स्टार्टअप से बदली किस्मत, बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए बनी ‘संजीवनी’ बिहार के सारण जिले की एक साधारण बेटी आज अपने अनोखे नवाचार के कारण देशभर में चर्चा का विषय बन गई है। महमदपुर गांव की रहने वाली गुड़िया कुमारी ने घर में तैयार किए गए देसी ड्रायर से न सिर्फ अपनी पहचान बनाई, बल्कि हजारों किसानों की आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाई है। नौकरी छोड़ स्टार्टअप का चुना रास्ता होम साइंस से ग्रेजुएशन करने के बाद गुड़िया कुमारी ने नौकरी की बजाय उद्यमिता का रास्ता चुना। उन्होंने भोजपट्टा एग्रीटेक की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य किसानों की समस्याओं का समाधान निकालना था। उनकी यह सोच आज एक सफल स्टार्टअप के रूप में सामने आई है। बाढ़ ने दी नई सोच, किसानों के लिए बनाया ड्रायर गुड़िया बताती हैं कि वर्ष 2012 में वह केला फाइबर खरीदने के लिए किसानों के पास जाती थीं। इसी दौरान हाजीपुर और सारण क्षेत्र में आई बाढ़ ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया। तब उन्होंने फल और सब्जियों को सुरक्षित रखने के लिए एक देसी ड्रायर बनाने का विचार किया। उन्होंने अपने गांव में ही पहला ड्रायर तैयार किया और एक किसान को इस्तेमाल के लिए दिया, जो पूरी तरह सफल साबित हुआ। इसके बाद यह नवाचार धीरे-धीरे किसानों के बीच लोकप्रिय होता गया। सरकार की मदद से मिली रफ्तार गुड़िया कुमारी के इस स्टार्टअप को राज्य सरकार की स्टार्टअप योजना से भी बड़ा सहयोग मिला। उनके पति और को-फाउंडर नीतीश कुमार के अनुसार, वर्ष 2023 में उद्योग विभाग से 9 लाख रुपये का ऋण मिला, जिससे स्टार्टअप को आगे बढ़ाने में मदद मिली। इस योजना के जरिए उनके प्रोडक्ट को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान भी मिली। पेटेंट और कई बड़े अवार्ड से सम्मानित भोजपट्टा एग्रीटेक के इस खास ड्रायर को गुड़िया कुमारी ने खुद डिजाइन किया है और इसे पेटेंट भी मिल चुका है। उनके इस नवाचार के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिल चुके हैं, जिनमें ‘महारथी अवार्ड’ और ‘ग्रीन एनर्जी चैलेंज अवार्ड’ शामिल हैं। इसके अलावा उन्हें IIT Kanpur से 12 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्राप्त हुई है। किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा प्रोडक्ट अब तक भोजपट्टा एग्रीटेक के करीब 250 ड्रायर बिक चुके हैं। इनका सबसे अधिक लाभ बाढ़ प्रभावित इलाकों के किसानों को मिल रहा है। किसान अब फल और सब्जियों को सुखाकर लंबे समय तक सुरक्षित रख पा रहे हैं और इससे उनकी आय भी दोगुनी हो रही है। बिहार बन रहा उद्यमिता का नया केंद्र गुड़िया कुमारी की सफलता यह साबित करती है कि बिहार अब केवल शिक्षा और स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि उद्योग और स्टार्टअप के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उनकी यह पहल राज्य के युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। गांव की बेटी से राष्ट्रीय पहचान तक का सफर सारण की गुड़िया कुमारी ने अपने छोटे से प्रयास से बड़ा बदलाव लाकर दिखाया है। उनका देसी ड्रायर न सिर्फ किसानों की जिंदगी आसान बना रहा है, बल्कि ‘मेड इन बिहार’ की ताकत को भी देश-दुनिया तक पहुंचा रहा है।
जहरीली शराब मामले की जांच के दौरान हुई मुठभेड़ बिहार के Saran district में रविवार देर रात पुलिस और शराब तस्करों के बीच मुठभेड़ हो गई। यह कार्रवाई मशरक और पानापुर थाना क्षेत्र की सीमा पर की गई, जहां पुलिस ने जहरीली शराब कांड के आरोपी एक शराब माफिया को गोली मारकर गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान Suraj Mahto (26) के रूप में हुई है, जो पानापुर थाना क्षेत्र के मिथवा गांव का निवासी बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार आरोपी के पैर में गोली लगी है और फिलहाल उसका इलाज चल रहा है। जहरीली शराब पीने से हुई थी कई लोगों की मौत जानकारी के मुताबिक हाल ही में सारण जिले में संदिग्ध जहरीली शराब पीने से पांच लोगों की मौत हो गई थी, जबकि करीब 12 लोग गंभीर रूप से बीमार पड़ गए थे। सभी पीड़ितों को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पीड़ितों ने बताया था कि शराब पीने के कुछ ही समय बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और आंखों से धुंधला दिखाई देने लगा। इलाज के बाद सभी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, लेकिन घटना के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी। पुलिस जांच में सामने आया आरोपी का नाम जांच के दौरान पुलिस को सुराग मिला कि जहरीली शराब की सप्लाई में Suraj Mahto का हाथ हो सकता है। इसके बाद आरोपी फरार हो गया था। पुलिस को बाद में सूचना मिली कि वह Katihar में छिपा हुआ है। इसके आधार पर पुलिस टीम ने कटिहार पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर लिया और आगे की पूछताछ के लिए छपरा लाया गया। सहयोगियों ने पुलिस पर की फायरिंग पुलिस शराब की बरामदगी और अन्य आरोपियों की तलाश में उसे लेकर मशरक-पानापुर बॉर्डर इलाके में छापेमारी करने पहुंची थी। इसी दौरान आरोपी के कुछ साथियों ने उसे छुड़ाने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। इस दौरान गोली लगने से सूरज महतो घायल हो गया और पुलिस ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया। अस्पताल में चल रहा इलाज घायल आरोपी को पहले स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से बेहतर इलाज के लिए Chhapra Sadar Hospital रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार गोली उसके पैर में लगी है और फिलहाल उसकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है। अन्य आरोपियों की तलाश में छापेमारी जारी मशरक एसडीपीओ ने बताया कि जहरीली शराब कांड की जांच के दौरान आरोपी का नाम सामने आया था। उसे कटिहार से गिरफ्तार कर शराब की बरामदगी के लिए मौके पर ले जाया गया था, लेकिन उसके सहयोगियों ने पुलिस पर हमला कर दिया। पुलिस का कहना है कि मामले में शामिल अन्य शराब माफियाओं की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।
बिहार में एक बार फिर जहरीली शराब की आशंका से हड़कंप मच गया है। Chhapra जिले में संदिग्ध परिस्थितियों में पांच लोगों की मौत हो गई है। मृतकों में तीन लोग Mashrakh क्षेत्र के हैं, जबकि दो की मौत Panapur में हुई है। परिजनों का आरोप है कि कुछ लोगों ने शराब पी थी, जबकि प्रशासन अभी तक इसे बीमारी से हुई मौत बता रहा है। मृतकों की पहचान मृतकों की पहचान इस प्रकार की गई है: संतोष महतो (मशरक) रघुवर महतो (मशरक) धर्मेंद्र सिंह (मशरक) सुखल नट (पानापुर) धर्मेंद्र राय (पानापुर) बताया जा रहा है कि सबसे पहले बुधवार रात संतोष महतो की मौत हुई थी। इसके बाद गुरुवार रात तक अलग-अलग जगहों से कुल पांच मौतों की खबर सामने आई। परिजनों ने शराब पीने की बात कही संतोष महतो की पत्नी लालमुनि देवी के अनुसार, उनके पति रात में घर आए और खाना खाकर सो गए। सुबह उठने के बाद उन्होंने पेट दर्द और आंखों से दिखाई न देने की शिकायत की। इसके बाद उन्हें लगातार उल्टियां होने लगीं। परिवार वाले उन्हें अस्पताल लेकर गए, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि संतोष महतो ने मरने से पहले शराब पीने की बात कही थी। उनके भतीजे ने भी बताया कि वह मंगलवार को कहीं से शराब पीकर घर लौटे थे और रात में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। प्रशासन ने शराब से मौत से किया इनकार मामले पर Sanjay Kumar Sudhanshu, एसडीपीओ मशरक ने कहा कि फिलहाल शराब पीने से मौत की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और पहली नजर में लीवर खराब होने की आशंका जताई जा रही है। वहीं जिला जनसंपर्क पदाधिकारी Ravindra Kumar ने बताया कि जांच में यह सामने आया है कि मृतक संतोष महतो पिछले कुछ दिनों से मानसिक तनाव में थे और ठीक से खाना नहीं खा रहे थे। प्रशासन का कहना है कि बीमारी की वजह से मौत हो सकती है। जांच जारी मढ़ौरा अनुमंडल पदाधिकारी Nidhi Raj ने बताया कि अभी तक एक मौत मशरक और एक पानापुर में होने की पुष्टि हुई है। बाकी मामलों की भी जांच की जा रही है। हालांकि स्थानीय लोगों के बीच जहरीली शराब की चर्चा तेज है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि पोस्टमार्टम और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो पाएगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।