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India Notifies Coal Exchange Rules 2026

Coal Exchange Rules 2026: अब बाजार तय करेगा कोयले का दाम, देश में खुलेंगे कोल एक्सचेंज

surbhi जून 10, 2026 0
Coal mining and trading concept illustrating India's new Coal Exchange Rules 2026 for market-based pricing.
India Coal Exchange Rules 2026

नई दिल्ली: भारत सरकार ने कोयला क्षेत्र में बड़ा सुधार करते हुए 'कोल एक्सचेंज नियम, 2026' अधिसूचित कर दिए हैं। इस नई व्यवस्था के तहत देश में कोल एक्सचेंज स्थापित किए जाएंगे, जहां बाजार आधारित प्रणाली के जरिए कोयले की खरीद-बिक्री और कीमतों का निर्धारण किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे कोयला व्यापार में पारदर्शिता बढ़ेगी, सप्लाई चेन मजबूत होगी और ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

कोयला मंत्रालय के अनुसार, इन नियमों के जरिए कोल एक्सचेंज स्थापित करने और उनके संचालन के लिए एक स्पष्ट नियामक ढांचा तैयार किया गया है। इससे कोयले की कीमतें मांग और आपूर्ति के आधार पर तय होंगी और उद्योगों को अधिक प्रतिस्पर्धी बाजार उपलब्ध होगा।

क्या होंगे बड़े बदलाव?

नई व्यवस्था लागू होने के बाद कोयला क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे:

  • कोयले की कीमतें बाजार आधारित तरीके से तय होंगी।
  • खरीद-बिक्री प्रक्रिया पहले से अधिक पारदर्शी बनेगी।
  • कमर्शियल और कैप्टिव खदान संचालकों को अधिक खरीदार मिल सकेंगे।
  • सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्र के खिलाड़ी इस प्लेटफॉर्म पर भाग ले सकेंगे।
  • ऊर्जा क्षेत्र की दक्षता और आपूर्ति सुरक्षा मजबूत होगी।
  • कोयला व्यापार में डिजिटल और आधुनिक व्यवस्था विकसित होगी।

MMDR संशोधन अधिनियम 2025 से मिला आधार

कोयला मंत्रालय ने बताया कि खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2025 के तहत पहली बार खनिज एक्सचेंज की अवधारणा पेश की गई थी। इस कानून ने केंद्र सरकार को कोयला और उसके प्रसंस्कृत रूपों सहित विभिन्न खनिजों के पारदर्शी और कुशल व्यापार को बढ़ावा देने का अधिकार दिया।

इसी प्रावधान के तहत 4 जून 2026 को आधिकारिक राजपत्र में कोल एक्सचेंज नियम, 2026 प्रकाशित किए गए।

CCO करेगा निगरानी और रेगुलेशन

सरकार ने कोल कंट्रोलर ऑर्गनाइजेशन (CCO) को कोल एक्सचेंजों के पंजीकरण और नियमन की जिम्मेदारी सौंपी है। दिसंबर 2025 में CCO को इस कार्य के लिए अधिकृत किया गया था।

नई व्यवस्था के तहत पात्र संस्थाओं को:

  • कोल एक्सचेंज स्थापित करने,
  • उनका संचालन करने,
  • बाजार के नियम और उप-नियम बनाने,
  • तथा कोयला व्यापार को सुगम बनाने

की अनुमति दी जाएगी।

इन एक्सचेंजों का रजिस्ट्रेशन 25 वर्षों तक वैध रहेगा।

सरकार का क्या है उद्देश्य?

सरकार पारंपरिक आपूर्ति तंत्र से आगे बढ़कर एक अधिक प्रतिस्पर्धी और आधुनिक कोयला बाजार विकसित करना चाहती है। इसका उद्देश्य उद्योगों को बेहतर विकल्प उपलब्ध कराना, व्यापार को आसान बनाना और आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था को बढ़ावा देना है।

कोयला मंत्रालय के अनुसार, यह पहल Ease of Doing Business, पारदर्शिता और आधुनिक ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

बिजली और उद्योग जगत को होगा फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि कोल एक्सचेंज शुरू होने से बिजली उत्पादन कंपनियों, इस्पात उद्योग और अन्य कोयला आधारित क्षेत्रों को अधिक लचीला और प्रतिस्पर्धी बाजार मिलेगा। साथ ही देश की ऊर्जा आपूर्ति को भी दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

 

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Share Market Update: पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव से शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 400 अंक टूटा

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। अमेरिका द्वारा ईरान के कई ठिकानों पर हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई और बाजार दबाव में आ गया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 400 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 50 भी 23,100 के स्तर के नीचे फिसल गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 73,983.18 अंक पर बंद हुआ था। गुरुवार को यह 73,615.99 अंक पर खुला। सुबह करीब 9:21 बजे सेंसेक्स 289.38 अंक यानी 0.39 फीसदी की गिरावट के साथ 73,693.80 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 50 भी 75.30 अंक यानी 0.32 फीसदी टूटकर 23,139.65 के स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान रुपया भी दबाव में दिखा और डॉलर के मुकाबले 35 पैसे कमजोर होकर 95.60 पर खुला। आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 26 गिरावट के साथ खुले। सबसे ज्यादा दबाव आईटी सेक्टर पर देखने को मिला। गिरावट वाले प्रमुख शेयर: एचसीएल टेक इन्फोसिस टेक महिंद्रा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) महिंद्रा एंड महिंद्रा टाइटन टाटा स्टील एशियन पेंट्स ट्रेंट एचसीएल टेक का शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 2.96 फीसदी तक टूट गया। इन शेयरों में रही तेजी बाजार की कमजोरी के बीच कुछ शेयरों में खरीदारी भी देखने को मिली। तेजी वाले प्रमुख शेयर: पावरग्रिड आईसीआईसीआई बैंक सन फार्मा भारती एयरटेल ब्रॉडर मार्केट भी दबाव में निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.61 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.62 फीसदी फिसला। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 2 फीसदी से अधिक की कमजोरी रही। ऑटो, केमिकल और कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टरों में भी गिरावट देखी गई। हालांकि, फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में मजबूती बनी रही। क्यों टूटा शेयर बाजार? अमेरिका के ईरान पर हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड लगभग 1.72 फीसदी बढ़कर 94.72 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 2 फीसदी की तेजी के साथ 91.82 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता का विषय हैं, क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया और बाजार में बिकवाली बढ़ गई।  

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शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 400 अंक गिरा, निफ्टी 23150 से नीचे

मुंबई, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण निवेशकों में चिंता बढ़ गई। बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 73,983.18 अंक के मुकाबले गिरकर 73,615.99 अंक पर खुला। वहीं, निफ्टी 50 भी 23,214.95 अंक से फिसलकर 23,104.40 अंक पर खुला और बाद में 23,100 के स्तर से नीचे पहुंच गया।   मिडिल ईस्ट संकट बना बड़ी वजह विश्लेषकों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। निवेशकों को आशंका है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी डर के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी देखी गई, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा।   तेल की बढ़ती कीमतों से बढ़ी चिंता भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर दबाव बन सकता है। यही वजह है कि निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हुए बिकवाली को प्राथमिकता दी।   इन सेक्टरों में सबसे ज्यादा कमजोरी बैंकिंग, ऑटो, आईटी और मेटल सेक्टर के शेयरों में सबसे अधिक दबाव देखने को मिला। निफ्टी आईटी इंडेक्स भी गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया। दूसरी ओर, ऑयल एंड गैस सेक्टर की कुछ कंपनियों में खरीदारी देखी गई, क्योंकि तेल कीमतों में वृद्धि से इन कंपनियों को फायदा मिलने की संभावना है।   निवेशकों के लिए क्या है सलाह? विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच घबराकर निवेश संबंधी फैसले लेने से बचना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों को मजबूत कंपनियों पर भरोसा बनाए रखना चाहिए। बाजार की आगे की दिशा मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। यदि तनाव कम होता है तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है।

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Stock market screen showing Sensex and Nifty gains with Reliance Industries leading the rally.
Share Market Update: शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स 400 अंक उछला, रिलायंस में सबसे ज्यादा बढ़त

नई दिल्ली: घरेलू शेयर बाजार में आज सकारात्मक शुरुआत देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 400 अंक से अधिक की तेजी के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 इंडेक्स 23,300 के स्तर को पार कर गया। सुबह करीब 9:45 बजे सेंसेक्स 430.61 अंक यानी 0.58 फीसदी की बढ़त के साथ 74,349.37 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 114.45 अंक या 0.49 फीसदी चढ़कर 23,356.55 अंक पर पहुंच गया। इस बीच भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 0.2 फीसदी कमजोर होकर 95.54 पर खुला। पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.35 के स्तर पर बंद हुआ था। रिलायंस इंडस्ट्रीज में सबसे ज्यादा तेजी सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 22 शेयर हरे निशान में खुले। सबसे ज्यादा बढ़त रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में दर्ज की गई, जो करीब 1.5 फीसदी मजबूत हुए। इसके अलावा इन शेयरों में भी तेजी रही: हिंदुस्तान यूनिलीवर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) इन्फोसिस ट्रेंट स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) लार्सन एंड टुब्रो (L&T) एचडीएफसी बैंक टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) इन शेयरों में रही कमजोरी दूसरी ओर कुछ प्रमुख शेयरों में गिरावट भी देखने को मिली। इनमें शामिल हैं: बजाज फिनसर्व पावरग्रिड टेक महिंद्रा एचसीएल टेक महिंद्रा एंड महिंद्रा सन फार्मा मारुति सुजुकी मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन ब्रॉडर मार्केट में भी मिश्रित रुख देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.01 फीसदी की बढ़त रही। निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.25 फीसदी मजबूत हुआ। सेक्टरवार प्रदर्शन आज के कारोबार में FMCG सेक्टर सबसे मजबूत रहा। निफ्टी FMCG इंडेक्स में लगभग 1 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा: आईटी सेक्टर में खरीदारी प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में मजबूती ऑयल एंड गैस सेक्टर में बढ़त वहीं, मेटल और ऑटो सेक्टर में दबाव देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में भी बढ़ोतरी पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में हल्की तेजी देखी गई है। ब्रेंट क्रूड 0.65 फीसदी बढ़कर 92.04 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इंडियन बास्केट की कीमत 1.31 फीसदी बढ़कर 97.19 डॉलर प्रति बैरल हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव आने वाले दिनों में भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।  

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