पलामू। झारखंड के पलामू जिले में घरेलू विवाद का एक दर्दनाक मामला सामने आया है। रामगढ़ थाना क्षेत्र के पिपराही नावाडीह गांव में शराब खरीदने के लिए पत्नी से पैसे नहीं मिलने पर एक व्यक्ति ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान नंद यादव के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। 400 रुपये की मांग पर बढ़ा विवाद जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात नंद यादव शराब के नशे में घर लौटा था। घर पहुंचने के बाद उसने पत्नी से शराब खरीदने के लिए 400 रुपये मांगे। पत्नी द्वारा पैसे देने से इनकार करने पर दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। विवाद इतना बढ़ गया कि नंद यादव ने कथित तौर पर पत्नी के साथ मारपीट भी की। इसके बाद वह अपने कमरे में चला गया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। काफी देर तक बाहर नहीं आने पर परिजनों और ग्रामीणों को शक हुआ। जब दरवाजा नहीं खुला तो ग्रामीणों ने उसे तोड़कर अंदर प्रवेश किया, जहां नंद यादव गंभीर हालत में मिला। अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित ग्रामीणों ने तत्काल उसे रामगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर किया गया। वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस कर रही मामले की जांच रामगढ़ थाना प्रभारी ओमप्रकाश शाह ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पति-पत्नी के बीच पैसे को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद यह घटना हुई। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव, अवसाद या आत्महत्या जैसे विचारों से जूझ रहा है, तो किसी भरोसेमंद परिजन, मित्र या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से तुरंत संपर्क करें। समय पर मदद मिलना जीवन बचा सकता है।
पलामू। झारखंड के पलामू जिले में पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली एक बड़ी घटना सामने आई है। हैदरनगर थाना से आठ वर्षीय मासूम की हत्या और एक दंपती पर जानलेवा हमले के मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी चितरंजन पासवान शुक्रवार तड़के पुलिस हिरासत से फरार हो गया। आरोपी के फरार होने की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और उसे पकड़ने के लिए जिलेभर में सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया। हत्या और जानलेवा हमले का है आरोपी पुलिस के अनुसार, फरार आरोपी चितरंजन पासवान हैदरनगर थाना क्षेत्र के बिंदु बीघा गांव का निवासी है। उस पर एक आठ वर्षीय बच्चे की बेरहमी से हत्या करने और एक दंपती को गंभीर रूप से घायल करने का आरोप है। घटना के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर थाना हाजत में रखा था। हालांकि, शुक्रवार सुबह वह पुलिसकर्मियों को चकमा देकर हिरासत से भाग निकलने में सफल हो गया। आरोपी की तलाश में ताबड़तोड़ छापेमारी घटना की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमों का गठन किया। पुलिस उसके संभावित ठिकानों, रिश्तेदारों और परिचितों के घरों पर लगातार छापेमारी कर रही है। साथ ही आसपास के थाना क्षेत्रों को भी अलर्ट कर दिया गया है, ताकि आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सके। पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल थाने से हत्या जैसे गंभीर मामले के आरोपी का फरार हो जाना पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और लापरवाही पर सवाल खड़े कर रहा है। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भय और नाराजगी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि जब पुलिस हिरासत से ही आरोपी भाग सकता है, तो आम लोगों की सुरक्षा पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। फिलहाल पुलिस आरोपी की तलाश में लगातार अभियान चला रही है। वहीं, यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी किन परिस्थितियों में थाने से फरार हुआ और इस मामले में कहीं पुलिसकर्मियों की लापरवाही या किसी की मिलीभगत तो नहीं थी।
पलामू। झारखंड के पलामू जिले के पड़वा प्रखंड स्थित सिक्का गांव में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की 10 दिनों के भीतर हुई मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। शुरुआत में इन मौतों को रहस्यमय बीमारी से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन अब जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। प्राथमिक जांच के अनुसार, परिवार बीमारी के इलाज के लिए आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ झाड़-फूंक का सहारा ले रहा था और ओझा की सलाह पर राख का सेवन कर रहा था। आशंका है कि यही राख शरीर में जाकर विषाक्त प्रभाव पैदा कर गई, जिससे एक के बाद एक पांच लोगों की मौत हो गई। कुलदीप महतो की मौत के बाद बढ़ता गया मौत का सिलसिला जानकारी के अनुसार, सिक्का गांव निवासी कुलदीप महतो और उनकी बेटी सबसे पहले बीमार पड़े। 19 जून को कुलदीप महतो की मौत हुई, जबकि अगले दिन उनकी बेटी ने दम तोड़ दिया। इसके बाद परिवार के अन्य सदस्य झाड़-फूंक कराने के लिए लेस्लीगंज के पूर्णाडीह क्षेत्र पहुंचे। इसी दौरान परिवार के लोग लगातार राख का सेवन भी करते रहे। 26 जून को कुलदीप की दूसरी बेटी इंदु कुमारी की मौत हो गई। इसके बाद 28 जून को बहू श्वेता कुमारी और 29 जून को बेटे नकुल महतो ने इलाज के दौरान रांची के रिम्स अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस तरह महज 10 दिनों में परिवार के पांच सदस्य काल के गाल में समा गए। जांच में जुटी स्वास्थ्य विभाग की टीम परिवार के अन्य सदस्य, जिनमें कुलदीप महतो की पत्नी, एक बेटा और एक पोता शामिल हैं, अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। स्वास्थ्य विभाग ने राख के नमूने, खाद्य सामग्री और सरसों तेल के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। मृतकों का विसरा भी सुरक्षित रखा गया है। पलामू के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पूरे मामले की वैज्ञानिक जांच कराई जा रही है। वहीं मेडिकल विशेषज्ञों ने ड्रॉप्सी बीमारी सहित अन्य संभावित कारणों की भी जांच की बात कही है। यह घटना अंधविश्वास और चिकित्सा से दूरी के खतरनाक परिणामों को उजागर करती है।
पलामू। झारखंड के पलामू जिले का मेदिनीनगर आज भी गंगा-जमुनी तहजीब और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बना हुआ है। यहां वर्ष 1937 से चली आ रही एक अनोखी परंपरा आज भी कायम है, जिसमें मुहर्रम और रामनवमी के अवसर पर दोनों समुदाय एक-दूसरे के जुलूस का स्वागत करते हैं। शुक्रवार को निकले मुहर्रम जुलूस में भी इस परंपरा की झलक देखने को मिली, जब रामनवमी पूजा समिति के सदस्यों ने पूरे उत्साह के साथ जुलूस का स्वागत किया। 1937 से निभाई जा रही है भाईचारे की परंपरा मेदिनीनगर में मुहर्रम के दौरान रामनवमी समिति जुलूस का स्वागत करती है, जबकि रामनवमी के अवसर पर मुहर्रम इंतजामिया समिति रामनवमी जुलूस का सम्मान करती है। दोनों समितियां एक-दूसरे को सम्मानित भी करती हैं। महावीर नवयुवक दल (रामनवमी समिति) के अध्यक्ष मंगल सिंह ने बताया कि यह परंपरा उनके पूर्वजों के समय से चली आ रही है और आज भी उसी आत्मीयता के साथ निभाई जा रही है। नमाज के दौरान रामनवमी समिति ने संभाली जिम्मेदारी शुक्रवार को जुमे की नमाज के दौरान जब मुस्लिम समुदाय के लोग मस्जिद गए, तब मुहर्रम जुलूस की देखरेख की जिम्मेदारी रामनवमी समिति के सदस्यों ने संभाली। यह दृश्य दोनों समुदायों के बीच विश्वास और आपसी सम्मान का प्रतीक बना। मुहर्रम इंतजामिया समिति के अध्यक्ष जीशान खान ने कहा कि डाल्टनगंज जैसी परंपरा शायद ही देश के किसी अन्य हिस्से में देखने को मिले। दोनों समुदाय हर पर्व पर एक-दूसरे का सहयोग करते हैं और सामाजिक एकता का संदेश देते हैं। प्रशासन ने भी की सराहना पलामू के उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने इस परंपरा को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि वर्षों से एक-दूसरे का सम्मान और स्वागत करने की यह परंपरा देश की सामाजिक ताकत का प्रतीक है। वहीं पुलिस अधीक्षक कपिल चौधरी ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में भाईचारा और आपसी विश्वास को मजबूत करते हैं। भीषण गर्मी के कारण बदला जुलूस का समय इस बार भीषण गर्मी को देखते हुए मेदिनीनगर में मुहर्रम जुलूस दोपहर बाद निकाले गए। मुहर्रम इंतजामिया समिति के अनुसार, इससे लोगों को गर्मी से राहत मिली और बिजली आपूर्ति भी अधिक प्रभावित नहीं हुई। यह आयोजन एक बार फिर पलामू की सांप्रदायिक सद्भाव की पहचान बनकर सामने आया।
पलामू। पलामू और डालटनगंज के रेल यात्रियों के लिए बड़ी खबर है। रेलवे ने सोन नगर से पतरातू रेलखंड के बीच चल रहे थर्ड लाइन निर्माण कार्य को लेकर कई ट्रेनों को रद्द और डायवर्ट करने का फैसला लिया है। रेलवे की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार 22 जून से 28 जून तक 14 पैसेंजर ट्रेनें रद्द रहेंगी, जबकि 16 एक्सप्रेस ट्रेनों का रूट 27 जून तक बदला गया है। थर्ड लाइन को जोड़ने वाले अंतिम कार्य की वजह से बदलाव रेलवे अधिकारियों के मुताबिक छिपादोहर और मंगरा रेलवे स्टेशन के बीच थर्ड लाइन को जोड़ने का अंतिम कार्य चल रहा है। इसी वजह से ट्रेनों के परिचालन में बदलाव किया गया है। यह परियोजना पूरी होने के बाद इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही और अधिक सुगम होने की उम्मीद है। डालटनगंज होकर गुजरने वाली कई महत्वपूर्ण एक्सप्रेस ट्रेनों को गढ़वा रोड, गया, डेहरी ऑन सोन और बरकाकाना के रास्ते चलाया जाएगा। इनमें नई दिल्ली-रांची राजधानी एक्सप्रेस, नई दिल्ली-रांची गरीब रथ, आनंद विहार-हटिया एक्सप्रेस, रांची-बनारस इंटरसिटी, शक्तिपुंज एक्सप्रेस, जम्मूतवी-हावड़ा एक्सप्रेस समेत कई प्रमुख ट्रेनें शामिल हैं। रांची-सासाराम एक्सप्रेस 23 से 27 जून तक रद्द रहेगी पलामू क्षेत्र की लाइफलाइन मानी जाने वाली रांची-सासाराम एक्सप्रेस 23 से 27 जून तक रद्द रहेगी। इसके अलावा बरकाकाना, बरवाडीह, डेहरी ऑन सोन, चोपन और गोमो रूट की कई पैसेंजर ट्रेनें भी प्रभावित रहेंगी। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन का स्टेटस अवश्य जांच लें, ताकि किसी तरह की परेशानी से बचा जा सके।
पलामू। झारखंड के पलामू जिले से होकर गुजरने वाली ट्रेनों को लेकर रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। सोन नगर-पतरातू रेलखंड पर थर्ड लाइन निर्माण कार्य के कारण डालटनगंज रूट से गुजरने वाली 14 पैसेंजर ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है, जबकि 16 एक्सप्रेस ट्रेनों का मार्ग अस्थायी रूप से बदल दिया गया है। रेलवे के अनुसार यह व्यवस्था 22 से 28 जून तक प्रभावी रहेगी, जबकि एक्सप्रेस ट्रेनों का डायवर्जन 27 जून तक लागू रहेगा। थर्ड लाइन निर्माण बना वजह रेलवे अधिकारियों के मुताबिक सोन नगर से पतरातू के बीच तीसरी रेल लाइन का निर्माण तेजी से चल रहा है। अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन छिपादोहर और मंगरा स्टेशन के बीच तीसरी लाइन को जोड़ने का काम जारी है। इसी कारण सुरक्षा और परिचालन को ध्यान में रखते हुए कई ट्रेनों के परिचालन में बदलाव किया गया है। 16 एक्सप्रेस ट्रेनों का बदला गया रूट डालटनगंज होकर चलने वाली कई महत्वपूर्ण एक्सप्रेस ट्रेनों को अब गढ़वा रोड, गया, डेहरी ऑन सोन, बरकाकाना और चोपन मार्ग से संचालित किया जाएगा। प्रभावित ट्रेनों में विशाखापट्टनम-वाराणसी एक्सप्रेस, धनबाद-भोपाल एक्सप्रेस, नई दिल्ली-रांची गरीब रथ, नई दिल्ली-रांची राजधानी, आनंद विहार-हटिया एक्सप्रेस, टाटा-जम्मूतवी एक्सप्रेस, जम्मूतवी-हावड़ा एक्सप्रेस, रांची-वाराणसी इंटरसिटी और शक्तिपुंज एक्सप्रेस समेत कुल 16 ट्रेनें शामिल हैं। 14 पैसेंजर ट्रेनें रहेंगी रद्द रेलवे ने रांची-सासाराम पैसेंजर सहित कुल 14 पैसेंजर ट्रेनों को अलग-अलग तिथियों में रद्द किया है। इसके अलावा बरकाकाना-डेहरी ऑन सोन, बरवाडीह-चोपन, गोमो-बरवाडीह, बरकाकाना-वाराणसी और डेहरी ऑन सोन-बरवाडीह जैसी महत्वपूर्ण पैसेंजर सेवाएं भी प्रभावित रहेंगी। रेलवे ने यात्रियों से यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जांच करने और वैकल्पिक यात्रा योजना बनाने की अपील की है, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
पलामू। झारखंड के पलामू जिले के पड़वा थाना क्षेत्र स्थित सिक्का गांव में एक ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। शरीर में सूजन की शिकायत के बीच पिता और पुत्री की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जबकि परिवार के चार अन्य सदस्य गंभीर रूप से बीमार हैं। सभी को बेहतर इलाज के लिए रांची स्थित रिम्स रेफर किया गया है। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है और स्वास्थ्य विभाग की टीम मामले की जांच में जुट गई है। कुछ घंटों के अंतराल पर पिता-पुत्री ने तोड़ा दम जानकारी के अनुसार, सिक्का गांव निवासी कुलदीप महतो की शुक्रवार देर रात अचानक तबीयत बिगड़ गई। शरीर में सूजन की शिकायत के साथ उनकी हालत तेजी से खराब हुई और देर रात करीब एक बजे उनकी मौत हो गई। परिवार इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि शनिवार सुबह करीब आठ बजे उनकी पुत्री बबीता कुमारी ने भी दम तोड़ दिया। कुछ ही घंटों के भीतर हुई दो मौतों से पूरे गांव में शोक और भय का माहौल है। चार अन्य सदस्यों की हालत गंभीर घटना के बाद कुलदीप महतो की पत्नी लाखो देवी, पुत्र नकुल महतो, पुत्रवधू श्वेता देवी और एक अन्य बेटी की भी तबीयत बिगड़ गई। सभी को पहले मेदिनीनगर स्थित एमएमसीएच में भर्ती कराया गया, जहां से उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने रांची के रिम्स रेफर कर दिया। फिलहाल उनका इलाज जारी है। स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच ग्रामीणों के अनुसार, परिवार के सभी सदस्यों के शरीर में सूजन की शिकायत थी, जिससे किसी अज्ञात बीमारी की आशंका जताई जा रही है। हालांकि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक किसी भी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. श्रवण कुमार मेहता ने बताया कि मेडिकल टीम गांव पहुंचकर जांच कर रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी तथा मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। इस घटना के बाद पूरे सिक्का गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। ग्रामीणों में भय का माहौल है और सभी की नजरें स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। फिलहाल प्रशासन लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और जांच पूरी होने तक धैर्य बनाए रखने की अपील कर रहा है।
पलामू। जिले में भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। पलामू पुलिस अधीक्षक (एसपी) कपिल चौधरी ने गुरुवार को आयोजित जिला स्तरीय क्राइम मीटिंग में सभी थाना प्रभारियों को भू-माफियाओं की सूची उपलब्ध कराते हुए उनके सत्यापन और कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए। बैठक में अपराध नियंत्रण, लंबित मामलों के निष्पादन और फरार आरोपियों पर कार्रवाई को लेकर भी विस्तृत समीक्षा की गई। भू-माफियाओं के सत्यापन का अभियान होगा शुरू क्राइम मीटिंग के दौरान एसपी ने बताया कि जिले में अलग-अलग श्रेणियों के भू-माफियाओं की पहचान कर सूची तैयार की गई है। इस सूची को सभी थाना प्रभारियों को सौंप दिया गया है। संबंधित व्यक्तियों को थाने बुलाकर उनका सत्यापन किया जाएगा और जांच में दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का उद्देश्य अवैध जमीन कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाना है। लंबित मामलों के जल्द निष्पादन पर जोर बैठक में वर्षों से लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए एसपी ने सभी थाना प्रभारियों को अनुसंधान में तेजी लाने और लंबित वारंटों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अपराध नियंत्रण के लिए मुकदमों का समय पर निष्पादन और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी बेहद जरूरी है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को मिला सम्मान एसपी कपिल चौधरी ने बताया कि मई माह में दर्ज मामलों की तुलना में पुलिस ने उससे अधिक मामलों का अनुसंधान पूरा किया है, जो बेहतर पुलिसिंग का संकेत है। उत्कृष्ट कार्य करने वाले थाना प्रभारियों को बैठक के दौरान पुरस्कृत भी किया गया, जबकि अगले महीने के लिए सभी अधिकारियों को नए लक्ष्य सौंपे गए। पुराने अपराधियों पर भी रहेगी नजर क्राइम मीटिंग में पिछले दस वर्षों में विभिन्न अपराधों में शामिल आरोपियों के सत्यापन और जेल से रिहा होकर बाहर आए अपराधियों की गतिविधियों की भी समीक्षा की गई। बैठक में जिले के सभी एसडीपीओ, इंस्पेक्टर और थाना प्रभारी मौजूद रहे। पुलिस ने स्पष्ट किया कि अपराध और अवैध भूमि कारोबार पर सख्ती से कार्रवाई जारी रहेगी।
पलामू। झारखंड के पलामू जिले के पांडू थाना क्षेत्र में 15 दिनों से लापता महिला का कंकाल जंगल से मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। मृतका की पहचान भटवलिया गांव निवासी सुनीता देवी के रूप में हुई है, जो 29 मई को जंगल में लकड़ी चुनने गई थीं और उसके बाद घर वापस नहीं लौटी थीं। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। लकड़ी चुनने गई थी, फिर नहीं लौटी घर जानकारी के अनुसार, सुनीता देवी अक्सर हुसैनाबाद थाना क्षेत्र के लोहबंधा-माहूर जंगल में लकड़ी चुनने जाती थीं। 29 मई को भी वह रोज की तरह जंगल गई थीं, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटीं। परिजनों ने पहले अपने स्तर पर उनकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई। मवेशी चराने गए ग्रामीणों को मिली लाश शुक्रवार को पांडू और हुसैनाबाद थाना क्षेत्रों की सीमा से लगे जंगल में कुछ ग्रामीण मवेशी चराने पहुंचे। इस दौरान उन्हें इलाके से तेज दुर्गंध आने का एहसास हुआ। जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो वहां एक महिला का कंकाल पड़ा मिला। सूचना मिलते ही पांडू थाना पुलिस और मृतका के परिजन घटनास्थल पर पहुंचे। कपड़ों के आधार पर हुई पहचान परिजनों ने शव के पास मिले कपड़ों के आधार पर महिला की पहचान सुनीता देवी के रूप में की। बिश्रामपुर के एसडीपीओ चिरंजीवी कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया कपड़ों के आधार पर पहचान की गई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों का पता चल सकेगा। पुलिस परिजनों के आवेदन के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी और सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है। मेदिनीनगर में ट्रेन की चपेट में आने से महिला की मौत उधर, मेदिनीनगर टाउन थाना क्षेत्र के शांतिपुरी इलाके में एक अन्य हादसे में लक्ष्मी देवी नामक महिला की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। वह छतरपुर थाना क्षेत्र के खाटीन गांव की रहने वाली थीं और अपनी बेटी से मिलने मेदिनीनगर जा रही थीं। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।
पलामू। झारखंड के पलामू जिले के रामगढ़ प्रखंड स्थित ढोढराही गांव आज एक दर्दनाक पहचान के साथ चर्चा में है। अनुसूचित जाति बहुल इस गांव में टीबी (क्षय रोग) ने पिछले एक दशक में 20 से अधिक पुरुषों की जान ले ली है, जिसके कारण गांव को अब ‘विधवाओं का गांव’ कहा जाने लगा है। गांव में लगभग 25 परिवार रहते हैं, जिनमें से 20 से अधिक परिवारों की महिलाएं विधवा हो चुकी हैं। मजदूरी के लिए जाते थे बाहर, बीमारी बन गई मौत की वजह ग्रामीणों के अनुसार, गांव के अधिकांश पुरुष बिहार के रोहतास जिले के करवंदिया क्षेत्र में स्टोन माइंस में मजदूरी करने जाते थे। वहीं काम करने के दौरान कई लोग बीमार पड़े और बाद में उनकी मौत हो गई। वर्ष 2016-17 के बाद से टीबी के मामलों में तेजी आई और एक-एक कर कई परिवारों के कमाने वाले सदस्य काल के गाल में समा गए। महिलाओं पर परिवार की जिम्मेदारी पति की मौत के बाद गांव की महिलाएं अब मजदूरी, महुआ चुनने और ईंट-भट्ठों में काम कर परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। कई बच्चों को भी कम उम्र में मजदूरी करनी पड़ रही है। कुछ परिवार गांव छोड़कर अन्य स्थानों पर पलायन कर चुके हैं, जिसके कारण कई घरों में ताले लटके हुए हैं। सवालों के घेरे में बीमारी का कारण ग्रामीणों का कहना है कि टीबी से सबसे ज्यादा पुरुषों की मौत हुई है, जबकि महिलाओं और बच्चों में ऐसे मामले सामने नहीं आए हैं। वर्ष 2022 में हुए स्वास्थ्य सर्वे में गांव में तीन टीबी मरीज मिले थे, लेकिन इसके बाद कोई बड़ा मेडिकल कैंप नहीं लगाया गया। स्वास्थ्य विभाग करेगा विशेष जांच पलामू के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने कहा है कि गांव में विशेष मेडिकल कैंप लगाया जाएगा। एक्स-रे और स्क्रीनिंग के जरिए सभी ग्रामीणों की जांच होगी। विभाग यह भी पता लगाएगा कि मौतें केवल टीबी से हुईं या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी जिम्मेदार है। गांव की स्थिति ने स्वास्थ्य व्यवस्था और ग्रामीण जीवन की चुनौतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पलामू। पलामू जिले के मेदिनीनगर शहर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से करीब 1 करोड़ 90 लाख रुपये की लागत से लगाए गए 113 सीसीटीवी कैमरे पिछले तीन महीनों से बंद पड़े हैं। नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न चौक-चौराहों पर लगाए गए ये कैमरे शहर की निगरानी और अपराध नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे थे, लेकिन अब इनके खराब हो जाने से पूरी व्यवस्था प्रभावित हो गई है। कैमरों के बंद होने से अपराधियों की पहचान और घटनाओं की निगरानी में पुलिस को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। नवंबर 2025 में समाप्त हुआ मेंटेनेंस एग्रीमेंट जिला प्रशासन ने वर्ष 2024 में जेम पोर्टल के माध्यम से निविदा निकालकर स्टार कंपनी को कैमरे लगाने का कार्य सौंपा था। कंपनी के साथ नवंबर 2024 से नवंबर 2025 तक रखरखाव का अनुबंध किया गया था। हालांकि, एग्रीमेंट समाप्त होने के कुछ ही महीनों बाद अधिकांश कैमरे खराब हो गए। बताया जा रहा है कि वर्तमान में 113 में से 110 कैमरे बंद हैं, जबकि केवल तीन कैमरे ही काम कर रहे हैं। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने किया था उद्घाटन कैमरों की स्थापना के बाद सितंबर 2025 में इन्हें पुलिस विभाग को सौंपा गया था। 29 सितंबर को डालटनगंज विधायक आलोक चौरसिया, पलामू प्रमंडल के आईजी शैलेंद्र कुमार सिन्हा, डीसी समीरा एस और एसपी रीषमा रमेशन सहित कई अधिकारियों ने संयुक्त रूप से इस परियोजना का उद्घाटन किया था। लेकिन अप्रैल 2026 के बाद कैमरों ने काम करना बंद कर दिया। भुगतान प्रक्रिया और गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल कैमरों की स्थापना के बाद नगर आयुक्त की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय समिति ने जांच कर भुगतान की मंजूरी दी थी। इसके बावजूद इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद कैमरों का डेढ़ वर्ष भी सही तरीके से नहीं चल पाना कई सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि परियोजना में बड़े पैमाने पर अनियमितता और भ्रष्टाचार हुआ है। कंपनी का दावा: आंधी-पानी से खराब हुए कैमरे स्टार कंपनी के मालिक सुमित कुमार ने बताया कि फरवरी तक सभी कैमरे सही स्थिति में थे। उनके अनुसार मार्च में आई आंधी और बारिश के कारण अधिकांश कैमरे खराब हो गए। हालांकि, इस दावे के बावजूद परियोजना की गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर बहस तेज हो गई है।
पलामू। पलामू जिले के पाटन प्रखंड में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित सरकारी अधिकारी आवास परिसर पिछले एक वर्ष से उपयोग के इंतजार में पड़ा है। बिजली, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं से सुसज्जित होने के बावजूद यह दो मंजिला भवन खाली पड़ा है। सरकारी नियमों के अनुसार प्रखंड स्तरीय अधिकारियों और कर्मचारियों को मुख्यालय में निवास करना अनिवार्य है, लेकिन अधिकांश अधिकारी आज भी मेदिनीनगर या अपने निजी आवासों से आना-जाना कर रहे हैं। नियमों की अनदेखी, सरकारी संपत्ति बेकार स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ), अंचल अधिकारी (सीओ), सीडीपीओ और अन्य विभागीय अधिकारी मुख्यालय में रहने से बच रहे हैं। इससे करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति का उपयोग नहीं हो पा रहा है। बताया जाता है कि पूर्व में कुछ अधिकारियों ने जांच से बचने के लिए केवल औपचारिकता निभाने हेतु किराये पर कमरा लिया था, लेकिन वहां भी नियमित रूप से नहीं रहते थे। ग्रामीणों को हो रही भारी दिक्कत अधिकारियों की अनुपस्थिति का सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। विभिन्न पंचायतों से आने वाले ग्रामीण अपने जरूरी कार्यों के लिए घंटों कार्यालय में इंतजार करते हैं, लेकिन कई बार अधिकारियों के नहीं मिलने पर उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। जाति, आय, आवासीय प्रमाण पत्र और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों में भी अनावश्यक देरी हो रही है। विकास कार्यों पर भी असर मुख्यालय में अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण प्रशासनिक कार्यों की निगरानी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में विकास योजनाओं की गति धीमी पड़ गई है और शिकायतों के समाधान में भी देरी हो रही है। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति असंतोष बढ़ता जा रहा है। जवाबदेही तय करने की मांग स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि अधिकारियों को मुख्यालय में रहने के नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाए। उनका कहना है कि जब करोड़ों रुपये खर्च कर आवास बनाए गए हैं तो उनका उपयोग भी होना चाहिए। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उच्च अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर व्यवस्था में सुधार करेंगे, ताकि जनता को समय पर सरकारी सेवाएं मिल सकें और सरकारी संसाधनों का सही उपयोग हो सके।
पलामू। झारखंड के पलामू जिले में गुरुवार को एक बड़ा रेल हादसा हो गया, जब राजहरा रेलवे स्टेशन के निकट कोयले से लदी एक मालगाड़ी के 15 डिब्बे पटरी से उतर गए। हादसे के बाद अप लाइन पर रेल परिचालन पूरी तरह प्रभावित हो गया और कई ट्रेनों की आवाजाही रोकनी पड़ी। घटना की सूचना मिलते ही रेलवे अधिकारियों और तकनीकी टीमों को मौके पर भेजा गया। कोयला लेकर मुगलसराय जा रही थी मालगाड़ी जानकारी के अनुसार, मालगाड़ी टोरी से मुगलसराय की ओर जा रही थी। राजहरा स्टेशन के पास अचानक उसके कई डिब्बे पटरी से उतर गए। रेलवे अधिकारियों ने पुष्टि की है कि दुर्घटना में कुल 15 वैगन बेपटरी हुए हैं। हालांकि किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है, लेकिन रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई ट्रेनों को किया गया रद्द और डायवर्ट हादसे के बाद रेलवे ने कई ट्रेनों के संचालन में बदलाव किया है। रांची-सासाराम एक्सप्रेस और बरवाडीह-डेहरी ऑन सोन पैसेंजर ट्रेन को रद्द कर दिया गया है। वहीं राजधानी एक्सप्रेस, झारखंड एक्सप्रेस, पलामू एक्सप्रेस, शक्तिपुंज एक्सप्रेस और जम्मू तवी एक्सप्रेस समेत कई महत्वपूर्ण ट्रेनों को वैकल्पिक मार्गों से चलाया जा रहा है। कुछ पैसेंजर ट्रेनों को निर्धारित गंतव्य से पहले ही रोक दिया गया है। राहत और बहाली कार्य जारी रेलवे के हाजीपुर जोन को घटना की जानकारी दे दी गई है। वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ मौके पर पहुंचकर राहत एवं ट्रैक बहाली कार्य में जुटे हैं। रेलवे प्रशासन का कहना है कि प्रभावित मार्ग को जल्द से जल्द सामान्य करने का प्रयास किया जा रहा है। महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर पड़ा असर राजहरा रेलवे स्टेशन धनबाद मंडल के अंतर्गत आने वाले व्यस्त औद्योगिक रेल मार्ग का हिस्सा है। यहां से प्रतिदिन 100 से अधिक मालगाड़ियां और यात्री ट्रेनें गुजरती हैं। ऐसे में इस दुर्घटना का असर क्षेत्रीय और लंबी दूरी की रेल सेवाओं पर भी देखने को मिल रहा है। यात्रियों को यात्रा से पहले ट्रेन की स्थिति जांचने की सलाह दी गई है।
पलामू। झारखंड के पलामू जिले में गुरुवार को एक बड़ा रेल हादसा हो गया। राजहरा रेलवे स्टेशन के समीप कोयला लदी एक मालगाड़ी के आठ डिब्बे पटरी से उतर गए, जिससे रेलवे परिचालन बुरी तरह प्रभावित हो गया। हादसे के बाद अप लाइन पर ट्रेनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई और कई यात्री तथा मालगाड़ियां विभिन्न स्टेशनों पर रोक दी गईं। कोयला लेकर मुगलसराय जा रही थी मालगाड़ी जानकारी के अनुसार, मालगाड़ी टोरी से मुगलसराय की ओर जा रही थी। इसी दौरान राजहरा रेलवे स्टेशन के पास अचानक उसके आठ से दस डिब्बे पटरी से उतर गए। घटना के बाद रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया और राहत एवं बचाव कार्य तत्काल शुरू कर दिया गया। हादसे की सूचना मिलते ही रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। रेलवे के हाजीपुर जोन को भी घटना की जानकारी दे दी गई है। अधिकारियों की टीम दुर्घटनास्थल का निरीक्षण कर रही है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। कई ट्रेनों का परिचालन प्रभावित मालगाड़ी के डिब्बे बेपटरी होने के कारण इस महत्वपूर्ण रेलखंड पर परिचालन बाधित हो गया है। कई मालगाड़ियां और यात्री ट्रेनें अलग-अलग रेलवे स्टेशनों पर खड़ी कर दी गई हैं। रेलवे प्रशासन स्थिति सामान्य करने के प्रयास में जुटा है। अधिकारियों ने बताया कि ट्रेनों को डायवर्ट करने या कुछ सेवाओं को रद्द करने का निर्णय स्थिति की समीक्षा के बाद लिया जाएगा। फिलहाल यात्रियों को संभावित देरी का सामना करना पड़ सकता है। महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर हुआ हादसा राजहरा रेलवे स्टेशन धनबाद रेल मंडल के अंतर्गत आता है और यह क्षेत्र रेलवे के औद्योगिक कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इस मार्ग से प्रतिदिन लगभग 100 से 110 मालगाड़ियां और यात्री ट्रेनें गुजरती हैं। वहीं करीब तीन दर्जन यात्री ट्रेनें रोजाना इस स्टेशन से होकर संचालित होती हैं। जांच के बाद सामने आएगा कारण रेलवे अधिकारियों के अनुसार, हादसे के कारणों की जांच की जाएगी। फिलहाल प्राथमिकता ट्रैक को जल्द बहाल कर रेल यातायात को सामान्य करने की है। राहत कार्य जारी है और रेलवे कर्मचारी युद्धस्तर पर स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे हुए हैं।
पलामू। झारखंड के पलामू जिले में सामने आए ऑनर किलिंग के सनसनीखेज मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया है। लेस्लीगंज थाना क्षेत्र में 26 मई को हुई इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था। आरोप है कि पिता ने अपनी ही बेटी की टांगी से हमला कर हत्या कर दी थी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर हत्या में इस्तेमाल हथियार भी बरामद कर लिया है। आपत्तिजनक फोटो बना हत्या की वजह पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी पिता को अपनी बेटी की एक कथित आपत्तिजनक तस्वीर मिली थी। तस्वीर देखने के बाद वह गुस्से में आ गया और आवेश में आकर बेटी पर टांगी से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपी पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जांच में सामने आई नई कहानी मामले की जांच के दौरान पुलिस को कई अहम जानकारियां मिलीं। जांच में पता चला कि युवती का प्रेमी उससे रिश्ता खत्म करना चाहता था। आरोप है कि इसी उद्देश्य से उसने युवती को जंगल में बुलाया और एक अन्य व्यक्ति के साथ उसकी तस्वीर खिंचवाई। पुलिस के अनुसार, बाद में यह तस्वीर युवती के माता-पिता को भेजी गई। तस्वीर देखने के बाद परिवार में तनाव बढ़ गया और अंततः यह घटना घटित हुई। पुलिस ने इस मामले में युवती के प्रेमी और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की है। प्रेमी पर उकसाने का आरोप लेस्लीगंज थाना प्रभारी उत्तम कुमार राय ने बताया कि जांच में प्रेमी की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। उस पर युवती के पिता को जानबूझकर उकसाने और युवती के खिलाफ दुष्प्रचार करने का आरोप है। इसी आधार पर उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। पुलिस कर रही है विस्तृत जांच पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि घटना के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे और क्या यह पूरी साजिश पूर्व नियोजित थी। फिलहाल मुख्य आरोपी पिता न्यायिक हिरासत में है, जबकि अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच जारी है। यह घटना एक बार फिर समाज में सम्मान के नाम पर होने वाले अपराधों और पारिवारिक हिंसा की गंभीर समस्या को उजागर करती है।
पलामू। जिले के छतरपुर थाना क्षेत्र के चिल्हो खुर्द गांव में पारा शिक्षक उदय सिंह की हत्या के बाद लोगों का आक्रोश शनिवार को खुलकर सामने आया। सैकड़ों ग्रामीणों, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं, ने छतरपुर थाना पहुंचकर घेराव किया और जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने भारत माता चौक को करीब तीन घंटे तक जाम कर दिया, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। गिरफ्तारी और मुआवजे की मांग प्रदर्शनकारियों ने हत्या में शामिल सभी आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की। ग्रामीणों का कहना था कि जब तक सभी दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। लोगों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। अधिकारियों ने संभाला मोर्चा स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अनुमंडल पदाधिकारी गणेश महतो, अंचल अधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी आशीष कुमार साहू और पुलिस अंचल निरीक्षक द्वारिका राम मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों और परिजनों से बातचीत कर उन्हें निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया। हालांकि काफी देर तक लोग अपनी मांगों पर अड़े रहे। एक आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी पुलिस अंचल निरीक्षक द्वारिका राम ने बताया कि मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस घटना के सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रही है ताकि किसी भी दोषी को कानून से बचने का मौका न मिले। परिजनों ने जताई साजिश की आशंका मृतक के बेटे बिपिन सिंह ने आरोप लगाया कि हत्या में कई लोग शामिल थे, लेकिन अब तक केवल एक गिरफ्तारी हुई है। वहीं, पत्नी तेतरी देवी ने इसे सुनियोजित साजिश बताते हुए सभी दोषियों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग की। इलाके में तनाव बरकरार घटना के बाद चिल्हो खुर्द और आसपास के क्षेत्रों में तनाव का माहौल है। स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।
पलामू। पलामू के सांसद बिष्णुदयाल राम ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी बैष्णव से मुलाकात कर पलामू में रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने की मांग की। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से पलामू से देश के विभिन्न हिस्सों का संपर्क बढ़ाने के उद्देश्य से 5 नई ट्रेनों की मांग की है। सांसद ने कहा कि इससे पलामू में आवागमन की सुविधा बढ़ेगी, रोजगार सृजन होगा और संसदीय क्षेत्र के लोगों का झारखंड के दूसरे शहरों ही नहीं, अपितु देश के विभिन्न हिस्सों से कनेक्टिविटी में इजाफा होगा। रेलमंत्री का दिया भरोसा सांसद बीडी राम ने पलामू जिले में 'वैगन उत्पादन एवं रख-रखाव सुविधा' (Wagon Production and Maintenance Facility) स्थापित करने का प्रस्ताव रखा और अनुरोध किया कि गढ़वा रोड़ या जपला में यह सुविधा स्थापित की जाए, जहां पर्याप्त रेलवे भूमि उपलब्ध है। इस परियोजना से स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर मिलेंगे और क्षेत्र का औद्योगिक विकास होगा। केंद्रीय मंत्री ने इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करते हुए पलामू जिले में वैगन उत्पादन एवं रखरखाव सुविधा की व्यवहार्यता अध्ययन (Feasibility Study) कराने का आश्वासन दिया। इन जगहों के लिए ट्रेनों की मांग की सांसद ने पलामू संसदीय क्षेत्र में बेहतर रेल कनेक्टिविटी के लिए निम्नलिखित नई ट्रेन सेवाएं शुरू करने का अनुरोध किया:- * चोपन-देवघर एक्सप्रेस वाया डालटनगंज-धनबाद। यह सेवा बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर) के श्रद्धालु यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। * दक्षिण भारत से बेहतर संपर्क के लिए चोपन से एर्नाकुलम तक नई रेल सेवा, जिसका रूट इस प्रकार प्रस्तावित है: चोपन – गढ़वा – डालटनगंज – बरकाकाना – मेसरा – रांची – राउरकेला – पेरंबुर (चेन्नई) – कोयंबटूर – एर्नाकुलम। * पश्चिमी भारत से सीधा संपर्क स्थापित करने के लिए रांची-अहमदाबाद एक्सप्रेस वाया लोहरदगा-डालटनगंज-जपला। * इसके अतिरिक्त नई दिल्ली-रांची राजधानी एक्सप्रेस की फ्रीक्वेंसी बढ़ाने की मांग की। वर्तमान में सप्ताह में एक दिन चलने वाली इस ट्रेन को सप्ताह में तीन दिन चलाए जाने का अनुरोध किया गया, जिसमें डालटनगंज, गढ़वा रोड, नगर उटारी, रेणुकूट, चोपन-चुनार मार्ग से। * हैदरनगर ब्लॉक के सरगड़ा टोला गांव में नावाडीह रेलवे फाटक नंबर-48 के पास पिलर नंबर 360/20 के समीप एलसी/आरयूबी (Level Crossing/Road Under Bridge) के निर्माण की भी मांग रखी। रेल मंत्री जी ने इस कार्य को निर्माण सूची में शामिल करने का आश्वासन दिया। पलामू में विकास कार्यों को मिलेगी गति सांसद बिष्णुदयाल राम ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के नेतृत्व में क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी। वैगन फैक्ट्री से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, जबकि नई ट्रेनों से यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। अश्विनी वैष्णव ने उपरोक्त मांगों को सकारात्मक रूप से लिया और आवश्यक अध्ययन एवं कार्रवाई का आश्वासन दिया।
पलामू। झारखंड के पलामू रेंज में महिला अपराध से जुड़े मामलों की जांच में लापरवाही सामने आने के बाद पुलिस महकमा सख्त हो गया है। Kishore Kaushal द्वारा की जा रही समीक्षा में कई गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। छेड़खानी, दुष्कर्म और POCSO Act से जुड़े मामलों में जांच में देरी और ढिलाई के कारण आरोपियों को फायदा मिलने की बात सामने आई है। इस पर कार्रवाई करते हुए दो थाना प्रभारियों और तीन सब-इंस्पेक्टरों से जवाब तलब किया गया है। तीन मामलों में बड़ी लापरवाही उजागर समीक्षा के दौरान कई केस स्टडी सामने आए। एक मामले में ऑटो में छेड़खानी की घटना के बावजूद वाहन और आरोपियों की पहचान तक नहीं हो सकी। दूसरे मामले में दिव्यांग महिला से दुष्कर्म के प्रयास की जांच लंबित रखी गई, जिससे आरोपियों को राहत मिली। वहीं, तीसरे मामले में पॉक्सो से जुड़े संवेदनशील केस में न तो उचित कार्रवाई हुई और न ही जांच में गंभीरता दिखाई गई। जांच में देरी से आरोपियों को मिला लाभ डीआईजी ने पाया कि कई मामलों में अनुसंधानकर्ताओं की लापरवाही और उदासीन रवैये के कारण केस कमजोर हुए हैं। समय पर कार्रवाई न होने से आरोपियों को कानूनी फायदा मिला, जो पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। सख्त कार्रवाई की चेतावनी डीआईजी किशोर कौशल ने स्पष्ट किया है कि महिला अपराध से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संबंधित अधिकारियों से तथ्यात्मक और स्पष्ट जवाब मांगा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कड़ी कार्रवाई तय है। संवेदनशीलता के साथ जांच के निर्देश पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि महिला अपराध के मामलों की जांच संवेदनशीलता और प्राथमिकता के आधार पर की जाए। पलामू, गढ़वा और लातेहार जिलों में ऐसे मामलों की लगातार समीक्षा जारी रहेगी, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और कानून का प्रभावी पालन सुनिश्चित हो।
पलामू/ गढ़वा। पलामू और गढ़वा जिलों में प्रस्तावित सोलर पावर प्लांट की योजना अब तक जमीन के अभाव में अटकी हुई है। केंद्र सरकार ने दोनों जिलों में 20-20 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट लगाने की योजना वर्ष 2021 में तैयार की थी। इसके लिए करीब 100-100 एकड़ भूमि की आवश्यकता है, लेकिन अब तक उपयुक्त जमीन की पहचान नहीं हो सकी है। पलामू के सांसद विष्णुदयाल राम ने सरकार पर लगाया आरोप इस मुद्दे पर पलामू के सांसद विष्णुदयाल राम ने झारखंड सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उन्होंने कई बार राज्य सरकार और जिला प्रशासन को पत्र लिखकर इस दिशा में पहल करने का आग्रह किया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अगर यह परियोजना समय पर पूरी हो जाती, तो क्षेत्र बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बन सकता था। हालांकि, कुछ प्रगति के संकेत भी मिले हैं। झारखंड नवीकरणीय ऊर्जा विकास निगम द्वारा 9 मेगावाट की एक अलग सोलर परियोजना की योजना बनाई गई है। करीब 93 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस प्लांट के लिए टेंडर भी जारी कर दिया गया है। यह प्लांट पलामू के हुसैनाबाद क्षेत्र में प्रस्तावित है और 25 वर्षों तक संचालन में रहेगा। पलामू और गढ़वा जिलों में बिजली की आपूर्ति वर्तमान में पलामू और गढ़वा जिलों में बिजली की आपूर्ति मुख्य रूप से बाहरी स्रोतों, जैसे उत्तर प्रदेश के रिहंद क्षेत्र, से होती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर सोलर प्लांट की स्थापना से न केवल बिजली की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी। फिलहाल, जमीन की समस्या के समाधान का इंतजार है, ताकि यह महत्वाकांक्षी योजना धरातल पर उतर सके।
पलामू। रांची कोतवाली डीएसपी पर फायरिंग करने के आरोपी जेपी शुक्ला को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को मेदिनीनगर टाउन थाना क्षेत्र से पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार, वह एक जमीन कारोबारी से 1.20 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में भी शामिल था। रंगदारी और हत्या की साजिश का खुलासा मामले में जमीन कारोबारी नंद यादव ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को धर दबोचा। जांच के दौरान पुलिस को रंगदारी मांगने से जुड़े कई इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी मिले हैं। अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी ने पहले भी एक जमीन कारोबारी की हत्या की साजिश रची थी। बताया जाता है कि 2017 में रांची में जेएससीए स्टेडियम के पास तत्कालीन डीएसपी भोला प्रसाद यादव के साथ आरोपी की मुठभेड़ हुई थी। उस दौरान जेपी शुक्ला ने सरेंडर कर दिया था, लेकिन इसके बाद भी वह आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय रहा। कई मामलों में रहा है शामिल पुलिस अधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जेपी शुक्ला कई संगीन मामलों में आरोपी रह चुका है। उस पर गढ़वा में हत्या, पलामू में आर्म्स एक्ट के तहत मामले और रांची के सुखदेव नगर क्षेत्र में हत्या की वारदात को अंजाम देने के आरोप हैं। पुलिस की संयुक्त कार्रवाई इस गिरफ्तारी में डीएसपी स्तर के अधिकारियों के साथ मेदिनीनगर टाउन थाना की टीम शामिल रही। पुलिस का कहना है कि आरोपी के आपराधिक नेटवर्क की भी जांच की जा रही है और उससे जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।
रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पलामू के एक युवक ट्विट पर सख्त एक्शन ले लिया है। इससे बिजली विभाग के कई अफसर रडार पर आ गये हैं। इतना ही नहीं, मामले को लेकर पलामू के बिजली विभाग में हड़कंप मच गया है। साथ ही, झारखंड में बिजली विभाग की कार्यशैली को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। क्या है मामला पलामू निवासी कुशवाहा अविनाश के एक ट्वीट के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। युवक ने मुख्यमंत्री को टैग करते हुए आरोप लगाया कि वह बिजली विभाग के कथित भ्रष्टाचार और मनमाने रवैये से परेशान है। उसने यहां तक कहा कि हालात ऐसे हैं कि वह आत्महत्या करने को मजबूर हो सकता है। गलत बिल और रिश्वत मांगने के आरोप ट्वीट में युवक ने आरोप लगाया कि विभाग के अधिकारी मीटर रीडिंग को नजरअंदाज कर मनमाने बिल जारी कर रहे हैं। साथ ही बिल सुधार के नाम पर उपभोक्ताओं से 50 प्रतिशत तक रिश्वत मांगे जा रहे हैं। मामला सामने आते ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम के प्रबंध निदेशक को टैग कर सख्त निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि यह स्थिति किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जा सकती। जांच और कार्रवाई के आदेश मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि मामले की तुरंत जांच कर दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाये। साथ ही विभाग को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने को भी कहा गया है। सीएम ने यह भी कहा कि इस तरह की शिकायतों को सिर्फ एक मामले तक सीमित न रखा जाए, बल्कि पूरे राज्य में इनका समय पर और निष्पक्ष निपटारा किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम नागरिकों को किसी भी तरह के मानसिक उत्पीड़न या गलत व्यवहार का सामना न करना पड़े, यह सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।