार माना जा रहा है, भारत के साथ मजबूत संबंधों के पक्षधर हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में एंडी बर्नहैम के साथ उनकी बातचीत हुई थी। बर्नहैम भारत का दौरा कर व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने के इच्छुक थे। उनका लक्ष्य ग्रेटर मैनचेस्टर और भारत के बीच आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देना है। भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था पर ब्रिटेन की नजर ट्रेड कमिश्नर ने कहा कि ब्रिटेन के प्रमुख राजनीतिक दल भारत को भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक शक्तियों में से एक मानते हैं। उनका कहना था कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। ऐसे में ब्रिटेन भारत के साथ अपने व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। उन्होंने कहा कि चाहे कीर स्टार्मर हों या ऋषि सुनक, सभी नेताओं की सोच भारत के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को लेकर सकारात्मक रही है। वर्षों की बातचीत के बाद हुआ FTA हरजिंदर कंग ने स्पष्ट किया कि भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता (FTA) किसी वैश्विक व्यापारिक तनाव या अमेरिकी टैरिफ के कारण नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यह समझौता कई वर्षों तक चली विस्तृत बातचीत और आपसी सहमति का परिणाम है। उनके मुताबिक, जब दोनों देशों को लगा कि अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, तब इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया। आइसक्रीम खाते हुए बनी अंतिम सहमति कंग ने बातचीत का एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि भारत के केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और उस समय के ब्रिटिश ट्रेड सेक्रेटरी जोनाथन रेनॉल्ड्स ने लंदन के एक पार्क में टहलते हुए और आइसक्रीम खाते-खाते अंतिम मुद्दों पर सहमति बनाई। इसके बाद दोनों नेताओं ने हाथ मिलाकर समझौते को अंतिम रूप दिया। CETA लागू होने से दोनों देशों को होंगे बड़े फायदे भारत और ब्रिटेन के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) 15 जुलाई से लागू हो चुका है। इस समझौते पर जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिटेन यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे।
High Protein Soya Paratha Recipe: अगर आप वजन घटाने के दौरान ऐसा नाश्ता या मील ढूंढ रहे हैं जो लंबे समय तक पेट भरा रखे और प्रोटीन की जरूरत पूरी करने में मदद करे, तो हाई-प्रोटीन सोया पराठा एक अच्छा विकल्प हो सकता है। सही मात्रा और संतुलित डाइट के साथ इसे वेट लॉस प्लान में शामिल किया जा सकता है। वेट लॉस डाइट में क्यों शामिल करें हाई-प्रोटीन सोया पराठा? वजन घटाने के दौरान अक्सर लोग स्वाद और पोषण के बीच संतुलन नहीं बना पाते। ऐसे में सोया पराठा एक हेल्दी विकल्प बन सकता है। सोया प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत है, जबकि गेहूं का आटा जटिल कार्बोहाइड्रेट (Complex Carbohydrates) प्रदान करता है। यह कॉम्बिनेशन लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद कर सकता है, जिससे बार-बार भूख लगने और अनहेल्दी स्नैकिंग की संभावना कम हो सकती है। आवश्यक सामग्री 1 कप सोया चंक्स (उबले और दरदरे पिसे हुए) 1 कप गेहूं या मल्टीग्रेन आटा 1 छोटा प्याज (बारीक कटा) 1–2 हरी मिर्च 1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट ½ छोटा चम्मच हल्दी ½ छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर ½ छोटा चम्मच गरम मसाला ½ छोटा चम्मच अजवाइन हरा धनिया नमक स्वादानुसार 1–2 छोटा चम्मच तेल या घी (सेकने के लिए) बनाने की विधि सबसे पहले सोया चंक्स को 10 मिनट तक गर्म पानी में भिगोकर उसका अतिरिक्त पानी निचोड़ लें और दरदरा पीस लें। पैन में थोड़ा तेल गर्म करके अजवाइन, अदरक-लहसुन, हरी मिर्च और प्याज भूनें। अब इसमें सोया और सभी मसाले डालकर 3–4 मिनट तक पकाएं और आखिर में हरा धनिया मिलाएं। गेहूं के आटे का नरम आटा गूंथें। लोई बनाकर उसमें तैयार स्टफिंग भरें और हल्के हाथ से पराठा बेल लें। नॉन-स्टिक तवे पर कम तेल या घी में दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेक लें। प्रति पराठा अनुमानित पोषण कैलोरी: 220–260 kcal प्रोटीन: 18–22 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 24–28 ग्राम फैट: 5–7 ग्राम फाइबर: 6–8 ग्राम वजन घटाने में कैसे मदद कर सकता है? हाई प्रोटीन होने के कारण लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद मिल सकती है। फाइबर अनहेल्दी स्नैकिंग और ओवरईटिंग को कम करने में सहायक हो सकता है। प्रोटीन मांसपेशियों को बनाए रखने में मदद करता है, खासकर जब आप कैलोरी नियंत्रित डाइट ले रहे हों। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ यह वजन प्रबंधन में उपयोगी विकल्प बन सकता है। डाइट में कब और कितनी बार खाएं? सबसे अच्छा समय: नाश्ता या दोपहर का भोजन हफ्ते में: 2–4 दिन तक शामिल किया जा सकता है। बेहतर संतुलन के लिए इसे दही, सलाद या हरी चटनी के साथ खाएं। ध्यान दें: केवल एक रेसिपी खाने से वजन कम नहीं होता। बेहतर परिणाम के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और स्वस्थ जीवनशैली जरूरी है। यदि आपको थायरॉयड, किडनी या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो अधिक प्रोटीन वाली डाइट शुरू करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें।
Weight Loss Recipe : अगर आप वजन कम करना चाहते हैं लेकिन बार-बार भूख लगने, कमजोरी या सख्त डाइटिंग से बचना चाहते हैं, तो अपनी डेली डाइट में हाई-प्रोटीन और फाइबर से भरपूर दाल टिक्की शामिल कर सकते हैं। मूंग दाल, चना दाल और ताजी सब्जियों से तैयार यह हेल्दी रेसिपी लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद कर सकती है, जिससे अनहेल्दी स्नैकिंग कम हो सकती है। हालांकि, सिर्फ एक डिश खाने से एक महीने में वजन कम होने की गारंटी नहीं दी जा सकती। वजन घटाने के लिए संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त नींद भी जरूरी है। क्यों फायदेमंद है यह हाई-प्रोटीन टिक्की? मूंग दाल और चना दाल प्रोटीन और फाइबर के अच्छे स्रोत माने जाते हैं। इसमें ओट्स, सब्जियां और थोड़ी मात्रा में पनीर मिलाने से इसकी न्यूट्रिशन वैल्यू और बढ़ जाती है। यह कॉम्बिनेशन लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद कर सकता है और कैलोरी कंट्रोल करने में भी सहायक हो सकता है। दाल टिक्की बनाने के लिए सामग्री 1 कप भीगी हुई मूंग दाल ½ कप भीगी हुई चना दाल 2 बड़े चम्मच ओट्स 2 बड़े चम्मच भुनी मूंगफली 1 छोटा प्याज (बारीक कटा) ½ शिमला मिर्च (बारीक कटी) 1 हरी मिर्च 1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट 2–3 बड़े चम्मच कद्दूकस किया पनीर (वैकल्पिक) हरा धनिया हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर, भुना जीरा, काली मिर्च, चाट मसाला और नमक 1 छोटा चम्मच तेल या घी सफेद तिल ऐसे बनाएं भीगी हुई मूंग और चना दाल को ओट्स और मूंगफली के साथ बिना पानी डाले पीस लें। इसमें सभी सब्जियां, मसाले और पनीर मिलाकर मिश्रण तैयार करें। छोटी-छोटी टिक्कियां बनाएं और हल्का तेल लगाकर नॉन-स्टिक पैन में दोनों तरफ से सुनहरा होने तक धीमी आंच पर सेक लें। प्रोबायोटिक रायता 1 कप दही में कद्दूकस किया हुआ खीरा और गाजर मिलाएं। स्वादानुसार नमक डालें। जीरा, हींग, करी पत्ता और हरी मिर्च का हल्का तड़का लगाकर रायते में मिला दें। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण (2 टिक्की + 1 कटोरी रायता) कैलोरी: 300–350 kcal प्रोटीन: 18–22 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 28–35 ग्राम फैट: 10–14 ग्राम फाइबर: 8–10 ग्राम संभावित फायदे हाई प्रोटीन और फाइबर से भरपूर लंबे समय तक पेट भरा रखने में मददगार अनहेल्दी स्नैकिंग कम करने में सहायक पाचन के लिए प्रोबायोटिक दही का लाभ वजन प्रबंधन वाली डाइट में शामिल किया जा सकता है ध्यान दें: किसी भी एक रेसिपी से तेजी से वजन कम होने की गारंटी नहीं होती। बेहतर परिणाम के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। यदि आपको कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो डाइट में बदलाव से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लें।
Healthy Indian Snacks: मुरमुरा भेल, ढोकला, इडली, पोहा, भुना चना और स्प्राउटेड मूंग चाट जैसे पारंपरिक स्नैक्स कम कैलोरी के साथ बेहतर पोषण देते हैं। जानें सामग्री, कैलोरी और सेहत के फायदे। जब भी हल्की भूख लगती है, ज्यादातर लोग चिप्स, नमकीन या तले-भुने स्नैक्स खा लेते हैं। लेकिन अगर आप स्वाद के साथ सेहत भी चाहते हैं, तो भारत के पारंपरिक स्नैक्स बेहतर विकल्प हो सकते हैं। ये स्नैक्स कम कैलोरी, फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होते हैं, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी मिलते हैं। 1. मुरमुरा भेल मुख्य सामग्री मुरमुरा प्याज टमाटर हरी मिर्च हरा धनिया नींबू अनुमानित कैलोरी: 120–150 kcal प्रति सर्विंग फायदा: कम कैलोरी, फाइबर से भरपूर और शाम की भूख के लिए बेहतरीन। 2. ढोकला मुख्य सामग्री बेसन दही राई करी पत्ता हरी मिर्च अनुमानित कैलोरी: 140–170 kcal प्रति सर्विंग फायदा: स्टीम्ड, कम तेल वाला और पाचन के लिए अच्छा। 3. इडली मुख्य सामग्री चावल उड़द दाल नमक अनुमानित कैलोरी: 130–160 kcal (2 इडली) फायदा: हल्की, आसानी से पचने वाली और सांभर के साथ प्रोटीन से भरपूर। 4. पोहा मुख्य सामग्री पोहा प्याज मूंगफली करी पत्ता हल्दी नींबू अनुमानित कैलोरी: 220–250 kcal प्रति सर्विंग फायदा: आयरन और ऊर्जा का अच्छा स्रोत। 5. भुना चना मुख्य सामग्री भुना चना अनुमानित कैलोरी: 120–140 kcal (30 ग्राम) फायदा: हाई प्रोटीन, हाई फाइबर और वजन कंट्रोल में मददगार। 6. स्प्राउटेड मूंग चाट मुख्य सामग्री अंकुरित मूंग प्याज टमाटर नींबू हरा धनिया चाट मसाला अनुमानित कैलोरी: 150–180 kcal प्रति सर्विंग फायदा: प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर हेल्दी स्नैक। निष्कर्ष:- अगर आप बार-बार लगने वाली भूख में हेल्दी विकल्प तलाश रहे हैं, तो ये 6 पारंपरिक भारतीय स्नैक्स आपकी डाइट का हिस्सा बन सकते हैं। ये स्वादिष्ट होने के साथ कम कैलोरी और पोषण से भरपूर हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आजकल लोग स्वाद के साथ-साथ हेल्दी खाने पर भी खास ध्यान देने लगे हैं। लेकिन कई बार स्वाद बढ़ाने के चक्कर में खाने में जरूरत से ज्यादा तेल इस्तेमाल हो जाता है। कई ऐसी सब्जियां और स्नैक्स हैं जो पकाते समय स्पंज की तरह तेल सोख लेते हैं। यही अतिरिक्त तेल वजन बढ़ने, हाई कोलेस्ट्रॉल, हार्ट डिजीज और पाचन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सही कुकिंग तकनीक अपनाई जाए तो इन चीजों को भी हेल्दी तरीके से बनाया जा सकता है। आइए जानते हैं कौन-कौन सी चीजें सबसे ज्यादा तेल सोखती हैं और उन्हें पकाने का सही तरीका क्या है। बैंगन: स्वादिष्ट लेकिन ऑयल एब्जॉर्ब करने में सबसे आगे बैंगन उन सब्जियों में शामिल है जो सबसे ज्यादा तेल सोखती हैं। खासकर बैंगन फ्राई या भरता बनाते समय इसमें काफी तेल लग जाता है। इसकी स्पंजी बनावट तेल को तेजी से अंदर खींच लेती है। अगर आप बैंगन को हेल्दी तरीके से खाना चाहते हैं तो नॉन-स्टिक पैन का इस्तेमाल करें और कम तेल में पकाने की कोशिश करें। आलू: फ्राइज और चिप्स में छिपा रहता है ढेर सारा तेल आलू से बनने वाले फ्रेंच फ्राइज, टिक्की और चिप्स बेहद लोकप्रिय हैं, लेकिन इनमें तेल की मात्रा भी काफी ज्यादा होती है। आलू में मौजूद स्टार्च तेल को पकड़कर रखता है, जिससे ये डिशेस ज्यादा ऑयली हो जाती हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि आलू को डीप फ्राई करने की बजाय बेक या एयर फ्राई करके खाना बेहतर विकल्प हो सकता है। पनीर और भिंडी भी कम नहीं पनीर पकौड़ा, शाही पनीर या फ्राई पनीर जैसी डिशेज भी काफी तेल सोखती हैं। खासकर तेज आंच पर फ्राई करने से पनीर ज्यादा ऑयली हो जाता है। इसे हल्का ग्रिल या कम तेल में पकाना ज्यादा हेल्दी माना जाता है। वहीं भिंडी पकाते समय भी लोग बार-बार तेल डालते रहते हैं क्योंकि यह जल्दी चिपचिपी होने लगती है। विशेषज्ञों के अनुसार भिंडी को पकाने से पहले अच्छी तरह सुखाना चाहिए और धीमी आंच पर कम तेल में पकाना चाहिए। पकौड़ों को ऐसे बनाएं थोड़ा हेल्दी बारिश के मौसम में बेसन और ब्रेड के पकौड़े लगभग हर घर में बनते हैं। लेकिन बेसन तलते समय काफी तेल सोख लेता है। इसलिए पकौड़ों को तलने के बाद टिश्यू पेपर पर जरूर रखें ताकि अतिरिक्त तेल निकल जाए। हेल्दी रहने के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स अगर आप स्वाद के साथ सेहत भी बनाए रखना चाहते हैं तो डीप फ्राई की जगह ग्रिल, बेक या एयर फ्राई तकनीक अपनाएं। साथ ही नॉन-स्टिक पैन का इस्तेमाल करें और खाने में तेल की मात्रा सीमित रखें। छोटी-छोटी सावधानियां आपकी डाइट को स्वादिष्ट और हेल्दी दोनों बना सकती हैं
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।