फिल्म को 3.5/5 की रेटिंग दी गई है।
फिल्म की कहानी Spider-Man: No Way Home की घटनाओं के बाद आगे बढ़ती है। Peter Parker अब अपनी जिंदगी का एक नया अध्याय शुरू करता है। दुनिया उसकी असली पहचान भूल चुकी है और वह पूरी तरह Spider-Man की जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करता है।
हालांकि, नई शुरुआत उसके लिए आसान नहीं है। पहचान खोने के साथ-साथ Peter अकेलेपन और भावनात्मक संघर्ष से भी जूझ रहा है। इसी बीच New York City में एक रहस्यमयी नया खतरा सामने आता है, जो उसे एक बार फिर अपनी शक्तियों और हिम्मत की परीक्षा देने पर मजबूर करता है।
इस बार फिल्म का फोकस सिर्फ बड़े एक्शन और MCU के विशाल spectacle पर नहीं है। कहानी Peter के grief, loneliness और identity crisis को ज्यादा जगह देती है।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत Tom Holland का प्रदर्शन है। उन्होंने Peter Parker की थकान, अकेलेपन, भावनात्मक कमजोरी और जिम्मेदारी को पहले से ज्यादा maturity के साथ पेश किया है।
Spider-Man के रूप में भी Holland का वही पुराना charm बरकरार है। उनके किरदार में humor, vulnerability और heroic determination का अच्छा संतुलन देखने को मिलता है। यही वजह है कि Peter Parker और Spider-Man दोनों ही किरदार स्क्रीन पर प्रभावी नजर आते हैं।
Sadie Sink फिल्म की standout performers में शामिल हैं। उनके किरदार को कहानी में एक अलग ऊर्जा और भावनात्मक परत मिलती है। उनका प्रदर्शन कई मौकों पर दर्शकों का ध्यान खींचता है और वह फिल्म के महत्वपूर्ण आकर्षणों में से एक बनकर उभरती हैं।
Zendaya सीमित स्क्रीन टाइम में भी प्रभाव छोड़ती हैं, जबकि Jon Bernthal की मौजूदगी फिल्म में intensity और charisma बढ़ाती है। Mark Ruffalo, Michael Mando, Tramell Tillman और Jacob Batalon समेत supporting cast ने भी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया है।
हालांकि कुछ supporting characters को और ज्यादा screen time मिलता तो कहानी का असर और मजबूत हो सकता था।
Destin Daniel Cretton ने फिल्म के action sequences को Spider-Man की agility और movement के हिसाब से काफी creative रखा है। बड़े पर्दे पर देखने के लिए कई action set pieces खास तौर पर तैयार किए गए महसूस होते हैं।
Cinematography, visual effects और production design फिल्म को polished Marvel experience देते हैं। New York को भी एक grounded लेकिन cinematic अंदाज में दिखाया गया है। Background score एक्शन और emotional moments दोनों को अच्छी तरह support करता है।
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी pacing है। कुछ emotional scenes जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं, खासकर middle act में। इससे कहानी की रफ्तार कुछ समय के लिए धीमी पड़ जाती है।
इसके अलावा कुछ जगहों पर कहानी familiar Marvel formula का सहारा लेती नजर आती है। फिल्म emotional themes पर अच्छा काम करती है, लेकिन कुछ supporting characters को पर्याप्त development नहीं मिल पाता।
यही वजह है कि फिल्म कई जगह प्रभावशाली होने के बावजूद Spider-Man: No Way Home जैसी emotional ऊंचाई तक लगातार नहीं पहुंच पाती।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
बॉलीवुड अभिनेता सुदेश बैरी अपने एक हालिया पॉडकास्ट इंटरव्यू को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें ‘विष्णु अवतार’ तक बताया। वहीं, दूसरी ओर उन्होंने CJP और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचकों पर बेहद तीखी और आपत्तिजनक भाषा में निशाना साधा। उनके बयान से जुड़े कई वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। पीएम मोदी की तुलना भगवान विष्णु से की ‘अकंपनी अक्की’ नाम के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान सुदेश बैरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जिस तरह लोग ईश्वर को देखे बिना उनकी पूजा करते हैं, उसी तरह वह भी पीएम मोदी का सम्मान करते हैं। अभिनेता ने प्रधानमंत्री को ‘विष्णु अवतार’ बताते हुए कहा कि वह उनके पैर धोकर पीना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश और दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। CJP पर तीखे हमले पॉडकास्ट के दौरान सुदेश बैरी ने CJP और उससे जुड़े लोगों पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने पार्टी और उसके आंदोलनकारियों के लिए कई आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग देश को पीछे ले जाने का काम कर रहे हैं। अभिनेता ने यह भी दावा किया कि CJP के अध्यक्ष ने उन्हें फोन कर आंदोलन से जुड़ने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर फोन ब्लॉक कर दिया। बैरी ने कहा कि वह इस राजनीतिक गतिविधि का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे क्लिप सुदेश बैरी के पॉडकास्ट में दिए गए बयानों के कुछ हिस्से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वायरल हो रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद उनके बयान पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग उनके प्रधानमंत्री के समर्थन वाले बयान की चर्चा कर रहे हैं, जबकि कई यूजर्स उनके द्वारा राजनीतिक विरोधियों के लिए इस्तेमाल की गई भाषा पर सवाल उठा रहे हैं। पीएम मोदी के आलोचकों पर भी निशाना अभिनेता ने उन लोगों की भी आलोचना की जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक असहमति अपनी जगह हो सकती है, लेकिन किसी व्यक्ति के खिलाफ गाली-गलौज करना उचित नहीं है। हालांकि, इसी दौरान उन्होंने खुद CJP और उसके समर्थकों के खिलाफ कई बेहद तीखे और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसके कारण उनके बयान को लेकर विवाद और तेज हो गया है। बयान पर बढ़ी राजनीतिक चर्चा सुदेश बैरी का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब देश में राजनीतिक मुद्दों को लेकर सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर तीखी बयानबाजी लगातार चर्चा में रहती है। ऐसे में किसी अभिनेता का किसी प्रधानमंत्री के समर्थन में इस तरह खुलकर सामने आना और साथ ही विरोधी समूह पर व्यक्तिगत टिप्पणियां करना सोशल मीडिया बहस का विषय बन गया है। फिलहाल, वायरल क्लिप्स को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। पूरे मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि वायरल वीडियो के छोटे-छोटे हिस्सों के बजाय अभिनेता के पूरे पॉडकास्ट संदर्भ को देखकर ही उनके बयान का आकलन किया जाए।
मुंबई, एजेंसियां। टीवी अभिनेत्री श्वेता तिवारी एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में हैं। उनके पूर्व पति राजा चौधरी ने एक हालिया इंटरव्यू में दावा किया कि श्वेता के "कई लोगों के साथ रिश्ते थे" और उन्होंने यहां तक कहा कि "हर आदमी के साथ अफेयर था।" हालांकि, ये आरोप राजा चौधरी के व्यक्तिगत दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले पर फिलहाल श्वेता तिवारी की ओर से कोई नई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सीजेन खान का भी लिया नाम राजा चौधरी ने इंटरव्यू में दावा किया कि उन्हें श्वेता और उनके पूर्व सह-कलाकार सीजेन खान के रिश्ते को लेकर भी संदेह था। उन्होंने कहा कि उस समय उन्होंने सीजेन से बात भी की थी और कुछ घटनाओं के बाद उनका भरोसा टूट गया। दूसरी ओर, श्वेता और सीजेन खान पहले ऐसे रिश्तों की खबरों से इनकार कर चुके हैं। सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस राजा चौधरी के बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग उनके आरोपों पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कई यूजर्स का कहना है कि वर्षों पुराने निजी विवादों को सार्वजनिक रूप से दोहराना उचित नहीं है। श्वेता की ओर से नहीं आया नया जवाब फिलहाल श्वेता तिवारी ने राजा चौधरी के ताजा आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इससे पहले भी वह इस तरह की अफवाहों और आरोपों को खारिज कर चुकी हैं। ऐसे में यह मामला फिलहाल केवल पूर्व पति के आरोपों तक सीमित है और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
'बंटवारा 1947' ट्रेलर लॉन्च मुंबई, एजेंसियां। फिल्म 'बंटवारा 1947' के ट्रेलर लॉन्च के दौरान दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी ने अभिनेता बॉबी देओल के साथ काम करने की इच्छा जताई। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्होंने धर्मेंद्र और सनी देओल के साथ काम किया है, अब "बॉबी को भी बोलो, अब तैयार हो जाए।" उनके इस बयान पर कार्यक्रम में मौजूद कलाकारों और दर्शकों ने तालियां बजाईं। देओल परिवार से जुड़ा खास रिश्ता शबाना आजमी ने कहा कि देओल परिवार के साथ उनका लंबे समय से अच्छा रिश्ता रहा है। उन्होंने धर्मेंद्र और सनी देओल के साथ काम करने के अपने अनुभवों को याद करते हुए कहा कि अब वह बॉबी देओल के साथ भी स्क्रीन साझा करना चाहती हैं। उनके इस बयान ने ट्रेलर लॉन्च इवेंट का माहौल हल्का-फुल्का और यादगार बना दिया। 'बंटवारा 1947' में निभाया अहम किरदार राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी 'बंटवारा 1947' भारत के विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म है। इसमें सनी देओल, शबाना आजमी, प्रीति जिंटा, करण देओल और अली फजल अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म 1947 के विभाजन के मानवीय और भावनात्मक पहलुओं को बड़े पर्दे पर दिखाएगी। ट्रेलर को मिल रहा शानदार रिस्पॉन्स फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर इसे सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। दर्शक शबाना आजमी और सनी देओल के अभिनय की सराहना कर रहे हैं, वहीं फिल्म की भावनात्मक कहानी और दमदार प्रस्तुति ने रिलीज से पहले ही दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दी है।