स्वास्थ्य टिप्स

Parents encouraging a child to eat healthy food and stay active to help reduce the risk of type 2 diabetes.
परिवार में है डायबिटीज का इतिहास? बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा ऐसे करें कम, डॉक्टरों ने बताए असरदार उपाय

अगर परिवार में किसी को डायबिटीज है, तो अक्सर माता-पिता को यह चिंता रहती है कि कहीं उनके बच्चों को भी भविष्य में यह बीमारी न हो जाए। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि पारिवारिक इतिहास जोखिम जरूर बढ़ाता है, लेकिन यह तय नहीं करता कि बच्चे को डायबिटीज होगी ही। सही खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। एंडोक्राइनोलॉजिस्ट्स के अनुसार, बचपन में अपनाई गई अच्छी आदतें लंबे समय तक मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। क्या केवल जेनेटिक्स ही जिम्मेदार हैं? विशेषज्ञों के मुताबिक, टाइप-2 डायबिटीज केवल आनुवंशिक कारणों से नहीं होती। यह जेनेटिक प्रवृत्ति और जीवनशैली दोनों के संयुक्त प्रभाव का परिणाम है। यदि माता-पिता या भाई-बहन को डायबिटीज है, तो बच्चे में इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ सकता है। लेकिन यह जोखिम बीमारी में बदलेगा या नहीं, यह काफी हद तक उसकी रोजमर्रा की आदतों पर निर्भर करता है। बचपन से डालें स्वस्थ खानपान की आदत डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों को सख्त डाइट पर रखने की बजाय पूरे परिवार में हेल्दी खाने की आदत विकसित करनी चाहिए। दैनिक भोजन में शामिल करें: ताजे फल हरी सब्जियां साबुत अनाज दालें और फलियां कम वसा वाले प्रोटीन हेल्दी फैट्स वहीं, इन चीजों का सेवन सीमित रखें: मीठे पेय पदार्थ पैकेज्ड स्नैक्स प्रोसेस्ड फूड फास्ट फूड विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे वही आदतें सीखते हैं जो वे घर में रोज देखते हैं। रोजाना शारीरिक गतिविधि है जरूरी बच्चों को जिम भेजने की जरूरत नहीं है। उन्हें ऐसी गतिविधियों के लिए प्रेरित करें जिनमें उन्हें आनंद आता हो। बेहतर विकल्प हो सकते हैं: साइकिल चलाना तैराकी क्रिकेट या फुटबॉल खेलना दौड़ना डांस करना स्केटिंग आउटडोर गेम्स डॉक्टरों की सलाह है कि बच्चों को हर दिन कम से कम 60 मिनट मध्यम से तेज शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए। पर्याप्त नींद भी उतनी ही महत्वपूर्ण अक्सर लोग खानपान और एक्सरसाइज पर ध्यान देते हैं, लेकिन अच्छी नींद को नजरअंदाज कर देते हैं। कम नींद लेने से शरीर के उन हार्मोन्स पर असर पड़ता है जो नियंत्रित करते हैं: भूख भूख बढ़ाने वाले हार्मोन ब्लड शुगर वजन इसलिए बच्चों के लिए नियमित सोने और जागने का समय तय करना जरूरी है। साथ ही रात में मोबाइल और अन्य स्क्रीन का उपयोग कम करना चाहिए। स्क्रीन टाइम रखें सीमित लंबे समय तक मोबाइल, टीवी या टैबलेट का इस्तेमाल बच्चों की शारीरिक गतिविधि कम कर देता है, जिससे: वजन बढ़ सकता है मोटापे का खतरा बढ़ता है नींद प्रभावित होती है टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है इसलिए स्क्रीन टाइम और एक्टिव प्ले के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। इन शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें यदि परिवार में डायबिटीज का इतिहास है और बच्चे में नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। बार-बार प्यास लगना बार-बार पेशाब आना बिना कारण वजन घटना लगातार थकान महसूस होना गर्दन या बगल में काले, मखमली धब्बे (Acanthosis Nigricans) तेजी से वजन बढ़ना या मोटापा जरूरत पड़ने पर डॉक्टर ब्लड शुगर टेस्ट, बीएमआई और कमर की माप जैसी जांच की सलाह भी दे सकते हैं। बच्चे वही सीखते हैं जो माता-पिता करते हैं विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे केवल सलाह नहीं, बल्कि अपने माता-पिता की आदतों की नकल करते हैं। यदि माता-पिता: संतुलित भोजन खाते हैं नियमित व्यायाम करते हैं समय-समय पर हेल्थ चेकअप करवाते हैं मीठे पेय पदार्थों से बचते हैं पर्याप्त नींद लेते हैं तो बच्चों में भी स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की संभावना अधिक रहती है। परिवार में डायबिटीज है तो घबराएं नहीं, सतर्क रहें डॉक्टरों का मानना है कि पारिवारिक इतिहास को डर की तरह नहीं, बल्कि समय रहते बचाव करने के अवसर के रूप में देखना चाहिए। जेनेटिक्स बदले नहीं जा सकते, लेकिन सही जीवनशैली अपनाकर भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यदि बच्चे में डायबिटीज से जुड़े लक्षण दिखाई दें या परिवार में बीमारी का मजबूत इतिहास हो, तो चिकित्सक से व्यक्तिगत सलाह अवश्य लें।  

surbhi जुलाई 9, 2026 0
Diplomatic and military tensions rise in the Middle East as Pakistan calls for dialogue following renewed US-Iran military clashes after the ceasefire collapsed.
अमेरिका-ईरान संघर्ष फिर भड़का, पाकिस्तान ने की संयम की अपील; मध्यस्थता की पेशकश दोहराई

US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम टूटने के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कहा है कि अंतरिम युद्धविराम (सीजफायर) अब समाप्त हो चुका है। लगातार दो दिनों से दोनों देशों के बीच हमले जारी हैं। इस बीच, पहले मध्यस्थता की भूमिका निभाने की कोशिश कर चुका पाकिस्तान अब दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील कर रहा है। पाकिस्तान ने जताई चिंता पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा शुरू हुआ सैन्य संघर्ष किसी के हित में नहीं है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में सभी पक्षों से संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की, जिनसे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को नुकसान पहुंचे। पाकिस्तान ने कहा कि स्थायी समाधान केवल संवाद, कूटनीति और बातचीत से ही संभव है। मध्यस्थता की पेशकश पाकिस्तान ने यह भी कहा कि यदि दोनों पक्ष सहमत हों तो इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए तैयार है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पहले हुए समझौतों और प्रतिबद्धताओं का सम्मान किया जाना चाहिए ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे। ट्रंप ने कहा- सीजफायर खत्म अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच हुआ अंतरिम समझौता अब समाप्त हो चुका है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कूटनीतिक बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। ट्रंप के बयान के बाद वैश्विक बाजारों में भी असर देखने को मिला और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेजी दर्ज की गई। दोनों ओर से जारी हैं हमले अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत और कतर में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन घटनाओं के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है तथा व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका जताई जा रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा तनाव का सबसे बड़ा केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल निर्यात होता है। यदि संघर्ष और बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकता है। ईरान का सख्त रुख ईरान के वरिष्ठ नेताओं ने भी अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो उसका जवाब और कड़े तरीके से दिया जाएगा। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और क्षेत्रीय अधिकारों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। बढ़ी वैश्विक चिंता अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा शुरू हुए सैन्य टकराव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की है, ताकि पश्चिम एशिया में व्यापक युद्ध की स्थिति से बचा जा सके।  

Deepshikha जुलाई 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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इंग्लैंड से सीरीज हार के बाद टीम इंडिया का होगा प्रदर्शन रिव्यू, BCCI करेगा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का मूल्यांकन

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0