स्वास्थ्य

Eye Symptoms That May Signal Liver Cancer

Liver Cancer Symptoms: आंखों में दिखें ये संकेत तो हो जाएं सावधान, लिवर की बीमारी का हो सकता है संकेत

surbhi मार्च 12, 2026 0
Yellowing eyes and eyelids indicating possible liver disease or early liver cancer symptoms
Eye Signs of Liver Cancer

 

हमारी आंखें सिर्फ देखने का माध्यम ही नहीं हैं, बल्कि कई बार शरीर में होने वाली बीमारियों के संकेत भी देती हैं। खासकर Liver Cancer और अन्य लिवर से जुड़ी बीमारियों के कुछ लक्षण आंखों में भी दिखाई दे सकते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार अगर इन संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए तो गंभीर बीमारी से बचाव संभव हो सकता है।

 

शरीर में लिवर की अहम भूमिका

लिवर हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने, पाचन में मदद करने और पोषक तत्वों को प्रोसेस करने का काम करता है। लेकिन लंबे समय तक शराब का सेवन, Hepatitis B या Hepatitis C संक्रमण, मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और फैटी लिवर जैसी समस्याएं लिवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

यदि लिवर लंबे समय तक खराब रहता है तो यह स्थिति Cirrhosis में बदल सकती है, जो आगे चलकर लिवर फेलियर या लिवर कैंसर का कारण बन सकती है।

 

आंखों में दिखने वाले लिवर की बीमारी के लक्षण

1. आंखों का पीला पड़ना (पीलिया)
लिवर की गंभीर बीमारी का सबसे आम लक्षण आंखों का पीला पड़ना है, जिसे Jaundice कहा जाता है। यह तब होता है जब शरीर में बिलीरुबिन नामक पदार्थ बढ़ जाता है और लिवर उसे बाहर नहीं निकाल पाता।

2. आंखों में सूखापन
लिवर की समस्या के कारण शरीर में विटामिन A की कमी हो सकती है, जिससे आंखों में सूखापन और जलन की समस्या होने लगती है।

3. रात में देखने में परेशानी
विटामिन A की कमी के कारण कई लोगों को रात में साफ दिखाई देने में दिक्कत होने लगती है।

4. पलकों के आसपास पीले दाग या गांठ
कुछ मामलों में पलकों के आसपास पीले रंग की छोटी गांठें दिखाई देती हैं, जिन्हें Xanthelasma कहा जाता है। यह शरीर में फैट और लिवर से जुड़ी समस्याओं का संकेत हो सकता है।

 

कब बढ़ जाता है खतरा?

एक्सपर्ट्स के अनुसार जब लिवर में ट्यूमर बढ़ने लगता है, तो वह बाइल डक्ट पर दबाव डाल सकता है। इससे शरीर में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाता है, जिसके कारण आंखें और त्वचा पीली पड़ सकती हैं। इसके साथ ही गहरा पेशाब, खुजली, थकान और भूख कम लगना जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

 

समय पर जांच है जरूरी

डॉक्टरों का कहना है कि अगर आंखों में इस तरह के लक्षण लंबे समय तक दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। शुरुआती चरण में बीमारी का पता चलने पर इलाज और लाइफस्टाइल में बदलाव से लिवर को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

 

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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जामुन के बीज फेंकने से पहले जान लें इसके चौंकाने वाले फायदे

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों में मिलने वाला जामुन स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है। अक्सर लोग जामुन खाने के बाद इसके बीजों को बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन आयुर्वेद और हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन छोटे बीजों में कई जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जामुन के बीजों में एंटीऑक्सिडेंट्स, फाइबर, आयरन, कैल्शियम और कई महत्वपूर्ण तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचा सकते हैं।   ब्लड शुगर कंट्रोल में मिल सकती है मदद जामुन के बीजों को लंबे समय से डायबिटीज कंट्रोल करने में उपयोगी माना जाता रहा है। इनमें जैंबोलिन और जैंबोसिन जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में शुगर के अवशोषण की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद कर सकते हैं। यही कारण है कि कई लोग जामुन के बीजों का पाउडर बनाकर सीमित मात्रा में सेवन करते हैं। हालांकि, जो लोग पहले से डायबिटीज की दवा ले रहे हैं, उन्हें इसका सेवन डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए।   पाचन तंत्र को बनाते हैं मजबूत अगर किसी को कब्ज, गैस या अपच जैसी समस्याएं रहती हैं, तो जामुन के बीज फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इनमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करता है। नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन करने से पेट साफ रखने और ब्लोटिंग जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है।   वजन और इम्युनिटी के लिए भी उपयोगी जामुन के बीजों में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स शरीर में फ्री रेडिकल्स से लड़ने में मदद करते हैं, जिससे सूजन कम हो सकती है और इम्युनिटी मजबूत होती है। वहीं इनमें मौजूद फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे ओवरईटिंग कम हो सकती है और वजन नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।   हार्ट और लिवर हेल्थ को मिल सकता है फायदा विशेषज्ञों के अनुसार, जामुन के बीजों में फ्लेवोनॉइड्स और एलैजिक एसिड जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में सूजन कम करने और हार्ट हेल्थ को सपोर्ट करने में सहायक हो सकते हैं। इन्हें लिवर के लिए भी उपयोगी माना जाता है, हालांकि इसे किसी मेडिकल ट्रीटमेंट का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।   सेवन से पहले रखें सावधानी जामुन के बीजों को धोकर सुखाने के बाद उनका पाउडर बनाकर इस्तेमाल किया जाता है। आमतौर पर आधा या एक चम्मच पाउडर गुनगुने पानी के साथ लिया जाता है। लेकिन अधिक मात्रा में सेवन करने से ब्लड शुगर बहुत कम हो सकता है या पाचन संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को इसका सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।

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हेल्दी समझकर न करें ये गलती, कॉपर बोतल का गलत इस्तेमाल पड़ सकता है भारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। Copper Water Bottle में रखा पानी पीना आजकल लोगों की हेल्दी लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है। आयुर्वेद में भी तांबे के बर्तन में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना गया है। माना जाता है कि इससे पाचन बेहतर होता है, इम्यूनिटी मजबूत होती है और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद मिलती है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि कॉपर बोतल का गलत इस्तेमाल फायदे की जगह नुकसान भी पहुंचा सकता है।   एसिडिक चीजें मिलाना पड़ सकता है भारी कई लोग कॉपर बोतल के पानी में नींबू या अन्य खट्टी चीजें मिलाकर पीते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह सबसे बड़ी गलती है। नींबू में मौजूद एसिड तांबे के साथ रिएक्शन कर सकता है, जिससे शरीर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इससे उल्टी, मतली और पेट खराब जैसी समस्याएं हो सकती हैं।   बहुत गर्म या ठंडा पानी रखना सही नहीं विशेषज्ञ बताते हैं कि कॉपर बोतल में बहुत ज्यादा गर्म या अत्यधिक ठंडा पानी नहीं रखना चाहिए। तापमान में अत्यधिक बदलाव तांबे के गुणों को प्रभावित कर सकता है। इससे पानी की गुणवत्ता पर असर पड़ता है और बोतल भी जल्दी खराब हो सकती है।   पूरे दिन कॉपर वॉटर पीना नुकसानदायक कुछ लोग पूरे दिन सिर्फ कॉपर बोतल का पानी पीते रहते हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा कॉपर शरीर में पहुंचने पर नुकसान हो सकता है। शरीर में तांबे की अधिक मात्रा बढ़ने से मतली, उल्टी, पेट दर्द और संक्रमण जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।   कितना पानी पीना है सही? विशेषज्ञों के मुताबिक रातभर कॉपर बोतल में पानी स्टोर करके सुबह पीना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। पूरे दिन में करीब 250 से 500 मिलीलीटर कॉपर वॉटर पर्याप्त माना जाता है। कॉपर बोतल का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह सेहत के लिए लाभकारी हो सकता है, लेकिन लापरवाही नुकसान का कारण भी बन सकती है।

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Dupilumab पर हुई एक नई स्टडी में सामने आया है कि यह दवा Prurigo Nodularis (PN) से पीड़ित मरीजों को पहले से कहीं अधिक व्यापक लाभ दे सकती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, भले ही कुछ मरीज क्लीनिकल ट्रायल के सबसे सख्त ट्रीटमेंट लक्ष्य तक नहीं पहुंचे, फिर भी उनमें खुजली, त्वचा के घावों और जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। क्या है Prurigo Nodularis? Prurigo Nodularis एक गंभीर और लंबे समय तक रहने वाली त्वचा संबंधी बीमारी है, जिसमें शरीर पर बेहद खुजली वाले गांठदार घाव (nodules) बन जाते हैं। यह बीमारी मरीजों की: नींद मानसिक स्वास्थ्य दैनिक जीवन सामाजिक गतिविधियों पर गहरा असर डाल सकती है। दो बड़े क्लीनिकल ट्रायल्स का विश्लेषण यह नई स्टडी LIBERTY-PN PRIME और PRIME2 नामक दो बड़े क्लीनिकल ट्रायल्स के डेटा पर आधारित थी। पहले के परिणामों में पाया गया था कि 24 सप्ताह के इलाज के बाद: Dupilumab लेने वाले 35.3% मरीजों में खुजली और त्वचा दोनों में बड़ा सुधार हुआ जबकि placebo समूह में यह आंकड़ा केवल 8.9% था लेकिन वैज्ञानिक यह जानना चाहते थे कि जो मरीज “optimal response” तक नहीं पहुंचे, क्या उन्हें भी फायदा मिला? लक्ष्य पूरा न होने पर भी मरीजों को मिला फायदा नई स्टडी में उन मरीजों का विश्लेषण किया गया जो 24 सप्ताह बाद भी ट्रायल के सबसे सख्त लक्ष्य तक नहीं पहुंचे थे। इसके बावजूद Dupilumab लेने वाले कई मरीजों में महत्वपूर्ण सुधार देखे गए: 61% से अधिक मरीजों की जीवन गुणवत्ता में बड़ा सुधार 55.8% मरीजों ने अपनी बीमारी को “हल्का” या “न के बराबर” बताया आधे से ज्यादा मरीजों में 75% तक त्वचा के घाव भर गए इन सभी परिणामों की तुलना placebo समूह से की गई और अंतर सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण पाया गया। सिर्फ “पूर्ण इलाज” ही सफलता नहीं शोधकर्ताओं का कहना है कि किसी इलाज की सफलता को केवल कठोर ट्रायल एंडपॉइंट्स से नहीं मापना चाहिए। कई मरीजों को: खुजली से राहत त्वचा में सुधार बेहतर नींद रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी जैसे फायदे मिले, भले ही वे “पूर्ण या लगभग पूर्ण” सुधार की श्रेणी में नहीं आए। लंबी अवधि की रणनीति पर जोर विशेषज्ञों ने कहा कि यह अध्ययन PN के इलाज में “Treat-to-Target” यानी लंबे समय तक लक्ष्य आधारित उपचार रणनीति की जरूरत को मजबूत करता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, आंशिक सुधार वाले मरीजों में भी Dupilumab का इलाज जारी रखने से लंबे समय में और बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।  

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