मलयालम सिनेमा के चर्चित अभिनेता Nivin Pauly ने सुपरस्टार Mohanlal के साथ अपनी तुलना को सिरे से खारिज कर दिया है। अपनी आगामी फिल्म Prathichaya के प्रमोशन के दौरान दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा कि “लालेत्तन, लालेत्तन हैं — उनका कोई मुकाबला नहीं।”
‘मोहनलाल अतुलनीय हैं’, निविन पॉली का बयान
मीडिया से बातचीत में निविन पॉली ने कहा कि वह खुद को किसी से तुलना करने के बजाय अपने काम पर ध्यान देना पसंद करते हैं।
उन्होंने कहा, “मैं अपने डायरेक्टर के निर्देशों का पालन करता हूं और सहज तरीके से अभिनय करता हूं। सेट पर कुछ दिन लगते हैं विज़न समझने में, उसके बाद मैं उसी के अनुसार खुद को ढाल लेता हूं। एक बार समझ आ जाए, तो मैं ज्यादा तनाव नहीं लेता।”
उनका यह बयान इंडस्ट्री में उनकी सादगी और पेशेवर सोच को दर्शाता है।
‘Prathichaya’ की कहानी और स्टारकास्ट
Prathichaya एक राजनीतिक थ्रिलर है, जिसका निर्देशन Unnikrishnan B ने किया है। फिल्म की कहानी एक टेक एंटरप्रेन्योर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो राज्य के मुख्यमंत्री का बेटा होता है।
जब एक खतरनाक साजिश में उसके पिता की मौत हो जाती है, तो वह सच्चाई उजागर करने और अपने पिता की विरासत बचाने के लिए संघर्ष करता है। फिल्म में राजनीति, साजिश और रणनीति का गहरा मिश्रण देखने को मिलेगा।
फिल्म में Sharaf U Dheen, Balachandra Menon, Harisree Ashokan, Ann Augustine और Sai Kumar जैसे कई कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। इसका संगीत Justin Varghese ने तैयार किया है।
‘Drishyam 3’ से वापसी करेंगे मोहनलाल
वहीं, Mohanlal जल्द ही अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म Drishyam 3 में नजर आएंगे, जिसका निर्देशन Jeethu Joseph कर रहे हैं। यह फिल्म अब 21 मई 2026 को रिलीज होगी, जो मोहनलाल के जन्मदिन के साथ मेल खाती है।
दोनों सितारों के अलग-अलग रास्ते
जहां एक ओर मोहनलाल अपने अनुभव और दमदार अभिनय के लिए जाने जाते हैं, वहीं निविन पॉली नई पीढ़ी के लोकप्रिय सितारों में शामिल हैं।
निविन का यह बयान यह स्पष्ट करता है कि वह अपनी अलग पहचान बनाए रखना चाहते हैं, बजाय किसी दिग्गज से तुलना के।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनम कपूर ने 29 मार्च 2026 को अपने दूसरे बच्चे को जन्म दिया। इस बार भी उन्होंने बेटे को जन्म दिया। मां बनने के बाद सोनम ने सोशल मीडिया पर अस्पताल से अपनी पहली तस्वीरें शेयर की हैं, जो फैंस और सेलेब्स के बीच तेजी से वायरल हो रही हैं।तस्वीरों में सोनम का ग्लैमरस अंदाज नहीं बल्कि एक मां की सादगी नजर आ रही है। पहली फोटो में सोनम अस्पताल के बेड पर लेटी दिखाई दे रही हैं, अपने नन्हें बेटे को सीने से लगाए हुए। उनके चेहरे पर मुस्कान और आंखों में खुशी साफ झलक रही है। इस दौरान उनके हाथों में ड्रिप लगी हुई है, लेकिन सोनम इस पल का पूरा आनंद ले रही हैं। दूसरी तस्वीर में एक्ट्रेस ब्लैक आउटफिट में दिखाई दीं उनका नो-मेकअप लुक और साधारण बालों की चोटी इस सादगी को और निखार रही है। फोटो में सोनम अपने ब्रेकफास्ट का आनंद ले रही हैं, जिससे यह साफ झलकता है कि फिलहाल उनका फोकस सिर्फ मातृत्व के सुख पर है।सोशल मीडिया पर फैंस और सेलिब्रिटी स्टार्स ने उन्हें बधाई दी है और उनके नए परिवार के स्वागत की खुशी जाहिर की है। सोनम की इस सादगी भरी तस्वीर ने दर्शकों का दिल जीत लिया है, क्योंकि इसमें एक आम मां की भावनाएं और खुशी साफ झलक रही हैं।सोनम ने अपने पहले बेटे का जन्म 20 अगस्त 2022 को किया था और उनका नाम वायु रखा था। अब फैंस बेसब्री से नए बेटे के नामकरण की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।
बॉलीवुड में इन दिनों सीक्वल का ट्रेंड जोरों पर है, और इसी बीच शाहिद कपूर को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शाहिद अपनी हिट साई-फाई रोमांटिक फिल्म ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ के सीक्वल की तैयारी में हैं-और इस बार कहानी में नया ट्विस्ट देखने को मिल सकता है। सीक्वल पर शुरू हुआ काम खबरों के अनुसार, फिल्म के दूसरे पार्ट की स्क्रिप्ट पर तेजी से काम चल रहा है। उम्मीद है कि स्क्रिप्ट अगस्त 2026 तक पूरी हो जाएगी। इसके बाद फिल्म की शूटिंग 2027 की शुरुआत में शुरू हो सकती है। पहले पार्ट को दर्शकों ने इसके यूनिक कॉन्सेप्ट-रोमांस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मेल-के लिए काफी पसंद किया था। स्टारकास्ट में बड़ा बदलाव! रिपोर्ट्स की मानें तो: शाहिद कपूर और कृति सेनन एक बार फिर लीड रोल में नजर आएंगे वहीं इस बार फिल्म में जाह्नवी कपूर की एंट्री हो सकती है अगर यह कास्ट फाइनल होती है, तो शाहिद और जाह्नवी पहली बार स्क्रीन शेयर करेंगे, जो फैंस के लिए बड़ा सरप्राइज होगा। कहानी में क्या होगा खास? सूत्रों के मुताबिक, सीक्वल की कहानी वहीं से आगे बढ़ेगी जहां पहली फिल्म खत्म हुई थी। इस बार टेक्नोलॉजी और रिश्तों के बीच का टकराव और गहराई से दिखाया जा सकता है। बाकी प्रोजेक्ट्स में भी बिजी हैं शाहिद शाहिद कपूर के पास इस वक्त कई बड़े प्रोजेक्ट्स लाइनअप हैं: कॉकटेल 2 – रश्मिका मंदाना और कृति सेनन के साथ (जून 2026 रिलीज) फर्जी सीजन 2 ओ रोमियो रिपोर्ट्स ये भी कहती हैं कि इस सीक्वल का भविष्य काफी हद तक ‘कॉकटेल 2’ की सफलता पर निर्भर करेगा।
बॉलीवुड के मशहूर फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली की आगामी फिल्म ‘Love And War’ को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह बना हुआ है। इस फिल्म में पहली बार रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विक्की कौशल की तिकड़ी एक साथ नजर आएगी। हालांकि फिल्म की रिलीज डेट आगे बढ़ा दी गई है, लेकिन इसकी स्टारकास्ट को लेकर चर्चा लगातार तेज हो रही है। अब सवाल यह है कि इस हाई-प्रोफाइल स्टारकास्ट में सबसे ज्यादा दौलत किसके पास है? आइए विस्तार से जानते हैं। आलिया भट्ट: कमाई में सबसे आगे बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेसेस में शामिल आलिया भट्ट ने अपनी दमदार एक्टिंग और लगातार हिट फिल्मों के जरिए इंडस्ट्री में अलग पहचान बनाई है। फिल्मों के अलावा ब्रांड एंडोर्समेंट और प्रोडक्शन वेंचर्स से भी उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा आता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आलिया भट्ट की कुल नेटवर्थ लगभग 550 करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई है, जो उन्हें इस तिकड़ी में सबसे अमीर बनाती है। रणबीर कपूर: लग्जरी लाइफ और हाई फीस हाल ही में फिल्म ‘Animal’ की सफलता के बाद रणबीर कपूर का स्टारडम और भी बढ़ गया है। वे बॉलीवुड के सबसे ज्यादा फीस लेने वाले एक्टर्स में शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रणबीर कपूर की कुल नेटवर्थ करीब 345 करोड़ रुपये है। खास बात यह है कि कई फिल्मों में उनकी फीस आलिया भट्ट से भी ज्यादा बताई जाती है। विक्की कौशल: दमदार एक्टिंग, बढ़ती कमाई ‘Sam Bahadur’ और ‘Chhaava’ जैसी फिल्मों से विक्की कौशल ने अपनी अभिनय क्षमता साबित की है। उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है और वे इंडस्ट्री में मजबूत पकड़ बना रहे हैं। हालांकि नेटवर्थ के मामले में वे इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति लगभग 41 करोड़ रुपये है। कौन है सबसे ज्यादा अमीर? तीनों सितारों की संपत्ति की तुलना करें तो: नंबर 1: आलिया भट्ट नंबर 2: रणबीर कपूर नंबर 3: विक्की कौशल स्पष्ट तौर पर आलिया भट्ट इस तिकड़ी में सबसे ज्यादा अमीर हैं। वहीं रणबीर कपूर दूसरे और विक्की कौशल तीसरे स्थान पर आते हैं। फिल्म को लेकर बढ़ी उत्सुकता ‘Love And War’ में इन तीनों बड़े सितारों को एक साथ देखना दर्शकों के लिए किसी ट्रीट से कम नहीं होगा। फिल्म की रिलीज भले ही टल गई हो, लेकिन इसकी चर्चा और क्रेज लगातार बढ़ता जा रहा है।