नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC में 6.5% हिस्सेदारी बेचकर ₹31,522 करोड़ जुटा लिए हैं। यह भारत के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा ऑफर फॉर सेल (OFS) रहा। खास बात यह रही कि पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया, जिससे बाजार में पहले से कोई हलचल नहीं हुई और शेयर की कीमत पर भी बड़ा दबाव नहीं पड़ा। सरकार को पहले से ही LIC में अपनी हिस्सेदारी घटाकर सार्वजनिक शेयरधारिता (Public Shareholding) बढ़ानी थी। सेबी के नियमों के अनुसार मई 2027 तक LIC में कम से कम 10% पब्लिक शेयरहोल्डिंग सुनिश्चित करनी है। इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने अंतिम समय तक OFS की लॉन्च तारीख को पूरी तरह गोपनीय रखा। इसका उद्देश्य यह था कि बड़े ट्रेडर्स और निवेशक पहले से पोजीशन लेकर शेयर की कीमत में गिरावट न ला सकें। यही रणनीति सरकार के लिए फायदेमंद साबित हुई और शुरुआती योजना से कहीं अधिक शेयर बेचने में सफलता मिली। बाजार को नहीं लगी भनक सूत्रों के मुताबिक, इस डील से जुड़े निवेश बैंकों को भी अलग-अलग समय पर जानकारी दी गई। एक बैंक को तो स्टॉक एक्सचेंज में सूचना जारी होने से कुछ समय पहले ही बुलाकर बताया गया कि उसी शाम OFS लॉन्च किया जाएगा। केवल एक छोटी कोर टीम को पूरी योजना की जानकारी थी, जबकि बाकी सलाहकारों को बाजार बंद होने के बाद प्रक्रिया में शामिल किया गया। बिना फीस के काम करने को तैयार हुए बैंक इस डील की एक और खास बात यह रही कि सलाह देने वाले चारों निवेश बैंकों ने कोई एडवाइजरी फीस नहीं ली। बताया गया कि एक बैंक ने शुरुआत में मुफ्त में काम करने की पेशकश की, जिसके बाद बाकी बैंकों ने भी फीस छोड़ने का फैसला किया। सरकारी विनिवेश से जुड़ी डील में अक्सर बैंक बेहद कम या नाममात्र की फीस लेते हैं। सही समय का भी मिला फायदा बाजार को उम्मीद थी कि सरकार LIC के तिमाही नतीजों के बाद OFS लाएगी। लेकिन सरकार ने इससे पहले ही शेयर बिक्री शुरू कर दी। अधिकारियों का मानना था कि निवेशकों को असमंजस में रखने से शेयर की कीमत स्थिर रहेगी और बेहतर प्रतिक्रिया मिलेगी। छोटे ऑफर से शुरू हुई बड़ी डील सरकार ने शुरुआत में केवल 2.5% हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई थी, जबकि अच्छी मांग मिलने पर अतिरिक्त 4% हिस्सेदारी बेचने का विकल्प रखा गया। यह रणनीति सफल रही। संस्थागत निवेशकों के लिए खुला हिस्सा 3.32 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसके बाद सरकार ने अतिरिक्त शेयर भी जारी कर दिए। रिटेल निवेशकों की ओर से भी अच्छी भागीदारी देखने को मिली और कुल OFS करीब 1.2 गुना सब्सक्राइब हुआ। इस बिक्री के बाद LIC में पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़कर 10% हो जाएगी, जिससे सेबी की निर्धारित शर्त पूरी हो जाएगी।
नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में सरकार अपनी हिस्सेदारी कम करने जा रही है। सरकार मंगलवार से दो दिवसीय ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए LIC के 82.22 करोड़ से अधिक शेयर बेच रही है। इसके लिए 382 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया गया है। इस कीमत पर LIC के शेयर सोमवार के बंद भाव की तुलना में करीब 10 प्रतिशत की छूट पर उपलब्ध होंगे। सरकार की इस हिस्सेदारी बिक्री से सरकारी खजाने में करीब 31,000 करोड़ रुपये आने की उम्मीद है। सरकार बेच रही 6.5% हिस्सेदारी सरकार LIC में अपनी कुल 6.5 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है। इसमें शुरुआती तौर पर 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी और अतिरिक्त 4 प्रतिशत का ग्रीन शू विकल्प शामिल है। निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव अरुणीश चावला के मुताबिक, पूरी सदस्यता मिलने और तय फ्लोर प्राइस पर बिक्री होने की स्थिति में सरकार 82.22 करोड़ से अधिक शेयर बेच सकती है। इस पूरी बिक्री का मूल्य करीब 31,000 करोड़ रुपये बैठता है। पहले संस्थागत निवेशक, फिर आम निवेशकों की बारी LIC OFS की प्रक्रिया दो दिनों में पूरी होगी। मंगलवार: बिक्री संस्थागत निवेशकों के लिए खुलेगी। बुधवार: आम निवेशक भी OFS में बोली लगा सकेंगे। इस तरह खुदरा निवेशकों को भी बाजार भाव की तुलना में कम कीमत पर LIC के शेयर खरीदने का मौका मिल सकता है। हालांकि, OFS में शेयर मिलना बोली और उपलब्ध शेयरों पर निर्भर करेगा। 382 रुपये का फ्लोर प्राइस क्यों खास है? LIC OFS के लिए सरकार ने 382 रुपये प्रति शेयर का न्यूनतम मूल्य तय किया है। सोमवार के बंद भाव के मुकाबले यह करीब 10 प्रतिशत कम है। सोमवार को LIC का शेयर BSE पर लगभग 424.85 रुपये पर बंद हुआ था। वहीं, दिए गए आंकड़ों के मुताबिक LIC का 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर 468.30 रुपये और निचला स्तर 361 रुपये रहा है। इसका मतलब है कि OFS का फ्लोर प्राइस बाजार के मौजूदा भाव की तुलना में आकर्षक दिखाई दे रहा है, लेकिन केवल डिस्काउंट देखकर निवेश का फैसला करना उचित नहीं होगा। सरकार की हिस्सेदारी घटेगी इस OFS के बाद LIC में सरकार की हिस्सेदारी कम होगी। फिलहाल सरकार के पास कंपनी की करीब 96.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है। LIC को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद से न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता संबंधी नियमों को पूरा करना है। सेबी ने LIC को कम से कम 10 प्रतिशत सार्वजनिक शेयरधारिता हासिल करने के लिए 16 मई 2027 तक की समयसीमा दी थी। सरकार की मौजूदा हिस्सेदारी बिक्री इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। LIC का मार्केट कैप कितना है? सोमवार के बंद भाव के आधार पर LIC का बाजार पूंजीकरण करीब 5.37 लाख करोड़ रुपये था। कंपनी बाजार पूंजीकरण के लिहाज से देश की प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों में शामिल है। LIC के शेयर का प्रदर्शन निवेशकों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी देश के बीमा क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है और इसमें सरकार की बड़ी हिस्सेदारी है। निवेशकों को क्या समझना चाहिए? LIC OFS में करीब 10 प्रतिशत का डिस्काउंट निश्चित रूप से निवेशकों का ध्यान खींच सकता है। लेकिन शेयर बाजार में किसी भी निवेश का फैसला सिर्फ डिस्काउंट देखकर नहीं किया जाना चाहिए। निवेशकों को कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, वैल्यूएशन, बीमा कारोबार की स्थिति, भविष्य की वृद्धि और बाजार जोखिम को ध्यान में रखना चाहिए। OFS में शेयर मिलने की गारंटी भी नहीं होती, क्योंकि आवंटन मांग और उपलब्ध शेयरों पर निर्भर करता है।
शेयर बाजार में कुछ कंपनियां ऐसी होती हैं, जिन्होंने लंबी अवधि में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। FMCG और एग्री-प्रोसेसिंग सेक्टर की कंपनी गोकुल एग्रो रिसोर्सेज लिमिटेड भी ऐसे ही शेयरों में शामिल है। कंपनी के शेयर ने पिछले पांच वर्षों में करीब 1,107 फीसदी का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। वहीं, हालिया कारोबारी सत्र में भी शेयर में 7 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। कंपनी के हालिया तिमाही नतीजों में भी कारोबार की मजबूती नजर आई है। FY27 की पहली तिमाही में गोकुल एग्रो रिसोर्सेज का कंसोलिडेटेड ऑपरेशंस से रेवेन्यू सालाना आधार पर करीब 7 फीसदी बढ़कर 5,281.95 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 4,924.35 करोड़ रुपये था। कंपनी की कुल आय भी 7 फीसदी बढ़कर 5,295.01 करोड़ रुपये रही। शेयर में क्यों आई तेजी? गुरुवार के कारोबारी सत्र में गोकुल एग्रो रिसोर्सेज के शेयरों में 7 फीसदी से अधिक की तेजी दर्ज की गई। इससे पहले बुधवार को शेयर 223.20 रुपये पर बंद हुआ था। गुरुवार को यह 225.40 रुपये पर खुला और इंट्राडे कारोबार में करीब 238.58 रुपये तक पहुंच गया। यह कंपनी के 52-सप्ताह के 249.92 रुपये के उच्च स्तर के भी करीब रहा। हालिया तेजी के पीछे कंपनी के मजबूत तिमाही नतीजों को एक अहम वजह माना जा रहा है। इसके अलावा कंपनी का विविधीकृत कारोबार, ऑपरेशनल एफिशिएंसी और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स पर फोकस भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ाने वाले कारकों में शामिल हैं। प्रोडक्ट डायवर्सिफिकेशन से मिला फायदा गोकुल एग्रो रिसोर्सेज खाद्य तेल, अरंडी तेल और एग्री-प्रोसेसिंग से जुड़े कारोबार में सक्रिय है। कंपनी के मुताबिक, उसके प्रदर्शन को प्रोडक्ट डायवर्सिफिकेशन, बेहतर ऑपरेशनल दक्षता, वैल्यू-एडेड उत्पादों और एक्सपोर्ट कारोबार से फायदा मिला है। कंपनी का डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क 575 से अधिक है। इसके उत्पाद देश के 28 राज्यों में उपलब्ध हैं, जबकि कंपनी 33 देशों में अपने उत्पादों का निर्यात करती है। इस तरह घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कारोबार भी कंपनी की ग्रोथ रणनीति का अहम हिस्सा है। पहली तिमाही में 5,282 करोड़ रुपये का रेवेन्यू कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कनुभाई जे. ठक्कर के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी ने लगभग 5,282 करोड़ रुपये का रेवेन्यू, 217 करोड़ रुपये का EBITDA और 124 करोड़ रुपये का टैक्स-पश्चात मुनाफा दर्ज किया। कंपनी का कहना है कि मुनाफे में वृद्धि रेवेन्यू ग्रोथ से अधिक रही। इसके पीछे रणनीतिक सोर्सिंग, बेहतर ऑपरेशनल क्षमता, वैल्यू-एडेड उत्पादों और ज्यादा विविधीकृत बिजनेस मिक्स को प्रमुख कारण बताया गया है। 5 साल में 1,107 फीसदी का रिटर्न गोकुल एग्रो रिसोर्सेज के शेयर ने अलग-अलग अवधि में निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है। 1 सप्ताह: करीब 8.50 फीसदी 1 महीना: करीब 9.44 फीसदी 2026 में अब तक: करीब 27 फीसदी 1 साल: करीब 47 फीसदी 3 साल: करीब 292 फीसदी 5 साल: करीब 1,107 फीसदी यानी पांच साल की अवधि में शेयर ने करीब 11 गुना से ज्यादा रिटर्न दिया है। इसी वजह से इसे मल्टीबैगर स्टॉक के तौर पर देखा जा रहा है। क्या निवेशकों को खरीदना चाहिए? किसी शेयर का पिछला शानदार प्रदर्शन उसके भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं होता। गोकुल एग्रो रिसोर्सेज के मजबूत तिमाही आंकड़े और लंबी अवधि का रिटर्न जरूर आकर्षक हैं, लेकिन निवेशकों को कंपनी की वैल्यूएशन, कर्ज, मार्जिन, कमोडिटी कीमतों, एक्सपोर्ट कारोबार और भविष्य की कमाई की संभावनाओं का भी आकलन करना चाहिए।
नई दिल्ली, एजेंसियां। टेक दिग्गज Google ने भारत में शिक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 'ATL Saathi' AI प्लेटफॉर्म का विस्तार करने की घोषणा की है। इस पहल के तहत देशभर के शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल लर्निंग टूल्स का बेहतर प्रशिक्षण और उपयोग उपलब्ध कराया जाएगा। शिक्षकों को मिलेगा AI का प्रशिक्षण Google के अनुसार, प्लेटफॉर्म के जरिए शिक्षकों को AI आधारित कंटेंट तैयार करने, स्मार्ट क्लासरूम चलाने और छात्रों के लिए इंटरैक्टिव लर्निंग अनुभव विकसित करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे डिजिटल शिक्षा को नई गति मिलने की उम्मीद है। क्लाउड और AI टूल्स हुए अपग्रेड कंपनी ने 'ATL Saathi' में कई नए AI फीचर्स और Google Cloud आधारित सेवाएं जोड़ी हैं। इनकी मदद से शिक्षक लेसन प्लान तैयार करने, क्विज़ बनाने, असाइनमेंट तैयार करने और छात्रों की प्रगति का बेहतर विश्लेषण कर सकेंगे। अटल टिंकरिंग लैब्स को मिलेगा फायदा यह पहल अटल इनोवेशन मिशन (AIM) के तहत संचालित अटल टिंकरिंग लैब्स (ATL) से जुड़े स्कूलों को विशेष रूप से लाभ पहुंचाएगी। Google का लक्ष्य छात्रों में AI, रोबोटिक्स, कोडिंग और नवाचार से जुड़ी कौशल विकसित करना है। डिजिटल शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित शिक्षा प्लेटफॉर्म के विस्तार से भारत के स्कूलों में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा। इससे शिक्षकों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और छात्रों को आधुनिक तकनीकों के साथ सीखने का अवसर मिलेगा। नई शिक्षा नीति के अनुरूप पहल Google ने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के उद्देश्यों के अनुरूप है और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से छात्रों को AI एवं डिजिटल स्किल्स से लैस करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
नई दिल्ली: घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी दिन भी मजबूती देखने को मिली। एशियाई बाजारों में कमजोरी के बावजूद भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में खुला। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 250 अंक से अधिक उछल गया, जबकि एनएसई का निफ्टी 50 इंडेक्स 24,150 के स्तर के ऊपर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी मामूली मजबूती के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में बाजार की स्थिति सुबह करीब 9:24 बजे तक बीएसई सेंसेक्स 242.70 अंक (0.31%) की बढ़त के साथ 77,428.13 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 50 62.35 अंक (0.26%) की तेजी के साथ 24,140.85 अंक पर पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में भी बाजार सकारात्मक रुख के साथ बंद हुआ था। उस दिन सेंसेक्स 130.49 अंक और निफ्टी 26.45 अंक की बढ़त दर्ज करने में सफल रहा था। रुपये में भी मामूली मजबूती शेयर बाजार की तेजी के बीच भारतीय मुद्रा में भी हल्की मजबूती देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1 पैसे मजबूत होकर 96.24 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। सेंसेक्स के इन शेयरों में रही सबसे ज्यादा तेजी 30 शेयरों वाले सेंसेक्स में शुरुआती कारोबार के दौरान 20 कंपनियों के शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। सबसे ज्यादा तेजी एचसीएल टेक में देखने को मिली, जिसके शेयर करीब 2.6% तक उछल गए। इसके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, टाइटन, मारुति सुजुकी, टीसीएस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एशियन पेंट्स और ट्रेंट जैसे शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इन शेयरों पर रहा दबाव दूसरी ओर बैंकिंग और कुछ अन्य सेक्टर के शेयरों में हल्की कमजोरी दर्ज की गई। एक्सिस बैंक, अडानी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), आईसीआईसीआई बैंक, सन फार्मा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) और एनटीपीसी के शेयर शुरुआती कारोबार में लाल निशान में कारोबार करते दिखे। निफ्टी में आईटी शेयरों का दबदबा निफ्टी 50 इंडेक्स में एचसीएल टेक, मारुति सुजुकी और विप्रो सबसे अधिक बढ़त वाले शेयर रहे। सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी आईटी और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में सबसे अच्छी तेजी देखने को मिली। वहीं, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर दबाव में रहा और इसमें सबसे ज्यादा कमजोरी दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बढ़त ब्रॉडर मार्केट की बात करें तो निवेशकों का रुझान मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सकारात्मक रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में करीब 0.02% जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.34% की बढ़त दर्ज की गई। निवेशकों की नजर आगे किन बातों पर रहेगी? विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों, वैश्विक बाजारों के रुख, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और रुपये की चाल पर बनी रहेगी। यदि आईटी और ऑटो सेक्टर में खरीदारी जारी रहती है तो बाजार को आगे भी मजबूती मिल सकती है।
नई दिल्ली: नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से जुड़े करोड़ों निवेशकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने NPS PRIDE-Disha (Pension Fund Returns for Informed Decision and Empowerment) नाम से एक नया डिजिटल टूल लॉन्च किया है। इस टूल का उद्देश्य NPS सब्सक्राइबर्स को अलग-अलग पेंशन फंड और निवेश विकल्पों के पिछले प्रदर्शन का विस्तृत विश्लेषण उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने रिटायरमेंट निवेश से जुड़े फैसले अधिक समझदारी से ले सकें। अब SIP निवेश का भी मिलेगा वास्तविक रिटर्न अब तक NPS निवेशक केवल 1, 2, 5 या 10 वर्षों के एकमुश्त (Lumpsum) निवेश के आधार पर फंड के प्रदर्शन की तुलना कर सकते थे। लेकिन नए PRIDE-Disha टूल के जरिए अब वे अपने मासिक निवेश यानी SIP के वास्तविक रिटर्न (XIRR) की भी गणना कर सकेंगे। XIRR निवेशकों को यह समझने में मदद करेगा कि यदि उन्होंने नियमित मासिक निवेश किया होता तो समय के साथ उनका निवेश कितना बढ़ सकता था। इससे वास्तविक निवेश प्रदर्शन का अधिक सटीक आकलन संभव होगा। 5,000 दिनों का NAV डेटा होगा उपलब्ध इस नए प्लेटफॉर्म में वर्ष 2008 से अब तक का लगभग 5,000 दिनों का NAV (Net Asset Value) डेटा शामिल किया गया है। निवेशक पुराने रिकॉर्ड के आधार पर विभिन्न पेंशन फंडों के प्रदर्शन की तुलना कर सकेंगे और यह समझ पाएंगे कि लंबे समय में किस फंड ने बेहतर रिटर्न दिया। करीब 4,800 निवेश विकल्पों की तुलना PRIDE-Disha टूल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेशक Active Choice और Auto Choice सहित करीब 4,800 विभिन्न निवेश विकल्पों की तुलना कर सकते हैं। इसके अलावा बार ग्राफ और अन्य विजुअल टूल्स की मदद से अलग-अलग फंडों के प्रदर्शन को आसानी से समझा जा सकता है। भविष्य का अनुमान नहीं देगा यह टूल PFRDA ने 14 जुलाई को जारी अपने सर्कुलर में स्पष्ट किया है कि PRIDE-Disha केवल ऐतिहासिक आंकड़ों पर आधारित जानकारी उपलब्ध कराता है। यह किसी भी प्रकार से भविष्य के रिटर्न की भविष्यवाणी या गारंटी नहीं देता। इसका उद्देश्य केवल निवेशकों को पुराने प्रदर्शन के आधार पर बेहतर निर्णय लेने में सहायता प्रदान करना है। ऐसे करें इस्तेमाल NPS सब्सक्राइबर्स PFRDA की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध PRIDE-Disha Calculator के माध्यम से इस सुविधा का उपयोग कर सकते हैं। यहां वे अलग-अलग पेंशन फंड, NAV हिस्ट्री और SIP आधारित XIRR की तुलना कर अपने रिटायरमेंट निवेश की बेहतर योजना बना सकते हैं। क्यों है यह टूल महत्वपूर्ण? रिटायरमेंट प्लानिंग में सही पेंशन फंड का चयन बेहद महत्वपूर्ण होता है। PRIDE-Disha टूल निवेशकों को पारदर्शी डेटा, विस्तृत तुलना और वास्तविक निवेश प्रदर्शन की जानकारी देकर अधिक समझदारी से निर्णय लेने में मदद करेगा। इससे NPS निवेशकों को अपने लंबे समय के वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप बेहतर फंड चुनने का अवसर मिलेगा।
लंदन, एजेंसियां। ब्रिटेन सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के समर्थन पर प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार ने नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत IRGC को पहली बार "स्टेट थ्रेट" (राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा) घोषित किया है। अब ब्रिटेन में IRGC के लिए समर्थन जुटाना, उसकी मदद करना या उसके हित में गतिविधियां चलाना अपराध माना जाएगा। 14 साल तक की जेल का प्रावधान ब्रिटेन के गृह मंत्रालय के अनुसार, नए कानून के तहत IRGC का समर्थन करने, उसके लिए काम करने या उसे किसी भी प्रकार की सहायता पहुंचाने पर अधिकतम 14 साल की जेल हो सकती है। वहीं यदि कोई व्यक्ति IRGC की ओर से जासूसी, तोड़फोड़ या हिंसक गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उसे आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। यह फैसला क्यों लिया गया? ब्रिटिश सरकार का आरोप है कि IRGC की कुद्स फोर्स ने ब्रिटेन में यहूदी और इजरायली समुदाय से जुड़े कई ठिकानों पर हुए हमलों के पीछे सक्रिय भूमिका निभाई। सरकार का कहना है कि ईरान समर्थित संगठन Islamic Movement of Companions of the Right (IMCR) ने लंदन समेत कई स्थानों पर आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं की जिम्मेदारी ली थी। इन्हीं घटनाओं के बाद यह कार्रवाई की गई।
Ayodhya Real Estate News: राम मंदिर के उद्घाटन के बाद अयोध्या देश के सबसे तेजी से उभरते रियल एस्टेट और आध्यात्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल हो गया है। शहर में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और बढ़ती निवेश संभावनाओं के बीच बॉलीवुड के कई बड़े सितारे भी यहां निवेश कर रहे हैं। इसी कड़ी में अभिनेता अमिताभ बच्चन और रणबीर कपूर के अयोध्या में किए गए रियल एस्टेट निवेश एक बार फिर चर्चा में हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमिताभ बच्चन ने अयोध्या में विभिन्न प्रॉपर्टीज़ के जरिए लगभग ₹90 करोड़ का निवेश किया है, जबकि रणबीर कपूर ने ₹3.31 करोड़ की कीमत वाला एक प्रीमियम प्लॉट खरीदा है। अमिताभ बच्चन का अयोध्या में बड़ा निवेश रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमिताभ बच्चन ने डेवलपर The House of Abhinandan Lodha (HoABL) की परियोजनाओं सहित अयोध्या में कई संपत्तियों में निवेश किया है। उनके निवेश का कुल अनुमान लगभग ₹90–100 करोड़ के बीच बताया जा रहा है। अमिताभ बच्चन की प्रमुख प्रॉपर्टीज़ सरयू प्लॉट: लगभग 10,000 वर्ग फुट का प्लॉट, जिसकी अनुमानित कीमत ₹14.5 करोड़ बताई जाती है। हवेली अवध: करीब 5,372 वर्ग फुट का प्लॉट, जिसकी कीमत लगभग ₹4.54 करोड़ है। प्रीमियम लग्जरी प्लॉट: सरयू डेवलपमेंट के पास लगभग 25,000 वर्ग फुट का प्लॉट, जिसकी कीमत करीब ₹40 करोड़ बताई गई है। 67 एकड़ भूमि: परिवार की कंपनी AB Corp Ltd के माध्यम से लगभग ₹35 करोड़ में खरीदी गई जमीन। हरिवंश राय बच्चन मेमोरियल ट्रस्ट: दिवंगत कवि हरिवंश राय बच्चन की स्मृति में प्रस्तावित स्मारक के लिए लगभग 54,454 वर्ग फुट भूमि का पंजीकरण कराया गया है। रणबीर कपूर ने भी खरीदा प्रीमियम प्लॉट अभिनेता रणबीर कपूर ने भी अयोध्या के लग्जरी रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने सरयू टाउनशिप में लगभग 2,134 वर्ग फुट का प्रीमियम प्लॉट खरीदा है, जिसकी कीमत ₹3.31 करोड़ बताई गई है। बताया जाता है कि यह निवेश उन्होंने अपनी फिल्म 'रामायण' में भगवान राम की भूमिका निभाने से पहले किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने इस निवेश को परिवार के लिए दीर्घकालिक संपत्ति और विशेष भावनात्मक महत्व वाला निर्णय बताया है। राम मंदिर के बाद अयोध्या बना निवेश का नया केंद्र राम मंदिर के उद्घाटन के बाद अयोध्या में रियल एस्टेट, होटल, हॉस्पिटैलिटी और पर्यटन से जुड़े क्षेत्रों में तेजी से निवेश बढ़ा है। शहर में लग्जरी आवासीय परियोजनाओं के साथ-साथ व्यावसायिक विकास भी तेज़ी से हो रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े बदलाव अयोध्या को वैश्विक धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जा रहा है। प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं: महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन बेहतर सड़क और एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी प्रस्तावित नमो भारत कॉरिडोर सहित विभिन्न परिवहन परियोजनाएं इन परियोजनाओं के कारण अयोध्या का रियल एस्टेट बाजार निवेशकों और डेवलपर्स के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।
वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म Goldman Sachs भारतीय शेयर बाजार को लेकर आशावादी नजर आ रही है। फर्म का अनुमान है कि आने वाले समय में निफ्टी 50 इंडेक्स 26,500 अंक तक पहुंच सकता है, जो मौजूदा स्तर से करीब 9.5% की बढ़त दर्शाता है। ब्रोकरेज का मानना है कि घरेलू आर्थिक संकेतकों में सुधार और विदेशी निवेशकों की संभावित वापसी भारतीय बाजार को नई मजबूती दे सकती है। क्यों सकारात्मक है Goldman Sachs? Goldman Sachs के अनुसार भारत के बाजार के लिए कई प्रमुख संकेतक बेहतर हो रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से: कमोडिटी कीमतों में नरमी रुपये की अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में बेहतर कॉर्पोरेट नतीजों की उम्मीद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की संभावित वापसी ब्रोकरेज का कहना है कि इस वर्ष विदेशी निवेशकों की बिकवाली काफी रही है, लेकिन अब यह दौर समाप्त होने की ओर बढ़ सकता है। यदि घरेलू आर्थिक माहौल मजबूत बना रहता है, तो विदेशी निवेश फिर से भारतीय बाजार की ओर लौट सकते हैं। किन सेक्टर्स पर लगाया दांव? Goldman Sachs ने पूरे बाजार की बजाय कुछ चुनिंदा सेक्टर्स को बेहतर प्रदर्शन करने वाला बताया है। ब्रोकरेज की पसंद में शामिल हैं: बैंकिंग सेक्टर टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी ऑयल रिफाइनिंग एवं एनर्जी कंपनियां इसके अलावा फर्म ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे: मिडकैप की तुलना में लार्जकैप शेयरों को प्राथमिकता दें। कृषि आधारित कंपनियों के बजाय पावर यूटिलिटी कंपनियों पर ध्यान दें। निर्यात आधारित कंपनियों की जगह घरेलू कारोबार पर आधारित कंपनियों को चुनें। इन 15 शेयरों पर Goldman Sachs को भरोसा ब्रोकरेज ने ऐसे 15 बड़े शेयरों की सूची जारी की है, जिनमें बाजार की तेजी का सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना जताई गई है। इनमें शामिल हैं: रिलायंस इंडस्ट्रीज HDFC बैंक अडानी पावर अडानी एंटरप्राइजेज कोटक महिंद्रा बैंक NTPC हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (HAL) Eternal (पूर्व में Zomato) पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन अडानी ग्रीन एनर्जी इंटरग्लोब एविएशन (IndiGo) HDFC लाइफ इंश्योरेंस इंडियन होटल्स मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स MakeMyTrip वैल्यू स्टॉक्स की ओर बढ़ सकता है रुझान Goldman Sachs का मानना है कि यदि बाजार में रिकवरी जारी रहती है तो निवेशकों का रुझान महंगे ग्रोथ स्टॉक्स से हटकर उचित मूल्यांकन (Value Stocks) वाले शेयरों की ओर बढ़ सकता है। ऐसे में मजबूत बुनियादी आधार वाली बड़ी कंपनियां बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। निवेशकों के लिए क्या है संकेत? ब्रोकरेज के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति में सुधार, स्थिर व्यापक आर्थिक संकेतक और विदेशी निवेश की वापसी बाजार को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव अल्पकाल में बाजार की चाल को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे माहौल में मजबूत फंडामेंटल वाले लार्जकैप शेयरों और बैंकिंग, टूरिज्म तथा एनर्जी जैसे सेक्टर्स पर नजर रखना निवेशकों के लिए बेहतर रणनीति हो सकती है।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड के मशहूर निर्देशक राजकुमार हिरानी के बेटे वीर हिरानी ने अभिनय की दुनिया में कदम रख दिया है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वेब सीरीज़ 'प्रीतम एंड पेड्रो' से की है। डेब्यू के बाद वीर ने अपने सह-कलाकार अरशद वारसी का विशेष रूप से धन्यवाद देते हुए कहा कि शूटिंग के दौरान उन्होंने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया और आत्मविश्वास बढ़ाया। "अरशद सर ने हर सीन में मेरा साथ दिया" वीर हिरानी ने कहा कि अभिनय की शुरुआत उनके लिए चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन अरशद वारसी ने उन्हें सहज महसूस कराया। उन्होंने बताया, "अरशद सर लगातार मुझे गाइड करते रहे। हर सीन के बाद समझाते थे कि क्या बेहतर किया जा सकता है। उनके साथ काम करना मेरे लिए किसी अभिनय स्कूल से कम नहीं था।" राजकुमार हिरानी ने नहीं दिया कोई विशेष फायदा वीर के डेब्यू को लेकर पहले ही राजकुमार हिरानी स्पष्ट कर चुके थे कि बेटे होने का उन्हें कोई विशेष लाभ नहीं मिला। उन्होंने वीर से दूसरे कलाकारों की तरह ऑडिशन दिलवाया और भूमिका योग्यता के आधार पर ही मिली। वीर ने भी कई ऑडिशन टेप रिकॉर्ड किए और चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही उन्हें यह मौका मिला। विक्की कौशल ने भी की तारीफ अभिनेता विक्की कौशल ने भी वीर हिरानी के अभिनय की सराहना की। उन्होंने कहा कि उन्होंने वीर को 'संजू' के सेट पर एक असिस्टेंट के रूप में काम करते देखा था और अब उन्हें मुख्य भूमिका निभाते देखना बेहद खुशी की बात है। विक्की ने कहा कि वीर ने अपने प्रदर्शन से साबित किया है कि उन्होंने मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। 'प्रीतम एंड पेड्रो' को मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया राजकुमार हिरानी की पहली OTT सीरीज़ 'प्रीतम एंड पेड्रो' को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। साइबर क्राइम और कॉमेडी पर आधारित इस सीरीज़ में अरशद वारसी, वीर हिरानी और विक्रांत मैसी अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। दर्शकों और समीक्षकों ने वीर के आत्मविश्वासपूर्ण अभिनय की भी सराहना की है।
सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 600 से अधिक अंक टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी 24,000 के आसपास कारोबार करता नजर आया। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया। क्यों टूटा शेयर बाजार? मंगलवार को बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से महंगाई और आयात बिल बढ़ने की आशंका रहती है, जिसका असर सीधे शेयर बाजार पर देखने को मिलता है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा दबाव बाजार पर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली का भी असर पड़ा। वैश्विक स्तर पर जोखिम बढ़ने के कारण विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे भारतीय बाजार में दबाव बढ़ा है। वैश्विक बाजारों से भी मिले कमजोर संकेत एशियाई और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कमजोरी का माहौल देखने को मिला। निवेशक फिलहाल वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। इसका असर भारतीय बाजार की कारोबारी शुरुआत से ही दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतें बनी चिंता विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विश्लेषकों के अनुसार, मौजूदा गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक कारकों से प्रभावित है। ऐसे समय में निवेशकों को घबराहट में निर्णय लेने के बजाय बाजार की दिशा और वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रखते हुए लंबी अवधि की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।
आईपीओ बाजार में एक बार फिर निवेशकों को शानदार लिस्टिंग गेन मिला है। राजस्थान के जयपुर स्थित हैंडक्राफ्टेड ज्वैलरी निर्माता Advit Jewels के शेयरों ने शेयर बाजार में दमदार शुरुआत करते हुए पहले ही दिन निवेशकों को करीब 36 फीसदी का मुनाफा दे दिया। कंपनी के शेयर बुधवार को BSE और NSE पर अपने इश्यू प्राइस से काफी ऊपर सूचीबद्ध हुए, जिससे आईपीओ में निवेश करने वाले शेयरधारकों की अच्छी कमाई हुई। किस भाव पर हुई लिस्टिंग? NSE पर Advit Jewels का शेयर ₹188.90 प्रति शेयर पर सूचीबद्ध हुआ। कंपनी का इश्यू प्राइस ₹138 था, यानी शेयर ने लगभग 36.8% प्रीमियम के साथ बाजार में एंट्री की। वहीं BSE पर शेयर ₹187 प्रति शेयर पर लिस्ट हुआ, जो इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 35.5% की बढ़त दर्शाता है। ग्रे मार्केट के अनुमान पर खरी उतरी लिस्टिंग शेयर की लिस्टिंग ग्रे मार्केट की उम्मीदों के अनुरूप रही। लिस्टिंग से पहले कंपनी का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) करीब ₹50 चल रहा था, जिससे संकेत मिल रहे थे कि शेयर लगभग 36% प्रीमियम पर सूचीबद्ध हो सकता है। वास्तविक लिस्टिंग भी लगभग इसी स्तर पर रही। आईपीओ को मिला था जबरदस्त रिस्पॉन्स Advit Jewels के आईपीओ को निवेशकों की ओर से शानदार प्रतिक्रिया मिली थी। आंकड़ों के अनुसार, यह इश्यू कुल मिलाकर 212.63 गुना सब्सक्राइब हुआ। रिटेल निवेशक श्रेणी: 95.30 गुना गैर-संस्थागत निवेशक (NII): 536.38 गुना इतनी मजबूत सब्सक्रिप्शन ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि शेयर की लिस्टिंग दमदार हो सकती है। कंपनी जुटाई गई राशि का क्या करेगी? यह आईपीओ पूरी तरह फ्रेश इश्यू था, जिसमें 1.20 करोड़ इक्विटी शेयर जारी किए गए। इसमें ऑफर फॉर सेल (OFS) का कोई हिस्सा शामिल नहीं था। कंपनी ने बताया है कि आईपीओ से जुटाई गई पूंजी का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए किया जाएगा— वर्किंग कैपिटल की जरूरतें पूरी करने के लिए मौजूदा कर्ज का भुगतान सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए निवेशकों के लिए क्या संकेत? Advit Jewels की मजबूत लिस्टिंग एक बार फिर यह दिखाती है कि जिन कंपनियों के बिजनेस मॉडल और आईपीओ को निवेशकों का अच्छा समर्थन मिलता है, वे लिस्टिंग के दिन बेहतर रिटर्न दे सकती हैं। हालांकि, विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह देते हैं कि केवल लिस्टिंग गेन के आधार पर निवेश का निर्णय लेने के बजाय कंपनी की वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का भी मूल्यांकन करें।
नई दिल्ली: ज्वैलरी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी Advit Jewels का आईपीओ 23 जून से निवेशकों के लिए खुल गया और पहले ही दिन इसे शानदार प्रतिक्रिया मिली। आईपीओ खुलने के शुरुआती तीन घंटों के भीतर ही रिटेल कैटेगरी में यह चार गुना से अधिक सब्सक्राइब हो गया, जिससे निवेशकों के बीच कंपनी को लेकर उत्साह साफ नजर आ रहा है। कंपनी इस पब्लिक इश्यू के जरिए लगभग 165 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। इसके तहत करीब 1.19 करोड़ नए शेयर जारी किए जा रहे हैं। निवेशक इस आईपीओ में 25 जून तक आवेदन कर सकते हैं, जबकि शेयरों की संभावित लिस्टिंग 1 जुलाई को हो सकती है। क्या है प्राइस बैंड और निवेश की शर्तें? Advit Jewels ने अपने आईपीओ का प्राइस बैंड 130 रुपये से 138 रुपये प्रति शेयर तय किया है। एक लॉट में 100 शेयर शामिल हैं। रिटेल निवेशक न्यूनतम एक लॉट और अधिकतम 14 लॉट के लिए आवेदन कर सकते हैं। क्या करती है Advit Jewels? जयपुर स्थित Advit Jewels अपने प्रसिद्ध 'Rambhajo' ब्रांड के तहत हाथ से तैयार की जाने वाली कुंदन, पोल्की, डायमंड और स्टडेड ज्वैलरी का निर्माण और सप्लाई करती है। कंपनी B2B मॉडल के तहत डीलर्स और रिटेलर्स को सेवाएं देने के साथ-साथ कस्टमाइज्ड ऑर्डर पर भी ज्वैलरी तैयार करती है। आईपीओ से जुटाई गई राशि का उपयोग कंपनी अपने कर्ज को कम करने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और अन्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। ग्रे मार्केट में मजबूत संकेत आईपीओ खुलने के साथ ही ग्रे मार्केट में भी Advit Jewels के शेयरों की मांग तेज दिखाई दी। दोपहर 12 बजे तक कंपनी का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) 65 रुपये पहुंच गया था। 138 रुपये के ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर यह लगभग 47 प्रतिशत प्रीमियम दर्शाता है। यदि ग्रे मार्केट का यह रुझान जारी रहता है, तो लिस्टिंग के समय निवेशकों को अच्छा मुनाफा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि GMP केवल एक संकेतक होता है और वास्तविक लिस्टिंग प्रदर्शन बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। एक्सपर्ट्स की राय रिसर्च फर्म Equivision ने इस आईपीओ को 'सब्सक्राइब' रेटिंग दी है। फर्म के अनुसार कंपनी की मजबूत राजस्व वृद्धि, बढ़ती लाभप्रदता और संगठित ज्वैलरी बाजार में मजबूत उपस्थिति इसकी प्रमुख ताकत हैं। साथ ही टियर-1 और टियर-2 शहरों में विस्तार की रणनीति को भी सकारात्मक माना गया है।
Gold-Silver Rate Today: अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो ताजा कीमतों की जानकारी लेना आपके लिए जरूरी है। 23 जून 2026 को सोने की कीमत में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि चांदी के दाम में मामूली गिरावट देखने को मिली है। बाजार के शुरुआती रुझानों के अनुसार, 24 कैरेट सोना 10 रुपये महंगा होकर ₹1,46,520 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी 100 रुपये सस्ती होकर ₹2,49,900 प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही है। सोने की कीमत में मामूली बढ़त आज 24 कैरेट सोने का भाव 10 रुपये बढ़कर ₹1,46,520 प्रति 10 ग्राम हो गया है। वहीं, 22 कैरेट सोना भी 10 रुपये की तेजी के साथ ₹1,34,310 प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है। हालांकि, जून महीने की शुरुआत की तुलना में सोने की कीमत अभी भी लगभग 6 प्रतिशत नीचे बनी हुई है। 24 कैरेट सोने का ताजा भाव (प्रति 10 ग्राम) शहर आज का भाव कल का भाव बदलाव पटना ₹1,46,570 ₹1,46,560 ▲ ₹10 लखनऊ ₹1,46,670 ₹1,46,660 ▲ ₹10 रांची ₹1,46,520 ₹1,46,510 ▲ ₹10 दिल्ली ₹1,46,670 ₹1,46,660 ▲ ₹10 मुंबई ₹1,46,520 ₹1,46,510 ▲ ₹10 कोलकाता ₹1,46,520 ₹1,46,510 ▲ ₹10 चेन्नई ₹1,48,360 ₹1,48,350 ▲ ₹10 चांदी के दाम में आई नरमी सोने के मुकाबले चांदी की कीमत में आज गिरावट दर्ज की गई है। एक किलोग्राम चांदी का भाव 100 रुपये घटकर ₹2,49,900 पर आ गया है। जून महीने में अब तक चांदी की कीमत में करीब 10.75 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। चांदी का ताजा भाव (प्रति किलो) शहर आज का भाव कल का भाव बदलाव पटना ₹2,49,900 ₹2,50,000 ▼ ₹100 लखनऊ ₹2,49,900 ₹2,50,000 ▼ ₹100 रांची ₹2,49,900 ₹2,50,000 ▼ ₹100 दिल्ली ₹2,49,900 ₹2,50,000 ▼ ₹100 मुंबई ₹2,49,900 ₹2,50,000 ▼ ₹100 कोलकाता ₹2,49,900 ₹2,50,000 ▼ ₹100 चेन्नई ₹2,54,900 ₹2,55,000 ▼ ₹100 बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू मांग के आधार पर आने वाले दिनों में सोना और चांदी के दाम में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले ताजा रेट जरूर जांच लें।
नई दिल्ली: लगातार दो दिनों की गिरावट के बाद सोमवार सुबह सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कारोबार शुरू होते ही सोना प्रति 10 ग्राम करीब ₹800 तक उछल गया, जबकि चांदी के दाम में प्रति किलो लगभग ₹4,000 की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस तेजी से निवेशकों और सर्राफा कारोबारियों को राहत मिली है। हाल के दिनों में सोने की कीमतों में आई गिरावट के बाद बाजार में फिर से सकारात्मक माहौल बनता दिखाई दे रहा है। MCX पर क्या रहे भाव? सुबह 9:40 बजे अगस्त डिलीवरी वाला सोना ₹522 की बढ़त के साथ ₹1,47,725 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। वहीं जुलाई डिलीवरी वाली चांदी ₹1,914 की तेजी के साथ ₹2,35,099 प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई। शुरुआती कारोबार में चांदी में करीब ₹4,000 तक का उछाल देखने को मिला। प्रमुख शहरों में आज का सोने का भाव शहर 24 कैरेट 22 कैरेट 18 कैरेट दिल्ली ₹1,46,660 ₹1,34,450 ₹1,10,030 मुंबई ₹1,46,510 ₹1,34,300 ₹1,09,880 कोलकाता ₹1,46,510 ₹1,34,300 ₹1,09,880 चेन्नई ₹1,48,360 ₹1,35,990 ₹1,13,690 लखनऊ ₹1,46,660 ₹1,34,450 ₹1,10,030 कानपुर ₹1,46,660 ₹1,34,450 ₹1,10,030 पटना ₹1,46,560 ₹1,34,350 ₹1,09,930 जयपुर ₹1,46,660 ₹1,34,450 ₹1,10,030 इंदौर ₹1,46,560 ₹1,34,350 ₹1,09,930 भोपाल ₹1,46,560 ₹1,34,350 ₹1,09,930 अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेजी वैश्विक बाजार में हाजिर सोना 0.9 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,197.41 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं चांदी की कीमतों में 1.8 प्रतिशत की तेजी आई और यह 66.10 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती दिखी। आगे कैसी रह सकती है चाल? विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों, महंगाई और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े फैसले आने वाले समय में सोने और चांदी की दिशा तय करेंगे। अगर ब्याज दरों में बढ़ोतरी होती है, तो सोने की लंबी अवधि की तेजी पर दबाव बन सकता है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बनी रह सकती है।
सोने और चांदी की कीमतों में शुक्रवार, 19 जून 2026 को बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में शुरुआती कारोबार के दौरान जहां चांदी के दाम में करीब ₹8,000 तक की गिरावट देखने को मिली, वहीं सोना भी लगभग ₹3,000 तक सस्ता हो गया। सर्राफा बाजार में भी दोनों कीमती धातुओं के भाव नीचे आए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा वर्ष के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेत दिए जाने के बाद निवेशकों का रुख बदला है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। एमसीएक्स पर चांदी में भारी गिरावट एमसीएक्स पर 3 जुलाई डिलीवरी वाली चांदी पिछले कारोबारी सत्र में ₹2,37,572 प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। शुक्रवार को इसकी शुरुआत ₹2,32,371 से हुई और शुरुआती कारोबार में यह गिरकर ₹2,29,561 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। सुबह करीब 10 बजे चांदी ₹6,944 यानी 2.92 फीसदी की गिरावट के साथ ₹2,30,628 प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखाई दी। सोने का भाव भी फिसला 5 अगस्त डिलीवरी वाला सोना पिछले सत्र में ₹1,49,309 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। शुक्रवार को इसकी शुरुआत ₹1,47,175 पर हुई और शुरुआती कारोबार में यह गिरकर ₹1,46,252 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। सुबह 10 बजे के आसपास सोना करीब ₹2,695 यानी 1.8 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹1,46,614 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। प्रमुख शहरों में आज का गोल्ड रेट शहर 24 कैरेट 22 कैरेट 18 कैरेट दिल्ली ₹1,46,010 ₹1,33,850 ₹1,09,540 मुंबई ₹1,45,860 ₹1,33,700 ₹1,09,390 कोलकाता ₹1,45,860 ₹1,33,700 ₹1,09,390 चेन्नई ₹1,48,040 ₹1,35,700 ₹1,13,500 लखनऊ ₹1,46,010 ₹1,33,850 ₹1,09,540 कानपुर ₹1,46,010 ₹1,33,850 ₹1,09,540 पटना ₹1,45,910 ₹1,33,750 ₹1,09,440 जयपुर ₹1,46,010 ₹1,33,850 ₹1,09,540 इंदौर ₹1,45,910 ₹1,33,750 ₹1,09,440 भोपाल ₹1,45,910 ₹1,33,750 ₹1,09,440 सर्राफा बाजार में भी आई गिरावट सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना ₹3,650 सस्ता होकर ₹1,45,860 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत ₹3,350 घटकर ₹1,33,700 हो गई। 18 कैरेट सोना ₹2,740 की गिरावट के बाद ₹1,09,390 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है। दूसरी ओर, चांदी का भाव ₹10,000 घटकर ₹2,50,000 प्रति किलोग्राम रह गया है। क्या खरीदारी का सही समय है? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में आई यह गिरावट खरीदारों के लिए एक अवसर हो सकती है, लेकिन निवेश करने से पहले बाजार की चाल और वैश्विक संकेतों पर नजर रखना जरूरी है।
Turtlemint Fintech IPO: इंश्योरटेक सेक्टर की प्रमुख कंपनी टर्टलमिंट फिनटेक सॉल्यूशंस का बहुप्रतीक्षित आईपीओ 19 जून 2026 से आम निवेशकों के लिए खुलने जा रहा है। कंपनी ने इस सार्वजनिक निर्गम का आकार 883 करोड़ रुपये रखा है और इसके लिए प्रति शेयर 144 रुपये से 152 रुपये का प्राइस बैंड तय किया गया है। वहीं, एंकर निवेशकों के लिए बोली प्रक्रिया 18 जून को शुरू हो चुकी है। ₹883 करोड़ का है आईपीओ टर्टलमिंट फिनटेक इस आईपीओ के जरिए कुल 883 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। इसमें: 660.72 करोड़ रुपये के नए शेयर (Fresh Issue) जारी किए जाएंगे। 221.95 करोड़ रुपये के शेयर ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत बेचे जाएंगे। ऊपरी प्राइस बैंड 152 रुपये के आधार पर कंपनी का अनुमानित मार्केट वैल्यूएशन करीब 4,500 करोड़ रुपये आंका गया है। कब तक लगा सकेंगे बोली? रिटेल निवेशकों के लिए यह इश्यू: ओपनिंग डेट: 19 जून 2026 क्लोजिंग डेट: 23 जून 2026 तक खुला रहेगा। वहीं एंकर निवेशकों ने 18 जून को ही इसमें निवेश के लिए बोली लगाई। न्यूनतम कितना निवेश करना होगा? कंपनी ने आईपीओ का लॉट साइज 98 शेयर तय किया है। एक शेयर का अधिकतम मूल्य: ₹152 एक लॉट का निवेश: ₹14,896 निवेशकों को कम से कम एक लॉट के लिए आवेदन करना होगा, जबकि इसके बाद उसी के गुणक में अतिरिक्त बोली लगाई जा सकेगी। किस वर्ग के लिए कितना आरक्षण? इश्यू में विभिन्न निवेशक श्रेणियों के लिए आरक्षण इस प्रकार है: 75% – क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) 15% – नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) 10% – रिटेल निवेशक ग्रे मार्केट में कैसा है माहौल? ग्रे मार्केट में फिलहाल टर्टलमिंट आईपीओ का प्रीमियम लगभग 1.32% बताया जा रहा है। मौजूदा संकेतों के अनुसार, ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर शेयर में लगभग ₹2 प्रति शेयर की संभावित लिस्टिंग गेन का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, जीएमपी समय के साथ बदल सकता है और इसे निवेश का एकमात्र आधार नहीं माना जाना चाहिए। महत्वपूर्ण तारीखें इवेंट तारीख एंकर बुक ओपन 18 जून 2026 आईपीओ ओपन 19 जून 2026 आईपीओ क्लोज 23 जून 2026 अलॉटमेंट 24 जून 2026 रिफंड प्रक्रिया 25 जून 2026 डीमैट अकाउंट में शेयर क्रेडिट 25 जून 2026 लिस्टिंग 29 जून 2026 क्या काम करती है Turtlemint? टर्टलमिंट एक टेक्नोलॉजी-आधारित इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म है, जो ग्राहकों, इंश्योरेंस कंपनियों और डिजिटल पार्टनर्स को एक मंच पर जोड़ता है। 30 सितंबर 2025 तक: कंपनी के पास 6 लाख से अधिक डिजिटल पार्टनर्स थे। इनमें करीब 4.85 लाख PoSPs (Point of Sales Persons) शामिल थे। अप्रैल 2022 से सितंबर 2025 के बीच कंपनी ने 1.97 करोड़ इंश्योरेंस पॉलिसियों के वितरण में मदद की।
नई दिल्ली: घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला। लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में दोनों कीमती धातुओं में तेजी दर्ज की गई। एमसीएक्स (MCX) पर शुरुआती कारोबार में सोना करीब ₹3,300 महंगा हुआ, जबकि चांदी में ₹7,200 तक की तेज बढ़त देखने को मिली। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते और वैश्विक बाजारों में बढ़ी हलचल का असर कीमती धातुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। MCX पर सोने का ताजा भाव 5 अगस्त डिलीवरी वाला सोना पिछले कारोबारी सत्र में ₹1,50,528 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। सोमवार को यह: ₹1,53,829 पर खुला शुरुआती कारोबार में ₹3,301 की तेजी के साथ ऊपर पहुंचा सुबह 10:10 बजे के आसपास ₹1,53,245 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता देखा गया चांदी में जबरदस्त उछाल 3 जुलाई डिलीवरी वाली चांदी का पिछला बंद भाव ₹2,46,186 प्रति किलोग्राम था। आज: यह ₹2,51,563 पर खुली शुरुआती कारोबार में ₹2,53,345 प्रति किलो तक पहुंच गई सुबह 10:10 बजे लगभग ₹2,52,486 प्रति किलो पर ट्रेड कर रही थी पिछले तीन दिनों में चांदी की कीमत में करीब ₹18,000 प्रति किलो की तेजी दर्ज की गई है। सर्राफा बाजार में सोने-चांदी के भाव गुड रिटर्न्स के अनुसार: 24 कैरेट सोना: ₹1,51,530 प्रति 10 ग्राम 22 कैरेट सोना: ₹1,38,900 प्रति 10 ग्राम 18 कैरेट सोना: ₹1,13,650 प्रति 10 ग्राम चांदी: ₹1,65,000 प्रति किलो प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव शहर 24 कैरेट सोना दिल्ली ₹1,51,680 मुंबई ₹1,51,530 कोलकाता ₹1,51,530 चेन्नई ₹1,53,590 लखनऊ ₹1,51,680 पटना ₹1,51,580 जयपुर ₹1,51,680 भोपाल ₹1,51,680 अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेजी वैश्विक बाजार में भी कीमती धातुओं में मजबूती देखी गई। स्पॉट गोल्ड: 2% बढ़कर $4,304.11 प्रति औंस यूएस गोल्ड फ्यूचर (अगस्त): 2% बढ़कर $4,325.20 प्रति औंस स्पॉट सिल्वर: 3.1% उछलकर $70.07 प्रति औंस निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक घटनाक्रम, डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों की नीतियां आने वाले दिनों में सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में निवेश से पहले बाजार की दिशा और विशेषज्ञों की सलाह पर ध्यान देना जरूरी है।
नई दिल्ली: सोने और चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट का सिलसिला जारी है। गुरुवार, 11 जून 2026 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। वहीं घरेलू बाजार में भी दोनों कीमती धातुओं के दाम में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। महंगाई और लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर सोने और चांदी की कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्या है स्थिति? स्पॉट गोल्ड कारोबार के दौरान 21 नवंबर के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। सोने की कीमत 0.2 फीसदी गिरकर 4,063.87 डॉलर प्रति औंस रही, जबकि स्पॉट सिल्वर 0.9 फीसदी की गिरावट के साथ 63.15 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती दिखी। एमसीएक्स पर सोना और चांदी घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स में भी गिरावट दर्ज की गई। 5 अगस्त डिलीवरी वाला सोना 1,48,017 रुपये प्रति 10 ग्राम से फिसलकर 1,46,444 रुपये तक पहुंच गया। 3 जुलाई डिलीवरी वाली चांदी 2,35,505 रुपये प्रति किलोग्राम से गिरकर 2,30,493 रुपये तक आ गई। प्रमुख शहरों में आज का सोने का भाव शहर 24 कैरेट 22 कैरेट 18 कैरेट दिल्ली ₹1,45,790 ₹1,33,650 ₹1,09,380 मुंबई ₹1,45,640 ₹1,33,500 ₹1,09,230 कोलकाता ₹1,45,640 ₹1,33,500 ₹1,09,230 चेन्नई ₹1,47,280 ₹1,35,000 ₹1,13,100 लखनऊ ₹1,45,790 ₹1,33,650 ₹1,09,380 पटना ₹1,45,690 ₹1,33,550 ₹1,09,380 जयपुर ₹1,45,790 ₹1,33,650 ₹1,09,380 भोपाल ₹1,45,690 ₹1,33,550 ₹1,09,280 सर्राफा बाजार में भी बड़ी गिरावट गुड रिटर्न्स के अनुसार, 24 कैरेट सोना ₹2,130 सस्ता होकर ₹1,45,640 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। 22 कैरेट सोने में ₹1,950 की गिरावट आई और इसका भाव ₹1,33,500 प्रति 10 ग्राम रह गया। 18 कैरेट सोना ₹1,600 टूटकर ₹1,09,230 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी का भाव करीब ₹2,50,000 प्रति किलोग्राम के आसपास बना हुआ है। सोने और चांदी की कीमतों में आई इस गिरावट से खरीदारों को राहत मिल सकती है। हालांकि निवेशकों की नजर अब वैश्विक घटनाक्रम और अमेरिकी ब्याज दरों से जुड़े संकेतों पर बनी हुई है।
नई दिल्ली: 10 जून 2026 को घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुरुआती कारोबार के दौरान चांदी के दाम में करीब ₹4,500 की गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोना लगभग ₹2,900 तक सस्ता हो गया। कीमती धातुओं में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक कमोडिटी बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है। क्यों गिरे सोना और चांदी के दाम? विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इससे वैश्विक महंगाई बढ़ने और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की आशंका बढ़ गई है। उच्च ब्याज दरों का माहौल आमतौर पर सोने और चांदी जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों पर दबाव बनाता है। इसी वजह से निवेशकों की बिकवाली बढ़ी और दोनों कीमती धातुओं में गिरावट दर्ज की गई। MCX पर शुरुआती कारोबार में बड़ी गिरावट चांदी: करीब ₹4,500 की गिरावट सोना: लगभग ₹2,900 सस्ता हालांकि, दिनभर के कारोबार के दौरान कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है और अंतिम बंद भाव शुरुआती स्तर से अलग हो सकते हैं। निवेशकों के लिए क्या है संकेत? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में: पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, और डॉलर की चाल सोना और चांदी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। यदि वैश्विक तनाव और बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग बढ़ने से कीमती धातुओं में फिर से तेजी भी लौट सकती है।
कीमती धातुओं की कीमतों में गुरुवार, 4 जून 2026 को मामूली नरमी देखने को मिली है। सोने और चांदी दोनों के दामों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि कीमतों में बदलाव बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन निवेशकों और आभूषण खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए ताजा रेट जानना जरूरी है। सोने की कीमत में कितनी आई गिरावट? आज 24 कैरेट सोने की कीमत 10 रुपये घटकर 1,56,210 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है। वहीं 22 कैरेट सोना भी 10 रुपये सस्ता होकर 1,43,190 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कमजोरी सोने को सहारा दे रही है, जबकि घरेलू बाजार में फिलहाल सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव (प्रति 10 ग्राम) शहर आज का भाव पटना ₹1,56,260 लखनऊ ₹1,56,360 कोलकाता ₹1,56,210 मुंबई ₹1,56,210 दिल्ली ₹1,56,360 चेन्नई ₹1,58,170 चांदी की कीमत में भी नरमी चांदी के दाम में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई है। आज एक किलोग्राम चांदी 100 रुपये सस्ती होकर 2,79,900 रुपये पर पहुंच गई है। हालांकि वैश्विक बाजार में चांदी की कीमतों में मजबूती बनी हुई है, लेकिन घरेलू बाजार में फिलहाल दबाव देखने को मिल रहा है। प्रमुख शहरों में चांदी का भाव (प्रति किलोग्राम) शहर आज का भाव पटना ₹2,79,900 लखनऊ ₹2,79,900 कोलकाता ₹2,79,900 मुंबई ₹2,79,900 दिल्ली ₹2,79,900 चेन्नई ₹2,89,900 आगे क्या रह सकता है रुख? अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,450 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार कर रहा है, जबकि चांदी भी मजबूत स्थिति में बनी हुई है। आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा कई वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगी, जिनमें डॉलर की चाल, ब्याज दरों से जुड़े संकेत और निवेशकों की मांग प्रमुख हैं। फिलहाल घरेलू बाजार में दोनों कीमती धातुओं में केवल मामूली गिरावट दर्ज की गई है, जिससे खरीदारी की योजना बना रहे लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।