संयुक्त राष्ट्र

Netnyahu
वेस्ट बैंक में सैन्य कार्रवाई तेज करने के नेतन्याहू के आदेश, नाबलुस हिंसा के बाद इज़रायल का बड़ा कदम

यरुशलम, एजेंसियां। इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक में सैन्य कार्रवाई तेज करने के आदेश दिए हैं। यह फैसला नाबलुस के पास स्थित तल (Tell) गांव में हुई हिंसक झड़प और उसके बाद बढ़ते तनाव के मद्देनज़र लिया गया है। इज़रायली सरकार ने सेना को व्यापक अभियान चलाने, संदिग्धों की गिरफ्तारी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।   हिंसक झड़प के बाद बढ़ा तनाव   इज़रायली सेना के अनुसार, नाबलुस के निकट एक इलाके में हुई झड़प में चार फिलिस्तीनी और दो इज़रायली सैनिकों की मौत हुई। घटना के बाद वेस्ट बैंक के कई हिस्सों में हालात तनावपूर्ण हो गए। इसके बाद सेना ने अतिरिक्त बल तैनात किए और कई क्षेत्रों में आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया।   नेतन्याहू ने दिए सख्त निर्देश   प्रधानमंत्री नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इज़रायल कैट्ज़ ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि सेना "व्यापक सैन्य अभियान" चलाएगी। आदेशों में संदिग्ध हमलावरों की तलाश, आतंकवादी ढांचे को नष्ट करने और सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ाने पर जोर दिया गया है। साथ ही, कथित हमलावर के घर को ध्वस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।   नई बस्तियों की स्थापना को भी मंजूरी   सुरक्षा कार्रवाई के साथ-साथ नेतन्याहू ने वेस्ट बैंक में नई यहूदी बस्तियों की स्थापना को भी मंजूरी दी है। इज़रायल का कहना है कि यह कदम सुरक्षा मजबूत करने के लिए उठाया गया है, जबकि फिलिस्तीन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कई देशों ने इसे विवादित और अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताया है।   संयुक्त राष्ट्र ने जताई चिंता   संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने वेस्ट बैंक में बढ़ती हिंसा पर चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इस वर्ष क्षेत्र में बसने वालों और सुरक्षा बलों से जुड़ी हिंसक घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।   क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका   विशेषज्ञों का मानना है कि वेस्ट बैंक में सैन्य अभियान तेज होने से पहले से तनावग्रस्त मध्य पूर्व की स्थिति और जटिल हो सकती है। फिलिस्तीनी अधिकारियों ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है।

abhishek singh जुलाई 25, 2026 0
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस मध्य पूर्व संकट पर चेतावनी देते हुए
मध्य पूर्व संकट गहराया, संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने क्षेत्रीय तनाव को ‘नियंत्रण से बाहर’ होने की चेतावनी दी

न्यूयॉर्क,एजेंसियां। मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव और बढ़ती हिंसा को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने गंभीर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र की स्थिति तेजी से बिगड़ रही है और यदि सभी पक्षों ने संयम नहीं बरता तो हालात पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ता संघर्ष न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की शांति, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।   ईरान, अमेरिका और क्षेत्रीय संघर्षों ने बढ़ाई चिंता   संयुक्त राष्ट्र के अनुसार हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा चुनौतियां तथा विभिन्न क्षेत्रीय समूहों की सैन्य गतिविधियों ने संकट को और गहरा कर दिया है। गुटेरेस ने सभी पक्षों से सैन्य कार्रवाई रोकने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और खाद्य सुरक्षा पर पड़ सकता है।   कूटनीतिक समाधान पर जोर, दुनिया की नजर अगले कदमों पर   संयुक्त राष्ट्र ने स्पष्ट किया है कि इस संकट का समाधान सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है। संगठन ने संबंधित देशों से वार्ता की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और तनाव कम करने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है। इस बीच तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता ने दुनिया भर की सरकारों और निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 24, 2026 0
Pakistan-occupied Kashmir
PoK में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज, विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा चिंताओं के बीच बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

इस्लामाबाद/मुजफ्फराबाद, एजेंसियां। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनाव ऐसे समय कराए जा रहे हैं जब क्षेत्र में सरकार और सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, आर्थिक संकट और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं। स्थानीय राजनीतिक दलों ने चुनाव प्रचार तेज कर दिया है, जबकि प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।   तीन चरणों में कराए जाएंगे चुनाव   पाकिस्तान के चुनाव अधिकारियों के अनुसार, विधानसभा चुनाव अब तीन चरणों में कराए जाएंगे। चुनाव प्रक्रिया जुलाई के अंत से शुरू होकर अगस्त के पहले सप्ताह तक चलेगी। चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों के सैकड़ों उम्मीदवार मैदान में हैं और लाखों मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।   विरोध प्रदर्शनों के बीच बढ़ी चुनौती   चुनाव से पहले PoK के कई इलाकों में महंगाई, बिजली संकट और प्रशासनिक नीतियों के विरोध में प्रदर्शन हुए हैं। हाल के दिनों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों की घटनाएं भी सामने आई हैं। इन हालातों को देखते हुए चुनाव के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जा रही है।   सरकार और विपक्ष आमने-सामने   पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N), पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) और अन्य दल चुनाव में अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराए जाने चाहिए, जबकि सरकार का कहना है कि सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।   अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर   PoK की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर बनी हुई है। हालिया विरोध प्रदर्शनों और हिंसा की घटनाओं के बाद संयुक्त राष्ट्र ने क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति पर चिंता जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव परिणाम क्षेत्र की राजनीतिक दिशा और पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति दोनों पर असर डाल सकते हैं।

abhishek singh जुलाई 23, 2026 0
Space Junk Problem
चंद्र मिशनों के बढ़ते दौर के बीच संयुक्त राष्ट्र ने अंतरिक्ष मलबे पर जताई चिंता, टिकाऊ अंतरिक्ष अभियानों की जरूरत बताई

संयुक्त राष्ट्र, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय मून डे के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहे चंद्र अभियानों के बीच अंतरिक्ष मलबे को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि चंद्रमा और पृथ्वी की कक्षा में बढ़ती अंतरिक्ष गतिविधियों के साथ यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि भविष्य के अंतरिक्ष अभियान टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल हों।   बढ़ते चंद्र मिशनों से बढ़ रहा अंतरिक्ष मलबा   संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के अनुसार, अमेरिका, भारत, चीन, जापान और कई निजी कंपनियां लगातार नए चंद्र मिशनों पर काम कर रही हैं। ऐसे में निष्क्रिय उपग्रह, रॉकेट के हिस्से और अन्य अंतरिक्ष मलबा भविष्य के अभियानों के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।   140 मिलियन से अधिक मलबे के टुकड़े पृथ्वी की कक्षा में   संयुक्त राष्ट्र ने बताया कि पृथ्वी की कक्षा में अनुमानित 14 करोड़ (140 मिलियन) से अधिक छोटे-बड़े अंतरिक्ष मलबे के टुकड़े मौजूद हैं। इनमें से अधिकांश इतने छोटे हैं कि उन्हें ट्रैक करना मुश्किल है, लेकिन तेज गति के कारण ये सक्रिय उपग्रहों और अंतरिक्ष यानों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।   देशों से जिम्मेदार अंतरिक्ष गतिविधियों की अपील   संयुक्त राष्ट्र ने सभी देशों और अंतरिक्ष एजेंसियों से अपील की है कि वे मिशन के अंत में निष्क्रिय उपग्रहों और रॉकेट चरणों को सुरक्षित तरीके से हटाने, नए मलबे के निर्माण को रोकने और अंतरराष्ट्रीय दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए मिलकर काम करें।   भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित अंतरिक्ष पर जोर   संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि अंतरिक्ष केवल वर्तमान पीढ़ी का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की भी साझा धरोहर है। इसलिए चंद्रमा और अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण तथा टिकाऊ उपयोग के लिए अभी से प्रभावी नीतियां और वैश्विक सहयोग आवश्यक है।

abhishek singh जुलाई 21, 2026 0
Syria Suicide Blast
सीरिया की राजधानी दमिश्क में कैफे के बाहर आत्मघाती विस्फोट, 9 लोगों की मौत, कई घायल

दमिश्क, एजेंसियां। सीरिया की राजधानी दमिश्क में गुरुवार देर शाम एक व्यस्त कैफे के बाहर हुए आत्मघाती विस्फोट में कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हुए हैं। विस्फोट के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।   कैफे के बाहर खुद को उड़ाया   प्रारंभिक जांच के अनुसार, हमलावर ने भीड़भाड़ वाले इलाके में स्थित एक कैफे के बाहर खुद को विस्फोटकों से उड़ा लिया। धमाका इतना तेज था कि आसपास की कई दुकानों और वाहनों को भी नुकसान पहुंचा। राहत एवं बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर घायलों को बाहर निकाला।   जांच एजेंसियां जुटीं   सीरियाई सुरक्षा एजेंसियों ने विस्फोट के बाद जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हमले के पीछे किसी आतंकी संगठन का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अभी तक किसी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है।   सरकार ने सुरक्षा बढ़ाई   घटना के बाद दमिश्क और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।   अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने जताई चिंता   संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों ने इस हमले की निंदा करते हुए निर्दोष नागरिकों पर हुए हमले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त प्रयासों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
Venezuela Earthquake
वेनेजुएला में भूकंप के बाद राहत अभियान जारी, 50 हजार से अधिक लोग अब भी लापता

कराकास, एजेंसियां। वेनेजुएला में 24 जून को आए दो शक्तिशाली भूकंपों के बाद हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र और स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, 50 हजार से अधिक लोग अब भी लापता हैं, जबकि राहत और बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश में लगातार अभियान चला रहे हैं।   मृतकों की संख्या 1,400 के पार   ताजा आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भूकंप में 1,400 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग घायल हुए हैं। पहले मृतकों की संख्या 920 बताई गई थी, लेकिन लगातार चल रहे राहत कार्यों के दौरान यह आंकड़ा बढ़ता गया। प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में इमारतें ढह गई हैं और कई सड़कें तथा संचार सेवाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं।   मलबे में जारी है खोज अभियान   राहतकर्मी, सेना और स्थानीय स्वयंसेवक राजधानी कराकास और ला गुआइरा सहित सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाकर जीवित लोगों की तलाश कर रहे हैं। कई स्थानों पर भारी मशीनों की कमी के कारण बचाव कार्य धीमा पड़ा है, जबकि विदेशी राहत दल भी अभियान में शामिल हो चुके हैं।   अंतरराष्ट्रीय मदद पहुंचनी शुरू   संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, यूरोपीय देशों और कई लैटिन अमेरिकी देशों ने राहत सामग्री, मेडिकल टीम और खोज एवं बचाव विशेषज्ञ वेनेजुएला भेजे हैं। मानवीय संगठनों का कहना है कि लाखों लोग भोजन, पेयजल, दवाइयों और अस्थायी आश्रय की जरूरत से जूझ रहे हैं।   आफ्टरशॉक से बढ़ी चिंता   भूकंप के बाद लगातार आ रहे हल्के झटकों (आफ्टरशॉक) के कारण लोगों में दहशत बनी हुई है। प्रशासन ने नागरिकों से क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने और राहत एजेंसियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि लापता लोगों की वास्तविक संख्या में बदलाव हो सकता है, क्योंकि राहत अभियान आगे बढ़ने के साथ कई लोगों का पता लगाया जा रहा है।

abhishek singh जून 28, 2026 0
UN General Assembly voting session electing new non-permanent members to the UN Security Council.
UNSC चुनाव में बदला वैश्विक समीकरण, किर्गिस्तान की ऐतिहासिक एंट्री; जर्मनी को झटका

  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के 2026 चुनाव परिणामों ने वैश्विक कूटनीति में बदलते समीकरणों की झलक दिखाई है। जहां मध्य एशिया के देश किर्गिस्तान ने पहली बार सुरक्षा परिषद में जगह बनाकर इतिहास रचा, वहीं यूरोप की प्रमुख शक्तियों में शामिल जर्मनी को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा। इन नतीजों ने संयुक्त राष्ट्र के भीतर बदलते राजनीतिक रुझानों और वैश्विक समर्थन के नए पैटर्न पर चर्चा तेज कर दी है। पांच नए देशों को मिली सुरक्षा परिषद में जगह 3 जून 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में हुए मतदान के बाद 2027-28 कार्यकाल के लिए पांच नए अस्थायी सदस्य चुने गए। इनमें शामिल हैं: किर्गिस्तान पुर्तगाल ऑस्ट्रिया जिम्बाब्वे त्रिनिदाद और टोबैगो ये देश 1 जनवरी 2027 से अपना दो वर्षीय कार्यकाल शुरू करेंगे और वर्तमान सदस्यों की जगह लेंगे जिनका कार्यकाल दिसंबर 2026 में समाप्त हो रहा है। किर्गिस्तान ने रचा नया इतिहास इस चुनाव का सबसे उल्लेखनीय परिणाम किर्गिस्तान की जीत रही। स्वतंत्रता प्राप्ति और संयुक्त राष्ट्र सदस्यता के तीन दशक से अधिक समय बाद पहली बार देश को सुरक्षा परिषद में प्रतिनिधित्व मिला है। एशिया-प्रशांत समूह की सीट के लिए हुए मुकाबले में किर्गिस्तान को कई दौर की मतदान प्रक्रिया के बाद सफलता मिली। इसे देश की सक्रिय कूटनीति और वैश्विक स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता का संकेत माना जा रहा है। किर्गिस्तान लंबे समय से यह मुद्दा उठाता रहा है कि छोटे, पर्वतीय और भू-आवेष्ठित देशों को भी वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। जर्मनी की हार बनी सबसे बड़ी चर्चा चुनाव में सबसे बड़ा राजनीतिक झटका जर्मनी को लगा। पश्चिमी यूरोपीय और अन्य देशों के समूह की दो सीटों के लिए हुए मुकाबले में पुर्तगाल और ऑस्ट्रिया सफल रहे, जबकि जर्मनी आवश्यक समर्थन जुटाने में पीछे रह गया। यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जर्मनी संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख वित्तीय योगदानकर्ताओं में शामिल है और अतीत में कई बार सुरक्षा परिषद का सदस्य रह चुका है। अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर रुख बना चर्चा का विषय विश्लेषकों का मानना है कि हाल के वर्षों में यूक्रेन युद्ध, गाजा संकट और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर जर्मनी की स्पष्ट विदेश नीति का असर मतदान पर पड़ा हो सकता है। आधिकारिक तौर पर किसी एक कारण की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन चुनाव परिणामों ने यह संकेत दिया है कि संयुक्त राष्ट्र में समर्थन हासिल करना केवल आर्थिक शक्ति या राजनीतिक प्रभाव से संभव नहीं है। भारत के लिए क्या संकेत? इन नतीजों को भारत के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार और स्थायी सदस्यता के विस्तार की मांग करता रहा है। भारत, जर्मनी, जापान और ब्राजील का जी-4 समूह सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए अभियान चलाता रहा है। ऐसे में जर्मनी का अस्थायी सीट हासिल न कर पाना यह दर्शाता है कि संयुक्त राष्ट्र में समर्थन जुटाने की चुनौती लगातार बढ़ रही है। भारत ने सभी विजेता देशों को बधाई देते हुए उनके साथ सहयोग जारी रखने की बात कही है। सुरक्षा परिषद की संरचना को समझिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें पांच स्थायी सदस्य शामिल हैं: United States Russia China United Kingdom France इन पांच देशों के पास वीटो शक्ति होती है। शेष 10 सदस्य दो वर्ष के लिए चुने जाते हैं और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के आधार पर उनका चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा किया जाता है। बदलती वैश्विक राजनीति का संकेत 2026 के चुनाव परिणाम यह दर्शाते हैं कि संयुक्त राष्ट्र में शक्ति संतुलन और समर्थन के पारंपरिक समीकरण बदल रहे हैं। छोटे और उभरते देशों की भूमिका बढ़ रही है, जबकि बड़े देशों को भी व्यापक कूटनीतिक समर्थन सुनिश्चित करने के लिए अधिक प्रयास करने पड़ रहे हैं। सुरक्षा परिषद के ये नतीजे आने वाले वर्षों में वैश्विक कूटनीति और संयुक्त राष्ट्र सुधार की बहस को नई दिशा दे सकते हैं।  

Deepshikha जून 4, 2026 0
Russia defends Iran at UN Security Council amid rising tensions over Strait of Hormuz
UN में रूस ने ईरान का किया बचाव, होर्मुज पर अमेरिका-पश्चिम को घेरा

Russia ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर Iran का खुलकर समर्थन किया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस ने पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका, पर तीखा हमला बोला और ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य में कदमों को जायज़ ठहराया। रूस ने क्या कहा? संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी प्रतिनिधि Vasily Nebenzya ने कहा कि युद्ध की स्थिति में किसी भी तटीय देश को अपनी सुरक्षा के लिए समुद्री क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही सीमित करने का अधिकार है। उनका कहना था कि ईरान पर पूरा दोष मढ़ना गलत है, जबकि वह खुद बाहरी दबाव और हमलों का सामना कर रहा है। पश्चिमी देशों पर 'समुद्री डाकू' वाला हमला नेबेंज्या ने पश्चिमी देशों की तुलना समुद्री डाकुओं से करते हुए कहा कि वे अपने "गैरकानूनी" कदमों को एकतरफा प्रतिबंधों और दबाव की आड़ में छिपाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोपीय देश खुलेआम समुद्र में लूटपाट जैसी कार्रवाइयों का समर्थन कर रहे हैं। पहले भी रूस-चीन ने किया था वीटो इस महीने की शुरुआत में China और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उस प्रस्ताव को वीटो कर दिया था, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना था। पुतिन ने भी जताया समर्थन इसी दिन रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की और ईरान के प्रति अपना समर्थन दोहराया। क्यों अहम है होर्मुज? Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
US and Iran delegates clash at UN Nuclear Non-Proliferation Treaty review conference in New York
UN परमाणु संधि सम्मेलन में अमेरिका-ईरान आमने-सामने, उपाध्यक्ष पद को लेकर तीखी बहस

United Nations में परमाणु अप्रसार संधि (NPT) की समीक्षा बैठक के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विवाद ईरान को सम्मेलन का उपाध्यक्ष बनाए जाने को लेकर हुआ। क्या है पूरा मामला? न्यूयॉर्क में आयोजित परमाणु अप्रसार संधि समीक्षा सम्मेलन में ईरान को 34 उपाध्यक्षों में शामिल किया गया। यह नियुक्ति गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की ओर से की गई थी। अमेरिका ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। अमेरिका ने क्यों जताया विरोध? अमेरिकी अधिकारी क्रिस्टोफर यीव ने कहा कि ईरान का इस पद पर होना NPT की भावना के खिलाफ है। उनका आरोप है कि ईरान लंबे समय से अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन नहीं कर रहा है और International Atomic Energy Agency के साथ भी पूरा सहयोग नहीं कर रहा। उन्होंने इसे सम्मेलन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करने वाला फैसला बताया। ईरान का पलटवार ईरान के प्रतिनिधि रज़ा नजाफी ने अमेरिकी आरोपों को "बेबुनियाद और राजनीतिक" करार दिया। उन्होंने अमेरिका पर ही परमाणु हथियारों के विस्तार और दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में दोहराया कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। ईरान का रुख ईरान का कहना है कि उसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम संवर्धन का अधिकार है। हालांकि पश्चिमी देशों को आशंका है कि इसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है। फिलहाल, यह टकराव वैश्विक परमाणु सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयासों के लिए नई चुनौती बनता दिख रहा है।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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