Jharkhand Police

Police personnel and parade contingents taking part in the Independence Day full dress rehearsal at Morabadi Ground in Ranchi
रांची में स्वतंत्रता दिवस समारोह की फुल ड्रेस रिहर्सल, मोरहाबादी मैदान में परेड का हुआ अभ्यास

रांची: स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर रांची के मोरहाबादी मैदान में गुरुवार सुबह फुल ड्रेस रिहर्सल किया गया। सुबह करीब 8:45 बजे आयोजित इस रिहर्सल में पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के साथ विभिन्न परेड टुकड़ियों ने हिस्सा लिया। जवानों ने मार्च-पास्ट और परेड का अभ्यास किया। इस दौरान समारोह की तैयारियों को अंतिम रूप देने के साथ सुरक्षा और यातायात व्यवस्था का भी जायजा लिया गया। फुल ड्रेस रिहर्सल के दौरान परेड टुकड़ियों के साथ बैंड टीम ने भी हिस्सा लिया। देशभक्ति की धुनों के बीच जवानों ने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मार्च-पास्ट किया। अधिकारियों ने परेड की पूरी प्रक्रिया को बारीकी से देखा और जहां जरूरी लगा, वहां संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। सुरक्षा व्यवस्था का लिया गया जायजा स्वतंत्रता दिवस समारोह में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रिहर्सल के दौरान समारोह स्थल के अंदर और आसपास सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गयी। पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा से जुड़े इंतजामों की जांच की और आवश्यक तैयारियों का जायजा लिया। इसके अलावा समारोह स्थल पर आने-जाने वाले लोगों और वाहनों को लेकर यातायात व्यवस्था की भी समीक्षा की गयी। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि समारोह के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो और लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। मंच और दर्शक दीर्घा की भी हुई जांच फुल ड्रेस रिहर्सल के दौरान मुख्य मंच, दर्शक दीर्घा और समारोह स्थल पर की गयी अन्य तैयारियों को भी परखा गया। अधिकारियों ने बैठने की व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम और कार्यक्रम से जुड़े विभिन्न बिंदुओं की समीक्षा की। समारोह को व्यवस्थित तरीके से आयोजित करने के लिए संबंधित विभागों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए। परेड और कार्यक्रम का हुआ अंतिम अभ्यास रिहर्सल के दौरान जवानों और परेड टुकड़ियों ने स्वतंत्रता दिवस के दिन होने वाले कार्यक्रम के अनुसार अभ्यास किया। मार्च-पास्ट से लेकर अन्य निर्धारित गतिविधियों का पूर्वाभ्यास कराया गया। अधिकारियों ने रिहर्सल के माध्यम से यह भी देखा कि कार्यक्रम के दौरान सभी गतिविधियां तय समय और निर्धारित क्रम के अनुसार संचालित हो सकें। स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस की ओर से तैयारियां अंतिम चरण में हैं। फुल ड्रेस रिहर्सल के बाद सुरक्षा, यातायात और समारोह स्थल से जुड़ी व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।  

kalpana अगस्त 13, 2026 0
Villagers surround police and Cobra personnel during an anti-Naxal operation in Patamda
पटमदा में नक्सली अभियान के दौरान पुलिस को ग्रामीणों ने घेरा, दो घंटे बाद छोड़ा

जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम के पटमदा थाना क्षेत्र के बटालुका जंगल में शनिवार सुबह नक्सली अभियान के दौरान उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गयी, जब ग्रामीणों ने पुलिस और कोबरा बटालियन के जवानों को घेर लिया. करीब दो घंटे तक ग्रामीणों ने अभियान दल को घेरे रखा. ग्रामीण पहले पूछताछ के लिए ले जाये गये युधिष्ठिर महतो और अन्य ग्रामीणों को छोड़ने की मांग कर रहे थे. जानकारी के अनुसार, पटमदा थाना की पुलिस और कोबरा बटालियन की टीम शनिवार सुबह करीब सात बजे बटालुका जंगल में नक्सल विरोधी अभियान के लिए निकली थी. इसी दौरान ग्रामीणों को जानकारी मिली कि पुलिस कुछ लोगों को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गयी है. इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण एकजुट हो गये और अभियान दल को घेर लिया. युधिष्ठिर महतो को घर से ले जाने का आरोप ग्रामीणों का आरोप है कि बुधवार को पुलिस बटालुका गांव निवासी युधिष्ठिर महतो को उसके घर से पूछताछ के लिए थाना ले गयी थी. ग्रामीणों के मुताबिक, कई दिन बीतने के बाद भी उसे वापस नहीं छोड़ा गया था. शनिवार को अभियान के दौरान कुछ अन्य ग्रामीणों को भी पूछताछ के लिए ले जाने की बात सामने आयी, जिसके बाद ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गयी. ग्रामीणों ने पुलिस के सामने मांग रखी कि जब तक युधिष्ठिर महतो और पूछताछ के लिए ले जाये गये अन्य ग्रामीणों को नहीं छोड़ा जाता, तब तक अभियान दल को गांव से आगे नहीं जाने दिया जायेगा. ग्रामीणों ने पुलिस पर लगाया परेशान करने का आरोप ग्रामीणों का कहना था कि पुलिस लगातार नक्सलियों की तलाश में अभियान चला रही है, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर गांव के लोगों को पूछताछ के नाम पर परेशान किया जा रहा है. इसी नाराजगी के कारण ग्रामीणों ने अभियान दल को घेरने का फैसला किया. स्थिति को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया. करीब दो घंटे तक चले गतिरोध के बाद वरीय अधिकारियों के निर्देश पर युधिष्ठिर महतो और अन्य ग्रामीणों को छोड़ दिया गया. इसके बाद ग्रामीणों ने पुलिस और कोबरा जवानों को आगे जाने दिया. इसके बाद भी जारी रहा पुलिस का अभियान ग्रामीणों के साथ गतिरोध खत्म होने के बाद पुलिस और कोबरा बटालियन की टीम फिर से बटालुका गांव की ओर रवाना हुई. इलाके में नक्सल गतिविधियों को देखते हुए पुलिस की ओर से अभियान जारी रखा गया. फिलहाल पूरे मामले में पुलिस की ओर से आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आयी है. ग्रामीणों द्वारा पूछताछ के लिए लोगों को ले जाने और बाद में छोड़े जाने को लेकर लगाये गये आरोपों की भी पुष्टि आधिकारिक स्तर पर होना बाकी है.  

kalpana अगस्त 8, 2026 0
Palamu Police Encounter
पलामू में पुलिस-अपराधी मुठभेड़, कुख्यात सुमित चंद्रवंशी के पैर में लगी गोली

पलामू। झारखंड के पलामू जिले में गुरुवार तड़के पुलिस और कुख्यात अपराधी सुमित चंद्रवंशी के बीच मुठभेड़ हो गई। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में सुमित चंद्रवंशी के पैर में गोली लगी। घायल आरोपी को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि पुलिस पूरे इलाके में सर्च अभियान चला रही है।   फायरिंग मामले में थी पुलिस को तलाश   पुलिस के अनुसार, कुछ दिन पहले मेदिनीनगर के टाउन थाना क्षेत्र स्थित कोयल नदी इलाके में हुई फायरिंग में तीन लोग घायल हुए थे। इस मामले का मुख्य आरोपी सुमित चंद्रवंशी था। घटना के बाद से उसकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही थी।   गिरफ्तारी के दौरान छीन लिया पुलिस का हथियार   गुरुवार सुबह मेदिनीनगर टाउन थाना पुलिस ने सदर थाना क्षेत्र के बजराहा इलाके में छापेमारी कर सुमित चंद्रवंशी को पकड़ लिया। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद उसने जवानों का हथियार छीन लिया और भागने की कोशिश की। इस दौरान उसने पुलिस टीम पर फायरिंग भी की।   जवाबी कार्रवाई में लगी गोली   पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की, जिसमें सुमित चंद्रवंशी के पैर में गोली लग गई। घायल होने के बाद उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद पूरे इलाके की घेराबंदी कर पुलिस अन्य संदिग्धों की तलाश में सर्च अभियान चला रही है।   एसपी ने क्या कहा   पलामू के पुलिस अधीक्षक कपिल चौधरी ने बताया कि आरोपी गिरफ्तारी के बाद पुलिस का हथियार लेकर भागने की कोशिश कर रहा था और उसने पुलिसकर्मियों पर गोली चलाई। जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।   पहले भी हो चुकी है मुठभेड़   सुमित चंद्रवंशी मेदिनीनगर टाउन थाना क्षेत्र का रहने वाला है और उस पर एक आपराधिक गिरोह से जुड़े होने का आरोप है। हाल के दिनों में पलामू पुलिस की अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई है। इससे पहले भी एक मुठभेड़ में कुख्यात अपराधी फैज खान पुलिस की जवाबी फायरिंग में घायल हुआ था।

anjali kumari अगस्त 6, 2026 0
DGP Tadasha Mishra
झारखंड पुलिस की पहली महिला डीजीपी तदाशा मिश्रा का दम, नक्सल मोर्चे पर लगातार बड़ी कामयाबी

रांची। झारखंड पुलिस की पहली महिला पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा के नेतृत्व में राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को लगातार बड़ी सफलता मिल रही है। उनके कार्यकाल में कई बड़े नक्सली कमांडरों की गिरफ्तारी, आत्मसमर्पण और एनकाउंटर ने सुरक्षा एजेंसियों के मनोबल को मजबूत किया है। इसी वजह से पुलिस महकमे और आम लोगों के बीच उन्हें झारखंड पुलिस का 'लेडी लक' कहा जाने लगा है।   नक्सल विरोधी अभियान में मिली उल्लेखनीय सफलता   डीजीपी तदाशा मिश्रा के नेतृत्व में झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ के संयुक्त अभियानों में वर्ष 2026 के दौरान अब तक 93 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया, 22 नक्सली मुठभेड़ में मारे गए और 45 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया। हाल ही में 39 लाख रुपये के कुल इनामी छह बड़े कमांडरों समेत 16 सक्रिय माओवादियों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।   राज्य का सबसे बड़ा सामूहिक आत्मसमर्पण   21 मई 2026 को झारखंड के इतिहास का सबसे बड़ा नक्सली आत्मसमर्पण देखने को मिला, जब 27 उग्रवादियों ने पुलिस के सामने हथियार डाल दिए। इनमें भाकपा (माओवादी) और जेजेएमपी के सदस्य शामिल थे। इसके बाद जुलाई में ऑपरेशन 'नवजीवन-II' के तहत 16 और सक्रिय माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। इन अभियानों में बड़ी मात्रा में हथियार और कारतूस भी बरामद किए गए।   सारंडा ऑपरेशन बना बड़ी उपलब्धि   22 जनवरी 2026 को सारंडा के घने जंगलों में चलाए गए अभियान में झारखंड पुलिस ने एक साथ 17 नक्सलियों को मार गिराया। मारे गए उग्रवादियों में करोड़ों रुपये के इनामी शीर्ष कमांडर भी शामिल थे। इस कार्रवाई को राज्य के नक्सल विरोधी अभियान की सबसे बड़ी सफलताओं में गिना जा रहा है।   अपराध और नक्सलवाद पर सख्त रणनीति   तदाशा मिश्रा ने अपने कार्यकाल में नक्सलवाद के साथ-साथ संगठित अपराध पर भी प्रभावी कार्रवाई की है। बोकारो की एसपी रहते हुए उन्होंने कोयला माफिया, रंगदारी और अपहरण जैसे अपराधों पर कड़ा प्रहार किया था। डीजीपी बनने के बाद भी उन्होंने पुलिसिंग को तकनीकी और रणनीतिक रूप से मजबूत करने पर जोर दिया है।   झारखंड की पहली महिला डीजीपी   1994 बैच की आईपीएस अधिकारी तदाशा मिश्रा को 30 दिसंबर 2025 को झारखंड का पूर्णकालिक डीजीपी नियुक्त किया गया। वह इस पद तक पहुंचने वाली राज्य की पहली महिला अधिकारी हैं। उत्कृष्ट सेवाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने नियमों में संशोधन कर उन्हें 2027 तक निश्चित कार्यकाल प्रदान किया। उनके नेतृत्व में पुलिस बल के आंतरिक सुधार, शिकायत निवारण व्यवस्था और समन्वित सुरक्षा अभियानों को भी नई गति मिली है।

anjali kumari जुलाई 31, 2026 0
Prince Khan Gang Arrest
हजारीबाग में प्रिंस खान गिरोह पर पुलिस का शिकंजा, पांच बदमाश हथियार के साथ गिरफ्तार

हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले में पुलिस ने गैंगस्टर प्रिंस खान के आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसके गिरोह से जुड़े पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बड़कागांव थाना क्षेत्र के आराहरा इलाके में हुई मुठभेड़ के दौरान एक आरोपी पुलिस की जवाबी कार्रवाई में घायल हो गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से हथियार, जिंदा कारतूस और मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।   गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई   पुलिस अधीक्षक अमन कुमार ने बताया कि 29 जुलाई को सूचना मिली थी कि प्रिंस खान के सहयोगी युवकों को गिरोह में शामिल कर 'कोयलांचल शांति सेना कुबेर' संगठन का विस्तार कर रहे हैं। इसके बाद बड़कागांव अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अमित आनंद के नेतृत्व में विशेष एसआईटी का गठन किया गया और तकनीकी व खुफिया इनपुट के आधार पर कार्रवाई शुरू की गई।   मुठभेड़ में चली गोलियां, एक आरोपी घायल   जांच के दौरान पुलिस टीम जब आराहरा के बुधना घाटी पुलिया के पास पहुंची तो अपराधियों ने पुलिस पर छह से सात राउंड फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में सैयद मोहम्मद जीशान के पैर में गोली लगी। इसके बाद पुलिस ने उसे समेत कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।   हथियार और कारतूस बरामद   पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से एक देसी पिस्तौल, एक देसी कट्टा, 23 जिंदा कारतूस और पांच मोबाइल फोन बरामद किए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह कोयला क्षेत्रों में लेवी वसूली, दहशत फैलाने और किसी बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था।   मुख्य आरोपी पर दर्ज हैं कई गंभीर मामले   पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार मुख्य आरोपी अरुण कुमार सिंह के खिलाफ हत्या, रंगदारी, आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम समेत करीब आठ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं घायल आरोपी सैयद मोहम्मद जीशान के खिलाफ भी पहले से एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज है।   फरार बदमाशों की तलाश जारी   पुलिस अधीक्षक ने कहा कि इस कार्रवाई से प्रिंस खान गिरोह की गतिविधियों को बड़ा झटका लगा है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। साथ ही गिरोह के नेटवर्क, वित्तीय स्रोतों और सहयोगियों की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि संगठित अपराध और लेवी वसूली के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।

anjali kumari जुलाई 31, 2026 0
सिमडेगा पुलिस द्वारा गिरफ्तार अंतरराज्यीय चोर गिरोह के आरोपी और बरामद सामान
सिमडेगा पुलिस को बड़ी सफलता: अंतरराज्यीय चोर गिरोह का भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार

सिमडेगा। जिले में लगातार बढ़ रही चोरी की घटनाओं के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सिमडेगा पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने अंतरराज्यीय चोर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनकी निशानदेही पर करीब 30 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवरात, नकदी, चोरी में प्रयुक्त बाइक और अन्य सामान बरामद किया गया है। साथ ही झारखंड और छत्तीसगढ़ में हुई पांच चोरी की वारदातों का भी खुलासा हुआ है।   राहुल सिंह के घर हुई चोरी से खुला पूरा मामला   सिमडेगा के पुलिस अधीक्षक श्रीकांत एस. खोटरे ने बताया कि हरिजन टोली निवासी राहुल कुमार सिंह के घर हुई चोरी के मामले में 5 जुलाई 2026 को सदर थाना में कांड संख्या 92/2026 दर्ज किया गया था। जांच के दौरान तकनीकी और मानवीय साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को गिरोह के संबंध में अहम सुराग मिले।   छत्तीसगढ़ में छापेमारी कर दोनों आरोपियों को दबोचा   पुलिस उपाधीक्षक रणवीर सिंह के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में छापेमारी कर अनिकेत टोप्पो (19) और सैफ अली (22) को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने सिमडेगा सहित कई क्षेत्रों में चोरी की घटनाओं में शामिल होने की बात स्वीकार की।   राशन दुकान चोरी का भी हुआ खुलासा   जांच में सामने आया कि आरोपियों ने सिमडेगा थाना क्षेत्र के सलडेगा बरपानी स्थित राशन दुकान में हुई चोरी की वारदात को भी अंजाम दिया था। इस मामले में दर्ज कांड संख्या 87/2026 का भी पुलिस ने सफलतापूर्वक उद्भेदन कर चोरी किया गया राशन बरामद कर लिया है।   झारखंड और छत्तीसगढ़ की कई वारदातों में संलिप्तता स्वीकार   पूछताछ के दौरान आरोपियों ने छत्तीसगढ़ के कुनकुरी और फरसाबहार, तथा झारखंड के गुमला जिले के विभिन्न क्षेत्रों में हुई चोरी की घटनाओं में भी अपनी संलिप्तता स्वीकार की। पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ के कई थानों में पहले से चोरी के मामले दर्ज हैं।   अन्य आरोपियों की तलाश जारी   पुलिस ने अब तक गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार कर कुल पांच चोरी की घटनाओं का खुलासा किया है। गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। इस कार्रवाई में सदर थाना प्रभारी संजीत कुमार, केसरई थाना प्रभारी विनायक पांडेय सहित विशेष टीम के अन्य पुलिसकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 27, 2026 0
Hazaribagh Encounter
हजारीबाग में पुलिस और राहुल दुबे गैंग के बीच मुठभेड़, एक बदमाश के पैर में गोली, दूसरा गिरफ्तार

हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले के केरेडारी थाना क्षेत्र स्थित चंद्रगुप्त कोल परियोजना के बुकरू ट्रांसपोर्टिंग रोड पर शुक्रवार देर रात पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हो गई। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक बदमाश के पैर में गोली लगी, जबकि उसके साथी को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। घायल अपराधी का इलाज शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कड़ी सुरक्षा के बीच चल रहा है।   हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अमन कुमार ने बताया कि दोनों आरोपी कुख्यात राहुल दुबे गिरोह के सक्रिय सदस्य हैं। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि पगार ओपी क्षेत्र में संचालित चंद्रगुप्त कोल खनन परियोजना के ट्रांसपोर्टिंग मार्ग पर कुछ अपराधियों ने फायरिंग कर गैंग का पर्चा छोड़ा है और जंगल की ओर भाग गए हैं।   सूचना के आधार पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अमित आनंद के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर इलाके में सर्च अभियान चलाया गया। तड़के करीब 3:15 बजे बुकरू गांव के जंगल के पास एक बाइक पर सवार दो संदिग्ध दिखाई दिए। पुलिस वाहन को देखते ही दोनों जंगल की ओर भागने लगे।   पुलिस के अनुसार, पीछा किए जाने पर बाइक असंतुलित होकर गिर गई और दोनों आरोपी पैदल जंगल की ओर भागने लगे। इसी दौरान उन्होंने पुलिस टीम पर लगातार तीन से चार राउंड फायरिंग की। पुलिस ने उन्हें आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी, लेकिन दोबारा गोलीबारी होने पर आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की गई। पुलिस की तीन राउंड फायरिंग में एक गोली एक आरोपी के पैर में लगी, जबकि दूसरे को मौके से पकड़ लिया गया।   घायल आरोपी की पहचान बड़कागांव थाना क्षेत्र के चेप खुर्द निवासी मोहम्मद रागीब अफजल के रूप में हुई है, जबकि गिरफ्तार आरोपी जितेंद्र सोनी केरेडारी थाना क्षेत्र के पगार ओपी इलाके का रहने वाला है।   पूछताछ में दोनों आरोपियों ने खुद को राहुल दुबे गिरोह का सदस्य बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि चंद्रगुप्त कोल परियोजना से कथित तौर पर लेवी नहीं मिलने पर कंपनी को धमकाने और दहशत फैलाने के उद्देश्य से ट्रांसपोर्टिंग रोड पर फायरिंग की और गैंग का पर्चा छोड़ा था।   एसपी अमन कुमार ने बताया कि घायल मोहम्मद रागीब अफजल का आपराधिक इतिहास रहा है। वह पहले भी जेल जा चुका है और उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित अन्य मामले दर्ज हैं। वहीं गिरफ्तार आरोपी जितेंद्र सोनी के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। पुलिस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है।

anjali kumari जुलाई 25, 2026 0
लातेहार से सासाराम जा रहे 27 नाबालिगों को पुलिस ने किया रेस्क्यू

पलामू। झारखंड के पलामू जिले में पुलिस ने मानव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 27 नाबालिग लड़के-लड़कियों को सुरक्षित रेस्क्यू किया है। सभी नाबालिग लातेहार जिले के मनिका क्षेत्र के रहने वाले बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन्हें बिहार के सासाराम इलाके में धान रोपाई के काम के लिए ले जाया जा रहा था। हालांकि पुलिस पूरे मामले की जांच मानव तस्करी के दृष्टिकोण से भी कर रही है।   दो थाना क्षेत्रों में एक साथ हुई कार्रवाई पुलिस को मिली गोपनीय सूचना के आधार पर शुक्रवार देर शाम पड़वा और नावाबाजार थाना क्षेत्रों में छापेमारी की गई। पड़वा थाना क्षेत्र से एक वाहन से 14 नाबालिगों को जबकि नावाबाजार थाना क्षेत्र से दूसरे वाहन से 13 नाबालिगों को बरामद किया गया। इस दौरान बिहार के कुछ संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है।   पड़वा थाना प्रभारी अंकित कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर 14 नाबालिगों को सुरक्षित निकाला। वहीं नावाबाजार थाना प्रभारी संजय कुमार यादव ने बताया कि उनके क्षेत्र से 13 नाबालिगों का रेस्क्यू किया गया है।   बाल कल्याण समिति करेगी आगे की कार्रवाई रेस्क्यू के बाद सभी नाबालिगों को सुरक्षा के मद्देनजर अलग-अलग संस्थानों में भेजा गया है। नाबालिग लड़कियों को सखी वन स्टॉप सेंटर और लड़कों को बाल गृह भेजा गया है। बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को भी मामले की जानकारी दे दी गई है। सीडब्ल्यूसी सदस्य रवि शंकर ने बताया कि सभी बच्चों की काउंसलिंग और सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही उनके परिजनों को भी सूचना दी जा रही है।   पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बच्चों को मजदूरी के लिए वैध रूप से ले जाया जा रहा था या इसके पीछे मानव तस्करी का कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है। हिरासत में लिए गए संदिग्धों से पूछताछ जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0
DGP Tadasha Mishra
झारखंड पुलिस के 153 आश्रितों को मिलेगी अनुकंपा पर नौकरी, समिति ने दी मंजूरी

रांची। झारखंड पुलिस सेवा के दौरान जान गंवाने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के परिवारों को बड़ी राहत देते हुए पुलिस मुख्यालय ने 153 आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति देने का फैसला किया है। डीजीपी तदाशा मिश्रा के निर्देश पर गठित अनुकंपा समिति की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसका उद्देश्य दिवंगत पुलिसकर्मियों के आश्रितों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना और उनके परिवारों को सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराना है।   163 मामलों की समीक्षा, 153 को मिली स्वीकृति पुलिस मुख्यालय में आयोजित अनुकंपा समिति की बैठक में कुल 163 मामलों पर विचार किया गया। समीक्षा के बाद 153 मामलों को मंजूरी दी गई, जबकि चार मामलों को विभिन्न कारणों से फिलहाल लंबित रखा गया। वहीं, तीन आवेदन नियमों के अनुरूप नहीं पाए जाने पर अस्वीकार कर दिए गए। पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि सभी मामलों की जांच निर्धारित नियमों के तहत की गई।   योग्यता के अनुसार विभिन्न पदों पर होगी नियुक्ति समिति की अनुशंसा के आधार पर चयनित आश्रितों को उनकी शैक्षणिक योग्यता और पात्रता के अनुसार विभिन्न पदों पर नियुक्त किया जाएगा। इनमें 66 कॉन्स्टेबल, 62 बाल आरक्षी, 24 महिला आरक्षी और एक फायरमैन ड्राइवर का पद शामिल है। विभाग का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी कर चयनित अभ्यर्थियों को पदस्थापित किया जाएगा।   एडीजी मुख्यालय की अध्यक्षता में हुई बैठक अनुकंपा समिति की बैठक एडीजी (मुख्यालय) मनोज कौशिक की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में जैप डीआईजी कार्तिक एस, स्पेशल ब्रांच डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा, सीआईडी डीआईजी चंदन कुमार झा तथा एसपी (गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवा) सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल हुए। पुलिस मुख्यालय का मानना है कि यह निर्णय न केवल दिवंगत पुलिसकर्मियों के परिवारों को आर्थिक संबल देगा, बल्कि पुलिस बल के जवानों और उनके परिजनों में भरोसा भी मजबूत करेगा कि सेवा के दौरान किसी अप्रिय घटना की स्थिति में उनके परिवार को विभाग का सहयोग और सुरक्षा मिलेगी।

abhishek singh जुलाई 9, 2026 0
Tamar Murder Case
प्रेमी संग नई जिंदगी की चाह में पत्नी बनी पति की कातिल, 17 दिन बाद खुला तमाड़ हत्याकांड

रांची। झारखंड के रांची जिले के तमाड़ क्षेत्र में हुए सनसनीखेज हत्याकांड का पुलिस ने 17 दिनों बाद खुलासा करने का दावा किया है। 19 जून को बुंडू थाना क्षेत्र के तेतरटांड़ जंगल से मिली सिरकटी और आंशिक रूप से जली लाश की गुत्थी सुलझाते हुए पुलिस ने मृतक की पत्नी और उसके कथित प्रेमी को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि प्रेमी से शादी करने की चाह में पत्नी ने अपने पति की हत्या की साजिश रची थी।   पहचान मिटाने के लिए सिर काटकर जलाया शव पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान तमाड़ थाना क्षेत्र के मांझीडीह निवासी संजय लोहरा के रूप में हुई। हत्या के बाद आरोपियों ने शव की पहचान छिपाने के लिए पहले सिर धड़ से अलग किया, फिर धड़ को जलाकर जंगल में फेंक दिया। सिर को अलग स्थान पर जमीन में दफना दिया गया, जिससे पुलिस को कोई सुराग न मिल सके। बिना सिर के शव मिलने के कारण यह मामला पुलिस के लिए ब्लाइंड मर्डर बन गया था।   आरोपियों की निशानदेही पर मिला कटा हुआ सिर गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में आरोपियों ने अपराध स्वीकार किया। उनकी निशानदेही पर तमाड़ थाना क्षेत्र के सुंदरडीह स्थित रानी वन में जमीन के भीतर दबाकर रखा गया मृतक का सिर बरामद किया गया। बरामदगी के दौरान एफएसएल टीम ने मौके से वैज्ञानिक साक्ष्य भी जुटाए।   चार आरोपी शामिल, दो अब भी फरार डीएसपी ओमप्रकाश ने बताया कि तकनीकी विश्लेषण, फॉरेंसिक जांच और लगातार छानबीन के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। जांच में चार लोगों की संलिप्तता सामने आई है। पत्नी और उसके कथित प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।   पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल कार भी जब्त कर ली है। अधिकारियों का कहना है कि सभी साक्ष्य जुटाने के बाद न्यायालय में मजबूत आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। इस ब्लाइंड मर्डर केस के खुलासे में अनुसंधान टीम, तकनीकी सेल और एफएसएल की संयुक्त भूमिका रही।

anjali kumari जुलाई 7, 2026 0
IIT Bombay researchers demonstrate an AI-based flood prediction system with high-resolution flood risk mapping.
IIT बॉम्बे ने विकसित किया AI आधारित हाई-प्रिसिजन सिस्टम, अब 30 मीटर स्तर पर मिलेगी बाढ़ की सटीक चेतावनी

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने एक अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम विकसित किया है, जो बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान करने के साथ-साथ 30 मीटर रिजॉल्यूशन पर बाढ़ के पानी की गहराई का भी अनुमान लगा सकता है। यह तकनीक दक्षिण भारत के पश्चिमी घाट क्षेत्र में विकसित की गई है और भविष्य में देश के अन्य बाढ़ प्रभावित इलाकों में भी इसका उपयोग किया जा सकता है। 93% से ज्यादा सटीकता के साथ करता है बाढ़ का अनुमान शोधकर्ताओं के अनुसार, यह AI सिस्टम 93 प्रतिशत से अधिक सटीकता के साथ बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान करने में सक्षम है। यह मॉडल लगभग 55,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करता है, जो कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के तदरी से लेकर तमिलनाडु के कन्याकुमारी तक फैला हुआ है। इस तकनीक का उद्देश्य भारी बारिश के कारण आने वाली अचानक बाढ़ (Flash Flood) से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम करना और समय रहते प्रशासन को सतर्क करना है। सिर्फ बारिश नहीं, कई कारकों का करता है विश्लेषण IIT बॉम्बे की रिसर्च टीम ने इस मॉडल में केवल वर्षा के आंकड़ों पर निर्भर रहने के बजाय कई अन्य कारकों को भी शामिल किया है। इनमें शामिल हैं: सतही जल प्रवाह (Surface Runoff) मिट्टी की नमी भूमि उपयोग (Land Use) जल अवशोषण क्षमता ड्रेनेज सिस्टम शोधकर्ताओं का कहना है कि सतही जल प्रवाह, केवल बारिश की मात्रा की तुलना में बाढ़ का अधिक विश्वसनीय संकेतक साबित हुआ। सैटेलाइट और AI का अनोखा संयोजन इस सिस्टम को तैयार करने के लिए यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के Sentinel-1 Synthetic Aperture Radar (SAR) सैटेलाइट डेटा का उपयोग किया गया। यह रडार तकनीक घने मानसूनी बादलों के बीच भी पृथ्वी की स्पष्ट तस्वीरें लेने में सक्षम है। AI मॉडल ने बाढ़ से पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर पानी से भरे क्षेत्रों की पहचान करना सीखा और उसी आधार पर संभावित बाढ़ की गहराई का अनुमान लगाया। दो चरणों में करता है काम यह AI सिस्टम दो स्तरों पर कार्य करता है: पहले चरण में यह पहचानता है कि कौन-सा क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आने की आशंका रखता है। दूसरे चरण में यह अनुमान लगाता है कि उस स्थान पर पानी कितनी गहराई तक भर सकता है। इससे प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्यों की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल सकती है। अस्पताल, सड़क और स्कूलों की सुरक्षा में होगी मदद 30 मीटर रिजॉल्यूशन वाले हाई-प्रिसिजन मैप्स की मदद से यह पता लगाया जा सकेगा कि बाढ़ के दौरान कौन-कौन से अस्पताल, स्कूल, सड़कें और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे प्रभावित हो सकते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक विशेष रूप से केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों में आपदा प्रबंधन और शहरी नियोजन के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। भविष्य में मुंबई और पूर्वी तट तक होगा विस्तार फिलहाल यह मॉडल पश्चिमी घाट के कम ढलान (7% से कम) वाले क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है। हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि आवश्यक बदलाव और अतिरिक्त डेटा जोड़कर इसे मुंबई और भारत के पूर्वी तटीय क्षेत्रों जैसे जटिल इलाकों में भी लागू किया जा सकता है।  

surbhi जुलाई 7, 2026 0
IG Shailendra Sinha
धनबाद में अपराधियों पर शिकंजा कसने के निर्देश, आईजी शैलेंद्र सिन्हा ने की हाईलेवल समीक्षा

धनबाद। पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) शैलेंद्र कुमार सिन्हा मंगलवार को धनबाद पहुंचे, जहां उन्होंने समाहरणालय में जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण को लेकर समीक्षा बैठक की। बैठक में एसएसपी प्रभात कुमार, सिटी एसपी, ग्रामीण एसपी समेत जिले के अन्य पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। बैठक से पहले एसएसपी प्रभात कुमार ने आईजी का स्वागत किया।   अपराधियों के नेटवर्क को खत्म करना प्राथमिकता बैठक के दौरान आईजी ने संगठित अपराध, रंगदारी, अवैध कारोबार और सक्रिय आपराधिक गिरोहों के खिलाफ लगातार और प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अपराधियों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। समीक्षा बैठक में जिले में लंबित मामलों की जांच, फरार अपराधियों की गिरफ्तारी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए चलाए जा रहे अभियानों की विस्तार से समीक्षा की गई।   संवेदनशील इलाकों में बढ़ेगी निगरानी आईजी शैलेंद्र सिन्हा ने अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने और आम लोगों के बीच सुरक्षा का भरोसा मजबूत करने के लिए सक्रिय पुलिसिंग अपनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस की नियमित गश्त, त्वरित कार्रवाई और खुफिया तंत्र को मजबूत कर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए।   प्रिंस खान पर कार्रवाई जारी बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में आईजी से फरार गैंगस्टर प्रिंस खान द्वारा सांसद ढुल्लू महतो और निरसा विधायक अरूप चटर्जी को कथित धमकी दिए जाने के मामले में सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि प्रिंस खान के खिलाफ पुलिस पहले से लगातार कार्रवाई कर रही है। उसके विरुद्ध कानूनी प्रक्रिया जारी है और उसे कानून के दायरे में लाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।   आईजी ने स्पष्ट किया कि किसी भी अपराधी को जिले की शांति और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि धनबाद पुलिस संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अभियान आगे भी जारी रखेगी और जिले में शांति, सुरक्षा तथा कानून का राज हर हाल में कायम रखा जाएगा।

anjali kumari जुलाई 7, 2026 0
Dhanbad Police Bulldozer Action
धनबाद के वासेपुर में गैंगस्टर प्रिंस खान के ठिकाने पर बुलडोजर, पुलिस ने अवैध निर्माण किया ध्वस्त

धनबाद। झारखंड पुलिस ने संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए धनबाद के वासेपुर में फरार गैंगस्टर हैदर अली उर्फ प्रिंस खान के ठिकाने पर बुलडोजर चलाया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने उसके कथित अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश और पहले से चल रही कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई।   संगठित अपराध पर शिकंजा कसने की मुहिम   धनबाद पुलिस का कहना है कि प्रिंस खान लंबे समय से फरार है और उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी, फायरिंग और आपराधिक धमकी सहित कई गंभीर मामले दर्ज हैं। हाल के दिनों में कथित रंगदारी और धमकी के मामलों के बाद उसके नेटवर्क पर कार्रवाई और तेज कर दी गई है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि गैंग के अन्य सदस्यों और सहयोगियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।   सुरक्षा के बीच चला अभियान   बुलडोजर कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। प्रशासन ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया गया और भविष्य में भी संगठित अपराध के खिलाफ ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।

abhishek singh जुलाई 5, 2026 0
Mission Vatsalya Portal
लापता बच्चों की तलाश होगी तेज, मिशन वात्सल्य पोर्टल से जुड़े झारखंड के सभी थाने

रांची। झारखंड में लापता बच्चों की सुरक्षित घर वापसी के लिए पुलिस ने तकनीक का सहारा लिया है। राज्य के सभी 24 जिलों के थानों को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के मिशन वात्सल्य पोर्टल से जोड़ दिया गया है। सीआईडी की पहल पर लागू की गई इस व्यवस्था के तहत अब झारखंड पुलिस देशभर के लापता और बरामद बच्चों के राष्ट्रीय डेटाबेस से सीधे जुड़ गई है। इससे बच्चों की पहचान, ट्रैकिंग और बरामदगी की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और प्रभावी होगी।   सीसीटीएनएस ऑपरेटर करेंगे राष्ट्रीय रिकॉर्ड से मिलान नई व्यवस्था के तहत सभी थानों के सीसीटीएनएस ऑपरेटर किसी भी बरामद या अज्ञात बच्चे के हुलिए, फोटो और अन्य विवरण का मिलान मिशन वात्सल्य पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड से करेंगे। यह केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘खोया-पाया’ और ‘ट्रैक चाइल्ड’ जैसी प्रणालियों को एक साथ जोड़ता है। इससे अलग-अलग राज्यों की पुलिस और एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने में तेजी आएगी और बच्चों की जल्द पहचान संभव हो सकेगी।   रांची विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आनंद ठाकुर ने कहा रांची विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आनंद ठाकुर ने कहा कि मिशन वात्सल्य पोर्टल झारखंड पुलिस के लिए गेम चेंजर साबित होगा। उनके अनुसार, लापता बच्चों की तलाश में समय सबसे अहम होता है और यह पोर्टल विभिन्न राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाकर बच्चों की सुरक्षित बरामदगी की संभावना को मजबूत करेगा। साथ ही मानव तस्करी जैसी गंभीर घटनाओं पर भी प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी।   सरकारी आंकड़ों के अनुसार सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 से 2025 के बीच झारखंड में 3,025 बच्चे लापता हुए। इनमें से 2,788 बच्चों को बरामद कर लिया गया, जबकि 237 बच्चे अब भी लापता हैं। वर्ष 2025 में अकेले 717 बच्चों के लापता होने के मामले दर्ज हुए। वहीं रांची में जनवरी से जून 2026 के बीच 42 बच्चे लापता हुए, जिनमें से 34 को सुरक्षित बरामद किया जा चुका है। बढ़ते मामलों को देखते हुए सीआईडी ने सभी थानों को पोर्टल का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

anjali kumari जुलाई 4, 2026 0
Jharkhand ATS
झारखंड की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा फेरबदल: अब सीआईडी की निगरानी में काम करेगा एटीएस

आतंकवाद और संगठित अपराधों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस प्रशासन ने बदली रणनीति, एटीएस की कार्यप्रणाली में होगा बदलाव। रांची। झारखंड पुलिस की आंतरिक सुरक्षा रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) तदाशा मिश्रा ने एक औपचारिक आदेश जारी कर राज्य के आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के नियंत्रण में लाने का निर्देश दिया है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य राज्य में बढ़ती आपराधिक गतिविधियों और आतंकी तंत्र को और अधिक प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना है।   एकीकृत जांच और प्रशासनिक नियंत्रण इस नए आदेश के अनुसार, एटीएस अब पूरी तरह से प्रशासनिक और परिचालन (operational) दृष्टिकोण से सीआईडी के दिशा-निर्देशों का पालन करेगी। अभी तक एटीएस जिन भी मामलों की जांच कर रही थी, अब वे सभी सीआईडी की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत संचालित होंगे। इसमें जांच अधिकारियों और पर्यवेक्षकों की नियुक्ति से लेकर केस की प्रगति रिपोर्ट तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया सीआईडी प्रमुख की निगरानी में होगी।   रणनीति के पीछे की वजह झारखंड में वर्ष 2015 में एटीएस का गठन किया गया था, जिसका मूल उद्देश्य स्लीपर सेल का भंडाफोड़ करना, संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी और आतंकी वारदातों को रोकना था। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की पुरानी अधिसूचनाओं का हवाला देते हुए, प्रशासन का मानना है कि एटीएस और सीआईडी के बीच बेहतर तालमेल न केवल केस को सुलझाने में तेजी लाएगा, बल्कि संगठित अपराध के आर्थिक तंत्र को तोड़ने में भी सक्षम होगा।   अधिकारों का स्पष्ट विभाजन हालांकि पूरा प्रशासनिक नियंत्रण सीआईडी के अधीन कर दिया गया है, लेकिन कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में जवाबदेही तय रखी गई है। निर्देश के मुताबिक, आतंकी गतिविधियों से निपटने और विशेष अभियानों के दौरान एटीएस के पुलिस अधीक्षक (SP) अभियान पुलिस महानिरीक्षक (IG) के प्रति जवाबदेह होंगे। वहीं, दैनिक कामकाज और जांच से जुड़ी गोपनीयता और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए वे सीआईडी के साथ मिलकर काम करेंगे।   सुरक्षा परिदृश्य पर प्रभाव विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय राज्य में सुरक्षा के 'अंडरवर्ल्ड' और विदेश से संचालित होने वाले आपराधिक गिरोहों के खिलाफ एक ठोस कदम साबित हो सकता है। प्रशासनिक स्तर पर पुलिस विभागों के बीच समन्वय में आने वाली बाधाओं को दूर कर एक केंद्रीय तंत्र बनाने का प्रयास किया जा रहा है। एटीएस को विशेष रूप से निर्देशित किया गया है कि वे अपनी जांच और ऑपरेशन्स के दौरान उच्च स्तर की गोपनीयता बनाए रखें, क्योंकि आने वाले समय में राज्य की आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियां अधिक जटिल हो सकती हैं। यह पुनर्गठन झारखंड पुलिस के लिए एक नए युग की शुरुआत जैसा है, जहां सुरक्षा एजेंसियों को एक ही छत के नीचे लाकर अपराध के हर स्तर पर वार करने की तैयारी है।

abhishek singh जून 17, 2026 0
Opium Fields Destroyed
अवैध अफीम की खेती पर झारखंड पुलिस का बड़ा प्रहार, तीन साल में 37 हजार एकड़ फसल नष्ट

रांची। झारखंड में अवैध अफीम की खेती और मादक पदार्थों के कारोबार के खिलाफ पुलिस ने पिछले तीन वर्षों में व्यापक अभियान चलाकर बड़ी सफलता हासिल की है। अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 से मई 2026 तक राज्य में लगभग 37 हजार एकड़ में लगी अफीम की फसल नष्ट की गई है। यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।   अभियान के तहत चतरा, खूंटी, रांची, लातेहार, पलामू, हजारीबाग समेत 14 जिलों में विशेष अभियान चलाया गया। पुलिस की कार्रवाई से अफीम तस्करों को 200 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान होने का अनुमान है। केवल जब्त और नष्ट की गई तैयार अफीम, डोडा और पोस्ता की कीमत ही 100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।   खूंटी में सबसे ज्यादा कार्रवाई अवैध अफीम उत्पादन के लिए बदनाम खूंटी जिला इस अभियान का मुख्य केंद्र रहा। पिछले तीन वर्षों में यहां लगभग 17 हजार एकड़ में लगी अफीम की खेती नष्ट की गई, जो राज्य में सबसे अधिक है। वहीं चतरा दूसरे स्थान पर रहा, जहां करीब 7 हजार एकड़ अफीम की फसल नष्ट की गई। पुलिस ने इन जिलों में बड़ी संख्या में तस्करों को गिरफ्तार कर कई मामलों में प्राथमिकी दर्ज की।   500 मुकदमे, 315 से ज्यादा गिरफ्तारियां सीआईडी के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में नारकोटिक्स एक्ट के तहत करीब 500 मामले दर्ज किए गए और 315 से अधिक आरोपियों को जेल भेजा गया। इसके अलावा 84 किलोग्राम तैयार अफीम और 42 हजार किलोग्राम से अधिक डोडा एवं पोस्ता भी जब्त किया गया।   अफीम रोकने के लिए तैयार हुआ मास्टर प्लान राज्य में अफीम की खेती को पूरी तरह खत्म करने के लिए सीआईडी ने नया एक्शन प्लान तैयार किया है। इसके तहत प्रभावित जिलों में "प्री-कल्टीवेशन अभियान" चलाया जाएगा। पूर्व में जहां अफीम की खेती होती थी, उन क्षेत्रों का सत्यापन किया जाएगा ताकि खेती की दोबारा तैयारी को रोका जा सके। इसके साथ ही फरार आरोपियों की गिरफ्तारी, कुर्की-जब्ती की कार्रवाई और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे। पुलिस का कहना है कि अवैध अफीम की खेती करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

Unknown जून 6, 2026 0
धनबाद में प्रिंस खान पर पुलिस का बड़ा एक्शन, कुर्की की तैयारी

धनबाद। कोयलांचल के कुख्यात और लंबे समय से फरार चल रहे अपराधी प्रिंस खान और उसके गुर्गों के खिलाफ धनबाद पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को पुलिस की टीम ने वासेपुर क्षेत्र में बड़ी दबिश दी। अदालत से प्राप्त आदेश के आलोक में पुलिस ने प्रिंस खान और उसके करीबी सहयोगी गोपी खान के घर पर सार्वजनिक उद्घोषणा (इश्तेहार) चस्पा की है। यह कदम अपराधियों को आत्मसमर्पण करने का अंतिम अवसर देने और उसके बाद उनकी संपत्तियों की कुर्की-जब्ती करने की कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।   अदालती आदेश के बाद वासेपुर में पुलिस की बड़ी कार्रवाई धनबाद के वासेपुर स्थित कमरमखदूमी रोड पर शनिवार को पुलिस की हलचल काफी तेज रही। बैंक मोड़ थाना की पुलिस टीम ने भारी सुरक्षा के बीच प्रिंस खान और गोपी खान के आवासों को चिन्हित कर वहां नोटिस चिपकाया। बैंक मोड़ थाना के एएसआई सुनील कुमार रवि ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि ये दोनों आरोपी कई गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित हैं और लगातार पुलिस की पकड़ से बाहर चल रहे हैं। इश्तेहार चस्पा होने के बाद अब पुलिस जल्द ही अदालत से कुर्की-जब्ती का वारंट प्राप्त कर इनकी संपत्तियों को कुर्क करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।   रंगदारी और आर्म्स एक्ट के दर्जनों मामलों में है तलाश प्रिंस खान पर धनबाद के विभिन्न थानों में रंगदारी, हत्या का प्रयास और आर्म्स एक्ट जैसे संगीन अपराधों के दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं। एएसआई सुनील कुमार रवि के अनुसार, विशेष रूप से बैंक मोड़ थाना कांड संख्या 175/2023 और 277/2023 के तहत दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लंबे समय से छापेमारी कर रही है। पुलिस का मानना है कि इस कानूनी प्रक्रिया से फरार चल रहे अपराधियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनेगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर आरोपी न्यायालय या पुलिस के समक्ष उपस्थित नहीं होते हैं, तो उनके घरों की ईंट से ईंट बजा दी जाएगी।   एसएसपी की दोटूक: अपराधियों की धमकियों से न डरें व्यवसायी इस बड़ी कार्रवाई से एक दिन पहले, शुक्रवार को एसएसपी प्रभात कुमार ने जिले की कानून-व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण मासिक अपराध समीक्षा बैठक की थी। इस बैठक में पुलिस कप्तान ने अधिकारियों को लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन और संगठित अपराध के खात्मे के सख्त निर्देश दिए। मीडिया से बातचीत में एसएसपी ने जिले के व्यवसायियों और आम नागरिकों को आश्वस्त किया कि किसी भी अपराधी द्वारा मोबाइल या इंटरनेट के माध्यम से दी जाने वाली धमकियों से घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस हर धमकी को गंभीरता से ले रही है और अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुँचाने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।   केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय और भविष्य की रणनीति प्रिंस खान के विदेश में छिपे होने की आशंकाओं के बीच, धनबाद पुलिस अब केंद्रीय जांच एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है। एसएसपी प्रभात कुमार ने बताया कि प्रिंस खान से जुड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए उच्चस्तरीय रणनीति तैयार की गई है। पुलिस न केवल जमीनी स्तर पर कार्रवाई कर रही है, बल्कि तकनीकी सर्विलांस और अंतरराज्यीय समन्वय के माध्यम से भी अपराधियों पर शिकंजा कस रही है। जिले में भय का माहौल पैदा करने वाले संगठित सिंडिकेट के खिलाफ पुलिस पहले से अधिक आक्रामक और त्वरित कार्रवाई करने की योजना पर काम कर रही है, ताकि कोयलांचल में शांति व्यवस्था बनी रहे।

Unknown अप्रैल 11, 2026 0
Arrested TSPC militants with seized weapons including INSAS rifles and police team in Hazaribagh
क्रांति के नाम पर वसूली! हजारीबाग में TSPC के 8 उग्रवादी गिरफ्तार, हथियारों का जखीरा बरामद

बड़ी वारदात की साजिश नाकाम, पुलिस की त्वरित कार्रवाई से टला खतरा हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (TSPC) के 8 सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की इस कार्रवाई से इलाके में होने वाली संभावित बड़ी घटना को समय रहते टाल दिया गया। बड़ी साजिश की थी तैयारी पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि उग्रवादी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर विशेष टीम गठित कर संदिग्ध इलाकों में सघन जांच अभियान चलाया गया। फिल्मी अंदाज में पीछा कर पकड़े गए आरोपी कार्रवाई के दौरान उरीमारी ओपी क्षेत्र के कोलियरी इलाके में एक संदिग्ध बोलेरो वाहन नजर आया। पुलिस को देखते ही चालक ने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस टीम ने पीछा कर उसे घेर लिया। भागने के दौरान वाहन अनियंत्रित होकर आसवा और गुडकुवा गांव के बीच पुल और पेड़ से टकरा गया। इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर वाहन में सवार सभी संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया। हथियारों के साथ पकड़े गए उग्रवादी तलाशी के दौरान दो आरोपियों के हाथ में इंसास राइफल मिली, जिससे उनके इरादों की गंभीरता साफ हो गई। पुलिस ने मौके से- 2 इंसास राइफल भारी मात्रा में जिंदा कारतूस 1 देसी पिस्टल 1 बोलेरो वाहन 7 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। लातेहार और रांची के रहने वाले आरोपी गिरफ्तार उग्रवादियों की पहचान सुनील मुंडा, विरेंद्र मुंडा, सुरेंद्र मुंडा, लालमोहन मुंडा, अनिल मुंडा, रविंद्र गंझू उर्फ रिंकू, सत्येंद्र गंझू उर्फ संतु और संजय मुंडा के रूप में हुई है। ये सभी आरोपी लातेहार और रांची जिले के निवासी बताए जा रहे हैं। नेटवर्क खंगालने में जुटी पुलिस प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सभी आरोपी टीएसपीसी संगठन से जुड़े हैं और इलाके में सक्रिय होकर वसूली और आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। फिलहाल पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है और उनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
Jharkhand police patrol vehicles
धनबाद पुलिस को मिली 40 नई बोलेरो और 45 बाइक, गश्ती व्यवस्था होगी और मजबूत

धनबाद। धनबाद जिले में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए Jharkhand Police को 40 नई बोलेरो गाड़ियां और करीब 45 नई बाइक मिली हैं। रांची में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ये वाहन जिला पुलिस को सौंपे गए। नए वाहनों के शामिल होने से गश्ती व्यवस्था और त्वरित कार्रवाई की क्षमता बढ़ेगी।   गश्ती व्यवस्था में होगा सुधार पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इन वाहनों का उपयोग कंपोजिट कंट्रोल रूम और उन थानों में किया जाएगा, जहां पहले वाहनों की कमी थी या पुराने वाहन जर्जर हो चुके थे। इससे पुलिस की प्रतिक्रिया समय तेज होगा और अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी।   प्राथमिकता के आधार पर होगा वितरण जिला पुलिस मुख्यालय ने थानों में वाहनों की स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी है। जिन थानों में वाहन कम हैं या पुराने वाहन पूरी तरह खराब हो चुके हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर नए वाहन दिए जाएंगे।   चरणबद्ध तरीके से मिलेगा लाभ नई बोलेरो गाड़ियों को चरणबद्ध तरीके से जिले के विभिन्न थानों और पुलिस इकाइयों में वितरित किया जाएगा। वहीं, नई बाइक मिलने से ग्रामीण और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पुलिस की निगरानी और तेज होगी।   आधुनिक संसाधनों से लैस होगी पुलिस राज्य सरकार की पहल के तहत पुलिस को आधुनिक संसाधनों से लैस किया जा रहा है, ताकि पुलिसिंग को और प्रभावी बनाया जा सके और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित हो। नई गाड़ियां और बाइक इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।

Unknown मार्च 14, 2026 0
Ranchi SSP Rakesh Ranjan inspecting night police patrolling during surprise check in city.
रांची में आधी रात सड़कों पर उतरे SSP राकेश रंजन, औचक निरीक्षण में लापरवाही पकड़ी गई तो अधिकारी सस्पेंड

  अपराध नियंत्रण को लेकर एक्शन मोड में पुलिस झारखंड की राजधानी Ranchi में अपराध पर नियंत्रण और पुलिस की सक्रियता जांचने के लिए SSP Rakesh Ranjan ने आधी रात औचक निरीक्षण किया। 13 मार्च की देर रात वे बिना किसी पूर्व सूचना के शहर की सड़कों पर निकल पड़े और सुरक्षा व्यवस्था व पुलिस पेट्रोलिंग की स्थिति का जायजा लिया।   रात एक बजे शुरू हुआ सरप्राइज निरीक्षण जानकारी के मुताबिक SSP राकेश रंजन करीब रात एक बजे अचानक शहर के अलग-अलग इलाकों में पहुंच गए। उनके इस निरीक्षण की सूचना पहले से किसी भी थाना प्रभारी या पुलिस कर्मियों को नहीं थी। निरीक्षण के दौरान SSP ने कई पेट्रोलिंग प्वाइंट्स पर रुककर वहां तैनात पुलिसकर्मियों की मौजूदगी और उनकी सतर्कता की जांच की। उन्होंने मौके पर पुलिसकर्मियों से ड्यूटी और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी भी ली।   कई संवेदनशील इलाकों का किया दौरा इस दौरान SSP ने शहर के प्रमुख और संवेदनशील इलाकों का दौरा किया। इनमें Birsa Chowk, Ekra Masjid के आसपास का मेन रोड क्षेत्र, Harmu Bypass Road और Argora Chowk शामिल हैं। इन स्थानों पर पुलिस गश्त, बैरिकेडिंग और रात के समय सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति की जांच की गई।   ड्यूटी में लापरवाही पर तत्काल कार्रवाई निरीक्षण के दौरान एक पुलिस पदाधिकारी ड्यूटी में लापरवाही करते हुए पाया गया। इस पर SSP ने तुरंत सख्त कदम उठाते हुए संबंधित अधिकारी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। इस अचानक कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में हलचल मच गई और सभी थाना क्षेत्रों में तैनात पुलिसकर्मी सतर्क हो गए।   आगे भी जारी रहेगा औचक निरीक्षण SSP राकेश रंजन ने साफ कहा कि शहर में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए इस तरह के औचक निरीक्षण आगे भी किए जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि ड्यूटी के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस प्रशासन का मानना है कि ऐसे निरीक्षण से न केवल पुलिसकर्मियों की जवाबदेही बढ़ती है, बल्कि शहर में सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होती है।  

surbhi मार्च 14, 2026 0
Chief Minister Hemant Soren flags off 1477 new vehicles for Jharkhand Police modernization program
झारखंड पुलिस को मिली बड़ी ताकत: 1477 नए वाहनों को CM हेमंत सोरेन ने दिखाई हरी झंडी

  Hemant Soren ने शुक्रवार को झारखंड पुलिस को बड़ी सौगात देते हुए 1477 नए वाहनों को हरी झंडी दिखाकर जिलों के लिए रवाना किया। विधानसभा परिसर से हुए इस कार्यक्रम के साथ ही राज्य में पुलिस को जर्जर गाड़ियों से राहत मिलने की शुरुआत हो गई है। अब थानों में नई चमचमाती गाड़ियां दिखाई देंगी और पुलिस की गश्ती व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत होगी।   628 पेट्रोलिंग वाहन और 849 दोपहिया वाहन शामिल इस बेड़े में कुल 628 पेट्रोलिंग वाहन और 849 दोपहिया वाहन शामिल हैं। सभी पेट्रोलिंग वाहन Mahindra Bolero के बीएस-6 मॉडल हैं, जिन्हें राज्य के विभिन्न जिलों और पुलिस इकाइयों में तैनात किया जाएगा। इनमें से 614 बोलेरो वाहन जिला पुलिस को दिए जाएंगे, जबकि बाकी वाहन क्विक रिस्पांस टीम (QRT) और अन्य विशेष इकाइयों को आवंटित किए जाएंगे। इसे पुलिस आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है और एक बार में इतनी बड़ी संख्या में वाहनों का आवंटन अब तक का सबसे बड़ा बताया जा रहा है।   पहले चरण में हुआ वाहन वितरण राज्य सरकार ने पहले ही 1255 पेट्रोलिंग वाहन और 1697 दोपहिया वाहन खरीदने की मंजूरी दी थी। पहले चरण में अब 628 पेट्रोलिंग वाहन और 849 दोपहिया वाहन जिलों को दिए जा रहे हैं।   12 अत्याधुनिक थानों का भी होगा शिलान्यास वाहन वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री राज्य के 12 नए अत्याधुनिक थाना भवनों का ऑनलाइन शिलान्यास भी करेंगे। सरकार जर्जर थाना भवनों की जगह आधुनिक सुविधाओं से लैस नए थाने बना रही है, ताकि पुलिसकर्मियों को बेहतर कार्य वातावरण मिल सके।   किन जिलों को कितनी बोलेरो गाड़ियां जिला पुलिस के लिए कुल 614 बोलेरो वाहन आवंटित किए गए हैं। इनमें प्रमुख जिलों को मिलने वाली गाड़ियों की संख्या इस प्रकार है: Ranchi – 80   Jamshedpur – 51   Dhanbad – 40   Chaibasa – 40   Bokaro – 39   Giridih – 32   Palamu – 31   Hazaribagh – 28   Deoghar – 28   Gumla – 22   Garhwa – 21   Dumka – 20   Chatra – 19   Seraikela – 19   Latehar – 18   Godda – 17   Simdega – 15   Jamtara – 14   Khunti – 14   Koderma – 14   Lohardaga – 14   Sahibganj – 14   Ramgarh – 13   Pakur – 11

surbhi मार्च 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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