West Asia

Smoke rises after reported airstrikes in Iraq as regional tensions escalate in West Asia
US-Saudi Strike: इराक में अमेरिका-सऊदी की संयुक्त कार्रवाई, 4 IRGC जवानों की मौत का दावा; पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव

US Saudi Iraq Strike: इराक में अमेरिका और सऊदी अरब की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और गहरा गया है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, उत्तरी इराक के दियाला प्रांत में रातभर चली बमबारी में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कम से कम चार सदस्यों के मारे जाने का दावा किया गया है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ईरानी मीडिया ने 4 IRGC सदस्यों की मौत का किया दावा रिपोर्ट के मुताबिक, हमले में मारे गए IRGC सदस्यों की पहचान अली असगर अस्तानेह, अबोलफजल मोताकी, मुर्तजा अकबरी और अमीर अब्बास दरहमफोरूश के रूप में की गई है। बताया गया कि सभी ईरान के काशान शहर के रहने वाले थे। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वे इराक में किस मिशन पर तैनात थे। अमेरिका का दावा- 20 ईरानी सलाहकार भी मारे गए अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से दावा किया है कि इस सैन्य कार्रवाई में करीब 20 ईरानी सैन्य सलाहकार, तकनीकी विशेषज्ञ और IRGC से जुड़े सदस्य भी मारे गए। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जिन ठिकानों पर हमला किया गया वहां ईरान समर्थित समूहों के मिसाइल और ड्रोन ऑपरेशन संचालित किए जा रहे थे। उनका कहना है कि इन ठिकानों को निशाना बनाकर ईरान समर्थित मिलिशिया की सैन्य क्षमता को कमजोर करने की कोशिश की गई। PMF ने भी 20 लड़ाकों की मौत की पुष्टि की इराक के पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) ने बयान जारी कर कहा कि हमलों में उसके 20 लड़ाके मारे गए, जबकि 32 अन्य घायल हुए हैं। संगठन के अनुसार, हमले बगदाद, दियाला, किरकुक और बसरा समेत सात प्रांतों में किए गए। वहीं, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि कार्रवाई के दौरान पूर्वी इराक में स्थित लॉजिस्टिक और हथियारों से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का दावा है कि पिछले 72 घंटों में उसकी सेना और सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर 30 से अधिक ड्रोन हमले हुए थे, जिनके पीछे ईरान समर्थित समूहों का हाथ था। सऊदी ने ड्रोन हमलों को बताया कार्रवाई की वजह सैन्य अभियान से पहले सऊदी अरब ने आरोप लगाया था कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने पूर्वी प्रांत में तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर भेजे गए कई ड्रोन मार गिराए थे। सऊदी सरकार ने इन हमलों के लिए इराक में सक्रिय ईरान समर्थित संगठनों को जिम्मेदार ठहराया था। इसके बाद अमेरिका और सऊदी अरब ने संयुक्त सैन्य कार्रवाई की। इराक ने बताया संप्रभुता का उल्लंघन इस पूरे घटनाक्रम पर इराक सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई है। इराक की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने अमेरिका और सऊदी अरब की सैन्य कार्रवाई को "अस्वीकार्य आक्रमण" बताते हुए कहा कि यह देश की संप्रभुता का उल्लंघन है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि यह कार्रवाई इराकी अधिकारियों के समन्वय से की गई थी, लेकिन बगदाद ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उसने इस तरह की किसी सैन्य कार्रवाई की अनुमति नहीं दी और देश की संप्रभुता से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। लगातार बढ़ते सैन्य टकराव के बीच पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति और अस्थिर होती दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास तेज नहीं हुए तो क्षेत्रीय तनाव और व्यापक संघर्ष में बदल सकता है।  

kalpana जुलाई 30, 2026 0
Share Market
शेयर बाजार लगातार चौथे दिन गिरावट के साथ बंद, सेंसेक्स 360 अंक टूटा; कच्चे तेल और वैश्विक तनाव से निवेशकों में चिंता

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। बीएसई सेंसेक्स 360 अंक से अधिक टूटकर 76,391.39 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 भी गिरावट के साथ 23,869.60 के स्तर पर बंद हुआ। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर घरेलू बाजार पर साफ देखने को मिला।   बैंकिंग, आईटी और ऑटो शेयरों में बिकवाली रही हावी   कारोबार के दौरान बैंकिंग, आईटी, ऑटो, फार्मा और मेटल सेक्टर के शेयरों में दबाव बना रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की सतर्क रणनीति और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी। हालांकि कुछ चुनिंदा एफएमसीजी और डिफेंस शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, लेकिन इससे बाजार को बड़ी राहत नहीं मिल सकी।   कच्चे तेल और वैश्विक घटनाक्रम पर रहेगी बाजार की नजर   बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रेंट क्रूड की ऊंची कीमतें और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव निकट भविष्य में निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा कंपनियों के तिमाही नतीजे, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और वैश्विक आर्थिक संकेत अगले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा तय करेंगे। विश्लेषकों के अनुसार फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रह सकता है और निवेशकों को सतर्क रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

abhishek singh जुलाई 23, 2026 0
Air India
युद्ध के बीच एयर इंडिया का बड़ा ऐलान, तेल अवीव-दिल्ली उड़ानें सितंबर तक रहेंगी निलंबित

नई दिल्ली, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और लगातार बिगड़ते सुरक्षा हालात के बीच एयर इंडिया ने बड़ा फैसला लेते हुए दिल्ली-तेल अवीव (इज़राइल) मार्ग की सभी उड़ानों को सितंबर तक निलंबित करने की घोषणा की है। एयरलाइन ने कहा कि यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।   सुरक्षा कारणों से लिया गया फैसला   एयर इंडिया के अनुसार, इज़राइल और आसपास के क्षेत्रों में जारी सैन्य संघर्ष तथा सुरक्षा जोखिमों को ध्यान में रखते हुए तेल अवीव के लिए उड़ानों का संचालन फिलहाल संभव नहीं है। एयरलाइन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही है।   यात्रियों को दी जाएगी वैकल्पिक सुविधा   एयरलाइन ने प्रभावित यात्रियों को टिकट की बिना अतिरिक्त शुल्क पुनर्निर्धारण (Rescheduling) या पूर्ण धनवापसी (Full Refund) का विकल्प देने की बात कही है। यात्रियों को अपनी उड़ान की स्थिति जानने के लिए एयर इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट और ग्राहक सेवा से संपर्क करने की सलाह दी गई है।   भारतीय यात्रियों की बढ़ी चिंता   इस फैसले के बाद भारत और इज़राइल के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों, छात्रों, व्यवसायियों और अन्य भारतीय नागरिकों की चिंता बढ़ गई है। कई लोगों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हुई हैं, जबकि कुछ यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों से यात्रा करनी पड़ सकती है।   स्थिति सामान्य होने पर होगा पुनर्मूल्यांकन   एयर इंडिया ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय अस्थायी है और क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है। जैसे ही हालात सामान्य और सुरक्षित होंगे, तेल अवीव मार्ग पर उड़ानों को दोबारा शुरू करने पर विचार किया जाएगा।

abhishek singh जुलाई 23, 2026 0
Share Market
लाल निशान पर बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 561 अंक टूटा, निफ्टी 24,052 पर बंद

मुंबई, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। तीन कारोबारी सत्रों की तेजी के बाद घरेलू बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स 561.46 अंक यानी 0.72 फीसदी टूटकर 77,054.94 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 158.95 अंक यानी 0.66 फीसदी की गिरावट के साथ 24,052.05 के स्तर पर आ गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 614.92 अंक तक फिसलकर 77,001.48 के निचले स्तर पर पहुंच गया।   वित्तीय, ऑटो और आईटी शेयरों में बिकवाली दिनभर के कारोबार में वित्तीय, ऑटो, रियल एस्टेट और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेक्टर के शेयरों पर सबसे अधिक दबाव रहा। सेंसेक्स में शामिल एचसीएल टेक के शेयर 4.42 फीसदी तक टूटे। इसके अलावा बजाज फिनसर्व, इंटरग्लोब एविएशन, भारतीय स्टेट बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा तथा लार्सन एंड टुब्रो के शेयरों में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर भारती एयरटेल, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), सन फार्मा, टाटा स्टील, अडानी पोर्ट्स और इटरनल के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। सुरक्षित माने जाने वाले हेल्थकेयर, फार्मा, एफएमसीजी और चुनिंदा मेटल शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।   कच्चा तेल महंगा, रुपया कमजोर वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 4.26 फीसदी बढ़कर 86.85 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। वहीं, डॉलर के मुकाबले रुपया 54 पैसे टूटकर 96.22 (अस्थायी) के स्तर पर बंद हुआ। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के शोध प्रमुख विनोद नायर के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने और आयात लागत बढ़ने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके साथ ही जून में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई बढ़कर 9.87 फीसदी होने से भी बाजार का निवेशक भाव कमजोर रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार को 3,062.27 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना रहा।

abhishek singh जुलाई 14, 2026 0
US-Iran War
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद, अमेरिका का बड़ा पलटवार; ईरान के 140 सैन्य ठिकानों पर हमले, खाड़ी में बढ़ा युद्ध का खतरा

तेहरान, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा के बाद अमेरिका ने बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करते हुए ईरान के 140 सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी कार्रवाई में मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन बेस, रडार सिस्टम, कमांड सेंटर और नौसैनिक ठिकानों को निशाना बनाया गया।   होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से बढ़ी वैश्विक चिंता   ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी हस्तक्षेप और विदेशी जहाजों की गतिविधियों के कारण उसने सुरक्षा कारणों से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में LNG की आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है। इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।   अमेरिका का जवाबी हमला, 140 ठिकाने बने निशाना   अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ तीन दिनों तक चले अभियान में करीब 140 सैन्य लक्ष्यों को निशाना बनाया। हमलों में वायु रक्षा प्रणाली, मिसाइल और ड्रोन लॉन्चर, तटीय रडार, कमांड एवं कंट्रोल नेटवर्क और कई सैन्य ठिकानों को नष्ट करने का दावा किया गया है। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ईरान के हमलों का जवाब देने के लिए की गई।   ईरान का पलटवार, खाड़ी देशों में बढ़ा तनाव   अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने कतर, कुवैत, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइल और ड्रोन दागे। कई जगह धमाकों की खबरें सामने आईं और क्षेत्र में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए। इस घटनाक्रम के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध का खतरा और गहरा गया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील कर रहा है।

abhishek singh जुलाई 12, 2026 0
India's Ministry of External Affairs responds to escalating US-Iran tensions, urging restraint, dialogue and diplomacy amid rising conflict in West Asia.
भारत की पहली प्रतिक्रिया: अमेरिका-ईरान तनाव पर संयम की अपील, कहा- बातचीत और कूटनीति ही समाधान

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव पर भारत ने पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने क्षेत्र में लगातार बढ़ते हमलों पर गहरी चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की है। भारत ने स्पष्ट कहा कि मौजूदा संकट का स्थायी समाधान सैन्य कार्रवाई से नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से ही संभव है। पश्चिम एशिया की स्थिति पर भारत की चिंता विदेश मंत्रालय ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि हाल के घटनाक्रम, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों के बाद क्षेत्र की स्थिति और गंभीर हो गई है। मंत्रालय के अनुसार, इससे क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। भारत ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए सभी संबंधित देशों को संयम दिखाना चाहिए और ऐसे कदमों से बचना चाहिए जो तनाव को और बढ़ा सकते हैं। बातचीत और कूटनीति पर दिया जोर भारत ने अपने बयान में कहा कि किसी भी विवाद का शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान केवल संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से ही निकाला जा सकता है। विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से आग्रह किया कि वे संघर्ष को बढ़ाने के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाएं। ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर चिंता भारत ने कहा कि उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को बिना किसी बाधा के जारी रखना शामिल है। विदेश मंत्रालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए और ऐसी किसी भी कार्रवाई से बचना चाहिए जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो। हमलों के बाद बढ़ा तनाव मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कथित तौर पर ईरान की ओर से हुए हमलों के जवाब में अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की है। वहीं, ईरान की ओर से कुवैत और बहरीन की दिशा में मिसाइलें दागे जाने की भी खबरें सामने आई हैं। इन घटनाओं के बाद क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है और बड़े सैन्य संघर्ष की आशंकाएं भी तेज हो गई हैं। ट्रंप ने दी आगे की कार्रवाई की चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि हालिया घटनाओं के बाद युद्ध-विराम की स्थिति समाप्त हो चुकी है और अमेरिका आगे की सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है। उनके इस बयान के बाद पूरे पश्चिम एशिया में हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं। भारत ने ऐसे समय में संयम और कूटनीति की अपील करते हुए स्पष्ट संकेत दिया है कि वह क्षेत्र में शांति, स्थिरता और संवाद के पक्ष में है।  

Deepshikha जुलाई 9, 2026 0
External Affairs Minister S. Jaishankar meets Bahrain's King Hamad bin Isa Al Khalifa in Manama to discuss India-Bahrain ties and regional security.
ईरान तनाव के बीच बहरीन पहुंचे एस. जयशंकर, शाह को दिया पीएम मोदी का संदेश; रणनीतिक साझेदारी पर हुई अहम चर्चा

मनामा: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को बहरीन की राजधानी मनामा में बहरीन के शाह हमद बिन ईसा अल खलीफा से मुलाकात कर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं एवं संदेश सौंपा। इस दौरान दोनों पक्षों ने भारत-बहरीन संबंधों को और मजबूत बनाने, क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की। जयशंकर की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब हाल के सप्ताहों में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के दौरान बहरीन भी मिसाइल और ड्रोन हमलों की चपेट में आया था। शाह हमद से मुलाकात, भारतीय समुदाय का जताया आभार विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्हें बहरीन के शाह हमद बिन ईसा अल खलीफा और युवराज एवं प्रधानमंत्री सलमान बिन हमद अल खलीफा से मुलाकात कर खुशी हुई। उन्होंने बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं पहुंचाईं और बहरीन में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा एवं कल्याण सुनिश्चित करने के लिए शाह का आभार व्यक्त किया। जयशंकर ने कहा कि भारत, बहरीन के नेतृत्व द्वारा दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को दिए जा रहे निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन को अत्यंत महत्व देता है। बहरीन के विदेश मंत्री से भी हुई अहम बैठक जयशंकर ने बहरीन के विदेश मंत्री डॉ. अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल जयानी से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। विदेश मंत्री ने बताया कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय सहयोग को नई गति देने के साथ-साथ पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। खाड़ी देशों के दौरे पर हैं जयशंकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर 5 से 10 जुलाई तक खाड़ी क्षेत्र के चार देशों के दौरे पर हैं। इस यात्रा में कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान शामिल हैं। इस दौरे का उद्देश्य भारत और खाड़ी देशों के बीच आर्थिक, ऊर्जा, निवेश, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करना है। कतर में भी हुई थी अहम बैठक बहरीन पहुंचने से पहले जयशंकर ने कतर का दौरा किया था, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल-थानी से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। क्यों अहम है यह दौरा? जयशंकर की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। हालिया संघर्ष के दौरान बहरीन पर ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले भी हुए थे। इसके अलावा कतर और ओमान अमेरिका-ईरान के बीच संभावित अप्रत्यक्ष वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे समय में भारत का खाड़ी देशों के साथ लगातार उच्चस्तरीय संवाद क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और भारतीय नागरिकों के हितों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगे का कार्यक्रम खाड़ी देशों का दौरा पूरा करने के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर 13 जुलाई को न्यूयॉर्क पहुंचेंगे, जहां वह 2028-29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत के अभियान की शुरुआत करेंगे। इसके बाद 14-15 जुलाई को वह ब्रसेल्स में आयोजित भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद की बैठक में भाग लेंगे।  

Deepshikha जुलाई 7, 2026 0
Iran’s Supreme Leader Mojtaba Khamenei reacts after the US-Iran agreement, saying Donald Trump was desperate to finalize the deal.
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई का दावा- समझौते के लिए बेताब थे ट्रंप, डील कराने को डाला हर तरह का दबाव

  तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर होने के एक दिन बाद ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समझौते को लेकर “बेहद बेताब” थे और इसे अंतिम रूप देने के लिए उन्होंने हर संभव दबाव और प्रभाव का इस्तेमाल किया। खामेनेई ने कहा कि उन्होंने शुरुआत में सिद्धांत के तौर पर इस समझौते का विरोध किया था, लेकिन बाद में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा देशहित और क्षेत्रीय हितों की सुरक्षा का भरोसा दिए जाने के बाद ही इस समझौते को मंजूरी दी। ‘देश के हितों और रेजिस्टेंस फ्रंट की रक्षा का मिला भरोसा’ अपने लिखित बयान में मोजतबा खामेनेई ने कहा कि ईरानी अधिकारियों ने उन्हें आश्वस्त किया था कि समझौते में देश के रणनीतिक हितों, राष्ट्रीय सुरक्षा और तथाकथित ‘रेजिस्टेंस फ्रंट’ के अधिकारों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा, “ईरानी अधिकारियों ने नेक इरादे और देश की चिंता को ध्यान में रखते हुए इस समझौते के लिए कड़ी मेहनत की। मुझे भरोसा दिलाया गया कि ईरान के हितों से कोई समझौता नहीं होगा।” 18 जून को हुआ था समझौते पर हस्ताक्षर 18 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कई महीनों से जारी तनाव को समाप्त करने और बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के उद्देश्य से समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए थे। इससे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी वार्ताकार मोहम्मद बाकेर कालीबाफ ने समझौते के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने वर्चुअल माध्यम से इसे अंतिम मंजूरी प्रदान की। ‘ईरान अपने राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगा’ खामेनेई ने कहा कि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने उन्हें स्पष्ट रूप से आश्वस्त किया था कि यदि भविष्य में अमेरिका की ओर से कोई ऐसी मांग रखी जाती है जो ईरान के राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध या अत्यधिक हो, तो तेहरान उसे स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “ईरान अपने राष्ट्रीय हितों, संप्रभुता और रणनीतिक प्राथमिकताओं से कोई समझौता नहीं करेगा।” बातचीत का मतलब अमेरिकी नीतियों से सहमति नहीं समझौते का समर्थन करते हुए भी खामेनेई ने स्पष्ट किया कि भविष्य में अमेरिका के साथ होने वाली प्रत्यक्ष बातचीत को अमेरिकी नीतियों या दृष्टिकोण की स्वीकृति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बातचीत का उद्देश्य केवल अपने हितों की रक्षा करना और विवादों का समाधान तलाशना है, न कि किसी दबाव के सामने झुकना। समझौते पर ईरान के भीतर भी हुई व्यापक चर्चा खामेनेई के बयान से यह संकेत मिला है कि अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर ईरान के शीर्ष नेतृत्व के भीतर व्यापक विचार-विमर्श हुआ था। सर्वोच्च नेता ने स्वयं स्वीकार किया कि उन्होंने प्रारंभ में इस समझौते का विरोध किया था, लेकिन राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के आश्वासन के बाद ही इसे मंजूरी दी। विश्लेषकों का मानना है कि खामेनेई का बयान एक ओर घरेलू राजनीतिक वर्ग को संदेश देने की कोशिश है, वहीं दूसरी ओर यह संकेत भी है कि ईरान भविष्य में अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखेगा, लेकिन अपने रणनीतिक हितों पर किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
US Vice President JD Vance speaks on diplomacy and Middle East security amid criticism of the America-Iran agreement from Israeli leaders.
‘हर समस्या का हल युद्ध नहीं’, जेडी वेंस ने इजराइल को दिया दो टूक संदेश; अमेरिका-ईरान समझौते का किया बचाव

  वॉशिंगटन/तेल अवीव: अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर इजराइली नेताओं की लगातार आलोचना के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजराइल को स्पष्ट संदेश दिया है कि हर क्षेत्रीय और राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती का समाधान केवल सैन्य ताकत या युद्ध के जरिए नहीं निकाला जा सकता। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक समस्याओं के समाधान के लिए बातचीत, कूटनीति और राजनीतिक प्रयासों पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में वेंस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति और हालिया अमेरिका-ईरान समझौते का बचाव करते हुए इजराइली नेतृत्व से अमेरिका के कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करने की अपील की। ‘हर समस्या का समाधान लोगों को मारकर नहीं निकाला जा सकता’ जेडी वेंस ने कहा कि इजराइल को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों के समाधान के लिए केवल सैन्य अभियानों और हमलों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा, “आप सिर्फ 90 लाख की आबादी वाला देश हैं। आप अपनी हर राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती का समाधान केवल लोगों को मारकर या सैन्य कार्रवाई के जरिए नहीं निकाल सकते।” वेंस ने संकेत दिया कि सुरक्षा संबंधी जटिल समस्याओं के समाधान के लिए कूटनीतिक संवाद और राजनीतिक समझौते जैसे विकल्पों को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इजराइली नेताओं की आलोचना के बीच आया बयान जेडी वेंस की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और इजराइल के राजनीतिक नेता अमेरिका-ईरान समझौते पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। इजराइली नेतृत्व का आरोप है कि इस समझौते में: ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पर्याप्त नियंत्रण की व्यवस्था नहीं है। बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से सीमित नहीं किया गया है। लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजराइल की सैन्य कार्रवाई की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। अमेरिका की नीति का किया बचाव वेंस ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति का उद्देश्य पश्चिम एशिया में तनाव कम करना और संघर्ष के स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका कूटनीतिक माध्यमों से क्षेत्रीय स्थिरता स्थापित करने का प्रयास कर रहा है और सहयोगी देशों से भी इसी दिशा में रचनात्मक समर्थन की अपेक्षा रखता है। उन्होंने इशारों में यह भी कहा कि अमेरिका की नीतियों की सार्वजनिक आलोचना करने के बजाय इजराइल को अपने सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी के साथ समन्वय बढ़ाने की जरूरत है। पश्चिम एशिया की राजनीति में बढ़ सकती है नई बहस विशेषज्ञों का मानना है कि जेडी वेंस का बयान अमेरिका और इजराइल के बीच ईरान नीति को लेकर उभरते मतभेदों को सार्वजनिक रूप से सामने लाता है। अमेरिका जहां कूटनीतिक समाधान और क्षेत्रीय तनाव कम करने पर जोर दे रहा है, वहीं इजराइल ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को लेकर अपनी सुरक्षा चिंताओं को प्रमुखता दे रहा है। अमेरिका-ईरान समझौते पर जारी बहस आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की रणनीतिक राजनीति और अमेरिका-इजराइल संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
US President Donald Trump and Iranian President Masoud Pezeshkian after signing a 14-point peace agreement on Hormuz Strait and sanctions relief.
ईरान-अमेरिका के बीच 14 सूत्रीय समझौते पर लगी मुहर, ट्रंप और पेजेशकियन ने किए हस्ताक्षर

  अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। समझौते के लागू होने के साथ ही दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव कम करने, होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और आर्थिक एवं परमाणु मुद्दों पर व्यापक बातचीत शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। अमेरिकी प्रशासन ने इस दस्तावेज को ‘संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामी गणराज्य ईरान के बीच इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ के रूप में जारी किया है। समझौते का उद्देश्य 60 दिनों के विस्तारित युद्धविराम को लागू करना और लंबित मुद्दों पर अंतिम समझौते की रूपरेखा तैयार करना है। होर्मुज जलडमरूमध्य तुरंत खोलने पर सहमति समझौते का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी समुद्री मार्ग से होता है। समझौते के तहत ईरान ने 60 दिनों तक फारस की खाड़ी और ओमान सागर के बीच वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित और निर्बाध मार्ग देने पर सहमति जताई है। प्रतिबंधों में चरणबद्ध राहत का रोडमैप अमेरिका ने ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके तहत ईरानी तेल निर्यात, बैंकिंग, बीमा और परिवहन सेवाओं को तत्काल राहत देने का प्रावधान किया गया है। साथ ही अमेरिका ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों और धनराशि को भी जारी करने पर सहमत हुआ है। परमाणु कार्यक्रम पर आगे होगी विस्तृत बातचीत समझौते में ईरान ने एक बार फिर दोहराया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और न ही उन्हें हासिल करने की कोशिश करेगा। दोनों देशों ने संवर्धित यूरेनियम भंडार, यूरेनियम संवर्धन और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अन्य मुद्दों पर अंतिम समझौते के तहत विस्तृत चर्चा करने पर सहमति जताई है। 14 सूत्रीय समझौते की प्रमुख बातें सभी सैन्य अभियानों और युद्ध गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से रोकना। एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना। 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते की दिशा में काम करना। अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की प्रक्रिया शुरू करना। होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित और मुफ्त आवाजाही सुनिश्चित करना। ईरान के लिए 300 अरब डॉलर की आर्थिक पुनर्निर्माण योजना तैयार करना। संयुक्त राष्ट्र और अमेरिकी प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाने का रोडमैप बनाना। ईरान द्वारा परमाणु हथियार नहीं बनाने की प्रतिबद्धता दोहराना। अंतिम समझौते तक दोनों देशों द्वारा यथास्थिति बनाए रखना। ईरानी तेल निर्यात, बैंकिंग और बीमा सेवाओं को तत्काल राहत देना। ईरान की जमी हुई संपत्तियों और धनराशि को जारी करना। समझौते के अनुपालन के लिए विशेष निगरानी तंत्र स्थापित करना। अंतिम समझौते के लिए औपचारिक वार्ता शुरू करना। अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बाध्यकारी प्रस्ताव के माध्यम से वैधता प्रदान करना। पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़ा मोड़ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता तय शर्तों के अनुसार लागू होता है, तो इससे न केवल अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा टकराव समाप्त होगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल बाजार, क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया की भू-राजनीति पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद भी बढ़ गई है।  

Deepshikha जून 18, 2026 0
Donald Trump and Iranian officials amid reports of a potential US-Iran peace deal and reopening of the Strait of Hormuz.
अमेरिका-ईरान शांति समझौते का दावा, 19 जून को स्विट्जरलैंड में हो सकते हैं हस्ताक्षर; होर्मुज स्ट्रेट खोलने का ऐलान

  वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबरों ने वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजारों में हलचल बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच शांति समझौते पर सहमति बन गई है। वहीं, ईरान की ओर से भी इस दिशा में सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने का किया ऐलान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पूरा हो चुका है। उन्होंने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को फिर से खोलने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की घोषणा की। ट्रंप ने लिखा, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो चुका है। सभी को बधाई। दुनिया के जहाज अब अपने इंजन शुरू करें, तेल का प्रवाह जारी रहने दें।" ईरान ने रखी अपनी शर्तें ईरान के कानूनी एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि तेहरान प्रस्तावित 60 दिन की वार्ता प्रक्रिया में तभी शामिल होगा, जब अमेरिका युद्ध समाप्त करने, नाकेबंदी हटाने और ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने जैसे अपने वादों को पूरा करेगा। उन्होंने कहा कि समझौते का अर्थ यह नहीं है कि ईरान अमेरिका पर पूरी तरह भरोसा कर रहा है। तेहरान अमेरिकी प्रतिबद्धताओं के क्रियान्वयन की लगातार निगरानी करेगा। शहबाज शरीफ ने भी किया समझौते का दावा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया कि लंबी बातचीत और गहन वार्ताओं के बाद अमेरिका और ईरान शांति समझौते पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने लेबनान समेत विभिन्न मोर्चों पर सैन्य गतिविधियों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने का निर्णय लिया है। शरीफ के अनुसार, समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में किए जा सकते हैं। कतर, सऊदी अरब और तुर्किये की भूमिका अहम शहबाज शरीफ ने इस मध्यस्थता प्रक्रिया में कतर, सऊदी अरब और तुर्किये की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन देशों के कूटनीतिक प्रयासों ने दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परमाणु कार्यक्रम पर भी रहेगा फोकस डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी को और मजबूत किया जाएगा। इसमें निरीक्षण व्यवस्था को सख्त करने तथा परमाणु सामग्री के प्रबंधन से जुड़े प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार की नजरें समझौते पर यदि 19 जून को प्रस्तावित हस्ताक्षर होते हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुलता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में भी राहत देखने को मिल सकती है। अमेरिका, ईरान और अन्य संबंधित पक्षों की ओर से समझौते के अंतिम दस्तावेज और आधिकारिक विवरण सार्वजनिक होने का इंतजार किया जा रहा है।  

Deepshikha जून 15, 2026 0
Donald Trump and Benjamin Netanyahu amid rising tensions over Israel's military operations in Lebanon
नेतन्याहू पर भड़के ट्रंप, लेबनान हमलों को लेकर फोन पर जताई नाराजगी

  अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के बीच लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई को लेकर तीखी बातचीत हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने हिजबुल्लाह के खिलाफ इजराइल के बढ़ते हमलों पर नाराजगी जताते हुए नेतन्याहू से सीधे सवाल किए। माना जा रहा है कि इस मुद्दे ने वॉशिंगटन और तेल अवीव के बीच उभरते मतभेदों को भी सामने ला दिया है। लेबनान में बढ़े हमलों से बढ़ी क्षेत्रीय तनाव की आशंका रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल ने हाल के दिनों में लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी इलाकों में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। इसके साथ ही दक्षिणी लेबनान में जमीनी सैन्य अभियान भी आगे बढ़ाया गया है। इन घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। अमेरिका को चिंता है कि क्षेत्र में बढ़ता तनाव ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक वार्ताओं को प्रभावित कर सकता है। वहीं, ईरान ने भी चेतावनी दी है कि ऐसी सैन्य कार्रवाइयां शांति प्रयासों को कमजोर कर सकती हैं। रिपोर्ट में ट्रंप की कड़ी प्रतिक्रिया का दावा डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म Axios की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने फोन पर नेतन्याहू के फैसलों को लेकर तीखी नाराजगी जताई। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप का मानना है कि इजराइल की मौजूदा रणनीति उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर सकती है और अमेरिका की कूटनीतिक कोशिशों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि बातचीत के दौरान ट्रंप ने नेतन्याहू के रवैये पर बेहद कठोर टिप्पणी की और कहा कि उनके कदमों के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। “आखिर आप कर क्या रहे हैं?”: रिपोर्ट एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से दावा किया गया है कि फोन वार्ता के दौरान ट्रंप ने नेतन्याहू से नाराजगी भरे लहजे में पूछा, “आखिर आप कर क्या रहे हैं?” रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति का मानना था कि लगातार सैन्य कार्रवाई क्षेत्रीय हालात को और जटिल बना सकती है। इन दावों पर व्हाइट हाउस या इजराइली प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बेरूत में हमलों के बाद बढ़ी लोगों की चिंता सोमवार को नेतन्याहू और इजराइल के रक्षा मंत्री ने बेरूत के दहियेह इलाके में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर कार्रवाई का आदेश दिया। इजराइल का आरोप है कि हिजबुल्लाह युद्धविराम समझौते का उल्लंघन कर रहा है और उसके क्षेत्र पर हमले कर रहा है। हमलों की खबर के बाद बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में दहशत का माहौल बन गया। संभावित हवाई हमलों की आशंका के बीच कई लोगों ने सुरक्षित स्थानों की ओर रुख किया। ईरान ने दी नई चेतावनी Iran ने कहा है कि लेबनान में जारी इजराइली सैन्य अभियान अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताओं को प्रभावित कर सकता है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए लेबनान में युद्धविराम बनाए रखना आवश्यक है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि लेबनान मोर्चे पर तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर न केवल इजराइल-हिजबुल्लाह संघर्ष पर पड़ेगा, बल्कि अमेरिका-ईरान संबंधों और पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता पर भी दिखाई दे सकता है।  

Deepshikha जून 2, 2026 0
UAE fighter jets and Gulf region map amid rising Iran-UAE tensions after ceasefire
सीजफायर के बाद भी UAE ने किया ईरान पर हमला, रिपोर्ट में बड़ा दावा, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ा तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम (सीजफायर) की घोषणा के बाद भी पश्चिम एशिया में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। एक अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने सीजफायर के बाद ईरान के अंदर कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन रिपोर्ट ने क्षेत्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट में क्या किया गया दावा? अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा के कुछ दिनों बाद UAE ने ईरान के भीतर कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर जवाबी हवाई कार्रवाई की। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन स्थानों को निशाना बनाया गया उनमें फारस की खाड़ी स्थित लावन द्वीप की रिफाइनरी, होर्मुज स्ट्रेट के पास केशम और अबू मूसा द्वीप, बंदर अब्बास बंदरगाह शहर और असलुयेह पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स शामिल थे। ऊर्जा केंद्रों पर हमलों से बढ़ी चिंता रिपोर्ट के मुताबिक, असलुयेह ऊर्जा केंद्र पर हुए कथित हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी। यह क्षेत्र ईरान के ऊर्जा उत्पादन और निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। बताया गया है कि इन घटनाओं के बाद अमेरिका ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ने से रोकने के लिए अपने सहयोगियों पर दबाव डाला, ताकि ऊर्जा अवसंरचना पर हमलों को सीमित किया जा सके। अमेरिका और इजरायल के साथ समन्वय का दावा रिपोर्ट में मामले से जुड़े सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि UAE ने ईरान के खिलाफ चलाए गए व्यापक सैन्य अभियान के दौरान अमेरिका और इजरायल के साथ समन्वय में काम किया। दावे के अनुसार, सीजफायर लागू होने के बाद भी कुछ हफ्तों तक यह अभियान जारी रहा। हालांकि इन आरोपों पर UAE, अमेरिका या इजरायल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। खाड़ी देशों में बदली रणनीतिक स्थिति विश्लेषकों का मानना है कि यदि रिपोर्ट में किए गए दावे सही साबित होते हैं, तो यह संकेत होगा कि UAE ने ईरान के खिलाफ पहले की तुलना में अधिक आक्रामक रणनीति अपनाई है। जहां अधिकांश खाड़ी देश संघर्ष के दौरान अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और तनाव से बचने की कोशिश करते रहे, वहीं UAE कथित तौर पर ईरान को सीधे जवाब देने वाले देशों में शामिल होता दिखाई देता है। आधिकारिक पुष्टि का इंतजार फिलहाल इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। न तो UAE और न ही ईरान ने रिपोर्ट में बताए गए हमलों को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी किया है। ऐसे में क्षेत्रीय घटनाक्रम पर दुनिया की नजर बनी हुई है, क्योंकि किसी भी नए सैन्य टकराव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।  

surbhi मई 30, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Mojtaba Khamenei delivering a statement on Iran, Hezbollah, and the Middle East conflict
दुनिया

US-Iran War: मोजतबा खामेनेई का बड़ा बयान, बोले- 'अब जिहाद और प्रतिरोध ही एकमात्र रास्ता'

kalpana जुलाई 27, 2026 0