रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पलामू के एक युवक ट्विट पर सख्त एक्शन ले लिया है। इससे बिजली विभाग के कई अफसर रडार पर आ गये हैं। इतना ही नहीं, मामले को लेकर पलामू के बिजली विभाग में हड़कंप मच गया है। साथ ही, झारखंड में बिजली विभाग की कार्यशैली को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
पलामू निवासी कुशवाहा अविनाश के एक ट्वीट के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। युवक ने मुख्यमंत्री को टैग करते हुए आरोप लगाया कि वह बिजली विभाग के कथित भ्रष्टाचार और मनमाने रवैये से परेशान है। उसने यहां तक कहा कि हालात ऐसे हैं कि वह आत्महत्या करने को मजबूर हो सकता है।
ट्वीट में युवक ने आरोप लगाया कि विभाग के अधिकारी मीटर रीडिंग को नजरअंदाज कर मनमाने बिल जारी कर रहे हैं। साथ ही बिल सुधार के नाम पर उपभोक्ताओं से 50 प्रतिशत तक रिश्वत मांगे जा रहे हैं। मामला सामने आते ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम के प्रबंध निदेशक को टैग कर सख्त निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि यह स्थिति किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि मामले की तुरंत जांच कर दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाये। साथ ही विभाग को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने को भी कहा गया है। सीएम ने यह भी कहा कि इस तरह की शिकायतों को सिर्फ एक मामले तक सीमित न रखा जाए, बल्कि पूरे राज्य में इनका समय पर और निष्पक्ष निपटारा किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम नागरिकों को किसी भी तरह के मानसिक उत्पीड़न या गलत व्यवहार का सामना न करना पड़े, यह सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
हजारीबाग। हजारीबाग से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां एक दलित महिला ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि उसे उसके छोटे बच्चे के साथ करीब 38 घंटे तक थाने में रोके रखा गया। इस दौरान उसके साथ मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ना की गई। पीड़िता के अनुसार, बिना किसी स्पष्ट कारण के उसे हिरासत में रखा गया और लगातार दबाव बनाया गया। सांसद मनीष जायसवाल ने लिया संज्ञान मामला सामने आते ही हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल ने तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। सांसद ने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। स्थानीय लोगों में गुस्सा और डर का माहौल इस घटना के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले में पारदर्शी जांच की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि यदि थाने जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थान पर इस तरह की घटनाएं होंगी, तो आम जनता का भरोसा पुलिस व्यवस्था पर से उठ जाएगा। पुलिस व्यवस्था पर उठे सवाल यह घटना एक बार फिर कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन इस तरह के आरोप व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करते हैं। अब सभी की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है कि पीड़िता को न्याय कब और कैसे मिलता है।
रांची। झारखंड के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से प्रतीक्षित ‘राज्य कर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना’ अब लागू होने के करीब है। 23 अप्रैल को झारखंड सरकार और चयनित बीमा कंपनी के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिससे योजना के क्रियान्वयन का रास्ता साफ हो जाएगा। इस पहल से प्रदेश के लाखों पुलिसकर्मियों और सरकारी कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन सहित विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने इस कदम का स्वागत किया है। बेहतर इलाज के साथ आर्थिक बोझ में मिलेगी राहत इस योजना के लागू होने के बाद कर्मचारियों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक दबाव का सामना कम करना पड़ेगा। साथ ही उन्हें बेहतर निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा भी मिल सकेगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच और मजबूत होगी। स्वास्थ्य मंत्री की मौजूदगी में होगा करार स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम 23 अप्रैल को सुबह 11 बजे से शुरू होगा। इस मौके पर मंत्री डॉ. इरफान अंसारी मुख्य रूप से उपस्थित रहेंगे। झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी (जसास) द्वारा चयनित बीमा कंपनी के साथ आधिकारिक अनुबंध किया जाएगा। इसके साथ ही राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना के कार्यान्वयन की औपचारिक शुरुआत हो जाएगी। इस कार्यक्रम के लिए झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष और महासचिव को विशेष रूप से सूचित किया गया है। योजना लागू होने के बाद कर्मचारियों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और उन्हें एक सशक्त स्वास्थ्य सुरक्षा कवच मिल सकेगा।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची के पंडरा इलाके में मंगलवार सुबह एक सनसनीखेज वारदात में जमीन कारोबारी भार्गव सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना से इलाके में दहशत का माहौल है, वहीं पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। बिहार में ठगी के आरोप, बदलकर रखा था नाम जानकारी के अनुसार, मृतक भार्गव सिंह का असली नाम अंकित सिंह बताया जा रहा है। वह पहले पटना में रहता था और खुद को बिहार विधानसभा का कर्मचारी बताकर लोगों को ठगता था। नौकरी और एडमिशन दिलाने के नाम पर उसने कई लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठे। बताया जाता है कि पुलिस उसकी तलाश में थी, लेकिन प्रभाव और संपर्क के कारण वह गिरफ्त से बचता रहा। पटना से भागकर रांची में शुरू किया नया धंधा सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2020-21 में वह पटना से भागकर रांची आ गया और यहां जमीन कारोबार शुरू किया। इस दौरान उसने कई लोगों के साथ जमीन के नाम पर भी धोखाधड़ी की। धीरे-धीरे उसने राजनीतिक संपर्क भी बना लिए और एक विधायक के करीबी के रूप में जाना जाने लगा। जमीन विवाद बना हत्या की वजह? प्राथमिक जानकारी के अनुसार, हाल के दिनों में हुरहुरी इलाके की जमीन को लेकर उसका विजय हेंड्रिक टेटे नामक व्यक्ति से विवाद चल रहा था। दोनों के बीच कुछ दिन पहले झगड़ा भी हुआ था, जिसमें जान से मारने की धमकी दी गई थी। हालांकि, पुलिस अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है, जिसमें पारिवारिक विवाद की बात भी सामने आई है। जांच में जुटी पुलिस, कारणों की तलाश जारी पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा।