WEST BENGAL

TMC Headquarter
TMC मुख्यालय पर सियासी संग्राम तेज, बागी गुट के कब्जे के बाद बढ़ा विवाद

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी सत्ता संघर्ष अब खुलकर सामने आ गया है। कोलकाता स्थित पार्टी के राज्य मुख्यालय पर बागी गुट के नियंत्रण के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने शुक्रवार को पार्टी कार्यालय पर कब्जा कर लिया, जिसके बाद परिसर में तनाव बढ़ गया। स्थिति को देखते हुए मौके पर CRPF और कोलकाता पुलिस के जवान तैनात किए गए।   बागी गुट ने जताया मुख्यालय पर दावा बताया जा रहा है कि बागी गुट ने नई दिल्ली में चुनाव आयोग के समक्ष पार्टी के नाम, फंड और चुनाव चिह्न पर दावा पेश करने के एक दिन बाद यह कदम उठाया। ऋतब्रत बनर्जी अपने समर्थक नेताओं के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचे और वहां लगे पुराने साइनबोर्ड हटाकर नया बैनर लगा दिया। बागी गुट ने वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को नया चेयरमैन घोषित करने का भी दावा किया।   बागी नेताओं का कहना है कि कार्यालय का पुराना किराया समझौता समाप्त हो चुका था और नई वर्किंग कमेटी के तहत नया समझौता किया गया है। उनका दावा है कि कार्यालय पर उनका वैध अधिकार है, हालांकि उन्होंने ममता बनर्जी के प्रति सम्मान जताते हुए अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को स्वीकार करने से इनकार किया।   ममता गुट ने लगाया अवैध कब्जे का आरोप मुख्यालय पर कब्जे की खबर के बाद ममता बनर्जी समर्थक नेताओं ने इसे अवैध कार्रवाई बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने आरोप लगाया कि बागी गुट को केंद्रीय सुरक्षा बलों का संरक्षण मिल रहा है। वहीं टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने बागी नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी इस कार्रवाई को अदालत और जनता दोनों के सामने चुनौती देगी।   अब चुनाव आयोग के फैसले पर निगाहें कोलकाता पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कार्यालय के स्वामित्व और लीज से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ही वहां नियमित राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति दी जाएगी। इस बीच चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से 6 जुलाई की शाम 5:30 बजे तक पार्टी के संगठन, नाम और चुनाव चिह्न पर अपने-अपने दावे और जवाब दाखिल करने को कहा है। अब इस विवाद का अगला बड़ा फैसला चुनाव आयोग के रुख पर निर्भर करेगा।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Swapan Das Gupta
बंगाल में जारी रहेंगी ममता सरकार की योजनाएं, लाभार्थियों का होगा सत्यापन

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में शुरू की गई प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं को जारी रखने का फैसला किया है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन योजनाओं का लाभ केवल पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए लाभार्थियों की व्यापक जांच कराई जाएगी। सरकार का उद्देश्य फर्जीवाड़े पर रोक लगाकर योजनाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है।   वोटर लिस्ट और डोर-टू-डोर सत्यापन से होगी जांच सरकारी अधिकारियों के अनुसार सभी लाभार्थियों के रिकॉर्ड का मिलान अंतिम मतदाता सूची से किया जाएगा। जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हट चुके हैं या जो अपात्र पाए जाएंगे, उन्हें योजनाओं की सूची से बाहर किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर घर-घर जाकर भी सत्यापन किया जाएगा, ताकि सरकारी सहायता केवल वास्तविक और जरूरतमंद लाभार्थियों तक पहुंचे। नवंबर 2025 में विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान करीब 80 लाख संदिग्ध नाम हटाए गए थे, जिनके आधार पर अब कल्याणकारी योजनाओं की भी समीक्षा की जाएगी।   वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने क्या कहा ? राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने अपने पहले बजट भाषण में संकेत दिया था कि सभी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं जारी रहेंगी, लेकिन उनमें पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सुधार किए जाएंगे। इसी क्रम में सरकार ने जनकल्याण शिविरों में प्राप्त नए आवेदनों की जांच शुरू कर दी है। सत्यापन पूरा होने तक वृद्धावस्था और विधवा पेंशन जैसी कुछ योजनाओं के वितरण को अस्थायी रूप से रोका गया है, जबकि कन्याश्री और रूपश्री जैसी योजनाओं की भी कड़ी निगरानी की जा रही है।   वहीं, सरकार ने तृणमूल कांग्रेस की महत्वाकांक्षी 'कृषक बंधु' योजना को बंद कर दिया है। अधिकारियों का दावा है कि इस योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और फर्जी लाभार्थी शामिल थे। इसके स्थान पर भाजपा सरकार नई योजना के तहत प्रत्येक पात्र किसान को सालाना 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता देगी। कृषि विभाग का अनुमान है कि सख्त सत्यापन के बाद मौजूदा लाभार्थियों में से 40 प्रतिशत से अधिक अपात्र नाम हटाए जा सकते हैं।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Mamata Banerjee Abhishek Banerjee
शहीद दिवस रैली अवमानना मामला: कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से मांगा जवाब

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने शहीद दिवस रैली से जुड़े कथित अवमानना मामले में दोनों नेताओं से जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि वे निर्धारित समय के भीतर अपना हलफनामा दाखिल करें।    क्या है पूरा मामला?   याचिकाकर्ता का आरोप है कि शहीद दिवस रैली के आयोजन के दौरान हाईकोर्ट के पहले जारी निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर अदालत में अवमानना याचिका दायर की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा था।    हाईकोर्ट ने मांगा हलफनामा   सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को निर्देश दिया कि वे आरोपों पर अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए हलफनामा दाखिल करें। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 अगस्त की नई तारीख भी तय की है, जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Premium Bangladeshi mangoes arriving at the Bangladesh Deputy High Commission in Kolkata as part of the annual 'Mango Diplomacy' initiative between India and Bangladesh.
सीमा पर तनाव के बीच भी कायम रही 'मैंगो डिप्लोमेसी', बांग्लादेश ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री को भेजे प्रीमियम आम

कोलकाता: भारत और बांग्लादेश के बीच हाल के दिनों में सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ को लेकर बढ़े तनाव के बावजूद दोनों देशों के बीच वर्षों पुरानी 'मैंगो डिप्लोमेसी' की परंपरा जारी है। बांग्लादेश सरकार ने सद्भावना के प्रतीक के रूप में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को प्रीमियम किस्म के आमों की खेप भेजी है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस पहल की पुष्टि करते हुए बताया कि यह उपहार दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने की परंपरा का हिस्सा है। 500 किलो आम की खेप पहुंची कोलकाता बांग्लादेश की ओर से 500 किलोग्राम प्रीमियम आम कोलकाता स्थित बांग्लादेश के उप-उच्चायोग भेजे गए। यह खेप जेसोर के बेनापोल सीमा मार्ग के जरिए भारत पहुंची। इस खेप में लोकप्रिय किस्मों हिमसागर, हरिभांगा और आम्रपाली शामिल हैं। बताया गया कि: 100 किलोग्राम आम मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के लिए भेजे गए हैं। शेष 400 किलोग्राम आम वरिष्ठ अधिकारियों, राजनयिकों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों को सद्भावना उपहार के रूप में वितरित किए जाएंगे। शेख हसीना के दौर से चली आ रही है परंपरा भारत और बांग्लादेश के बीच आम और हिलसा मछली का आदान-प्रदान लंबे समय से सांस्कृतिक कूटनीति का हिस्सा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना अपने कार्यकाल के दौरान हर वर्ष भारत के प्रधानमंत्री और पश्चिम बंगाल के नेतृत्व को आम भेजती थीं। हालांकि 2024 के राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान इस परंपरा में कुछ समय के लिए विराम आया था। अब वर्तमान प्रशासन ने इस परंपरा को फिर से जारी रखा है। सीमा विवाद के बीच बढ़ी चर्चा इस बार आमों की यह खेप ऐसे समय आई है जब भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध घुसपैठ, सीमा प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हाल के महीनों में अवैध प्रवासियों के खिलाफ 'डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट' अभियान चलाने की बात कही है। उनके इस रुख को लेकर बांग्लादेश के कुछ राजनीतिक नेताओं ने आपत्ति भी जताई थी। सीमा पर बढ़ा था तनाव हाल के दिनों में सीमा पार अवैध घुसपैठ और कथित डिपोर्टेशन अभियान को लेकर सीमा सुरक्षा बल (BSF) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के बीच भी तनाव और गतिरोध की खबरें सामने आई थीं। ऐसे माहौल में बांग्लादेश की ओर से आम भेजने की इस पहल को दोनों देशों के बीच संवाद और सद्भाव बनाए रखने की एक प्रतीकात्मक कूटनीतिक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। सांस्कृतिक रिश्तों को बनाए रखने की पहल विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी मतभेदों के बावजूद सांस्कृतिक और मानवीय पहल दोनों देशों के रिश्तों में सकारात्मक संदेश देने का काम करती हैं। 'मैंगो डिप्लोमेसी' भी इसी परंपरा का हिस्सा मानी जाती है, जिसके जरिए कूटनीतिक संवाद के साथ-साथ आपसी सद्भाव को बनाए रखने का प्रयास किया जाता है।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
BJP workers stop a bus in Gangarampur, West Bengal, after suspecting that Abhishek Banerjee's personal assistant was on board, before police verify the passenger's identity.
भाजपा कार्यकर्ताओं ने बस रोककर किया हंगामा, अभिषेक बनर्जी के PA होने के शक में यात्री से बदसलूकी

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तनाव के बीच दक्षिण दिनाजपुर जिले के गंगारामपुर में शुक्रवार देर रात एक बस को रोककर भाजपा कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया। कार्यकर्ताओं को शक था कि बस में सवार व्यक्ति तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (PA) सुमित रॉय हैं। हालांकि पुलिस की जांच में यह आशंका गलत साबित हुई और मामला शांत हो गया। शक के आधार पर रोकी गई बस प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भाजपा कार्यकर्ताओं ने सूचना मिलने के बाद बस को रोक लिया और एक यात्री से पूछताछ करते हुए उसके साथ बदसलूकी की। इस दौरान कुछ समय के लिए मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और संबंधित यात्री की पहचान की जांच शुरू की। पुलिस जांच में सामने आई सच्चाई पुलिस सूत्रों के अनुसार, जिस व्यक्ति को अभिषेक बनर्जी का PA समझा जा रहा था, वह सुमित रॉय नहीं बल्कि शरीफुल आलम निकला। पुलिस ने बताया कि शरीफुल आलम पहले अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा में तैनात एक पुलिस अधिकारी रह चुके हैं। वर्तमान में वह दक्षिण दिनाजपुर जिले के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (Information & Cultural Affairs) में कार्यरत हैं। पहचान की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने बस को आगे जाने की अनुमति दे दी और स्थिति सामान्य हो गई। भाजपा ने क्या कहा? गंगारामपुर नगर भाजपा अध्यक्ष वृंदावन घोष ने कहा कि स्थानीय लोगों को संदेह था कि वाहन में अभिषेक बनर्जी के करीबी सहयोगी सुमित रॉय मौजूद हैं। उन्होंने कहा, "जैसे ही हमें इसकी जानकारी मिली, हमने पुलिस प्रशासन को सूचित किया। जांच के दौरान पता चला कि वह व्यक्ति सुमित रॉय नहीं है, बल्कि पहले अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा में तैनात अधिकारी रह चुका है। गलतफहमी दूर होने के बाद पुलिस ने वाहन को जाने दिया।" तनाव के बीच हुई घटना यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल पहले से ही काफी गर्म है। हाल के दिनों में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और समर्थकों के बीच कई टकराव और विरोध-प्रदर्शन की घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे माहौल में गंगारामपुर की यह घटना भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। फिलहाल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच में किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि सामने नहीं आई है और पहचान की पुष्टि होने के बाद मामला समाप्त कर दिया गया।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
West Bengal launches the Durga Suraksha Squad, women's help desks, cyber crime help desks, and the Dial-112 emergency response initiative to strengthen law enforcement and women's safety.
पश्चिम बंगाल में ‘दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड’ की शुरुआत, महालया से शुरू होगी डायल-112 सेवा; 5 मिनट में पुलिस पहुंचाने का लक्ष्य

कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में कानून-व्यवस्था मजबूत करने और महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई नई पहल की घोषणा की है। मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने नबान्न सभागार से ‘दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड’, साइबर क्राइम हेल्प डेस्क और महिला हेल्प डेस्क का शुभारंभ किया। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि महालया से राज्यभर में डायल-112 आपातकालीन सेवा शुरू होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि 112 पर सूचना मिलने के बाद पुलिस किसी भी थाना क्षेत्र में पांच मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंचे। क्या है ‘दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड’? ‘दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड’ महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा के लिए गठित एक विशेष पुलिस इकाई है। यह टीम सार्वजनिक स्थानों, स्कूलों, कॉलेजों और संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त करेगी तथा महिला सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करेगी। सरकार के अनुसार, इस स्क्वाड का उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ अपराधों की रोकथाम और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना है। एक साल में 5 मिनट रिस्पॉन्स टाइम का लक्ष्य मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में पश्चिम बंगाल में पुलिस की औसत प्रतिक्रिया समय लगभग तीन घंटे है, जबकि गुजरात, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पुलिस औसतन छह मिनट के भीतर मौके पर पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार अगले एक वर्ष के भीतर पश्चिम बंगाल में भी पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम घटाकर पांच मिनट करने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है। इसके लिए इस वर्ष के बजट में प्रत्येक थाने को डायल-112 सेवा के लिए एक वाहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। अगले बजट में इन वाहनों की संख्या और बढ़ाई जाएगी। 500 थानों में महिला हेल्प डेस्क सरकार ने राज्य के 500 पुलिस थानों में महिला हेल्प डेस्क की शुरुआत भी की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि महिलाओं से जुड़े मामलों में किसी भी शिकायत को नजरअंदाज न किया जाए और प्रत्येक शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साइबर अपराध से निपटने के लिए विशेष हेल्प डेस्क राज्य के सभी थानों में साइबर क्राइम हेल्प डेस्क भी स्थापित किए गए हैं। इनका उद्देश्य ऑनलाइन धोखाधड़ी, साइबर अपराध और डिजिटल फ्रॉड से जुड़े मामलों की त्वरित शिकायत दर्ज करना और जांच प्रक्रिया को तेज करना है। पुलिस के आधुनिकीकरण का भरोसा मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और उन्हें आधुनिक तकनीक से लैस करने पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस बल को राष्ट्रीय स्तर की आधुनिक एजेंसियों के अनुरूप विकसित किया जाएगा और पुलिस के कामकाज में किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होने दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इन पहलों का उद्देश्य कानून-व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाना और आम नागरिकों को तेज एवं भरोसेमंद पुलिस सहायता उपलब्ध कराना है।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
Aditya Birla Group
पांच दशक बाद बिड़ला समूह को बंगाल का न्योता, निवेश के लिए सरकार की पहल

बंगाल, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद राज्य में निवेश आकर्षित करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इसी क्रम में देश के प्रमुख औद्योगिक समूहों में शामिल आदित्य बिड़ला समूह से राज्य में निवेश करने का आग्रह किया गया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल एक बार फिर उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और पुराने औद्योगिक घरानों को राज्य में वापस निवेश के लिए आमंत्रित किया जा रहा है।   पुराने औद्योगिक संबंधों का दिलाया गया स्मरण कोलकाता में आयोजित 'बिजनेस अपॉर्च्युनिटी प्लेटफॉर्म' कार्यक्रम में शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि आदित्य बिड़ला समूह का बंगाल से ऐतिहासिक रिश्ता रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि कभी इस समूह का मुख्यालय कोलकाता में हुआ करता था, लेकिन श्रमिक अशांति और उस समय के औद्योगिक माहौल के कारण समूह को अपना मुख्यालय मुंबई स्थानांतरित करना पड़ा। उन्होंने कहा कि अब राज्य में उद्योगों के लिए बेहतर वातावरण बनाने का प्रयास किया जा रहा है और बिड़ला समूह जैसे प्रतिष्ठित उद्योग घरानों का स्वागत है।   1978 की घटना का किया उल्लेख अपने संबोधन में शमिक भट्टाचार्य ने वर्ष 1978 की एक घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उस समय उद्योगपति आदित्य बिड़ला को कोलकाता में कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद उन्होंने अपने व्यवसाय की सुरक्षा और विस्तार के लिए मुख्यालय मुंबई स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। उनके अनुसार, इसके बाद कई अन्य बड़े उद्योग समूहों ने भी बंगाल से अपना मुख्यालय दूसरी जगह स्थानांतरित कर लिया।   निवेश और रोजगार पर सरकार का फोकस भाजपा का कहना है कि राज्य में औद्योगिक निवेश बढ़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी। हालांकि, आदित्य बिड़ला समूह की ओर से इस आग्रह पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राज्य सरकार और उद्योग जगत के बीच संवाद बढ़ाने की पहल को निवेश और औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
TMC MP Mahua Moitra speaks in a video after alleging that protesters threw eggs and rotten brinjals outside her residence or office premises in Kolkata.
महुआ मोइत्रा ने घर पर अंडे और सड़े बैंगन फेंके जाने का लगाया आरोप, सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किया

कोलकाता: Mahua Moitra ने दावा किया है कि उनके घर (या कार्यालय परिसर) के बाहर कुछ लोगों ने अंडे और सड़े बैंगन फेंके। उन्होंने घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा करते हुए इसके लिए भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों को जिम्मेदार ठहराया और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। वीडियो शेयर कर लगाए गंभीर आरोप महुआ मोइत्रा ने अपने पोस्ट में आरोप लगाया कि भाजपा समर्थक उनके परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने पश्चिम बंगाल पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। अपने पोस्ट में उन्होंने कई विपक्षी नेताओं, जिनमें Mamata Banerjee, Rahul Gandhi, Akhilesh Yadav, Supriya Sule, M. K. Stalin और Arvind Kejriwal को टैग किया। वीडियो में क्या दिखाई देता है? करीब एक मिनट के वीडियो में एक व्यस्त सड़क पर भीड़, पुलिसकर्मी और कई लोग मोबाइल से वीडियो बनाते दिखाई देते हैं। वीडियो ऊपरी मंजिल से रिकॉर्ड किया गया प्रतीत होता है। महुआ मोइत्रा का कहना है कि वे करीब एक घंटे तक अपने कार्यालय के अंदर ही रहीं क्योंकि बाहर का माहौल तनावपूर्ण था। उन्होंने वीडियो में यह भी कहा कि केंद्रीय सुरक्षा बल (CRPF) के जवान मौके पर मौजूद थे, लेकिन उन्होंने कोई हस्तक्षेप नहीं किया। पहले भी दी थी चेतावनी महुआ मोइत्रा ने इससे पहले सार्वजनिक रूप से कहा था कि यदि कोई उन पर अंडे फेंकेगा या इस तरह का हमला करेगा तो वह संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराएंगी और कानूनी कार्रवाई करेंगी। सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं घटना का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ यूज़र्स ने घटना की आलोचना की, जबकि कुछ ने राजनीतिक टिप्पणी करते हुए इसे लेकर व्यंग्यात्मक पोस्ट भी साझा किए। आधिकारिक पुष्टि नहीं फिलहाल इस मामले में आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से महुआ मोइत्रा द्वारा साझा किए गए वीडियो और उनके सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। इस संबंध में पुलिस या अन्य संबंधित एजेंसियों की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
A symbolic image of the Calcutta High Court, representing the resignation of retired Justice Ranjit Kumar Bag from the SIR Tribunal handling West Bengal voter list cases.
पश्चिम बंगाल: SIR ट्रिब्यूनल से एक और सेवानिवृत्त जज का इस्तीफा, स्वास्थ्य कारणों का दिया हवाला

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे SIR ट्रिब्यूनल को एक और झटका लगा है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजीत कुमार बाग ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए ट्रिब्यूनल से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले भी एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश इस ट्रिब्यूनल से अलग हो चुके हैं। स्वास्थ्य कारणों से दिया इस्तीफा सूत्रों के अनुसार, सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजीत कुमार बाग ने खराब स्वास्थ्य के कारण ट्रिब्यूनल में अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त होने का निर्णय लिया। उनके इस्तीफे के बाद ट्रिब्यूनल की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। पहले भी दे चुके हैं जज इस्तीफा इससे पहले मई में T. S. Sivagnanam ने भी SIR ट्रिब्यूनल से इस्तीफा दिया था। लगातार दो वरिष्ठ न्यायाधीशों के हटने से ट्रिब्यूनल के कामकाज पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुआ था गठन SIR ट्रिब्यूनल का गठन Supreme Court of India के निर्देश पर तत्कालीन Calcutta High Court के मुख्य न्यायाधीश Sujoy Paul द्वारा किया गया था। इस ट्रिब्यूनल का उद्देश्य मतदाता सूची से बाहर हुए लोगों के मामलों की जांच करना और उनके दस्तावेजों का सत्यापन कर उचित निर्णय देना है। 27 लाख मामलों के निपटारे की जिम्मेदारी ट्रिब्यूनल के सामने करीब 27 लाख मामलों के निपटारे की जिम्मेदारी है। इनमें उन लोगों के आवेदन शामिल हैं, जिनके नाम मतदाता सूची से हट गए हैं। दस्तावेजों की जांच की जा रही है और कई आवेदकों से फोन के माध्यम से भी संपर्क किया जा रहा है। शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच से भी जुड़ा रहा नाम सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजीत कुमार बाग इससे पहले पश्चिम बंगाल के चर्चित शिक्षक भर्ती मामले की जांच से भी जुड़े रहे हैं। उनकी अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के आधार पर कथित भर्ती अनियमितताओं का मामला सामने आया था, जिसके बाद जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी गई थी। ट्रिब्यूनल से उनके इस्तीफे की वजह केवल स्वास्थ्य संबंधी बताई गई है और इसे किसी अन्य विवाद से नहीं जोड़ा गया है।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
A heritage Kolkata tram on city streets, representing West Bengal's plan to introduce modern air-conditioned trams and expand the network for tourism and public transport.
कोलकाता में फिर दौड़ेगी आधुनिक ट्राम, कालीघाट-दक्षिणेश्वर के बीच शुरू होगी AC सेवा

कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार शहर की 150 वर्ष पुरानी ट्राम विरासत को आधुनिक स्वरूप देने की तैयारी में है। इस पहल के तहत कोलकाता में जल्द ही वातानुकूलित (AC) ट्राम सेवा शुरू की जाएगी। सरकार का लक्ष्य ट्राम को केवल सार्वजनिक परिवहन ही नहीं, बल्कि धार्मिक और पर्यटन सर्किट का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना है। राज्य के परिवहन मंत्री Arjun Singh ने बुधवार को Merchants' Chamber of Commerce & Industry द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बताया कि सरकार ट्राम नेटवर्क के विस्तार और आधुनिकीकरण की दिशा में काम कर रही है। कालीघाट-दक्षिणेश्वर कॉरिडोर पर होगा फोकस सरकार की योजना के अनुसार नया ट्राम कॉरिडोर दक्षिणेश्वर और कालीघाट जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ेगा। इसके अलावा न्यू टाउन क्षेत्र में भी नए ट्राम रूट विकसित किए जाएंगे, जिससे शहर के आधुनिक और पारंपरिक हिस्सों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित हो सके। राइट्स को सौंपी गई सर्वे की जिम्मेदारी परिवहन मंत्री ने बताया कि इस परियोजना की व्यवहार्यता और नए ट्राम मार्गों के विकास के लिए RITES Limited को विस्तृत सर्वे का कार्य सौंपा गया है। सर्वे के आधार पर नए ट्रैक, आधुनिक ट्राम कोच और आवश्यक बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा। सरकार विदेशी शहरों के आधुनिक ट्राम मॉडल का भी अध्ययन कर रही है ताकि कोलकाता की विरासत को आधुनिक सुविधाओं के साथ जोड़ा जा सके। सरकारी बसों का भी होगा आधुनिकीकरण परिवहन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए नई AC बसों को भी बेड़े में शामिल करेगी। इनमें इलेक्ट्रिक और CNG दोनों प्रकार की बसें होंगी। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए राज्यभर में व्यापक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा, जिससे स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। जलमार्ग और पोर्ट विकास पर भी जोर सरकार अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन को मजबूत करने की दिशा में भी काम कर रही है। गंगा नदी के किनारे आधुनिक बंदरगाह विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है, जिससे माल परिवहन और लॉजिस्टिक्स को नई गति मिल सके। निवेशकों को दिया भरोसा कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उद्योग और व्यापार के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आश्वस्त किया कि निवेश संबंधी प्रस्ताव नौकरशाही में लंबित नहीं रहने दिए जाएंगे और आवश्यक फैसले तेजी से लिए जाएंगे। सरकार जल्द ही एक परिणामोन्मुखी बिजनेस समिट आयोजित करने की भी योजना बना रही है, जिसमें निवेशकों को पश्चिम बंगाल में उपलब्ध अवसरों से अवगत कराया जाएगा। 'ट्रांसपोर्ट अर्थव्यवस्था की रीढ़' कार्यक्रम में MCCI के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने कहा कि मजबूत सड़क, रेल, बंदरगाह, हवाई अड्डे, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स और अंतर्देशीय जलमार्ग किसी भी प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था की आधारशिला होते हैं। उनका मानना है कि आधुनिक परिवहन नेटवर्क राज्य के औद्योगिक और आर्थिक विकास को नई गति देगा।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
Aditya Birla Group branding alongside an industrial facility, symbolizing West Bengal's appeal for fresh investments to boost the state's industrial growth.
बंगाल ने पांच दशक बाद बढ़ाया बिड़ला समूह की ओर दोस्ती का हाथ, निवेश के लिए किया आग्रह

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने की कोशिशों के बीच राज्य सरकार ने देश के प्रमुख औद्योगिक घरानों में से एक Aditya Birla Group से राज्य में निवेश करने का आग्रह किया है। यह पहल ऐसे समय में हुई है जब राज्य में उद्योगों को आकर्षित करने के लिए नई रणनीतियों पर जोर दिया जा रहा है। शमिक भट्टाचार्य ने दी जानकारी Shamik Bhattacharya ने कोलकाता में आयोजित 'बिजनेस अपॉर्च्युनिटी प्लेटफॉर्म' कार्यक्रम में कहा कि राज्य सरकार ने आदित्य बिड़ला समूह से पश्चिम बंगाल में निवेश बढ़ाने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि बंगाल का बिड़ला समूह के साथ ऐतिहासिक संबंध रहा है और अब राज्य एक बार फिर इस औद्योगिक घराने को निवेश के लिए आमंत्रित कर रहा है। मुख्यालय कभी कोलकाता में था शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि आज से करीब पांच दशक पहले आदित्य बिड़ला समूह का मुख्यालय कोलकाता में हुआ करता था, लेकिन उस समय श्रमिक अशांति और औद्योगिक माहौल के कारण समूह को अपना मुख्यालय मुंबई स्थानांतरित करना पड़ा। उन्होंने कहा कि उस दौर में कई बड़े औद्योगिक समूहों ने भी पश्चिम बंगाल से अपने मुख्यालय अन्य राज्यों में स्थानांतरित किए थे। 1978 की घटना का किया उल्लेख भट्टाचार्य ने वर्ष 1978 की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि कथित तौर पर तत्कालीन परिस्थितियों के कारण उद्योगपति आदित्य बिड़ला को कोलकाता स्थित Reserve Bank of India कार्यालय के पास अपनी कार से उतरकर पैदल जाना पड़ा था। उन्होंने दावा किया कि इसी तरह की घटनाओं और असुरक्षा की भावना के बाद समूह ने अपने व्यवसाय के विस्तार और सुरक्षा के लिए मुंबई जाने का फैसला किया। उनके अनुसार, बाद में कई अन्य उद्योगपति भी अपने मुख्यालय पश्चिम बंगाल से बाहर ले गए। बंगाल से पूरी तरह नहीं टूटा था रिश्ता भट्टाचार्य ने कहा कि मुख्यालय मुंबई स्थानांतरित होने के बावजूद आदित्य बिड़ला समूह ने पश्चिम बंगाल में अपने औद्योगिक परिचालन पूरी तरह बंद नहीं किए और राज्य में अपनी व्यावसायिक गतिविधियां जारी रखीं। निवेश आकर्षित करने पर सरकार का जोर पश्चिम बंगाल सरकार राज्य में नए निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न औद्योगिक समूहों से संपर्क कर रही है। सरकार का मानना है कि बड़े निवेश से राज्य के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होगा।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
Ritabrata Banerjee
बागी टीएमसी विधायक दल आज चुनाव आयोग से करेगा मुलाकात, पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर ठोक सकता है दावा

कोलकाता एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी सियासी हलचल के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का बागी विधायक दल आज चुनाव आयोग से मुलाकात करेगा। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल पार्टी के संगठनात्मक ढांचे, नेतृत्व और चुनाव चिन्ह से जुड़े मुद्दों पर अपना पक्ष आयोग के समक्ष रखेगा।   नेतृत्व विवाद को लेकर चुनाव आयोग के सामने रखेगा पक्ष   सूत्रों के अनुसार, बागी गुट का कहना है कि पार्टी में नए नेतृत्व का गठन किया गया है और इसकी आधिकारिक जानकारी चुनाव आयोग को दी जानी चाहिए। वहीं ममता बनर्जी समर्थक गुट का दावा है कि टीएमसी की वैध राष्ट्रीय कार्यसमिति और पदाधिकारियों की सूची पहले ही आयोग को सौंप दी गई है और पार्टी पर उनका ही अधिकार है।   चुनाव चिन्ह पर भी हो सकती है चर्चा   राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बागी गुट की यह पहल भविष्य में पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठनात्मक अधिकारों को लेकर कानूनी विवाद का रूप ले सकती है। हालांकि, अभी तक चुनाव आयोग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।   राजनीतिक हलकों की नजर आयोग के फैसले पर   आज होने वाली इस मुलाकात पर राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग के अगले कदम से इस विवाद की दिशा और पश्चिम बंगाल की राजनीति पर इसका असर आने वाले दिनों में साफ हो सकेगा।

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
Kolkata Police personnel deployed near Victoria House after Section 163 of the BNSS was imposed in central Kolkata ahead of political events.
कोलकाता में 30 अगस्त तक लागू रहेगी धारा 163, फैसले पर तृणमूल कांग्रेस का विरोध तेज

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के मध्य क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी है। यह आदेश 2 जुलाई से 30 अगस्त तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, धरना-प्रदर्शन, सभा और जुलूस निकालने पर प्रतिबंध रहेगा। पुलिस के इस फैसले का तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने कड़ा विरोध किया है और इसे अदालत में चुनौती देने की बात कही है। विक्टोरिया हाउस के सामने नहीं होगा 21 जुलाई का कार्यक्रम कोलकाता पुलिस ने विक्टोरिया हाउस के सामने 21 जुलाई शहीद दिवस कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। बताया गया कि तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों की ओर से की गई अनुमति संबंधी अपील भी खारिज कर दी गई। इसके बाद पुलिस आयुक्त अजय नंदा ने पूरे इलाके में धारा 163 लागू करने का आदेश जारी किया। पुलिस ने क्या कहा? कोलकाता पुलिस के अनुसार, विश्वसनीय खुफिया सूचनाओं के आधार पर आशंका है कि संबंधित क्षेत्र में हिंसक प्रदर्शन हो सकते हैं, जिससे शांति और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा है। आदेश के तहत— पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक रहेगी। धरना, प्रदर्शन और जुलूस निकालने की अनुमति नहीं होगी। लाठी या अन्य संभावित खतरनाक वस्तुओं के साथ समूह में एकत्र होना भी प्रतिबंधित रहेगा। तृणमूल कांग्रेस ने जताया विरोध तृणमूल कांग्रेस ने पुलिस के आदेश को लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है। पार्टी सांसद Kalyan Banerjee ने कहा कि मध्य कोलकाता में इस तरह धारा 163 लागू करना पूरी तरह गैरकानूनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक विरोध से डर रही है और इस आदेश को अदालत में चुनौती दी जाएगी। महुआ मोइत्रा ने भी उठाए सवाल कृष्णानगर से सांसद Mahua Moitra ने भी फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक आंदोलनों को इस तरह रोका नहीं जा सकता। उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि पार्टी राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर इस आदेश का विरोध करेगी। नाम को लेकर स्पष्टता समाचार में यह उल्लेख किया गया है कि "मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी" के फैसले पर विरोध हुआ। वर्तमान में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee हैं, जबकि Suvendu Adhikari राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। इसलिए समाचार में नाम संबंधी त्रुटि प्रतीत होती है।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
A passenger train at a railway station in West Bengal as services on the Haldia rail section are temporarily modified due to maintenance work.
Indian Railway: पश्चिम बंगाल के इन स्टेशनों पर बुधवार को नहीं रुकेंगी ट्रेनें, यात्रा से पहले देखें पूरी सूची

कोलकाता: रेलवे ने पश्चिम बंगाल के रेल यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना जारी की है। रेलवे लाइन पर रखरखाव (मेंटेनेंस) कार्य के चलते हल्दिया रेलखंड पर बुधवार को कई ट्रेनों के संचालन में अस्थायी बदलाव किया गया है। कुछ ट्रेनें अपने निर्धारित गंतव्य तक नहीं जाएंगी, जबकि कुछ ट्रेनों का प्रारंभिक स्टेशन भी बदला गया है। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा से पहले अपनी ट्रेन का अद्यतन शेड्यूल और प्रस्थान स्टेशन की जानकारी अवश्य जांच लें, ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके। ये ट्रेनें गंतव्य से पहले ही यात्रा समाप्त करेंगी रेलवे के अनुसार, निम्नलिखित ट्रेनें हल्दिया तक नहीं जाएंगी— 38051 हावड़ा–हल्दिया लोकल: यह ट्रेन हल्दिया की बजाय दुर्गाचक स्टेशन तक ही चलेगी। 38053 हावड़ा–हल्दिया लोकल: यह ट्रेन भी अपनी यात्रा दुर्गाचक स्टेशन पर समाप्त करेगी। 22330 आसनसोल–हल्दिया एक्सप्रेस: एक्सप्रेस ट्रेन हल्दिया के स्थान पर दुर्गाचक स्टेशन तक ही संचालित होगी। इन ट्रेनों का शुरुआती स्टेशन बदला गया कुछ ट्रेनों की शुरुआत भी अस्थायी रूप से बदली गई है— 38052 हल्दिया–हावड़ा लोकल: अब यह ट्रेन हल्दिया के बजाय दुर्गाचक स्टेशन से रवाना होगी। 38054 हल्दिया–पांशकुड़ा लोकल: यह ट्रेन भी दुर्गाचक से अपनी यात्रा शुरू करेगी। 38056 हल्दिया–हावड़ा लोकल: इसका प्रस्थान भी दुर्गाचक स्टेशन से होगा। 22329 हल्दिया–आसनसोल एक्सप्रेस: यह ट्रेन हल्दिया या दुर्गाचक से नहीं, बल्कि तमलुक स्टेशन से आसनसोल के लिए रवाना होगी। यात्रियों के लिए रेलवे की सलाह रेलवे ने कहा है कि रखरखाव कार्य के कारण यह बदलाव केवल अस्थायी हैं। यात्रियों को सलाह दी गई है कि स्टेशन पहुंचने से पहले अपनी ट्रेन का समय, प्रस्थान स्टेशन और रूट की जानकारी आधिकारिक रेलवे माध्यमों से अवश्य जांच लें, ताकि यात्रा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
Firefighters battle a massive blaze at the Haldia Petrochemicals plant in West Bengal after a suspected naphtha gas leak, as thick smoke billows into the sky.
पश्चिम बंगाल के हल्दिया पेट्रोकेमिकल प्लांट में भीषण आग, 15 घायल; कई की हालत गंभीर

  हल्दिया: पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले स्थित हल्दिया पेट्रोकेमिकल प्लांट में मंगलवार तड़के भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पाइपलाइन से नेफ्था गैस के रिसाव के बाद आग भड़की, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। हादसे में कम से कम 15 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 6 की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद घायलों को हल्दिया उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि गंभीर रूप से झुलसे लोगों को ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से कोलकाता रेफर किया जा रहा है। तड़के लगी आग, कई घंटे चला राहत अभियान जानकारी के मुताबिक, आग सुबह करीब 4 बजे लगी। स्थानीय लोगों ने पहले काला धुआं उठते देखा, जिसके बाद तेज लपटें पूरे इलाके में फैल गईं। आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की 6 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। बाद में राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के लिए तीन अतिरिक्त दमकल वाहन भी भेजे गए। दमकल कर्मियों ने आग बुझाने के लिए पानी और फोम का इस्तेमाल किया, लेकिन नेफ्था गैस की मौजूदगी के कारण आग पर काबू पाने में काफी समय लगा। नेफ्था गैस रिसाव से भड़की आग प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह नेफ्था गैस का रिसाव बताई जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्हें घटना से एक रात पहले से ही गैस की तेज गंध महसूस हो रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तड़के तेज धमाके की आवाज सुनाई दी, जिसके तुरंत बाद आग की ऊंची लपटें दिखाई देने लगीं। गैस रिसाव के कारण आग तेजी से आसपास के क्षेत्र में फैल गई। कई घर और दुकानें भी चपेट में आईं आग की चपेट में आने से प्लांट के आसपास स्थित कई मकान और दुकानें भी क्षतिग्रस्त हो गईं। कुछ घर पूरी तरह जलकर राख हो गए। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। 15 लोग घायल, 6 की हालत गंभीर स्थानीय प्रशासन के अनुसार, हादसे में करीब 15 लोग घायल हुए हैं। इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। सभी घायलों का इलाज जारी है, जबकि गंभीर रूप से झुलसे छह लोगों को बेहतर उपचार के लिए कोलकाता भेजा गया है। रेल सेवाएं भी प्रभावित आग के चलते हल्दिया-पांसकुरा रेल मार्ग पर रेल परिचालन भी प्रभावित हुआ। सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए ट्रेनों की आवाजाही बाधित रही। स्थानीय लोगों ने लगाए लापरवाही के आरोप स्थानीय निवासियों का आरोप है कि उन्हें पिछले कुछ समय से प्लांट के आसपास गैस रिसाव की गंध महसूस हो रही थी। उनका कहना है कि इस संबंध में फैक्ट्री प्रबंधन को सूचना भी दी गई थी, लेकिन समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए। फिलहाल दमकल विभाग, जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियां आग लगने के कारणों की जांच कर रही हैं। शुरुआती जांच में नेफ्था गैस रिसाव को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है, हालांकि विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
West Bengal Assembly expected to discuss a Uniform Civil Code (UCC) bill during a special legislative session.
पश्चिम बंगाल में लागू होगा यूनिफॉर्म सिविल कोड? विधानसभा के मौजूदा सत्र में आ सकता है UCC विधेयक

  कोलकाता: उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू करने की तैयारी तेज होती दिखाई दे रही है। विधानसभा और राज्य प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार अगले सप्ताह विधानसभा के विशेष सत्र में यूसीसी से संबंधित विधेयक पेश कर सकती है। यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो पश्चिम बंगाल समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का चौथा भाजपा शासित राज्य बन जाएगा। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन संबंधों जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना है। साथ ही महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार ने बताई यूसीसी की जरूरत विधानसभा और प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, सरकार का मानना है कि अलग-अलग समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान नागरिक कानून लागू होने से न्यायिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। सरकार का दावा है कि इससे कानूनी विवादों में एकरूपता आएगी और सभी नागरिकों को समान अधिकार सुनिश्चित किए जा सकेंगे। असम मॉडल पर आगे बढ़ सकती है सरकार सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार यूसीसी लागू करने के लिए असम मॉडल का अध्ययन कर रही है। हाल ही में असम विधानसभा ने लंबी बहस के बाद समान नागरिक संहिता विधेयक पारित किया था। उस कानून में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन संबंधों के पंजीकरण और बहुविवाह पर रोक जैसे कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। असम सरकार ने इसे संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों के अनुरूप बताया था और कहा था कि इसका उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और लैंगिक समानता को बढ़ावा देना है। जनजातीय समुदायों को मिल सकती है छूट सूत्रों के मुताबिक, असम की तरह पश्चिम बंगाल में भी कुछ जनजातीय समुदायों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने पर विचार किया जा रहा है। दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र और जंगलमहल के कुछ आदिवासी समुदायों की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और संवैधानिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं।  इस संबंध में अंतिम फैसला विधेयक पेश होने के बाद ही स्पष्ट होगा। राजनीतिक मुद्दा बनने की संभावना राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पश्चिम बंगाल विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश होता है तो यह राज्य की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है। भाजपा इसे महिलाओं के अधिकार, समान कानून और सुशासन से जोड़कर पेश कर सकती है, जबकि विपक्ष धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के आधार पर इसका विरोध कर सकता है। सरकार का कहना है कि समान नागरिक संहिता किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करने का संवैधानिक प्रयास है। वहीं विपक्षी दल पहले ही इस प्रस्तावित कानून को लेकर विरोध के संकेत दे चुके हैं। विधेयक पर रहेगी सबकी नजर अब सभी की नजर विधानसभा के आगामी विशेष सत्र पर टिकी है, जहां सरकार यूसीसी विधेयक पेश कर सकती है। विधेयक के अंतिम स्वरूप, उसमें शामिल प्रावधानों और संभावित छूटों को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
Bengal Assembly UCC
पश्चिम बंगाल में UCC बिल लाने की तैयारी, सोमवार को विधानसभा में हो सकता है पेश

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार आगामी सोमवार को विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश कर सकती है। सूत्रों के अनुसार, विधानसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक के बाद विधेयक का मसौदा सभी विधायकों को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।   विधानसभा में होगी अहम चर्चा   सूत्रों का कहना है कि सरकार विधेयक पेश करने के बाद इस पर विस्तृत चर्चा कराना चाहती है। इसे मौजूदा विधानसभा सत्र का सबसे महत्वपूर्ण विधायी प्रस्ताव माना जा रहा है।   विपक्ष ने जताई आपत्ति   विपक्षी दलों ने प्रस्तावित विधेयक को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि इतने महत्वपूर्ण कानून पर सभी पक्षों से व्यापक चर्चा और परामर्श होना चाहिए। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि यह कदम समान कानून व्यवस्था और प्रशासनिक सुधार की दिशा में उठाया जा रहा है।   राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल   UCC विधेयक की संभावित पेशी को लेकर राज्य की राजनीति गर्मा गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा में इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है। साथ ही इसका असर राज्य की राजनीति पर भी पड़ सकता है।   पूरे देश की नजर बंगाल विधानसभा पर   यदि यह विधेयक विधानसभा में पेश होता है, तो पश्चिम बंगाल उन राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां समान नागरिक संहिता को लेकर विधायी पहल की जा रही है। अब सभी की नजर सोमवार को होने वाली बंगाल विधानसभा की कार्यवाही पर टिकी है।

abhishek singh जून 26, 2026 0
Rescue teams work at the collapsed construction site in Kolkata’s Taratala area after a deadly roof collapse.
तारातला हादसे के बाद सरकार का बड़ा फैसला, SIT गठित; कोलकाता में सभी निर्माण कार्यों पर रोक

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला इलाके में हुए भीषण हादसे के बाद राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देश पर घटना की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। साथ ही कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत चल रहे सभी निर्माण कार्यों को तत्काल प्रभाव से अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। बुधवार दोपहर एक निर्माणाधीन औद्योगिक परिसर की छत गिरने से कई मजदूर मलबे में दब गए। हादसे में कई लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई घायल मजदूरों का इलाज एसएसकेएम अस्पताल में चल रहा है। राहत एवं बचाव कार्य देर रात तक जारी रहा। डीसी डीडी के नेतृत्व में बनी 5 सदस्यीय SIT सरकार ने हादसे की जांच के लिए डिप्टी कमिश्नर, डिटेक्टिव डिपार्टमेंट (DC-DD) के नेतृत्व में पांच सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया है। टीम में एक सहायक सब-इंस्पेक्टर, तीन इंस्पेक्टर और दो सब-इंस्पेक्टर शामिल किए गए हैं। पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें गैर-इरादतन हत्या, गैर-इरादतन हत्या के प्रयास और आपराधिक षड्यंत्र जैसी धाराएं शामिल हैं। 31 जुलाई तक निर्माण कार्यों पर रोक मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हादसे के बाद कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी निर्माण कार्यों को फिलहाल रोक दिया गया है। उन्होंने बताया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में स्वीकृत परियोजनाओं सहित सभी निर्माण कार्यों का पुनर्मूल्यांकन कराया जाएगा। सरकार ने 31 जुलाई तक निर्माण गतिविधियों को स्थगित रखने का निर्देश दिया है। इस दौरान विशेषज्ञों की एक टीम सभी परियोजनाओं का सुरक्षा ऑडिट करेगी। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनेगी ऑडिट कमेटी मुख्यमंत्री ने बताया कि निर्माण परियोजनाओं की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। इसमें कोलकाता नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, नागरिक सुरक्षा, अग्निशमन विभाग, पुलिस और केएमडीए के अधिकारी शामिल होंगे। जहां आवश्यकता होगी, वहां कोलकाता पोर्ट अथॉरिटी और मेट्रो रेलवे के विशेषज्ञों को भी समिति में शामिल किया जाएगा। अस्पतालों और अन्य आपातकालीन सेवाओं से जुड़े निर्माण कार्यों को इस रोक से छूट दी जाएगी। प्रारंभिक जांच में सामने आईं योजना संबंधी खामियां मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक मिली शुरुआती रिपोर्टों में निर्माण योजना और संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर गंभीर खामियों के संकेत मिले हैं। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा और जिम्मेदारी तय होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सेना और NDRF भी बचाव कार्य में जुटी तारातला हादसे के बाद राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। पुलिस, दमकल विभाग, नागरिक सुरक्षा बल, सेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) संयुक्त रूप से अभियान चला रहे हैं। घायलों को तेजी से अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया है। प्रशासन की ओर से मलबे में फंसे लोगों तक पानी और ऑक्सीजन पहुंचाने की भी व्यवस्था की गई है। विधानसभा में बयान देंगे मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी गुरुवार को विधानसभा में तारातला हादसे पर विस्तृत बयान देंगे। सरकार की ओर से इस घटना को गंभीरता से लेते हुए भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए व्यापक सुरक्षा समीक्षा की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य सरकार का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और निर्माण सुरक्षा मानकों को और अधिक सख्त बनाया जाएगा।  

Deepshikha जून 25, 2026 0
West Bengal government prepares to introduce a strict anti-corruption law in a special Assembly session.
पश्चिम बंगाल विधानसभा का विशेष आपात सत्र 29 जून को, भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कानून की तैयारी

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाने की दिशा में सरकार एक नए और सख्त कानून को लागू करने की तैयारी में है। इसके लिए 29 जून को विधानसभा का एक दिवसीय विशेष आपात सत्र बुलाया गया है, जिसमें प्रस्तावित भ्रष्टाचार के खिलाफ विधेयक पेश किया जाएगा। बजट सत्र के बीच लिया गया बड़ा फैसला विधानसभा सूत्रों के अनुसार, वर्तमान बजट सत्र का पहला चरण 25 जून तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण 6 जुलाई से शुरू होगा। इसी अंतराल के दौरान सरकार ने विशेष सत्र बुलाकर विधेयक को पेश करने का निर्णय लिया है। सूत्रों का कहना है कि विधेयक के अंतिम मसौदे को अभी कानूनी विशेषज्ञों द्वारा अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि उसमें किसी प्रकार की कानूनी खामी न रह जाए। भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून में संपत्ति जब्ती का प्रावधान प्रस्तावित कानून के तहत भ्रष्टाचार में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों की अवैध रूप से अर्जित चल और अचल संपत्तियों को जब्त करने का प्रावधान शामिल किया जा रहा है। इसके साथ ही ऐसी संपत्तियों की सार्वजनिक नीलामी का भी प्रस्ताव है, जिससे प्राप्त धनराशि को जनहित कार्यों में उपयोग किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्ति को पूरी तरह समाप्त करना है। मुख्यमंत्री का सख्त रुख विधानसभा में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि नया कानून भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक कदम साबित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब केवल जेल भेजना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्ति को भी जब्त कर नीलाम किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भ्रष्टाचार के जरिए कमाई गई संपत्ति किसी भी स्थिति में सुरक्षित न रहे। विपक्ष पर तीखा हमला विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर बिना नाम लिए निशाना साधते हुए कहा कि अब तक कई लोग कानूनी प्रक्रिया का लाभ उठाकर बच निकलते रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था में ऐसे सभी रास्ते बंद किए जाएंगे। सरकार का दावा—भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम सरकार का मानना है कि यह प्रस्तावित कानून राज्य में पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगा। आने वाले दिनों में इस विधेयक को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।  

Deepshikha जून 25, 2026 0
Officials discuss ADB-backed industrial corridor and infrastructure development plans for West Bengal at Nabanna.
एडीबी से पश्चिम बंगाल के विकास को नई गति, औद्योगिक कॉरिडोर और पर्यटन पर होगा बड़ा निवेश प्रस्ताव

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल के बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने राज्य सरकार के सामने बड़ा निवेश प्रस्ताव रखा है। प्रस्ताव के तहत राज्य में औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक नेटवर्क और पर्यटन विकास परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देने पर सहमति की संभावना जताई गई है। नबान्न में उच्चस्तरीय बैठक राज्य के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल और मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार सुब्रत गुप्ता ने नबान्न भवन में एडीबी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक में पश्चिम बंगाल के दीर्घकालिक औद्योगिक और आर्थिक विकास को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, एडीबी ने नीति आयोग द्वारा सुझाए गए सिटी इकोनॉमिक रीजन (CER) मॉडल के आधार पर राज्य में विकास ढांचा तैयार करने का प्रस्ताव दिया है। दो सिटी इकोनॉमिक रीजन (CER) विकसित करने का प्रस्ताव एडीबी ने पश्चिम बंगाल में कम से कम दो प्रमुख CER विकसित करने का सुझाव दिया है। इसके तहत चार संभावित क्षेत्रों की पहचान की गई है— कोलकाता महानगरीय CER इस मॉडल में कोलकाता, हावड़ा, हुगली, उलुबेरिया और डानकुनी को जोड़ते हुए इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और लॉजिस्टिक्स हब विकसित करने की योजना है। सिलीगुड़ी CER सिलीगुड़ी, जलपाईगुड़ी, अलीपुरदुआर और कूचबिहार को जोड़कर यह क्षेत्र आईटी, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और कृषि-प्रसंस्करण उद्योगों का केंद्र बनेगा। औद्योगिक कॉरिडोर पर फोकस एडीबी ने राज्य में कई प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरिडोर विकसित करने में रुचि दिखाई है, जिनमें शामिल हैं— कोलकाता–डानकुनी–दुर्गापुर–आसनसोल मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर हल्दिया–खड़गपुर औद्योगिक कॉरिडोर सिलीगुड़ी–जलपाईगुड़ी एग्रो-प्रोसेसिंग कॉरिडोर राज्यव्यापी लॉजिस्टिक्स हब नेटवर्क इन परियोजनाओं से राज्य में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। हल्दिया और दुर्गापुर को मिलेगा औद्योगिक बढ़ावा हल्दिया–दीघा क्षेत्र को बंदरगाह आधारित विकास मॉडल के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है, जिसमें रिफाइनरी, केमिकल और पर्यटन उद्योग शामिल होंगे। वहीं दुर्गापुर–आसनसोल क्षेत्र को इस्पात, भारी उद्योग और स्वच्छ विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। पर्यटन क्षेत्र में भी बड़े क्लस्टर की योजना एडीबी ने राज्य में चार प्रमुख पर्यटन क्लस्टर विकसित करने का सुझाव दिया है— दार्जिलिंग–डुआर्स–कालिम्पोंग–तीस्ता सर्किट दीघा–मंदारमणि–ताजपुर तटीय सर्किट सुंदरबन इको-टूरिज्म क्लस्टर कोलकाता–मुर्शिदाबाद–बिष्णुपुर हेरिटेज सर्किट राज्य सरकार ने प्रस्ताव को बताया महत्वपूर्ण बैठक में शामिल अधिकारियों ने इस प्रस्ताव को पश्चिम बंगाल के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया है। माना जा रहा है कि इस सहयोग से राज्य में निवेश, बुनियादी ढांचे और पर्यटन क्षेत्र को नई गति मिलेगी।  

Deepshikha जून 25, 2026 0
Officials inspect Tarakeswar Temple route ahead of Shravani Mela as encroachment removal drive begins.
सावन से पहले तारकेश्वर मंदिर मार्ग से हटेगा अतिक्रमण, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चलेगा बुलडोजर

  पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध तारकेश्वर मंदिर में आगामी श्रावणी मेले की तैयारियां तेज हो गई हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर के मुख्य प्रवेश मार्ग से अतिक्रमण हटाने का निर्णय लिया गया है। राज्य की नगर एवं शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल ने स्पष्ट किया है कि सावन शुरू होने से पहले मंदिर तक जाने वाले रास्ते को अतिक्रमण मुक्त किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। अवैध दुकानों पर होगी कार्रवाई तारकेश्वर मंदिर परिसर का निरीक्षण करने पहुंचीं मंत्री अग्निमित्रा पाल ने कहा कि मंदिर के प्रवेश मार्ग की चौड़ाई वर्तमान में पर्याप्त नहीं है। इसे ध्यान में रखते हुए एक विशेष योजना तैयार की जा रही है, जिसके तहत मार्ग के दोनों ओर अवैध रूप से बनाई गई दुकानों और अन्य अतिक्रमणों को हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन आवश्यक कार्रवाई करेगा। अधिकारियों के साथ हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण करने के बाद मंत्री ने अतिथि निवास में अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में श्रावणी मेले के सफल आयोजन, सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन मेले के दौरान सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करेगा। सुरक्षा और सुविधाओं पर विशेष जोर जिलाधिकारी खुर्शीद अली क़ादरी ने बताया कि श्रावण माह के दौरान लाखों श्रद्धालु तारकेश्वर मंदिर पहुंचते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और सुविधा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने बताया कि दूध पोखर में स्नान के बाद मंदिर तक जाने वाले मार्ग पर विशेष मैट बिछाए जाएंगे। इसके अलावा रास्ते के दोनों ओर भगवान शिव और शिव पुराण से संबंधित चित्रों की प्रदर्शनी तथा आकर्षक प्रकाश व्यवस्था की जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव मिल सके। स्वच्छता अभियान पर रहेगा विशेष ध्यान प्रशासन ने मेले के दौरान साफ-सफाई को लेकर भी विशेष योजना बनाई है। अधिकारियों के अनुसार पूरे मेले के दौरान कचरा प्रबंधन, नियमित सफाई और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती की जाएगी। कांवर यात्रियों के मार्ग की भी होगी मरम्मत चांपदानी के विधायक दिलीप सिंह ने बताया कि बैद्यवाटी के निमाई तीर्थ घाट से जल लेकर तारकेश्वर पहुंचने वाले कांवर यात्रियों के मार्ग की भी समीक्षा की गई है। लगभग 40 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर जहां-जहां सड़कें क्षतिग्रस्त हैं, वहां तत्काल मरम्मत का कार्य कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि बरसात के बाद इन सड़कों के स्थायी पुनर्निर्माण की भी योजना बनाई गई है, ताकि भविष्य में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की तैयारी प्रशासन को उम्मीद है कि इस वर्ष भी श्रावणी मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु तारकेश्वर मंदिर पहुंचेंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।  

Deepshikha जून 24, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0