स्वास्थ्य

डबल चिन हटाने के लिए जरूर आजमाएं ये 5 असरदार योगासन

Anjali Kumari मार्च 24, 2026 0
Yoga for double chin
Yoga for double chin

नई दिल्ली, एजेंसियां।  डबल चिन अब केवल मोटापे की निशानी नहीं रही। मोबाइल पर झुकी गर्दन, घंटों बैठकर काम करना और कम शारीरिक गतिविधि मिलकर चेहरे के नीचे फैट जमा कर देते हैं और स्किन ढीली बना देते हैं। क्रीम, बेल्ट या महंगे ट्रीटमेंट अस्थायी असर दिखा सकते हैं, लेकिन स्थायी समाधान योग और एक्सरसाइज से ही संभव है।

 

डबल चिन के मुख्य कारण


• गर्दन की मांसपेशियों की कमजोरी
• गलत पोस्चर और मोबाइल नेक
• बढ़ता वजन
• उम्र के साथ स्किन का ढीलापन
• कम पानी पीना
• डबल चिन कम करने वाले असरदार योगासन

 

सिंहासन: 


जीभ बाहर निकालकर गहरी सांस लें और 10-15 सेकंड रोकें। लाभ: गर्दन और जबड़े की मांसपेशियां टाइट होती हैं।

 

जालंधर बंध: 


ठोड़ी को छाती की ओर झुकाएं और सांस रोककर रखें। लाभ: गर्दन की चर्बी घटाने में मदद।

 

भुजंगासन: 


पेट के बल लेटकर छाती ऊपर उठाएं। लाभ: गर्दन और चेहरे का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है।

 

काउ फेस एक्सरसाइज: 


होंठ आगे निकालकर ऊपर की ओर देखें और 10 सेकंड तक पकड़ें। लाभ: डबल चिन पर सीधा असर।

 

ओम जप:


 “ओम” का लंबा उच्चारण करें। लाभ: चेहरे की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं।

 

योग का असर और नियमित अभ्यास

 

यदि रोजाना 10–15 मिनट इन योगासन का अभ्यास किया जाए और सही पोस्चर अपनाया जाए, तो 3–4 हफ्तों में डबल चिन में फर्क दिखाई देने लगता है।
योग के नियमित अभ्यास से न केवल डबल चिन कम होता है, बल्कि चेहरे और गर्दन की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और शरीर फिट और एनर्जेटिक रहता है। बिना खर्च और साइड इफेक्ट के, ये योगासन घर पर आसानी से किए जा सकते हैं।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित, अनुज अग्निहोत्री बने टॉपर, 958 उम्मीदवार सफल

UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)   भारतीय पुलिस सेवा (IPS)   भारतीय विदेश सेवा (IFS)   भारतीय राजस्व सेवा (IRS)   भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं   979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं   होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें   “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं   Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें   मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी   Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें   15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98   EWS: 85.92   OBC: 87.28   SC: 79.03   ST: 74.23   आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज

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गर्मियों में सेहतमंद रहने के लिए खाएं ये 5 रोटियां

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों का मौसम शरीर पर असर डालता है, इसलिए इस दौरान खाने-पीने का खास ध्यान रखना बेहद जरूरी है। गर्मी में हल्का और ठंडी तासीर वाला भोजन सेहत के लिए सबसे फायदेमंद होता है। सही रोटी का चुनाव न केवल पेट को हल्का रखता है बल्कि शरीर को ठंडक और ऊर्जा भी देता है।विशेषज्ञों के अनुसार, ज्वार, गेहूं और मल्टीग्रेन जैसी रोटियां गर्मियों में सबसे अच्छी मानी जाती हैं। ये रोटियां पचने में आसान होती हैं और इन्हें दही या छाछ के साथ खाने से शरीर हाइड्रेटेड रहता है।   आइए जानते हैं गर्मियों के लिए सबसे उपयुक्त रोटियां   1. ज्वार की रोटी ज्वार की रोटी ठंडी तासीर वाली होती है और यह पाचन को बेहतर बनाती है। इसे नियमित खाने से शरीर को ठंडक मिलती है और गर्मी में राहत महसूस होती है। 2. बाजरे की रोटी बाजरे की रोटी पोषण में अच्छी होती है, लेकिन यह गर्म होती है। इसलिए इसे गर्मियों में सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए। 3. गेहूं की पतली रोटी गेहूं की पतली रोटी हल्की और पचने में आसान होती है। यह रोजाना खाने के लिए एक अच्छा विकल्प है और शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देती है। 4. चने के आटे (बेसन) की रोटी बेसन की रोटी प्रोटीन से भरपूर होती है और हल्की भी रहती है। यह गर्मियों में सेहत को बनाए रखने में मदद करती है। 5. मल्टीग्रेन रोटी मल्टीग्रेन रोटी विभिन्न अनाजों से बनाई जाती है। यह शरीर को संतुलित पोषण देती है और गर्मी में भी हल्की और फायदेमंद रहती है। गर्मियों में इन रोटियों के साथ दही, छाछ या सलाद का सेवन करने से शरीर ठंडक महसूस करता है और ऊर्जा बनी रहती है। सही रोटी चुनकर आप अपने स्वास्थ्य को बेहतर रख सकते हैं और गर्मियों में सेहतमंद रह सकते हैं

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दिल्ली में HIV इलाज की बड़ी चुनौती: सिर्फ 70% मरीज ही उपचार से जुड़े, केंद्र ने जिलास्तर पर तेज की कार्रवाई

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में HIV नियंत्रण को लेकर प्रगति के बावजूद इलाज से जुड़ाव एक बड़ी चिंता बना हुआ है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, पहचान किए गए मरीजों में से केवल लगभग 70% ही नियमित उपचार से जुड़े हैं। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने अब जिलास्तर पर विशेष रणनीति के तहत कार्रवाई तेज कर दी है। ‘सुरक्षा संकल्प कार्यशाला’ में हुई समीक्षा हाल ही में आयोजित ‘सुरक्षा संकल्प कार्यशाला’ में केंद्र के स्वास्थ्य मंत्रालय और National AIDS Control Organisation (NACO) ने दिल्ली और हरियाणा में HIV की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में टेस्टिंग, इलाज से जोड़ने (linkage) और मरीजों की निरंतर निगरानी पर जोर दिया गया। दिल्ली में क्या है स्थिति? दिल्ली में करीब 59,079 लोग HIV के साथ जीवन जी रहे हैं और वयस्कों में इसका प्रचलन 0.33% है। हालांकि, असली चुनौती यह है कि जिन लोगों की पहचान हो चुकी है, उन्हें समय पर इलाज शुरू कराया जाए और लंबे समय तक उपचार में बनाए रखा जाए। 7 जिलों पर विशेष फोकस स्थिति सुधारने के लिए दिल्ली के सात जिलों-नॉर्थ, न्यू दिल्ली, शाहदरा, सेंट्रल, साउथ ईस्ट, साउथ और नॉर्थ वेस्ट-को चिन्हित किया गया है, जहां निगरानी और हस्तक्षेप बढ़ाए जाएंगे। क्या हैं मुख्य चुनौतियां? विशेषज्ञों के मुताबिक समस्या संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ की है। Dr Neeraj Nischal के अनुसार, “दिल्ली में अस्पताल और विशेषज्ञों की कमी नहीं है, लेकिन मरीजों को इलाज से जोड़ने और लंबे समय तक बनाए रखने में दिक्कतें हैं।” मुख्य कारणों में शामिल हैं: इलाज शुरू करने में देरी सामाजिक कलंक (stigma) उपचार में रुकावट लगातार स्थान बदलने वाली शहरी आबादी क्या हो सकते हैं समाधान? विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि: मरीजों के लिए पोर्टेबल ट्रीटमेंट सिस्टम बनाया जाए एकीकृत (unified) डेटा बेस तैयार हो मल्टी-मंथ दवाओं की सुविधा मिले समुदाय स्तर पर दवा वितरण को बढ़ावा दिया जाए इससे खासकर प्रवासी (migrant) आबादी को इलाज जारी रखने में मदद मिलेगी। हरियाणा की स्थिति बेहतर दिल्ली की तुलना में हरियाणा का प्रदर्शन बेहतर बताया गया है, जहां ट्रीटमेंट कवरेज करीब 81:83:95 के अनुपात में है, हालांकि वहां भी सुधार की जरूरत बनी हुई है। राष्ट्रीय लक्ष्य क्या है? देशभर में 219 जिलों को HIV/AIDS नियंत्रण के लिए प्राथमिकता क्षेत्र घोषित किया गया है, जिनमें दिल्ली के 7 और हरियाणा के 11 जिले शामिल हैं। सरकार वैश्विक 95-95-95 लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है और अब इसे बढ़ाकर 95-95-99 करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि 2027 तक HIV/AIDS को नियंत्रण में लाया जा सके। मां से बच्चे में संक्रमण रोकने पर जोर अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि समय पर जांच और इलाज के जरिए मां से बच्चे में HIV संक्रमण को पूरी तरह खत्म करना प्राथमिकता में शामिल है।  

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Lose weight by walking
डाइट और एक्सरसाइज़ छोड़ो, सिर्फ वॉक से तीन महीने में घटाएं 4-6 किलो वजन

नई दिल्ली, एजेंसियां। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिट रहना हर किसी की चाहत है, लेकिन स्ट्रिक्ट डाइट और जिम के लिए समय निकाल पाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। ऐसे में रोज़ाना 10,000 कदम चलना एक आसान, सस्ता और प्रभावी तरीका साबित हो सकता है। यह न सिर्फ वजन कम करने में मदद करता है, बल्कि शरीर और मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है।   तीन महीने तक रोज़ 10,000 कदम चलने के फायदे अगर कोई व्यक्ति लगातार तीन महीने तक रोज़ाना 10,000 कदम चलता है, तो शरीर एक्स्ट्रा कैलोरी बर्न करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक सामान्य व्यक्ति इस दौरान लगभग 300 से 500 कैलोरी प्रति दिन खर्च कर सकता है। लगातार यह आदत बनाए रखने से शरीर में जमा अतिरिक्त फैट धीरे-धीरे कम होने लगता है। वजन कम करने के लिए यह तरीका बेहद आसान है और सिर्फ़ वॉक करने से तीन महीने में 4 से 6 किलो तक वजन घटाया जा सकता है।   डाइट का ध्यान रखें तो परिणाम और बेहतर होंगे हालांकि, सिर्फ़ वॉक करने से भी फायदा होता है, लेकिन अगर वॉक के दौरान बाहर का भारी खाना लिया जाए तो वजन कम करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए हल्का और संतुलित भोजन करना फायदेमंद रहता है। इसके लिए किसी सख्त डाइट की आवश्यकता नहीं है, बस खाने की मात्रा और गुणवत्ता पर थोड़ा ध्यान देना ही काफी है।   सिर्फ वजन नहीं, ये फायदे भी मिलेंगे रोज़ाना 10,000 कदम चलने के अन्य कई हेल्थ फायदे भी हैं। यह दिल की सेहत को बेहतर बनाता है, ब्लड शुगर को नियंत्रित रखता है और मानसिक तनाव को कम करता है। इसके अलावा, इससे मांसपेशियां मजबूत होती हैं, स्टैमिना बढ़ता है और नींद की गुणवत्ता में भी सुधार आता है।   शुरुआत कैसे करें नए लोगों को सीधे 10,000 कदम से शुरुआत करने की बजाय धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए। शुरुआत 5,000 से 6,000 कदम से करें और फिर धीरे-धीरे इसे 10,000 तक बढ़ाएं। सुबह और शाम के समय वॉक करके अपने दैनिक कदम पूरे किए जा सकते हैं।

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