ओमान के तट के निकट भारतीय चालक दल वाले एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। इस घटना में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई, जिसके बाद ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। वहीं भारत ने भी घटना की निंदा करते हुए क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की है। ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना की ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में भारतीय नागरिकों की मौत पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बगाई ने अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। भारतीय नागरिकों के प्रति जताई संवेदना ईरानी प्रवक्ता ने मृत भारतीय नाविकों के परिवारों, मित्रों, भारतीय जनता और भारत सरकार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों की मौत किसी भी परिस्थिति में दुखद है और ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। भारत ने भी की हमले की निंदा भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने ओमान के तट के पास वाणिज्यिक जहाज ‘सेटेबेलो’ पर हुए हमले की निंदा की। मंत्रालय ने बताया कि जहाज पर सवार 24 भारतीय चालक दल के सदस्यों में से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया था, जबकि तीन भारतीयों के लापता होने की सूचना मिली थी। बाद में खोज एवं बचाव अभियान के दौरान तीनों नाविकों के शव बरामद किए गए। मृत भारतीय नाविकों की पहचान केंद्रीय शिपिंग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने मृतकों की पहचान की पुष्टि करते हुए शोक व्यक्त किया। मृत नाविकों में: हिमाचल प्रदेश के डेक कैडेट आदित्य शर्मा उत्तर प्रदेश के इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया आंध्र प्रदेश के चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश शामिल थे। ये सभी पलाऊ के झंडे वाले जहाज एमटी सेटेबेलो के चालक दल का हिस्सा थे। होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर भारत की चिंता विदेश मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। मंत्रालय के अनुसार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करना वैश्विक समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। भारत ने कहा कि क्षेत्र में जारी संघर्ष और अस्थिरता का असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर पड़ रहा है, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। कूटनीतिक समाधान पर जोर भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील दोहराई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से निकाला जाना चाहिए। बयान में कहा गया कि क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए जारी कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि क्षेत्र में लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाई जा रही है और ईरान के साथ संभावित समझौते पर जल्द फैसला लिया जा सकता है। ईरान ने उनके दावों पर पूरी तरह सहमति नहीं जताई है और कहा है कि बातचीत अभी जारी है। शांति समझौते पर चल रही है बातचीत पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच कई दौर की बातचीत हो रही है। दोनों देशों के बीच होर्मुज स्ट्रेट, क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा जारी है। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच शुरुआती स्तर पर कुछ सहमति बनी है और मौजूदा युद्धविराम को 60 दिनों तक बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि अंतिम समझौते की घोषणा अभी नहीं हुई है। व्हाइट हाउस में हुई उच्चस्तरीय बैठक ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि वह ईरान के साथ प्रस्तावित समझौते पर जल्द निर्णय लेंगे। इसके लिए व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में करीब दो घंटे तक एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें समझौते से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। बैठक के बाद व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि किसी अंतिम फैसले पर सहमति बनी है या नहीं। ईरान के सामने रखीं ये प्रमुख शर्तें ट्रंप ने कहा कि किसी भी संभावित समझौते के लिए ईरान को कुछ महत्वपूर्ण शर्तें स्वीकार करनी होंगी। इनमें सबसे प्रमुख शर्त यह है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार या परमाणु बम विकसित नहीं करेगा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को सभी देशों के जहाजों के लिए बिना किसी शुल्क और बाधा के खोलना होगा। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाया या निष्क्रिय किया जाएगा ताकि समुद्री यातायात सामान्य हो सके। होर्मुज में फंसे जहाजों को लेकर ट्रंप का बयान ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसैनिक कार्रवाई के कारण प्रभावित जहाज अब जल्द अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। इसी दौरान उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि जहाजों के चालक दल अपने परिवारों तक लौट सकते हैं और "अपनी पत्नी को मेरी तरफ से हैलो कहना।" उनकी यह टिप्पणी सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चा का विषय बन गई। व्हाइट हाउस ने क्या कहा? व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अमेरिका तभी किसी शांति समझौते को अंतिम रूप देगा, जब ईरान सभी आवश्यक शर्तों को स्वीकार करेगा। अधिकारी के अनुसार, बातचीत जारी है और अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। वैश्विक ऊर्जा बाजार की नजर समझौते पर होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते पर दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों और व्यापारिक समुदाय की नजर बनी हुई है। यदि समझौता सफल होता है, तो इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार में स्थिरता आने की उम्मीद की जा रही है।
India के लिए पश्चिम एशिया से एक राहतभरी खबर सामने आई है। तेल सप्लाई को लेकर बढ़ी वैश्विक चिंता के बीच ‘निसोस केरोस’ नाम का एक बड़ा तेल टैंकर सफलतापूर्वक होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुका है और अब Visakhapatnam की ओर बढ़ रहा है। इसकी 3 जून तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। 21 मई को शारजाह से रवाना हुआ था जहाज मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला यह टैंकर 21 मई को Sharjah से रवाना हुआ था। जहाजों की ट्रैकिंग करने वाली संस्थाओं के मुताबिक शुक्रवार सुबह इसे भारत के पश्चिमी तट के पास उत्तरी अरब सागर में देखा गया। ‘निसोस केरोस’ लगभग 333 मीटर लंबा तेल टैंकर है। इसका मालिक अरेथुसा शिपिंग कॉरपोरेशन है, जबकि संचालन किक्लेड्स मैरीटाइम कॉरपोरेशन कर रही है। होर्मुज स्ट्रेट बना हुआ है वैश्विक चिंता का केंद्र Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। दुनिया की करीब 20% तेल और गैस सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी तनाव का असर सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर पड़ता है। हाल के महीनों में Iran और United States के बीच तनाव बढ़ने के बाद इस क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। IRGC ने 23 जहाजों को दी अनुमति ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पिछले 24 घंटे में 23 कॉमर्शियल जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दी। इनमें तेल टैंकर और कंटेनर जहाज शामिल थे। रिपोर्ट में कहा गया कि जहाजों की आवाजाही ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय के बाद हुई। हालांकि यह साफ नहीं किया गया कि जहाजों से कोई शुल्क या टोल लिया गया या नहीं। ईरान ने बनाई नई समुद्री एजेंसी इसी महीने ईरान ने समुद्री यातायात नियंत्रण के लिए ‘पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ नाम की नई एजेंसी बनाने की घोषणा की थी। दूसरी तरफ संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर टोल वसूली को अवैध बताया है। अमेरिका लगातार ईरान पर दबाव बना रहा है कि वह इस रणनीतिक समुद्री मार्ग में स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करे। ट्रंप की ओमान को चेतावनी Donald Trump ने हाल ही में कहा था कि “होर्मुज स्ट्रेट सभी देशों के लिए खुला रहना चाहिए।” उन्होंने Oman को भी चेतावनी दी थी कि अगर उसने ईरान के साथ मिलकर जहाजों से टोल वसूली का समझौता किया तो अमेरिका कड़ा कदम उठा सकता है। ओमान होर्मुज स्ट्रेट के दूसरे किनारे पर स्थित है और इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। भारत के लिए क्यों अहम है यह खबर? भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी तरह की बाधा से भारत में तेल सप्लाई और कीमतों पर असर पड़ सकता है। इसलिए भारतीय टैंकर का सुरक्षित तरीके से स्ट्रेट पार करना फिलहाल भारत के लिए राहत की खबर माना जा रहा है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ओमान के तट के पास भारतीय ध्वज वाले व्यावसायिक जहाज ‘हाजी अली’ पर हमला हुआ है। भारत सरकार ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे “अस्वीकार्य” बताया है। Ministry of External Affairs ने गुरुवार को कहा कि भारतीय जहाज पर हमला व्यावसायिक नौवहन और आम नाविकों की सुरक्षा के खिलाफ गंभीर घटना है। ओमान के जलक्षेत्र में हुआ हमला जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव Mukesh Mangal के मुताबिक, ‘हाजी अली’ नाम का यह पारंपरिक लकड़ी का पाल वाला भारतीय जहाज सोमालिया से Sharjah जा रहा था। बताया गया कि 13 मई 2026 की सुबह ओमान के जलक्षेत्र में जहाज पर हमला हुआ, जिसके बाद उसमें आग लग गई और बाद में वह समुद्र में डूब गया। सभी 14 चालक दल सदस्य सुरक्षित राहत की बात यह रही कि जहाज पर सवार सभी 14 चालक दल सदस्यों को Oman Coast Guard ने सुरक्षित बचा लिया। सभी लोगों को ओमान के दिब्बा बंदरगाह पहुंचाया गया है और उनकी हालत सुरक्षित बताई जा रही है। भारत ने जताया कड़ा विरोध विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि व्यावसायिक जहाजों और निर्दोष नाविकों को लगातार निशाना बनाया जाना पूरी तरह गलत है। भारत ने कहा कि समुद्री व्यापार, नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य में बाधा डालने वाली किसी भी गतिविधि से बचा जाना चाहिए। हमलावरों की पहचान नहीं फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि जहाज पर हमला किसने किया। घटना की जांच जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ते तनाव के बीच समुद्री सुरक्षा को लेकर खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। वैश्विक व्यापार के लिए अहम है होर्मुज स्ट्रेट Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का हमला अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी चिंता माना जाता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान की ओर से भेजे गए नए शांति प्रस्ताव को पूरी तरह “अनएक्सेप्टेबल” यानी अस्वीकार्य करार दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के साथ करीब 10 हफ्तों से जारी तनाव और संघर्ष को खत्म करने के लिए कई शर्तें रखी थीं, जिनमें युद्ध के नुकसान का मुआवजा और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान के नियंत्रण को मान्यता देना शामिल है। पाकिस्तान के जरिए भेजा गया प्रस्ताव रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अपना प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाया। प्रस्ताव में कहा गया कि अगर अमेरिका युद्ध रोकना चाहता है तो उसे पहले तत्काल संघर्षविराम लागू करना होगा और भविष्य में किसी भी नए हमले की गारंटी देनी होगी। ईरान ने यह भी मांग की कि युद्ध के दौरान हुए नुकसान की आर्थिक भरपाई की जाए। इसके साथ ही उसने Strait of Hormuz पर अपनी संप्रभुता को औपचारिक रूप से स्वीकार करने की बात कही। तेल प्रतिबंध हटाने की मांग ईरान ने प्रस्ताव में अमेरिकी वित्त विभाग के Office of Foreign Assets Control यानी OFAC द्वारा लगाए गए तेल निर्यात प्रतिबंधों में अस्थायी राहत की मांग भी रखी। तेहरान चाहता है कि कम से कम 30 दिनों के लिए उसके तेल निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाई जाएं और समुद्री घेराबंदी समाप्त की जाए, ताकि उसकी अर्थव्यवस्था को राहत मिल सके। होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा मुद्दा दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में से एक Strait of Hormuz इस पूरे विवाद का केंद्र बन गया है। ईरान ने संकेत दिया है कि अगर अमेरिका उसकी कुछ शर्तें मान लेता है, तो इस रणनीतिक समुद्री मार्ग का प्रबंधन उसके नियंत्रण में रहेगा। हालांकि, ईरान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह कौन-सी शर्तें हैं जिनके बदले वह क्षेत्रीय तनाव कम करने को तैयार होगा। परमाणु कार्यक्रम पर भी तनातनी The Wall Street Journal की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने संकेत दिया है कि वह सीमित समय के लिए यूरेनियम संवर्धन रोकने को तैयार हो सकता है, लेकिन अमेरिका के 20 साल वाले प्रस्ताव को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है। तेहरान ने अपने परमाणु ठिकानों को खत्म करने की मांग को भी साफ तौर पर खारिज कर दिया है। इससे साफ है कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच अब भी गहरा मतभेद बना हुआ है। ट्रंप ने क्यों ठुकराया प्रस्ताव? अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि ईरान की शर्तें अमेरिका के लिए स्वीकार्य नहीं हैं। उनका मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान को ज्यादा नियंत्रण देना और मुआवजे की मांग मानना अमेरिकी रणनीतिक हितों के खिलाफ होगा।
वॉशिंगटन: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि ईरानी तेल ले जा रहे चीनी जहाजों को रोका जाएगा। यह कार्रवाई वैश्विक ऊर्जा सप्लाई के सबसे अहम रास्ते Strait of Hormuz पर लागू की जा रही है। 10,000 सैनिक और नेवल शिप्स तैनात अमेरिकी सेना ने नाकाबंदी को लागू करने के लिए: 10,000 से ज्यादा सैनिक करीब 12 नौसैनिक जहाज (Naval Ships) तैनात किए हैं। सेना के अनुसार, नाकाबंदी के पहले 24 घंटों में एक भी जहाज होर्मुज स्ट्रेट पार नहीं कर पाया। 6 व्यापारिक जहाजों को वापस लौटने का आदेश दिया गया हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में 4 जहाजों के गुजरने का दावा भी किया गया हर देश के जहाजों पर लागू नियम अमेरिका की यह कार्रवाई: ईरान के बंदरगाहों में जाने या निकलने वाले सभी जहाजों पर लागू जहाज किसी भी देश का हो, नियम समान रहेगा बातचीत की कोशिश भी जारी तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं: वॉशिंगटन में लेबनान-इजराइल सीजफायर पर पहले दौर की बातचीत हुई इसे सकारात्मक बताया गया, अगली बैठक की तैयारी जारी 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स 1. छूट खत्म होने की चेतावनी अमेरिकी ट्रेजरी ने कहा कि ईरानी तेल बिक्री पर दी गई अस्थायी छूट जल्द खत्म होगी। 2. यूरोप का अलग मिशन यूरोपीय देश होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बहाल करने के लिए नया अंतरराष्ट्रीय मिशन बना रहे हैं–खास बात, इसमें अमेरिका शामिल नहीं है। 3. कनाडा की मदद Canada ने Lebanon के लिए 40 मिलियन डॉलर की सहायता का ऐलान किया। 4. हिजबुल्लाह के हमले Hezbollah ने दावा किया कि उसने 24 घंटे में 34 हमले किए, जिनमें Israel के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। 5. ट्रंप का बयान अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत अगले 2 दिनों में फिर शुरू हो सकती है। होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नाकाबंदी ने वैश्विक तेल सप्लाई और समुद्री व्यापार को सीधे प्रभावित किया है। जहां एक ओर सैन्य दबाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं–आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
Islamabad में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे चली हाई-लेवल बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। इस वार्ता के टूटने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। अराघची का आरोप–अमेरिका ‘वादे से मुकरा’ ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि समझौता लगभग तय था, लेकिन आखिरी समय में अमेरिका ने अपनी शर्तें बदल दीं। उन्होंने ‘मैक्सिमलिज्म’ का आरोप लगाते हुए कहा कि वॉशिंगटन ने जरूरत से ज्यादा मांग रखकर बातचीत को विफल कर दिया। अराघची ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर अमेरिका अच्छी नीयत दिखाता, तो जवाब भी वैसा ही मिलता–लेकिन अब “दुश्मनी का जवाब दुश्मनी से दिया जाएगा।” जेडी वेंस का तंज अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance भी इस बैठक में शामिल थे। उन्होंने कहा कि कुछ मुद्दों पर सहमति बनी, लेकिन अंतिम समझौता नहीं हो सका। वेंस ने कहा कि यह विफलता अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए नुकसानदायक है। किन मुद्दों पर फंसी बात? रिपोर्ट्स के मुताबिक, बातचीत दो बड़े मुद्दों पर अटक गई: Strait of Hormuz पर नियंत्रण ईरान का परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन ईरानी मीडिया ने अमेरिकी रुख को ‘अवास्तविक’ बताया और कहा कि बुनियादी समझौते का ढांचा तक तैयार नहीं हो पाया। ट्रंप की धमकियों पर ईरान का जवाब ईरान की संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि Donald Trump की धमकियों का कोई असर नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी–“अगर अमेरिका लड़ाई चाहता है, तो हम भी तैयार हैं, और अगर बातचीत करेगा तो हम भी तर्क से जवाब देंगे।”
Energy Update: मिडिल ईस्ट में ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। 15,400 टन LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) लेकर भारतीय ध्वज वाला पोत ‘ग्रीन आशा’ सुरक्षित भारत पहुंच गया है। होर्मुज स्ट्रेट पार कर JNPA पहुंचा जहाज ‘ग्रीन आशा’ ने तनावपूर्ण हालात के बीच होर्मुज स्ट्रेट पार कर नवी मुंबई स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) पर सुरक्षित लंगर डाला। मिडिल ईस्ट में हालिया तनाव के बाद यह पहला जहाज है जो इस रूट से होकर भारत पहुंचा है। सुरक्षित पहुंचा माल और क्रू जेएनपीए ने पोत का औपचारिक स्वागत किया जहाज ने BPCL-IOCL द्वारा संचालित लिक्विड बर्थ पर एंकर किया पोत पर मौजूद सारा LPG कार्गो और चालक दल पूरी तरह सुरक्षित हैं अब तक 8 जहाज पहुंच चुके ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच तनाव शुरू होने के बाद अब तक कुल 8 जहाज भारत पहुंच चुके हैं: ग्रीन सान्वी: 46,650 टन LPG (7 अप्रैल) पाइन गैस जग वसंत MT शिवालिक MT नंदा देवी जग लाडकी: 80,886 MT कच्चा तेल (18 मार्च) क्यों अहम है यह खबर? होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का सबसे अहम समुद्री मार्ग है। यहां तनाव के कारण सप्लाई बाधित होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में ‘ग्रीन आशा’ का सुरक्षित पहुंचना: भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए राहत LPG सप्लाई चेन के स्थिर रहने का संकेत वैश्विक बाजार में घबराहट कम करने वाला कदम
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।