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Indian stock market crash with Sensex and Nifty falling sharply as HDFC Bank shares tumble
शेयर बाजार में भारी गिरावट: HDFC Bank में बड़ी टूट, तेल की कीमत और Fed के रुख से बढ़ा दबाव

सुबह खुलते ही बाजार में मचा हड़कंप गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार गिरावट देखने को मिली। निफ्टी 50 2.24% टूटकर 23,245 के स्तर पर आ गया, जबकि सेंसेक्स 2.33% गिरकर 74,906 पर पहुंच गया। बाजार खुलते ही निवेशकों में घबराहट का माहौल देखने को मिला। HDFC Bank में भारी गिरावट, बाजार पर पड़ा असर इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह HDFC Bank के शेयर में आई तेज गिरावट रही। बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद शेयर में करीब 8.6% तक की गिरावट दर्ज की गई, जो दो साल में सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि “गवर्नेंस और पारदर्शिता” को लेकर उठे सवालों ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है, जिससे बैंकिंग सेक्टर पर सीधा असर पड़ा। तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ी चिंता वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। ईरान और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों में तेजी आई है, जिससे भारत जैसे आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। फेडरल रिजर्व के ‘हॉकिश’ रुख का असर फेडरल रिजर्व ने भले ही ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया, लेकिन उसका सख्त (हॉकिश) रुख बाजार के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। इससे विदेशी निवेशकों का रुझान उभरते बाजारों (जैसे भारत) से कम हो सकता है। सभी सेक्टर लाल निशान में बाजार में व्यापक गिरावट देखने को मिली- बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में करीब 3% की गिरावट मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में लगभग 2% की कमजोरी कुल 16 के 16 सेक्टर लाल निशान में बंद ग्लोबल संकेत भी रहे कमजोर एशियाई बाजारों में भी करीब 2.3% की गिरावट आई, जो अमेरिकी बाजारों में आई कमजोरी का असर है। वैश्विक स्तर पर निवेशक बढ़ती तेल कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव से चिंतित हैं। L&T समेत कई शेयर दबाव में मिडिल ईस्ट में कारोबार रखने वाली लार्सन एंड टुब्रो के शेयर में भी करीब 3.5% की गिरावट आई, क्योंकि क्षेत्र में तनाव बढ़ने से इसके बिजनेस पर असर पड़ने की आशंका है। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। बढ़ती तेल कीमतें, वैश्विक तनाव और केंद्रीय बैंकों की सख्ती निवेशकों के लिए जोखिम बढ़ा रही है।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
PG Electroplast shares fall as gas supply shortage affects production
गैस सप्लाई में कमी से पीजी इलेक्ट्रोप्लास्ट के शेयर गिरे, उत्पादन प्रभावित

  इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज देने वाली कंपनी PG Electroplast के शेयरों में शुक्रवार को तेज गिरावट देखने को मिली। Bombay Stock Exchange पर कंपनी का शेयर करीब 8 प्रतिशत तक टूटकर 491 रुपये के निचले स्तर तक पहुंच गया। कंपनी प्रबंधन के अनुसार गैस सप्लाई में कमी के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे वित्त वर्ष 2026 के राजस्व अनुमान पर भी असर पड़ सकता है।   एक हफ्ते तक रुका उत्पादन कंपनी में संचालन के प्रबंध निदेशक Vikas Gupta ने बताया कि गैस की कमी के कारण एसी बनाने वाले संयंत्रों में करीब एक सप्ताह तक उत्पादन बंद रहा। उन्होंने कहा कि इससे कंपनी के उत्पादन और बिक्री पर असर पड़ने की आशंका है।   राजस्व अनुमान पर भी असर संभव कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 5700 करोड़ से 5800 करोड़ रुपये के राजस्व का अनुमान लगाया है। हालांकि गैस की कमी के चलते इस अनुमान पर कितना असर पड़ेगा, इसका स्पष्ट आकलन अभी नहीं किया गया है।   एसी निर्माण में गैस का अहम उपयोग पीजी इलेक्ट्रोप्लास्ट एसी, वॉशिंग मशीन और ऑटोमोबाइल पार्ट्स के लिए प्लास्टिक कंपोनेंट बनाती है। एसी निर्माण में कूलिंग के लिए R-32 और R-410A जैसी गैसों का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा उत्पादन प्रक्रिया में LPG का इस्तेमाल कॉपर ट्यूब की ब्रेजिंग और वेल्डिंग में होता है।   पश्चिम एशिया संकट का असर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और US–Iran tensions के कारण दुनिया के बड़े LNG उत्पादकों में शामिल Qatar में गैस उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित हुई है। इससे वैश्विक गैस सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है और कई कंपनियों को आपूर्ति में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।   पहले भी गिरा था शेयर इससे पहले 9 मार्च को भी कंपनी के शेयर में करीब 14 प्रतिशत की गिरावट आई थी। कंपनी ने तब बताया था कि गैस सप्लायर से मिले संदेश के अनुसार मध्य-पूर्व में युद्ध और समुद्री मार्गों में बाधा के कारण गैस की उपलब्धता कम हो गई है। फिलहाल कंपनी वैकल्पिक गैस स्रोतों की तलाश कर रही है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है। लगातार गिरावट के बाद कंपनी का बाजार पूंजीकरण घटकर करीब 14,500 करोड़ रुपये रह गया है। एक सप्ताह में शेयर लगभग 16 प्रतिशत और एक वर्ष में करीब 38 प्रतिशत गिर चुका है।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
Surge in induction cooktop demand in India amid gas supply crisis and rising energy concerns
गैस सप्लाई संकट: इंडक्शन कुकटॉप कंपनियों की चांदी, सिटी गैस और रेस्टोरेंट सेक्टर पर दबाव

  पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और गैस सप्लाई में कमी का असर अब भारतीय बाजार पर भी दिखने लगा है। गैस की कमी के चलते जहां सिटी गैस और रेस्टोरेंट सेक्टर दबाव में हैं, वहीं इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरण बनाने वाली कंपनियों को बड़ा फायदा मिल रहा है।   इंडक्शन कुकटॉप की मांग में जबरदस्त उछाल गैस सप्लाई में दिक्कत के कारण लोग तेजी से इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की ओर रुख कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले दो दिनों में इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री करीब 30 गुना तक बढ़ गई है। वहीं राइस कुकर और इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर की मांग भी लगभग 4 गुना बढ़ी है। इस बढ़ती मांग का फायदा TTK Prestige, Stovekraft, Butterfly Gandhimathi Appliances जैसी कंपनियों को मिल रहा है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म Amazon और Flipkart पर भी इन उत्पादों की बिक्री में तेज उछाल दर्ज किया गया है। कई शहरों में क्विक-डिलीवरी प्लेटफॉर्म Blinkit, Swiggy Instamart और Zepto पर इंडक्शन कुकटॉप का स्टॉक तक खत्म हो गया है।   सिटी गैस कंपनियों पर दबाव गैस सप्लाई में कमी का असर सिटी गैस कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिल रहा है। Mahanagar Gas Limited, Indraprastha Gas Limited और GAIL के शेयर दबाव में हैं क्योंकि गैस की उपलब्धता कम होने से इनके वॉल्यूम पर असर पड़ सकता है।   होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर असर गैस सप्लाई में कटौती से होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री की लागत बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों के मुताबिक गैस की जगह बिजली या अन्य ईंधन का इस्तेमाल करने से ऑपरेटिंग कॉस्ट 30–40% तक बढ़ सकती है। इसका असर Jubilant FoodWorks, Restaurant Brands Asia और होटल चेन Kamat Hotels जैसे कारोबारों पर पड़ सकता है।   डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर भी दबाव रेस्टोरेंट संचालन महंगा होने से फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato और Swiggy पर भी असर पड़ने की आशंका है। ऑर्डर वॉल्यूम घटने की स्थिति में डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।   बिजली की मांग बढ़ने की संभावना विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लोग बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों का इस्तेमाल करने लगते हैं तो बिजली की मांग भी बढ़ सकती है। इससे पावर सेक्टर के शेयरों को फायदा मिल सकता है। इस बीच ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने LPG डिस्ट्रीब्यूटर्स को निर्देश दिया है कि अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों जैसी जरूरी जगहों को कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई को प्राथमिकता दी जाए। इससे आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों के लिए गैस की उपलब्धता और मुश्किल हो सकती है।  

surbhi मार्च 12, 2026 0
Asian Paints company logo with stock market chart highlighting pledged promoter shares for loan collateral
एशियन पेंट्स के प्रमोटर ने गिरवी रखे 5 लाख शेयर, बजाज फाइनेंस से लिए गए लोन के लिए बनाया गया कोलैटरल

प्रमोटर कंपनी ने लोन के बदले शेयर किए गिरवी भारत की प्रमुख पेंट कंपनी Asian Paints के प्रमोटर समूह की इकाई Sattva Holding and Trading Private Limited ने अपने अतिरिक्त 5 लाख इक्विटी शेयर गिरवी रखे हैं। यह शेयर लोन के लिए कोलैटरल (जमानत) के रूप में Bajaj Finance Limited के पक्ष में रखे गए हैं। यह गिरवीकरण 2 मार्च 2026 को किया गया था, जिसकी जानकारी 5 मार्च 2026 को स्टॉक एक्सचेंज को दी गई। यह खुलासा SEBI के SAST (Substantial Acquisition of Shares and Takeovers) नियमों के तहत किया गया है। कितना हुआ नया शेयर गिरवी ताजा लेनदेन के बाद सत्वा होल्डिंग की गिरवी रखी गई हिस्सेदारी में बढ़ोतरी हुई है। कंपनी ने अपनी कुल हिस्सेदारी का एक हिस्सा लोन के लिए इस्तेमाल किया है। मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं: गिरवी रखे गए नए शेयर: 5,00,000 गिरवी रखने की तारीख: 2 मार्च 2026 लाभार्थी संस्था: Bajaj Finance Limited उद्देश्य: कंपनी द्वारा लिए गए लोन के लिए कोलैटरल गिरवी का प्रकार: प्लेज (Pledge)   एशियन पेंट्स में सत्वा होल्डिंग की हिस्सेदारी नए गिरवीकरण के बाद भी सत्वा होल्डिंग के पास कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी बनी हुई है। कुल शेयर होल्डिंग: 5,47,89,183 शेयर (लगभग 5.71%) पहले से गिरवी शेयर: 77,26,000 (0.805%) नया गिरवी: 5,00,000 (0.052%) कुल गिरवी शेयर: 82,26,000 (0.858%) प्रमोटर ग्रुप की कुल हिस्सेदारी Asian Paints में पूरे प्रमोटर ग्रुप की संयुक्त हिस्सेदारी 50,47,85,198 शेयर है, जो कंपनी की कुल पूंजी का लगभग 52.63% है। प्रमुख प्रमोटर कंपनियों की हिस्सेदारी इस प्रकार है: Smiti Holding and Trading Company Private Limited – 5,14,42,638 शेयर (5.36%) Geetanjali Trading and Investments Private Limited – 4,57,06,140 शेयर (4.77%) Elcid Investments Limited – 2,83,13,860 शेयर (2.95%) Shubhit Holdings Private Limited – 2,31,50,730 शेयर (2.41%)   सेबी नियमों के तहत किया गया खुलासा यह जानकारी SEBI (SAST) Regulations 2011 के Regulation 31(1) और 31(2) के तहत दी गई है। इन नियमों के अनुसार, प्रमोटरों को अपनी हिस्सेदारी पर किसी भी तरह के गिरवी, रिलीज या इनवोकेशन की जानकारी स्टॉक एक्सचेंज को देना अनिवार्य होता है। सत्वा होल्डिंग, जिसे पहले Isis Holding and Trading Company Private Limited के नाम से जाना जाता था, ने यह जानकारी अपने CEO, CFO और प्रिंसिपल ऑफिसर पर्सी दाजी के माध्यम से फाइल की।   प्रमोटर ग्रुप के कुल गिरवी शेयर पूरे प्रमोटर समूह के स्तर पर देखें तो कुल 4,67,89,727 शेयर गिरवी रखे गए हैं, जो कंपनी की कुल पूंजी का लगभग 4.88% है। इनमें सबसे बड़ा गिरवी हिस्सा Smiti Holding and Trading Company Private Limited के पास है, जिसने 3,53,15,000 शेयर (करीब 3.68%) गिरवी रखे हैं।   शेयर का प्रदर्शन Asian Paints के शेयरों का हालिया प्रदर्शन कुछ इस प्रकार रहा: 1 दिन: +0.18% 5 दिन: -4.39% 1 महीना: -5.85% 6 महीने: -11.24% 1 साल: +5.81% 5 साल: -4.08%

surbhi मार्च 6, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Crowd chaos at Nalanda Sheetla Temple during religious event causing stampede-like situation and casualties
बिहार

नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0