प्रशांत किशोर

Investment Summit Jharkhand
'सिर्फ एमओयू नहीं, उद्योगों के साथ बनेगी दीर्घकालिक साझेदारी': हेमंत सोरेन

रांची। नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026 के समापन सत्र में झारखंड को करीब 99,639 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल उद्योगों के साथ एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर करना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और टिकाऊ औद्योगिक साझेदारी विकसित करना है। उन्होंने कहा कि सरकार निवेशकों के लिए ऐसा माहौल तैयार कर रही है, जिससे उद्योगों के साथ-साथ राज्य और स्थानीय युवाओं को भी स्थायी लाभ मिल सके।   बिजली, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्किल डेवलपमेंट पर फोकस   मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड अब केवल खनिज संपदा वाले राज्य की पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहता। सरकार नवाचार, तकनीक और शोध आधारित विकास मॉडल पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि निवेश को बढ़ावा देने के लिए बिजली आपूर्ति, परिवहन संपर्क, आधारभूत ढांचे और कुशल मानव संसाधन को मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। उनका कहना था कि राज्य ने देश को बड़ी संख्या में वैज्ञानिक, इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी दिए हैं और अब इसी प्रतिभा को झारखंड के विकास से जोड़ने का समय है।   रोजगार सृजन और उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा   कार्यक्रम में उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता राज्य के भीतर ही रोजगार के अवसर बढ़ाना है, ताकि युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन न करना पड़े। उन्होंने स्वीकार किया कि पर्यटन के क्षेत्र में झारखंड के पास अपार संभावनाएं हैं, लेकिन अभी काफी काम किए जाने की जरूरत है। उद्योगों और सरकार के सहयोग से समावेशी विकास का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।   नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026 के दौरान जिंदल स्टील, रूंगटा ग्रुप, टाटा स्टील, वरुण बेवरेजेज समेत कई प्रमुख औद्योगिक समूहों ने निवेश में रुचि दिखाई। सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव जिंदल स्टील की ओर से 40 हजार करोड़ रुपये और एंबिशियस सीमेंट की ओर से 30 हजार करोड़ रुपये का रहा। सरकार का मानना है कि इन निवेश प्रस्तावों के धरातल पर उतरने से झारखंड में औद्योगिक विकास, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0
Bankipur Assembly Constituency
बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा ने बदला उम्मीदवार, प्रशांत किशोर का तंज- ‘बीजेपी को कैंडिडेट भी नहीं मिल रहा’

पटना, एजेंसियां।  बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी द्वारा ऐन वक्त पर उम्मीदवार बदलने से सियासी माहौल गर्म हो गया है। पहले भाजपा उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल करने वाले अभिषेक कुमार सिन्हा उर्फ बंटी ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया, जिसके बाद पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को नया उम्मीदवार घोषित किया। इस घटनाक्रम को लेकर विपक्ष और अन्य दलों ने भाजपा पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।   प्रशांत किशोर ने भाजपा पर साधा निशाना जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर सीट से उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने भाजपा के फैसले को जनता के डर का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि जो भाजपा पूरे देश में दूसरे दलों के उम्मीदवारों को अपनी ओर लाने का दावा करती है, उसे अब अपने ही गढ़ में उम्मीदवार बदलना पड़ रहा है। प्रशांत किशोर ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा जिस बांकीपुर को अपना मजबूत किला बताती थी, वहां अब उसे चुनाव लड़ाने के लिए उम्मीदवार तक नहीं मिल रहा है।   आरजेडी ने भी भाजपा को घेरा राष्ट्रीय जनता दल ने भी भाजपा के इस फैसले को उसकी कमजोरी करार दिया। आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा ने हार के डर से अपने ही पुराने कार्यकर्ता की "बलि" चढ़ा दी। उन्होंने दावा किया कि महागठबंधन की उम्मीदवार रेखा गुप्ता को क्षेत्र में व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है और यही वजह है कि भाजपा को उम्मीदवार बदलना पड़ा।   30 जुलाई को मतदान, मुकाबला हुआ त्रिकोणीय बांकीपुर सीट भाजपा नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई थी। उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि मतगणना 3 अगस्त को होगी। नामांकन की अंतिम तिथि 13 जुलाई निर्धारित है। इस बार भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा, महागठबंधन की ओर से आरजेडी उम्मीदवार रेखा गुप्ता और जन सुराज के प्रशांत किशोर के मैदान में होने से मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के साथ चुनावी सरगर्मी लगातार बढ़ती जा रही है।

abhishek singh जुलाई 11, 2026 0
Bankipur By-Poll
बांकीपुर उपचुनाव: 13 जुलाई को नामांकन भरेंगे प्रशांत किशोर, जन सुराज में शामिल हुए शिक्षक रामांशु सर

पटना, एजेंसियां।  बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर जन सुराज पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जन सुराज के सूत्रधार और पार्टी प्रत्याशी प्रशांत किशोर 13 जुलाई को सुबह 10 बजे नामांकन दाखिल करेंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक उनके साथ मौजूद रहेंगे।   पार्टी के अनुसार, सभी कार्यकर्ता सुबह छज्जूबाग स्थित स्काउट गाइड मैदान में एकत्रित होंगे। वहां से गांधी मैदान होते हुए पैदल मार्च के जरिए पटना समाहरणालय पहुंचेंगे, जहां प्रशांत किशोर अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे।   422 बूथों और 24 वार्डों में तेज हुआ चुनाव प्रचार जन सुराज के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ ने बताया कि बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के 422 बूथों और 24 वार्डों में कार्यकर्ता लगातार घर-घर संपर्क अभियान चला रहे हैं। उनका दावा है कि क्षेत्र की जनता बदलाव चाहती है और प्रशांत किशोर को व्यापक समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार की राजनीति की नई दिशा तय करने वाला चुनाव साबित हो सकता है।   जन सुराज में शामिल हुए रामांशु सर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चर्चित शिक्षक रामांशु सर ने जन सुराज की सदस्यता ग्रहण की। प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने उन्हें पार्टी का गमछा पहनाकर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि शिक्षित और जागरूक लोगों के जुड़ने से संगठन को मजबूती मिलेगी।   पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना ने बताया कि रामांशु सर ने लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई की है और उनका अनुभव पार्टी के लिए उपयोगी साबित होगा।   विकास की राजनीति पर जोर जन सुराज में शामिल होने के बाद रामांशु सर ने कहा कि वे बिहार के विकास, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर काम करने के उद्देश्य से पार्टी से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि जन सुराज जाति और धर्म की राजनीति से ऊपर उठकर जनता के वास्तविक मुद्दों को केंद्र में रखता है। उनके अनुसार, बिहार को बेहतर शिक्षा, रोजगार और विकास की जरूरत है और यही जन सुराज की प्राथमिकता है।

abhishek singh जुलाई 10, 2026 0
Prashant Kishor
विधानसभा उपचुनाव : क्या इस बार भाजपा का गढ़ बांकीपुर में प्रशांत किशोर लगा पाएंगे सेंध?

पटना, एजेंसियां। बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव इस बार राजनीतिक रूप से बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। सब पार्टियों के साथ प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज भी इस चुनाव में नई रणनीति के साथ मैदान में उतरी है। बता दे पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद इस बार भाजपा के लंबे समय से मजबूत गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर में प्रशांत किशोर अपनी किस्मत आजमाने जा रहे है और इसकी तैयारियां घर-घर पदयात्रा से  शुरू कर चुके है।  उनका दावा है कि यह सिर्फ एक उपचुनाव नहीं, बल्कि बिहार में नई राजनीतिक संस्कृति की शुरुआत का प्रयास है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर की चुनावी तस्वीर बदलना किसी भी दल के लिए आसान नहीं होगा।   पदयात्रा के जरिए जनता तक पहुंचने की रणनीति बता दे चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने वार्ड 29 और 35 में पदयात्रा कर लोगों से सीधे संपर्क साधा। उन्होंने गली-गली और घर-घर जाकर मतदाताओं से मुलाकात की, हाथ जोड़कर अभिवादन किया और स्थानीय समस्याओं को सुना। उनके समर्थकों ने पूरे मार्ग में जन सुराज के पक्ष में नारे लगाए, जबकि प्रशांत किशोर ने अपेक्षाकृत शांत और संवाद आधारित प्रचार शैली अपनाई। उन्होंने बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं से भी मुलाकात कर व्यक्तिगत संपर्क बनाने का प्रयास किया।   भाजपा का मजबूत वोट बैंक बड़ी चुनौती प्रशांत किशोर का प्रचार अभियान उन इलाकों पर केंद्रित है जहां भाजपा और राजद दोनों के समर्थकों की अच्छी संख्या मानी जाती है। करबिगहिया, चिरैयाटांड़, खासमहल और चांदमारी रोड जैसे क्षेत्रों में भाजपा का पारंपरिक वोट बैंक मजबूत माना जाता है। स्थानीय स्तर पर जलजमाव और बुनियादी सुविधाओं जैसी समस्याएं लगातार उठती रही हैं, लेकिन चुनावी मुकाबले में भाजपा का संगठन और उसका स्थायी समर्थन आधार उसे बढ़त दिलाता रहा है। तीन दशक से भाजपा का दबदबा बांकीपुर विधानसभा का राजनीतिक इतिहास भी काफी रोचक रहा है। यहां तीन दशकों से भाजपा का दबदबा है। पहले यह क्षेत्र पटना पश्चिम विधानसभा के नाम से जाना जाता था। यहां कायस्थ और वैश्य समुदाय के मतदाता चुनावी परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। वर्ष 1967 में इसी क्षेत्र के मतदाताओं ने तत्कालीन मुख्यमंत्री के.बी. सहाय को हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया था। हालांकि, 1989 के बाद से कायस्थ मतदाताओं का बड़ा वर्ग भाजपा के साथ जुड़ गया और तब से यह सीट भाजपा का मजबूत गढ़ बनी हुई है।   क्या बदल पाएंगे चुनावी समीकरण? राजनीतिक जानकारों का कहना है कि प्रशांत किशोर के सामने सबसे बड़ी चुनौती भाजपा के पारंपरिक वोटरों का भरोसा जीतना है। सोशल मीडिया और जनसभाओं में उनकी लोकप्रियता को अब मतदान में बदलना होगा। कई मतदाताओं के लिए सामाजिक स्थिरता, सुरक्षा और मजबूत संगठन आज भी प्रमुख मुद्दे हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रशांत किशोर विपक्ष के साझा उम्मीदवार होते तो मुकाबला अधिक रोचक हो सकता था। फिलहाल जन सुराज बदलाव का संदेश लेकर मैदान में है, जबकि भाजपा अपने तीन दशक पुराने संगठनात्मक नेटवर्क और मजबूत जनाधार के भरोसे इस सीट को बचाने की तैयारी में जुटी है। ऐसे में बांकीपुर उपचुनाव बिहार की राजनीति की दिशा तय करने वाले अहम मुकाबलों में से एक माना जा रहा है।

abhishek singh जुलाई 10, 2026 0
Bankipur By - Election
बांकीपुर उपचुनाव: CM सम्राट चौधरी का प्रशांत किशोर पर तंज, बोले- जिन्हें बिहार से मतलब नहीं, वे भी वोट मांगने आएंगे

पटना, एजेंसियां। बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में गुरुवार को चुनावी सरगर्मी तेज हो गई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार अभिषेक कुमार ‘बंटी’ ने नामांकन दाखिल किया। इसके बाद आयोजित एनडीए की सभा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, डिप्टी सीएम विजय चौधरी, उपेंद्र कुशवाहा, विजय सिन्हा समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के समय ऐसे लोग भी वोट मांगने आते हैं, जिनका बिहार और उसकी राजनीति से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने मतदाताओं से ऐसे लोगों से सतर्क रहने की अपील की।   एनडीए ने जताया जीत का भरोसा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बांकीपुर से एक समर्पित कार्यकर्ता चुनाव लड़ रहा है और एनडीए पहले की तरह इस सीट पर भी बड़ी जीत दर्ज करेगा। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार ने बिजली, सड़क और विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। वहीं, डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने कहा कि जनता ने हाल के विधानसभा चुनाव में एनडीए पर भरोसा जताया था और इस बार भी बांकीपुर में जीत का नया रिकॉर्ड बनेगा।   राजद और जन सुराज भी मैदान में राजद उम्मीदवार रेखा कुमारी गुप्ता ने भी गुरुवार को नामांकन दाखिल किया। उन्होंने दावा किया कि बांकीपुर की जनता बदलाव चाहती है और इस बार राजद को समर्थन मिलेगा। कांग्रेस ने भी महागठबंधन के तहत राजद उम्मीदवार का समर्थन करने की घोषणा की है। दूसरी ओर, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर 11 जुलाई को अपना नामांकन दाखिल करेंगे और लगातार जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं।   चुनावी मुकाबला हुआ दिलचस्प नामांकन के दौरान एक रोचक घटना भी देखने को मिली, जब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी मंच से उम्मीदवार अभिषेक कुमार का नाम लेने के बजाय बार-बार दूसरे नेता आशीष सिन्हा का नाम लेते रहे। बांकीपुर सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई है। इस सीट पर 13 जुलाई तक नामांकन, 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को मतगणना होगी। प्रशांत किशोर की एंट्री और प्रमुख दलों के आमने-सामने होने से यह उपचुनाव राज्य की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल हो गया है।

abhishek singh जुलाई 9, 2026 0
Abhishek Kumar Prashant Kishor
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए BJP ने अभिषेक कुमार को बनाया उम्मीदवार, मुकाबला हुआ दिलचस्प

पटना, एजेंसियां। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए अभिषेक कुमार को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। अभिषेक कुमार भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके हैं और पार्टी के संगठन में लंबे समय से सक्रिय हैं। उनके नाम की घोषणा के साथ ही बांकीपुर का उपचुनाव राज्य की सबसे चर्चित चुनावी लड़ाइयों में शामिल हो गया है।   राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई सीट   बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई थी। भाजपा इस सीट को अपने कब्जे में बनाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। पार्टी ने चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी भी कई वरिष्ठ नेताओं को सौंपी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल समेत कई बड़े नेता चुनावी रणनीति पर लगातार बैठकें कर रहे हैं।   प्रशांत किशोर से सीधी टक्कर   इस उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने से मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर का चुनाव केवल एक सीट का उपचुनाव नहीं, बल्कि बिहार की आगामी राजनीति की दिशा तय करने वाला अहम मुकाबला बन सकता है।   30 जुलाई को मतदान   निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना के बाद नतीजे घोषित किए जाएंगे। सभी प्रमुख दलों ने चुनाव प्रचार तेज कर दिया है और राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं।

abhishek singh जुलाई 8, 2026 0
Prashant Kishor Shatrughan Sinha
प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने पर शत्रुघ्न सिन्हा का बड़ा बयान

पटना, एजेंसियां। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर के चुनाव मैदान में उतरने पर राजनीति तेज हो गई है। इस बीच आसनसोल से सांसद और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने को बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीति के लिए बड़ा घटनाक्रम बताया है।   'राजनीतिक गलियारों में नई हलचल' शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा कि प्रशांत किशोर के चुनावी मैदान में उतरने से बिहार की राजनीति के साथ-साथ देशभर के राजनीतिक गलियारों और आम जनता के बीच नई हलचल पैदा हुई है। उन्होंने प्रशांत किशोर को दूरदर्शी, लोकप्रिय और चर्चित व्यक्तित्व बताते हुए उनके चुनाव लड़ने को महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम बताया।   युवाओं से समर्थन की अपील अपने संदेश में शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि एक 'बिहारी बाबू' होने के नाते उन्हें यह राजनीतिक घटनाक्रम बेहद रोचक और प्रभावशाली लग रहा है। उन्होंने लोगों, खासकर युवाओं से जाति, धर्म और दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर सोचने और एकजुट होने की अपील की। उन्होंने अपने संदेश का समापन 'जय बिहार, जय हिंद' के साथ किया।   बांकीपुर सीट से जुड़ा है सिन्हा परिवार का भी रिश्ता बांकीपुर विधानसभा सीट का संबंध शत्रुघ्न सिन्हा के परिवार से भी रहा है। वर्ष 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में उनके बेटे लव सिन्हा ने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में इसी सीट से चुनाव लड़ा था। हालांकि उन्हें भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नितिन नवीन के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।   अब प्रशांत किशोर के चुनाव मैदान में उतरने से बांकीपुर उपचुनाव चर्चा का केंद्र बन गया है। राजनीतिक दलों की नजर इस सीट पर टिकी हुई है और माना जा रहा है कि इस चुनाव के नतीजे बिहार की राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं।

abhishek singh जुलाई 7, 2026 0
Bankipur Vidhan Sabha
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को होगा उपचुनाव, चुनाव आयोग ने जारी किया कार्यक्रम

पटना, एजेंसियां। चुनाव आयोग ने बिहार की हाई-प्रोफाइल सीट मानी जाने  वाली बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा कर दी है। आयोग के अनुसार, इस सीट पर 30 जुलाई 2026 को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे। बांकीपुर सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की सीट मानी जाती है और इस उपचुनाव पर पूरे राज्य की राजनीतिक नजरें टिकी हैं।   नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट   बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद विधायक पद से इस्तीफा देने के कारण रिक्त हुई थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने इस सीट पर उपचुनाव का कार्यक्रम जारी किया है।   जानिए पूरा चुनाव कार्यक्रम   चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, 6 जुलाई को अधिसूचना जारी होगी। 13 जुलाई नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि होगी, 14 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी और 16 जुलाई तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। मतदान 30 जुलाई को होगा और 3 अगस्त को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।   प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने पर सस्पेंस   उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। जन सुराज पार्टी ने घोषणा की है कि वह 5 जुलाई को अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान करेगी। हालांकि पार्टी प्रमुख प्रशांत किशोर खुद चुनाव लड़ेंगे या नहीं, इस पर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है।   राजनीतिक दलों ने शुरू की तैयारियां   उपचुनाव की घोषणा के साथ ही भाजपा, राजद, कांग्रेस और जन सुराज समेत सभी प्रमुख दलों ने चुनावी रणनीति तेज कर दी है। बांकीपुर सीट को बिहार की सबसे चर्चित सीटों में से एक माना जा रहा है और इस चुनाव के नतीजों पर पूरे राज्य की राजनीतिक निगाहें टिकी रहेंगी।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
Prashant Kishore
बांकीपुर सीट से चुनाव लड़ सकते हैं प्रशांत किशोर, जन सुराज में जल्द होगा अंतिम फैसला

पटना, एजेंसियां। जन सुराज अभियान के प्रमुख प्रशांत किशोर के आगामी बिहार उपचुनाव में पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की संभावना जताई जा रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार इस पर अंतिम निर्णय जल्द लिया जाएगा, और उम्मीदवार को लेकर तस्वीर 4–5 जुलाई तक साफ हो सकती है।   जन सुराज की बैठक के बाद होगा अंतिम निर्णय   सूत्रों के मुताबिक, जन सुराज की एक महत्वपूर्ण बैठक में प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी पर चर्चा होगी, जिसके बाद औपचारिक घोषणा की जाएगी। पार्टी के अंदर इस बात को लेकर सहमति बन रही है कि उन्हें सीधे चुनावी मैदान में उतारा जाए।   बांकीपुर सीट पर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी   बांकीपुर विधानसभा सीट पहले से ही राजनीतिक रूप से अहम मानी जाती है, और यहां से प्रशांत किशोर के संभावित चुनाव लड़ने की खबर के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। यह सीट लंबे समय से बीजेपी का गढ़ रही है, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।   पहली बार सीधे चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी   यदि यह फैसला होता है, तो प्रशांत किशोर पहली बार सीधे चुनावी राजनीति में उतरेंगे। अब तक वे रणनीतिकार की भूमिका में रहे हैं, लेकिन इस कदम से बिहार की राजनीति में नया समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
Prashant Kishor speaking at Sasaram press conference criticizing Nitish Kumar over Rajya Sabha speculation
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर प्रशांत किशोर का तंज: ‘अब बिहार से मुख्यमंत्री का भी पलायन’

  जन सुराज अभियान के सूत्रधार Prashant Kishor ने बिहार की राजनीति को लेकर एक बार फिर तीखा बयान दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा जाने की चर्चा पर तंज कसते हुए कहा कि अब तक बिहार से केवल युवाओं का पलायन होता था, लेकिन अब तो मुख्यमंत्री का भी पलायन होने लगा है। मंगलवार को सासाराम में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान प्रशांत किशोर ने राज्य की मौजूदा स्थिति और सरकार के कामकाज पर कई सवाल उठाए।   ‘सरकार के वादे पूरे नहीं हुए’ प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव के समय सरकार ने अपराध पर नियंत्रण, भ्रष्टाचार पर लगाम और पलायन रोकने जैसे कई बड़े वादे किए थे। लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए लगता है कि ये समस्याएं कम होने के बजाय और बढ़ गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में युवाओं के सामने रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं हैं, जिसके कारण उन्हें दूसरे राज्यों में काम करने के लिए जाना पड़ रहा है।   ‘अन्य राज्यों में 50 से ज्यादा बिहारियों की मौत’ पलायन के मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्ष नवंबर के बाद से 50 से अधिक बिहारियों की मौत अन्य राज्यों में हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अगर लोग धर्म, जाति और पैसे के लालच में वोट देते रहेंगे, तो बिहार की स्थिति में सुधार मुश्किल है।   चुनावी हार पर भी बोले प्रशांत किशोर प्रेस वार्ता में उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में मिली हार पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने जाति, धर्म या पैसों के आधार पर राजनीति नहीं की और ईमानदारी से लोगों से बिहार के बच्चों के भविष्य के नाम पर वोट देने की अपील की थी, लेकिन जनता उनकी बात समझ नहीं पाई। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक बिहार में वास्तविक बदलाव नहीं होगा, तब तक जन सुराज आंदोलन अपनी कोशिश जारी रखेगा।   ‘नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री नहीं रहने की बात सच हुई’ प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने पहले ही दावा किया था कि नीतीश कुमार लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर नहीं रह पाएंगे। उस समय लोगों ने उनका मजाक उड़ाया था, लेकिन अब उनकी बात सही साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल से वह लगातार यह कह रहे थे कि नीतीश कुमार की मानसिक और शारीरिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकें।   निशांत कुमार के राजनीति में आने पर क्या बोले मुख्यमंत्री के बेटे Nishant Kumar के राजनीति में आने की संभावना पर प्रशांत किशोर ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को राजनीति में आने का अधिकार है और उनका स्वागत है। हालांकि उन्होंने परिवारवाद पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कई नेताओं ने अपने बच्चों के लिए सत्ता का रास्ता तैयार कर दिया है, जबकि आम जनता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर उतनी गंभीर नहीं दिखती।   संगठन को मजबूत करने पर जोर प्रशांत किशोर ने बताया कि बिहार में व्यवस्था परिवर्तन और नवनिर्माण के लक्ष्य के साथ जन सुराज अभियान आने वाले छह महीनों में अपनी गतिविधियों को फिर तेज करेगा। इसके लिए पहले संगठन को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह प्रदेश के हर जिले में तीन दिनों का प्रवास करेंगे और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर संगठन को और प्रभावी बनाने के लिए सुझाव लेंगे।  

surbhi मार्च 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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