West Bengal 7th Pay Commission: पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 7th Pay Commission से जुड़ी जानकारी जल्द एक ही जगह उपलब्ध हो सकती है। आयोग अपनी डेडिकेटेड वेबसाइट शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इस पोर्टल के जरिए आयोग से जुड़े नोटिफिकेशन, कामकाज और ताजा अपडेट की आधिकारिक जानकारी मिल सकेगी। कर्मचारी और पेंशनर्स अपनी राय, सुझाव और जरूरी दस्तावेज भी आयोग तक पहुंचा सकेंगे। वेबसाइट तैयार करने का फैसला नबन्ना में हुई आयोग की पहली बैठक में लिया गया है। पोर्टल के जल्द शुरू होने की उम्मीद है। वेबसाइट की जरूरत क्यों पड़ी? 7th Pay Commission से जुड़ी जानकारी को कर्मचारियों और पेंशनर्स तक सही तरीके से पहुंचाने के लिए अलग वेबसाइट तैयार की जा रही है। फिलहाल सोशल मीडिया पर वेतन, DA और पेंशन से जुड़े कई तरह के दावे और दस्तावेज सामने आते रहते हैं। अधिकारियों के मुताबिक आयोग अभी शुरुआती चरण में है। ऐसे में सोशल मीडिया या अन्य जगहों पर सामने आ रहे किसी भी कथित वेतन, DA या पेंशन प्रस्ताव को आधिकारिक फैसला नहीं माना जाना चाहिए। कर्मचारियों को अंतिम और प्रमाणिक जानकारी के लिए आयोग के आधिकारिक नोटिफिकेशन का इंतजार करना होगा। पोर्टल पर क्या-क्या जानकारी मिल सकती है? नई वेबसाइट के जरिए कर्मचारियों और पेंशनर्स को आयोग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी एक ही जगह मिलने की उम्मीद है। पोर्टल पर आयोग कर्मचारियों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव और जरूरी जानकारी भी मांग सकता है। वेबसाइट पर संभावित रूप से ये सुविधाएं उपलब्ध हो सकती हैं: आयोग के आधिकारिक नोटिफिकेशन और घोषणाएं आयोग के कामकाज से जुड़े अपडेट कर्मचारियों और पेंशनर्स से डेटा एवं सुझाव लेने की जानकारी मेमोरेंडम और सुझाव जमा करने की सुविधा Pay Review से संबंधित आधिकारिक जानकारी इससे कर्मचारियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि आयोग किन मुद्दों की समीक्षा कर रहा है और कौन-सी जानकारी अभी केवल चर्चा या प्रस्ताव के स्तर पर है। 7th Pay Commission में किन मुद्दों की होगी समीक्षा? आयोग का दायरा केवल बेसिक पे की समीक्षा तक सीमित नहीं है। कर्मचारियों के वेतन और अलग-अलग भत्तों से जुड़े कई मुद्दों पर भी विचार किया जाना है। मुद्दा समीक्षा से जुड़ा विषय बेसिक पे वेतन और Pay Structure DA महंगाई भत्ता स्पेशल अलाउंस विशेष भत्ते ट्रैवलिंग अलाउंस यात्रा भत्ता एनुअल इन्क्रीमेंट सालाना वेतन बढ़ोतरी हॉस्टल सब्सिडी हॉस्टल से जुड़ी सहायता ट्रांसपोर्ट अलाउंस परिवहन भत्ता हाउस रेंट अलाउंस मकान किराया भत्ता 3% इन्क्रीमेंट को 5% करने पर भी होगी समीक्षा? पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों को फिलहाल सालाना 3% इन्क्रीमेंट मिलता है। आयोग इस व्यवस्था की भी समीक्षा करेगा। इसमें यह मांग या प्रस्ताव भी चर्चा का हिस्सा हो सकता है कि सालाना इन्क्रीमेंट को बढ़ाकर 5% किया जाए। हालांकि, 3% से 5% इन्क्रीमेंट किए जाने की अभी कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल समीक्षा का विषय ही माना जाना चाहिए। आयोग में कौन-कौन शामिल हैं? पश्चिम बंगाल 7th Pay Commission की अध्यक्षता रिटायर्ड IAS अधिकारी अतनु चक्रवर्ती कर रहे हैं। आयोग के सदस्यों में Centre for Policy Research के सीनियर फेलो पार्थ मुखोपाध्याय और IIM Calcutta के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर पार्थप्रतिम पाल शामिल हैं। IAS अधिकारी देबिप्रसाद कर्णम आयोग के मेंबर-सेक्रेटरी हैं। फिलहाल कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए सबसे अहम बात यह है कि वेतन, DA या पेंशन में बदलाव से जुड़ी किसी भी जानकारी को आधिकारिक पुष्टि के बिना सही न मानें। वेबसाइट शुरू होने के बाद आयोग से जुड़े नोटिफिकेशन और अन्य अपडेट के लिए यह महत्वपूर्ण आधिकारिक माध्यम बन सकती है।
छापेमारी में भारी नकदी मिलने से हड़कंप, अवैध पत्थर कारोबार और वित्तीय लेन-देन की जांच तेज बीरभूम, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में पत्थर कारोबार से जुड़े एक व्यक्ति के रिश्तेदार के ठिकाने से करीब ₹28.5 करोड़ रुपये की नकदी बरामद होने का मामला सामने आया है। भारी मात्रा में कैश मिलने के बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं और बरामद रकम के स्रोत का पता लगाया जा रहा है। छापेमारी के दौरान मिली बड़ी रकम जांच एजेंसियों ने कथित तौर पर पत्थर कारोबार से जुड़े नेटवर्क की जांच के दौरान कार्रवाई की। इसी क्रम में एक ठिकाने पर तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी मिली। अधिकारियों ने बरामद रकम को जब्त कर आगे की जांच शुरू कर दी है। अवैध पत्थर कारोबार से कनेक्शन की जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि बरामद पैसा कहां से आया और क्या इसका संबंध अवैध पत्थर खनन, परिवहन या अन्य संदिग्ध गतिविधियों से है। संबंधित लोगों के बैंक खातों, संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज बीरभूम में अवैध खनन और पत्थर कारोबार को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं। इतनी बड़ी रकम बरामद होने के बाद इलाके में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल बढ़ गई है। जांच एजेंसियां सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई कर रही हैं। आगे की कार्रवाई पर नजर अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि बरामद राशि का वास्तविक स्रोत क्या है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं। फिलहाल मामले में पूछताछ और दस्तावेजों की जांच जारी है।
कोलकाता, एजेंसियां। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल की पूर्व सरकार की चक्रवात अम्फान राहत योजना को लेकर कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में राहत वितरण, नुकसान के आकलन और लाभार्थियों के चयन में गड़बड़ियों की ओर इशारा करते हुए व्यवस्था में सुधार के लिए कई सिफारिशें की गई हैं। राहत वितरण और भुगतान प्रक्रिया पर उठे सवाल रिपोर्ट के अनुसार, कई मामलों में चक्रवात से हुए नुकसान का आकलन बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। साथ ही लाभार्थियों की सूची में एक ही व्यक्ति के नाम की दोहराव, संदिग्ध भुगतान और राहत वितरण की निगरानी व्यवस्था में खामियां भी सामने आईं। CAG ने दी छह प्रमुख सिफारिशें सीएजी ने आपदा से हुए नुकसान का वैज्ञानिक आकलन, लाभार्थियों के चयन में पारदर्शिता, राहत राशि जारी करने से पहले रिकॉर्ड की अनिवार्य जांच, राहत सामग्री के भंडारण और वितरण की बेहतर निगरानी तथा संदिग्ध भुगतान की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जैसी छह प्रमुख सिफारिशें राज्य सरकार को दी हैं। नुकसान के दावों पर भी सवाल रिपोर्ट में कहा गया कि राज्य सरकार ने अम्फान के दौरान करीब 24 लाख मकानों के क्षतिग्रस्त होने का दावा करते हुए 18,000 करोड़ रुपये की सहायता मांगी थी। हालांकि, केंद्र की मूल्यांकन टीम को कई मामलों में दावों के अनुरूप नुकसान के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले, जिसके बाद नुकसान के आकलन में संशोधन किया गया। राज्य ने मांगे थे 35,018 करोड़, मंजूर हुए 2,707 करोड़ सीएजी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) से 35,018 करोड़ रुपये की सहायता की मांग की थी। केंद्र सरकार की जांच और मूल्यांकन के बाद 2,707 करोड़ रुपये की सहायता की सिफारिश की गई। सुधारों का होगा फील्ड वेरिफिकेशन प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल (ऑडिट-II) मनीष कुमार ने कहा कि राज्य सरकार ने सुधार लागू करने का दावा किया है, लेकिन सीएजी केवल दावों पर निर्भर नहीं रहेगा। ऑडिट टीम मौके पर जाकर यह सत्यापित करेगी कि सिफारिशों को वास्तव में लागू किया गया है या नहीं।
कोलकाता हाई कोर्ट ने मेडिकल छात्रा से कथित दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग और निजी तस्वीरों के दुरुपयोग से जुड़े मामले में सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने हुगली जिले की मगरा थाना पुलिस को निर्देश दिया है कि मामले के दोनों आरोपियों, जिनमें आईपीएल क्रिकेटर अभिषेक पोरेल भी शामिल हैं, को जल्द गिरफ्तार किया जाए। साथ ही कोर्ट ने आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तत्काल जब्त करने के आदेश दिए हैं ताकि कथित तौर पर पीड़िता की निजी तस्वीरों और वीडियो का आगे प्रसार रोका जा सके। कोर्ट ने पुलिस को मामले में अब तक हुई जांच और कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट 11 अगस्त 2026 तक प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। प्रेम संबंध का झांसा देकर शोषण का आरोप याचिकाकर्ता छात्रा का आरोप है कि उसे प्रेम संबंध का भरोसा देकर कथित रूप से यौन शोषण का शिकार बनाया गया। छात्रा का कहना है कि उसकी जानकारी और सहमति के बिना उसकी निजी तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड किए गए। आरोप है कि बाद में इन्हीं तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल कर उसे ब्लैकमेल किया गया और इंटरनेट पर वायरल करने की धमकी देकर मानसिक दबाव बनाया गया। इस संबंध में पहले ही मगरा थाने में प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने पर कोर्ट का जोर सुनवाई के दौरान पीड़िता की ओर से अदालत को बताया गया कि आरोपियों के मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरण अब तक जब्त नहीं किए गए हैं। वकीलों ने दलील दी कि यदि समय रहते इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद नहीं किए गए तो निजी सामग्री के दुरुपयोग और उसके इंटरनेट पर फैलने का खतरा बना रहेगा। याचिकाकर्ता की ओर से यह आशंका भी जताई गई कि इस तरह की घटना में अन्य महिलाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। इस संबंध में अदालत के समक्ष कुछ प्रारंभिक साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए। पुलिस को जांच तेज करने के निर्देश पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं और जांच आगे बढ़ रही है। इस पर हाई कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए तथा सभी आवश्यक डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित किया जाए। अदालत ने पुलिस से अब तक की गई कार्रवाई का विस्तृत विवरण अगली सुनवाई से पहले दाखिल करने को कहा है। 11 अगस्त को होगी अगली सुनवाई मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त 2026 को होगी। उस दिन हाई कोर्ट पुलिस द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट और अब तक की कार्रवाई की समीक्षा करेगा। यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। अदालत ने अभी आरोपों पर अंतिम निर्णय नहीं दिया है और आरोपियों का पक्ष भी सुनवाई के दौरान सामने आना बाकी है। इसलिए सभी आरोप इस समय न्यायिक परीक्षण के अधीन माने जाएंगे।
कोलकाता। रथ यात्रा के मद्देनजर पश्चिम बंगाल के आसनसोल और दुर्गापुर में यातायात व्यवस्था में व्यापक बदलाव किया गया है। श्रद्धालुओं की भीड़ और रथ यात्रा के सुचारु संचालन को देखते हुए प्रशासन ने कई प्रमुख सड़कों पर वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी है, जबकि कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है। पुलिस आयुक्त डॉ. प्रणव कुमार के निर्देश पर यह विशेष ट्रैफिक व्यवस्था गुरुवार सुबह 10 बजे से रथ यात्रा कार्यक्रम समाप्त होने तक प्रभावी रहेगी। प्रशासन ने लोगों से यात्रा पर निकलने से पहले वैकल्पिक मार्गों की जानकारी लेने की अपील की है। आसनसोल में इन प्रमुख मार्गों पर रहेगा प्रतिबंध आसनसोल साउथ थाना क्षेत्र में हटन रोड, इस्माइल मोड़, बुद्ध मोड़, नूरुद्दीन रोड, कालीपहाड़ी मोड़, आश्रम मोड़, पंपू तालाव मोड़, बीएनआर मोड़ और भगत सिंह मोड़ समेत कई महत्वपूर्ण स्थानों पर यातायात प्रतिबंध लागू रहेगा। बड़ी गाड़ियों को विभिन्न वैकल्पिक मार्गों जैसे जुबली मोड़, ऑफिसर्स क्लब, डीएस मोड़, जोगी बाबा मोड़, एचएलजी मोड़ और आसनसोल सिटी बस स्टैंड की ओर डायवर्ट किया जाएगा। हीरापुर क्षेत्र में भी रहेगा ट्रैफिक डायवर्जन हीरापुर थाना क्षेत्र में कोर्ट मोड़, विद्यासागर स्टैच्यू मोड़, गैलेक्सी मॉल मोड़, पोलो ग्राउंड, ध्रुबडांगाल रेल गेट और हाउसिंग मोड़ के बीच भी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध रहेगा। इन मार्गों पर आने वाले वाहनों को कोर्ट मोड़, बर्नपुर रोड और गैलेक्सी मॉल की ओर मोड़ने की व्यवस्था की गई है। रानीगंज में कई प्रवेश मार्ग बंद रानीगंज थाना क्षेत्र में पंजाबी मोड़, गिरजापाड़ा मोड़, मंगलपुर मोड़, टीबी हॉस्पिटल वॉटर टैंक, राजबाड़ी मोड़, अनाथ काली मंदिर और सियरसोल इलाके में भी विशेष ट्रैफिक व्यवस्था लागू रहेगी। राष्ट्रीय राजमार्ग-19 और बांकुरा की ओर से आने वाले वाहनों को निर्धारित वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाएगा, ताकि रथ यात्रा के दौरान यातायात बाधित न हो। दुर्गापुर में भी लागू रहेगा विशेष ट्रैफिक प्लान दुर्गापुर में बसुंधरा रोटरी, रघुनाथपुर मोड़, अकबर रोटरी, एनेक्स रोटरी, एलआईसी रोटरी, चित्रालय रोटरी, प्रांतिका मोड़ और भीरिंगी अंडरपास के आसपास यातायात में बदलाव किया गया है। इन मार्गों पर विशेष रूप से बड़ी बसों और भारी वाहनों को लिंक रोड तथा अन्य वैकल्पिक मार्गों से होकर गुजरने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की अपील पुलिस प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि रथ यात्रा के दौरान अनावश्यक रूप से प्रतिबंधित मार्गों पर जाने से बचें और ट्रैफिक पुलिस के निर्देशों का पालन करें। प्रशासन का कहना है कि इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और शहर में यातायात को सुचारु बनाए रखना है।
कोलकाता: बदलते मौसम और लगातार बढ़ती जलभराव की समस्या से निपटने के लिए कोलकाता नगर निगम (KMC) ने एक नई पहल शुरू की है। निगम शहर के 50 से अधिक जलजमाव प्रभावित इलाकों में विशेष भूमिगत जलाशय (अंडरग्राउंड रिजर्वायर) बना रहा है। इनका उद्देश्य बारिश के पानी को संग्रहित कर उसे फिल्टर करने के बाद भूजल स्तर को रिचार्ज करना है। 50 से अधिक इलाकों में शुरू हुआ काम नगर निगम के ड्रेनेज विभाग ने शहर के 50 से अधिक ऐसे क्षेत्रों की पहचान की है, जहां हर वर्ष मानसून के दौरान जलभराव की गंभीर समस्या होती है। इन स्थानों पर भूमिगत जलाशय तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें भारी बारिश के दौरान सड़कों पर जमा पानी एकत्र किया जाएगा। इसके बाद आधुनिक फिल्ट्रेशन प्रणाली से पानी को साफ कर पाइपलाइन के जरिए जमीन के भीतर भेजा जाएगा, जिससे भूजल स्तर बढ़ाने में मदद मिलेगी। दो समस्याओं का एक साथ समाधान नगर निगम का कहना है कि इस परियोजना से दो बड़े लाभ होंगे। पहला, बारिश के दौरान सड़कों पर जलभराव कम होगा और दूसरा, लगातार गिर रहे भूजल स्तर को दोबारा बढ़ाने में सहायता मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण कम समय में अत्यधिक बारिश हो रही है, जिससे शहर का पुराना ड्रेनेज सिस्टम पर्याप्त साबित नहीं हो रहा है। 70 से 90 मीटर की गहराई तक भेजा जाएगा पानी ड्रेनेज विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, फिल्टर किया गया बारिश का पानी विशेष पाइपों के माध्यम से जमीन के भीतर 70 से 90 मीटर की गहराई तक स्थित प्राकृतिक रेतीली परतों में पहुंचाया जाएगा। इससे केवल स्वच्छ पानी ही भूजल में जाएगा और जल स्रोतों का प्राकृतिक पुनर्भरण (रिचार्ज) होगा। क्यों जरूरी है यह परियोजना कोलकाता में हाल के वर्षों में कम समय में अत्यधिक वर्षा होने लगी है। कई बार शहर का ड्रेनेज नेटवर्क एक घंटे में जितना पानी निकाल सकता है, उससे कहीं अधिक पानी सड़कों पर जमा हो जाता है। इससे लंबे समय तक जलभराव बना रहता है और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। नगर निगम का मानना है कि नई परियोजना जलभराव की समस्या को पूरी तरह समाप्त नहीं करेगी, लेकिन इसकी गंभीरता को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी। सफल होने पर पूरे शहर में होगा विस्तार ड्रेनेज विभाग ने बताया कि फिलहाल इस योजना को 50 से 55 जलभराव वाले क्षेत्रों में लागू किया जा रहा है। परियोजना के परिणामों का आकलन करने के बाद इसे कोलकाता के अन्य संवेदनशील इलाकों में भी विस्तार दिया जाएगा। नगर निगम को उम्मीद है कि यह पहल न केवल मानसून के दौरान नागरिकों को राहत देगी, बल्कि भविष्य में शहर के जल संसाधनों को सुरक्षित रखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों और सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए भोजन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने मरीजों के भोजन पर होने वाला दैनिक खर्च लगभग दोगुना कर दिया है। वहीं, पीएम पोषण (मिड-डे मील) योजना के तहत प्राथमिक और प्री-प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों के भोजन की लागत भी बढ़ा दी गई है। नई दरें 1 अगस्त से लागू होंगी। मरीजों के भोजन पर अब 110 रुपये खर्च राज्य सरकार के नए आदेश के अनुसार, सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती मरीजों के दैनिक भोजन पर होने वाला खर्च 56.64 रुपये से बढ़ाकर 110 रुपये कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि बढ़ी हुई राशि से मरीजों को अधिक पौष्टिक, संतुलित और बेहतर गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। इस संबंध में सोमवार को स्वास्थ्य विभाग ने आधिकारिक निर्देश जारी किया। स्कूलों में मिड-डे मील के लिए 10 रुपये पीएम पोषण योजना के तहत प्री-प्राथमिक और प्राथमिक विद्यालयों में मिलने वाले मिड-डे मील की प्रति छात्र लागत भी बढ़ा दी गई है। पहले प्रति छात्र भोजन पर 6.78 रुपये खर्च किए जाते थे, जिसे अब बढ़ाकर 10 रुपये कर दिया गया है। बढ़ी हुई 3.22 रुपये की अतिरिक्त राशि राज्य सरकार अपने बजट से वहन करेगी। सरकार का कहना है कि महंगाई बढ़ने के कारण मौजूदा राशि में गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा था। 2017 के बाद पहली बार बढ़ीं दरें सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, भोजन पर होने वाले खर्च में आखिरी बार संशोधन वर्ष 2017 में किया गया था। लगभग नौ वर्ष बाद अब इन दरों में वृद्धि की गई है। सरकार का कहना है कि बदलती कीमतों और पोषण संबंधी जरूरतों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। सरकार ने बताया फैसले का उद्देश्य राज्य सरकार के मुताबिक, इस निर्णय का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराना और सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण मिड-डे मील सुनिश्चित करना है। सरकार का मानना है कि संतुलित और पौष्टिक भोजन मरीजों के जल्द स्वस्थ होने में मदद करेगा, जबकि बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए भी बेहतर पोषण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अहमदाबाद, एजेंसियां। गुजरात की राजधानी अहमदाबाद ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। अहमदाबाद नगर निगम ने मात्र एक घंटे में 3.61 लाख पौधे लगाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। यह मेगा वृक्षारोपण अभियान 12 जुलाई को शहर के भदाज क्षेत्र में आयोजित किया गया, जिसमें 25,000 से अधिक स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। मियावाकी तकनीक से लगाया गया मिनी जंगल इस अभियान में मियावाकी (Miyawaki) पद्धति का इस्तेमाल किया गया, जिसके तहत कम जगह में घने जंगल विकसित किए जाते हैं। लगभग 76,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में 35 देशी प्रजातियों के पौधे लगाए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में एक घने शहरी जंगल के रूप में विकसित होगा, जिससे जैव विविधता बढ़ेगी और शहर का हरित क्षेत्र मजबूत होगा। 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से प्रेरित पहल यह वृक्षारोपण अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "एक पेड़ मां के नाम" अभियान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की "हरियाली लोकसभा" पहल के तहत आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अमित शाह, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इस अभियान का लक्ष्य गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हरित आवरण बढ़ाना है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम अहमदाबाद नगर निगम ने कहा कि यह रिकॉर्ड केवल संख्या का नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी का प्रतीक है। अभियान के तहत लगाए गए पौधे भविष्य में कार्बन उत्सर्जन कम करने, तापमान नियंत्रित रखने, जैव विविधता बढ़ाने और शहर को अधिक हरित एवं स्वच्छ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों की घोषणा की है। सरकार ने फैसला किया है कि अब सरकारी स्कूलों की परिचालन (मैनेजिंग) समितियों में राजनीतिक नेताओं को जगह नहीं दी जाएगी। उनकी जगह छात्रों के अभिभावकों को शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही राज्य के 81 हजार स्कूलों के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने और निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर सख्त निगरानी रखने की भी योजना बनाई गई है। शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी राज्य सरकार ने सोमवार को विकास भवन में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों की इसमें समान जिम्मेदारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य को लंबित केंद्रीय अनुदान की राशि अगले सप्ताह तक मिल जाएगी। 81 हजार स्कूलों का होगा कायाकल्प मुख्यमंत्री ने बताया कि 1 अगस्त से राज्य के 81 हजार सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के विकास का अभियान शुरू किया जाएगा। इसके तहत स्कूलों में- स्वच्छ शौचालय बनाए जाएंगे। आर्सेनिक मुक्त पेयजल की व्यवस्था होगी। छात्राओं के लिए सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें लगाई जाएंगी। मिड-डे मील की गुणवत्ता और पोषण स्तर में सुधार किया जाएगा। निजी स्कूलों की फीस पर रहेगी नजर सरकार ने निजी स्कूलों और विश्वविद्यालयों द्वारा फीस में लगातार बढ़ोतरी पर भी सख्त रुख अपनाने का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन निजी शिक्षण संस्थानों को एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) दिया गया है, उनके कामकाज की नियमित समीक्षा होगी। यदि कोई संस्थान निर्धारित नियमों का पालन नहीं करता है तो उसकी मान्यता या एनओसी के नवीनीकरण पर पुनर्विचार किया जाएगा। स्कूल समितियों में अब नहीं होंगे नेता सरकार ने स्कूलों की परिचालन समितियों की संरचना में भी बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत- परिचालन समितियों में किसी भी राजनीतिक नेता को शामिल नहीं किया जाएगा। छात्रों के अभिभावकों को समिति में प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। स्कूल के प्रशासक को ही समिति का मुख्य अधिकारी बनाया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे स्कूलों के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। नियुक्तियों को लेकर भी सरकार का दावा मुख्यमंत्री ने शिक्षकों की नियुक्ति में हो रही देरी पर कहा कि ओबीसी आरक्षण से जुड़े विवाद को दूर करने के लिए सरकार जल्द ही विधानसभा में नया कानून लाएगी। उन्होंने बताया कि नियुक्ति बोर्ड के नए अध्यक्ष दुष्मंत नरियाल ने सोमवार को पदभार संभाल लिया है और आगे की भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से संचालित की जाएगी। सरकार का दावा है कि लंबित नियुक्तियों की प्रक्रिया जल्द तेज होगी।
कोलकाता: कोलकाता मेट्रो की जोका-एस्प्लेनेड (पर्पल लाइन) परियोजना में बड़ी सफलता मिली है। टनल बोरिंग मशीन (TBM) 'दुर्गा' ने खिदिरपुर से विक्टोरिया मेट्रो स्टेशन तक 1.7 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग की खुदाई सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इसे परियोजना का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। एक साल पहले शुरू हुआ था अभियान मेट्रो अधिकारियों के अनुसार, टीबीएम 'दुर्गा' ने 10 जुलाई 2025 को खिदिरपुर स्थित सेंट थॉमस स्कूल परिसर में बने शाफ्ट से सुरंग खोदने का काम शुरू किया था। लगभग एक वर्ष की लगातार मेहनत के बाद मशीन अब विक्टोरिया मेट्रो स्टेशन तक पहुंच गई है। अधिकारियों ने बताया कि मशीन निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद सुरंग से बाहर निकलेगी और अगले चरण के लिए तैयार की जाएगी। अब पार्क स्ट्रीट की ओर बढ़ेगी खुदाई विक्टोरिया स्टेशन तक सुरंग पूरी करने के बाद टीबीएम 'दुर्गा' और दूसरी मशीन 'दिव्या' अब पार्क स्ट्रीट की दिशा में सुरंग निर्माण का कार्य आगे बढ़ाएंगी। खिदिरपुर से पार्क स्ट्रीट तक लगभग 2.65 किलोमीटर लंबी जुड़वां सुरंग तैयार की जा रही है, जो पर्पल लाइन परियोजना का अहम हिस्सा है। दिसंबर 2026 तक पूरा होने का लक्ष्य मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक, टीबीएम 'दुर्गा' से सुरंग निर्माण का कार्य दिसंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है, जबकि दूसरी मशीन 'दिव्या' मार्च 2027 तक अपना काम पूरा कर सकती है। अत्याधुनिक तकनीक से हो रही खुदाई टीबीएम 'दुर्गा' एक अर्थ प्रेशर बैलेंस (EPB) तकनीक वाली आधुनिक टनल बोरिंग मशीन है। यह करीब 95 मीटर लंबी, 600 टन वजनी है और इसका बाहरी व्यास 6.63 मीटर है। मेट्रो अधिकारियों के अनुसार, यह नई पीढ़ी की मशीन अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीकों से लैस है और लगभग 80 मिलीमीटर प्रति मिनट की गति से सुरंग की खुदाई करने में सक्षम है। पर्पल लाइन से मिलेगा बेहतर कनेक्टिविटी जोका-एस्प्लेनेड पर्पल लाइन कोलकाता मेट्रो की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल है। इसके पूरा होने के बाद दक्षिण कोलकाता के क्षेत्रों को शहर के प्रमुख व्यावसायिक और प्रशासनिक इलाकों से बेहतर और तेज़ कनेक्टिविटी मिलेगी। अधिकारियों का मानना है कि परियोजना पूरी होने पर लाखों यात्रियों को यातायात में बड़ी राहत मिलेगी।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के चर्चित शिक्षक वरुण विश्वास हत्याकांड में 14 साल बाद जांच ने नया मोड़ ले लिया है। उत्तर 24 परगना के गोबरडांगा निवासी और सुतिया सामूहिक दुष्कर्म कांड के मुख्य गवाह रहे वरुण विश्वास की हत्या की जांच दोबारा शुरू कर दी गई है। गुरुवार को सीआईडी की टीम उनके घर पहुंची और परिवार के सदस्यों से लंबी पूछताछ कर बयान दर्ज किए। परिवार की मांग पर दोबारा शुरू हुई जांच वरुण विश्वास के परिवार ने हाल ही में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। परिवार का कहना था कि पिछले 14 वर्षों में मामले की सही तरीके से जांच नहीं हुई। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद सीआईडी ने दोबारा जांच शुरू कर दी है। परिवार ने लगाया गंभीर आरोप वरुण विश्वास के परिवार ने आरोप लगाया है कि उनकी हत्या एक सुनियोजित साजिश थी। परिवार का दावा है कि इस मामले में तत्कालीन हाबरा विधायक और पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। वरुण के बड़े भाई असित विश्वास ने कहा कि वर्षों तक उन्हें न्याय नहीं मिला और कई बार दबाव तथा धमकियों का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई जांच में वास्तविक दोषियों का पता चल सकेगा। 2012 में हुई थी गोली मारकर हत्या 5 जुलाई 2012 को गोबरडांगा रेलवे स्टेशन के पास 38 वर्षीय शिक्षक वरुण विश्वास की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। वरुण विश्वास उत्तर 24 परगना के सुतिया क्षेत्र में हुए चर्चित सामूहिक दुष्कर्म कांड के खिलाफ आवाज उठाने वाले प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं में शामिल थे। वे पीड़ितों को न्याय दिलाने के अभियान का अहम चेहरा बनकर उभरे थे। सीआईडी ने जुटाए नए साक्ष्य सीआईडी अधिकारियों ने परिवार से घटना से जुड़े कई पहलुओं पर जानकारी ली और पुराने दस्तावेजों व बयानों की भी समीक्षा शुरू कर दी है। जांच एजेंसी अब नए सिरे से पूरे मामले की पड़ताल करेगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। परिवार को न्याय की उम्मीद परिवार का कहना है कि 14 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद उन्हें उम्मीद जगी है कि इस बार निष्पक्ष जांच होगी और हत्या के पीछे शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें कानून के कटघरे में लाया जाएगा। यह मामला एक बार फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति और कानून-व्यवस्था के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कोलकाता पुलिस ने दो प्रमुख पुलिस थानों की कमान महिला अधिकारियों को सौंपी है। लंबे अंतराल के बाद मुख्य पुलिस थानों में महिला थाना प्रभारियों (ओसी) की नियुक्ति की गई है। इसे कोलकाता पुलिस के प्रशासनिक ढांचे में एक अहम बदलाव माना जा रहा है। दो प्रमुख थानों में महिला ओसी की नियुक्ति हालिया प्रशासनिक फेरबदल के तहत सरशुना पुलिस स्टेशन की नई प्रभारी रूपा सिंह को बनाया गया है। इससे पहले वह टॉलीगंज महिला पुलिस स्टेशन की प्रभारी थीं। वहीं सिंथी पुलिस स्टेशन की कमान चमेली मुखर्जी को सौंपी गई है। इससे पहले वह उल्टाडांगा महिला पुलिस स्टेशन में ओसी के रूप में कार्यरत थीं। 26 साल बाद मुख्य थानों में महिला नेतृत्व कोलकाता पुलिस के मुख्य पुलिस थानों में महिला अधिकारियों की नियुक्ति लंबे समय बाद हुई है। पिछले कई वर्षों से महिला अधिकारियों को मुख्य रूप से महिला पुलिस थानों तक ही सीमित रखा गया था। पुलिस विभाग के इस फैसले को महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बड़े पैमाने पर हुआ तबादला कोलकाता पुलिस आयुक्त के निर्देश पर गुरुवार को शहर के 33 पुलिस थानों के निरीक्षक स्तर के अधिकारियों का तबादला किया गया। इसी प्रशासनिक फेरबदल के दौरान दो मुख्य थानों की जिम्मेदारी महिला अधिकारियों को सौंपी गई। महिला सुरक्षा पर सरकार का जोर राज्य सरकार ने हाल के वर्षों में महिला सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। कोलकाता पुलिस के विभिन्न थानों में महिला सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां महिलाओं से जुड़े मामलों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इसके अलावा महिला अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि वे संवेदनशील मामलों का प्रभावी ढंग से निपटारा कर सकें। महिला सशक्तिकरण का संदेश पुलिस विभाग का मानना है कि मुख्य पुलिस थानों में महिला अधिकारियों की नियुक्ति से प्रशासनिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और पुलिस बल में नेतृत्व के नए अवसर खुलेंगे। साथ ही, इससे महिला सुरक्षा और जनविश्वास को भी मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
बिधाननगर नगर परिषद के मेयर देबराज चक्रवर्ती से जुड़े कथित जबरन वसूली मामले में पुलिस ने दो करीबी सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। दोनों को आज अदालत में पेश किया जाएगा। देबराज चक्रवर्ती मामले में जांच ने पकड़ी रफ्तार पश्चिम बंगाल में बिधाननगर नगर परिषद के मेयर और पूर्व विधायक अदिति मुंशी के पति देबराज चक्रवर्ती से जुड़े कथित जबरन वसूली मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। देबराज चक्रवर्ती की गिरफ्तारी के बाद गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अब उनके दो करीबी सहयोगियों को भी हिरासत में लिया है। पुलिस को उम्मीद है कि इनसे पूछताछ में मामले से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। दो करीबी सहयोगी गिरफ्तार बागुइआटी थाना पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस से जुड़े अमर नस्कर और कल्याण मुखर्जी को गिरफ्तार किया है। दोनों को लंबे समय से देबराज चक्रवर्ती और पार्षद समरेश चक्रवर्ती का करीबी माना जाता है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ जबरन वसूली, धोखाधड़ी, जमीन कब्जाने, जान से मारने की धमकी और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। दोनों आरोपियों को बुधवार को अदालत में पेश किया जाएगा। जमीन कब्जाने और धमकी देने का आरोप शिकायतकर्ता शुभोजीत नस्कर ने आरोप लगाया है कि रघुनाथपुर इलाके में उनकी 33 कट्ठा जमीन है, जिसके विकास के लिए उन्होंने वर्ष 2022 में एक प्रमोटर के साथ समझौता किया था। आरोप है कि इसके बाद अमर नस्कर, अमित चक्रवर्ती और कल्याण मुखर्जी वहां पहुंचे और निर्माण कार्य रोकने के साथ उन्हें धमकाया। शिकायतकर्ता का कहना है कि उनके साथ मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी भी दी गई। पुलिस पर भी लगाए गंभीर आरोप शुभोजीत नस्कर का आरोप है कि घटना के बाद जब वह शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे तो उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा उनके खिलाफ ही मामला दर्ज कर लिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें इलाके में निर्माण कार्य करने के लिए एक खास समूह से ही निर्माण सामग्री खरीदने का दबाव बनाया गया। नई शिकायत के बाद हुई कार्रवाई शुभोजीत नस्कर ने हाल ही में बागुइआटी थाने में देबराज चक्रवर्ती, समरेश चक्रवर्ती, अमर नस्कर, अमित चक्रवर्ती और कल्याण मुखर्जी के खिलाफ नई लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की और देर रात अमर नस्कर तथा कल्याण मुखर्जी को गिरफ्तार कर लिया। SIT की जांच पर नजर देबराज चक्रवर्ती की गिरफ्तारी के बाद गठित एसआईटी पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर कथित जबरन वसूली, जमीन कब्जाने और अन्य आरोपों से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
पुरुलिया: पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के एक स्कूल में धार्मिक प्रतीकों को लेकर विवाद सामने आया है। आरोप है कि 11वीं की एक छात्रा के तुलसी की माला पहनने और माथे पर तिलक लगाने पर स्कूल प्रबंधन ने आपत्ति जताई और बाद में उसे ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) भेज दिया। हालांकि, स्कूल प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज किया है। परिवार ने लगाए गंभीर आरोप छात्रा के परिवार का कहना है कि वह नियमित रूप से तुलसी की माला पहनकर और माथे पर तिलक लगाकर स्कूल जाती थी। इसी बात पर स्कूल अधिकारियों ने आपत्ति जताई और परिवार को स्कूल बुलाया गया। परिजनों का आरोप है कि बातचीत के बाद भी कोई समाधान नहीं निकला और अगले ही दिन छात्रा का ट्रांसफर सर्टिफिकेट व्हाट्सऐप के जरिए भेज दिया गया। परिवार ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिक्षिका पर भी लगाए आरोप छात्रा की मां का आरोप है कि एक शिक्षिका बार-बार उनकी बेटी की तुलसी की माला और तिलक पर आपत्ति जताती थीं तथा माला नहीं पहनने की सलाह देती थीं। स्कूल प्रबंधन ने आरोपों से किया इनकार स्कूल प्रशासन ने कहा कि छात्रा को अब तक आधिकारिक रूप से ट्रांसफर सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया है। प्रबंधन का दावा है कि तुलसी की माला पहनने पर कोई प्रतिबंध नहीं है और किसी छात्र को धार्मिक प्रतीकों के कारण निशाना नहीं बनाया गया। स्कूल का कहना है कि मामला केवल विद्यालय के अनुशासन और नियमों के पालन से जुड़ा है तथा सभी छात्रों पर समान नियम लागू होते हैं। पुलिस कर रही है जांच छात्रा के परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि विवाद धार्मिक प्रतीकों को लेकर था या स्कूल के अनुशासन से जुड़े किसी अन्य मुद्दे के कारण उत्पन्न हुआ। जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
हरिद्वार: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और एसआईटी जांच के बाद सामने आए खुलासों के बीच अब देश के अन्य प्रमुख मंदिरों ने भी सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी क्रम में हरिद्वार के प्रसिद्ध मां मनसा देवी मंदिर प्रबंधन ने पुजारियों के लिए बिना जेब वाले कुर्ते पहनना अनिवार्य कर दिया है। चढ़ावे में पारदर्शिता के लिए नई व्यवस्था मंदिर प्रबंधन का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य चढ़ावे के प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करना और किसी भी तरह की अनियमितता की आशंका को खत्म करना है। अब ड्यूटी के दौरान कोई भी पुजारी जेब वाला कुर्ता नहीं पहन सकेगा। महंत रवींद्र पुरी ने बताई वजह मंदिर के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा, "आजकल मंदिरों को बदनाम करने की कोशिशें हो रही हैं। इसलिए हमने एक विशेष समिति बनाई है। कोई भी पुजारी चढ़ावा अपनी जेब में नहीं रखेगा। मंदिर में आने वाला हर दान जनकल्याण के कार्यों में उपयोग होगा। इसी उद्देश्य से पुजारियों के लिए बिना जेब वाले कुर्ते अनिवार्य किए गए हैं।" चढ़ावे की निगरानी करेगी 7 सदस्यीय समिति मंदिर ट्रस्ट ने चढ़ावे की निगरानी के लिए सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति दान और चढ़ावे की नियमित निगरानी करेगी तथा पूरे सिस्टम की समीक्षा करेगी। गड़बड़ी मिलने पर होगी सख्त कार्रवाई मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान किसी भी स्तर पर चढ़ावे में हेरफेर, गबन या अन्य अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित पुजारी या कर्मचारी के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद यह फैसला देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में दान प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हावड़ा: पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के बालुहाटी इलाके में स्थित इंडियन ऑयल के एक स्टेशन पर गैस रिसाव की घटना से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। समय रहते अधिकारियों की कार्रवाई से स्थिति पर काबू पा लिया गया और बड़ा हादसा टल गया। वाल्व खुलने से शुरू हुआ गैस रिसाव प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गैस पाइपलाइन का वाल्व अचानक खुल जाने से तेज दबाव के साथ गैस का रिसाव शुरू हो गया। रिसाव इतना तेज था कि गैस ऊंचाई तक निकलती हुई दिखाई दे रही थी, जिससे आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस और अधिकारी स्थानीय लोगों ने तुरंत घटना की सूचना प्रशासन और इंडियन ऑयल के अधिकारियों को दी। सूचना मिलते ही डोमजूर थाना पुलिस और इंडियन ऑयल की तकनीकी टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने तत्काल गैस पाइपलाइन का वाल्व बंद कर रिसाव पर नियंत्रण पा लिया। कुछ देर तक बना रहा अफरा-तफरी का माहौल गैस रिसाव के कारण कुछ समय तक स्टेशन परिसर और आसपास के इलाके में अफरा-तफरी का माहौल रहा। हालांकि, समय पर कार्रवाई होने से किसी तरह की जनहानि या बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। अधिकारियों ने कहा- स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में इंडियन ऑयल और प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि गैस रिसाव पूरी तरह रोक दिया गया है और स्थिति अब सामान्य है। उन्होंने कहा कि फिलहाल लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है और पूरे क्षेत्र की निगरानी की जा रही है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भाजपा ने अभी तक अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, लेकिन नंदीग्राम के कई इलाकों में भाजपा नेता मेघनाथ पाल के समर्थन में पोस्टर लगाए जाने के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। पोस्टरों से बढ़ी सियासी अटकलें इलाके में लगाए गए पोस्टरों में लिखा गया है कि नंदीग्राम की जनता मेघनाथ पाल को अपना विधायक देखना चाहती है। पोस्टरों में "मजबूत और विकसित नंदीग्राम" के निर्माण के लिए उन्हें समर्थन देने की अपील भी की गई है। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये पोस्टर किसने लगाए हैं। पहले अंजन भारती का नाम भी आया था सामने इससे पहले भाजपा नेता अंजन भारती का नाम भी संभावित उम्मीदवार के रूप में सोशल मीडिया पर चर्चा में था। लगातार सामने आ रहे नामों के बीच उम्मीदवार को लेकर अटकलों का दौर जारी है। भाजपा ने दी सफाई पोस्टरों को लेकर भाजपा ने आधिकारिक तौर पर किसी भी उम्मीदवार के नाम की पुष्टि से इनकार किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि भाजपा एक अनुशासित संगठन है और नंदीग्राम उपचुनाव के उम्मीदवार का अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व करेगा। भाजपा का कहना है कि संभव है कुछ उत्साही कार्यकर्ताओं ने अपने स्तर पर ये पोस्टर लगाए हों, लेकिन इन्हें पार्टी का आधिकारिक फैसला नहीं माना जाना चाहिए। उम्मीदवार के ऐलान का इंतजार फिलहाल नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर सभी दल अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं। भाजपा की ओर से उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपियों में से एक को मुठभेड़ में मार गिराया। पुलिस के अनुसार, आरोपी को घटना से जुड़े सबूतों की बरामदगी के लिए एक सुनसान इलाके में ले जाया गया था। इसी दौरान उसने पुलिस की गिरफ्त से भागने और पुलिसकर्मियों पर हमला करने की कोशिश की। आत्मरक्षा में पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में आरोपी गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इस जघन्य घटना ने पूरे इलाके में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। इससे पहले पुलिस ने मामले में आनंद सरदार, प्रभास मंडल और दिवाकर सरदार समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और सभी पहलुओं की गहन पड़ताल की जा रही है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पीड़िता के परिवार से मुलाकात की मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को बारुईपुर पहुंचकर पीड़िता के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें त्वरित एवं निष्पक्ष न्याय का भरोसा दिलाया। इस दौरान राज्य के पुलिस महानिदेशक सिद्धनाथ गुप्ता भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। क्या है मामला? यह मामला तब सामने आया जब शनिवार को लापता हुई बच्ची का शव रविवार सुबह रेलवे लाइन के पास एक तालाब से बरामद हुआ। शव मिलने के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने एक युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। मुख्यमंत्री ने मॉब लिंचिंग में जान गंवाने वाले युवक के परिजनों से भी मुलाकात कर सांत्वना दी। इस बीच स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि बच्ची के लापता होने की सूचना मिलने के बावजूद पुलिस ने समय पर कार्रवाई नहीं की। इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस महानिदेशक ने स्पष्ट किया है कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ पुलिस की कथित लापरवाही की भी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। फिलहाल इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के बरुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या की घटना को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। घटना के विरोध में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी सोमवार को कोलकाता की सड़कों पर कैंडल मार्च निकालते हुए नजर आईं। इस दौरान उन्होंने पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की और राज्य की भाजपा सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा में विफल रहने का आरोप लगाया। कैंडल मार्च निकालकर जताया विरोध ममता बनर्जी ने कालीघाट से सांसदों, विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला। उन्होंने कहा कि यह मार्च बरुईपुर की पीड़िता को श्रद्धांजलि देने और आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग के लिए आयोजित किया गया। मार्च के दौरान उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध चिंता का विषय हैं और दोषियों को जल्द से जल्द सख्त सजा मिलनी चाहिए। "पीड़ित परिवार से मिलने नहीं जाने दिया" फेसबुक पर साझा किए गए अपने संदेश में ममता बनर्जी ने कहा कि घटना की जानकारी मिलने के बाद वह पीड़िता के परिवार से मिलने बरुईपुर जाना चाहती थीं, लेकिन उन्हें घर से बाहर निकलने से रोक दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद उन्होंने फोन पर पीड़िता के परिजनों से बात कर उन्हें हरसंभव मदद और न्याय दिलाने का भरोसा दिया। भाजपा सरकार पर लगाए गंभीर आरोप ममता बनर्जी ने दावा किया कि कैंडल मार्च के दौरान भी पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए इसकी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में महिलाओं के खिलाफ हिंसा, उत्पीड़न और अपराध की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है तथा सरकार महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक पीड़िता को न्याय नहीं मिल जाता और दोषियों को कानून के तहत कड़ी सजा नहीं मिलती। त्वरित न्याय की मांग टीएमसी प्रमुख ने मांग की कि मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक अदालत में कराई जाए और दोषियों को जल्द से जल्द सख्त सजा दी जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके। पुराने बयानों को लेकर भी चर्चा बरुईपुर घटना के बीच ममता बनर्जी के पुराने बयान भी एक बार फिर चर्चा में हैं। वर्ष 2012 के कटवा सामूहिक दुष्कर्म मामले और 2022 के हंसखाली प्रकरण में दिए गए उनके बयानों को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। विपक्ष का आरोप है कि उन मामलों में उन्होंने शुरुआती चरण में घटनाओं को लेकर अलग रुख अपनाया था, जबकि टीएमसी का कहना है कि वर्तमान मामले में पार्टी पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मामले की जांच जारी बरुईपुर में हुई इस वारदात की जांच पुलिस कर रही है। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के हिंगलगंज क्षेत्र में कालिंदी नदी के तटबंध (बांध) का करीब 300 फुट हिस्सा धंस जाने से आसपास के गांवों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। घटना के बाद साहेबखाली और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि बांध और कमजोर हुआ तो नदी का पानी गांवों, कृषि भूमि और मछली पालन के तालाबों में घुस सकता है। साहेबखाली इलाके में बढ़ी लोगों की चिंता स्थानीय लोगों के मुताबिक, कालिंदी नदी का यह तटबंध पहले से ही कमजोर स्थिति में था। लगातार कटाव और बारिश के बीच अचानक करीब 300 फुट हिस्से में धंसाव होने से हालात गंभीर हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं की गई तो बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है। लोगों ने प्रशासन से तत्काल सुरक्षा उपाय करने की मांग की है ताकि संभावित बाढ़ से जान-माल की रक्षा की जा सके। आयला और अम्फान जैसी तबाही का डर ग्रामीणों ने वर्ष 2009 के चक्रवात आयला और 2020 के चक्रवात अम्फान को याद करते हुए कहा कि उन आपदाओं के दौरान भी तटबंध टूटने से भारी नुकसान हुआ था। उनका कहना है कि अस्थायी मरम्मत की बजाय कालिंदी नदी के किनारे स्थायी कंक्रीट तटबंध बनाया जाए, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। प्रशासन ने सिंचाई विभाग को किया अलर्ट हिंगलगंज के बीडीओ देवदास गंगोपाध्याय ने बताया कि तटबंध धंसने की सूचना मिलते ही सिंचाई विभाग को अवगत करा दिया गया है। विभाग की टीम आवश्यक कदम उठाने की तैयारी में जुटी है और प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्हें मौके से प्रारंभिक रिपोर्ट मिली है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आवश्यकता पड़ने पर आपदा प्रबंधन टीम भी भेजी जाएगी। मरम्मत कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद प्रशासन का कहना है कि प्रभावित हिस्से की तकनीकी जांच के बाद मरम्मत कार्य शुरू किया जाएगा। साथ ही नदी के जलस्तर और तटबंध की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि मानसून के दौरान तटबंध की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, क्योंकि थोड़ी भी लापरवाही आसपास के गांवों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद रेलवे ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में शनिवार देर रात कोलकाता के पार्क सर्कस रेलवे स्टेशन पर व्यापक बुलडोजर कार्रवाई की गई। रेलवे प्रशासन ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच स्टेशन परिसर में बनी अवैध दुकानों और अतिक्रमणों को हटाया। रातभर चला अतिक्रमण हटाने का अभियान रेलवे अधिकारियों के अनुसार, अभियान शनिवार रात करीब 10:30 बजे शुरू हुआ और रविवार सुबह तक जारी रहा। कार्रवाई के दौरान स्टेशन परिसर को पूरी तरह पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने घेर लिया, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके। चेतावनी के बाद चला बुलडोजर रेलवे प्रशासन ने बताया कि कार्रवाई से पहले माइक के माध्यम से अतिक्रमणकारियों और दुकानदारों को रेलवे भूमि खाली करने की अंतिम चेतावनी दी गई। लेकिन जब किसी ने स्वयं दुकानें नहीं हटाईं, तब बुलडोजर की मदद से एक-एक कर सभी अवैध ढांचों को ध्वस्त कर दिया गया। पहले ही जारी किए गए थे नोटिस रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, जून की शुरुआत में ही पार्क सर्कस स्टेशन पर अवैध रूप से दुकानें चलाने वाले फेरीवालों और व्यापारियों को नोटिस जारी कर दिया गया था। इसके बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। पार्क सर्कस स्टेशन पर लंबे समय से था अतिक्रमण पार्क सर्कस स्टेशन को सियालदह मंडल के सबसे अधिक अतिक्रमण वाले स्टेशनों में गिना जाता है। रेलवे का कहना है कि वर्षों से स्टेशन परिसर में बड़ी संख्या में अवैध दुकानें संचालित हो रही थीं, जिससे यात्रियों की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। अन्य स्टेशनों पर भी जारी रहेगा अभियान रेलवे प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि अतिक्रमण हटाने का अभियान केवल पार्क सर्कस तक सीमित नहीं रहेगा। हावड़ा, सियालदह, दमदम समेत कई प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर भी अवैध कब्जों के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। रेलवे का कहना है कि यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और स्टेशन परिसरों को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए यह अभियान आगे भी चलता रहेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।