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Gas Crisis Boosts Induction Cooktop Sales

गैस सप्लाई संकट: इंडक्शन कुकटॉप कंपनियों की चांदी, सिटी गैस और रेस्टोरेंट सेक्टर पर दबाव

surbhi मार्च 12, 2026 0
Surge in induction cooktop demand in India amid gas supply crisis and rising energy concerns
Induction Cooktop Demand Surge India

 

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और गैस सप्लाई में कमी का असर अब भारतीय बाजार पर भी दिखने लगा है। गैस की कमी के चलते जहां सिटी गैस और रेस्टोरेंट सेक्टर दबाव में हैं, वहीं इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरण बनाने वाली कंपनियों को बड़ा फायदा मिल रहा है।

 

इंडक्शन कुकटॉप की मांग में जबरदस्त उछाल

गैस सप्लाई में दिक्कत के कारण लोग तेजी से इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की ओर रुख कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले दो दिनों में इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री करीब 30 गुना तक बढ़ गई है। वहीं राइस कुकर और इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर की मांग भी लगभग 4 गुना बढ़ी है।

इस बढ़ती मांग का फायदा TTK Prestige, Stovekraft, Butterfly Gandhimathi Appliances जैसी कंपनियों को मिल रहा है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म Amazon और Flipkart पर भी इन उत्पादों की बिक्री में तेज उछाल दर्ज किया गया है। कई शहरों में क्विक-डिलीवरी प्लेटफॉर्म Blinkit, Swiggy Instamart और Zepto पर इंडक्शन कुकटॉप का स्टॉक तक खत्म हो गया है।

 

सिटी गैस कंपनियों पर दबाव

गैस सप्लाई में कमी का असर सिटी गैस कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिल रहा है। Mahanagar Gas Limited, Indraprastha Gas Limited और GAIL के शेयर दबाव में हैं क्योंकि गैस की उपलब्धता कम होने से इनके वॉल्यूम पर असर पड़ सकता है।

 

होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर असर

गैस सप्लाई में कटौती से होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री की लागत बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों के मुताबिक गैस की जगह बिजली या अन्य ईंधन का इस्तेमाल करने से ऑपरेटिंग कॉस्ट 30–40% तक बढ़ सकती है। इसका असर Jubilant FoodWorks, Restaurant Brands Asia और होटल चेन Kamat Hotels जैसे कारोबारों पर पड़ सकता है।

 

डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर भी दबाव

रेस्टोरेंट संचालन महंगा होने से फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato और Swiggy पर भी असर पड़ने की आशंका है। ऑर्डर वॉल्यूम घटने की स्थिति में डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

 

बिजली की मांग बढ़ने की संभावना

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लोग बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों का इस्तेमाल करने लगते हैं तो बिजली की मांग भी बढ़ सकती है। इससे पावर सेक्टर के शेयरों को फायदा मिल सकता है।

इस बीच ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने LPG डिस्ट्रीब्यूटर्स को निर्देश दिया है कि अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों जैसी जरूरी जगहों को कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई को प्राथमिकता दी जाए। इससे आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों के लिए गैस की उपलब्धता और मुश्किल हो सकती है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Fuel station displaying petrol and diesel prices board with vehicles refueling at pump
पेट्रोल-डीजल के नए दाम जारी: 4 अप्रैल 2026 को जानें आपके शहर में क्या है ताजा रेट

देशभर में हर सुबह की तरह आज 4 अप्रैल 2026 को भी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के नए दाम जारी कर दिए हैं। आज ज्यादातर महानगरों में कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिली है। हालांकि उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के कुछ शहरों में मामूली उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। बड़े शहरों में पेट्रोल के दाम स्थिर देश के प्रमुख महानगरों में आज पेट्रोल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। नई दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 प्रति लीटर पर स्थिर है मुंबई में ₹103.54 प्रति लीटर कोलकाता में ₹105.41 प्रति लीटर चेन्नई में ₹101.06 प्रति लीटर बेंगलुरु में ₹102.92 प्रति लीटर वहीं, नोएडा में पेट्रोल 13 पैसे महंगा होकर ₹94.90 पर पहुंच गया है, जबकि बिहार के मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे शहरों में भी हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली है। बिहार और झारखंड में हलचल पटना में पेट्रोल ₹105.23 पर स्थिर मुजफ्फरपुर में ₹106.45 (+0.67) भागलपुर में ₹106.66 (+0.45) रांची में ₹98.70 (+0.26) जमशेदपुर में ₹97.80 (-0.18) यह उतार-चढ़ाव स्थानीय टैक्स और परिवहन लागत के कारण देखा जा रहा है। डीजल के दाम: बाजार के लिए राहत डीजल की कीमतें भी आज अधिकतर शहरों में स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली में ₹87.67 प्रति लीटर मुंबई में ₹90.03 प्रति लीटर कोलकाता में ₹92.02 प्रति लीटर चेन्नई में ₹92.61 प्रति लीटर झारखंड के रांची में डीजल 25 पैसे महंगा हुआ है, जबकि जमशेदपुर में 18 पैसे की गिरावट दर्ज की गई है। क्यों बदलती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें? फ्यूल की कीमतें कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारकों पर निर्भर करती हैं: कच्चे तेल (Crude Oil) की वैश्विक कीमत डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी राज्य सरकारों का VAT इन्हीं वजहों से अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम अलग-अलग होते हैं। घर बैठे ऐसे जानें ताजा रेट आप SMS के जरिए भी अपने शहर का फ्यूल रेट आसानी से चेक कर सकते हैं: Indian Oil: RSP लिखकर 9224992249 पर भेजें BPCL: RSP लिखकर 9223112222 पर भेजें HPCL: HP Price लिखकर 9222201122 पर भेजें

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ट्रम्प के बयान से बाजार में घबराहट, शेयर बाजार में बड़ी गिरावट

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के ताजा बयान के बाद वैश्विक तनाव बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को तेज गिरावट देखने को मिली। ट्रम्प ने संकेत दिया कि अमेरिका आने वाले हफ्तों में ईरान पर “बेहद कड़ा हमला” कर सकता है, जिससे युद्ध के जल्द खत्म होने की उम्मीदों को झटका लगा है। सेंसेक्स-निफ्टी में करीब 2% की गिरावट कारोबार के दौरान: Nifty 50 1.95% गिरकर 22,236.80 पर पहुंच गया BSE Sensex 1.95% टूटकर 71,710.72 पर आ गया एशियाई बाजारों में भी लगभग 2% की गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर पड़ा। तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता ट्रम्प के बयान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। खासतौर पर Strait of Hormuz में संभावित बाधा को लेकर चिंता बढ़ी है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि तेल आपूर्ति में बाधा आती है, तो भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। ब्रोकरेज ने घटाया भरोसा ग्लोबल ब्रोकरेज Nomura ने भारतीय इक्विटी पर अपनी रेटिंग “ओवरवेट” से घटाकर “न्यूट्रल” कर दी है। कारण: ऊंची क्रूड कीमतों से कमाई और वैल्यूएशन पर दबाव सभी सेक्टर लाल निशान में बाजार में बिकवाली का असर हर सेक्टर पर दिखा: बैंक और फाइनेंशियल शेयर करीब 2.5% गिरे PSU बैंक इंडेक्स 3.1% तक लुढ़का मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में करीब 3% की गिरावट RBI के नियमों का भी असर Reserve Bank of India (RBI) के नए फॉरेक्स डेरिवेटिव नियमों ने भी बैंकिंग शेयरों पर दबाव बढ़ाया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे बैंकों को अतिरिक्त नुकसान उठाना पड़ सकता है। फार्मा शेयरों पर भी दबाव फार्मा सेक्टर में करीब 3.75% की गिरावट आई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका दवाओं पर 100% तक टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है, जिससे भारतीय दवा कंपनियों पर असर पड़ सकता है।

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मार्च में जीएसटी संग्रह 2 लाख करोड़ रुपये के पार

नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) संग्रह में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में सकल जीएसटी कलेक्शन 2,00,064 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो मार्च 2025 के 1,83,845 करोड़ रुपये के मुकाबले 8.8% अधिक है।   वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत ट्रेंड पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में कुल जीएसटी संग्रह 22.27 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष 20.55 लाख करोड़ रुपये से 8.3% ज्यादा है। मार्च में दो लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करना आर्थिक गतिविधियों में तेजी और बेहतर टैक्स अनुपालन का संकेत माना जा रहा है।   घरेलू और आयात जीएसटी में वृद्धि आंकड़ों के अनुसार, घरेलू जीएसटी राजस्व मार्च में 5.9% बढ़कर 1.46 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो देश में स्थिर खपत और घरेलू कारोबार की मजबूती को दर्शाता है। वहीं, आयात से जुड़े जीएसटी कलेक्शन में 17.8% की तेज वृद्धि दर्ज की गई, जो बढ़ती आयात गतिविधियों और बेहतर कस्टम्स कलेक्शन को इंगित करता है।   विशेषज्ञों का विश्लेषण विशेषज्ञों के अनुसार, मार्च में उच्च जीएसटी संग्रह का मुख्य कारण साल के अंत में व्यवसायों द्वारा करों का समय पर जमा करना और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि है। इससे सरकार की तिजोरी में अतिरिक्त राजस्व जमा हुआ, जो विकास और सार्वजनिक खर्चों के लिए उपयोगी होगा।   नतीजा मौजूदा आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि भारत में जीएसटी प्रणाली अब स्थिर और प्रभावी रूप से काम कर रही है। वित्त वर्ष के अंत में उच्च संग्रह यह भी संकेत देता है कि कर अनुपालन में सुधार हुआ है और अर्थव्यवस्था में गतिविधियां सामान्य से अधिक गति से चल रही हैं।

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