1376 – ब्रिटिश संसद ने राजा के खर्चों की निगरानी का प्रस्ताव रखा।
1498 – क्रिस्टोफर कोलंबस अपनी तीसरी यात्रा के दौरान त्रिनिदाद द्वीप पर पहुंचे।
1611 – कैथोलिक यूनिवर्सिटी पोंटीफिकेल एंड रॉयल यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई।
1658 - मुगल सम्राट औरंगजेब ने स्वयं को मंगोल का राजा घोषित किया।
1788 – मैरीलैंड अमेरिकी संविधान की पुष्टि करने वाला सातवां राज्य बना।
1848 – फ्रांस ने अपने उपनिवेशों से आखिरी गुलामों को भी मुक्त किया।
1855 – अमेरिका के पहले पशु चिकित्सा कॉलेज की स्थापना बोस्टन में की गई।
1861 – असम के चेरापूंजी में 9,300 मिलीलीटर बारिश हुई, जो एक विश्व रिकॉर्ड बन गया।
1865 - ऑस्ट्रेलिया में दक्षिण पूर्व क्लीव्सलैंड ग्रैडचेस्टर शहर में विश्व की पहली छोटी रेल लाइन शुरू।
1910 – इंग्लैंड के क्लाउड ग्राहमे व्हाइट ने पहली बार विमान को रात में उड़ाया।
1913 – बुल्गारिया ने दूसरे बाल्कन युद्ध के युद्धविराम करने की घोषणा पर हस्ताक्षर किया।
1924 - मद्रास प्रेसीडेंसी क्लब ने रेडियो प्रसारण संचालित करने का बीड़ा उठाया।
1932 – तानाशाह शासक एडॉल्फ हिटलर की राष्ट्रवादी सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी (नाजी) ने विधायी चुनावों में अपनी ताकत दोगुनी कर और कुल 37.3 प्रतिशत वोट प्राप्त की।
1933 - राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने साबरमती आश्रम छोड़ा।
1935 – मॉस्को के भूमिगत मेट्रो लाइन को लोगों के लिए खोला गया।
1937 – एनिमेटड कार्टून इलेक्ट्रिक साइन बोर्ड न्यूयॉर्क में लगाया गया।
1948 - भारत में कलकत्ता में पहली राज्य परिवहन सेवा की स्थापना।
1950 – भारत और नेपाल ने शांति और मित्रता संधि पर हस्ताक्षर किए।
1971 – अपोलो-15 अंतरिक्ष यात्रियों ने इलेक्ट्रिक का साढ़े 6 घंटे की यात्रा की।
1982 – यूगोस्लाविया ने कीमतों पर छह महीने के लिए रोक लगा दी।
1991 – अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश और सोवियत राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव ने सामरिक शस्त्र कटौती संधि पर हस्ताक्षर किये।
1992 – सितार वादक पंडित रविशंकर मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित हुए।
1998 - सार्क का दसवां शिखर सम्मेलन श्रीलंका की राजधानी कोलम्बो में सम्पन्न।
2000 – लोकसभा ने छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण विधेयक पास किया।
2003 - इस्रायल और फ़िलिस्तीन के सुरक्षा मंत्रियों की बैठक येरूशलम में समाप्त।
2004 - आर्थिक सहयोग मंच बिम्सटेक का नाम बदलकर 'बंगतक्षेस' किया गया।
2005 - उज़बेकिस्तान ने अमेरिका को अपने सैनिक अड्डे हटा लेने का आदेश दिया।
2006 - श्रीलंका में युद्ध विराम समझौता समाप्त, एलटीटीई के साथ संघर्ष में 50 लोग मारे गये।
2006 – फिदेल कास्त्रो ने अपने भाई को सत्ता सौंपी।
2007 - भारतीय मूल के अमेरिकी डॉक्टर सुधीर पारिख को पाल हैरिस अवार्ड प्रदान किया गया।
2008 - थाइलैंड की एक अदालत ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री थॉक्सिन शिनावात्रा की पत्नी को कर चोरी के मामले में दोषी पाये जाने पर तीन वर्ष की सज़ा सुनाई।
2010 – बाढ़ से पाकिस्तान में 900 लोगों की मौत हुई।
2012- प्रो. अशोक सेन को पहले यूरी मिलनर फंडामेंटल फिजिक्स प्राइज़ (मौलिक भौतिकी पुरस्कार) के नौ विजेताओं में से एक विजेता घोषित किया गया।
2012 – अमेरिकी तैराक माइकल फेल्प्स ने लंदन ओलंपिक में 6 मेडल जीते। इससे वह सबसे ज्यादा कुल 22 ओलंपिक मेडल जीतने वाले खिलाड़ी बन गए।
2014 – विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पश्चिम अफ्रीका में इबोला से 57 से अधिक लोगों की मौत हुई।
2019 - अंतरिक्ष यात्रियों की अंतर्राष्ट्रीय फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल ने डॉ. जितेन्द्र सिंह से मुलाकात की।
2019 - नेपाल में अमेरिकी दूतावास ने काठमांडू में एक दक्षिण एशिया एयर क्वालिटी टेक कैंप का आयोजन किया।
2019 - राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्रिपल तलाक बिल पर हस्ताक्षर किये।
2019 - नासा के TESS मिशन ने TOI 270 नामक ग्रहीय तंत्र की खोज की।
2020 - नेपाली विदेश मंत्री ने कहा कि भारत, नेपाल और यूनाइटेड किंगडम के बीच वर्ष 1947 का समझौता जो गोरखा सैनिकों की सैन्य सेवा से संबंधित है, ‘निरर्थक’ हो गया।
2020 - आंध्रप्रदेश की तीन राजधानियों से संबंधित योजना को राज्य के राज्यपाल विश्व भूषण हरिचंदन ने मंज़ूरी दे दी।
2021 - लेफ्टिनेंट जनरल के रवि प्रसाद, पीवीएसएम , वीएसएम सेना में सेवा के 29 साल पूरे करने के बाद सेवानिवृत्त हुए व वाइस एडमिरल जी अशोक कुमार 39 वर्ष की शानदार सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए।
2022 - वेटलिफ्टिंग में जेरेमी लालरिनुंगा ने 67 किग्रा भारवर्ग में (स्वर्ण पदक जीतकर) इतिहास रचा।
2022 - केंद्र सरकार ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी संजय अरोड़ा को दिल्ली पुलिस का नया आयुक्त नियुक्त किया।
2022 - मुंबई में चाबहार दिवस सम्मेलन शुरू हुआ , ईरान, कजाखिस्तान, किरगिज्स्तान , ताजिकिस्तान , तुर्कमेनिस्तान , उज्बेकिस्तान और अफगानिस्तान बैठक में शामिल हुए।
2023 - हरियाणा के मेवात में शोभायात्रा के दौरान बवाल , धारा 144 लागू , दो की मौत , 15 पुलिसकर्मी घायल , स्कूल-इंटरनेट बंद बंद किए।
2023 - भारतीय नौसेना प्रमुख का ओमान दौरा (31 जुलाई - 02 अगस्त 2023) शुरू हुआ।
2023 - संसद ने सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) विधेयक, 2023 पारित किया।
2023 - फीनिक्स, एरिजोना शहर में 108°F (42.2°C) के उच्च तापमान ने 110°F या उससे अधिक तापमान के लगातार 31 दिनों के गर्मी रिकॉर्ड को तोड़ा।
2023 - अफ्रीका में पहले अंग्रेजी दास किले का स्थान मिला - फोर्ट कोरमंटाइन, 1631 में निर्मित, फोर्ट एम्स्टर्डम, घाना में।
2023 - भारत की जी20 अध्यक्षता के तहत थिंक-20 शिखर सम्मेलन मैसूर में शुरू हुआ।
2024 - उत्तराखंड में दो जगह बादल फटा, टिहरी में दो लोगों की मौत हुई व केदारनाथ में 150 से 200 यात्री फंसे।
2024 - महाराष्ट्र विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष हरिभाऊ किसनराव बागड़े ने राजस्थान के 45वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली।
2025 - नई दिल्ली के प्रगति मैदान में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ड्रोन प्रदर्शनी का आयोजन शुरू हुआ।
2025 - 17 साल बाद आए फैसले से मालेगांव ब्लास्ट मामले में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर निर्दोष व सभी 7 आरोपी बरी हुए।
1880 – महान साहित्यकार, लेखक, संपादक और पत्रकार मुंशी प्रेमचंद का जन्म उत्तर प्रदेश में वराणसी के निकट लम्ही गांव में हुआ।
1902 - के. शंकर पिल्लई - जिन्हें शंकर के नाम से जाता है, प्रसिद्ध भारतीय कार्टूनिस्ट थे।
1907 - दामोदर धर्मानंद कोसांबी - भारत के प्रसिद्ध विद्वान, भाषा-वैज्ञानिक और गणितज्ञ।
1916 - मोहन लाल सुखाड़िया - प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ तथा राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री।
1941 - अमरसिंह चौधरी गुजरात के भूतपूर्व आठवें मुख्यमंत्री।
1947- मुमताज़- प्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेत्री।
1998 - श्रीजा अकुला एक भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ी।
1865 - जगन्नाथ शंकरशेठ मुरकुटे (नाना शंकरशेठ , मुंबई के आद्य शिल्पकार) भारत के एक परोपकारी व शिक्षाविद थे।
1912 - ह्यूम, ए. ओ. - एक अवकाश प्राप्त अंग्रेज़ अधिकारी थे।
1940 – ब्रिटिश सरकार ने उग्र क्रांतिकारी, स्वतंत्रता सेनानी व समाज सुधारक ऊधम सिंह को लंदन में फांसी दी।
1941 - आशुतोष दास - स्वतंत्रता सेनानी व समाज सेवक।
1968 - श्रीपाद दामोदर सातवलेकर - 20वीं शताब्दी के भारतीय सांस्कृतिक उन्नयन में विशेष योगदान देने वाले विद्वान।
1980 – पद्मश्री पुरस्कार से अलंकृत प्रसिद्ध पार्श्व गायक मुहम्मद रफी का निधन हुआ।
2019 - प्रख्यात अर्थशास्त्री और आरबीआइ के पूर्व डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण का निधन।
2020 - सा. कंदासामी तमिल भाषा के विख्यात साहित्यकार।
2020 - आर. डी. प्रधान - पूर्व केंद्रीय गृह सचिव थे।
2021 - मान कौर - भारतीय ट्रैक-एंड-फील्ड एथलीट थीं।
2021 - जम्मू-कश्मीर के पुलवामा की मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद का आतंकवादी और पाकिस्तान के पंजाब प्रांती अबू सैफुल्ला उर्फ 'लंबू' की मौत हुई।
2022 - मशहूर बास्केटबॉल खिलाड़ी बिल रसेल (88) का निधन हुआ।
2022 - तानाशाही को उखाड़ फेंकने वाले फिलीपीन के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल रामोस (94) का COVID -19 से निधन हुआ।
2022 - प्रसिद्ध बंगाली गायिका निर्मला मिश्रा (81) का हार्टअटैक से निधन हुआ।
2022 - अल कायदा सरगना अयमान अल जवाहिरी ड्रोन हमले में मारा गया।
2023 - अमेरिकी अभिनेता एंगस क्लाउड (25) का निधन हुआ।
2023 - इथियोपियाई आनुवंशिकीविद् और कृषिविज्ञानी मेलाकु वोरेडे (87) का निधन हुआ।
2024 - हमास के राजनीतिक नेता इस्माइल हनीयेह की उनके निजी अंगरक्षक के साथ ईरानी राजधानी तेहरान में एक इज़राइली हमले में हत्या की।
2024 -भारत के दिग्गज बल्लेबाज अंशुमान गायकवाड़ (71) का कैंसर से निधन हुआ।
भगवान मुनिसुव्रतनाथ जी गर्भकल्याणक (जैन , श्रावण कृष्ण द्वितीया)।
अमर शहीद श्री उधमसिंह शहीदी दिवस।
श्री अमरसिंह चौधरी जयन्ती।
महान साहित्यकार श्री मुन्शी प्रेमचंद जयन्ती।
पार्श्व गायक श्री मुहम्मद रफी स्मृति दिवस।
विश्व रेंजर दिवस (World Ranger Day)।
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यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इंद्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
ठाणे, एजेंसियां। महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी के नारपोली स्थित गंगाराम वाडी इलाके में शुक्रवार देर रात बड़ा हादसा हो गया। 'कोहिनूर अपार्टमेंट' नामक ग्राउंड प्लस चार मंजिला इमारत का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे में अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। युद्धस्तर पर जारी है रेस्क्यू ऑपरेशन हादसे की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ, दमकल विभाग, नगर निगम की आपदा प्रबंधन टीम और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंच गया। बचाव दल भारी मशीनों और विशेष उपकरणों की मदद से मलबा हटाकर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का प्रयास कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है। मरम्मत के दौरान हुआ हादसा प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, इमारत के एक पिलर को असुरक्षित पाए जाने के बाद रात में मरम्मत का कार्य चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रात करीब आठ बजे इमारत एक ओर झुकती दिखाई दी, जिसके बाद अधिकांश परिवारों को बाहर निकाल लिया गया। हालांकि, कुछ लोग दोबारा इमारत के अंदर चले गए थे और मरम्मत कार्य में लगे मजदूर भी वहीं मौजूद थे, जिससे वे मलबे में फंस गए। हादसे के कारणों की जांच शुरू प्रशासन ने चार लोगों की मौत की पुष्टि की है और आशंका जताई है कि मलबे में अभी भी कुछ लोग फंसे हो सकते हैं। पूरे इलाके को सुरक्षा कारणों से सील कर दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि इमारत के गिरने के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है और रेस्क्यू अभियान पूरा होने के बाद विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
अदालत ने कहा- लंबित मामलों की सुनवाई तय प्रक्रिया के तहत होगी, न्यायिक व्यवस्था में स्पष्टता लाने पर जोर नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने कोयला घोटाला (Coal Scam) से जुड़े मामलों की सुनवाई को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने हाई कोर्ट में लंबित इन मामलों की सुनवाई और अधिकार क्षेत्र से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव किया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का असर देशभर में चल रहे कई कोयला घोटाला मामलों की आगे की सुनवाई पर पड़ सकता है। हाई कोर्ट में लंबित मामलों पर नई व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कोयला घोटाले से जुड़े मामलों में सुनवाई तय कानूनी प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र के आधार पर की जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामलों को लंबित रखने के बजाय प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने की जरूरत है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में देरी कम हो। सीबीआई जांच और अदालतों की भूमिका पर चर्चा कोयला घोटाला मामलों में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच, विशेष अदालतों की भूमिका और हाई कोर्ट की निगरानी को लेकर लंबे समय से कानूनी बहस चल रही थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इन मामलों में आगे की न्यायिक प्रक्रिया को दिशा मिलने की उम्मीद है। कई बड़े मामलों से जुड़ा है कोयला घोटाला कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े मामलों में पूर्व अधिकारियों, कंपनियों और कई प्रभावशाली लोगों के खिलाफ जांच और मुकदमे चल चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट पहले भी कोयला आवंटन प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर सख्त रुख अपना चुका है। न्यायिक प्रक्रिया तेज करने की कोशिश विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला लंबित मामलों के निपटारे और अदालतों के बीच अधिकारों की स्पष्टता के लिहाज से महत्वपूर्ण है। अब संबंधित अदालतों में मामलों की सुनवाई इसी नई व्यवस्था के अनुसार आगे बढ़ेगी।
करीब 11 साल पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के समन आदेश को किया रद्द नई दिल्ली, एजेंसियां। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़े कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया है और निचली अदालत द्वारा जारी किए गए समन आदेश को रद्द कर दिया। हिंदाल्को कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में आया फैसला यह मामला हिंदाल्को कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़ा था। आरोप था कि कोयला ब्लॉक आवंटन प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई थीं। सीबीआई ने जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसे लेकर कानूनी विवाद चल रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर संज्ञान लेने का पर्याप्त आधार नहीं था। मनमोहन सिंह को मिली क्लीन चिट सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ इस मामले में कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं चलेगी। यह मामला उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल (2004-2014) के दौरान हुए कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़ा था और लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया में था। करीब दो साल बाद आया अंतिम फैसला डॉ. मनमोहन सिंह का निधन दिसंबर 2024 में 92 वर्ष की उम्र में हुआ था। उनके निधन के बाद भी यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था। अब अदालत के फैसले से इस लंबे कानूनी विवाद का अंत हो गया है।