नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय स्मार्टफोन कंपनी Lava ने अपना नया स्मार्टफोन Lava Virat V1 5G भारत में लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इसे बजट सेगमेंट के यूजर्स को ध्यान में रखते हुए पेश किया है। फोन में बड़ी बैटरी, 5G कनेक्टिविटी और क्लीन एंड्रॉयड अनुभव जैसे फीचर्स दिए गए हैं। Lava Virat V1 5G की कीमत और बिक्री Lava Virat V1 5G को भारत में ₹11,999 की शुरुआती कीमत के साथ लॉन्च किया गया है। इसके साथ ही कंपनी ने इसका 4G मॉडल Lava Virat V1 भी पेश किया है, जिसकी कीमत करीब ₹8,999 रखी गई है। दोनों स्मार्टफोन की बिक्री ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और Lava की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से शुरू होगी। 6000mAh बैटरी और 5G कनेक्टिविटी मुख्य आकर्षण Lava Virat V1 5G की सबसे बड़ी खासियत इसकी 6000mAh की बड़ी बैटरी है। कंपनी का दावा है कि यह फोन लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए बेहतर बैकअप देगा। इसमें 5G नेटवर्क सपोर्ट दिया गया है, जिससे यूजर्स तेज इंटरनेट स्पीड का अनुभव कर सकेंगे। फोन में वर्चुअल रैम एक्सपेंशन, IP64 रेटिंग और स्टॉक एंड्रॉयड अनुभव जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं। कंपनी ने इसमें अनावश्यक ऐप्स (Bloatware) को कम रखने पर जोर दिया है। कैमरा और डिस्प्ले पर भी कंपनी का फोकस Lava Virat V1 5G में 13 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया है। कंपनी ने इसे युवाओं और बजट स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया है। बड़े डिस्प्ले और बेहतर बैटरी बैकअप के साथ यह फोन रोजमर्रा के उपयोग, सोशल मीडिया और मनोरंजन के लिए तैयार किया गया है। भारतीय स्मार्टफोन बाजार में Lava की वापसी की कोशिश Lava लगातार बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। कंपनी का लक्ष्य भारतीय ग्राहकों को किफायती कीमत में बेहतर फीचर्स वाले फोन उपलब्ध कराना है। Virat सीरीज इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। बजट 5G फोन बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा भारत में ₹10,000 से ₹15,000 के बीच 5G स्मार्टफोन की मांग तेजी से बढ़ रही है। Lava Virat V1 5G की एंट्री के बाद इस सेगमेंट में पहले से मौजूद अन्य कंपनियों के साथ मुकाबला और बढ़ने की उम्मीद है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। स्मार्टफोन कंपनी OnePlus अपने नए बजट स्मार्टफोन OnePlus N6x को भारतीय बाजार में लॉन्च करने की तैयारी में है। कंपनी ने इस फोन की लॉन्च तारीख की घोषणा कर दी है। यह स्मार्टफोन 31 जुलाई 2026 को भारत में पेश किया जाएगा और इसकी सबसे बड़ी खासियत 7000mAh की बड़ी बैटरी होगी। 31 जुलाई को होगा लॉन्च, बैटरी पर कंपनी का फोकस OnePlus N6x को कंपनी अपने बजट स्मार्टफोन लाइनअप के विस्तार के तौर पर पेश कर रही है। OnePlus के अनुसार, फोन में 7000mAh बैटरी दी जाएगी, जो लंबे समय तक इस्तेमाल का दावा करती है। कंपनी ने टेस्टिंग के आधार पर इसमें करीब 2.5 दिन तक बैटरी बैकअप मिलने की बात कही है। बड़ी बैटरी के साथ यह फोन उन यूजर्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जो गेमिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और लंबे समय तक फोन इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। Nord सीरीज जैसा डिजाइन, बजट सेगमेंट में मुकाबला रिपोर्ट्स के मुताबिक, OnePlus N6x का डिजाइन कंपनी के Nord सीरीज के स्मार्टफोन्स से मिलता-जुलता हो सकता है। फोन में नए कलर ऑप्शन और प्रीमियम लुक देने की कोशिश की गई है। कंपनी इस फोन के जरिए ₹15 हजार से ₹20 हजार रुपये वाले स्मार्टफोन बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जहां पहले से ही कई कंपनियां दमदार बैटरी और 5G फीचर्स के साथ मौजूद हैं। कैमरा और अन्य फीचर्स पर भी नजर OnePlus ने लॉन्च से पहले फोन की बैटरी को मुख्य आकर्षण बनाया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसमें डुअल रियर कैमरा सेटअप और 3.5mm हेडफोन जैक जैसे फीचर्स मिलने की उम्मीद है। हालांकि कंपनी ने अभी पूरी स्पेसिफिकेशन और कीमत का खुलासा नहीं किया है। फोन की कीमत और प्रोसेसर से जुड़ी जानकारी लॉन्च इवेंट में सामने आने की संभावना है। बजट 5G स्मार्टफोन बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा भारत में बजट 5G स्मार्टफोन की मांग लगातार बढ़ रही है। बड़ी बैटरी, बेहतर डिस्प्ले और AI फीचर्स के साथ कंपनियां इस सेगमेंट में नए मॉडल लॉन्च कर रही हैं। OnePlus N6x की एंट्री के बाद इसका मुकाबला अन्य बजट 5G स्मार्टफोन्स से होगा। अब ग्राहकों की नजर इसकी कीमत, कैमरा और परफॉर्मेंस पर टिकी हुई है।
वॉशिंगटन, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चेतावनी दी है कि वित्तीय क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से बढ़ता उपयोग जहां बैंकिंग और भुगतान सेवाओं को अधिक कुशल बना रहा है, वहीं इससे साइबर सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता के लिए नए जोखिम भी पैदा हो रहे हैं। आईएमएफ ने कहा कि यदि AI से जुड़े जोखिमों के लिए समय रहते प्रभावी नियामकीय ढांचा नहीं बनाया गया, तो भविष्य में इसका असर पूरे वैश्विक वित्तीय तंत्र पर पड़ सकता है। बैंकिंग और भुगतान प्रणाली पर बढ़ सकता है खतरा आईएमएफ की रिपोर्ट के अनुसार, AI की मदद से साइबर हमलावर पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से सुरक्षा कमजोरियों का पता लगा सकते हैं और बड़े पैमाने पर हमले कर सकते हैं। बैंक, भुगतान नेटवर्क, क्लाउड सेवाएं और साझा डिजिटल अवसंरचना ऐसे हमलों से सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। संस्था ने आगाह किया कि यदि एक ही तकनीकी प्लेटफॉर्म पर निर्भर कई वित्तीय संस्थानों पर एक साथ हमला हुआ, तो यह वित्तीय स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। वैश्विक सहयोग और कड़े नियमन पर जोर आईएमएफ ने सरकारों, केंद्रीय बैंकों और वित्तीय नियामकों से AI आधारित जोखिमों के लिए स्पष्ट नियम बनाने, साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने और सार्वजनिक-निजी सहयोग बढ़ाने की अपील की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि AI के लाभ तभी सुरक्षित रहेंगे, जब इसके साथ मजबूत निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित नियमन भी विकसित किया जाए।
Apple के अगले फ्लैगशिप स्मार्टफोन iPhone 18 Pro को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कंपनी की ओर से अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन कई लीक रिपोर्ट्स में इसके डिजाइन, कैमरा, बैटरी, प्रोसेसर और AI फीचर्स से जुड़ी अहम जानकारियां सामने आई हैं। माना जा रहा है कि Apple इस साल सितंबर में अपने नए iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को पेश कर सकता है। हालांकि, फिलहाल सामने आई सभी जानकारियां लीक रिपोर्ट्स पर आधारित हैं और Apple ने इनमें से किसी भी फीचर की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सितंबर में हो सकता है लॉन्च रिपोर्ट्स के मुताबिक, Apple अपना वार्षिक लॉन्च इवेंट सितंबर 2026 में आयोजित कर सकता है। संभावना है कि इवेंट 8 या 9 सितंबर को आयोजित हो और इसके कुछ दिनों बाद नए iPhone की बिक्री शुरू हो जाए। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इस बार Apple लॉन्च रणनीति में बदलाव कर सकता है। इसके तहत सितंबर में केवल iPhone 18 Pro, iPhone 18 Pro Max और कंपनी का पहला फोल्डेबल iPhone पेश किया जा सकता है, जबकि स्टैंडर्ड iPhone 18 मॉडल्स को 2027 की शुरुआत तक लॉन्च किया जा सकता है। डिजाइन में छोटे लेकिन अहम बदलाव लीक्स के अनुसार, iPhone 18 Pro का डिजाइन मौजूदा Pro सीरीज जैसा ही रहेगा। संभावित बदलावों में शामिल हैं- फ्लैट-एज डिजाइन बरकरार रहेगा। ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिलेगा। कैमरा मॉड्यूल पहले से थोड़ा बड़ा हो सकता है। बड़ी बैटरी और बेहतर कूलिंग सिस्टम के कारण फोन थोड़ा मोटा और भारी हो सकता है। नए Dark Cherry कलर के साथ Light Blue, Silver और Dark Grey रंग मिलने की संभावना है। Dynamic Island हो सकता है छोटा रिपोर्ट्स के अनुसार- iPhone 18 Pro में 6.3 इंच डिस्प्ले iPhone 18 Pro Max में 6.9 इंच डिस्प्ले मिल सकता है। कहा जा रहा है कि Face ID के कुछ सेंसर डिस्प्ले के नीचे शिफ्ट किए जा सकते हैं, जिससे Dynamic Island पहले की तुलना में छोटा दिखाई दे सकता है। इसके अलावा LTPO+ OLED डिस्प्ले मिलने की भी संभावना जताई जा रही है, जिससे बैटरी एफिशिएंसी बेहतर हो सकती है। नई A20 Pro चिप दे सकती है AI बूस्ट iPhone 18 Pro सीरीज में Apple की नई A20 Pro चिप मिलने की उम्मीद है, जिसे TSMC की 2nm प्रोसेस टेक्नोलॉजी पर तैयार किया जा सकता है। इससे यूजर्स को- तेज़ प्रोसेसिंग बेहतर गेमिंग कम बैटरी खपत ऑन-डिवाइस AI फीचर्स अधिक स्मार्ट Siri अनुभव जैसे फायदे मिल सकते हैं। बैटरी पर भी रहेगा खास फोकस बैटरी को लेकर भी इस बार बड़ा अपग्रेड देखने को मिल सकता है। लीक्स के मुताबिक, iPhone 18 Pro Max में लगभग 5,391mAh से 5,567mAh तक की बैटरी दी जा सकती है। बड़ी बैटरी की वजह से फोन का वजन और मोटाई थोड़ा बढ़ सकती है। कैमरे में मिल सकते हैं बड़े बदलाव Apple इस बार ट्रिपल 48MP कैमरा सिस्टम को बरकरार रख सकता है, लेकिन कैमरा हार्डवेयर में कई नए सुधार देखने को मिल सकते हैं। संभावित फीचर्स- Variable Aperture Main Camera नया Stacked Image Sensor बेहतर Telephoto Camera 24MP फ्रंट कैमरा Pressure-Sensitive Camera Control Button इन बदलावों से फोटोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग का अनुभव पहले से बेहतर होने की उम्मीद है। नई कनेक्टिविटी और AI फीचर्स रिपोर्ट्स के अनुसार, iPhone 18 Pro में Apple का नया C2 Modem दिया जा सकता है, जिससे नेटवर्क स्पीड और पावर एफिशिएंसी बेहतर होगी। इसके अलावा- एडवांस Satellite Connectivity iOS 27 नई Siri Apple Intelligence आधारित AI फीचर्स भी मिलने की संभावना है। कीमत बढ़ने की संभावना Apple ने अभी तक कीमत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि नई 2nm चिप, बड़ी बैटरी और कैमरा अपग्रेड के कारण iPhone 18 Pro सीरीज की कीमत पिछले मॉडल्स की तुलना में अधिक हो सकती है। हालांकि, कंपनी की ओर से आधिकारिक घोषणा होने तक इन जानकारियों को केवल लीक रिपोर्ट्स के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
आज के दौर में स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैबलेट के साथ ऑडियो डिवाइस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। लोग संगीत, कॉल, पॉडकास्ट और वीडियो सुनने के लिए घंटों तक ईयरबड्स या हेडफोन का उपयोग करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इनमें से कौन-सा डिवाइस आपके कानों के लिए सबसे सुरक्षित है? विशेषज्ञों के अनुसार, केवल डिवाइस ही नहीं बल्कि उसे इस्तेमाल करने का तरीका भी आपकी सुनने की क्षमता पर बड़ा असर डालता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का अनुमान है कि असुरक्षित तरीके से तेज आवाज में ऑडियो सुनने की आदत के कारण दुनिया भर में 1 अरब से अधिक युवा सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचाने के खतरे में हैं। Earbuds, Headphones और Bone-Conduction डिवाइस में क्या है अंतर? Earbuds: ईयरबड्स सीधे कान की नली (Ear Canal) में लगाए जाते हैं। तेज आवाज और लंबे समय तक इनके इस्तेमाल से कान के पर्दे पर अधिक दबाव पड़ सकता है। गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर संक्रमण और सुनने की क्षमता प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ जाता है। Over-Ear Headphones: ये पूरे कान को ढक लेते हैं और बाहरी शोर को काफी हद तक कम कर देते हैं। इससे कम आवाज में भी ऑडियो स्पष्ट सुनाई देता है, जिससे कानों पर दबाव कम पड़ता है। Bone-Conduction Devices: ये डिवाइस गाल की हड्डियों (Cheekbones) के जरिए ध्वनि पहुंचाते हैं और कान की नली खुली रहती है। इसलिए बाहर की आवाज भी सुनाई देती रहती है। दौड़ने, साइकिल चलाने या सार्वजनिक स्थानों पर इनका इस्तेमाल अधिक सुरक्षित माना जाता है। विशेषज्ञ क्या कहते हैं? पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक के वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. मुरारजी घाडगे के अनुसार, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप किस आवाज में और कितनी देर तक ऑडियो सुनते हैं। तेज वॉल्यूम और लंबे समय तक लगातार सुनना सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचाने का सबसे बड़ा कारण है। उनका कहना है कि सामान्य तौर पर Over-Ear Headphones, ईयरबड्स की तुलना में अधिक सुरक्षित माने जाते हैं क्योंकि इनमें कम वॉल्यूम पर भी बेहतर ऑडियो अनुभव मिलता है। WHO की Safe Listening Guidelines विशेषज्ञ और WHO सुरक्षित सुनने के लिए कुछ जरूरी सुझाव देते हैं: वॉल्यूम को अधिकतम 60% तक रखें। लगातार 60 मिनट से अधिक ऑडियो न सुनें। हर घंटे कम से कम 5 से 10 मिनट का ब्रेक लें। सोते समय ईयरफोन या ईयरबड्स का इस्तेमाल न करें। बच्चों और किशोरों को तेज आवाज में ऑडियो सुनने से बचाएं। यदि कानों में घंटी बजने (Tinnitus), सुनने में कठिनाई या कान बंद होने जैसा महसूस हो तो तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से सलाह लें। Noise-Cancelling हेडफोन क्यों हो सकते हैं बेहतर? Noise-Cancelling हेडफोन बाहरी शोर को कम कर देते हैं, जिससे उपयोगकर्ता को आवाज तेज करने की जरूरत नहीं पड़ती। यही वजह है कि लंबी यात्रा, फ्लाइट या भीड़भाड़ वाली जगहों पर ये कानों के लिए बेहतर विकल्प माने जाते हैं। किन संकेतों को नजरअंदाज न करें? यदि आपको ये समस्याएं महसूस हो रही हैं, तो यह सुनने की क्षमता प्रभावित होने का संकेत हो सकता है: कानों में लगातार घंटी बजना आवाज साफ सुनाई न देना बातचीत समझने में परेशानी ऑडियो सुनने के बाद कान बंद महसूस होना लोगों से बार-बार बात दोहराने के लिए कहना कौन-सा डिवाइस है सबसे सुरक्षित? विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो Noise-Cancelling Over-Ear Headphones सबसे सुरक्षित विकल्प माने जाते हैं। वहीं बाहर की गतिविधियों के दौरान Bone-Conduction Devices बेहतर विकल्प हो सकते हैं। दूसरी ओर, तेज आवाज में लंबे समय तक Earbuds का इस्तेमाल सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है। कुल मिलाकर, डिवाइस से ज्यादा जरूरी है कि आप कम वॉल्यूम, सीमित समय और नियमित ब्रेक के साथ ऑडियो सुनने की आदत अपनाएं।
सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में बड़ा नाम बन चुकी Meta अब एक नए AI-पावर्ड वियरेबल डिवाइस पर काम कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी एक ऐसे स्मार्ट AI पेंडेंट की टेस्टिंग की तैयारी कर रही है जिसे यूजर्स गले में पहन सकेंगे या अपनी शर्ट पर क्लिप कर सकेंगे। यह डिवाइस केवल एक एक्सेसरी नहीं होगा, बल्कि बातचीत को सुनने, रिकॉर्ड करने और उसे व्यवस्थित करने में सक्षम AI असिस्टेंट की तरह काम करेगा। Meta का नया AI पेंडेंट क्या करेगा? लीक हुए एक इंटरनल मेमो के अनुसार, Meta अगले एक साल के भीतर इस डिवाइस की टेस्टिंग शुरू कर सकती है। बताया जा रहा है कि यह तकनीक उस AI पेंडेंट पर आधारित होगी जिसे Limitless AI ने विकसित किया था। Limitless का डिवाइस यूजर्स की बातचीत को रिकॉर्ड और प्रोसेस कर सकता था। इसे दो तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता था: गले में पेंडेंट की तरह पहनकर शर्ट या कपड़ों पर क्लिप लगाकर इसके जरिए AI असिस्टेंट आसपास की बातचीत को कैप्चर करता था और बाद में उसे व्यवस्थित जानकारी के रूप में उपलब्ध कराता था। Meta ने क्यों खरीदी थी Limitless? 2025 के आखिर में Meta ने Limitless का अधिग्रहण किया था। कंपनी का मानना था कि इस तकनीक की मदद से AI आधारित हार्डवेयर जैसे: स्मार्ट ग्लासेज स्मार्ट वॉच AI असिस्टेंट डिवाइस को तेजी से विकसित किया जा सकेगा। Meta लंबे समय से AI को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाने की दिशा में काम कर रही है और यह पेंडेंट उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। बातचीत रिकॉर्ड करने पर उठ सकते हैं सवाल AI पेंडेंट का सबसे चर्चित फीचर इसकी बातचीत रिकॉर्ड करने की क्षमता है। हालांकि यही फीचर इसकी सबसे बड़ी चुनौती भी बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे डिवाइस को लेकर तीन प्रमुख चिंताएं सामने आती हैं: प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा बातचीत रिकॉर्ड होने की पारदर्शिता संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग का जोखिम पिछले कुछ AI वियरेबल डिवाइस भी इन्हीं कारणों से बड़े पैमाने पर लोकप्रिय नहीं हो सके थे। AI वियरेबल्स पर बढ़ रहा है दांव AI हार्डवेयर को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। Meta के अलावा OpenAI सहित कई बड़ी टेक कंपनियां ऐसे उपकरण विकसित कर रही हैं जो स्मार्टफोन के बाद अगली बड़ी तकनीकी क्रांति बन सकते हैं। कंपनियों का मानना है कि भविष्य में AI सिर्फ मोबाइल ऐप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सीधे पहनने वाले डिवाइसों के जरिए लोगों के साथ लगातार जुड़ा रहेगा। "Wearables for Work" भी ला सकती है Meta रिपोर्ट्स के अनुसार Meta केवल AI पेंडेंट तक सीमित नहीं रहने वाली। कंपनी अपने AI-संचालित स्मार्ट ग्लासेज पोर्टफोलियो का भी विस्तार कर रही है। इसके अलावा Meta "Wearables for Work" नाम से एक नई सब्सक्रिप्शन सेवा लॉन्च करने की तैयारी में है, जो विशेष रूप से: कॉर्पोरेट यूजर्स ऑफिस कर्मचारियों एंटरप्राइज ग्राहकों को ध्यान में रखकर विकसित की जा रही है। क्या बदल सकता है AI का भविष्य? यदि Meta का यह प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो AI असिस्टेंट को इस्तेमाल करने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। स्मार्टफोन निकालने की जरूरत के बिना यूजर्स सीधे अपने पहनने वाले डिवाइस के जरिए नोट्स, बातचीत और जानकारी को मैनेज कर सकेंगे। हालांकि इसकी सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि Meta प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा से जुड़े सवालों का समाधान किस तरह करती है।
डिजिटल युग में तेजी से हो रहे बदलावों ने करियर के पारंपरिक रास्तों को पूरी तरह बदल दिया है। इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)–एक ऐसी तकनीक जो न सिर्फ काम करने के तरीके को बदल रही है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रही है। आज कंपनियां ऐसे प्रोफेशनल्स की तलाश में हैं जो AI को समझते हों और उसे प्रभावी ढंग से लागू कर सकें। अगर आप भी अपने करियर को भविष्य के हिसाब से तैयार करना चाहते हैं, तो AI से जुड़ी कुछ अहम स्किल्स सीखना अब विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन गया है। AI क्यों बन गया है करियर का सबसे बड़ा ट्रेंड? AI अब सिर्फ टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रहा। हेल्थकेयर, बैंकिंग, एजुकेशन, ई-कॉमर्स और मार्केटिंग जैसे हर सेक्टर में इसका इस्तेमाल हो रहा है। कंपनियां अपने काम को तेज, सटीक और ऑटोमेटेड बनाने के लिए AI पर निर्भर होती जा रही हैं। यही वजह है कि AI स्किल्स रखने वाले प्रोफेशनल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है और उन्हें आकर्षक सैलरी पैकेज भी मिल रहे हैं। ये 6 AI स्किल्स बना सकती हैं आपका करियर 1. मशीन लर्निंग (Machine Learning) AI की नींव मानी जाने वाली यह स्किल कंप्यूटर को डेटा के आधार पर खुद सीखने और निर्णय लेने की क्षमता देती है। इस फील्ड में काम करने वाले डेटा साइंटिस्ट और AI इंजीनियर की डिमांड काफी ज्यादा है। 2. डेटा एनालिसिस (Data Analysis) AI का पूरा खेल डेटा पर टिका है। डेटा को समझना, उसका विश्लेषण करना और उससे सही निष्कर्ष निकालना एक जरूरी स्किल है। Python, SQL और Excel जैसे टूल्स इसमें आपकी मदद करते हैं। 3. प्रोग्रामिंग स्किल्स AI में करियर बनाने के लिए कोडिंग का ज्ञान बेहद जरूरी है। खासतौर पर Python, Java और R जैसी प्रोग्रामिंग भाषाएं इस फील्ड में अहम भूमिका निभाती हैं। 4. डीप लर्निंग (Deep Learning) यह AI का एडवांस्ड हिस्सा है, जिसमें Neural Networks के जरिए मशीनों को इंसानों की तरह सोचने और समझने की क्षमता दी जाती है। इसका इस्तेमाल फेस रिकग्निशन, रोबोटिक्स और सेल्फ-ड्राइविंग टेक्नोलॉजी में होता है। 5. क्लाउड कंप्यूटिंग (Cloud Computing) AI मॉडल्स को रन करने के लिए हाई कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है, जो AWS, Google Cloud और Microsoft Azure जैसे प्लेटफॉर्म्स से मिलती है। इस स्किल के जरिए आप बड़े स्तर पर काम कर सकते हैं। 6. कम्युनिकेशन और प्रॉब्लम सॉल्विंग टेक्निकल स्किल्स के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि आप अपनी सोच को स्पष्ट तरीके से व्यक्त कर सकें और समस्याओं का समाधान निकाल सकें। टीमवर्क और क्रिएटिविटी आज हर कंपनी की प्राथमिकता है। AI फील्ड में कितनी है कमाई? AI सेक्टर में सैलरी पैकेज काफी आकर्षक होते हैं। एक शुरुआती प्रोफेशनल सालाना 6 से 10 लाख रुपये तक कमा सकता है। वहीं अनुभव और विशेषज्ञता बढ़ने के साथ यह आंकड़ा करोड़ों तक पहुंच सकता है। इसके अलावा फ्रीलांसिंग और स्टार्टअप के जरिए भी कमाई के बड़े अवसर मौजूद हैं।
टेक जगत में एक बार फिर Xiaomi के आगामी फ्लैगशिप स्मार्टफोन को लेकर हलचल तेज हो गई है। हालिया लीक के मुताबिक, कंपनी अपने नए प्रीमियम डिवाइस Xiaomi 18 Pro पर काम कर रही है, जिसमें एक खास डेडिकेटेड AI बटन और कुछ सूक्ष्म डिजाइन बदलाव देखने को मिल सकते हैं। डिजाइन में क्या नया? ऑनलाइन सामने आए कथित रेंडर्स से संकेत मिलता है कि फोन के साइड में एक नया फिजिकल बटन दिया जा सकता है, जिस पर AI ब्रांडिंग होगी। यह बटन यूजर्स को एक टैप में कई स्मार्ट फीचर्स एक्सेस करने की सुविधा देगा। बताया जा रहा है कि यह बटन: स्मार्ट होम डिवाइसेज को कंट्रोल करने में मदद करेगा कनेक्टेड कार फीचर्स को मैनेज करेगा और AI आधारित टूल्स जैसे “Xiaomi Miclaw” तक तुरंत पहुंच देगा हालांकि कंपनी ने अभी तक इन फीचर्स की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। कैमरा और सेकेंडरी डिस्प्ले रेंडर में डिवाइस का कैमरा मॉड्यूल भी दिखा है, जिसमें: दो बड़े कैमरा लेंस और पीछे की तरफ सेकेंडरी डिस्प्ले होने की संभावना यह डिजाइन पिछले मॉडल Xiaomi 17 Pro की तरह ही नजर आता है, जिसमें बैक पैनल पर एक छोटा डिस्प्ले दिया गया था। दमदार बैटरी और चार्जिंग रिपोर्ट्स के अनुसार, Xiaomi 18 Pro में: 7,000mAh या उससे बड़ी बैटरी 100W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट जैसी हाई-एंड सुविधाएं मिल सकती हैं, जो इसे पावर यूजर्स के लिए बेहद आकर्षक बना सकती हैं। कैमरा स्पेसिफिकेशन (संभावित) लीक्स के मुताबिक फोन में: दो 200MP कैमरे टेलीफोटो और मैक्रो कैपेबिलिटी जैसे एडवांस्ड फीचर्स शामिल हो सकते हैं, जो फोटोग्राफी एक्सपीरियंस को नई ऊंचाई दे सकते हैं। पुराने मॉडल से तुलना पिछला मॉडल Xiaomi 17 Pro सितंबर 2025 में लॉन्च हुआ था, जिसकी शुरुआती कीमत लगभग ₹75,000 थी। इसमें: Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट 6,300mAh बैटरी Leica ट्यून कैमरा सिस्टम जैसे फीचर्स दिए गए थे।
दुनिया में पहली बार एक ऐसा लग्जरी बैग सामने आया है, जिसे दावा किया जा रहा है कि यह T-Rex (डायनासोर) के कोलेजन से बने लेदर से तैयार किया गया है। फिलहाल यह अनोखा बैग एम्सटर्डम के Artis Zoo Museum में प्रदर्शित है और 11 मई के बाद इसकी नीलामी होगी। कितनी है कीमत? शुरुआती बोली: 5 लाख डॉलर (₹4 करोड़+ लगभग) यानी यह बैग सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि अल्ट्रा-लक्जरी कलेक्टर आइटम बन चुका है। कैसे बना “डायनासोर लेदर”? यह सुनने में जितना फिल्मी लगता है, प्रक्रिया उतनी ही साइंटिफिक है: T-Rex के फॉसिल से कोलेजन (protein) के छोटे टुकड़े निकाले गए इन्हें लैब में दूसरे जानवर की कोशिकाओं में डाला गया नया कोलेजन तैयार किया गया फिर उसे प्रोसेस करके लेदर में बदला गया यानी यह बैग सीधे डायनासोर की स्किन से नहीं, बल्कि लैब-ग्रोउन (Lab-grown) लेदर से बना है किसने बनाया यह प्रोजेक्ट? यह अनोखा प्रोजेक्ट तीन कंपनियों के सहयोग से बना: The Organoid Company VML (क्रिएटिव एजेंसी) Lab Grown Leather Ltd. ये वही टीम है जिसने पहले मैमथ DNA से मीटबॉल बनाकर सुर्खियां बटोरी थीं। क्यों है इतना खास? “डायनासोर कनेक्शन” इसे यूनिक बनाता है एथिकल (जानवरों को नुकसान नहीं) लेदर का विकल्प फ्यूचर फैशन और बायोटेक्नोलॉजी का कॉम्बिनेशन वैज्ञानिकों के सवाल हर कोई इस दावे से सहमत नहीं है: कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि डायनासोर कोलेजन सिर्फ छोटे-छोटे टुकड़ों में मिलता है इससे असली लेदर जैसा मजबूत मटेरियल बनाना मुश्किल यह “T-Rex लेदर” ज्यादा कॉन्सेप्ट या मार्केटिंग भी हो सकता है क्या आप लगाएंगे बोली? यह बैग सिर्फ एक फैशन आइटम नहीं, साइंस + लक्जरी + इनोवेशन का मेल है लेकिन सवाल यही है: क्या आप ₹4 करोड़ देकर “डायनासोर टच” वाला बैग खरीदना चाहेंगे?
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।