असम चुनाव

BJP supporters celebrating Assam election victory as Congress leaders react to major defeats
असम में कांग्रेस को बड़ा झटका: पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे हारे, भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत

Assam Election Results: असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारा झटका लगा है। इस बार पार्टी के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे चुनाव हार गए, जिससे राज्य में कांग्रेस की स्थिति कमजोर होती दिख रही है। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहली बार अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल किया है। गौरव गोगोई की हार ने चौंकाया प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई को जोरहाट सीट से हार का सामना करना पड़ा। उनके पिता तरुण गोगोई 15 साल तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे। गौरव गोगोई को भाजपा के हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने 23,182 वोटों के अंतर से हराया। देबब्रत सैकिया भी नहीं बचा पाए गढ़ विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया भी अपनी पारंपरिक नाजिरा सीट नहीं बचा सके। उनके पिता हितेश्वर सैकिया दो बार मुख्यमंत्री रहे थे। देबब्रत सैकिया को भाजपा के मयूर बोरगोहेन ने 46,000 से अधिक वोटों से हराया। दिगंता बर्मन की बड़ी हार एक और पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र दिगंता बर्मन को भी हार का सामना करना पड़ा। उनके पिता भूमिधर बर्मन कार्यवाहक मुख्यमंत्री रह चुके थे। बरखेत्री सीट पर भाजपा के नारायण डेका ने उन्हें 84,000 से अधिक वोटों के बड़े अंतर से हराया। NDA की प्रचंड जीत, भाजपा का दमदार प्रदर्शन असम में सत्तारूढ़ NDA गठबंधन ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का रास्ता साफ कर लिया है। 126 सदस्यीय विधानसभा में NDA ने 102 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया। भारतीय जनता पार्टी ने अकेले 82 सीटें जीतकर पहली बार अपने दम पर बहुमत हासिल किया। वहीं सहयोगी दलों बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) और असम गण परिषद (AGP) को 10-10 सीटें मिलीं। कांग्रेस के लिए बड़ा संदेश इन नतीजों ने साफ कर दिया है कि असम की राजनीति में वंशवाद का असर कम होता जा रहा है और मतदाता प्रदर्शन के आधार पर फैसले ले रहे हैं। कांग्रेस के लिए यह परिणाम भविष्य की रणनीति को लेकर बड़ा संकेत माना जा रहा है।  

surbhi मई 5, 2026 0
Portrait of Assamese singer Zubeen Garg displayed at polling booth during Assam Elections 2026.
Assam Election 2026: ‘जुबीन गर्ग अमर रहें’-वोटर लिस्ट में नाम बरकरार, भावनाओं ने जीता दिल

गुवाहाटी: असम विधानसभा चुनाव 2026 के बीच एक अनोखी और भावुक खबर सामने आई है। राज्य के लोकप्रिय गायक जुबीन गर्ग के प्रति लोगों के प्यार ने उन्हें चुनावी दस्तावेजों में भी “अमर” बना दिया है। वोटर लिस्ट में ‘जिंदा’ रहे जुबीन गर्ग गुवाहाटी की दिसपुर विधानसभा सीट के एक मतदान केंद्र पर मतदाता सूची में जुबीन गर्ग का नाम अब भी मौजूद SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के बावजूद नाम नहीं हटाया गया BLO ने लिख दिया-‘अमर रहें’ मतदाता सूची अपडेट के दौरान जब नाम हटाने की बारी आई संबंधित BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) भावुक हो गए नाम काटने की जगह लिख दिया-“जुबीन गर्ग अमर रहें” इस मानवीय पहल की हर तरफ सराहना हो रही है पोलिंग बूथ पर दिखा सम्मान मतदान केंद्र के बाहर जुबीन गर्ग की तस्वीर लगाई गई फैंस और स्थानीय लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी यह बूथ चर्चा का केंद्र बन गया असम चुनाव 2026: बड़े चेहरे मैदान में राज्य की 126 सीटों पर वोटिंग जारी है और करीब 2.5 करोड़ मतदाता 722 उम्मीदवारों की किस्मत तय कर रहे हैं। प्रमुख उम्मीदवार हिमंता बिस्वा सरमा (जालुकबाड़ी) गौरव गोगोई (जोरहाट) बदरुद्दीन अजमल (बिन्नाकांडी) अखिल गोगोई (सिबसागर) लुरिनज्योति गोगोई (खोवांग) अतुल बोरा (बोकाखाट)

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
Voters casting ballots at polling stations during Assembly Elections 2026 in Kerala, Assam, and Puducherry.
Assembly Elections 2026: केरल, असम और पुडुचेरी में वोटिंग जारी, PM मोदी ने की अपील

नई दिल्ली/गुवाहाटी/तिरुवनंतपुरम/पुडुचेरी: केरल, असम और पुडुचेरी की सभी विधानसभा सीटों पर आज (गुरुवार, 9 अप्रैल) मतदान जारी है। सुबह 7 बजे से शुरू हुई वोटिंग एक ही चरण में हो रही है। इन राज्यों में कुल 296 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं और नतीजे 4 मई को घोषित होंगे। कहां कितनी सीटों पर मतदान? असम: 126 सीटें केरल: 140 सीटें पुडुचेरी: 30 सीटें असम: 722 उम्मीदवार मैदान में कुल 722 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर करीब 2.50 करोड़ मतदाता मतदान करेंगे 31,490 मतदान केंद्र बनाए गए शाम 5 बजे तक वोटिंग जारी बीजेपी तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश में, कांग्रेस भी जोरदार मुकाबले में केरल: 883 उम्मीदवार, कड़ी सुरक्षा 883 उम्मीदवार चुनावी मैदान में करीब 2.71 करोड़ मतदाता वोट डालेंगे 30,495 मतदान केंद्र स्थापित 1.46 लाख चुनाव कर्मी तैनात सुरक्षा के लिए 76,000 पुलिस और केंद्रीय बल मौजूद PM मोदी की अपील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम, केरल और पुडुचेरी के लोगों से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की। युवाओं और महिलाओं से खासतौर पर आगे आने को कहा लोकतंत्र के इस पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आग्रह नेताओं ने डाला वोट केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने पथानामथिट्टा में मतदान किया मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने धर्मदम सीट पर वोट डाला

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
Assam CM Himanta Biswa Sarma addressing media amid controversy over Congress allegations and FIR filed by his wife
कांग्रेस के आरोपों पर हिमंत बिस्वा सरमा का पलटवार, बोले- “पाकिस्तानी ग्रुप से ली गई फर्जी जानकारी”; पत्नी ने दर्ज कराई FIR

असम विधानसभा चुनाव से पहले सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस द्वारा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद अब सरमा ने जोरदार पलटवार किया है। उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह झूठा और बेबुनियाद बताते हुए दावा किया कि ये जानकारी “पाकिस्तानी सोशल मीडिया ग्रुप” से ली गई है। “फर्जी दस्तावेजों से जनता को गुमराह कर रही कांग्रेस” सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि कांग्रेस नेताओं द्वारा पेश किए गए दस्तावेज फोटोशॉप्ड और फर्जी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह की झूठी जानकारी फैलाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि उनकी टीम की जांच में सामने आया है कि कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस्तेमाल किया गया सामग्री एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया ग्रुप से लिया गया था। सरमा ने यह भी दावा किया कि पिछले 10 दिनों में पाकिस्तान के चैनलों पर असम चुनाव को लेकर कई चर्चा कार्यक्रम हुए, जिनमें कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की गई। पत्नी ने दर्ज कराई FIR इस पूरे विवाद के बीच हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। सरमा ने बताया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए आरोप लगाने पर IPC की धारा 420 और 468 (धोखाधड़ी और जालसाजी) के तहत मामला बनता है। उन्होंने कहा कि चुनाव को प्रभावित करने के लिए इस तरह के आरोप लगाना गंभीर अपराध है और इसमें सख्त सजा का प्रावधान है। उन्हें भरोसा है कि पुलिस इस मामले में उचित कार्रवाई करेगी। कांग्रेस के आरोप क्या हैं? कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सीएम सरमा की पत्नी के पास तीन देशों के पासपोर्ट हैं, जो भारतीय कानून के खिलाफ है क्योंकि भारत में दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है। इसके अलावा कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने विदेश में कंपनी खोलकर निवेश किया और अपनी संपत्ति से जुड़ी जानकारी छुपाई। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर ये दस्तावेज फर्जी हैं तो सरकार इसकी जांच कराए और सच्चाई सामने लाए। बीजेपी का पलटवार बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी बिना तथ्यों के आधार पर आरोप लगा रही है। उन्होंने आरोपों को “हास्यास्पद” बताते हुए कहा कि कांग्रेस को बुनियादी तथ्यों की भी समझ नहीं है। गौरव गोगोई का जवाब वहीं, असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस उनके परिवार की संपत्ति और विदेशों में बिजनेस से जुड़े मामलों का खुलासा करेगी। उन्होंने यह भी मांग की कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो सरमा को अयोग्य घोषित किया जाए और जांच एजेंसियां कार्रवाई करें। चुनाव से पहले बढ़ा सियासी तापमान असम में 9 अप्रैल को मतदान होना है और उससे पहले आरोप-प्रत्यारोप का दौर अपने चरम पर है। मंगलवार को चुनाव प्रचार थम जाएगा, ऐसे में सभी दल आखिरी समय में एक-दूसरे पर हमले तेज कर रहे हैं।  

surbhi अप्रैल 6, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi addressing massive rally in Assam’s Barpeta targeting Congress ahead of elections
असम के बरपेटा में पीएम मोदी की रैली, कांग्रेस पर साधा निशाना; बोले- “हार की सेंचुरी लगेगी”

असम विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बरपेटा में जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास न तो लंबी सोच है और न ही विकास का विजन, यही वजह है कि पार्टी को लगातार चुनावी हार का सामना करना पड़ रहा है। “कांग्रेस की हार की सेंचुरी बनाएंगे असम के लोग” पीएम मोदी ने कहा कि इस बार असम की जनता ने दो बड़े संकल्प लिए हैं-पहला, राज्य में भाजपा-एनडीए की हैट्रिक सुनिश्चित करना और दूसरा, कांग्रेस की हार की “सेंचुरी” पूरी करना। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि दिल्ली में बैठे कांग्रेस के “शाही परिवार” के नामदारों के हार का रिकॉर्ड भी असम के लोग ही बनाएंगे। BJP कार्यकर्ताओं को दी बधाई बीजेपी के स्थापना दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि बीजेपी “नेशन फर्स्ट” के मंत्र के साथ मां भारती की सेवा में समर्पित है। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना है। “बीजेपी देती है रिपोर्ट कार्ड, कांग्रेस नहीं” पीएम मोदी ने कहा कि बीजेपी सरकार हमेशा अपनी उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखती है, जबकि कांग्रेस ऐसा करने से बचती है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी साफ नीयत से काम करती है और जनता को बताती है कि उनके लिए क्या किया गया। “विकसित असम की दिशा में बढ़ रहा राज्य” प्रधानमंत्री ने असम के लोगों से अपील करते हुए कहा कि उनका वोट “विकसित असम” की नींव को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि बीजेपी असम को उस ऊंचाई तक ले जाने के लिए काम कर रही है, जिसका राज्य के लोग हकदार हैं। उन्होंने आगे कहा, “पिछला दशक असम को डर और अस्थिरता से बाहर निकालने के लिए समर्पित था। अब आने वाला दशक असम को आत्मनिर्भर बनाने और उसकी पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का होगा।” किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस पर हमला पीएम मोदी ने किसानों के मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले कांग्रेस सरकार के 10 साल में धान किसानों को केवल 4 लाख करोड़ रुपये का MSP मिला, जबकि पिछले 10 साल में उनकी सरकार ने 16 लाख करोड़ रुपये दिए। उन्होंने यह भी बताया कि 2013 में धान का MSP करीब 1,300 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब बढ़कर लगभग 2,370 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। साथ ही, असम की भाजपा सरकार भी इसमें अतिरिक्त बढ़ोतरी कर रही है। चुनावी माहौल हुआ तेज पीएम मोदी की इस रैली के साथ ही असम में चुनावी माहौल और गरमा गया है। सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में हैं, लेकिन बीजेपी पूरी ताकत के साथ जीत की हैट्रिक लगाने की कोशिश में जुटी हुई है।  

surbhi अप्रैल 6, 2026 0
BJP Assam manifesto announcement highlighting UCC, jobs promise and infrastructure development ahead of elections
असम चुनाव से पहले भाजपा का बड़ा दांव: 31 वादों में UCC, ‘लव जिहाद’ कानून और 10 लाख नौकरियों का ऐलान

गुवाहाटी, 31 मार्च 2026: आगामी चुनावों से पहले Bharatiya Janata Party ने असम के लिए 31 बड़े चुनावी वादों का ऐलान किया है। इस घोषणापत्र में सुरक्षा, रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक योजनाओं पर खास जोर दिया गया है। पार्टी ने अवैध घुसपैठ पर सख्ती, समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने और ‘लव जिहाद’ व ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ मजबूत कानून बनाने का वादा किया है। सुरक्षा और कानून पर सख्त रुख राज्य के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने कहा कि अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और जमीन से जुड़े मामलों में सख्त नीति अपनाई जाएगी। इसके साथ ही UCC लागू करने और विवादित मुद्दों पर कानून लाने का भी ऐलान किया गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर में 5 लाख करोड़ निवेश भाजपा ने असम में सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए बड़े निवेश का वादा किया है। करीब 5 लाख करोड़ रुपये का इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश 18,000 करोड़ रुपये से बाढ़ नियंत्रण योजना (पहले 2 साल में) रोजगार और शिक्षा पर बड़ा फोकस घोषणापत्र में युवाओं के लिए बड़े वादे किए गए हैं: 10 लाख नौकरियां देने का लक्ष्य हर जिले में यूनिवर्सिटी, मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज महिलाओं और गरीबों के लिए योजनाएं 40 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य Orunodoi Scheme के तहत महिलाओं को करीब ₹3,000 सहायता गरीब परिवारों को मुफ्त आवश्यक वस्तुएं चाय बागान मजदूरों के लिए बड़े वादे असम की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले चाय बागान श्रमिकों के लिए भी कई घोषणाएं की गईं: सभी मजदूरों को भूमि पट्टा मजदूरी बढ़ाकर ₹500 प्रतिदिन करने का लक्ष्य आवास योजनाओं का विस्तार क्या है राजनीतिक संदेश? भाजपा का यह घोषणापत्र स्पष्ट संकेत देता है कि पार्टी विकास के साथ-साथ सुरक्षा और पहचान की राजनीति को भी चुनावी एजेंडे में प्रमुखता दे रही है। हालांकि, विपक्ष ने इन वादों को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, जिससे चुनावी मुकाबला और तेज होने के संकेत हैं।  

surbhi मार्च 31, 2026 0
JMM leaders announcing contest on 19 seats in Assam elections 2026 press conference
असम चुनाव 2026: ‘हाथ’ से नहीं चलेगा ‘तीर’, झारखंड मुक्ति मोर्चा ने 19 सीटों पर अकेले उतरने का किया ऐलान

असम विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी तस्वीर अब साफ होती नजर आ रही है। झारखंड में साथ मिलकर सरकार चला रहे झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अब असम में आमने-सामने होंगे। लंबे समय से जारी सीट बंटवारे की बातचीत विफल होने के बाद झामुमो ने राज्य में अकेले चुनाव लड़ने का बड़ा फैसला लिया है। पार्टी के महासचिव और प्रवक्ता विनोद पांडेय ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस के साथ सम्मानजनक समझौता नहीं हो सका, इसलिए अब झामुमो 19 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगा, जबकि एक सीट वाम दलों के लिए छोड़ी गई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दोनों दलों के बीच कई दौर की बातचीत के बावजूद सहमति नहीं बन पाई। दिल्ली से रांची तक चली बातचीत, लेकिन नहीं बनी बात झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद दिल्ली जाकर कांग्रेस नेतृत्व से मिले थे। वहीं असम कांग्रेस के प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई रांची पहुंचकर वार्ता कर चुके थे। इसके बावजूद सीट शेयरिंग पर सहमति नहीं बन सकी। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस झामुमो को पांच से अधिक सीटें देने के पक्ष में नहीं थी, जबकि झामुमो ज्यादा हिस्सेदारी चाहता था। आदिवासी और टी-ट्राइब वोट पर झामुमो की नजर असम की 126 सदस्यीय विधानसभा में 19 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। झामुमो अपनी रणनीति इन्हीं सीटों पर केंद्रित कर रहा है। पार्टी का मानना है कि झारखंड में आदिवासी राजनीति का अनुभव असम में भी असर दिखा सकता है। साथ ही, चाय बागान (टी-ट्राइब) समुदाय को साधने की भी कोशिश की जा रही है, जो राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है। ‘तीर-कमान’ के साथ चुनावी मैदान में निर्वाचन आयोग से झामुमो को असम में भी उसका पारंपरिक चुनाव चिन्ह ‘तीर-कमान’ मिल चुका है। फिलहाल राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, जबकि कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है। झामुमो नेताओं का दावा है कि वे इस चुनाव में मजबूती से उतरेंगे और असम की राजनीति में अपनी ठोस उपस्थिति दर्ज कराएंगे।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
Election strategy of BJP for Assam Kerala and West Bengal polls
तीन राज्यों में BJP का बड़ा चुनावी ब्लूप्रिंट: असम में गठबंधन, केरल में विस्तार और बंगाल में ‘क्लीन स्वीप’ का लक्ष्य

आगामी विधानसभा चुनावों से पहले Bharatiya Janata Party ने असम, केरल और पश्चिम बंगाल को लेकर अपनी व्यापक रणनीति तैयार कर ली है। राजधानी दिल्ली में हुई केंद्रीय चुनाव समिति की अहम बैठक में प्रधानमंत्री Narendra Modi, गृह मंत्री Amit Shah और रक्षा मंत्री Rajnath Singh समेत शीर्ष नेतृत्व ने इन राज्यों में चुनावी गणित और संभावनाओं पर विस्तार से मंथन किया। असम: गठबंधन के साथ चुनावी मैदान Assam में पार्टी ने सहयोगी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। Asom Gana Parishad   Bodoland People's Front   इन दलों के साथ सीट शेयरिंग के जरिए चुनावी मजबूती बढ़ाने की रणनीति बनाई गई है। बताया जा रहा है कि 89 सीटों पर गहन चर्चा हुई है और जल्द ही उम्मीदवारों की सूची जारी की जा सकती है। इस रणनीति में मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की अहम भूमिका रही है। केरल: 100 सीटों पर बड़ा दांव Kerala में पार्टी ने इस बार आक्रामक रणनीति अपनाई है। 140 सदस्यीय विधानसभा में से 100 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का लक्ष्य रखा गया है। पहली सूची में ही कई बड़े नामों को टिकट दिया गया है: Rajeev Chandrasekhar – नेमोम सीट   George Kurian – कांजिराप्पिली सीट   गौरतलब है कि 2021 के चुनाव में पार्टी को यहां एक भी सीट नहीं मिली थी। ऐसे में यह रणनीति राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने और तीसरे विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश मानी जा रही है। बंगाल: पहली बार सत्ता में आने का लक्ष्य West Bengal में पार्टी ने इस बार ‘क्लीन स्वीप’ का लक्ष्य रखा है। बीजेपी 150 से अधिक सीटों पर मजबूत लड़ाई की तैयारी में है। पहले ही 144 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की जा चुकी है, जिसमें प्रमुख चेहरे शामिल हैं: Suvendu Adhikari   Dilip Ghosh   राज्य की कुल 294 सीटों में मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है, क्योंकि सत्तारूढ़ दल All India Trinamool Congress भी 291 सीटों पर उम्मीदवार उतार चुका है। चुनावी टाइमलाइन और सियासी समीकरण Kerala में 9 अप्रैल को एक चरण में मतदान होना है। वहीं कांग्रेस और वाम दल भी अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ मैदान में उतर चुके हैं। बीजेपी का यह पूरा प्लान दर्शाता है कि पार्टी उन राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, जहां अब तक उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली है। आने वाले चुनाव यह तय करेंगे कि यह रणनीति जमीन पर कितनी कारगर साबित होती है।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0