पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) की 500 कंपनियां फिलहाल राज्य में तैनात रहेंगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने गृह मंत्रालय से 180 दिनों तक केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रखने का आग्रह किया था। केंद्र सरकार ने फिलहाल 20 जून तक इसकी मंजूरी दी है। चुनाव के बाद भी तैनात रखे गए थे केंद्रीय बल विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद पश्चिम बंगाल में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीएपीएफ की 500 कंपनियों को राज्य में तैनात किया गया था। पिछले चुनावों के बाद हुई हिंसक घटनाओं को ध्यान में रखते हुए इस बार मतदान खत्म होने के बाद भी केंद्रीय बलों को नहीं हटाया गया था। गत सप्ताह राज्य की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के बाद गृह मंत्रालय ने इन बलों को चरणबद्ध तरीके से वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू की थी। पहले चरण में 100 कंपनियों यानी करीब 10 हजार जवानों को हटाने का आदेश जारी किया गया था। गृह मंत्रालय ने जारी किया नया आदेश केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी नए आदेश के अनुसार, अब 20 जून तक राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रहेगी। आदेश में कहा गया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए विभिन्न बलों की कुल 500 कंपनियां पश्चिम बंगाल में मौजूद रहेंगी। इनमें: केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 200 कंपनियां सीमा सुरक्षा बल (BSF) की 150 कंपनियां केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की 50 कंपनियां भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की 50 कंपनियां सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 50 कंपनियां शामिल हैं। राज्य सरकार को करनी होगी व्यवस्थाएं गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि केंद्रीय बलों की तैनाती के दौरान ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक सपोर्ट और जवानों के ठहरने की व्यवस्था राज्य सरकार को करनी होगी। साथ ही बलों की सभी ऑपरेशनल जरूरतों का भी ध्यान रखने को कहा गया है। पहले चरण में हटनी थीं 100 कंपनियां गृह मंत्रालय ने पहले चरण में 100 कंपनियों को वापस बुलाने का फैसला लिया था। इनमें CRPF की 40, BSF की 30, CISF की 10, ITBP की 10 और SSB की 10 कंपनियां शामिल थीं। आदेश के मुताबिक 15 मई से इन कंपनियों को कानून व्यवस्था ड्यूटी से हटाया जाना था। सुरक्षा समीक्षा के बाद लिया गया फैसला राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हुई समीक्षा बैठक में पश्चिम बंगाल गृह विभाग और केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारी शामिल हुए थे। खुफिया एजेंसियों से भी विशेष रिपोर्ट मांगी गई थी। समीक्षा में बताया गया कि चुनाव के बाद फिलहाल राज्य में स्थिति शांतिपूर्ण है और बड़े राजनीतिक प्रदर्शन या हिंसा की घटनाएं नहीं हुई हैं। वहीं बांग्लादेश सीमा से लगने वाले इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। सीमा सुरक्षा बल घुसपैठ रोकने के लिए लगातार सतर्क है और कई इलाकों में फेंसिंग का काम भी शुरू किया जा रहा है।
पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने राज्य के मदरसों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। राज्य के अल्पसंख्यक कार्य और मदरसा शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य कर दिया है। सरकार के नए आदेश के बाद अब राज्य के सभी मदरसों को सुबह की प्रार्थना सभा में ‘वंदे मातरम्’ गाना होगा। इस फैसले को लेकर राज्य में राजनीतिक और शैक्षणिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। पहले स्कूलों के लिए जारी हुआ था आदेश इससे पहले पश्चिम बंगाल के स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया था कि हर दिन कक्षाएं शुरू होने से पहले ‘वंदे मातरम्’ का गायन सुनिश्चित किया जाए। विभाग ने कहा था कि सुबह की प्रार्थना सभा में राष्ट्रगीत गाने से छात्रों में देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना को बढ़ावा मिलेगा। राज्य सरकार का यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय के उस निर्देश के बाद सामने आया है, जिसमें राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इसे व्यापक रूप से गाने की बात कही गई थी। नए आदेश में राज्य गीत को लेकर स्थिति साफ नहीं बंगाल में पहले से स्कूलों की सुबह की सभा में ‘बांग्लार माटी बांग्लार जल’ गीत गाना अनिवार्य था। हालांकि नए आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि राज्य गीत को अब भी जारी रखा जाएगा या नहीं। कुछ स्कूल प्रबंधन ने इस फैसले को लागू करने में व्यावहारिक चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया है। स्कूल प्रमुखों का कहना है कि राष्ट्रगान पहले से अनिवार्य है और अब ‘वंदे मातरम्’ जोड़े जाने के बाद अगर राज्य गीत भी जारी रहता है तो प्रार्थना सभा का समय काफी बढ़ जाएगा। स्कूलों ने शुरू किया पालन शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार फिलहाल निर्देश केवल ‘वंदे मातरम्’ को लेकर जारी किया गया है। विभाग ने साफ किया कि स्कूल प्रार्थना में राष्ट्रगीत को शामिल करना जरूरी होगा, जबकि राज्य गीत पर कोई अलग निर्देश नहीं दिया गया है। कई स्कूलों ने इस आदेश का पालन भी शुरू कर दिया है। जादवपुर विद्यापीठ के प्रधानाध्यापक पार्थ प्रतिम बैद्य ने बताया कि उनके स्कूल में पिछले सप्ताह से राष्ट्रगान से पहले ‘वंदे मातरम्’ गाया जा रहा है। राजनीतिक बहस तेज मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य किए जाने के फैसले ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर सरकार इसे राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति से जोड़ रही है, वहीं विपक्ष और कुछ शिक्षा विशेषज्ञ इस फैसले के सामाजिक और प्रशासनिक प्रभावों पर सवाल उठा रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलावों की शुरुआत हो गई है। राज्य की पहली कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसलों पर मुहर लगी, जिनमें सबसे प्रमुख Ayushman Bharat योजना को राज्य में लागू करना रहा। इस फैसले पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने खुशी जताई और कहा कि पश्चिम बंगाल के लोगों का कल्याण उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अब राज्य के लोगों को दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना का लाभ मिलेगा, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग को बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। पीएम मोदी ने ‘डबल इंजन सरकार’ पर दिया जोर पीएम मोदी ने अपने संदेश में “डबल इंजन सरकार” का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय से विकास योजनाओं की डिलीवरी तेज और निर्बाध होगी। उन्होंने लिखा कि पश्चिम बंगाल के लोगों तक केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के पहुंचाया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषक इसे केंद्र और राज्य सरकार के बीच नए तालमेल का संकेत मान रहे हैं। शुभेंदु अधिकारी सरकार के बड़े फैसले पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari की अध्यक्षता में हुई पहली कैबिनेट बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। इनमें आयुष्मान भारत योजना लागू करने के अलावा सीमा सुरक्षा बल को बॉर्डर फेंसिंग के लिए जमीन उपलब्ध कराने का फैसला भी शामिल है। सरकार ने सरकारी नौकरियों के लिए आयु सीमा में पांच साल की छूट देने की घोषणा की है। इसके साथ ही राज्य में Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) लागू करने को भी मंजूरी दी गई। केंद्र की योजनाओं का रास्ता साफ नई सरकार ने कई केंद्रीय योजनाओं के कार्यान्वयन में आ रही बाधाओं को हटाने का भी फैसला किया है। इनमें PM Vishwakarma Yojana, Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana और Pradhan Mantri Ujjwala Yojana जैसी योजनाएं शामिल हैं। सरकार का दावा है कि इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों, श्रमिकों, कारीगरों और गरीब परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। आयुष्मान भारत लागू होना क्यों अहम माना जा रहा? विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत योजना लागू होना बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक बदलाव है। पिछले कई वर्षों से राज्य में यह योजना पूरी तरह लागू नहीं हो पाई थी। भाजपा ने विधानसभा चुनाव के दौरान इसे प्रमुख मुद्दा बनाया था और प्रधानमंत्री मोदी ने प्रचार के दौरान वादा किया था कि राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में ही आयुष्मान भारत को मंजूरी दी जाएगी। अब सरकार इसे अपनी बड़ी उपलब्धि और “डबल इंजन मॉडल” की शुरुआत के रूप में पेश कर रही है।
Suvendu Adhikari के मुख्यमंत्री बनते ही West Bengal में कानून-व्यवस्था और सीमा सुरक्षा को लेकर बड़े फैसलों का दौर शुरू हो गया है। अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में शुभेंदु सरकार ने गौ-तस्करी के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा कदम उठाया। सरकार ने Border Security Force (BSF) को बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी (Fencing) के लिए जमीन हस्तांतरण की मंजूरी दे दी है। सरकार का मानना है कि जब तक सीमा पूरी तरह सुरक्षित नहीं होगी, तब तक अंतरराष्ट्रीय गौ-तस्करी और घुसपैठ पर प्रभावी रोक लगाना मुश्किल रहेगा। गौ-तस्करी के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ कहा कि बंगाल में अब तस्करों और अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान सीमा पर बाड़बंदी का काम लंबे समय तक अटका रहा, जिसकी वजह से तस्करी का नेटवर्क मजबूत होता गया। अब सरकार का दावा है कि BSF को जमीन मिलने के बाद सीमा पर तेजी से बाड़ लगाने का काम पूरा किया जाएगा, जिससे तस्करी के प्रमुख रास्ते बंद हो सकेंगे। ‘नार्को-टेरर’ और तस्करी के गठजोड़ पर नजर राज्य सरकार का कहना है कि गौ-तस्करी से आने वाला पैसा सिर्फ अवैध कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सुरक्षा से जुड़े खतरे भी पैदा हो रहे हैं। इसी को देखते हुए गृह विभाग को निर्देश दिया गया है कि तस्करी में शामिल बड़े नेटवर्क और कथित सरगनाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए। सरकार इसे सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा मान रही है। सीमावर्ती जिलों पर खास फोकस कैबिनेट बैठक में सीमावर्ती जिलों में तेजी से बदलते जनसंख्या पैटर्न को भी गंभीर विषय बताया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा मजबूत करना राज्य की आंतरिक सुरक्षा के लिए जरूरी है। भूमि एवं राजस्व विभाग को निर्देश दिया गया है कि BSF को जमीन सौंपने की प्रक्रिया 45 दिनों के भीतर पूरी की जाए ताकि बाड़बंदी के काम में और देरी न हो। केंद्र के साथ संयुक्त अभियान की तैयारी राज्य सरकार अब केंद्र सरकार के साथ मिलकर संयुक्त अभियान (Joint Operation) चलाने की तैयारी में भी है। इसके तहत सीमा सुरक्षा, घुसपैठ रोकने और अवैध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने की रणनीति पर काम किया जाएगा। इसके अलावा जनगणना और केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों को तेजी से लागू करने का फैसला भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। राजनीतिक संदेश भी साफ भाजपा सरकार के इस फैसले को राजनीतिक तौर पर भी बड़ा संदेश माना जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने लगातार सीमा सुरक्षा, घुसपैठ और गौ-तस्करी को बड़ा मुद्दा बनाया था। अब सत्ता में आने के बाद सरकार ने पहली कैबिनेट में ही इस दिशा में बड़ा फैसला लेकर यह संकेत देने की कोशिश की है कि बंगाल में कानून-व्यवस्था और सीमा प्रबंधन को लेकर नई नीति अपनाई जाएगी।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में डायमंड हार्बर के 4 और मगरहाट पश्चिम के 11 बूथों पर दोबारा मतदान हो रहा है। वोटिंग सुबह से ही जारी है, जो शाम 6 बजे तक होगी। चुनाव आयोग ने इन बूथों पर EVM से छेड़छाड़ और झड़प की शिकायत के बाद फिर से वोटिंग कराने का फैसला लिया था। सभी बूथ दक्षिण 24 परगना जिले में आते हैं। बंगाल में इस बार रिकॉर्ड वोटिंग राज्य की सभी 294 सीटों पर रिकॉर्ड 92.84% वोटिंग हुई। 23 अप्रैल को फर्स्ट फेज की 152 सीटों पर 93.19% मतदान हुआ था। 29 अप्रैल को सेकेंड फेज की 142 सीटों पर 92.48% वोट पड़े। रिजल्ट 4 मई को आएंगे।
पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्द्धमान जिले के आसनसोल से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली एक शर्मनाक घटना सामने आई है। यहाँ केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के एक जवान को 10 साल की बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के प्रयास के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। लालच देकर जाल में फंसाया यह घटना रविवार दोपहर की है, जब लाल बाजार इलाके के पास दो छोटी बच्चियां (उम्र 5 और 10 वर्ष) कच्चे आम चुनने के लिए सरकारी क्वार्टरों की ओर गई थीं। आरोपी जवान, जिसकी पहचान रमाकांत विश्वकर्मा (40) के रूप में हुई है, ने बच्चियों को अधिक आम देने का प्रलोभन दिया। वह उन्हें अपनी स्कूटी पर बैठाकर एक सुनसान क्वार्टर में ले गया, जहाँ उसने बड़ी बच्ची के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। बच्ची की बहादुरी और लोगों का गुस्सा बच्ची द्वारा शोर मचाए जाने पर आरोपी घबराकर मौके से फरार हो गया। जैसे ही यह खबर स्थानीय निवासियों तक पहुँची, क्षेत्र में भारी जनाक्रोश फैल गया। न्याय की मांग को लेकर ग्रामीणों ने: शीतलपुर गेट नंबर 3 पर सड़क जाम कर दी। CISF कैंप के बाहर जोरदार प्रदर्शन कर तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। पुलिस की त्वरित कार्रवाई पीड़िता के पिता और स्थानीय प्रतिनिधियों द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने सक्रियता दिखाई। आरोपी जवान को कुछ ही घंटों के भीतर हिरासत में ले लिया गया। पुलिस के अनुसार: आरोपी के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आरोपी चुनाव ड्यूटी पर नहीं, बल्कि कोयला खदानों की सुरक्षा के नियमित कार्य में तैनात था। वर्तमान में स्थिति को देखते हुए पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और इलाके में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्कता बरती जा रही है।
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले से एक झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। शांति निकेतन थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले महिदापुर इलाके में, एक होम (आश्रय गृह) में रहने वाली नाबालिग बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया है। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की कर्मभूमि पर हुई इस दरिंदगी ने पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया है। "काकू, मैं आपकी बेटी जैसी हूं": पीड़िता की रुलाई अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच जूझ रही पीड़िता ने जो आपबीती सुनाई, वह किसी के भी रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है। पीड़िता के अनुसार, आरोपी वे लोग थे जिन्हें वह 'काकू' (चाचा) कहकर बुलाती थी और पिता समान मानती थी। नाबालिग ने बताया कि वह दरिंदों के सामने गिड़गिड़ाती रही और उनके पैर पकड़कर गुहार लगाती रही कि वह उनकी अपनी बेटी की तरह है। लेकिन उन हैवानों पर मासूम की चीखों का कोई असर नहीं हुआ; वे उसकी बेबसी का मजाक उड़ाते रहे और बारी-बारी से उसके साथ कुकर्म किया। प्रमुख घटनाक्रम और ग्रामीणों का आक्रोश आंदोलन की चेतावनी: घटना की खबर मिलते ही महिदापुर के ग्रामीण उग्र हो गए। उन्होंने शांति निकेतन थाने का घेराव किया और आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की। अल्टीमेटम: प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों के भीतर सभी अपराधियों को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे। अस्पताल में इलाज: पीड़िता की गंभीर शारीरिक और मानसिक स्थिति को देखते हुए उसे बोलपुर उप-मंडल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिसिया कार्रवाई की स्थिति मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच तेज कर दी गई है और संदिग्धों की पहचान भी कर ली गई है। हालांकि, ताजा जानकारी मिलने तक आधिकारिक रूप से किसी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। क्षेत्र में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। ग्रामीण इस बात से सबसे अधिक आहत हैं कि यह घटना विश्व भारती जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के निकट घटी है, जो शांति और संस्कृति का प्रतीक माना जाता है।
Narendra Modi 14 अप्रैल को West Bengal के भाजपा कार्यकर्ताओं से ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’ अभियान के तहत सीधा संवाद करेंगे। यह वर्चुअल कार्यक्रम दोपहर 4:30 बजे आयोजित होगा, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर संगठन को और मजबूत करना है। नमो ऐप से जुड़ने का मौका इस कार्यक्रम में जुड़ने के लिए NaMo App को मुख्य प्लेटफॉर्म बनाया गया है। कार्यकर्ता इस ऐप के जरिए: अपने सुझाव और विचार साझा कर सकते हैं भविष्य की रणनीति पर फीडबैक दे सकते हैं चुने गए प्रतिभागियों को PM से सीधे बात करने का मौका मिलेगा क्या है अभियान का मकसद? Bharatiya Janata Party (BJP) का मानना है कि बूथ स्तर का कार्यकर्ता ही चुनाव जीत का सबसे अहम कड़ी होता है। इस कार्यक्रम के जरिए: कार्यकर्ताओं में जोश भरना घर-घर जनसंपर्क की रणनीति समझाना केंद्र सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाना TMC के खिलाफ रणनीति बंगाल में Trinamool Congress (TMC) के खिलाफ बीजेपी अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है। पीएम मोदी कार्यकर्ताओं को बताएंगे: कैसे हर बूथ को मजबूत बनाया जाए चुनावी चुनौतियों और हिंसा के आरोपों के बीच संगठन को कैसे सक्रिय रखा जाए क्यों अहम है यह कार्यक्रम? पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच यह कार्यक्रम बीजेपी के लिए ग्राउंड लेवल स्ट्रेटजी को मजबूत करने का बड़ा प्रयास माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं से बड़ी संख्या में इस डिजिटल संवाद से जुड़ने की अपील की है।
Supreme Court of India आज West Bengal में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। यह मामला विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बेहद अहम माना जा रहा है। किस पीठ के सामने होगी सुनवाई? सुनवाई मुख्य न्यायाधीश Surya Kant और जस्टिस Joymalya Bagchi की पीठ के सामने होगी। 13 अप्रैल की कार्यसूची में इस मामले को सूचीबद्ध किया गया है। चुनाव आयोग पहले ही दे चुका है अंतिम सूची Election Commission of India ने 9 अप्रैल को पहले चरण के मतदान के लिए मतदाता सूची को अंतिम रूप दे दिया है। बंगाल में चुनाव: 23 और 29 अप्रैल मतगणना: 4 मई SIR और ‘स्थगन’ का मतलब क्या? मतदाता सूची के “स्थगन” का मतलब है कि अब इस चुनाव के लिए नई एंट्री नहीं की जा सकती। यानी जो नाम सूची में नहीं है, वह इस बार वोट नहीं डाल सकेगा। मालदा केस पर भी सुनवाई कोर्ट Malda में SIR प्रक्रिया के दौरान सात न्यायिक अधिकारियों के ‘घेराव’ मामले पर भी सुनवाई करेगा। इस मामले में पहले ही National Investigation Agency (NIA) को जांच सौंपने का आदेश दिया जा चुका है।
कोलकाता,एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में मतदाता सूची को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। गुरुवार सुबह पुराने मालदा ब्लॉक के मंगलबाड़ी इलाके में लोगों ने फिर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वैध दस्तावेज जमा करने के बावजूद उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। इसी मुद्दे पर नाराज लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-12 (NH-12) को एक बार फिर जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने टायरों में आग लगाई और बांस लगाकर सड़क अवरुद्ध कर दी। स्थिति को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल और केंद्रीय अर्धसैनिक बल (CAPF) की तैनाती की गई है। मालदा पुलिस, स्थानीय प्रशासन और खुफिया शाखा को अलर्ट पर रखा गया है। मालदा-मोथाबारी राज्य राजमार्ग और NH-12 के कई हिस्सों पर सुरक्षा चौकियां स्थापित की गई हैं। बुधवार को कालियाचक में हुए बवाल यह विरोध प्रदर्शन बुधवार को कालियाचक में हुए बवाल के बाद और तेज हो गया। बुधवार को भी लोगों ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया था। उस दौरान सात न्यायिक अधिकारियों को भी प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया था और करीब नौ घंटे तक बंधक बनाए रखा। बाद में जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में भारी पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने इस गंभीर घटना पर पश्चिम बंगाल पुलिस महानिदेशक से रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने खासतौर पर उन मामलों पर चिंता जताई है, जिनमें मतदाताओं को “तार्किक विसंगति” श्रेणी में रखकर उनके नाम सूची से हटाए गए। इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है, खासकर ऐसे समय में जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मालदा जिले के बैष्णवनगर में चुनावी रैली करने वाली हैं। अब यह मुद्दा सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप भी लेता दिख रहा है।
कोलकाता,एजेंसियां। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल के चर्चित कोयला तस्करी मामले में इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई हैदराबाद, बेंगलुरु और दिल्ली में की गई। बेंगलुरु में कंपनी के को-फाउंडर ऋषिराज सिंह के ठिकानों पर भी तलाशी ली गई। इससे पहले जनवरी में भी ED ने कोलकाता स्थित I-PAC कार्यालय और कंपनी के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर रेड की थी। क्या है पूरा मामला? ED की जांच 2020 में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। जांच एजेंसी के मुताबिक, ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज़ क्षेत्र से बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन और चोरी की जा रही थी। इसमें ECL, CISF, रेलवे और अन्य विभागों के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत होने का आरोप है। जांच में अनुप माजी को इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड बताया गया है। ED का दावा है कि अवैध कोयला खनन और तस्करी के जरिए करीब ₹2,742.32 करोड़ के कोयले की हेराफेरी हुई। एजेंसी के अनुसार, इस नेटवर्क से जुड़े कई लोगों ने अपराध से अर्जित रकम (POC) को अलग-अलग माध्यमों से आगे पहुंचाया। जांच में हवाला नेटवर्क के भी अहम सुराग मिले हैं। I-PAC का नाम कैसे जुड़ा? ED के मुताबिक, हवाला के जरिए करोड़ों रुपये के लेन-देन का संबंध I-PAC से सामने आया है। एजेंसी का दावा है कि कथित कोयला तस्करी से जुड़े करीब ₹20 करोड़ के हवाला फंड I-PAC तक पहुंचे। हालांकि, कंपनी ने सभी आरोपों पर कहा है कि उसने जांच में पूरा सहयोग दिया है और आगे भी कानून का सम्मान करते हुए सहयोग करती रहेगी।
पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुदुचेरी में चल रहे विधानसभा चुनावों के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनावी रैलियों से लेकर दल-बदल तक, कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। प्रियंका गांधी का हमला कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने असम के शिवसागर में रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और असम के मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “मोदी जी अमेरिका के गुलाम हैं… और असम के मुख्यमंत्री उनके गुलाम हैं।” प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार डर और दबाव की राजनीति कर रही है और इससे देश को नुकसान हो रहा है। ओवैसी का मुर्शिदाबाद में बयान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में सभा को संबोधित करते हुए कहा कि: अगर जनता का अपना नेता नहीं होगा, तो उनकी आवाज दबा दी जाएगी ममता बनर्जी और मोदी सरकार पर एक जैसी राजनीति करने का आरोप लगाया उन्होंने लोगों से अपनी “स्वतंत्र लीडरशिप” चुनने की अपील की। बड़ा राजनीतिक बदलाव वरिष्ठ वकील और आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता एच. एस. फूलका बुधवार को भाजपा में शामिल हो गए। फूलका 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के केस लड़ने के लिए जाने जाते हैं 2014 में AAP में शामिल हुए थे, 2019 में पार्टी छोड़ दी थी महाराष्ट्र उपचुनाव अपडेट भाजपा ने महाराष्ट्र के राहुरी विधानसभा उपचुनाव के लिए अक्षय शिवाजीराव कर्डिले को उम्मीदवार घोषित किया है अहम तारीखें: नामांकन की अंतिम तारीख:6 अप्रैल जांच:7 अप्रैल नाम वापसी:9 अप्रैल मतदान: 23 अप्रैल मतगणना: 4 मई यह सीट ग्रामीण और कृषि प्रधान है, जहां मराठा, ओबीसी, दलित और मुस्लिम वोटर अहम भूमिका निभाते हैं। चुनावी माहौल गरम देश के पांच राज्यों में चुनाव के बीच: नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज दल-बदल की राजनीति जारी क्षेत्रीय मुद्दों के साथ राष्ट्रीय मुद्दे भी हावी
कोलकाता, एजेंसियां। कोलकाता में शनिवार को राजनीतिक तनाव उस समय बढ़ गया जब राज्य की कैबिनेट मंत्री शशि पंजा के घर पर कथित हमला कर दिया गया। सत्तारूढ़ Trinamool Congress (TMC) ने इस घटना के लिए Bharatiya Janata Party (BJP) के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया है। हमले के दौरान कई TMC समर्थक घायल हो गए और मंत्री की कार में भी तोड़फोड़ की गई। घटना के बाद इलाके में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ईंट से हमला, मंत्री ने खुद बताया घटनाक्रम मंत्री शशि पांजा ने घटना के बाद कहा कि उन पर ईंट से हमला किया गया। उनके अनुसार, कुछ लोगों ने उनके घर के बाहर हंगामा करते हुए पत्थरबाजी की, जिससे वह घायल हो गईं। घटना में घर के बाहर खड़ी गाड़ी को भी नुकसान पहुंचाया गया।TMC नेताओं का आरोप है कि यह हमला राजनीतिक साजिश के तहत किया गया है और इसके पीछे BJP समर्थकों का हाथ है। हालांकि इस मामले में विपक्ष की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। गिरीश पार्क के पास हुई झड़प जानकारी के अनुसार, यह घटना गिरीश पार्क के पास हुई, जहां TMC और BJP समर्थकों के बीच झड़प की खबर सामने आई। यह इलाका शहर के प्रमुख मार्ग Central Avenue के आसपास स्थित है।प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच पहले नारेबाजी हुई और फिर स्थिति अचानक हिंसक हो गई। पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए मौके पर तैनात करना पड़ा। पीएम मोदी की रैली से पहले बढ़ा राजनीतिक माहौल इस घटना का समय भी राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि उसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कोलकाता दौरा प्रस्तावित था। प्रधानमंत्री शहर के ऐतिहासिक Brigade Parade Ground में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करने वाले हैं।इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से राज्य के लिए करीब 18,680 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं की शुरुआत भी की जानी है। कई क्षेत्रों में विकास योजनाओं की घोषणा प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान जिन परियोजनाओं की घोषणा की जानी है, उनमें मुख्य रूप से सड़क परिवहन, रेलवे, बंदरगाह और जहाजरानी से जुड़े विकास कार्य शामिल हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य राज्य में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और व्यापार व परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाना बताया जा रहा है। चुनावी माहौल में बढ़ी सियासी गर्मी राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में आने वाले समय में होने वाले चुनावों को देखते हुए राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। ऐसे में इस तरह की घटनाएं सियासी माहौल को और गर्म कर सकती हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।