झारखंड

हजारीबाग में प्रिंस खान गिरोह पर पुलिस का शिकंजा, पांच बदमाश हथियार के साथ गिरफ्तार

anjali kumari जुलाई 31, 2026 0
Prince Khan Gang Arrest
Prince Khan Gang Arrest

हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले में पुलिस ने गैंगस्टर प्रिंस खान के आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसके गिरोह से जुड़े पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बड़कागांव थाना क्षेत्र के आराहरा इलाके में हुई मुठभेड़ के दौरान एक आरोपी पुलिस की जवाबी कार्रवाई में घायल हो गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से हथियार, जिंदा कारतूस और मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।

 

गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई

 

पुलिस अधीक्षक अमन कुमार ने बताया कि 29 जुलाई को सूचना मिली थी कि प्रिंस खान के सहयोगी युवकों को गिरोह में शामिल कर 'कोयलांचल शांति सेना कुबेर' संगठन का विस्तार कर रहे हैं। इसके बाद बड़कागांव अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अमित आनंद के नेतृत्व में विशेष एसआईटी का गठन किया गया और तकनीकी व खुफिया इनपुट के आधार पर कार्रवाई शुरू की गई।

 

मुठभेड़ में चली गोलियां, एक आरोपी घायल

 

जांच के दौरान पुलिस टीम जब आराहरा के बुधना घाटी पुलिया के पास पहुंची तो अपराधियों ने पुलिस पर छह से सात राउंड फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में सैयद मोहम्मद जीशान के पैर में गोली लगी। इसके बाद पुलिस ने उसे समेत कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

 

हथियार और कारतूस बरामद

 

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से एक देसी पिस्तौल, एक देसी कट्टा, 23 जिंदा कारतूस और पांच मोबाइल फोन बरामद किए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह कोयला क्षेत्रों में लेवी वसूली, दहशत फैलाने और किसी बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था।

 

मुख्य आरोपी पर दर्ज हैं कई गंभीर मामले

 

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार मुख्य आरोपी अरुण कुमार सिंह के खिलाफ हत्या, रंगदारी, आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम समेत करीब आठ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं घायल आरोपी सैयद मोहम्मद जीशान के खिलाफ भी पहले से एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज है।

 

फरार बदमाशों की तलाश जारी

 

पुलिस अधीक्षक ने कहा कि इस कार्रवाई से प्रिंस खान गिरोह की गतिविधियों को बड़ा झटका लगा है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। साथ ही गिरोह के नेटवर्क, वित्तीय स्रोतों और सहयोगियों की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि संगठित अपराध और लेवी वसूली के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

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झारखंड पुलिस की पहली महिला डीजीपी तदाशा मिश्रा का दम, नक्सल मोर्चे पर लगातार बड़ी कामयाबी

रांची। झारखंड पुलिस की पहली महिला पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा के नेतृत्व में राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को लगातार बड़ी सफलता मिल रही है। उनके कार्यकाल में कई बड़े नक्सली कमांडरों की गिरफ्तारी, आत्मसमर्पण और एनकाउंटर ने सुरक्षा एजेंसियों के मनोबल को मजबूत किया है। इसी वजह से पुलिस महकमे और आम लोगों के बीच उन्हें झारखंड पुलिस का 'लेडी लक' कहा जाने लगा है।   नक्सल विरोधी अभियान में मिली उल्लेखनीय सफलता   डीजीपी तदाशा मिश्रा के नेतृत्व में झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ के संयुक्त अभियानों में वर्ष 2026 के दौरान अब तक 93 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया, 22 नक्सली मुठभेड़ में मारे गए और 45 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया। हाल ही में 39 लाख रुपये के कुल इनामी छह बड़े कमांडरों समेत 16 सक्रिय माओवादियों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।   राज्य का सबसे बड़ा सामूहिक आत्मसमर्पण   21 मई 2026 को झारखंड के इतिहास का सबसे बड़ा नक्सली आत्मसमर्पण देखने को मिला, जब 27 उग्रवादियों ने पुलिस के सामने हथियार डाल दिए। इनमें भाकपा (माओवादी) और जेजेएमपी के सदस्य शामिल थे। इसके बाद जुलाई में ऑपरेशन 'नवजीवन-II' के तहत 16 और सक्रिय माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। इन अभियानों में बड़ी मात्रा में हथियार और कारतूस भी बरामद किए गए।   सारंडा ऑपरेशन बना बड़ी उपलब्धि   22 जनवरी 2026 को सारंडा के घने जंगलों में चलाए गए अभियान में झारखंड पुलिस ने एक साथ 17 नक्सलियों को मार गिराया। मारे गए उग्रवादियों में करोड़ों रुपये के इनामी शीर्ष कमांडर भी शामिल थे। इस कार्रवाई को राज्य के नक्सल विरोधी अभियान की सबसे बड़ी सफलताओं में गिना जा रहा है।   अपराध और नक्सलवाद पर सख्त रणनीति   तदाशा मिश्रा ने अपने कार्यकाल में नक्सलवाद के साथ-साथ संगठित अपराध पर भी प्रभावी कार्रवाई की है। बोकारो की एसपी रहते हुए उन्होंने कोयला माफिया, रंगदारी और अपहरण जैसे अपराधों पर कड़ा प्रहार किया था। डीजीपी बनने के बाद भी उन्होंने पुलिसिंग को तकनीकी और रणनीतिक रूप से मजबूत करने पर जोर दिया है।   झारखंड की पहली महिला डीजीपी   1994 बैच की आईपीएस अधिकारी तदाशा मिश्रा को 30 दिसंबर 2025 को झारखंड का पूर्णकालिक डीजीपी नियुक्त किया गया। वह इस पद तक पहुंचने वाली राज्य की पहली महिला अधिकारी हैं। उत्कृष्ट सेवाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने नियमों में संशोधन कर उन्हें 2027 तक निश्चित कार्यकाल प्रदान किया। उनके नेतृत्व में पुलिस बल के आंतरिक सुधार, शिकायत निवारण व्यवस्था और समन्वित सुरक्षा अभियानों को भी नई गति मिली है।

anjali kumari जुलाई 31, 2026 0
Shravani Mela 2026

श्रावणी मेला 2026: देवघर में 10 टन एक्सपायर्ड आटा और 800 किलो बेसन जब्त, खाद्य सुरक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई

Prince Khan Gang Arrest

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धनबाद में कोयला कारोबारियों के ठिकानों पर ED की छापेमारी और जांच

धनबाद के कोयला कारोबारियों पर ED की छापेमारी, अवैध कोयला कारोबार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई

एम्स देवघर में बिना ऑपरेशन कैथेटर तकनीक से दिल की बीमारी का इलाज करते डॉक्टर
एम्स देवघर में बिना ऑपरेशन दिल की सर्जरी, किशोर के दिल की गंभीर बीमारी का सफल इलाज

पहली बार नॉन-सर्जिकल PDA क्लोजर प्रक्रिया सफल, कैथेटर तकनीक से हुआ इलाज   देवघर, एजेंसियां। झारखंड के एम्स देवघर के डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए एक किशोर मरीज के दिल की बीमारी का बिना ओपन हार्ट ऑपरेशन के सफल इलाज किया है। अस्पताल में पहली बार पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस (PDA) क्लोजर की नॉन-सर्जिकल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।   कैथेटर तकनीक से किया गया इलाज   PDA दिल से जुड़ी एक जन्मजात बीमारी है, जिसमें हृदय की एक रक्त वाहिका (डक्टस आर्टेरियोसस) जन्म के बाद भी बंद नहीं होती। पहले कई मामलों में इसके लिए सर्जरी की जरूरत पड़ती थी, लेकिन अब इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी की मदद से कैथेटर आधारित प्रक्रिया के जरिए इसका इलाज संभव है।   मरीज को नहीं खोलना पड़ा सीना   इस आधुनिक तकनीक में बड़े चीरे या ओपन हार्ट सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। डॉक्टरों ने एक छोटे रास्ते से कैथेटर डालकर डिवाइस की मदद से समस्या को ठीक किया। इससे मरीज को कम दर्द, कम जोखिम और जल्दी रिकवरी का फायदा मिलता है।   एम्स देवघर में बढ़ रही अत्याधुनिक हृदय सेवाएं   एम्स देवघर में कार्डियोलॉजी और कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के जरिए हृदय रोगों के इलाज की सुविधाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। संस्थान का लक्ष्य क्षेत्र के मरीजों को बेहतर और आधुनिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।   स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि   एम्स देवघर की इस उपलब्धि से झारखंड और आसपास के राज्यों के मरीजों को फायदा मिलने की उम्मीद है। इससे गंभीर हृदय रोगों के इलाज के लिए दूसरे बड़े शहरों पर निर्भरता कम हो सकती है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 30, 2026 0
बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर में श्रावणी मेले के दौरान जलार्पण के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

श्रावणी मेले में बैद्यनाथ और बासुकीनाथ धाम में VIP दर्शन बंद, आम श्रद्धालुओं को प्राथमिकता

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हजारीबाग में पुलिस और प्रिंस खान गैंग के बीच मुठभेड़, एक अपराधी घायल  बड़कागांव इलाके में हुई गोलीबारी, पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में बदमाश को मारी गोली; फरार अपराधियों की तलाश जारी  हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले के बड़कागांव थाना क्षेत्र में पुलिस

भगवान बिरसा जैविक उद्यान में खुशी की लहर, 18 मोर चूजों का सफल जन्म

जमशेदपुर में 108 एंबुलेंस और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा
जमशेदपुर में 27 लाख आबादी पर मात्र 25 सरकारी एंबुलेंस, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

108 एंबुलेंस सेवा भी सीमित, मरीजों को समय पर वाहन नहीं मिलने की शिकायत; सिविल सर्जन ने मुख्यालय को भेजने की बात कही   जमशेदपुर। झारखंड के जमशेदपुर जिले में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 27 लाख की आबादी वाले जिले में मात्र 25 सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध होने की बात सामने आई है। वहीं, 108 एंबुलेंस सेवा की कई गाड़ियां भी सीमित संख्या में ही चालू हालत में हैं, जिससे मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में परेशानी हो रही है।   मरीजों को समय पर नहीं मिल रही एंबुलेंस   रिपोर्ट के अनुसार, जिले में सरकारी एंबुलेंस के अलावा 108 सेवा की 16 एंबुलेंस चालू स्थिति में बताई गई हैं। इसके अलावा प्रसव और छोटे बच्चों के लिए अलग से ममता वाहन उपलब्ध हैं, लेकिन सामान्य आपातकालीन मामलों में मरीजों को काफी इंतजार करना पड़ रहा है।   एंबुलेंस नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी   कई मामलों में मरीजों के परिजनों ने शिकायत की है कि फोन करने के बाद भी समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाई। कुछ मरीजों को मजबूरी में निजी वाहन या अन्य साधनों से अस्पताल ले जाना पड़ा। ऐसी घटनाओं के बाद स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।   सिविल सर्जन ने जांच और कार्रवाई की बात कही   जमशेदपुर के सिविल सर्जन ने एंबुलेंस व्यवस्था में सुधार को लेकर रिपोर्ट तैयार करने और खराब पड़ी एंबुलेंस की स्थिति की जानकारी लेने की बात कही है। उन्होंने मामले को स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय तक पहुंचाने और आवश्यक कार्रवाई की मांग करने की बात कही।   सरकार की ओर से स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने की तैयारी   झारखंड सरकार ने राज्य में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए नई हाईटेक एंबुलेंस खरीदने की योजना भी बनाई है। इसका उद्देश्य दूरदराज के इलाकों तक समय पर एंबुलेंस सेवा पहुंचाना है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 30, 2026 0
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श्रावणी मेला 2026: सावन के पहले दिन शिवमय हुई राजधानी, पहाड़ी मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

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kalpana जुलाई 27, 2026 0

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