कंपनी के हालिया तिमाही नतीजों में भी कारोबार की मजबूती नजर आई है। FY27 की पहली तिमाही में गोकुल एग्रो रिसोर्सेज का कंसोलिडेटेड ऑपरेशंस से रेवेन्यू सालाना आधार पर करीब 7 फीसदी बढ़कर 5,281.95 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 4,924.35 करोड़ रुपये था। कंपनी की कुल आय भी 7 फीसदी बढ़कर 5,295.01 करोड़ रुपये रही।
गुरुवार के कारोबारी सत्र में गोकुल एग्रो रिसोर्सेज के शेयरों में 7 फीसदी से अधिक की तेजी दर्ज की गई। इससे पहले बुधवार को शेयर 223.20 रुपये पर बंद हुआ था। गुरुवार को यह 225.40 रुपये पर खुला और इंट्राडे कारोबार में करीब 238.58 रुपये तक पहुंच गया। यह कंपनी के 52-सप्ताह के 249.92 रुपये के उच्च स्तर के भी करीब रहा।
हालिया तेजी के पीछे कंपनी के मजबूत तिमाही नतीजों को एक अहम वजह माना जा रहा है। इसके अलावा कंपनी का विविधीकृत कारोबार, ऑपरेशनल एफिशिएंसी और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स पर फोकस भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ाने वाले कारकों में शामिल हैं।
गोकुल एग्रो रिसोर्सेज खाद्य तेल, अरंडी तेल और एग्री-प्रोसेसिंग से जुड़े कारोबार में सक्रिय है। कंपनी के मुताबिक, उसके प्रदर्शन को प्रोडक्ट डायवर्सिफिकेशन, बेहतर ऑपरेशनल दक्षता, वैल्यू-एडेड उत्पादों और एक्सपोर्ट कारोबार से फायदा मिला है।
कंपनी का डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क 575 से अधिक है। इसके उत्पाद देश के 28 राज्यों में उपलब्ध हैं, जबकि कंपनी 33 देशों में अपने उत्पादों का निर्यात करती है। इस तरह घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कारोबार भी कंपनी की ग्रोथ रणनीति का अहम हिस्सा है।
कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कनुभाई जे. ठक्कर के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी ने लगभग 5,282 करोड़ रुपये का रेवेन्यू, 217 करोड़ रुपये का EBITDA और 124 करोड़ रुपये का टैक्स-पश्चात मुनाफा दर्ज किया।
कंपनी का कहना है कि मुनाफे में वृद्धि रेवेन्यू ग्रोथ से अधिक रही। इसके पीछे रणनीतिक सोर्सिंग, बेहतर ऑपरेशनल क्षमता, वैल्यू-एडेड उत्पादों और ज्यादा विविधीकृत बिजनेस मिक्स को प्रमुख कारण बताया गया है।
गोकुल एग्रो रिसोर्सेज के शेयर ने अलग-अलग अवधि में निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है।
यानी पांच साल की अवधि में शेयर ने करीब 11 गुना से ज्यादा रिटर्न दिया है। इसी वजह से इसे मल्टीबैगर स्टॉक के तौर पर देखा जा रहा है।
किसी शेयर का पिछला शानदार प्रदर्शन उसके भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं होता। गोकुल एग्रो रिसोर्सेज के मजबूत तिमाही आंकड़े और लंबी अवधि का रिटर्न जरूर आकर्षक हैं, लेकिन निवेशकों को कंपनी की वैल्यूएशन, कर्ज, मार्जिन, कमोडिटी कीमतों, एक्सपोर्ट कारोबार और भविष्य की कमाई की संभावनाओं का भी आकलन करना चाहिए।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
राजस्व 18% बढ़कर 90 अरब डॉलर के पार, Azure की मजबूत ग्रोथ से निवेशकों में उत्साह; शेयरों में रिकॉर्ड उछाल वॉशिंगटन, एजेंसियां। टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के शानदार नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का राजस्व 18% बढ़कर 90.01 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि प्रति शेयर आय 4.74 डॉलर रही, जो बाजार के अनुमान से बेहतर है। कंपनी के क्लाउड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कारोबार ने इस प्रदर्शन में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। Azure और AI बने सबसे बड़े ग्रोथ इंजन माइक्रोसॉफ्ट ने बताया कि उसका क्लाउड प्लेटफॉर्म Azure लगातार मजबूत गति से बढ़ रहा है। कंपनी के अनुसार, Azure ने 100 अरब डॉलर का वार्षिक कारोबार पार कर लिया, जबकि पूरे Microsoft Cloud का वार्षिक राजस्व 214 अरब डॉलर से अधिक हो गया। कंपनी का कहना है कि AI सेवाओं और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग से यह वृद्धि संभव हुई। AI निवेश का दिखने लगा असर माइक्रोसॉफ्ट ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटरों पर बड़े निवेश जारी रखने की बात कही है। कंपनी ने तिमाही के दौरान दुनिया भर में कई नए डेटा सेंटर शुरू किए और कहा कि AI आधारित सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी का AI पर किया गया बड़ा निवेश अब बेहतर वित्तीय परिणाम देने लगा है। शेयरों में रिकॉर्ड तेजी बेहतर नतीजों के बाद माइक्रोसॉफ्ट के शेयरों में जोरदार उछाल आया। कंपनी के शेयर एक दिन में 15% से अधिक चढ़ गए, जिससे उसके बाजार पूंजीकरण में करीब 450 अरब डॉलर की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई। यह किसी भी कंपनी की सबसे बड़ी एकदिवसीय मार्केट वैल्यू बढ़ोतरी में से एक मानी जा रही है। आगे भी मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद कंपनी ने अगले वित्त वर्ष के लिए भी सकारात्मक संकेत दिए हैं। माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि क्लाउड कंप्यूटिंग, AI और एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर की मजबूत मांग भविष्य में भी उसके कारोबार को गति देती रहेगी।
करीब ₹1,491 करोड़ के सेटलमेंट प्रस्ताव को मिली मंजूरी, वर्षों पुराने विवाद के समाधान की दिशा में बड़ा कदम मुंबई, एजेंसियां। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के लंबे समय से लंबित को-लोकेशन (Co-location) और अन्य नियामकीय मामलों के निपटारे के लिए दिए गए सेटलमेंट प्रस्ताव को सैद्धांतिक (In-principle) मंजूरी दे दी है। NSE ने बताया कि वह इन मामलों के समाधान के लिए ₹1,491 करोड़ का सेटलमेंट करेगा। क्या है को-लोकेशन मामला? को-लोकेशन मामला 2015 में सामने आया था। आरोप था कि NSE की को-लोकेशन सुविधा का उपयोग करने वाले कुछ ब्रोकरों को ट्रेडिंग सर्वर तक दूसरों की तुलना में पहले पहुंच (Preferential Access) मिली, जिससे उन्हें हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग में अनुचित लाभ हुआ। इसके बाद SEBI ने कई वर्षों तक जांच की और विभिन्न आदेश जारी किए। IPO का रास्ता हुआ साफ इस सेटलमेंट को NSE के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। लंबे समय से नियामकीय विवादों के कारण NSE का IPO अटका हुआ था। अब सेटलमेंट को मंजूरी मिलने के बाद एक्सचेंज के बहुप्रतीक्षित IPO का रास्ता लगभग साफ हो गया है। NSE पहले ही अपना ड्राफ्ट ऑफर डॉक्यूमेंट जमा कर चुका है और निवेशकों के साथ शुरुआती बातचीत भी शुरू कर चुका है। भारत का सबसे बड़ा सेटलमेंट रिपोर्टों के अनुसार, यह भारत में किसी एक संस्था द्वारा किया गया सबसे बड़ा नियामकीय सेटलमेंट माना जा रहा है। अंतिम औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद NSE लंबित मामलों से राहत पाकर अपनी लिस्टिंग प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकेगा। बाजार की नजर अगले कदम पर विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतिम मंजूरी और अन्य औपचारिकताएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो NSE का IPO भारतीय पूंजी बाजार के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में से एक हो सकता है। निवेशकों की नजर अब SEBI की अंतिम स्वीकृति और IPO की समय-सारिणी पर टिकी है।
देश में उच्च शिक्षा की बढ़ती लागत के बीच छात्रों के लिए एजुकेशन लोन हासिल करना आसान बनाने की दिशा में केंद्र सरकार बड़े बदलावों की तैयारी कर रही है। सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में एजुकेशन लोन बांटने की रफ्तार को करीब दोगुना करना है। इसके लिए लोन आवेदन की प्रक्रिया को तेज करने, बिना गारंटी मिलने वाले लोन की सीमा बढ़ाने और छात्रों को ब्याज में राहत देने जैसे कदमों पर काम किया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बैंकों को एजुकेशन लोन के आवेदन को 10 दिनों के भीतर अंतिम रूप देने का लक्ष्य दिया जा सकता है। इसके अलावा देशभर के करीब 50,000 कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों में बैंक कैंप लगाए जाने की तैयारी है, ताकि छात्रों को लोन की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी मौके पर ही मिल सके और आवेदन का निपटारा तेजी से हो। एजुकेशन लोन बांटने की रफ्तार दोगुनी करने का लक्ष्य सरकार की योजना अगले साल तक एजुकेशन लोन वितरण की रफ्तार को दोगुना करने की है। वित्त वर्ष 2025-26 में बैंकों ने करीब 39,000 करोड़ रुपये के एजुकेशन लोन वितरित किए थे। इसी अवधि में 3.80 लाख से ज्यादा एजुकेशन लोन आवेदन मंजूर किए गए। सरकार का मानना है कि लोन प्रक्रिया आसान और तेज होने से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को उच्च शिक्षा हासिल करने में मदद मिल सकती है। 10 दिन में पूरा करने की तैयारी प्रस्तावित बदलावों में सबसे अहम एजुकेशन लोन की प्रोसेसिंग टाइमलाइन को कम करना है। बैंकों को आवेदन मिलने के बाद करीब 10 दिनों के भीतर लोन पर फैसला लेने के लक्ष्य के साथ काम करने को कहा जा सकता है। इसका सीधा फायदा उन छात्रों को मिल सकता है, जिन्हें कॉलेज में एडमिशन, फीस जमा करने या विदेश में पढ़ाई की प्रक्रिया के दौरान जल्द वित्तीय सहायता की जरूरत होती है। 50 हजार कॉलेजों में बैंक लगाएंगे कैंप सरकार और बैंक छात्रों तक एजुकेशन लोन की सुविधा पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर कैंप लगाने की योजना बना रहे हैं। करीब 50,000 कॉलेजों और संस्थानों में बैंक कैंप आयोजित किए जाने की तैयारी है। इन कैंपों के जरिए छात्रों को लोन की पात्रता, ब्याज दर, दस्तावेज, गारंटी और आवेदन प्रक्रिया के बारे में जानकारी मिल सकेगी। कुछ संस्थानों में बैंक पहले से ही छात्रों को मौके पर लोन से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। बिना गारंटी लोन की सीमा बढ़ सकती है फिलहाल Credit Guarantee Fund Scheme for Education Loans (CGFSEL) के तहत 7.5 लाख रुपये तक के एजुकेशन लोन पर 75 फीसदी तक क्रेडिट गारंटी कवर उपलब्ध है। सरकार अब बिना किसी संपत्ति या अन्य सुरक्षा को गिरवी रखे मिलने वाले लोन की सीमा बढ़ाने पर विचार कर रही है। दिसंबर 2025 में एक संसदीय समिति ने इस सीमा को 7.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने की सिफारिश की थी। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो छात्रों को महंगी उच्च शिक्षा के लिए ज्यादा रकम का एजुकेशन लोन बिना कोलैटरल के हासिल करने में मदद मिल सकती है। सह-आवेदक की शर्त में भी बदलाव संभव सरकार एजुकेशन लोन के लिए गारंटी कवर मिलने वाले मामलों में सह-आवेदक की अनिवार्य शर्त को हटाने पर भी विचार कर रही है। इससे छात्रों और उनके परिवारों के लिए लोन प्रक्रिया और आसान हो सकती है। हालांकि, अंतिम नियम और पात्रता शर्तें संबंधित सरकारी फैसले और बैंकों की लागू व्यवस्था के आधार पर स्पष्ट होंगी। ब्याज में भी मिल सकती है राहत सरकार छात्रों के लिए ब्याज सब्सिडी की सुविधा को भी मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना (PM Vidyalaxmi Scheme) के तहत वित्त वर्ष 2024-25 से 2030-31 की अवधि के लिए ब्याज सब्सिडी के लिए 3,600 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य पात्र छात्रों पर उच्च शिक्षा के लिए लिए गए कर्ज का वित्तीय बोझ कम करना है। छोटे-मोटे बैंक चार्ज भी हटाने की तैयारी बैंकिंग स्तर पर छात्रों को अतिरिक्त राहत देने के लिए कुछ छोटे-मोटे शुल्क माफ किए जाने की व्यवस्था भी कई मामलों में देखने को मिल रही है। सरकार की व्यापक योजना लोन आवेदन से लेकर मंजूरी और वितरण तक की प्रक्रिया को ज्यादा सरल बनाने की है। छात्रों के लिए क्या बदलेगा? प्रस्तावित बदलाव लागू होने पर एजुकेशन लोन लेने वाले छात्रों के लिए कई स्तरों पर राहत मिल सकती है। 10 दिन: लोन आवेदन को अंतिम रूप देने का लक्ष्य 50,000: बैंक कैंप के लिए लक्षित कॉलेज और संस्थान 7.5 लाख रुपये: मौजूदा कोलैटरल-फ्री लोन सीमा 20 लाख रुपये: संसदीय समिति की प्रस्तावित नई सीमा 3,600 करोड़ रुपये: PM Vidyalaxmi के तहत ब्याज सब्सिडी का बजट 39,000 करोड़ रुपये: FY2025-26 में वितरित एजुकेशन लोन 3.80 लाख+: FY2025-26 में मंजूर किए गए एजुकेशन लोन आवेदन छात्रों के लिए क्यों अहम है यह बदलाव? आज उच्च शिक्षा की फीस, हॉस्टल, किताबों और अन्य खर्चों के कारण कई परिवारों के लिए पढ़ाई का खर्च उठाना चुनौती बन गया है। ऐसे में अगर एजुकेशन लोन की प्रक्रिया तेज होती है, बिना गारंटी ज्यादा रकम मिलती है और ब्याज पर राहत मिलती है, तो छात्रों के लिए उच्च शिक्षा तक पहुंच आसान हो सकती है। हालांकि, छात्रों को लोन लेने से पहले ब्याज दर, कुल पुनर्भुगतान राशि, मोरेटोरियम अवधि, EMI, प्रोसेसिंग फीस और अन्य नियमों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था से राहत की उम्मीद जरूर है, लेकिन अंतिम नियम लागू होने के बाद ही इसकी पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।