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'स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे' को दर्शकों का शानदार रिस्पॉन्स, सोशल मीडिया पर मिली भरपूर सराहना

ranjan kumar tiwari जुलाई 31, 2026 0
'स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे' फिल्म में मुख्य भूमिका में टॉम हॉलैंड और जेंडाया
Spider Man Brand New Day Tom Holland Zendaya

मुंबई, एजेंसियां। मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स (MCU) की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे' भारत में पांच भाषाओं में रिलीज हो गई है। निर्देशक डेस्टिन डेनियल क्रेटन की इस फिल्म में टॉम हॉलैंड और जेंडाया मुख्य भूमिकाओं में हैं। रिलीज के बाद फिल्म को दर्शकों और फिल्म समीक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।

 

सोशल मीडिया पर छाई फिल्म

 

फिल्म देखने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दर्शकों ने इसकी कहानी, भावनात्मक पहलू, एक्शन और सिनेमैटोग्राफी की जमकर तारीफ की है। कई दर्शकों ने इसे 'स्पाइडर-मैन 2' के बाद फ्रेंचाइजी की सबसे बेहतरीन फिल्म बताया है। कुछ यूजर्स ने इसे अब तक की सर्वश्रेष्ठ स्पाइडर-मैन फिल्म करार दिया, जबकि कुछ ने इसकी भावनात्मक कहानी और दमदार प्रस्तुति की सराहना की।

 

टॉम हॉलैंड और जेंडाया के अभिनय की तारीफ

 

फिल्म में टॉम हॉलैंड ने एक बार फिर पीटर पार्कर/स्पाइडर-मैन की भूमिका निभाई है, जबकि जेंडाया एमजे के किरदार में नजर आई हैं। दोनों कलाकारों के अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया है। फिल्म के एक्शन सीक्वेंस, विजुअल इफेक्ट्स और स्टंट भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।

 

क्या है फिल्म की कहानी?

 

फिल्म की कहानी पीटर पार्कर के उस दौर को दिखाती है, जब डॉक्टर स्ट्रेंज की घटना के बाद पूरी दुनिया उसे भूल चुकी है। एमजे और नेड भी उसे पहचान नहीं पाते। अकेलेपन के बीच पीटर न्यूयॉर्क में स्पाइडर-मैन बनकर लोगों की मदद करता रहता है। कहानी तब नया मोड़ लेती है, जब शहर पर बड़ा खतरा मंडराता है और पीटर को केवल सुपरहीरो ही नहीं, बल्कि लोगों की उम्मीद बनकर सामने आना पड़ता है।

 

भावनाओं और एक्शन का संतुलित मेल

 

दर्शकों के अनुसार, फिल्म में भावनात्मक कहानी, रोमांचक एक्शन और मजबूत किरदारों का संतुलित मेल देखने को मिलता है। हालांकि कुछ लोगों ने फिल्म की लंबाई पर सवाल उठाए हैं, लेकिन अधिकांश दर्शकों का मानना है कि इसकी कहानी और प्रस्तुति इसे देखने लायक बनाती है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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टीवी अभिनेत्री श्वेता तिवारी और उनके पूर्व पति राजा चौधरी के बीच पुराना विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला उनकी बेटी पलक तिवारी की कस्टडी और करीब 93 लाख रुपये कीमत वाले एक फ्लैट से जुड़ा है। श्वेता तिवारी की ओर से अतीत में किए गए दावों और अब राजा चौधरी की सफाई के बाद इस पूरे मामले को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। तलाक समझौते में क्या हुआ था? रिपोर्ट के मुताबिक, श्वेता तिवारी और राजा चौधरी के तलाक के दौरान करीब 93 लाख रुपये कीमत का एक बेडरूम वाला फ्लैट राजा चौधरी के नाम ट्रांसफर किया गया था। इसके बदले राजा ने तलाक के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए और बेटी पलक तिवारी की कस्टडी के लिए दावा नहीं करने पर सहमति जताई थी। श्वेता तिवारी ने एक पुराने इंटरव्यू में दावा किया था कि कानूनी टीम ने राजा और पलक के नाम पर संपत्ति की संयुक्त मालिकाना व्यवस्था का विकल्प रखा था, लेकिन राजा ने कथित तौर पर इसे स्वीकार नहीं किया और फ्लैट का पूरा मालिकाना हक मांगा। श्वेता के मुताबिक, उस समय राजा की ओर से कथित तौर पर कहा गया था कि वह संपत्ति के बदले बेटी की कस्टडी छोड़ने को तैयार हैं। यही दावा बाद में दोनों के रिश्ते और तलाक की कहानी का सबसे विवादित हिस्सा बन गया। राजा चौधरी ने अब क्या कहा? अब एक नए इंटरव्यू में राजा चौधरी ने इस पूरे मामले पर अपनी तरफ की कहानी सामने रखी है। उनका कहना है कि 2007 में दोनों अलग हुए और मामला फैमिली कोर्ट तक पहुंचा। उनके मुताबिक, 2007 से 2012 के बीच वह लगातार कोर्ट की तारीखों पर जाते रहे। राजा ने दावा किया कि अदालत के आदेश के तहत उन्हें अपनी बेटी पलक से निर्धारित स्थान पर मिलने की अनुमति थी, लेकिन उनके अनुसार उन्हें बेटी से मिलने का मौका नहीं मिला। उन्होंने यह भी कहा कि उस दौर में वह दूसरी परेशानियों में उलझे हुए थे और उनके लिए रहने की जगह ढूंढना मुश्किल हो गया था। इसी परिस्थिति में उन्होंने फ्लैट को अपने रहने के लिए सुरक्षित विकल्प के तौर पर चुना। ₹9 लाख में खरीदा गया था फ्लैट राजा चौधरी के अनुसार, जिस फ्लैट की मौजूदा कीमत करीब 93 लाख रुपये बताई जा रही है, उसे शुरुआत में लगभग 9 लाख रुपये में खरीदा गया था। उनका दावा है कि उनके पिता ने इसकी डाउन पेमेंट की थी, जबकि उन्होंने और श्वेता ने मिलकर इसकी ईएमआई चुकाई थी। राजा का कहना है कि उस समय उनकी प्राथमिकता किसी बड़े आर्थिक लाभ से ज्यादा अपने लिए एक स्थायी घर हासिल करना थी। उन्होंने श्वेता के पुराने आरोप पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की रहने के लिए जगह पाने की जरूरत को बेटी या संपत्ति में से किसी एक को चुनने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। राजा का दावा- दूसरी संपत्तियों में भी छोड़ा हिस्सा राजा चौधरी ने यह भी दावा किया कि उन्होंने उन संपत्तियों में अपना हिस्सा छोड़ दिया था, जिन्हें उन्होंने और श्वेता ने साथ मिलकर खरीदा था। उनके मुताबिक, इन संपत्तियों में उनका आर्थिक योगदान भी था। उनका तर्क है कि अगर उनका मकसद केवल संपत्ति हासिल करना होता, तो वह दूसरी संयुक्त संपत्तियों में भी अपना हिस्सा मांग सकते थे। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। पुराने दावों के बीच फिर बढ़ी चर्चा इस पूरे मामले में खास बात यह है कि श्वेता तिवारी और राजा चौधरी की ओर से सामने आई कहानियां एक-दूसरे से काफी अलग हैं। श्वेता ने जहां अतीत में संपत्ति और बेटी की कस्टडी को लेकर एक अलग तस्वीर पेश की थी, वहीं राजा अब इसे अपनी परिस्थितियों और रहने की जरूरत से जोड़कर देख रहे हैं। ऐसे में इस पुराने विवाद को समझने के लिए दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग देखना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी में दोनों के आरोपों और दावों के बीच कई अंतर दिखाई देते हैं, इसलिए किसी एक पक्ष की बात को अंतिम तथ्य मानने के बजाय इसे उनके संबंधित बयानों के तौर पर देखना अधिक उचित होगा। सोशल मीडिया पर क्यों चर्चा? पलक तिवारी अब खुद एक जानी-पहचानी अभिनेत्री हैं और श्वेता तिवारी भी लंबे समय से टेलीविजन की लोकप्रिय हस्तियों में शामिल रही हैं। ऐसे में उनके परिवार से जुड़ा कोई भी पुराना विवाद दोबारा सामने आने पर सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय बन जाता है। हालांकि, इस मामले का सबसे संवेदनशील पहलू बेटी पलक तिवारी से जुड़ा है। इसलिए पुराने पारिवारिक विवाद को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय दोनों पक्षों के सार्वजनिक रूप से सामने आए दावों को सावधानी से समझना जरूरी है।  

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ममता कुलकर्णी ने 'राणाजी 2.0' पर तोड़ी चुप्पी, बोलीं- ओरिजिनल गाने की बात ही अलग थी

मुंबई, एजेंसियां। 90 के दशक की चर्चित अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने फिल्म 'करण अर्जुन' के सुपरहिट गीत 'मुझको राणाजी माफ करना' के नए संस्करण 'राणाजी 2.0' पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने नई वीडियो में माहिरा शर्मा की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने अच्छा काम किया है, लेकिन ओरिजिनल गाने की पहचान और लोकप्रियता आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है।   'ओरिजिनल गाना लोगों के दिलों में बसा है'   ममता कुलकर्णी ने कहा कि 'राणाजी 2.0' एक नया प्रयास है और माहिरा शर्मा ने अपनी तरफ से बेहतरीन प्रदर्शन किया है। हालांकि, उन्होंने माना कि 1995 में रिलीज़ हुआ 'मुझको राणाजी माफ करना' आज भी लोगों की यादों में गहराई से जुड़ा हुआ है, इसलिए उसकी तुलना करना आसान नहीं है।   शूटिंग के दिनों को किया याद   ममता ने बताया कि ओरिजिनल गाने की शूटिंग के दौरान कई दिनों तक कड़ी रिहर्सल हुई थी। उन्होंने फिल्म के निर्देशक राकेश रोशन और पूरी टीम की तारीफ करते हुए कहा कि 'करण अर्जुन' के गानों ने फिल्म को यादगार बनाने में बड़ी भूमिका निभाई थी।   बॉलीवुड में वापसी के लिए तैयार, लेकिन रखी शर्त   ममता कुलकर्णी ने यह भी संकेत दिए कि यदि उन्हें मजबूत कहानी और उनकी मौजूदा सोच के अनुरूप किरदार मिलता है तो वह बॉलीवुड में वापसी कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि अब उनकी सोच पहले जैसी नहीं रही और वह ऐसे प्रोजेक्ट का हिस्सा बनना चाहेंगी, जिसका विषय और संदेश सार्थक हो।

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मुंबई, एजेंसियां। प्राइम वीडियो के लोकप्रिय रियलिटी शो 'द ट्रेटर्स' (The Traitors) का दूसरा सीजन अब पहले से ज्यादा धमाकेदार होने जा रहा है। शो के मेकर्स ने आधिकारिक तौर पर 21 कंटेस्टेंट्स के नामों का ऐलान कर दिया है, जिसमें रिया चक्रवर्ती और श्वेता तिवारी भी शामिल हैं। शो को एक बार फिर करण जौहर होस्ट करेंगे और इसका प्रीमियर 13 अगस्त 2026 से प्राइम वीडियो पर होगा।   इन सितारों के बीच होगा खेल और धोखे का मुकाबला   'द ट्रेटर्स 2' में रिया चक्रवर्ती और श्वेता तिवारी के अलावा मल्लिका शेरावत, मुनव्वर फारूकी, अभिषेक मल्हान, दलीप ताहिल, क्रिस्टल डिसूजा, रणवीर बराड़, पारुल गुलाटी, साहिल सलाथिया समेत कई चर्चित चेहरे नजर आएंगे। कुल 21 प्रतियोगी इस बार रणनीति, भरोसे और धोखे के खेल में एक-दूसरे को चुनौती देंगे।   मुंबई इवेंट में हुई आधिकारिक घोषणा   मुंबई में आयोजित लॉन्च इवेंट के दौरान सभी प्रतिभागियों को आधिकारिक रूप से पेश किया गया। इस मौके पर रिया चक्रवर्ती, श्वेता तिवारी, मल्लिका शेरावत और करण जौहर समेत कई सितारे मौजूद रहे। इवेंट की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।   पहले सीजन की सफलता के बाद बढ़ीं उम्मीदें   'द ट्रेटर्स' का पहला सीजन दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय रहा था। दूसरे सीजन में भी हाई-वोल्टेज ड्रामा, रणनीति और ट्विस्ट देखने को मिलेंगे। प्राइम वीडियो को उम्मीद है कि नया सीजन पहले से भी ज्यादा दर्शकों को आकर्षित करेगा।

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'रामायण' के ट्रेलर पर आलिया भट्ट का रिएक्शन, रणबीर कपूर की फिल्म को बताया 'जादुई'

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यश के 'रावण' लुक की तारीफ, लेकिन 'रामायण' में हनुमान की झलक न मिलने से फैंस में सवाल

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रामायण ट्रेलर रिलीज: रणबीर कपूर बने मर्यादा पुरुषोत्तम राम, रावण के अवतार में यश ने बिखेरा दमदार अंदाज

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kalpana जुलाई 30, 2026 0

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