नई दिल्ली, एजेंसियां। सौंफ और धनिया का पानी आजकल हेल्दी रहने वालों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। यह पानी न केवल पाचन सुधारने में मदद करता है, बल्कि शरीर को डिटॉक्स करने, वजन नियंत्रित रखने और हृदय स्वास्थ्य बेहतर बनाने में भी असरदार है। सौंफ और धनिया में मौजूद पोषक तत्व छोटी-बड़ी कई स्वास्थ्य समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक हैं।
बेहतर पाचन: यह मिश्रण पेट की जलन, सूजन, भारीपन और कब्ज जैसी परेशानियों को कम करता है, जिससे पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है।
डिटॉक्स और वजन कम करना: सौंफ और धनिया का पानी शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है, ब्लोटिंग कम करता है और मेटाबॉलिज्म बढ़ाकर वजन कम करने में मदद करता है।
शरीर के तापमान को संतुलित रखना: दोनों ही ठंडे तासीर के होते हैं, जो गर्मियों में शरीर का तापमान संतुलित रखते हैं और पेट को ठंडा रखते हैं।
कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण: यह पानी खराब कोलेस्ट्रॉल कम और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है। इसमें मौजूद फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट नसों में जमा वसा को कम कर हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं।इम्यूनिटी बूस्टर: एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सर्दी-जुकाम और संक्रमण से बचाव में सहायक हैं।
रात में एक गिलास पानी में 1-1 छोटी चम्मच साबुत धनिया और सौंफ को भिगोकर रखें। सुबह इसे 5-10 मिनट तक उबालें, छानकर खाली पेट पिएं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इसे नियमित रूप से सेवन करने से शरीर फिट, हल्का और एनर्जेटिक रहता है। हालांकि, किसी भी स्वास्थ्य समस्या या फिटनेस प्लान के लिए इसे अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।इस प्रकार, सौंफ और धनिया का पानी एक सरल, घरेलू और असरदार उपाय है, जो पाचन, वजन, हृदय स्वास्थ्य और इम्यूनिटी सभी के लिए फायदेमंद माना जाता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
आजकल आयरन की कमी (Iron Deficiency) एक आम समस्या बन गई है, खासकर महिलाओं में। लेकिन सही डाइट अपनाकर इसे आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। आइए जानते हैं 6 ऐसी हरी चीजों के बारे में जो आपके शरीर में आयरन की कमी नहीं होने देंगी 1. करी पत्ता (Curry Leaves) — आयरन का पावरहाउस करी पत्ता सिर्फ तड़के के लिए नहीं, बल्कि आयरन और फोलिक एसिड का बेहतरीन स्रोत है। फोलिक एसिड आयरन को शरीर में अच्छे से अवशोषित करने में मदद करता है। इसे चटनी बनाकर या सीधे खाएं, फेंकें नहीं। 2. पालक (Spinach) — सबसे मशहूर आयरन सोर्स पालक आयरन से भरपूर होता है और रेड ब्लड सेल्स बनाने में मदद करता है। हल्का उबालकर या पकाकर खाएं नींबू या टमाटर के साथ लेने से आयरन जल्दी अवशोषित होता है 3. मेथी के पत्ते (Fenugreek Leaves) — खून बढ़ाने वाली सब्जी मेथी में आयरन के साथ-साथ फाइबर और विटामिन K भी होता है। खासकर महिलाओं के लिए फायदेमंद पराठा, सब्जी या दाल में शामिल करें 4. सहजन के पत्ते (Moringa) — ‘मिरेकल फूड’ मोरिंगा के पत्तों में पालक से भी ज्यादा आयरन होता है। इसमें विटामिन C भी होता है, जो आयरन को आसानी से शरीर में पहुंचाता है पाउडर, सूप या सांभर में इस्तेमाल करें 5. चौलाई (Amaranth Leaves) — आयरन + कैल्शियम का खजाना चौलाई के पत्ते आयरन और कैल्शियम से भरपूर होते हैं। ये खून को मजबूत बनाते हैं स्टर-फ्राई या सब्जी के रूप में खाएं 6. सरसों का साग (Mustard Greens) — सर्दियों की ताकत सरसों का साग आयरन के साथ विटामिन A, C और K से भरपूर होता है। यह शरीर को डिटॉक्स करता है और खून साफ करता है सर्दियों में इसे जरूर डाइट में शामिल करें जरूरी टिप्स आयरन के साथ विटामिन C लेना जरूरी है (नींबू, आंवला) चाय/कॉफी खाने के तुरंत बाद न लें (आयरन अवशोषण कम होता है) संतुलित मात्रा में सेवन करें
नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों में तेज धूप, बढ़ता पसीना और ऑयल प्रोडक्शन स्किन के लिए बड़ी चुनौती बन जाते हैं। यही कारण है कि इस मौसम में चेहरे पर बार-बार मुहांसे (Acne) उभरते हैं। पसीना और धूल-मिट्टी की वजह से त्वचा पर गंदगी जमती है, जिससे पिंपल्स बढ़ते हैं। हाथों से बार-बार चेहरे को छूना भी बैक्टीरिया फैलाता है और समस्या को और गंभीर बना देता है। सही स्किन केयर और जीवनशैली अपनाकर इस समस्या से राहत पाई जा सकती है। दिन में दो बार चेहरा धोएं गर्मी में चेहरे को साफ रखना सबसे जरूरी है। दिन में कम से कम दो बार हल्के फेस वॉश से चेहरा धोएं। इससे अतिरिक्त तेल और गंदगी हटती है और पोर्स क्लियर रहते हैं। ऑयल-फ्री प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल हेल्दी स्किन के लिए ऑयल-फ्री मॉइस्चराइज़र और सनस्क्रीन का उपयोग जरूरी है। ये त्वचा को हाइड्रेट रखते हैं और सूरज की हानिकारक किरणों से भी बचाते हैं। आइस थेरेपी अपनाएं हफ्ते में दो से तीन बार आइस फेशियल करने से त्वचा की सूजन और रेडनेस कम होती है। बर्फ को सीधे चेहरे पर न लगाएं, बल्कि किसी कपड़े में लपेटकर 2-4 मिनट हल्के हाथों से रगड़ें। घरेलू नुस्खे नीम का रस या एलोवेरा जेल रात में लगाने से त्वचा को ठंडक और मजबूती मिलती है। गुलाब जल भी चेहरे को हाइड्रेटेड और ग्लोइंग बनाता है। चेहरे को बार-बार न छुएं हाथों की गंदगी से बैक्टीरिया फैलते हैं। इसलिए चेहरे को अनावश्यक न छुएं और हाथ हमेशा साफ रखें। हेल्दी डाइट और पर्याप्त पानी हरी सब्जियां, फल और पर्याप्त पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है और त्वचा में सुधार आता है। पर्याप्त नींद लें नींद की कमी से स्किन की समस्या बढ़ सकती है। हर मौसम में पूरी नींद लेना जरूरी है। क्या न करें ज्यादा केमिकल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल न करें। पिंपल्स को दबाकर न निकलें और गंदे तौलिये या तकिये का उपयोग बंद करें।
Vitamin B12 Deficiency Symptoms: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में थकान, कमजोरी और फोकस की कमी आम हो गई है। लेकिन अगर ये समस्याएं लगातार बनी रहें, तो इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। Indian Journal of Endocrinology and Metabolism में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, उत्तर भारत के करीब 47% लोग विटामिन B12 की कमी से जूझ रहे हैं। इसे ‘साइलेंट’ समस्या इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं। क्यों जरूरी है Vitamin B12? विटामिन B12 शरीर के कई जरूरी कामों के लिए अहम है: रेड ब्लड सेल्स (RBC) बनाने में मदद नर्वस सिस्टम को स्वस्थ रखना खाने को ऊर्जा में बदलना दिमाग और याददाश्त को सपोर्ट करना इसकी कमी होने पर शरीर अंदर ही अंदर कमजोर होने लगता है। किन लोगों को ज्यादा खतरा? शाकाहारी (Vegetarians) बुजुर्ग लोग लंबे समय तक कुछ दवाएं लेने वाले जिनका शरीर B12 सही से अब्जॉर्ब नहीं कर पाता ICMR के अनुसार, शाकाहारियों में इसकी कमी ज्यादा देखी जाती है, क्योंकि B12 मुख्य रूप से एनिमल-बेस्ड फूड में पाया जाता है। B12 की कमी के शुरुआती और गंभीर लक्षण शुरुआती लक्षण: हमेशा थकान और कमजोरी ध्यान न लगना (Brain Fog) हल्की सांस फूलना गंभीर लक्षण: हाथ-पैरों में झुनझुनी याददाश्त कमजोर होना चलने-फिरने में बैलेंस बिगड़ना अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह न्यूरोलॉजिकल डैमेज तक पहुंच सकता है। किन चीजों में मिलता है Vitamin B12? नॉन-वेज सोर्स: अंडा मछली चिकन दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स वेज ऑप्शन: दूध, दही, पनीर फोर्टिफाइड सीरियल्स प्लांट-बेस्ड मिल्क ध्यान दें: सामान्य शाकाहारी खाने में B12 बहुत कम होता है। कैसे करें बचाव? संतुलित और पोषक आहार लें जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स लें नियमित रूप से ब्लड टेस्ट कराते रहें लंबे समय तक थकान को नजरअंदाज न करें