Kia Syros EV को दो बैटरी विकल्प और कुल पांच वेरिएंट्स में पेश किया गया है। ऐसे में सवाल यह है कि कौन-सा वेरिएंट आपके बजट और जरूरतों के हिसाब से सबसे बेहतर साबित होगा। आइए जानते हैं पूरी डिटेल।
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कंपनी Battery-as-a-Service (BaaS) मॉडल भी दे रही है। इसके तहत ग्राहक ₹7.99 लाख की शुरुआती कीमत पर SUV खरीद सकते हैं, जबकि बैटरी के लिए ₹3.3 प्रति किलोमीटर का किराया देना होगा।
एंट्री-लेवल HTK वेरिएंट में भी कई आधुनिक फीचर्स दिए गए हैं, जिनमें शामिल हैं—
HTK+ वेरिएंट में बेस मॉडल के अलावा ये अतिरिक्त सुविधाएं मिलती हैं—
HTX वेरिएंट में प्रीमियम फीचर्स की लंबी सूची मिलती है—
यही वजह है कि यह वेरिएंट कीमत और फीचर्स के बीच सबसे अच्छा संतुलन प्रदान करता है।
यदि आप अधिक प्रीमियम अनुभव चाहते हैं तो HTX+ में अतिरिक्त सुविधाएं मिलती हैं—
टॉप-स्पेक X-Line वेरिएंट में कई एडवांस टेक्नोलॉजी फीचर्स दिए गए हैं—
Kia Syros EV के सभी वेरिएंट्स में स्टैंडर्ड तौर पर कई महत्वपूर्ण सुरक्षा फीचर्स दिए गए हैं—
अगर आप कीमत, फीचर्स और रेंज के बीच सबसे अच्छा संतुलन चाहते हैं, तो HTX वेरिएंट सबसे वैल्यू फॉर मनी विकल्प माना जा सकता है। इसमें 51.4kWh बैटरी का विकल्प मिलता है, जिससे लंबी ड्राइविंग रेंज हासिल होती है। साथ ही पैनोरमिक सनरूफ, कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी, स्लाइडिंग रियर सीट और कई प्रीमियम फीचर्स इसे अपनी कीमत के हिसाब से बेहद आकर्षक बनाते हैं।
वहीं HTX+ और X-Line उन ग्राहकों के लिए बेहतर हैं, जो लग्जरी और एडवांस टेक्नोलॉजी फीचर्स को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि, अधिकांश खरीदारों के लिए HTX वेरिएंट सबसे संतुलित और समझदारी भरा विकल्प साबित हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और इसी बीच Kia ने अपनी नई Syros EV को आकर्षक कीमत और दमदार फीचर्स के साथ लॉन्च कर दिया है। यह इलेक्ट्रिक SUV ₹13.50 लाख (एक्स-शोरूम) की शुरुआती कीमत पर उपलब्ध है और 526 किलोमीटर तक की दावा की गई रेंज के साथ आती है। Kia Syros EV को दो बैटरी विकल्प और कुल पांच वेरिएंट्स में पेश किया गया है। ऐसे में सवाल यह है कि कौन-सा वेरिएंट आपके बजट और जरूरतों के हिसाब से सबसे बेहतर साबित होगा। आइए जानते हैं पूरी डिटेल। Kia Syros EV की कीमत वेरिएंट 42kWh बैटरी 51.4kWh बैटरी HTK ₹13.50 लाख — HTK+ ₹14 लाख ₹17 लाख HTX ₹16 लाख ₹18 लाख HTX+ — ₹19.50 लाख X-Line — ₹20 लाख कंपनी Battery-as-a-Service (BaaS) मॉडल भी दे रही है। इसके तहत ग्राहक ₹7.99 लाख की शुरुआती कीमत पर SUV खरीद सकते हैं, जबकि बैटरी के लिए ₹3.3 प्रति किलोमीटर का किराया देना होगा। HTK: बेस वेरिएंट में भी शानदार फीचर्स एंट्री-लेवल HTK वेरिएंट में भी कई आधुनिक फीचर्स दिए गए हैं, जिनमें शामिल हैं— LED हेडलैंप 16-इंच अलॉय व्हील फ्लश डोर हैंडल 12.3-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम 12.3-इंच डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर वायरलेस Android Auto और Apple CarPlay 4 स्पीकर और 2 ट्वीटर मल्टीपल ड्राइव मोड रियर AC वेंट इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक HTK+: बढ़िया फीचर्स के साथ बेहतर विकल्प HTK+ वेरिएंट में बेस मॉडल के अलावा ये अतिरिक्त सुविधाएं मिलती हैं— रियर पार्किंग कैमरा क्रूज कंट्रोल 100W USB Type-C फास्ट चार्जिंग 17-इंच अलॉय व्हील (Long Range मॉडल) HTX: सबसे संतुलित और वैल्यू फॉर मनी HTX वेरिएंट में प्रीमियम फीचर्स की लंबी सूची मिलती है— पैनोरमिक सनरूफ स्लाइड और रिक्लाइन होने वाली रियर सीट 60:40 स्प्लिट फोल्डिंग सीट रियर आर्मरेस्ट रियर डिफॉगर OTA अपडेट कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी (Long Range मॉडल) यही वजह है कि यह वेरिएंट कीमत और फीचर्स के बीच सबसे अच्छा संतुलन प्रदान करता है। HTX+: लग्जरी फीचर्स का पैकेज यदि आप अधिक प्रीमियम अनुभव चाहते हैं तो HTX+ में अतिरिक्त सुविधाएं मिलती हैं— ऑटो फ्लश डोर हैंडल लेदरेट सीटें 8-स्पीकर Harman Kardon ऑडियो सिस्टम वायरलेस फोन चार्जर वेंटिलेटेड फ्रंट और रियर सीट 4-वे पावर्ड ड्राइवर सीट फ्रंट पार्किंग सेंसर बैटरी हीटिंग सिस्टम ड्यूल डैशकैम X-Line: सबसे प्रीमियम वेरिएंट टॉप-स्पेक X-Line वेरिएंट में कई एडवांस टेक्नोलॉजी फीचर्स दिए गए हैं— Level-2 ADAS Vehicle-to-Load (V2L) डिजिटल की 64-कलर एम्बिएंट लाइटिंग LED फुटवेल लाइट लोगो प्रोजेक्शन पडल लैंप सुरक्षा फीचर्स Kia Syros EV के सभी वेरिएंट्स में स्टैंडर्ड तौर पर कई महत्वपूर्ण सुरक्षा फीचर्स दिए गए हैं— 6 एयरबैग ABS के साथ EBD इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) हिल स्टार्ट असिस्ट टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS) चारों पहियों पर डिस्क ब्रेक इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक ISOFIX चाइल्ड सीट माउंट रियर पार्किंग सेंसर ऑटो डोर अनलॉक रियर ऑक्यूपेंट अलर्ट कौन-सा वेरिएंट खरीदना सबसे बेहतर? अगर आप कीमत, फीचर्स और रेंज के बीच सबसे अच्छा संतुलन चाहते हैं, तो HTX वेरिएंट सबसे वैल्यू फॉर मनी विकल्प माना जा सकता है। इसमें 51.4kWh बैटरी का विकल्प मिलता है, जिससे लंबी ड्राइविंग रेंज हासिल होती है। साथ ही पैनोरमिक सनरूफ, कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी, स्लाइडिंग रियर सीट और कई प्रीमियम फीचर्स इसे अपनी कीमत के हिसाब से बेहद आकर्षक बनाते हैं। वहीं HTX+ और X-Line उन ग्राहकों के लिए बेहतर हैं, जो लग्जरी और एडवांस टेक्नोलॉजी फीचर्स को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि, अधिकांश खरीदारों के लिए HTX वेरिएंट सबसे संतुलित और समझदारी भरा विकल्प साबित हो सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने अगस्त 2026 से अपने विभिन्न मॉडलों की कीमतों में ₹30,000 तक की बढ़ोतरी करने की घोषणा की है। कंपनी ने कहा कि कच्चे माल, उत्पादन और परिचालन लागत में लगातार बढ़ोतरी के कारण यह फैसला लिया गया है। यह पिछले दो महीनों में कंपनी की दूसरी मूल्य वृद्धि होगी। बढ़ती लागत के कारण लिया गया फैसला कंपनी के अनुसार, स्टील, एल्युमीनियम, प्लास्टिक समेत अन्य कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि और बढ़ती उत्पादन लागत का दबाव लगातार बना हुआ है। ऐसे में बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए वाहनों की कीमतों में संशोधन किया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग मॉडलों के अनुसार कीमतों में बढ़ोतरी अलग होगी और अधिकतम ₹30,000 तक रहेगी। खरीदारों पर पड़ेगा सीधा असर अगस्त से नई कीमतें लागू होने के बाद नई कार खरीदने वाले ग्राहकों को अधिक कीमत चुकानी होगी। ऑटोमोबाइल उद्योग के जानकारों का मानना है कि कीमतें बढ़ने से एंट्री-लेवल और मिड-सेगमेंट कारों की मांग पर कुछ असर पड़ सकता है। हालांकि, त्योहारी सीजन को देखते हुए कंपनी को बिक्री पर अधिक प्रभाव पड़ने की उम्मीद नहीं है। अन्य कंपनियां भी बढ़ा सकती हैं दाम ऑटो सेक्टर के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे माल और उत्पादन लागत में राहत नहीं मिलती है, तो आने वाले दिनों में अन्य वाहन निर्माता कंपनियां भी कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान कर सकती हैं। इससे पूरे ऑटोमोबाइल बाजार में वाहनों की कीमतें बढ़ने की संभावना है।
भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में Ather Energy का Ather Rizta तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। फैमिली-फ्रेंडली डिजाइन, लंबी रेंज और आधुनिक फीचर्स के कारण यह इलेक्ट्रिक स्कूटर ग्राहकों की पसंद बनता जा रहा है। अगर आप भी इसे खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अच्छी बात यह है कि इसे सिर्फ ₹10,000 के डाउन पेमेंट पर भी घर लाया जा सकता है। आइए जानते हैं Ather Rizta की संभावित EMI, बैटरी, रेंज और फीचर्स से जुड़ी पूरी जानकारी। ₹10,000 डाउन पेमेंट पर कितनी बनेगी EMI? Ather Rizta S की शुरुआती एक्स-शोरूम (दिल्ली) कीमत लगभग ₹1,21,499 है। यदि आप ₹10,000 का डाउन पेमेंट करते हैं और शेष राशि पर बैंक या फाइनेंस कंपनी से 8% वार्षिक ब्याज दर पर 36 महीनों के लिए लोन लेते हैं, तो अनुमानित मासिक EMI करीब ₹3,715 हो सकती है। ध्यान रखें कि वास्तविक EMI आपके शहर की ऑन-रोड कीमत, डाउन पेमेंट, ब्याज दर, लोन अवधि और आपके क्रेडिट प्रोफाइल के आधार पर अलग हो सकती है। बैटरी और रेंज Ather Rizta दो बैटरी विकल्पों के साथ उपलब्ध है— 2.9kWh बैटरी पैक – लगभग 123 किलोमीटर की IDC रेंज। 3.7kWh बैटरी पैक – लगभग 160 किलोमीटर की IDC रेंज। स्कूटर की टॉप स्पीड 80 किमी/घंटा है और यह 0 से 40 किमी/घंटा की रफ्तार केवल 4.7 सेकंड में पकड़ सकता है। लगभग 15 डिग्री ग्रेडेबिलिटी के साथ यह चढ़ाई वाले रास्तों पर भी बेहतर प्रदर्शन करता है। Ather Rizta के प्रमुख फीचर्स Ather Rizta S में कई आधुनिक फीचर्स दिए गए हैं, जिनमें शामिल हैं— 17.7 सेमी (लगभग 7 इंच) का कलर TFT डिस्प्ले ब्लूटूथ कनेक्टिविटी टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन स्मार्टफोन कनेक्टिविटी WhatsApp नोटिफिकेशन सपोर्ट लाइव लोकेशन ट्रैकिंग डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर फैमिली-फ्रेंडली बड़ी और आरामदायक सीट बेहतर अंडर-सीट स्टोरेज क्या Ather Rizta खरीदना सही रहेगा? अगर आपकी प्राथमिकता लंबी रेंज, कम रनिंग कॉस्ट, आरामदायक सीट और स्मार्ट फीचर्स वाला फैमिली इलेक्ट्रिक स्कूटर है, तो Ather Rizta एक अच्छा विकल्प हो सकता है। हालांकि, खरीदने से पहले अपने शहर की ऑन-रोड कीमत, उपलब्ध ऑफर्स, चार्जिंग सुविधाओं और फाइनेंस विकल्पों की जानकारी जरूर लें। कम डाउन पेमेंट और आसान EMI विकल्प इसे उन ग्राहकों के लिए भी आकर्षक बनाते हैं, जो बिना एकमुश्त बड़ी रकम खर्च किए इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना चाहते हैं।