Kanpuriya Aloo Dhaniya Recipe: अगर आपको मसालेदार और चटपटा स्ट्रीट फूड पसंद है, तो कानपुर का फेमस आलू धनिया जरूर ट्राई करें। हरी धनिया की तीखी चटनी, सरसों के तेल का देसी फ्लेवर और उबले आलू का कॉम्बिनेशन इसे मिनटों में बनने वाला स्वादिष्ट स्नैक बनाता है।
अगर शाम की हल्की भूख में कुछ ऐसा खाना चाहते हैं जो स्वाद में दमदार हो और बनाने में आसान भी, तो Kanpuriya Aloo Dhaniya आपके लिए बेहतरीन विकल्प है। उत्तर प्रदेश के कानपुर की गलियों में मिलने वाला यह लोकप्रिय स्ट्रीट फूड अपनी तीखी धनिया चटनी और सरसों के तेल की खुशबू के लिए जाना जाता है।
माना जाता है कि 1970 के दशक में स्थानीय चाट विक्रेताओं ने पारंपरिक आलू चाट में हरी धनिया की चटनी का ट्विस्ट देकर इस खास रेसिपी की शुरुआत की थी। आज भी यह स्नैक कानपुर की पहचान बना हुआ है और अब इसे घर पर भी आसानी से तैयार किया जा सकता है।
सबसे पहले उबले आलुओं को छीलकर छोटे टुकड़ों में काट लें। अब मिक्सर में हरा धनिया, हरी मिर्च, अदरक और थोड़ा पानी डालकर गाढ़ी चटनी तैयार करें।
इस चटनी में चाट मसाला, भुना जीरा, काला नमक, सादा नमक और नींबू का रस मिलाएं। अब कटे हुए आलुओं पर यह चटनी डालकर हल्के हाथों से टॉस करें ताकि हर टुकड़े पर चटनी अच्छी तरह लिपट जाए। आखिर में ऊपर से सरसों का तेल डालें और तुरंत सर्व करें।
ध्यान दें: यदि आपको ज्यादा तीखा खाना पसंद नहीं है, तो हरी मिर्च और सरसों के तेल की मात्रा अपने स्वाद के अनुसार कम रखें।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Healthy Recipe for Diabetes: अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं और ऐसा भोजन चाहते हैं जो पौष्टिक होने के साथ ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद कर सके, तो मेथी-मूंग स्प्राउट्स सलाद एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यह प्रोटीन, फाइबर और विटामिन से भरपूर है और इसे नाश्ते, लंच या शाम के स्नैक में शामिल किया जा सकता है। डायबिटीज में क्यों फायदेमंद है मेथी-मूंग स्प्राउट्स सलाद? डायबिटीज में ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना बेहतर माना जाता है जो लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Low GI) वाले हों और जिनमें फाइबर व प्रोटीन भरपूर मात्रा में हो। अंकुरित मूंग (Sprouted Moong) और मेथी की पत्तियां पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं। यह संयोजन लंबे समय तक पेट भरा रखने, ऊर्जा बनाए रखने और संतुलित आहार का हिस्सा बनने में मदद कर सकता है। आवश्यक सामग्री 1 कप अंकुरित मूंग 1 कप बारीक कटी ताजी मेथी 1 छोटा खीरा (कटा हुआ) 1 छोटा टमाटर (बीज निकालकर कटा हुआ) 1 छोटा प्याज (वैकल्पिक) 1 बड़ा चम्मच भुने कद्दू के बीज 1 छोटा चम्मच भुना अलसी पाउडर 1 बड़ा चम्मच नींबू का रस काली मिर्च पाउडर सेंधा नमक या सामान्य नमक (सीमित मात्रा में) बनाने की विधि अंकुरित मूंग को 2–3 मिनट हल्का स्टीम कर लें। अब एक बड़े बाउल में मूंग, मेथी, खीरा, टमाटर और प्याज मिलाएं। इसमें भुने कद्दू के बीज, अलसी पाउडर, नींबू का रस, काली मिर्च और स्वादानुसार नमक डालकर अच्छी तरह टॉस करें। हेल्दी सलाद तैयार है। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 170–210 kcal प्रोटीन: 11–13 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 18–22 ग्राम फाइबर: 8–10 ग्राम फैट: 5–7 ग्राम संभावित फायदे हाई फाइबर और प्रोटीन से भरपूर। लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद मिल सकती है। ब्लड शुगर के स्तर को संतुलित रखने वाली डाइट का हिस्सा बन सकता है। पाचन और वजन प्रबंधन में सहायक। एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन से भरपूर। कब खाएं? सुबह के नाश्ते में दोपहर के भोजन के साथ शाम के हेल्दी स्नैक के रूप में ध्यान दें : यह रेसिपी डायबिटीज-फ्रेंडली संतुलित आहार का हिस्सा हो सकती है, लेकिन यह डायबिटीज का इलाज नहीं है। यदि आप डायबिटीज की दवा या इंसुलिन लेते हैं, तो अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या रजिस्टर्ड डाइटिशियन की सलाह जरूर लें।
Healthy Breakfast for Weight Loss: अगर आप वजन घटाना चाहते हैं, नियमित जिम जाते हैं या ऑफिस की व्यस्त दिनचर्या में हेल्दी और जल्दी बनने वाला नाश्ता ढूंढ रहे हैं, तो हाई-प्रोटीन और फाइबर से भरपूर ब्रेकफास्ट आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा नाश्ता लंबे समय तक पेट भरा रखने, मसल्स रिकवरी को सपोर्ट करने और मेटाबॉलिक हेल्थ बनाए रखने में मदद कर सकता है। हालांकि, केवल कोई एक फूड या ड्रिंक मेटाबॉलिज्म को चमत्कारी तरीके से तेज नहीं करता। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और अच्छी नींद भी उतनी ही जरूरी हैं। सुबह का नाश्ता क्यों जरूरी है? रातभर के उपवास के बाद शरीर को ऊर्जा और पोषण की जरूरत होती है। प्रोटीन और फाइबर से भरपूर नाश्ता दिनभर की एनर्जी बनाए रखने, अनहेल्दी स्नैकिंग कम करने और कैलोरी कंट्रोल में मदद कर सकता है। जिम जाने वालों के लिए यह मसल्स रिकवरी और प्रोटीन की जरूरत पूरी करने में भी सहायक हो सकता है। 1. हाई-प्रोटीन पनीर-वेज सैंडविच बनने का समय: 10–15 मिनट सामग्री 2 स्लाइस मल्टीग्रेन ब्रेड 80 ग्राम लो-फैट पनीर खीरा, टमाटर, शिमला मिर्च पुदीना-धनिया चटनी काली मिर्च और ओरिगैनो कैसे बनाएं? ब्रेड पर चटनी लगाएं। पनीर और सब्जियां रखें, हल्का टोस्ट करें और गर्मागर्म सर्व करें। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 300 kcal प्रोटीन: 22 ग्राम फाइबर: 7 ग्राम किसके लिए बेहतर? वेट लॉस ऑफिस जाने वाले जिम करने वाले 2. ग्रीक योगर्ट फ्रूट-सीड्स बाउल बनने का समय: 10 मिनट सामग्री 1 कप ग्रीक योगर्ट सेब या अनार चिया सीड्स अलसी कद्दू के बीज प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 300 kcal प्रोटीन: 20 ग्राम फाइबर: 9 ग्राम फायदे गट हेल्थ को सपोर्ट हेल्दी फैट और एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद 3. सोया-ओट्स वेज उपमा बनने का समय: 20 मिनट सामग्री ½ कप ओट्स ½ कप उबले सोया ग्रैन्यूल्स गाजर, मटर, शिमला मिर्च सरसों, करी पत्ता 1 छोटा चम्मच तेल कैसे बनाएं? हल्के तेल में मसालों का तड़का लगाएं। सब्जियां, सोया और ओट्स डालकर 5–7 मिनट पकाएं। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 290 kcal प्रोटीन: 21 ग्राम फाइबर: 8 ग्राम फायदे हाई प्रोटीन और हाई फाइबर एनर्जी बनाए रखने में मदद ऑफिस और जिम रूटीन के लिए उपयुक्त रोज डाइट में शामिल करें यह हेल्दी ड्रिंक जीरा-अदरक-नींबू ड्रिंक कब पिएं? नाश्ते के 20–30 मिनट बाद या वर्कआउट के बाद सामग्री 1 गिलास गुनगुना पानी ½ छोटा चम्मच भुना जीरा पाउडर थोड़ा कद्दूकस किया अदरक ½ नींबू संभावित फायदे शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद पाचन को सपोर्ट कम कैलोरी वाला हेल्दी विकल्प जिम और ऑफिस जाने वालों के लिए आसान डाइट चार्ट सुबह: गुनगुना पानी ब्रेकफास्ट (8–9 बजे): ऊपर दिए गए 3 विकल्पों में से कोई एक मिड मॉर्निंग: 1 मौसमी फल + 5 बादाम लंच: 2 रोटी + दाल + सब्जी + सलाद + दही शाम: जीरा-अदरक-नींबू ड्रिंक + भुना चना वर्कआउट के बाद: दूध/दही + हाई-प्रोटीन स्नैक डिनर: पनीर, सोया या दाल के साथ हल्का भोजन क्या ये मेटाबॉलिज्म बढ़ाते हैं? कोई भी एक रेसिपी या ड्रिंक अकेले मेटाबॉलिज्म को तेज नहीं करती। लेकिन हाई-प्रोटीन नाश्ता, पर्याप्त फाइबर, नियमित एक्सरसाइज, अच्छी नींद और संतुलित आहार मिलकर बेहतर मेटाबॉलिक हेल्थ बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। हफ्ते में कितने दिन खाएं? इन तीनों ब्रेकफास्ट को सप्ताह में 5–6 दिन रोटेशन में शामिल किया जा सकता है ताकि शरीर को अलग-अलग पोषक तत्व मिलते रहें। ध्यान दें: यदि आपको किडनी रोग, लिवर की बीमारी, डायबिटीज या कोई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, तो हाई-प्रोटीन डाइट शुरू करने से पहले डॉक्टर या रजिस्टर्ड डाइटिशियन की सलाह जरूर लें।
Jagannath Rath Yatra Fasting Recipes: भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं। ऐसे में फलाहारी और सात्विक भोजन का विशेष महत्व होता है। अगर आप इस पावन अवसर पर घर में स्वादिष्ट और पौष्टिक व्रत का भोजन बनाना चाहते हैं, तो ये तीन आसान रेसिपीज आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकती हैं। रथ यात्रा पर क्यों बनाया जाता है सात्विक भोजन? भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा आस्था, भक्ति और सेवा का महापर्व माना जाता है। इस दौरान कई भक्त उपवास रखते हैं और बिना प्याज-लहसुन वाला सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। व्रत में ऐसे खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दी जाती है जो हल्के हों, ऊर्जा दें और लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करें। यहां जानिए तीन ऐसी आसान रेसिपीज, जिन्हें आप रथ यात्रा के दिन कम समय में तैयार कर सकते हैं। 1. साबूदाना मूंगफली खिचड़ी आवश्यक सामग्री 1 कप साबूदाना (5–6 घंटे भिगोया हुआ) ½ कप भुनी मूंगफली (दरदरी पिसी) 2 उबले आलू 2 हरी मिर्च 1 छोटा चम्मच जीरा 8–10 करी पत्ते (यदि व्रत की परंपरा में स्वीकार्य हों) सेंधा नमक 1 बड़ा चम्मच घी हरा धनिया नींबू बनाने की विधि घी गर्म करें, जीरा डालें। आलू और हरी मिर्च हल्का भूनें। अब साबूदाना और मूंगफली मिलाकर 4–5 मिनट पकाएं। अंत में नींबू और हरा धनिया डालकर सर्व करें। बनने में समय: 20 मिनट प्रति सर्विंग कैलोरी: लगभग 320–350 kcal 2. सामक चावल की खीर आवश्यक सामग्री ½ कप सामक चावल 500 ml दूध 1 बड़ा चम्मच गुड़ या मिश्री इलायची पाउडर बादाम और काजू केसर (वैकल्पिक) बनाने की विधि दूध उबालें, उसमें सामक चावल डालकर धीमी आंच पर पकाएं। गाढ़ा होने पर गुड़, इलायची और ड्राई फ्रूट्स मिलाकर सर्व करें। बनने में समय: 30 मिनट प्रति सर्विंग कैलोरी: लगभग 240–280 kcal 3. सिंघाड़े के आटे के पनीर चीला आवश्यक सामग्री 1 कप सिंघाड़े का आटा 100 ग्राम पनीर हरी मिर्च हरा धनिया सेंधा नमक जीरा 1 छोटा चम्मच घी बनाने की विधि आटे में पानी मिलाकर घोल तैयार करें। पनीर, धनिया और मसाले मिलाएं। नॉन-स्टिक तवे पर दोनों तरफ सुनहरा होने तक सेक लें। बनने में समय: 20–25 मिनट प्रति सर्विंग कैलोरी: लगभग 280–330 kcal व्रत में इन बातों का रखें ध्यान :- पर्याप्त मात्रा में पानी और नारियल पानी पीते रहें। सेंधा नमक का ही उपयोग करें (यदि आपकी व्रत परंपरा में यही प्रचलित हो)। अधिक तला-भुना भोजन खाने से बचें। फल और दही को भी डाइट में शामिल करें। यदि मधुमेह, किडनी या अन्य स्वास्थ्य समस्या है तो व्रत का भोजन अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार चुनें और जरूरत हो तो डॉक्टर से सलाह लें। ध्यान दें: अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में व्रत के नियम भिन्न हो सकते हैं। किसी भी सामग्री का उपयोग अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार करें।