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Deeksha Cracks UPSC with AIR 44

मां का अधूरा सपना बना लक्ष्य, Deeksha Chourasiya ने UPSC में AIR 44 हासिल कर बनी सफलता की मिसाल

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
Deeksha Chourasiya celebrates UPSC success after securing AIR 44, inspiring story from Indore
Deeksha Chourasiya UPSC AIR 44

देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शुमार UPSC Civil Services Examination को पास करना आसान नहीं होता। सालों की मेहनत, धैर्य और निरंतर संघर्ष के बाद ही सफलता मिलती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है इंदौर की Deeksha Chourasiya की, जिन्होंने UPSC 2025 में ऑल इंडिया रैंक 44 हासिल कर यह साबित कर दिया कि लगन और अनुशासन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि और निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन

मध्य प्रदेश के Indore में पली-बढ़ी दीक्षा एक शिक्षित परिवार से आती हैं। उनके पिता चार्टर्ड अकाउंटेंट और मां होम्योपैथिक डॉक्टर हैं।
दीक्षा बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रही हैं। उन्होंने Delhi Public School Indore से पढ़ाई करते हुए लगातार सात वर्षों तक ऑल-राउंड परफॉर्मेंस के लिए गोल्ड मेडल हासिल किया।
इसके बाद उन्होंने Miranda House से इतिहास में ग्रेजुएशन किया, जो University of Delhi का एक प्रतिष्ठित कॉलेज है।

चार प्रयासों का संघर्ष और सफलता

Deeksha Chourasiya को यह सफलता चौथे प्रयास में मिली। शुरुआती तीन असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।
उन्होंने अपने अध्ययन को व्यवस्थित रखने के लिए सिलेबस को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा और रोज़ाना, साप्ताहिक व मासिक लक्ष्य तय किए। यही रणनीति उनकी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी बनी।

मां का सपना बना प्रेरणा

दीक्षा की सफलता के पीछे सबसे बड़ी प्रेरणा उनकी मां हैं। उनकी मां कभी खुद सिविल सेवा में जाना चाहती थीं, लेकिन यह सपना अधूरा रह गया।
दीक्षा ने उसी सपने को अपना लक्ष्य बनाया और उसे पूरा कर दिखाया। यह कहानी न सिर्फ मेहनत की है, बल्कि परिवार के सपनों को साकार करने की भी मिसाल है।

शानदार स्कोर के साथ हासिल की रैंक

UPSC 2025 में Deeksha Chourasiya ने कुल 1014 अंक हासिल किए।

  • लिखित परीक्षा: 816 अंक
  • इंटरव्यू: 198 अंक

उनका यह प्रदर्शन यह दिखाता है कि सही रणनीति और निरंतर मेहनत से बड़ी से बड़ी परीक्षा को भी जीता जा सकता है।

 

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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विदेश में पढ़ाई का सुनहरा मौका: Romania ने भारतीय छात्रों के लिए खोले स्कॉलरशिप के दरवाजे, खर्च भी उठाएगी सरकार

विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी है। यूरोप का खूबसूरत देश Romania अब भारतीय छात्रों को अपने यहां पढ़ने और रिसर्च करने का शानदार मौका दे रहा है। अकादमिक वर्ष 2026-27 के लिए रोमानिया सरकार ने विशेष स्कॉलरशिप की घोषणा की है, जिसके तहत छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ रहने और खाने का खर्च भी दिया जाएगा। यह पहल भारत और रोमानिया के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम का हिस्सा है। Ministry of Education India के माध्यम से छात्रों का नामांकन किया जाएगा, जबकि अंतिम चयन रोमानिया की सरकार करेगी। कितनी अवधि की होगी स्कॉलरशिप? रोमानिया सरकार कुल 20 महीने की स्कॉलरशिप ऑफर कर रही है। हर छात्र को 3 महीने से 10 महीने तक की अवधि के लिए मौका मिलेगा समर कोर्स (रोमानियाई भाषा, संस्कृति और सभ्यता) के लिए अलग से 2 स्कॉलरशिप भी उपलब्ध हैं ध्यान देने वाली बात यह है कि यह स्कॉलरशिप फुल डिग्री (बैचलर्स/मास्टर्स/पीएचडी) के लिए नहीं, बल्कि एक्सचेंज प्रोग्राम और रिसर्च ट्रेनिंग के लिए है। स्कॉलरशिप में क्या-क्या फायदे मिलेंगे? इस स्कॉलरशिप के तहत छात्रों को कई बड़े लाभ दिए जाएंगे: यूनिवर्सिटी एडमिशन और ट्यूशन फीस पूरी तरह माफ हॉस्टल में रहने की सुविधा, जिसका खर्च सरकार उठाएगी हर महीने 925 लेई (लगभग 20,000 रुपये) का भत्ता बीमारी की स्थिति में मुफ्त मेडिकल सुविधा किन शर्तों को पूरा करना होगा? छात्र के पास रोमानियाई यूनिवर्सिटी का ऑफर लेटर होना जरूरी है बैचलर्स या मास्टर्स एक्सचेंज प्रोग्राम के लिए रोमानियाई भाषा का सर्टिफिकेट अनिवार्य है यह स्कॉलरशिप केवल भारतीय छात्रों के लिए उपलब्ध है कैसे करें आवेदन? इच्छुक छात्र SAKSHAT Portal पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अंतिम तिथि 15 मई 2026 निर्धारित की गई है।

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  इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE Main 2026 को लेकर इस बार बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सेशन-2 की प्रोविजनल आंसर-की में भारी गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं, जहां 300 से अधिक सवालों के जवाबों को छात्रों ने चुनौती दी है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए Ministry of Education ने सख्त रुख अपनाया है और जांच के निर्देश दिए हैं। क्या है पूरा मामला? सूत्रों के अनुसार, 5 अप्रैल को हुई शिफ्ट-2 के केमिस्ट्री पेपर की आंसर-की में कई गलतियां पाई गईं। छात्रों ने बड़े पैमाने पर इन उत्तरों को चुनौती दी, जिसके बाद National Testing Agency (NTA) हरकत में आया। कुल 9 शिफ्ट में परीक्षा आयोजित हुई हर शिफ्ट में 75 सवाल कुल मिलाकर 675 सवालों की आंसर-की जारी हुई इनमें से लगभग आधे सवालों पर आपत्ति दर्ज की गई एक्सपर्ट कमेटी करेगी समीक्षा NTA ने एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है, जो: सभी चैलेंज किए गए सवालों की समीक्षा करेगी सही जवाब तय करेगी और उसी आधार पर फाइनल आंसर-की जारी की जाएगी शिक्षा मंत्रालय ने साफ कहा है कि फाइनल आंसर-की में किसी भी तरह की गलती नहीं होनी चाहिए। हर साल क्यों उठता है विवाद? JEE Main में आंसर-की विवाद कोई नया मुद्दा नहीं है। हर साल: बड़ी संख्या में छात्र उत्तरों को चुनौती देते हैं कुछ सवाल ड्रॉप किए जाते हैं और कई बार आंसर-की में बदलाव भी होता है इस साल भी पहले सेशन में: मैथ्स के 2 सवाल फिजिक्स के 7 सवाल ड्रॉप किए गए थे, जबकि 5 उत्तरों में बदलाव किया गया था। रिजल्ट और आगे की प्रक्रिया JEE Main 2026 सेशन-2 का रिजल्ट 20 अप्रैल तक जारी हो सकता है इसके बाद JEE Advanced के लिए आवेदन शुरू होंगे रजिस्ट्रेशन: 23 अप्रैल से 2 मई तक परीक्षा तिथि: 17 मई 2026 JEE Main के फाइनल रिजल्ट के आधार पर लगभग 2.5 लाख उम्मीदवार JEE Advanced के लिए क्वालिफाई करेंगे।

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