नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देते हुए राजधानी दिल्ली के हैदराबाद हाउस में कई महत्वपूर्ण सहयोग समझौतों (MoC) पर हस्ताक्षर किए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत दौरे पर आईं जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री सनाए तकाइची की मौजूदगी में आयोजित वार्षिक भारत-जापान शिखर सम्मेलन में रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हेल्थकेयर और फार्मास्यूटिकल्स सहित कई रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। भरोसा ही सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत: पीएम मोदी संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सनाए तकाइची का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और जापान के बीच दोस्ती और भरोसे का रिश्ता समय के साथ और मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अस्थिरता के दौर में दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास सबसे बड़ी रणनीतिक पूंजी है। पीएम मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि तकाइची जापान के नारा प्रांत से आती हैं, जो भारत और जापान की साझा बौद्ध विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। इंडो-पैसिफिक में शांति और विकास पर साझा जोर दोनों नेताओं ने स्वतंत्र, समृद्ध और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के निर्माण को साझा प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों और मुक्त बाजार व्यवस्था में विश्वास रखने वाले भारत और जापान क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे। AI, रक्षा और हेल्थ सेक्टर में बढ़ेगा सहयोग शिखर सम्मेलन के दौरान AI क्षेत्र में संयुक्त बयान जारी किया गया, जिसके तहत भारतीय और जापानी संस्थान अत्याधुनिक तकनीक के विकास के लिए मिलकर काम करेंगे। रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों ने पहले को-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर सहमति जताई, जिसके तहत नेवल रेडियो एंटीना ‘यूनिकॉर्न’ विकसित किया जाएगा। इसके अलावा फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी कई समझौते हुए। भारत की उत्पादन क्षमता और जापान की गुणवत्ता विशेषज्ञता को मिलाकर किफायती और उन्नत स्वास्थ्य समाधान विकसित करने पर दोनों देशों ने सहमति जताई।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत और जापान के बीच आज होने वाली शिखर वार्ता में रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी प्रमुख एजेंडा रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री सानाए तकाईची के बीच होने वाली इस बैठक को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है। रक्षा सहयोग को नई गति देने पर जोर सूत्रों के अनुसार, दोनों देश रक्षा उपकरणों के सह-विकास, सैन्य तकनीक के आदान-प्रदान और संयुक्त अभ्यासों को और मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए समुद्री निगरानी और लॉजिस्टिक सहयोग पर भी बातचीत होने की संभावना है। इंडो-पैसिफिक में चीन की गतिविधियों पर नजर विशेषज्ञों का मानना है कि बैठक में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों और समुद्री मार्गों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठ सकता है। भारत और जापान लंबे समय से मुक्त, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का समर्थन करते रहे हैं। आर्थिक और प्रौद्योगिकी सहयोग पर भी चर्चा रक्षा मामलों के अलावा दोनों नेता सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने के विकल्पों पर विचार करेंगे। जापानी निवेश को भारत में बढ़ावा देने और सप्लाई चेन साझेदारी को मजबूत करने पर भी जोर रहने की उम्मीद है। क्वाड सहयोग को मिलेगा बल यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब क्वाड समूह—भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया—क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा पर अपना सहयोग बढ़ा रहे हैं। माना जा रहा है कि आज की बैठक से भारत-जापान रणनीतिक संबंधों को नई दिशा मिल सकती है।
ताइपे/बीजिंग: एक ओर स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और मध्य पूर्व में शांति बहाल करने के लिए बातचीत जारी है, वहीं एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन ने ताइवान को लेकर नई रणनीति अपनानी शुरू कर दी है। ताइवान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने दावा किया है कि बीजिंग अब सीधे सैन्य टकराव के बजाय "हाइब्रिड युद्ध" (Hybrid Warfare) के जरिए ताइवान पर दबाव बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। ताइवान राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थान के उप महासचिव हो चेंगहुई ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में कहा कि चीन अपनी रणनीति में तटरक्षक बल, वैज्ञानिक अनुसंधान पोत, आर्थिक दबाव, दुष्प्रचार अभियान और मनोवैज्ञानिक रणनीतियों का इस्तेमाल कर रहा है। उनका कहना है कि बीजिंग बिना औपचारिक युद्ध छेड़े ताइवान की सुरक्षा और जनमत को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। क्या होता है हाइब्रिड युद्ध? हाइब्रिड युद्ध ऐसी रणनीति है, जिसमें किसी देश पर दबाव बनाने के लिए सीधे सैन्य कार्रवाई के बजाय साइबर हमले, दुष्प्रचार, आर्थिक प्रतिबंध, राजनीतिक हस्तक्षेप, खुफिया अभियानों और कानूनी दावों जैसे गैर-पारंपरिक उपायों का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य प्रतिद्वंद्वी देश को अंदर से कमजोर करना और अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाना होता है। रूस-यूक्रेन और ईरान संघर्ष से सबक ले रहा चीन हो चेंगहुई के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान से जुड़े हालिया घटनाक्रमों ने चीन को यह एहसास कराया है कि खुले युद्ध के जरिए राजनीतिक लक्ष्य हासिल करना कठिन और महंगा साबित हो सकता है। ऐसे में बीजिंग अब ऐसी रणनीतियों पर अधिक ध्यान दे रहा है, जो युद्ध की सीमा से नीचे रहकर भी प्रतिद्वंद्वी पर दबाव बना सकें। उन्होंने कहा कि चीन समुद्री दावों, तटरक्षक जहाजों की तैनाती और प्रचार अभियानों के माध्यम से ताइवान के साथ-साथ जापान और फिलीपींस जैसे क्षेत्रीय देशों पर भी कूटनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। तटरक्षक बल बना चीन की नई रणनीति का हथियार ताइवान के सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि चीन का तटरक्षक बल उसकी हाइब्रिड रणनीति का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है। चीनी जहाज विवादित समुद्री क्षेत्रों में लगातार गतिविधियां बढ़ा रहे हैं, जिससे अनिश्चितता और तनाव का माहौल पैदा हो रहा है। हो चेंगहुई ने ताइवान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ), ताइवान स्ट्रेट की मध्य रेखा और किनमेन-मात्सु द्वीपों के आसपास के समुद्री इलाकों को भविष्य में चीनी गतिविधियों का संभावित केंद्र बताया है। फिलीपींस मॉडल अपनाने की सलाह ताइवान के सुरक्षा विशेषज्ञों ने सरकार को फिलीपींस की "पूर्ण पारदर्शिता नीति" अपनाने की सलाह दी है। उनके अनुसार, फिलीपींस ने चीनी समुद्री घुसपैठ की घटनाओं को सार्वजनिक कर और उनका दस्तावेजीकरण करके बीजिंग के दुष्प्रचार का प्रभावी मुकाबला किया है। उन्होंने सुझाव दिया कि ताइवान भी अपने बाहरी द्वीपों के आसपास तटरक्षक गश्त का लाइव प्रसारण शुरू कर सकता है। साथ ही जापान और फिलीपींस के साथ खुफिया जानकारी साझा करने, संयुक्त समुद्री निगरानी और कानून प्रवर्तन सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच चीन की यह नई रणनीति एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक नए प्रकार की भू-राजनीतिक चुनौती को जन्म दे सकती है, जहां सीधे युद्ध के बजाय हाइब्रिड रणनीतियां भविष्य की प्रतिस्पर्धा का प्रमुख माध्यम बन सकती हैं।
काठमांडू, एजेंसियां। जापान के बाद अब नेपाल ने भारत से आम मंगाने पर रोक लगा दी है। नेपाल के अधिकारियों का कहना है कि जांच में कुछ खेपों में तय सीमा से ज्यादा कीटनाशक मिले। नेपाल सरकार के मुताबिक, यह फैसला खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन कराने के लिए लिया गया है। सरकार ने साफ किया कि इसका मकसद भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों को प्रभावित करना नहीं है। रोक लगने से पहले करीब 15.8 मीट्रिक टन भारतीय आम नेपाल पहुंच चुके थे। इनकी कीमत लगभग 10 लाख नेपाली रुपये बताई गई है। जापान ने सफाई कारणों से लगाई रोक यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब पिछले महीने जापान ने भी भारतीय आमों के आयात पर रोक लगाई थी। हालांकि जापान ने यह कदम कीटनाशकों की वजह से नहीं, बल्कि जांच और सफाई से जुड़े नियमों में कमी मिलने पर उठाया था। जापान के फैसले से अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी भारतीय आम की मशहूर किस्मों का निर्यात प्रभावित हुआ था। करीब 20 साल में पहली बार जापान ने भारतीय आमों पर ऐसी रोक लगाई थी।
जापान के कॉर्पोरेट जगत में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। दुनिया की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनियों में शामिल Toyota Motor Corporation अब जापान की सबसे वैल्यूएबल कंपनी नहीं रही। करीब 26 वर्षों बाद कंपनी को मार्केट कैपिटलाइजेशन के मामले में शीर्ष स्थान गंवाना पड़ा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी के चलते SoftBank Group और KIOXIA Holdings Corporation ने टोयोटा को पीछे छोड़ दिया है। सॉफ्टबैंक बनी जापान की सबसे वैल्यूएबल कंपनी सोमवार के कारोबार में सॉफ्टबैंक ग्रुप के शेयरों में करीब 14 प्रतिशत की तेज उछाल देखने को मिली। इस तेजी के साथ कंपनी का मार्केट कैप लगभग 304 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिससे वह जापान की सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई। सॉफ्टबैंक के चेयरमैन Masayoshi Son लगातार AI और नई तकनीकों में बड़े निवेश कर रहे हैं। कंपनी का जुड़ाव OpenAI और SB Energy जैसी परियोजनाओं से भी है, जिसने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। इस साल सॉफ्टबैंक के शेयरों में 80 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई है। KIOXIA ने भी टोयोटा को छोड़ा पीछे सिर्फ सॉफ्टबैंक ही नहीं, बल्कि KIOXIA Holdings के शेयरों में भी लगभग 11 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली। इस उछाल के बाद KIOXIA का मार्केट कैप करीब 249.82 अरब डॉलर पहुंच गया, जो टोयोटा के 247.56 अरब डॉलर के मार्केट कैप से अधिक है। इस तरह जापान की दो तकनीकी कंपनियां मार्केट वैल्यू के मामले में टोयोटा से आगे निकल गई हैं। क्यों पिछड़ रही है टोयोटा? हालांकि टोयोटा आज भी दुनिया की सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनियों में शामिल है, लेकिन निवेशकों की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं। मुख्य कारण: AI और सेमीकंडक्टर कंपनियों में बढ़ता निवेश टेक्नोलॉजी सेक्टर में तेज ग्रोथ की उम्मीद चीनी इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा ऑटोमोबाइल सेक्टर में अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि वहीं इस साल टोयोटा के शेयरों में लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों का झुकाव अब AI की ओर वैश्विक बाजारों में इस समय AI सबसे बड़ा निवेश विषय बना हुआ है। अमेरिका, जापान और चीन समेत दुनिया भर के निवेशक उन कंपनियों में पैसा लगा रहे हैं जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, चिप निर्माण और क्लाउड टेक्नोलॉजी से जुड़ी हैं। इसी वजह से सॉफ्टबैंक जैसी कंपनियों को जबरदस्त फायदा मिल रहा है, जबकि पारंपरिक उद्योगों की कंपनियां निवेशकों का उतना ध्यान आकर्षित नहीं कर पा रही हैं। दुनिया की वैल्यूएबल कंपनियों में जापान की स्थिति मार्केट कैप के आधार पर वैश्विक रैंकिंग में सॉफ्टबैंक अब दुनिया की 48वीं सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई है। हालिया तेजी के बाद उसकी रैंकिंग में 13 स्थानों का सुधार हुआ है। दूसरी ओर टोयोटा 70वें स्थान पर खिसक गई है। वैश्विक स्तर पर: टॉप 10 में 8 कंपनियां अमेरिका की हैं। टॉप 100 में चीन की 11 कंपनियां शामिल हैं। जापान की 4 कंपनियों को जगह मिली है। भारत की कोई भी कंपनी अभी टॉप 100 वैल्यूएबल कंपनियों की सूची में शामिल नहीं है। क्या संकेत देता है यह बदलाव? टोयोटा का शीर्ष स्थान गंवाना केवल एक कंपनी की रैंकिंग बदलने की कहानी नहीं है, बल्कि यह वैश्विक निवेश ट्रेंड में आए बड़े बदलाव का संकेत भी है। निवेशक अब पारंपरिक ऑटोमोबाइल उद्योग से ज्यादा AI, सेमीकंडक्टर और उभरती तकनीकों पर दांव लगा रहे हैं। यदि यही रुझान जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों की सूची में तकनीकी कंपनियों का दबदबा और बढ़ सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।