आज के ऑटोमोबाइल बाजार में सनरूफ अब सिर्फ लग्ज़री कारों तक सीमित नहीं रह गया है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों की बदलती पसंद के चलते अब एंट्री-लेवल और कॉम्पैक्ट कारों में भी यह फीचर आसानी से उपलब्ध है। खासकर युवा और शहरी ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए कंपनियां कम बजट में भी प्रीमियम एक्सपीरियंस देने की कोशिश कर रही हैं।
अगर आपका बजट ₹8 लाख तक है और आप सनरूफ वाली कार खरीदना चाहते हैं, तो यहां 5 बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं-
यह कार अपने स्टाइलिश डिजाइन और प्रीमियम फीचर्स के लिए जानी जाती है। Magna ट्रिम से इसमें सिंगल-पेन इलेक्ट्रिक सनरूफ मिलता है।
मुख्य फीचर्स:
LED DRLs, रियर AC वेंट्स, डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, 6 एयरबैग
इंजन: 1.2L पेट्रोल (82 hp)
कीमत: लगभग ₹7 लाख (एक्स-शोरूम)
अपडेटेड अवतार में आई यह माइक्रो SUV अब ज्यादा फीचर-लोडेड हो चुकी है। Pure Plus S ट्रिम से सनरूफ मिलता है।
मुख्य फीचर्स:
8-इंच टचस्क्रीन, क्रूज़ कंट्रोल, 6 एयरबैग, ड्राइव मोड्स
इंजन: 1.2L पेट्रोल + CNG ऑप्शन
कीमत: लगभग ₹7.35 लाख
सेफ्टी और प्रीमियम फील के लिए जानी जाने वाली यह हैचबैक अब सनरूफ के साथ और भी आकर्षक हो गई है।
मुख्य फीचर्स:
7-इंच टचस्क्रीन, क्रूज़ कंट्रोल, रियर कैमरा, 6 एयरबैग
इंजन: 1.2L पेट्रोल + CNG
कीमत: लगभग ₹7.36 लाख
स्टाइलिश लुक और फीचर-लोडेड केबिन वाली यह SUV HTE(O) ट्रिम से सनरूफ ऑफर करती है।
मुख्य फीचर्स:
LED DRLs, 6 एयरबैग, स्टीयरिंग कंट्रोल, रियर पार्किंग सेंसर
इंजन: 1.2L पेट्रोल / 1.5L डीजल
कीमत: लगभग ₹7.7 लाख
यह नई SUV कम बजट में शानदार फीचर्स का पैकेज देती है और HX4 Plus ट्रिम से सनरूफ मिलता है।
मुख्य फीचर्स:
8-इंच टचस्क्रीन, वायरलेस कनेक्टिविटी, TPMS, 6 एयरबैग
इंजन: 1.2L पेट्रोल + CNG
कीमत: लगभग ₹7.95 लाख
कम बजट में सनरूफ वाली कार खरीदना अब एक सपना नहीं रहा। चाहे आप हैचबैक पसंद करते हों या SUV, ₹8 लाख तक के बजट में कई ऐसे विकल्प मौजूद हैं जो स्टाइल, सेफ्टी और टेक्नोलॉजी का बेहतरीन संतुलन देते हैं। सही चुनाव आपके उपयोग, माइलेज जरूरत और फीचर प्रायोरिटी पर निर्भर करेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
चीनी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता BYD ने भारत में अपनी नई Seal U SUV और एडवांस DM-i (Dual Mode Intelligent) प्लग-इन हाइब्रिड टेक्नोलॉजी को पेश कर दिया है। कंपनी की यह नई SUV साल 2026 के अंत तक भारतीय बाजार में लॉन्च की जा सकती है। खास बात यह है कि Seal U एक Plug-in Hybrid Electric Vehicle (PHEV) होगी, जो इलेक्ट्रिक और पेट्रोल दोनों पावरट्रेन का बेहतरीन संतुलन प्रदान करेगी। BYD की यह तकनीक पहले से ही वैश्विक बाजार में काफी लोकप्रिय है और कंपनी इसे बेहतर माइलेज, लंबी रेंज और दमदार परफॉर्मेंस का कॉम्बिनेशन बता रही है। क्या है BYD की DM-i टेक्नोलॉजी? BYD Seal U DM-i पारंपरिक हाइब्रिड कारों से अलग है। इसका पूरा सिस्टम "Electric First" कॉन्सेप्ट पर आधारित है, यानी सामान्य ड्राइविंग के दौरान कार अधिकतर समय इलेक्ट्रिक मोड में चलती है और जरूरत पड़ने पर पेट्रोल इंजन सहायता प्रदान करता है। इस SUV में मिलते हैं: 1.5-लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन 18.3 kWh Blade Battery ट्रैक्शन इलेक्ट्रिक मोटर अतिरिक्त जनरेटर मोटर इन सभी के संयोजन से बेहतर परफॉर्मेंस और कम ईंधन खपत हासिल की जाती है। इसकी बैटरी को EV की तरह बाहरी चार्जर से भी चार्ज किया जा सकता है। 1,200 किलोमीटर तक की कंबाइंड रेंज BYD का दावा है कि Seal U DM-i एक बार फुल टैंक और फुल चार्ज के बाद लगभग 1,200 किलोमीटर तक की कुल रेंज देने में सक्षम होगी। कंपनी के अनुसार इसका 1.5-लीटर इंजन 43.04 प्रतिशत तक की थर्मल एफिशिएंसी प्रदान करता है, जो इसे काफी फ्यूल-एफिशिएंट बनाता है। तीन अलग-अलग मोड में काम करता है सिस्टम BYD का DM-i सिस्टम तीन मोड में संचालित होता है: फुल इलेक्ट्रिक मोड इस मोड में SUV केवल बैटरी से चलती है और पेट्रोल इंजन का उपयोग नहीं होता। सीरीज मोड इस स्थिति में पेट्रोल इंजन केवल बैटरी चार्ज करने का काम करता है जबकि पहियों को इलेक्ट्रिक मोटर चलाती है। पैरलल मोड अधिक पावर की जरूरत पड़ने पर इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर दोनों मिलकर पहियों को शक्ति प्रदान करते हैं। 0 से 100 kmph की रफ्तार सिर्फ 5.9 सेकंड में कंपनी का दावा है कि BYD Seal U PHEV महज 5.9 सेकंड में 0 से 100 kmph की स्पीड हासिल कर सकती है। कुछ वेरिएंट्स में यह आंकड़ा 5.5 सेकंड तक भी पहुंच सकता है, जो इसे कई 2.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल SUVs के बराबर या उससे बेहतर बनाता है। 20 kmpl से ज्यादा माइलेज का दावा BYD के अनुसार यह SUV 100 किलोमीटर की दूरी तय करने में केवल 4.8 लीटर पेट्रोल खर्च करती है। यानी इसका अनुमानित माइलेज करीब 20.8 kmpl हो सकता है। 70 किलोमीटर से ज्यादा की इलेक्ट्रिक रेंज Seal U DM-i में दी गई 18.3 kWh Blade Battery के साथ SUV केवल इलेक्ट्रिक मोड में लगभग 70 किलोमीटर तक चल सकती है। यह सुविधा रोजमर्रा के शहरी उपयोग में पेट्रोल की खपत को काफी कम कर सकती है। भारत में बढ़ेगी हाइब्रिड SUV सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा BYD की नई Seal U SUV भारतीय बाजार में लॉन्च होने के बाद हाइब्रिड और इलेक्ट्रिफाइड SUV सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकती है। लंबी रेंज, बेहतर माइलेज और दमदार प्रदर्शन के कारण यह उन ग्राहकों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकती है जो EV और पेट्रोल दोनों का संतुलन चाहते हैं।
भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में Ather Energy ने अपने लोकप्रिय फैमिली इलेक्ट्रिक स्कूटर Ather Rizta की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी ने 1 जून 2026 से Rizta के सभी वेरिएंट्स की कीमतों में लगभग ₹3,000 से ₹4,000 तक का इजाफा किया है। नई कीमतें लागू होने के बाद अब ग्राहकों को इस फैमिली-फ्रेंडली इलेक्ट्रिक स्कूटर के लिए पहले से अधिक भुगतान करना होगा। Ather Rizta ने लॉन्च के बाद से ही भारतीय परिवारों के बीच अपनी उपयोगिता, लंबी रेंज और आधुनिक फीचर्स के कारण खास पहचान बनाई है। बाजार में इसका मुकाबला TVS और Bajaj जैसे ब्रांड्स के इलेक्ट्रिक स्कूटर्स से होता है। वेरिएंट के अनुसार नई कीमतें वेरिएंट नई कीमत पुरानी कीमत बढ़ोतरी Rizta S (2.9 kWh) ₹1,21,499 ₹1,17,500 ₹3,999 Rizta Z (2.9 kWh) ₹1,36,999 ₹1,32,998 ₹4,001 Rizta S (3.7 kWh) ₹1,44,500 ₹1,40,499 ₹4,001 Rizta Z (3.7 kWh) ₹1,56,999 ₹1,52,998 ₹4,001 कीमत बढ़ने की क्या है वजह? Ather Energy ने फिलहाल कीमत बढ़ाने के पीछे कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है। हालांकि, ऑटो इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि कच्चे माल की बढ़ती लागत, उत्पादन खर्च में इजाफा और सप्लाई चेन से जुड़े खर्च इस फैसले की प्रमुख वजह हो सकते हैं। हाल के महीनों में कई अन्य वाहन निर्माताओं ने भी इसी तरह कीमतों में संशोधन किया है। बैटरी, रेंज और वारंटी Ather Rizta को दो बैटरी विकल्पों के साथ पेश किया जाता है। 2.9kWh बैटरी पैक लगभग 105 किलोमीटर की वास्तविक रेंज प्रदान करता है, जबकि 3.7kWh बैटरी विकल्प में यह रेंज करीब 125 किलोमीटर तक पहुंच जाती है। कंपनी बैटरी पर 5 साल या 60,000 किलोमीटर तक की वारंटी देती है। इसके अलावा बैटरी को IP67 रेटिंग मिली हुई है, जो इसे धूल और पानी से सुरक्षा प्रदान करती है। Rizta S के प्रमुख फीचर्स Rizta S वेरिएंट में 7-इंच का DeepView डिस्प्ले, टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन और रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम दिया गया है। सुरक्षा के लिए CBS ब्रेकिंग, Vehicle Fall Safe और Emergency Stop Signal (ESS) जैसे फीचर्स शामिल हैं। इसके अलावा 34 लीटर अंडर-सीट स्टोरेज, LED लाइटिंग, मल्टीपल राइडिंग मोड्स, Auto Hold, Guide Me Home लाइट्स और Ather Connect जैसी कनेक्टेड सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। Rizta Z के एडवांस फीचर्स टॉप वेरिएंट Rizta Z में 7-इंच TFT टचस्क्रीन डिस्प्ले, Magic Twist और स्किड कंट्रोल जैसे एडवांस फीचर्स दिए गए हैं। इसके अलावा ऑटो-ब्राइटनेस एडजस्टमेंट, ऑप्टिमाइज्ड चार्जिंग, रिमोट फंक्शन्स, पॉटहोल अलर्ट और क्रैश अलर्ट जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं। कनेक्टिविटी और स्मार्ट फीचर्स की बात करें तो इसमें WhatsApp प्रीव्यू, लाइव लोकेशन शेयरिंग, डॉक्यूमेंट स्टोरेज, Cricket Dash, नेविगेशन और टेक्स्ट मैसेज के साथ कॉल रिजेक्ट करने जैसी सुविधाएं शामिल हैं। कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद Ather Rizta अपने सेगमेंट में फीचर्स, रेंज और फैमिली-ओरिएंटेड डिजाइन के कारण एक मजबूत विकल्प बना हुआ है। हालांकि, नए ग्राहकों को अब इस इलेक्ट्रिक स्कूटर को खरीदने के लिए पहले से कुछ अधिक बजट तैयार रखना होगा।
भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार तेजी से बढ़ रहा है और अब खरीदार सिर्फ स्टाइल या फीचर्स नहीं, बल्कि लंबी बैटरी रेंज को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। ऑफिस, कॉलेज या रोजमर्रा के कामों के लिए लोग ऐसे इलेक्ट्रिक स्कूटर चाहते हैं जो एक बार चार्ज होने के बाद लंबी दूरी तय कर सकें और बार-बार चार्जिंग की चिंता न रहे। अगर आप भी लंबी रेंज और बेहतर परफॉर्मेंस वाला इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो ये 5 मॉडल आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं। 1. Bajaj Chetak C2501 बजाज का यह इलेक्ट्रिक स्कूटर रोजमर्रा के इस्तेमाल को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसकी सीट आरामदायक है और ट्रैफिक में इसे चलाना काफी आसान माना जाता है। कंपनी के अनुसार यह स्कूटर एक बार फुल चार्ज होने पर 113 किलोमीटर तक की IDC रेंज देने में सक्षम है। मजबूत बॉडी और भरोसेमंद परफॉर्मेंस इसे शहर में डेली कम्यूट के लिए अच्छा विकल्प बनाते हैं। 2. TVS iQube टीवीएस का iQube भारतीय बाजार में सबसे लोकप्रिय इलेक्ट्रिक स्कूटर्स में शामिल है। इसकी चौड़ी सीट, बेहतर स्टोरेज स्पेस और आरामदायक राइड इसे परिवारों के बीच भी लोकप्रिय बनाती है। इसके अलग-अलग वेरिएंट्स में लगभग 94 किलोमीटर से लेकर 212 किलोमीटर तक की IDC रेंज मिलती है। लंबी दूरी तय करने वालों के लिए यह एक मजबूत विकल्प माना जाता है। 3. Ather Rizta Ather Rizta को खासतौर पर फैमिली यूजर्स को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। इसमें बड़ा सीट स्पेस और पर्याप्त स्टोरेज दिया गया है, जिससे रोजमर्रा के उपयोग में सुविधा मिलती है। इसके विभिन्न बैटरी विकल्प 123 किलोमीटर से 159 किलोमीटर तक की IDC रेंज प्रदान करते हैं। आराम और उपयोगिता के मामले में यह स्कूटर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। 4. Honda Activa e होंडा ने अपनी लोकप्रिय Activa सीरीज के जरिए इलेक्ट्रिक सेगमेंट में कदम रखा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत स्वैपेबल बैटरी सिस्टम है। इसमें 1.5 kWh की दो बैटरियां दी गई हैं जिन्हें जरूरत पड़ने पर बदला जा सकता है। कंपनी का दावा है कि यह स्कूटर फुल चार्ज पर लगभग 102 किलोमीटर तक की रेंज देता है। 5. Ather 450X अगर आप लंबी रेंज के साथ स्पोर्टी परफॉर्मेंस भी चाहते हैं, तो Ather 450X एक शानदार विकल्प हो सकता है। तेज एक्सीलरेशन, स्मार्ट फीचर्स और शानदार हैंडलिंग के साथ यह स्कूटर शहर की सड़कों पर बेहतरीन अनुभव देता है। कंपनी के मुताबिक इसकी रेंज लगभग 161 किलोमीटर तक जा सकती है। किसके लिए कौन सा स्कूटर बेहतर? डेली ऑफिस और शहर में सफर के लिए: Bajaj Chetak C2501 सबसे ज्यादा रेंज चाहने वालों के लिए: TVS iQube फैमिली यूज के लिए: Ather Rizta बैटरी स्वैपिंग सुविधा पसंद करने वालों के लिए: Honda Activa e परफॉर्मेंस और रेंज दोनों चाहने वालों के लिए: Ather 450X इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदते समय केवल कंपनी की दावा की गई रेंज पर निर्भर न रहें। अपनी रोजाना की जरूरत, चार्जिंग सुविधा, सर्विस नेटवर्क और बजट को ध्यान में रखकर फैसला लेना ज्यादा समझदारी होगी।