सोशल मीडिया विवाद

AI-generated viral video showing Donald Trump and Stephen Colbert controversy circulating on social media platforms
ट्रंप ने शेयर किया AI वीडियो, स्टीफन कोल्बर्ट को ‘डस्टबिन’ में फेंकते दिखे; सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

Donald Trump ने एक AI-जनरेटेड वीडियो शेयर कर नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस वीडियो में अमेरिकी टीवी होस्ट Stephen Colbert को कूड़ेदान में फेंकते हुए दिखाया गया है। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। क्या है वीडियो में? वीडियो में दिखाया गया है कि जैसे ही The Late Show with Stephen Colbert के अंतिम एपिसोड में स्टीफन कोल्बर्ट दर्शकों का स्वागत करते हैं, तभी पीछे से ट्रंप आते हैं। इसके बाद ट्रंप उन्हें कॉलर से पकड़कर डस्टबिन में फेंक देते हैं और फिर डांस करने लगते हैं। बैकग्राउंड में उनके चुनावी कैंपेन की धुन जैसी म्यूजिक भी सुनाई देती है। यह वीडियो AI तकनीक से तैयार किया गया बताया जा रहा है। शो के आखिरी एपिसोड के बाद बढ़ा विवाद यह वीडियो ऐसे समय सामने आया, जब ‘The Late Show with Stephen Colbert’ का आखिरी एपिसोड हाल ही में प्रसारित हुआ। 2015 में शुरू हुआ यह शो अमेरिका के सबसे लोकप्रिय लेट-नाइट टॉक शोज में शामिल रहा। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक शो का फिनाले एपिसोड रिकॉर्ड व्यूअरशिप के साथ खत्म हुआ। ओवरनाइट नीलसन रेटिंग्स के अनुसार इसे करीब 6.74 मिलियन लोगों ने देखा, जो 2015 के पहले एपिसोड से भी ज्यादा था। फिनाले एपिसोड में कई स्टार्स पहुंचे 21 मई को प्रसारित अंतिम एपिसोड में कई सेलिब्रिटी मेहमान शामिल हुए। कोल्बर्ट ने अपने खास अंदाज में दर्शकों को अलविदा कहा। शो के दौरान अभिनेता Bryan Cranston ने सरप्राइज एंट्री भी दी। क्यों बंद हुआ शो? CBS ने जुलाई 2025 में घोषणा की थी कि 30 साल पुराने इस शो को बंद किया जा रहा है। नेटवर्क ने इसके पीछे आर्थिक कारण बताए थे और कहा था कि पारंपरिक टीवी ब्रॉडकास्टिंग पर बढ़ते दबाव के चलते यह फैसला लिया गया। हालांकि आलोचकों और खुद कोल्बर्ट ने संकेत दिए थे कि इसके पीछे राजनीतिक वजहें भी हो सकती हैं। सोशल मीडिया और यूट्यूब का असर रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में लेट-नाइट टीवी शोज की लोकप्रियता में गिरावट आई है। अब बड़ी संख्या में दर्शक टीवी पर लाइव देखने के बजाय यूट्यूब और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शो के क्लिप्स देखना पसंद करते हैं। अब फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखेंगे कोल्बर्ट ‘The Late Show’ खत्म होने के बाद Stephen Colbert अब फिल्मों की स्क्रीनराइटिंग पर काम कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह Peter Jackson और अन्य राइटर्स के साथ मिलकर The Lord of the Rings: Shadow of the Past की कहानी लिख रहे हैं।  

surbhi मई 23, 2026 0
Abhijeet Deepke discussing hacked Instagram account amid CJP social media controversy
टेंशन में CJP संस्थापक अभिजीत दीपके, इंस्टाग्राम अकाउंट हैक होने का दावा; बैकअप अकाउंट भी हटाया गया

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक Abhijeet Deepke ने दावा किया है कि उनका इंस्टाग्राम अकाउंट हैक हो गया है। उन्होंने कहा कि वह अब अपने अकाउंट को एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं। अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया कि काफी कोशिशों के बावजूद उन्हें अकाउंट वापस नहीं मिल पाया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि Cockroach Janta Party (CJP) का बैकअप इंस्टाग्राम अकाउंट भी हटा दिया गया है। इस मामले में अब तक Meta की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई थी CJP 15 मई को भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की “पैरासाइट” और “कॉकरोच” टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर CJP तेजी से चर्चा में आ गई थी। इसके अगले ही दिन बने इस ऑनलाइन मूवमेंट को बड़ी संख्या में सोशल मीडिया यूजर्स, एक्टिविस्ट्स, कलाकारों और युवाओं का समर्थन मिलने लगा। बाद में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सफाई देते हुए कहा था कि उनकी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया और उनका बयान फर्जी डिग्री लेकर कानून पेशे में आने वालों के लिए था। इसके बावजूद “कॉकरोच” चुनाव चिन्ह वाली CJP इंटरनेट पर तेजी से वायरल होती चली गई। 2.1 करोड़ से ज्यादा थे फॉलोअर्स अभिजीत दीपके के मुताबिक CJP के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर 2.1 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स थे। ऐसे में अकाउंट के हटने और हैक होने के दावे के बाद समर्थकों के बीच चिंता बढ़ गई है। उन्होंने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि बैकअप अकाउंट भी हटा दिया गया है, जिससे संगठन की सोशल मीडिया मौजूदगी को बड़ा झटका लगा है। भारत में ब्लॉक हुआ X अकाउंट 21 मई को Cockroach Janta Party का X अकाउंट भी भारत में ब्लॉक कर दिया गया था। CJP_2029 नाम वाले अकाउंट पर अब “Account Withheld” का संदेश दिखाई दे रहा है। साथ ही लिखा है कि भारत में कानूनी मांग के जवाब में इस अकाउंट को रोका गया है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि अकाउंट पर कार्रवाई किस शिकायत या कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई।  

surbhi मई 23, 2026 0
Pakistan ISPR chief Ahmed Sharif Chaudhry faces backlash after remarks targeting Indian Army press briefing
भारतीय सेना पर तंज कसना पड़ा भारी, पाकिस्तान में ही घिरे ISPR प्रमुख; लोगों ने कहा- उर्दू सिर्फ जनता को बहकाने के लिए

पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी का भारतीय सेना पर किया गया तंज अब उन्हीं पर भारी पड़ता नजर आ रहा है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली बरसी पर भारतीय सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर टिप्पणी करने के बाद पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर ही उनकी जमकर आलोचना हो रही है. दरअसल, 7 मई को भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पहलगाम आतंकी हमले के बाद की रणनीतिक स्थिति और सैन्य तैयारियों पर जानकारी दी थी. इस दौरान अधिकारियों ने अंग्रेजी भाषा में मीडिया को संबोधित किया, जिस पर पाकिस्तान सेना के मीडिया विंग ISPR के प्रमुख अहमद शरीफ चौधरी ने सवाल उठाए. “अंग्रेजी में क्यों बोले?” : पाक प्रवक्ता का तंज अहमद शरीफ चौधरी ने भारतीय अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा, “आपको अंग्रेजी में बोलने के लिए किसने कहा? क्या आप दुनिया को अपनी कहानी सुनाना चाहते हैं?” उन्होंने दावा किया कि भारतीय सैन्य अधिकारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नैरेटिव बनाने के लिए अंग्रेजी का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन उनका यह बयान पाकिस्तान में ही विवाद का कारण बन गया. पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी ने खोली पोल पाकिस्तानी सेना के पूर्व अधिकारी और वर्तमान पत्रकार मेजर आदिल फारूक राजा (रिटायर्ड) ने ISPR प्रमुख के बयान को “पाखंड” बताया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सेना में उच्च स्तर से लेकर निचले स्तर तक अधिकांश आधिकारिक संचार अंग्रेजी में ही होता है. मेजर राजा ने कहा, “उर्दू का इस्तेमाल सिर्फ पाकिस्तान की जनता को भ्रमित करने और प्रोपोगेंडा फैलाने के लिए किया जाता है. असल रणनीतिक दस्तावेज और सूचनाएं अंग्रेजी में तैयार होती हैं.” उन्होंने यह भी कहा कि भारत जैसे बहुभाषी देश में अंग्रेजी एक “लिंक लैंग्वेज” के तौर पर इस्तेमाल होती है, इसलिए सैन्य ब्रीफिंग अंग्रेजी में देना कोई असामान्य बात नहीं है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर उठाए सवाल मेजर आदिल राजा ने पाकिस्तान सेना से यह भी पूछा कि वह “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान हुए नुकसान की पूरी जानकारी जनता से क्यों छिपा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सेना केवल “एकतरफा कहानी” पेश कर रही है और जनता को वास्तविक स्थिति नहीं बताई जा रही. सोशल मीडिया पर भी कई पाकिस्तानी यूजर्स ने सेना से सवाल किए कि आखिर नुकसान और विफलताओं को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा. सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस अहमद शरीफ चौधरी के बयान के बाद पाकिस्तान में भाषा, सैन्य पारदर्शिता और मीडिया नैरेटिव को लेकर बहस तेज हो गई है. कई यूजर्स ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों और सैन्य कूटनीति में अंग्रेजी का इस्तेमाल सामान्य बात है, इसलिए इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है. वहीं कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान सेना वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए भाषा जैसे विषयों को उछाल रही है.  

surbhi मई 9, 2026 0
Protesters arguing inside Lenskart store in Mumbai over religious symbols policy controversy
लेंसकार्ट स्टोर में हंगामा: बीजेपी नेता के नेतृत्व में विरोध, कंपनी ने बदले नियम

मुंबई: Mumbai में Lenskart के एक शोरूम में उस समय हंगामा हो गया, जब बीजेपी से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने स्टोर में पहुंचकर कर्मचारियों के साथ बहस की और धार्मिक प्रतीकों को लेकर विरोध जताया। क्या हुआ शोरूम में? बताया जा रहा है कि Nazia Elahi Khan के नेतृत्व में कुछ लोग स्टोर में पहुंचे और: कर्मचारियों को तिलक लगाया कलाई पर कलावा बांधा “जय श्री राम” के नारे लगाए इस दौरान उन्होंने स्टोर मैनेजमेंट से कथित तौर पर हिंदू प्रतीकों पर रोक को लेकर सवाल किए। विवाद की जड़ क्या है? यह विवाद एक कथित ग्रूमिंग पॉलिसी दस्तावेज के वायरल होने के बाद शुरू हुआ, जिसमें दावा किया गया था कि: बिंदी और तिलक जैसे धार्मिक प्रतीकों पर रोक है जबकि हिजाब की अनुमति दी गई है इस दावे के बाद सोशल मीडिया पर कंपनी के खिलाफ विरोध शुरू हो गया। कंपनी ने दी सफाई, बदले नियम विवाद बढ़ने के बाद Peyush Bansal की कंपनी Lenskart ने सफाई दी कि: वायरल दस्तावेज पुराना है मौजूदा नीति अलग है इसके बाद कंपनी ने नया ‘इन-स्टोर स्टाइल गाइड’ जारी किया, जिसमें अब कर्मचारियों को: बिंदी, तिलक, सिंदूर कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा हिजाब और पगड़ी जैसे सभी धार्मिक प्रतीक पहनने की अनुमति दे दी गई है। कंपनी ने मांगी माफी कंपनी ने सोशल मीडिया पर कहा कि अगर किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो उसे इसका खेद है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि वह सभी धर्मों और संस्कृतियों का सम्मान करती है। विवाद अभी भी जारी नए नियम लागू होने के बावजूद यह मामला पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। अलग-अलग संगठनों की ओर से कंपनी के खिलाफ विरोध जारी है।  

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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US President Donald Trump speaks about Iran talks, nuclear concerns, and a possible diplomatic agreement.
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ट्रंप बोले- समझौते से हो या सैन्य कार्रवाई से, अंत में अमेरिका ही जीतेगा

Deepshikha जून 5, 2026 0