भगवान शिव

difference between kidney stones and gallbladder stones
Kidney Stone या Gallbladder Stone? पेट दर्द को न करें नजरअंदाज, ऐसे पहचानें पथरी कहां है

आजकल बदलती जीवनशैली, कम पानी पीने की आदत और असंतुलित खानपान के कारण पथरी (स्टोन) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। कई बार लोगों को पेट या कमर में तेज दर्द होता है, लेकिन वे इसे गैस या अपच समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि यह किडनी स्टोन या गॉलब्लैडर स्टोन का संकेत भी हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर सही पहचान और इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि दोनों तरह की पथरी में क्या अंतर होता है और इनके लक्षण कैसे अलग-अलग होते हैं। किडनी स्टोन और गॉलब्लैडर स्टोन में क्या अंतर है? किडनी स्टोन मूत्र तंत्र (यूरिनरी सिस्टम) से जुड़ी समस्या है। यह तब बनती है जब पेशाब में मौजूद कैल्शियम, यूरिक एसिड या अन्य खनिज मिलकर कठोर कण बना लेते हैं। वहीं गॉलब्लैडर स्टोन पाचन तंत्र से जुड़ी समस्या है। यह पित्ताशय (गॉलब्लैडर) में बनती है और आमतौर पर कोलेस्ट्रॉल या बिलीरुबिन जैसे तत्वों के जमने से विकसित होती है। कई मामलों में दोनों प्रकार की पथरी लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के भी रह सकती है। परेशानी तब शुरू होती है जब पथरी रास्ता रोकने लगती है। दर्द से कैसे करें पहचान? किडनी स्टोन के लक्षण कमर या पीठ के एक तरफ अचानक तेज दर्द होना। दर्द का पेट के निचले हिस्से या जांघ तक फैलना। दर्द का रुक-रुक कर तेज होना। पेशाब के दौरान दर्द या जलन महसूस होना। मतली या उल्टी की शिकायत होना। कुछ मामलों में पेशाब में खून भी आ सकता है। गॉलब्लैडर स्टोन के लक्षण दाईं ओर ऊपरी पेट या पसलियों के नीचे तेज दर्द। तला-भुना या ज्यादा वसायुक्त भोजन खाने के बाद दर्द बढ़ना। दर्द कई घंटों तक बना रह सकता है। मतली और उल्टी की समस्या। यदि पथरी पित्त नली में फंस जाए तो बुखार और पीलिया जैसी स्थिति भी हो सकती है। किन लोगों में अधिक होता है पथरी का खतरा? कुछ आदतें और स्वास्थ्य स्थितियां स्टोन बनने का जोखिम बढ़ा सकती हैं, जैसे- दिनभर पर्याप्त पानी न पीना। अधिक नमक और प्रोसेस्ड फूड का सेवन। मोटापा या बढ़ता वजन। नियमित शारीरिक गतिविधि की कमी। परिवार में पहले किसी को किडनी स्टोन होने का इतिहास। असंतुलित खानपान और खराब जीवनशैली। कब डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें? यदि पेट, कमर या पसलियों के नीचे लगातार तेज दर्द हो, पेशाब में खून आए, तेज बुखार, पीलिया या बार-बार उल्टी जैसी समस्या हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। अल्ट्रासाउंड, यूरिन टेस्ट और अन्य जांचों के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि पथरी किडनी में है या गॉलब्लैडर में। समय पर पहचान और उचित उपचार से अधिकांश मरीज बिना किसी गंभीर जटिलता के स्वस्थ हो सकते हैं। नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
Pahari Mandir
सावन में रांची के इन प्रसिद्ध शिव मंदिरों में करें दर्शन, मिलेगा महादेव का आशीर्वाद

रांची। भगवान शिव की आराधना का पवित्र महीना सावन इस वर्ष 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा। हिंदू धर्म में सावन को शिव भक्ति का सबसे शुभ समय माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र के जाप के माध्यम से भगवान भोलेनाथ की आराधना करते हैं। इस वर्ष सावन में चार सोमवार पड़ रहे हैं, जिन्हें विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। राजधानी रांची के प्रमुख शिव मंदिरों में भी सावन को लेकर विशेष तैयारियां शुरू हो गई हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।   पहाड़ी मंदिर में उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़ रातू रोड स्थित पहाड़ी मंदिर रांची के सबसे प्रसिद्ध शिवालयों में से एक है। लगभग 350 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 400 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। सावन की प्रत्येक सोमवारी को यहां विशेष जलाभिषेक, श्रृंगार और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां से रांची शहर का मनमोहक दृश्य भी दिखाई देता है।   सुरेश्वर धाम और शिव शक्ति धाम में भी विशेष आयोजन चुटिया स्थित सुरेश्वर धाम मंदिर अपने 108 फीट ऊंचे विशाल शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है। सावन के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं। वहीं, चिरौंदी स्थित शिव शक्ति धाम प्राकृतिक वातावरण और आध्यात्मिक शांति के लिए जाना जाता है। यहां सावन के दौरान भगवान शिव और मां शक्ति की विशेष पूजा-अर्चना होती है।   आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनेंगे शिवालय सावन महीने में रांची के ये शिव मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति का भी प्रमुख केंद्र बन जाते हैं। श्रद्धालु मानते हैं कि इस पवित्र माह में भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा करने और इन शिवालयों के दर्शन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसी कारण हर वर्ष सावन में इन मंदिरों में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।

abhishek singh जुलाई 14, 2026 0
Devotees offering prayers to Lord Shiva during Pradosh Vrat with Shivling, lamps and Bel Patra.
जुलाई 2026 का पहला प्रदोष व्रत कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

12 जुलाई को रखा जाएगा रवि प्रदोष व्रत, प्रदोष काल में करें भगवान शिव की पूजा Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है। जुलाई 2026 का पहला प्रदोष व्रत 12 जुलाई, रविवार को पड़ रहा है। रविवार के दिन होने के कारण इसे रवि प्रदोष व्रत या भानु प्रदोष व्रत कहा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। प्रदोष व्रत 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त के समय यानी प्रदोष काल में करना सबसे शुभ माना जाता है। त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 12 जुलाई 2026, सुबह 02:04 बजे त्रयोदशी तिथि समाप्त: 12 जुलाई 2026, रात 10:29 बजे प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 07:22 बजे से रात 09:24 बजे तक प्रदोष व्रत की पूजा विधि प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें तथा भगवान शिव के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें। दिनभर श्रद्धा के साथ व्रत रखें। अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार निराहार या फलाहार रह सकते हैं। इस दौरान "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप करना शुभ माना जाता है। शाम को प्रदोष काल से पहले स्नान कर पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। इसके बाद उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके भगवान शिव की पूजा आरंभ करें। शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें और फिर चंदन, बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद पुष्प तथा अक्षत अर्पित करें। इसके बाद भगवान शिव को फल और मिठाई का भोग लगाएं। अंत में शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें तथा कपूर या दीपक से भगवान शिव की आरती करें। पूजा पूर्ण होने के बाद प्रसाद वितरित करें और विधि अनुसार व्रत का पारण करें। रवि प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रवि प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से कुंडली में सूर्य ग्रह की स्थिति मजबूत होती है और व्यक्ति के जीवन से अनेक बाधाएं दूर होती हैं। मान्यता यह भी है कि इस व्रत के पुण्य प्रभाव से पितृ दोष का प्रभाव कम होता है तथा यश, सम्मान, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। नोट: व्रत, पूजा और शुभ मुहूर्त से जुड़ी मान्यताएं धार्मिक विश्वासों और पंचांग पर आधारित हैं। श्रद्धालु स्थानीय परंपरा या अपने पुरोहित की सलाह के अनुसार भी पूजा कर सकते हैं।  

surbhi जुलाई 7, 2026 0
Shiv Puja
बुध प्रदोष व्रत 2026: आज प्रदोष काल में करें ये विशेष उपाय, भगवान शिव की कृपा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज 15 अप्रैल 2026 को श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र अवसर है, क्योंकि आज बुध प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना को समर्पित होता है। प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि को किया जाने वाला प्रदोष व्रत जब बुधवार को पड़ता है, तो इसका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है, इसलिए इस दिन शिव परिवार की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार, आज त्रयोदशी तिथि रात 10:31 बजे तक रहेगी। वहीं पूजा के लिए सबसे शुभ समय प्रदोष काल माना गया है, जो आज शाम 6:47 बजे से रात 9:00 बजे तक रहेगा। इस अवधि में की गई पूजा अत्यंत शीघ्र फल देने वाली मानी जाती है। ज्योतिषाचार्य की राय ज्योतिषाचार्य डॉ. गौरव कुमार दीक्षित के अनुसार, बुध प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति की बुद्धि, वाणी और कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। यह व्रत मानसिक शांति प्रदान करता है और जीवन में सफलता के नए द्वार खोलता है। भगवान शिव की कृपा से साधक की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। प्रदोष काल में करें ये प्रभावी उपाय शिवलिंग का गंगाजल, दूध, शहद, घी और पंचामृत से अभिषेक करें। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग और हरी मूंग दाल अर्पित करें। श्रद्धा भाव से शिव चालीसा का पाठ करें और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। पूजा के अंत में सच्चे मन से अपनी इच्छाएं भगवान के सामने रखें। इन उपायों को करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। धार्मिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त पूर्ण श्रद्धा और सच्चे मन से प्रदोष व्रत करते हैं, भगवान शिव उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। यह व्रत जीवन के कष्टों को दूर कर सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्रदान करता है। ऐसे में, यदि आप भी भगवान शिव की विशेष कृपा पाना चाहते हैं, तो आज प्रदोष काल में विधि-विधान से पूजा अवश्य करें। यह दिन आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Lord Rama breaking Shiva’s Pinaka bow during Sita swayamvar in Mithila royal court
भगवान शिव का रहस्यमयी पिनाक धनुष: जब श्रीराम ने तोड़ा अहंकार और बदल दी रामायण की दिशा

भारतीय पौराणिक कथाओं में कई ऐसे प्रसंग हैं, जो केवल कहानी नहीं बल्कि जीवन की गहरी सीख भी देते हैं। ऐसा ही एक महत्वपूर्ण प्रसंग है भगवान शिव के दिव्य धनुष ‘पिनाक’ का, जिसे उठाना तो दूर, छूना भी असंभव माना जाता था। लेकिन जब भगवान राम ने इसे तोड़ा, तो न केवल इतिहास बदल गया बल्कि पूरी रामायण की कथा एक नए मोड़ पर पहुंच गई। क्या था पिनाक धनुष? भगवान शिव का पिनाक धनुष कोई साधारण अस्त्र नहीं था। मान्यता है कि इसे देव शिल्पकार विश्वकर्मा ने बनाया था और इसमें स्वयं भगवान शिव की दिव्य शक्ति समाहित थी। इसकी टंकार से आकाश तक गूंज उठता था और इसकी शक्ति इतनी प्रचंड थी कि सृष्टि को भी प्रभावित कर सकती थी। राजा जनक के पास कैसे पहुंचा? पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह दिव्य धनुष देवताओं द्वारा राजा जनक के पूर्वजों को सौंपा गया था। तब से यह मिथिला राजवंश की अमूल्य धरोहर बन गया। सीता और पिनाक का अद्भुत संबंध कहा जाता है कि बचपन में माता सीता ने खेल-खेल में इस भारी धनुष को उठा लिया था। इस अद्भुत घटना के बाद राजा जनक ने संकल्प लिया कि सीता का विवाह उसी पुरुष से होगा, जो इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ा सके। स्वयंवर और धनुष भंग का ऐतिहासिक क्षण सीता स्वयंवर में अनेक राजा-महाराजा आए, लेकिन कोई भी पिनाक को हिला तक नहीं सका। जब भगवान राम आगे बढ़े, तो उन्होंने सहज भाव से धनुष को उठाया और जैसे ही प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया-धनुष दो टुकड़ों में टूट गया। इस घटना को “धनुष भंग” कहा जाता है और यही पल राम-सीता विवाह का कारण बना। पिनाक का आध्यात्मिक संदेश पिनाक केवल एक शक्तिशाली अस्त्र नहीं, बल्कि गहरा प्रतीक भी है- यह अहंकार के अंत का प्रतीक है यह सिखाता है कि सच्ची शक्ति विनम्रता में होती है ईश्वर तक पहुंचने के लिए अहंकार त्यागना आवश्यक है क्या शिव के पास और भी अस्त्र थे? कुछ ग्रंथों में शिव के एक अन्य धनुष “अजगव” का भी उल्लेख मिलता है, लेकिन पिनाक को ही उनका सबसे प्रमुख और शक्तिशाली अस्त्र माना गया है। इसके अलावा त्रिशूल और पाशुपतास्त्र भी शिव की पहचान हैं। आज के समय में पिनाक का महत्व आज भी यह कथा लोगों को प्रेरित करती है- चाहे अपनी सीमाओं को तोड़ने की बात हो या अहंकार को नियंत्रित करने की, पिनाक की कहानी हर युग में प्रासंगिक है।  

surbhi अप्रैल 6, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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anjali kumari जुलाई 11, 2026 0