फैशन और ब्यूटी

Is Volufiline Really a Filler Alternative?

Volufiline बना नया ब्यूटी ट्रेंड! क्या सच में बिना इंजेक्शन के मिल सकते हैं भरे हुए होंठ और फुलर अंडर-आईज़?

surbhi जून 25, 2026 0
Skincare serum containing Volufiline applied around lips and under-eye area for a plumping effect
Volufiline Beauty Trend Explained

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक स्किनकेयर इंग्रीडिएंट तेजी से वायरल हो रहा है, जिसका दावा है कि यह बिना किसी इंजेक्शन या कॉस्मेटिक प्रक्रिया के चेहरे को भरा-भरा और युवा दिखा सकता है। इस इंग्रीडिएंट का नाम है Volufiline। TikTok, Instagram और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हजारों यूजर्स इसे अंडर-आई एरिया, गालों और होंठों के आसपास लगाकर अपने पहले और बाद के परिणाम साझा कर रहे हैं। कई लोग इसे "बॉटल में फिलर" तक कह रहे हैं।

लेकिन क्या वास्तव में Volufiline फिलर्स का विकल्प बन सकता है? या फिर यह सिर्फ एक और वायरल ब्यूटी ट्रेंड है? आइए जानते हैं विशेषज्ञों की राय और इसके पीछे की सच्चाई।

क्या है Volufiline?

Volufiline एक ट्रेडमार्क्ड कॉस्मेटिक इंग्रीडिएंट है, जिसे Hydrogenated Polyisobutene और Anemarrhena Asphodeloides Root Extract के मिश्रण से तैयार किया जाता है।

इसका मुख्य सक्रिय तत्व Sarsasapogenin माना जाता है, जिसके बारे में दावा किया जाता है कि यह फैट सेल्स को परिपक्व होने और उनमें लिपिड स्टोर करने की प्रक्रिया को बढ़ावा देता है। सरल भाषा में कहें तो इसका उद्देश्य त्वचा के नीचे मौजूद फैट सेल्स को बड़ा दिखाना है, जिससे चेहरे पर अतिरिक्त वॉल्यूम दिखाई दे सके।

क्या वैज्ञानिक रिसर्च इसके दावों का समर्थन करती है?

कॉस्मेटिक डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. जैश्री शरद के अनुसार, Volufiline को लेकर उपलब्ध अधिकांश रिसर्च प्रयोगशाला में अलग किए गए फैट सेल्स पर की गई है, न कि बड़े पैमाने पर इंसानों पर किए गए क्लीनिकल ट्रायल्स पर।

विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है जो यह साबित करता हो कि Volufiline लंबे समय तक चेहरे की वॉल्यूम बढ़ाने में सक्षम है, खासकर तब जब इसका उपयोग बंद कर दिया जाए।

क्यों मुश्किल है चेहरे के फैट तक पहुंचना?

त्वचा के नीचे मौजूद फैट लेयर डर्मिस से भी नीचे स्थित होती है। अधिकांश स्किनकेयर प्रोडक्ट्स त्वचा की ऊपरी परतों तक ही सीमित रहते हैं।

डॉ. शरद बताती हैं कि जब तक किसी प्रोडक्ट में अत्याधुनिक डिलीवरी टेक्नोलॉजी न हो, तब तक किसी क्रीम या सीरम का चेहरे के फैट सेल्स तक गहराई से पहुंचना और उन्हें बड़ा करना बेहद मुश्किल है।

यही कारण है कि वैज्ञानिक समुदाय अभी तक Volufiline को वास्तविक वॉल्यूम बढ़ाने वाला समाधान नहीं मानता।

फिर लोगों को रिजल्ट क्यों दिखाई देते हैं?

सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे कई "पहले और बाद" की तस्वीरों का सबसे बड़ा कारण हाइड्रेशन हो सकता है।

Volufiline युक्त अधिकांश प्रोडक्ट्स में समृद्ध मॉइस्चराइजिंग तत्व मौजूद होते हैं, जो—

  • त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करते हैं
  • डिहाइड्रेशन लाइन्स को कम करते हैं
  • त्वचा को स्मूद और सॉफ्ट बनाते हैं
  • चेहरे को अस्थायी रूप से भरा-भरा दिखाते हैं

विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रभाव वास्तविक फैट बढ़ने के बजाय त्वचा की बेहतर नमी और कंडीशनिंग का परिणाम होता है।

क्या Volufiline फिलर या Botox का विकल्प है?

सीधा जवाब है—नहीं।

फिलर्स कैसे काम करते हैं?

डर्मल फिलर्स त्वचा के नीचे इंजेक्ट किए जाते हैं और सीधे वॉल्यूम को बढ़ाते या पुनर्स्थापित करते हैं।

Botox कैसे काम करता है?

Botox मांसपेशियों की गतिविधि को अस्थायी रूप से कम करता है, जिससे झुर्रियां कम दिखाई देती हैं।

Volufiline क्या करता है?

Volufiline केवल एक टॉपिकल कॉस्मेटिक इंग्रीडिएंट है, जो मुख्य रूप से त्वचा की नमी और अस्थायी प्लंपिंग में मदद कर सकता है।

फिलहाल ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जो इसे Botox या फिलर्स के बराबर प्रभावी साबित करता हो।

किन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है?

Volufiline उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जो—

  • त्वचा को अधिक हाइड्रेटेड दिखाना चाहते हैं
  • हल्का प्लंपिंग इफेक्ट चाहते हैं
  • इंजेक्शन या कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं से बचना चाहते हैं
  • स्किनकेयर रूटीन में अतिरिक्त मॉइस्चराइजिंग चाहते हैं

हालांकि, ऑयली या एक्ने-प्रोन त्वचा वाले लोगों को हल्के और नॉन-कॉमेडोजेनिक फॉर्मूले चुनने की सलाह दी जाती है।

 

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यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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नीता अंबानी की चिकनकारी साड़ी बनने में लगा एक साल से अधिक समय, लखनऊ की पारंपरिक कला को मिला वैश्विक मंच

मुंबई: रिलायंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन और समाजसेवी नीता अंबानी एक बार फिर भारतीय हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्त्रों को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों के कारण चर्चा में हैं। अपने खास और शालीन फैशन सेंस के लिए पहचानी जाने वाली नीता अंबानी ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में ऐसी साड़ी पहनी, जिसे तैयार करने में एक वर्ष से अधिक समय लगा। नीता अंबानी ने अपने स्वयं के क्राफ्ट-केंद्रित पहल 'स्वदेश इंडिया' की एक विशेष हस्तनिर्मित चिकनकारी साड़ी को चुना। वर्ष 2023 में शुरू किए गए इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य भारत की पारंपरिक कलाओं और शिल्प विरासत को संरक्षित और प्रोत्साहित करना है। एक साल की मेहनत से तैयार हुई चिकनकारी की उत्कृष्ट कृति नीता अंबानी की एंटीक मॉव रंग की शिफॉन साड़ी में लखनऊ की सदियों पुरानी चिकनकारी कला की खूबसूरत झलक देखने को मिली। साड़ी के पारदर्शी कपड़े पर बारीक फ्लोरल जाल डिज़ाइन बनाए गए थे, जो इसकी सुंदरता को और बढ़ा रहे थे। इस शानदार साड़ी को लखनऊ के मास्टर कारीगर अंजनी कश्यप ने पारंपरिक 'दो तार चिकनकारी' तकनीक से हाथों से तैयार किया। इसे बनाने में एक साल से अधिक का समय लगा। साड़ी में जाली, मुर्री, घास पत्ती और बलदा वर्क जैसी जटिल कढ़ाई तकनीकों का इस्तेमाल किया गया, जो लखनऊ की समृद्ध शिल्प परंपरा का प्रतीक हैं। मनीष मल्होत्रा के ब्लाउज ने बढ़ाई खूबसूरती नीता अंबानी ने साड़ी को पारंपरिक निवी स्टाइल में ड्रेप किया और इसके साथ डिजाइनर मनीष मल्होत्रा द्वारा तैयार कस्टम ऑर्गेंजा और लेस ब्लाउज पहना। ब्लाउज की प्लीटेड और रफल डिटेलिंग साड़ी की टेक्सचर और चिकनकारी के साथ बेहद खूबसूरती से मेल खा रही थी। डायमंड ज्वेलरी और मिनिमल मेकअप में दिखीं एलिगेंट अपने मोनोक्रोमैटिक लुक को पूरा करने के लिए नीता अंबानी ने डायमंड ड्रॉप ईयररिंग्स, डायमंड बैंगल, स्टेटमेंट रिंग और एक क्लासिक घड़ी को चुना। ब्यूटी लुक को उन्होंने बेहद सादगी के साथ रखा। कोहल-रिम्ड आंखें, हल्के गुलाबी होंठ और सेंटर-पार्टेड बन में सजे बैंगनी गुलाब उनके पूरे लुक को और भी आकर्षक बना रहे थे। मैचिंग बिंदी ने उनके पारंपरिक अंदाज में चार चांद लगा दिए। नीता अंबानी का यह लुक सिर्फ फैशन नहीं बल्कि भारतीय कारीगरों की कला, धैर्य और विरासत को सम्मान देने का एक शानदार उदाहरण बनकर सामने आया है। यह एक बार फिर साबित करता है कि भारतीय हस्तशिल्प की खूबसूरती और शान वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान रखती है।  

surbhi जून 23, 2026 0
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Summer Skin Care Tips: गर्मी में चेहरे पर भूलकर भी न लगाएं ये 5 चीजें

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मी के मौसम में तेज धूप, पसीना और बढ़ता तापमान त्वचा को अधिक संवेदनशील बना देता है। ऐसे में कई लोग इंस्टेंट ग्लो पाने या दाग-धब्बे हटाने के लिए सोशल मीडिया पर बताए गए घरेलू नुस्खों और ब्यूटी टिप्स को अपनाने लगते हैं। हालांकि, त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ चीजें गर्मियों में चेहरे पर लगाने से फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो सकता है। स्वस्थ और चमकदार त्वचा के लिए सही स्किनकेयर रूटीन अपनाने के साथ-साथ ऐसी चीजों से बचना भी जरूरी है, जो स्किन की प्राकृतिक सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचाती हैं।   इन चीजों से रखें दूरी विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में नींबू का रस सीधे चेहरे पर नहीं लगाना चाहिए। इसमें मौजूद साइट्रिक एसिड त्वचा को धूप के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकता है, जिससे जलन, लालिमा और पिगमेंटेशन की समस्या हो सकती है। इसी तरह टूथपेस्ट को पिंपल्स पर लगाने का घरेलू उपाय भी नुकसानदायक साबित हो सकता है। इसमें मौजूद केमिकल्स त्वचा को ड्राई और इरिटेट कर सकते हैं, जिससे सूजन और जलन बढ़ सकती है।   बेकिंग सोडा का pH स्तर त्वचा के प्राकृतिक pH से अलग होता है। इसे चेहरे पर लगाने से स्किन बैरियर कमजोर हो सकता है और त्वचा रूखी व संवेदनशील बन सकती है।   स्क्रब और ऑयल-बेस्ड प्रोडक्ट्स का भी रखें ध्यान गर्मी में बार-बार स्क्रब करने से त्वचा की ऊपरी परत को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे सन डैमेज और रेडनेस का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, भारी ऑयल-बेस्ड क्रीम और प्रोडक्ट्स रोमछिद्रों को बंद कर सकते हैं, जिससे मुंहासे, ब्लैकहेड्स और चिपचिपाहट की समस्या बढ़ सकती है।   विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गर्मियों में हल्के, नॉन-कॉमेडोजेनिक स्किनकेयर प्रोडक्ट्स, नियमित सनस्क्रीन, पर्याप्त पानी और संतुलित आहार अपनाकर त्वचा को स्वस्थ और प्राकृतिक रूप से चमकदार रखा जा सकता है।

anjali kumari जून 22, 2026 0
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