West Bengal News

Railway removes illegal encroachments at Kolkata Park Circus Railway Station during overnight demolition drive
रेलवे की बड़ी कार्रवाई: बंगाल में आधी रात चला बुलडोजर, पार्क सर्कस स्टेशन से हटाया अतिक्रमण

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद रेलवे ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में शनिवार देर रात कोलकाता के पार्क सर्कस रेलवे स्टेशन पर व्यापक बुलडोजर कार्रवाई की गई। रेलवे प्रशासन ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच स्टेशन परिसर में बनी अवैध दुकानों और अतिक्रमणों को हटाया। रातभर चला अतिक्रमण हटाने का अभियान रेलवे अधिकारियों के अनुसार, अभियान शनिवार रात करीब 10:30 बजे शुरू हुआ और रविवार सुबह तक जारी रहा। कार्रवाई के दौरान स्टेशन परिसर को पूरी तरह पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने घेर लिया, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके। चेतावनी के बाद चला बुलडोजर रेलवे प्रशासन ने बताया कि कार्रवाई से पहले माइक के माध्यम से अतिक्रमणकारियों और दुकानदारों को रेलवे भूमि खाली करने की अंतिम चेतावनी दी गई। लेकिन जब किसी ने स्वयं दुकानें नहीं हटाईं, तब बुलडोजर की मदद से एक-एक कर सभी अवैध ढांचों को ध्वस्त कर दिया गया। पहले ही जारी किए गए थे नोटिस रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, जून की शुरुआत में ही पार्क सर्कस स्टेशन पर अवैध रूप से दुकानें चलाने वाले फेरीवालों और व्यापारियों को नोटिस जारी कर दिया गया था। इसके बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। पार्क सर्कस स्टेशन पर लंबे समय से था अतिक्रमण पार्क सर्कस स्टेशन को सियालदह मंडल के सबसे अधिक अतिक्रमण वाले स्टेशनों में गिना जाता है। रेलवे का कहना है कि वर्षों से स्टेशन परिसर में बड़ी संख्या में अवैध दुकानें संचालित हो रही थीं, जिससे यात्रियों की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। अन्य स्टेशनों पर भी जारी रहेगा अभियान रेलवे प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि अतिक्रमण हटाने का अभियान केवल पार्क सर्कस तक सीमित नहीं रहेगा। हावड़ा, सियालदह, दमदम समेत कई प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर भी अवैध कब्जों के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। रेलवे का कहना है कि यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और स्टेशन परिसरों को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए यह अभियान आगे भी चलता रहेगा।  

Deepshikha जून 29, 2026 0
कोलकाता में गोदाम की इमारत ढही, 5 मजदूरों की मौत; राज्यभर में निर्माण परियोजनाओं की जांच के आदेश

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला इलाके में एक निर्माणाधीन गोदाम की इमारत ढहने से कम से कम 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई मजदूर घायल हो गए। हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया गया है। प्रशासन, दमकल विभाग और बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं।   कई मजदूरों को सुरक्षित निकाला गया   अधिकारियों के अनुसार, हादसे के समय निर्माण स्थल पर बड़ी संख्या में मजदूर काम कर रहे थे। अब तक करीब 20 लोगों को मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।   मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश   घटना के बाद मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने हादसे की जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही कोलकाता नगर निगम क्षेत्र में निर्माणाधीन व्यावसायिक परियोजनाओं की सुरक्षा जांच पूरी होने तक कई परियोजनाओं पर अस्थायी रोक लगाने की घोषणा की गई है।   सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल   इस हादसे के बाद निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन यह जांच कर रहा है कि निर्माण कार्य के दौरान सभी आवश्यक नियमों का पालन किया गया था या नहीं।   राज्यभर में बढ़ी सतर्कता   घटना के बाद पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों में चल रही बड़ी निर्माण परियोजनाओं की समीक्षा शुरू कर दी गई है। अधिकारियों को सुरक्षा मानकों की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

anjali kumari जून 25, 2026 0
Jamai Shashthi 2026
जमाई षष्ठी पर दामाद के लिए क्यों सजती है शाही थाली? जानिए परंपरा का राज

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के प्रमुख पारंपरिक त्योहारों में शामिल जमाई षष्ठी केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि परिवार के रिश्तों को मजबूत करने वाला विशेष सांस्कृतिक पर्व भी है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह त्योहार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 20 जून, शनिवार को मनाया जा रहा है। इस दिन बेटी और दामाद को ससुराल आमंत्रित कर उनका विशेष सत्कार किया जाता है।   दामाद के सम्मान की अनोखी परंपरा जमाई षष्ठी को बंगाली समाज में दामाद के सम्मान और सुख-समृद्धि का पर्व माना जाता है। इस अवसर पर सास दामाद का तिलक लगाकर स्वागत करती हैं और उनकी कलाई पर पीला धागा बांधकर लंबी उम्र, सफलता और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं। यह परंपरा सास-दामाद के रिश्ते में प्रेम, सम्मान और अपनत्व का प्रतीक मानी जाती है।   इसलिए खास होती है जमाई षष्ठी की थाली इस पर्व का सबसे आकर्षक हिस्सा दामाद के लिए सजाई जाने वाली विशेष थाली होती है। मान्यता है कि इस दिन दामाद को परिवार के सम्मानित सदस्य के रूप में 'राजा' जैसा आदर दिया जाता है। उनकी पसंद के अनुसार पारंपरिक बंगाली व्यंजन तैयार किए जाते हैं। थाली में भात (चावल), दाल, पांच तरह की तली हुई सब्जियां, कोशा मांगशो, इलिश भापा, विभिन्न प्रकार की मछलियां, मिठाइयां और मौसमी फल परोसे जाते हैं। यह थाली केवल भोजन नहीं, बल्कि स्नेह और सम्मान का प्रतीक मानी जाती है।   बाजारों में दिखती है त्योहार की रौनक जमाई षष्ठी के अवसर पर सुबह से ही बाजारों में विशेष चहल-पहल देखने को मिलती है। मछली, मिठाई, फल और सब्जियों की दुकानों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है। परिवार इस दिन के लिए विशेष तैयारियां करते हैं, ताकि बेटी और दामाद का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया जा सके। यह पर्व आज भी बंगाली समाज में पारिवारिक एकता, प्रेम और रिश्तों की मिठास को जीवंत बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।

abhishek singh जून 20, 2026 0
Nabanna security breach
नबन्ना की सुरक्षा में सेंध? वीआईपी जोन में मिला संदिग्ध युवक, STF की पूछताछ जारी

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिवालय नबन्ना के वीआईपी सुरक्षा क्षेत्र में एक संदिग्ध युवक के पहुंच जाने से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। युवक कथित तौर पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के काफिले की तस्वीरें अपने मोबाइल फोन से ले रहा था। सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ जवानों ने उसकी गतिविधियों पर तुरंत संदेह जताया और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई।     जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार, गुरुवार शाम मुख्यमंत्री नबन्ना से रवाना होने वाले थे। उनका काफिला पार्किंग जोन से वीआईपी लिफ्ट की ओर बढ़ रहा था, तभी एक युवक सुरक्षा घेरे के पास पहुंच गया और मोबाइल फोन से काफिले की तस्वीरें लेने लगा। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत उसे रोक लिया और नबन्ना के सुरक्षा निदेशक को इसकी जानकारी दी। इसके बाद युवक को पुलिस के हवाले कर दिया गया।   पुलिस के मुताबिक, हिरासत में लिए गए युवक की पहचान पंकज कुमार के रूप में हुई है। शुरुआती पूछताछ के बाद उसे हावड़ा पुलिस आयुक्त कार्यालय ले जाया गया, जहां से मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के हवाले कर दिया गया। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि युवक का उद्देश्य क्या था और वह वीआईपी क्षेत्र तक कैसे पहुंचा।फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि युवक मुख्यमंत्री के काफिले की रेकी कर रहा था या केवल उत्सुकतावश तस्वीरें ले रहा था। सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की चूक हुई है या नहीं, इसकी भी समीक्षा की जा रही है।   पहले भी ऐसा एक बार हो चूका है  गौरतलब है कि वर्ष 2024 में भी नबन्ना परिसर के बाहर एक संदिग्ध युवक को हिरासत में लिया गया था। ताजा घटना के बाद एक बार फिर राज्य सचिवालय की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन ने पूरे मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है और सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।

anjali kumari जून 19, 2026 0
Bengal Weapons Cache
बंगाल के तालाब में मिला हथियारों का जखीरा

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के एक तालाब में हथियारों का जखीरा मिला है। राज्य में अवैध हथियारों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में पुलिस को यह बड़ी सफलता मिली है। पश्चिम बंगाल एसटीएफ ने उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली-बसीरहाट क्षेत्र में एक तालाब से 16 लंबी बंदूकें और 2,345 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। यह कार्रवाई खुफिया सूचना के आधार पर की गई। सर्च ऑपरेशन चला रही एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार, 6 जून को बसीरहाट और बरूईपुर में हुई हथियार बरामदगी के बाद जांच चल रही थी। उसी जांच के दौरान मिले नए इनपुट और तकनीकी सूचनाओं के आधार पर एसटीएफ ने यह सर्च ऑपरेशन चलाया। इसके दौरान तालाब से भारी मात्रा में हथियार और कारतूस बरामद हुए। संगठित नेटवर्क की आशंका इस ताजा कार्रवाई के बाद मामले में 51 हथियार और 2,705 राउंड गोला-बारूद बरामद किए जा चुके हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि इसके पीछे एक संगठित अवैध हथियार नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। पहले भी मिल चुके हथियार कुछ दिन पहले संदेशखाली क्षेत्र में एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर तालाब और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में अवैध हथियार बरामद किए थे। कई लोगों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से लगातार तलाशी अभियान जारी है। बरामद हथियारों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। एसटीएफ यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हथियार कहां से लाए गए। किसके लिए जमा किए गए थे। इनके पीछे कौन-सा नेटवर्क काम कर रहा था। फिलहाल इलाके में सर्च ऑपरेशन और जांच जारी है।

anjali kumari जून 12, 2026 0
West Bengal DA Hike
बंगाल के कर्मचारियों को बड़ी सौगात, केंद्र के बराबर मिलेगा महंगाई भत्ता

कोलकाता,एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) को लेकर बड़ी घोषणा की गई है। राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि आगामी बजट में कर्मचारियों को केंद्र सरकार के बराबर महंगाई भत्ता देने की दिशा में बड़ा फैसला लिया जाएगा। इस ऐलान के बाद राज्य के कर्मचारियों में उत्साह का माहौल है।   केंद्रीय दर के बराबर होगा डीए सूत्रों के अनुसार, सरकार का लक्ष्य राज्य कर्मचारियों के डीए को केंद्र सरकार के समान स्तर पर लाना है। लंबे समय से राज्य कर्मचारी इस मांग को लेकर आंदोलन और विरोध कर रहे थे। सरकार ने अब इस अंतर को खत्म करने की दिशा में कदम उठाने की बात कही है।   बकाया डीए पर भी हो सकता है फैसला नई योजना के तहत सिर्फ मौजूदा महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी ही नहीं, बल्कि पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान रुके हुए डीए एरियर को भी चरणबद्ध तरीके से जारी करने की तैयारी की जा रही है। इससे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ा वित्तीय लाभ मिलने की संभावना है।   वित्तीय सुधार और बजट पर फोकस सरकारी सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्रालय को राज्य के राजस्व में सुधार और डीए फंड को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए प्रशासनिक खर्चों में कटौती की योजना बनाई जा रही है। लोक निर्माण विभाग और अन्य विभागों में गैर-जरूरी खर्च कम करने पर भी विचार किया जा रहा है।   14 लाख कर्मचारियों को होगा लाभ इस फैसले से राज्य के लगभग 14 लाख नियमित सरकारी कर्मचारी, शिक्षक, नगर निगम कर्मी और करीब 6 लाख पेंशनभोगी परिवारों को फायदा मिलने की उम्मीद है। इसे राज्य सरकार की एक बड़ी कल्याणकारी पहल माना जा रहा है।   कर्मचारियों में उत्साह, बजट पर नजर डीए बढ़ोतरी की घोषणा के संकेत के बाद कर्मचारियों में खुशी की लहर है। अब सभी की नजर आगामी राज्य बजट पर टिकी हुई है, जिसमें इस फैसले पर अंतिम मुहर लगने की संभावना जताई जा रही है।

abhishek singh जून 11, 2026 0
Mamata Banerjee and Abhishek Banerjee during Delhi visit amid speculation over dissent within TMC ranks.
दिल्ली दौरे में ममता बनर्जी को झटका! बागी सांसदों की दूरी से बढ़ीं टीएमसी की मुश्किलें

  नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी के हालिया दिल्ली दौरे ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और असंतोष की अटकलों को और हवा दे दी है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के कुछ असंतुष्ट सांसदों ने नेतृत्व से दूरी बना ली है, जिससे टीएमसी की राष्ट्रीय राजनीति में स्थिति को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं. सांसदों से संपर्क की कोशिशों को नहीं मिला अपेक्षित समर्थन सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पहुंचने के बाद ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कई सांसदों से संपर्क साधने की कोशिश की. कई सांसदों से संपर्क नहीं हो सका. बताया जा रहा है कि कुछ सांसदों के फोन बंद थे, जबकि कुछ ने बातचीत से परहेज किया. राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह घटनाक्रम पार्टी नेतृत्व के लिए चिंता का विषय हो सकता है, खासकर ऐसे समय में जब टीएमसी को संगठनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. बागी खेमे की गतिविधियों पर बनी हुई है नजर टीएमसी के भीतर असंतोष को लेकर चर्चाएं पहले से चल रही थीं. अब खबरें हैं कि कुछ सांसद अलग रणनीति पर काम कर रहे हैं. पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर किसी बड़े विभाजन की पुष्टि नहीं की गई है. सूत्रों का दावा है कि असंतुष्ट नेताओं के बीच लगातार बैठकें हो रही हैं और भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर विचार-विमर्श जारी है. अभिषेक बनर्जी ने संभाला मोर्चा दिल्ली प्रवास के दौरान ममता बनर्जी अपने भतीजे और टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी के आवास पर ठहरीं. बताया जा रहा है कि अभिषेक ने पार्टी के असंतुष्ट नेताओं को मनाने और संवाद कायम रखने की कोशिश की. सूत्रों के मुताबिक अब तक इन प्रयासों को बड़ी सफलता नहीं मिली है. पार्टी नेतृत्व लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और संगठनात्मक एकता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है. विपक्षी राजनीति में टीएमसी की भूमिका पर उठे सवाल पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय तक मजबूत स्थिति रखने वाली टीएमसी के सामने मौजूदा परिस्थितियां नई चुनौती बनकर उभरी हैं. INDIA गठबंधन की राजनीति और राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता के बीच पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति आने वाले दिनों में टीएमसी की रणनीति को प्रभावित कर सकती है. फिलहाल पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है.  

Deepshikha जून 10, 2026 0
West Bengal News
कूचबिहार के होल्डिंग सेंटरों में बढ़ी संदिग्ध घुसपैठियों की संख्या, प्रशासन अलर्ट

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में बनाए गए होल्डिंग सेंटरों में संदिग्ध घुसपैठियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, दिनहाटा और चांगराबांधा स्थित होल्डिंग सेंटरों में कई लोगों को अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के संदेह में रखा गया है। इन लोगों की पहचान और उनके दस्तावेजों की जांच की जा रही है।   दो होल्डिंग सेंटरों में रखे गए 14 संदिग्ध जानकारी के मुताबिक, दिनहाटा नगरपालिका के कम्युनिटी हॉल में बनाए गए होल्डिंग सेंटर में चार लोगों को रखा गया है। वहीं मेखलीगंज क्षेत्र के चांगराबांधा ट्रक टर्मिनस स्थित होल्डिंग सेंटर में रविवार को दस अन्य लोगों को लाया गया। अधिकारियों का मानना है कि ये सभी लोग बांग्लादेश सीमा के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए हो सकते हैं।   हालांकि प्रशासन और पुलिस ने अभी तक हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान, उनके भारत आने की तारीख या सीमा पार करने के स्थानों को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है।   सीमावर्ती जिला होने से बढ़ी चुनौती कूचबिहार की लगभग 500 किलोमीटर लंबी सीमा बांग्लादेश से लगती है। सीमा के कुछ हिस्सों में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अभी भी कंटीले तारों की बाड़ नहीं लगाई जा सकी है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ऐसे क्षेत्रों का उपयोग अवैध घुसपैठ और तस्करी के लिए किया जाता रहा है।   बढ़ाई गई निगरानी और सुरक्षा प्रशासन ने होल्डिंग सेंटरों में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। सेंटरों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और पुलिस निगरानी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर जिले में और होल्डिंग सेंटर भी बनाए जा सकते हैं।   जांच के बाद होगा अगला फैसला प्रशासन फिलहाल सभी संदिग्ध व्यक्तियों के दस्तावेजों और पहचान की जांच कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद उनके संबंध में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस बीच सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के प्रयास जारी हैं।

Unknown जून 8, 2026 0
Scenic view of Darjeeling hills as North Bengal cities prepare for major urban development project.
उत्तर बंगाल की बदलेगी तस्वीर: दार्जिलिंग-सिलीगुड़ी समेत 5 शहर बनेंगे ‘हिमालयी पर्वतीय शहर’

  कोलकाता: उत्तर बंगाल के विकास को लेकर केंद्र सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत दार्जिलिंग, सिलीगुड़ी, कलिम्पोंग, कर्सियांग और मिरिक को आधुनिक ‘हिमालयी पर्वतीय शहरों’ (Himalayan Hill Cities) के रूप में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य पहाड़ी और तराई क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। पांच प्रमुख शहरों को मिलेगा नया स्वरूप उत्तर बंगाल के प्रशासनिक मुख्यालय ‘उत्तर कन्या’ में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद इस परियोजना की जानकारी सामने आई। प्रस्तावित योजना के तहत जिन शहरों को विकसित किया जाएगा, उनमें शामिल हैं: Darjeeling Siliguri Kalimpong Kurseong Mirik राज्य की शहरी विकास एवं नगर मामलों की मंत्री Agnimitra Paul ने बताया कि केंद्रीय मंत्री Manohar Lal Khattar ने इन शहरों को उनकी भौगोलिक और पारिस्थितिक विशेषताओं के अनुरूप विकसित करने का प्रस्ताव रखा है। पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बड़ा बढ़ावा परियोजना के तहत केवल सड़क निर्माण ही नहीं, बल्कि आधुनिक शहरी सुविधाओं का भी विस्तार किया जाएगा। इनमें शामिल हैं: आधुनिक वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन भू-स्खलन रोधी इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर जल निकासी और शहरी सेवाएं स्मार्ट पर्यटन सुविधाएं इसके साथ ही दार्जिलिंग और सिलीगुड़ी के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि घरेलू और विदेशी पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। सांसद राजू बिष्ट ने किया स्वागत दार्जिलिंग से भाजपा सांसद Raju Bista ने इस पहल को उत्तर बंगाल के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित विकास योजनाओं में से एक है और इससे पहाड़, तराई तथा डुआर्स क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति मिलेगी। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के लागू होने से होटल, होम-स्टे, एडवेंचर टूरिज्म, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यवसायों में निवेश बढ़ेगा। इससे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे और युवाओं का दूसरे राज्यों की ओर पलायन कम हो सकता है। उत्तर बंगाल के विकास की नई शुरुआत केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय के साथ शुरू की जा रही यह परियोजना उत्तर बंगाल के पहाड़ी क्षेत्रों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। यदि योजना तय समय पर लागू होती है, तो दार्जिलिंग, सिलीगुड़ी और आसपास के शहर आने वाले वर्षों में देश के प्रमुख पर्वतीय शहरी केंद्रों के रूप में उभर सकते हैं।  

Deepshikha जून 8, 2026 0
ED officials and security personnel delivering notice to Abhishek Banerjee at his Kolkata residence in teacher recruitment case.
बंगाल में बढ़ी सियासी गर्मी, अभिषेक बनर्जी को ईडी का नया नोटिस

  पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहे उथल-पुथल भरे दौर के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को शिक्षक भर्ती मामले में नया नोटिस जारी किया है। बुधवार को ईडी की एक टीम केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ कोलकाता के कालीघाट स्थित उनके आवास पहुंची और कानूनी प्रक्रिया पूरी की। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुई कार्रवाई जांच एजेंसी के पहुंचने के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। केंद्रीय बलों की मौजूदगी के बीच आवास के आसपास निगरानी रखी गई और स्थिति पर नजर बनाए रखी गई। घटना की जानकारी मिलते ही पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं की आवाजाही भी बढ़ गई। भर्ती मामले की जांच में नए पहलुओं की तलाश ईडी लंबे समय से कथित शिक्षक भर्ती अनियमितताओं से जुड़े वित्तीय पहलुओं की जांच कर रही है। एजेंसी विभिन्न दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की समीक्षा कर रही है ताकि मामले से जुड़े आर्थिक लेन-देन की पूरी तस्वीर सामने लाई जा सके। जांच के दौरान कई व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका भी जांच के दायरे में है। कारोबारी संस्थाओं और वित्तीय नेटवर्क पर नजर सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां उन कंपनियों और वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल कर रही हैं जिनका नाम जांच के दौरान सामने आया है। उद्देश्य यह समझना है कि कथित तौर पर धन का प्रवाह किस प्रकार हुआ और उससे जुड़े नेटवर्क कैसे काम कर रहे थे। इसी क्रम में कुछ अतिरिक्त जानकारियां जुटाने के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। राजनीतिक संकट के बीच नई चुनौती यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब तृणमूल कांग्रेस पहले से ही संगठनात्मक चुनौतियों और आंतरिक मतभेदों से जूझ रही है। हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने पार्टी के भीतर चर्चा और गतिविधियों को बढ़ा दिया है। ऐसे माहौल में ईडी की यह कार्रवाई राजनीतिक महत्व भी रखती है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद राज्य में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। विपक्ष इसे जांच प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा बता रहा है, जबकि तृणमूल कांग्रेस के नेता केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका को लेकर सवाल उठा रहे हैं। इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। आगे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसी की अगली कार्रवाई क्या होगी और पूछताछ या जांच के अगले चरण में कौन-से नए तथ्य सामने आते हैं। शिक्षक भर्ती मामला पहले से ही पश्चिम बंगाल के सबसे चर्चित मामलों में शामिल है और ताजा घटनाक्रम ने इसे एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।  

Deepshikha जून 4, 2026 0
TMC legislators meeting amid internal party crisis and leadership dispute in West Bengal
टीएमसी में बड़ा राजनीतिक संकट, 58 विधायकों ने रीतब्रत बनर्जी को चुना नया नेता

  पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चल रहा असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। पार्टी के 58 विधायकों ने अलग रुख अपनाते हुए रीतब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता चुन लिया है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। बागी विधायकों ने पेश किया समर्थन का दावा रीतब्रत बनर्जी और उनके समर्थक विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष अपने समर्थन से जुड़े दस्तावेज जमा किए। बागी खेमे का दावा है कि उनके पास पर्याप्त संख्या बल है और वे विधायक दल के भीतर अपनी वैध स्थिति स्थापित करने में सफल रहे हैं। उनका कहना है कि अधिकांश विधायक उनके साथ हैं और वे विधानसभा में अपनी अलग पहचान के साथ काम करेंगे। नई नेतृत्व टीम की घोषणा बागी गुट ने केवल नेता का चयन ही नहीं किया, बल्कि विधायक दल के लिए नई जिम्मेदारियों का भी ऐलान किया। रीतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की भूमिका दी गई, जबकि अन्य वरिष्ठ नेताओं को उपनेता और मुख्य सचेतक जैसी जिम्मेदारियां सौंपी गईं। इस कदम को संगठन के भीतर समानांतर नेतृत्व खड़ा करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। कई वरिष्ठ नेता भी आए साथ इस पूरे घटनाक्रम में पार्टी के कई अनुभवी और वरिष्ठ विधायकों के नाम भी सामने आए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बड़े नेताओं की मौजूदगी ने इस बगावत को और अधिक गंभीर बना दिया है। यही वजह है कि इसे केवल सामान्य गुटबाजी नहीं बल्कि संगठन के भीतर बड़े राजनीतिक पुनर्संतुलन के रूप में देखा जा रहा है। ममता के नेतृत्व पर भरोसा, अभिषेक पर सवाल बागी विधायकों ने अपने रुख में स्पष्ट किया है कि वे ममता बनर्जी को पार्टी का सर्वोच्च नेता मानते हैं।  विधायक दल के कामकाज में अभिषेक बनर्जी की भूमिका को लेकर उन्होंने असहमति जताई है। उनका कहना है कि संगठनात्मक फैसलों और विधायक दल की गतिविधियों को लेकर नई व्यवस्था की जरूरत है। पार्टी नेतृत्व ने उठाए कड़े कदम घटनाक्रम के बाद पार्टी नेतृत्व ने पूरे राज्य में संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा शुरू कर दी है। विभिन्न समितियों और इकाइयों के पुनर्गठन की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। पार्टी का मानना है कि मौजूदा हालात से निपटने के लिए संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की जरूरत है। वैधता को लेकर शुरू हुई बहस बागी गुट और आधिकारिक नेतृत्व के बीच सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर है कि विधायक दल से जुड़े फैसले लेने का अधिकार किसके पास है। दोनों पक्ष अपने-अपने दावों को सही ठहरा रहे हैं। इसी वजह से यह मामला केवल राजनीतिक मतभेद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संगठनात्मक अधिकार और नेतृत्व की वैधता का सवाल भी बन गया है। पुराने विवादों से जुड़ रहे हैं तार जानकारों का मानना है कि यह संकट अचानक पैदा नहीं हुआ। पिछले कुछ समय से विधायक दल के नेतृत्व और संगठनात्मक फैसलों को लेकर असंतोष की खबरें सामने आ रही थीं। अब यह असंतोष खुली राजनीतिक चुनौती में बदलता दिखाई दे रहा है, जिससे पार्टी के भविष्य और नेतृत्व संरचना को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि संगठनात्मक स्तर पर कौन-सा पक्ष अधिक समर्थन जुटा पाता है और पार्टी के भीतर चल रहा यह संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ता है।  

Deepshikha जून 4, 2026 0
Bengal government
घुसपैठ रोकने के लिए बंगाल सरकार ने BSF को सौंपा  32 एकड़ जमीन

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार ने सीमा पर बाड़ लगाने और सुरक्षा ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को लगभग 32 एकड़ जमीन सौंप दी है। यह फैसला लंबे समय से लंबित था और अब राज्य कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे अमल में लाया जा रहा है। राज्य के पंचायत मंत्री दिलीप घोष ने कैबिनेट बैठक के बाद जानकारी देते हुए बताया कि बांग्लादेश सीमा से सटे विभिन्न इलाकों में स्थायी सीमा चौकियों और बाड़बंदी के निर्माण के लिए कुल 31.905 एकड़ भूमि बीएसएफ को हस्तांतरित की गई है। यह जमीन नौ अलग-अलग स्थानों पर स्थित है और इसका उपयोग सीमा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में किया जाएगा।   मालदा, मुर्शिदाबाद और कूचबिहार में भी बनेगी नई चौकियां सरकार ने इसके अलावा मालदा, मुर्शिदाबाद और कूचबिहार जिलों में 1.53 एकड़ अतिरिक्त भूमि देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। इस जमीन पर तीन नई स्थायी सीमा चौकियां बनाई जाएंगी। वहीं उत्तर दिनाजपुर जिले में 11 स्थानों पर 12.72 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी रखा गया है, जिससे सीमा पर बाड़ लगाने के कार्य में तेजी आएगी।   हाईकोर्ट ने जताई थी नाराजगी सीमा सुरक्षा से जुड़ा यह मुद्दा लंबे समय से विवाद का विषय बना हुआ था। इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़बंदी के लिए भूमि हस्तांतरण में हो रही देरी पर राज्य सरकार की आलोचना की थी। अदालत ने सीमा सुरक्षा के महत्व को देखते हुए प्रक्रिया में तेजी लाने की जरूरत बताई थी।   रेल परियोजना को भी मिली राहत कैबिनेट बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए जलपाईगुड़ी जिले के नागराकाटा क्षेत्र में 20 एकड़ सरकारी जमीन वन विभाग को सौंपने का फैसला लिया गया। बाद में यह भूमि सेवक-रंगपो रेलवे लाइन परियोजना के लिए उपयोग की जाएगी। सरकार के इस फैसले को सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ रोकने और बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे सीमा क्षेत्रों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

Unknown जून 3, 2026 0
Smart electricity meter installation drive announced for 2 crore consumers in West Bengal
बंगाल में 2 करोड़ घरों में लगेंगे स्मार्ट मीटर, बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए शुरू होगी बड़ी योजना

  पश्चिम बंगाल में बिजली क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने करीब 2 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर लगाने की योजना को मंजूरी दे दी है। कोलकाता में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री Manohar Lal Khattar और मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari के बीच हुई समीक्षा बैठक में इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम पर सहमति बनी। योजना के तहत जुलाई 2026 से चरणबद्ध तरीके से पुराने बिजली मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदला जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे बिजली चोरी पर रोक लगेगी, बकाया बिलों की वसूली आसान होगी और वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी। पहले सरकारी दफ्तरों में लगेंगे स्मार्ट मीटर सरकार ने इस परियोजना को मिशन मोड में लागू करने का फैसला किया है। जून 2026 तक सभी सरकारी कार्यालयों और सरकारी परिसरों में स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद अगस्त 2026 तक इन सभी कनेक्शनों को प्रीपेड प्रणाली में बदला जाएगा। सरकारी विभागों में बकाया बिलों की समस्या को खत्म करने के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है। घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता भी आएंगे दायरे में सरकारी प्रतिष्ठानों के बाद बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर से जोड़ा जाएगा। इसके बाद राज्यभर के घरेलू उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। राज्य सरकार का कहना है कि आम उपभोक्ताओं को प्रीपेड प्रणाली अपनाने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। उपभोक्ता अपनी सुविधा के अनुसार प्रीपेड या पोस्टपेड, किसी भी विकल्प का चयन कर सकेंगे। उपभोक्ताओं को मीटर लगाने के लिए एक साथ पूरी रकम नहीं चुकानी होगी।  स्मार्ट मीटर योजना के तहत केंद्र सरकार प्रत्येक मीटर पर 900 रुपये की सहायता देगी। उपभोक्ताओं को मीटर लगाने के लिए एक साथ पूरी रकम  राशि नहीं चुकानी होगी। सरकार के अनुसार, उपभोक्ताओं से मासिक बिजली बिल के साथ लगभग 100 रुपये का अतिरिक्त योगदान लिया जाएगा, जिससे मीटर की लागत की भरपाई की जाएगी। 15 हजार करोड़ रुपये के घाटे को कम करने की तैयारी समीक्षा बैठक में सामने आया कि राज्य के बिजली क्षेत्र पर करीब 15,000 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ है। इसके अलावा ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन (T&D) लॉस लगभग 12 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। सरकार का लक्ष्य स्मार्ट मीटरिंग के जरिए इस नुकसान को सिंगल डिजिट में लाना है। अगले दो महीनों में एक विस्तृत "सोर्स एलोकेशन प्लान" तैयार किया जाएगा, जिसके आधार पर बिजली क्षेत्र की वित्तीय स्थिति को सुधारने की रणनीति बनाई जाएगी। बकाया बिलों की वसूली के लिए बनेगा सख्त तंत्र राज्य सरकार सरकारी विभागों और बड़े उपभोक्ताओं पर बकाया लगभग 800 करोड़ रुपये की राशि की वसूली के लिए भी नई व्यवस्था तैयार कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि स्मार्ट मीटर से रीयल-टाइम निगरानी संभव होगी, जिससे बकाया भुगतान और बिजली खपत पर बेहतर नियंत्रण रखा जा सकेगा। सौर ऊर्जा योजनाओं को भी मिलेगा बढ़ावा बैठक में केवल स्मार्ट मीटरिंग ही नहीं, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। राज्य सरकार ने केंद्र को भरोसा दिलाया है कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और पीएम-कुसुम योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाएगी। सरकार का कहना है कि इन योजनाओं के जरिए किसानों और निम्न आय वर्ग के परिवारों को सस्ती तथा स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।  

Deepshikha जून 2, 2026 0
Mamata Banerjee
अभिषेक हमले पर ममता का बड़ा आरोप, बोलीं- भर्ती रोकने के लिए बनाया गया दबाव

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के बाद उनके इलाज को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। ममता बनर्जी ने दावा किया कि दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में हुई घटना के बाद अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों पर दबाव बनाया गया ताकि अभिषेक बनर्जी को अस्पताल में भर्ती न किया जाए। उन्होंने इस पूरे मामले को राजनीतिक हस्तक्षेप बताते हुए सरकार और प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए।   अस्पताल प्रशासन को धमकी भरे फोन आने का दावा ममता बनर्जी ने कहा कि एक अस्पताल प्रशासक ने उन्हें बताया था कि पुलिस की ओर से लगातार धमकी भरे फोन किए जा रहे थे। उनके अनुसार, इलाज की प्रक्रिया को प्रभावित करने और अस्पताल पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन को स्वतंत्र रूप से काम नहीं करने दिया गया।   इलाज की प्रक्रिया पर उठाए सवाल मुख्यमंत्री ने पूछा कि यदि अभिषेक बनर्जी की स्थिति गंभीर नहीं थी और भर्ती की आवश्यकता नहीं थी, तो उन्हें पहले आईटीयू में क्यों रखा गया। उन्होंने कहा कि करीब दो घंटे तक डॉक्टरों की निगरानी में रखने और कई मेडिकल जांच व स्कैन कराने की सलाह दिए जाने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी क्यों दी गई। ममता ने पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग की है।   शरीर पर मिले चोट के निशान ममता बनर्जी के मुताबिक, हमले के बाद अभिषेक बनर्जी को शाम से रात तक डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया। चिकित्सकों ने उनके चेहरे, पीठ, छाती और गर्दन पर चोट के निशान पाए थे। संभावित अंदरूनी चोट या हड्डी टूटने की आशंका को खारिज करने के लिए कई जांच कराने की सलाह दी गई थी।   सोनारपुर में क्या हुआ था? पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी के पहुंचते ही माहौल तनावपूर्ण हो गया था। आरोप है कि कुछ लोगों ने उनके खिलाफ नारेबाजी की, पत्थर और अंडे फेंके तथा धक्का-मुक्की की कोशिश की। हालात बिगड़ते देख सुरक्षाकर्मियों ने मानव शृंखला बनाकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। घटना के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

Unknown जून 1, 2026 0
West Bengal Cabinet
बंगाल में शुभेंदु सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार, 35 मंत्रियों ने ली शपथ

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के गठन के बाद सोमवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार का पहला और अब तक का सबसे बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार हुआ। राज्य सचिवालय नबन्ना में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल आर.एन. रवि ने 35 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस विस्तार को नई सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।   कई प्रमुख नेताओं को मिली मंत्रिमंडल में जगह नए मंत्रिमंडल में कई चर्चित और अनुभवी नेताओं को शामिल किया गया है। शपथ लेने वालों में स्वपन दासगुप्ता, अशोक डिंडा, मनोज ओरांव, जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, मालती रॉय, इंद्रनील खान, गौरीशंकर घोष, कल्याण चक्रवर्ती, राजेश महतो, अर्जुन सिंह और तापस राय जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। माना जा रहा है कि इनमें से कई नेताओं को महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।   चुनावी जीत के बाद सरकार का बड़ा कदम हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत हासिल कर तृणमूल कांग्रेस के लगभग 15 वर्षों के शासन का अंत किया था। सत्ता संभालने के बाद यह पहला बड़ा मंत्रिमंडलीय विस्तार है, जिससे सरकार प्रशासनिक ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।   विभागों के बंटवारे पर जल्द होगा फैसला सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल विस्तार के बाद विभागों के आवंटन को लेकर भी जल्द महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे। पहली बार विधायक बने कई नेताओं को भी मंत्री पद देकर सरकार ने नए चेहरों पर भरोसा जताया है। संभावित रूप से शंकर घोष, शारद्वत मुखोपाध्याय, दुधकुमार मंडल और अन्य नेताओं को भी अहम जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।   मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक दिन पहले सोशल मीडिया मंच एक्स पर मंत्रिमंडल विस्तार की जानकारी साझा की थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विस्तार सरकार की कार्यक्षमता बढ़ाने और चुनावी वादों को तेजी से लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

Unknown जून 1, 2026 0
West Bengal Chief Minister Shubhendu Adhikari during cabinet expansion as new ministers take oath
पश्चिम बंगाल में मंत्रिमंडल विस्तार, आज 35 नए मंत्री लेंगे शपथ

पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के गठन के लगभग एक महीने बाद सोमवार (1 जून) को मंत्रिमंडल विस्तार होने जा रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार में 35 नए मंत्री शपथ लेंगे। इसके साथ ही राज्य मंत्रिमंडल लगभग पूर्ण आकार में पहुंच जाएगा और मंत्रियों की कुल संख्या 41 हो जाएगी। राजभवन की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह सुबह 11 बजे लोकभवन में आयोजित होगा, जहां राज्यपाल आर.एन. रवि नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। सरकार गठन के बाद पहला बड़ा विस्तार भाजपा सरकार के गठन के बाद 9 मई को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ पांच मंत्रियों ने शपथ ली थी। तब से विपक्ष और राजनीतिक हलकों में पूर्ण मंत्रिमंडल के गठन में देरी को लेकर सवाल उठ रहे थे। अब मंत्रिमंडल विस्तार के साथ सरकार प्रशासनिक स्तर पर पूरी क्षमता से काम करने की स्थिति में आ जाएगी। मुख्यमंत्री के साथ पहले चरण में शपथ लेने वाले मंत्रियों में दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, नीशीथ प्रमाणिक, अशोक कीर्तनिया और खुदीराम टुडू शामिल थे। कई बड़े नामों पर नजर मंत्रिमंडल विस्तार से पहले संभावित मंत्रियों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। वरिष्ठ भाजपा नेता और रासबिहारी विधायक स्वपन दासगुप्ता का नाम प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। उन्हें पहले ही शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी दी जा चुकी है, जिससे उनके शिक्षा मंत्री बनने की अटकलें लगाई जा रही हैं। इसके अलावा मानिकतला विधायक तापस रॉय के भी मंत्रिमंडल में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। संभावित मंत्रियों की सूची में शंकर घोष, रुद्रनील घोष, डॉ. शारद्वत मुखर्जी, प्रणत टुडू, रूपा गांगुली, कल्याण चक्रवर्ती, चंदना बाउड़ी, जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, अशोक डिंडा और सुब्रत मैत्रा जैसे नाम भी चर्चा में हैं। क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर फोकस भाजपा नेतृत्व मंत्रिमंडल विस्तार में उत्तर बंगाल, जंगलमहल, आदिवासी क्षेत्रों, अनुसूचित जाति समुदाय, महिलाओं और दक्षिण बंगाल के प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन बनाने पर विशेष ध्यान दे सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मंत्रिमंडल की संरचना से भाजपा की आगामी राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक प्राथमिकताओं की झलक भी मिलेगी। वर्तमान मंत्रियों के पास कौन से विभाग? मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पास मुख्यमंत्री कार्यालय के अलावा कई प्रमुख विभागों की जिम्मेदारी है। दिलीप घोष पंचायत एवं ग्रामीण विकास, पशुपालन विकास और कृषि विपणन विभाग संभाल रहे हैं। अग्निमित्रा पॉल महिला एवं बाल विकास तथा नगर विकास विभाग की जिम्मेदारी निभा रही हैं। नीशीथ प्रमाणिक के पास उत्तर बंगाल विकास और खेल विभाग है, जबकि अशोक कीर्तनिया खाद्य विभाग और खुदीराम टुडू पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं अल्पसंख्यक मामलों का प्रभार संभाल रहे हैं। संवैधानिक सीमा के करीब पहुंचेगी सरकार संविधान के अनुसार किसी राज्य में मंत्रियों की संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में अधिकतम 44 मंत्री बनाए जा सकते हैं। 35 नए मंत्रियों के शपथ लेने के बाद मंत्रिपरिषद की संख्या 41 हो जाएगी, जिससे सरकार संवैधानिक सीमा के काफी करीब पहुंच जाएगी। भाजपा सरकार की प्रशासनिक दिशा होगी स्पष्ट राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह मंत्रिमंडल विस्तार केवल रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि नई सरकार की प्रशासनिक प्राथमिकताओं और राजनीतिक संतुलन को भी परिभाषित करेगा। शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी नए मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर सकते हैं, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।  

surbhi जून 1, 2026 0
Abhishek Banerjee faces protesters in Sonarpur amid growing political debate in West Bengal
सोनारपुर हमला: अभिषेक बनर्जी के लिए राजनीतिक चुनौती या नए नेतृत्व की परीक्षा?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोनारपुर में हुई हिंसक घटना ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना केवल एक सुरक्षा चुनौती नहीं, बल्कि उनके नेतृत्व, जनसंपर्क क्षमता और राजनीतिक परिपक्वता की भी महत्वपूर्ण परीक्षा है। पहली बार खुले जन-विरोध का सामना अब तक अभिषेक बनर्जी की राजनीतिक यात्रा संगठनात्मक मजबूती और सत्ता के प्रभावशाली ढांचे के भीतर आगे बढ़ी है। सोनारपुर में उनके काफिले पर हुए हमले और विरोध प्रदर्शन ने उन्हें पहली बार सीधे सार्वजनिक आक्रोश के सामने ला खड़ा किया है। इस घटना ने राज्य की राजनीति में बढ़ते असंतोष और जनभावनाओं को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। ममता बनर्जी के संघर्षपूर्ण राजनीतिक सफर से तुलना राजनीतिक पर्यवेक्षक इस घटना की तुलना मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शुरुआती राजनीतिक जीवन से कर रहे हैं। ममता बनर्जी ने विपक्षी राजनीति के दौर में कई आंदोलनों, विरोध प्रदर्शनों और हमलों का सामना किया था और अक्सर ऐसे घटनाक्रमों को जनसमर्थन में बदलने में सफल रही थीं। विश्लेषकों का मानना है कि सोनारपुर की घटना अभिषेक बनर्जी के लिए भी वैसा ही निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है। अब यह देखना होगा कि वे इस चुनौती का राजनीतिक रूप से किस प्रकार सामना करते हैं। पुराने संकेतों की याद राजनीतिक विश्लेषक 2023 के कुर्मी आंदोलन का भी उल्लेख कर रहे हैं, जब झाड़ग्राम में आंदोलनकारियों ने अभिषेक बनर्जी के काफिले का विरोध किया था। बाद में कुर्मी बहुल इलाकों में चुनावी परिणामों ने यह संकेत दिया कि स्थानीय असंतोष को नजरअंदाज करना राजनीतिक रूप से महंगा पड़ सकता है। सोनारपुर की घटना को भी कई विशेषज्ञ इसी व्यापक राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में देख रहे हैं। विशेषज्ञों की राय पूर्व सांसद जवाहर सरकार का कहना है कि यह अभिषेक बनर्जी के राजनीतिक जीवन की एक महत्वपूर्ण परीक्षा है। उनके अनुसार, जिन परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना ममता बनर्जी दशकों से करती रही हैं, अभिषेक अब पहली बार उस राजनीतिक वास्तविकता से रूबरू हो रहे हैं। वहीं राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर मैदुल इस्लाम का मानना है कि किसी भी नेता की वास्तविक राजनीतिक पहचान केवल विरासत से नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में उसके व्यवहार और जनता से जुड़ाव से तय होती है। उनके अनुसार, यदि अभिषेक विरोध के बावजूद लोगों के बीच सक्रिय बने रहते हैं, तो यह उनके राजनीतिक व्यक्तित्व को नई मजबूती दे सकता है। आगे की राह सोनारपुर की घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि तृणमूल कांग्रेस और स्वयं अभिषेक बनर्जी इस घटनाक्रम को किस तरह संभालते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनकी प्रतिक्रिया और जनता के साथ संवाद की रणनीति ही तय करेगी कि यह घटना उनके लिए नुकसानदेह साबित होगी या फिर एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत बनेगी। फिलहाल इतना तय है कि सोनारपुर की घटना ने अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को नए सिरे से परखने का अवसर और चुनौती दोनों पैदा कर दी है। आने वाले महीनों में इसका प्रभाव पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।  

surbhi जून 1, 2026 0
Mamata Banerjee and Abhishek Banerjee face legal controversy amid rising political tensions in West Bengal
बंगाल की राजनीति में बढ़ा सियासी तनाव, ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी कानूनी विवादों में घिरे

पश्चिम बंगाल की राजनीति में सियासी टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की शीर्ष नेतृत्व टीम अब कानूनी विवादों में घिरती नजर आ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के खिलाफ सिलीगुड़ी में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गयी है, जबकि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कोलकाता के भवानीपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज करायी गयी है। दोनों नेताओं पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने और विवादित टिप्पणियों के जरिए सामाजिक तनाव बढ़ाने के आरोप लगाये गये हैं। इन घटनाओं के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। ममता बनर्जी पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप सिलीगुड़ी के साइबर क्राइम थाने में अधिवक्ता रिंकी चटर्जी सिंह की ओर से ममता बनर्जी के खिलाफ FIR दर्ज करायी गयी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ममता बनर्जी ने 2025 की ईद और 2026 विधानसभा चुनाव से पहले हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान ऐसे बयान दिये, जिनसे हिंदू और सनातन धर्म से जुड़े लोगों की भावनाएं आहत हुईं। शिकायतकर्ता का कहना है कि एक संवैधानिक पद पर रह चुकी नेता को ऐसी टिप्पणी करने से बचना चाहिए, जिससे किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाये जाने का संदेश जाये। पुलिस ने गंभीर धाराओं में दर्ज किया मामला पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और सामाजिक शांति भंग करने की कोशिश जैसे आरोप शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, मामले की शुरुआती जांच शुरू कर दी गयी है और आने वाले दिनों में ममता बनर्जी को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में पुलिस की ओर से आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है। अभिषेक बनर्जी के सोशल मीडिया पोस्ट पर भी उठा विवाद टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी भी विवादों में घिर गये हैं। भवानीपुर निवासी अर्नबकांति दास ने उनके खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करायी है। यह विवाद अभिषेक बनर्जी के एक सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर ‘एंटी-बंगाल गुजराती गैंग’ शब्द का इस्तेमाल किया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस तरह की टिप्पणी विभिन्न समुदायों के बीच तनाव और नफरत फैलाने का कारण बन सकती है। शिकायतकर्ता ने लगाया राजनीतिक शक्ति के दुरुपयोग का आरोप अर्नबकांति दास ने अपनी शिकायत में कहा है कि एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि को ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जो सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करें। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की बयानबाजी राजनीतिक लाभ के लिए की जा रही है और इससे राज्य में सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है। कोलकाता पुलिस मुख्यालय लालबाजार की ओर से अभी तक FIR दर्ज होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है, लेकिन मामले में प्रारंभिक जांच शुरू होने की जानकारी सामने आयी है। बीजेपी ने कहा- कानून अपना काम कर रहा है इन घटनाओं के बाद बीजेपी ने टीएमसी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि किसी भी नेता को धर्म या समुदाय विशेष के खिलाफ भड़काऊ बयान देने की छूट नहीं दी जा सकती। पार्टी नेताओं ने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और अगर किसी ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बयान दिया है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होना स्वाभाविक है। टीएमसी का पलटवार, कहा- विपक्ष दबाना चाहता है आवाज तृणमूल कांग्रेस ने इन कानूनी कार्रवाइयों को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनावी हार के बाद बीजेपी अब अदालतों और पुलिस के जरिए ममता बनर्जी और टीएमसी नेतृत्व पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। टीएमसी नेताओं का दावा है कि विपक्ष जानबूझकर ऐसे विवाद खड़े कर रहा है ताकि राज्य की राजनीति में तनाव पैदा किया जा सके और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। बढ़ सकती हैं टीएमसी नेतृत्व की कानूनी मुश्किलें राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से जुड़े ये विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकते हैं। अभिषेक बनर्जी पहले से ही कुछ साइबर क्राइम मामलों और नगर निगम के नोटिसों का सामना कर रहे हैं। अब ममता बनर्जी के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद टीएमसी की शीर्ष नेतृत्व टीम की कानूनी और राजनीतिक चुनौतियां बढ़ती नजर आ रही हैं। बंगाल की राजनीति में पहले से जारी टकराव के बीच इन घटनाओं ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।  

surbhi मई 29, 2026 0
Mamata Banerjee shares Girgiti poem amid TMC rebellion and Bengal political turmoil
‘गिरगिटी’ कविता से ममता बनर्जी का बड़ा सियासी संदेश, बागी नेताओं पर साधा निशाना

पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2026 के बाद सियासी हलचल लगातार तेज होती जा रही है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ते असंतोष और इस्तीफों के बीच मुख्यमंत्री और पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने अब कविता के जरिए अपने विरोधियों और बागी नेताओं को संदेश दिया है। ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर ‘गिरगिटी’ शीर्षक से एक कविता साझा की, जिसे राजनीतिक गलियारों में पार्टी के भीतर ‘रंग बदलने वाले’ नेताओं पर सीधा हमला माना जा रहा है। दूसरी ओर बीजेपी सांसद सौमित्र खान के उस दावे ने बंगाल की राजनीति का तापमान और बढ़ा दिया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि टीएमसी के कई सांसद और विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं। फेसबुक पर साझा की गयी ‘गिरगिटी’ कविता, पार्टी के भीतर मचा सियासी हलचल ममता बनर्जी द्वारा साझा की गई कविता को लेकर बंगाल की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। कविता में ‘गिरगिट’ का प्रतीक इस्तेमाल करते हुए उन्होंने ऐसे लोगों पर निशाना साधा है, जो परिस्थिति के अनुसार अपना रंग और रुख बदल लेते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कविता सीधे तौर पर उन नेताओं के लिए संदेश है, जो हाल के दिनों में पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं या टीएमसी छोड़ने के संकेत दे रहे हैं। ममता बनर्जी ने कविता में लिखा कि गिरगिट तो केवल अपनी आजीविका बचाने के लिए रंग बदलता है, लेकिन कुछ लोग निजी स्वार्थ और राजनीतिक फायदे के लिए पल भर में अपना चरित्र बदल लेते हैं। मुश्किल समय में पार्टी छोड़ने वालों पर ममता का तीखा हमला कविता में ममता बनर्जी ने उन नेताओं पर भी नाराजगी जतायी, जिन पर पार्टी के कठिन दौर में कार्यकर्ताओं को अकेला छोड़ने का आरोप लग रहा है। उन्होंने संकेतों में कहा कि कुछ नेताओं ने सत्ता और व्यक्तिगत सुविधाओं के लिए अपने आत्मसम्मान और राजनीतिक प्रतिबद्धता से समझौता कर लिया। कविता के अंतिम हिस्से में उन्होंने ‘समय के पहिये’ का जिक्र करते हुए चेतावनी भरे अंदाज में लिखा कि हर व्यक्ति को अपने कर्मों का परिणाम भुगतना पड़ता है और गद्दारों को एक दिन अपनी असली कीमत समझ में आ जाती है। बीजेपी सांसद सौमित्र खान का बड़ा दावा, कहा- टीएमसी के कई नेता संपर्क में ममता बनर्जी की कविता के बीच बीजेपी सांसद सौमित्र खान के बयान ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। सौमित्र खान ने दावा किया कि टीएमसी के 20 सांसद और करीब 50 विधायक पार्टी से नाराज हैं और वे बीजेपी के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी आलाकमान की ओर से संकेत मिल जाये, तो बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव हो सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि टीएमसी का संगठन अंदर से कमजोर हो चुका है और पार्टी में असंतोष लगातार बढ़ रहा है। टीएमसी में बढ़ते इस्तीफों और नाराजगी ने बढ़ायी नेतृत्व की चिंता हाल के दिनों में टीएमसी के भीतर कई नेताओं की नाराजगी खुलकर सामने आयी है। सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी के सभी सांगठनिक पदों से इस्तीफा दे दिया है। इसके अलावा सुशांत घोष, अरूप चक्रवर्ती और इंद्रनील सेन जैसे नेताओं ने भी पार्टी के कामकाज और कथित ‘वीवीआईपी कल्चर’ पर सवाल उठाये हैं। बागी नेताओं का आरोप है कि राशन घोटाला, शिक्षक भर्ती विवाद और आरजी कर अस्पताल मामले जैसे मुद्दों ने जनता के बीच पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया है। उनका कहना है कि पार्टी नेतृत्व इन मामलों से प्रभावी तरीके से निपटने में विफल रहा है। टीएमसी ने बीजेपी के दावों को बताया अफवाह और राजनीतिक माइंडगेम टीएमसी नेतृत्व ने बीजेपी सांसद सौमित्र खान के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पार्टी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि बीजेपी केवल भ्रम फैलाने और राजनीतिक माइंडगेम खेलने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि टीएमसी पूरी तरह एकजुट है और पार्टी के बड़े नेताओं या विधायकों के बीजेपी में जाने की बात निराधार है। सौगत रॉय ने दावा किया कि विपक्ष जानबूझकर पार्टी के भीतर असंतोष का माहौल दिखाने की कोशिश कर रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर टीएमसी मजबूत स्थिति में है। 2026 चुनाव के बाद बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में जिस तरह से बयानबाजी, इस्तीफे और दल-बदल की चर्चाएं तेज हुई हैं, उसने राज्य की सियासत को नया मोड़ दे दिया है। एक तरफ ममता बनर्जी कविता और राजनीतिक संदेशों के जरिए पार्टी को एकजुट रखने की कोशिश कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर बीजेपी लगातार टीएमसी में टूट का दावा कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बंगाल की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।  

surbhi मई 29, 2026 0
Families gather at Hakimpur border amid Bengal’s 3D policy and deportation fears
बंगाल में 3D नीति का असर, हकीमपुर बॉर्डर पर लौटने को जुटे संदिग्ध बांग्लादेशी

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद शुरू हुई 3D नीति का असर अब सीमा क्षेत्रों में साफ दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की “Detect, Delete and Deport” यानी “पता लगाओ, हटाओ और निर्वासित करो” नीति के बाद अवैध रूप से रह रहे संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों में दहशत का माहौल बताया जा रहा है। उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट स्थित हकीमपुर बॉर्डर पर पिछले दो दिनों में बड़ी संख्या में लोग सीमा पार कर बांग्लादेश लौटने की कोशिश करते दिखाई दिए। इनमें पुरुषों के साथ महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। सामान और परिवार के साथ बॉर्डर पर जुटे लोग हकीमपुर सीमा चौकी पर पहुंचे कई लोग अपने साथ घरेलू सामान, बिस्तर, बर्तन और बड़े-बड़े बोरे लेकर पहुंचे हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से अधिकतर लोग कोलकाता, दमदम, न्यूटाउन और डानकुनी जैसे इलाकों में वर्षों से दिहाड़ी मजदूर या घरेलू सहायक के तौर पर काम कर रहे थे। सीमा पर मौजूद लोगों का कहना है कि प्रशासन की सख्ती और निरुद्ध केंद्रों की शुरुआत के बाद उनके बीच डर का माहौल बन गया है। एक व्यक्ति ने कहा, “अगर सरकार हमें यहां रहने नहीं देगी और डिटेंशन सेंटर में भेज देगी, तो हमारे पास वापस लौटने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।” मालदा में शुरू हुआ पहला निरुद्ध केंद्र राज्य सरकार की कार्रवाई के तहत मालदा में पहला निरुद्ध केंद्र शुरू किया गया है। यहां फिलहाल 9 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है। प्रशासन के अनुसार, इन्हें कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक केंद्र में रखा जाएगा, जिसके बाद निर्वासन की कार्रवाई की जाएगी। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अन्य जिलों में भी ऐसे केंद्र सक्रिय करने की तैयारी चल रही है। बीएसएफ भी बढ़ी भीड़ से सतर्क सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि पिछले दो दिनों में सीमा पार लौटने की कोशिश करने वालों की संख्या अचानक बढ़ी है। अधिकारियों के अनुसार, दस्तावेजों की जांच की जा रही है और बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड (BGB) के साथ समन्वय बनाकर आगे की प्रक्रिया तय की जा रही है। बीएसएफ के अधिकारियों का कहना है कि कई लोग खुद ही सीमा चौकी पर पहुंचकर वापस भेजे जाने की मांग कर रहे हैं। जाली दस्तावेज पकड़े जाने का डर सूत्रों के मुताबिक, कई लोगों को यह आशंका है कि यदि घर-घर जांच अभियान चलाया गया तो उनके आधार कार्ड और अन्य पहचान दस्तावेजों की जांच हो सकती है। इसी डर के चलते कई परिवार जल्द से जल्द सीमा पार लौटने की कोशिश कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि प्रशासन अवैध पहचान पत्रों और फर्जी दस्तावेजों की भी जांच कर रहा है। हकीमपुर बॉर्डर पर शरणार्थी शिविर जैसे हालात हकीमपुर सीमा चौकी पर मौजूद तस्वीरों में लोग प्लास्टिक की चादरों के नीचे खुले आसमान में बैठे नजर आ रहे हैं। उनके पास वर्षों की जमा पूंजी और घरेलू सामान से भरे बैग और गठरियां दिखाई दे रही हैं। सीमा क्षेत्र में अचानक बढ़ी भीड़ के कारण प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। पहले भी दिखा था ऐसा माहौल पिछले वर्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान भी सीमा क्षेत्रों में ऐसी हलचल देखी गई थी। इस बार नई सरकार की सख्ती और 3D अभियान के कारण स्थिति अधिक गंभीर मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्य सरकार की नई नीति ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अवैध प्रवास के मामलों में अब सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

surbhi मई 27, 2026 0
Taniya Bhardwaj reacts to Mamata Banerjee’s old Maoist remark after Bengal election results
ममता बनर्जी के ‘माओवादी’ बयान की फिर चर्चा, 12 साल बाद तानिया भारद्वाज ने दी तीखी प्रतिक्रिया

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है। तृणमूल कांग्रेस की हार और बीजेपी की प्रचंड जीत के बीच 12 साल पुराना एक विवाद फिर चर्चा में आ गया है। वर्ष 2012 में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा ‘माओवादी’ कहे जाने वाली छात्रा तानिया भारद्वाज ने चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे “अहंकार की हार” बताया है। तानिया ने कहा कि यह सिर्फ किसी एक राजनीतिक दल की जीत या हार नहीं, बल्कि लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी की जीत है। उनके मुताबिक, जनता ने उस राजनीति को नकार दिया है जिसमें सवाल पूछने वालों को देशविरोधी या माओवादी जैसे टैग दिए जाते थे। क्या था 2012 का चर्चित विवाद? मई 2012 में कोलकाता के प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय की छात्रा तानिया भारद्वाज ने एक लाइव टॉक शो के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से राज्य में बढ़ते अपराध और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल पूछा था। सवाल सुनते ही ममता बनर्जी नाराज हो गई थीं और उन्होंने तानिया को “माओवादी” करार दे दिया था। इतना ही नहीं, ममता बनर्जी बीच कार्यक्रम से उठकर चली गई थीं। उस समय यह घटना राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियों में रही थी। विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने इसे लोकतांत्रिक असहमति को दबाने का उदाहरण बताया था। “यह तानाशाही सोच की हार” : तानिया भारद्वाज चुनाव नतीजों के बाद तानिया भारद्वाज ने कहा कि वर्ष 2012 में जो हुआ था, वह सत्ता के बढ़ते अहंकार की शुरुआत थी। उन्होंने कहा कि जब सरकारें सवालों का जवाब देने के बजाय सवाल पूछने वालों को बदनाम करने लगती हैं, तो जनता का विश्वास धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। तानिया ने कहा, “यह जनादेश सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं है। यह उस मानसिकता की हार है जो असहमति की आवाज़ को दबाना चाहती थी।” आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले का भी किया जिक्र तानिया भारद्वाज ने अपनी प्रतिक्रिया में आरजी कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस घटना ने बंगाल के युवाओं और आम जनता को झकझोर दिया था। उनके मुताबिक, राज्य के युवाओं ने इस चुनाव में यह संदेश दिया है कि उन्हें डराकर हमेशा चुप नहीं कराया जा सकता। उन्होंने कहा कि जनता अब जवाबदेही और सम्मान चाहती है। बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद बढ़ी चर्चा विधानसभा चुनाव 2026 में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बीजेपी ने 208 सीटें जीतकर पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने का दावा पेश किया है। इसके साथ ही ममता बनर्जी के 15 साल लंबे शासन का अंत हो गया। चुनाव परिणामों के बाद सोशल मीडिया पर तानिया भारद्वाज का पुराना वीडियो और 2012 की घटना फिर वायरल हो रही है। कई लोग उन्हें “लोकतांत्रिक आवाज़” और “बंगाल की साहसी छात्रा” के रूप में पेश कर रहे हैं। “अब किसी छात्र को आतंकवादी नहीं कहा जाएगा” तानिया भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि वे किसी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं करती हैं। उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र नागरिक के रूप में उन्हें यह राहत महसूस हो रही है कि अब शायद कोई छात्र या आम नागरिक सिर्फ सवाल पूछने पर “आतंकवादी” या “माओवादी” नहीं कहलाएगा। उनकी यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में सामने आई है, जब बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव और सत्ता परिवर्तन को लेकर पूरे देश में चर्चा जारी है।  

surbhi मई 27, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Bihar Assistant Professor
जॉब्स

बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के नियम बदले, जानिए कब जरूरी होगा NET ?

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0